Follow Us
Select Medium / माध्यम चुनें:
Eng (English) Hindi (हिन्दी)
JAC • Class XII • Physics • Ch 4
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Moving Charges and Magnetism

स्थिर आवेश केवल विद्युत क्षेत्र ($\u000bec{E}$) उत्पन्न करते हैं, परंतु जब वही आवेश गतिमान होते हैं, तो वे विद्युत क्षेत्र के साथ-साथ एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र ($\u000bec{B}$) का भी सृजन करते हैं। सन् 1820 में हैंस क्रिश्चियन ऑर्स्टेड की इस युगांतरकारी खोज ने विद्युत और चुंबकत्व के बीच की खाई को पाटकर आधुनिक विद्युत-चुंबकत्व (Electromagnetism) की नींव रखी। चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश पर लगने वाला चुंबकीय लॉरेंट्ज बल [$\vec{F} = q(\vec{v} \times \vec{B})$] सदैव वेग के लंबवत कार्य करता है, जिसके कारण यह आवेश पर शून्य कार्य ($W=0$) करता है—अर्थात यह कण की चाल या गतिज ऊर्जा को बदले बिना केवल उसकी दिशा मोड़कर उसे वृत्ताकार या कुंडलिनी (Helical) पथ पर घुमाता है। किसी सूक्ष्म धारा अल्पांश द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का निर्धारण बायो-सावर्ट के नियम ($d\vec{B} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I d\vec{l} \times \hat{r}}{r^2}$) द्वारा होता है, जिसके आधार पर वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर $B = \frac{\mu_0 N I}{2R}$ तथा अक्ष पर $B = \frac{\mu_0 N I R^2}{2(R^2+x^2)^{3/2}}$ प्राप्त होता है। सममित धाराओं के लिए स्थिरवैद्युतिकी के गाउस नियम की भांति ऐम्पियर का परिपथीय नियम ($\oint \vec{B}\cdot d\vec{l} = \mu_0 I_{\text{in}}$) परिनालिका ($B = \mu_0 n I$) एवं टोरॉइड के चुंबकीय क्षेत्र को सरलता से हल करता है। दो समांतर धारावाही तारों के मध्य आकर्षण/प्रतिकर्षण बल ($\frac{F}{L} = \frac{\mu_0}{2\pi} \frac{I_1 I_2}{d}$) से अंतरराष्ट्रीय SI पद्धति में '1 एम्पियर' को परिभाषित किया गया है। अंततः, त्रिज्य चुंबकीय क्षेत्र में कार्य करने वाला चल कुंडली गैल्वेनोमीटर (Moving Coil Galvanometer), तथा शंट और उच्च श्रेणी प्रतिरोध द्वारा इसका क्रमशः अमीटर व वोल्टमीटर में रूपांतरण इस अध्याय के सर्वोत्कृष्ट व्यावहारिक अनुप्रयोग हैं।

चुंबकीय क्रेन टन-टन वजनी लोहे की कारों को बिना छुए हवा में कैसे उठा लेती है और बटन दबाते ही छोड़ देती है?

कबाड़खानों (Junkyards) में आपने वह विशालकाय क्रेन जरूर देखी होगी जिसमें नीचे कोई हुक या रस्सी नहीं बंधी होती, बल्कि एक सपाट लोहे की गोल डिस्क होती है। जैसे ही ऑपरेटर एक बटन दबाता है, वह चपटी डिस्क नीचे खड़ी 2000 किलोग्राम की कार को चुंबक की तरह चिपका कर आसमान में उठा लेती है; और जहाँ ले जाना होता है, वहाँ दूसरा बटन दबाते ही कार धड़ाम से नीचे छूट जाती है! वह कौन सा जादूई चुंबक है जो एक सेकंड में पैदा होता है और अगले ही सेकंड में पूरी तरह गायब हो जाता है? यह है गतिमान आवेशों का चमत्कार—'विद्युत चुंबक' (Electromagnet)! तार में बहती विद्युत धारा ही उस विशाल चुंबकीय क्षेत्र की जननी है। आइए समझें गतिमान आवेश और चुंबकत्व का यह विस्मयकारी विज्ञान!

Why This Chapter Matters

JAC और CBSE कक्षा 12वीं भौतिकी बोर्ड परीक्षा में 'गतिमान आवेश और चुंबकत्व' सर्वाधिक अंक-भार वाले अध्यायों में से एक है। चुंबकीय लॉरेंट्ज बल एवं चुंबकीय क्षेत्र में आवेशित कण के वृत्ताकार पथ की त्रिज्या ($r = \frac{mv}{qB}$) व आवर्तकाल का निगमन, बायो-सावर्ट का नियम और इसके द्वारा धारावाही वृत्ताकार कुंडली की अक्ष पर चुंबकीय क्षेत्र का व्यंजक, ऐम्पियर का परिपथीय नियम तथा लंबी परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र ($B = \mu_0 n I$), दो समांतर धारावाही चालकों के बीच बल का व्यंजक एवं इसके आधार पर '1 एम्पियर' की मानक परिभाषा, तथा चल कुंडली गैल्वेनोमीटर का सिद्धांत, त्रिज्य क्षेत्र का महत्व और इसका अमीटर व वोल्टमीटर में रूपांतरण पर प्रतिवर्ष 3 से 5 अंकों के दीर्घ-उत्तरीय और संख्यात्मक प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

Before You Begin (Prerequisites)

  • सदिश गुणनफल (Cross Product: $\vec{A} \times \vec{B} = AB\sin\theta \,\hat{n}$) एवं दाएं हाथ का नियम।
  • वृत्तीय गति एवं अभिकेंद्रीय बल ($F_c = \frac{mv^2}{r}$) की यांत्रिकी अवधारणा।
  • विद्युत धारा ($I$) एवं चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की बुनियादी समझ।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • ऑर्स्टेड के प्रयोग, चुंबकीय क्षेत्र की अवधारणा एवं चुंबकीय लॉरेंट्ज बल ($\u000bec{F} = q(\vec{v} \times \vec{B})$) की व्याख्या करना।
  • एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में आवेशित कण के वृत्ताकार एवं हेलिकल पथ का गणितीय विश्लेषण करना।
  • बायो-सावर्ट का नियम लिखना और वृत्ताकार धारा लूप की अक्ष व केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का निगमन करना।
  • ऐम्पियर के परिपथीय नियम का प्रयोग करके सीधे तार, परिनालिका एवं टोरॉइड के चुंबकीय क्षेत्र की गणना करना।
  • समांतर धाराओं के बीच पारस्परिक बल व्युत्पन्न कर 1 एम्पियर को परिभाषित करना तथा चल कुंडली गैल्वेनोमीटर का संपूर्ण सिद्धांत समझना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. चुंबकीय क्षेत्र, लॉरेंट्ज बल एवं...
2 2. बायो-सावर्ट का नियम एवं वृत्ताका...
3 3. ऐम्पियर का परिपथीय नियम, परिनालि...
4 4. दो समांतर धाराओं के बीच बल एवं 1...
5 5. धारा लूप पर बल आघूर्ण एवं चल कुं...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. चुंबकीय क्षेत्र, लॉरेंट्ज बल एवं चुंबकीय क्षेत्र में आवेश की गति

1.1 चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field - $\vec{B}$) एवं लॉरेंट्ज बल

गतिमान आवेश अथवा धारावाही चालक के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें कोई अन्य गतिमान आवेश अथवा चुंबकीय सुई चुंबकीय बल का अनुभव करती है, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है। इसका SI मात्रक टेस्ला (Tesla - T) अथवा $\text{Wb/m}^2$ है ($1\text{ Tesla} = 10^4\text{ Gauss}$)।

चुंबकीय लॉरेंट्ज बल (Magnetic Force on a Moving Charge): जब कोई आवेश $q$ वेग $\vec{v}$ से चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ में गति करता है, तो उस पर लगने वाला चुंबकीय बल:
$$\mathbf{\vec{F}_m = q(\vec{v} \times \vec{B})} \implies F_m = q v B \sin\theta$$जहाँ $\theta$, $\vec{v}$ और $\vec{B}$ के बीच का कोण है। बल की दिशा दाएं हाथ के अंगूठे के नियम (Right Hand Rule) से निर्धारित होती है。
• विशेष स्थितियां:
1. यदि आवेश स्थिर हो ($v = 0$): $F_m = 0$ (स्थिर आवेश पर चुंबकीय बल कभी नहीं लगता)।
2. यदि आवेश क्षेत्र के समांतर गति करे ($\theta = 0^\circ$ या $180^\circ$): $F_m = 0$ (कोई विक्षेप नहीं)।
3. यदि आवेश क्षेत्र के लंबवत गति करे ($\theta = 90^\circ$): $\mathbf{F_{\max} = q v B}$ (अधिकतम बल)।
• शून्य कार्य प्रमेय: चूंकि $\vec{F}_m \perp \vec{v}$, अतः तात्क्षणिक शक्ति $P = \vec{F}_m \cdot \vec{v} = 0$। चुंबकीय बल द्वारा आवेशित कण पर किया गया कार्य सदैव शून्य होता है ($W = 0$); यह केवल कण की दिशा बदलता है, उसकी चाल और गतिज ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है!

संपूर्ण लॉरेंट्ज बल (Total Lorentz Force): यदि कण विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ एवं चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ दोनों में गतिमान हो:
$$\mathbf{\vec{F} = q(\vec{E} + \vec{v} \times \vec{B})}$$

1.2 एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में आवेशित कण की वृत्तीय एवं हेलिकल गति

  1. जब कण क्षेत्र के लंबवत प्रवेश करता है ($\theta = 90^\circ$):
    चुंबकीय बल $\vec{F}_m$ सदैव वेग $\vec{v}$ के लंबवत केंद्र की ओर कार्य करता है, जो आवश्यक अभिकेंद्रीय बल प्रदान करता है:
    $$\frac{m v^2}{r} = q v B \implies \mathbf{r = \frac{m v}{q B} = \frac{p}{q B} = \frac{\sqrt{2mK}}{qB}}$$
    जहाँ $p = mv$ संवेग तथा $K = \frac{p^2}{2m}$ गतिज ऊर्जा है।
    • आवर्तकाल (Time Period - $T$) एवं आवृत्ति (Frequency - $\nu$):
    $$T = \frac{2\pi r}{v} = \frac{2\pi}{v} \left( \frac{mv}{qB} \right) = \mathbf{\frac{2\pi m}{q B}}$$$$\nu = \frac{1}{T} = \mathbf{\frac{q B}{2\pi m}}$$
    क्रांतिक निष्कर्ष: वृत्ताकार पथ का आवर्तकाल और आवृत्ति कण के वेग ($v$) तथा त्रिज्या ($r$) पर बिल्कुल निर्भर नहीं करते!
  2. जब कण किसी कोण $\theta$ ($0^\circ < \theta < 90^\circ$) पर प्रवेश करता है:
    वेग के दो घटक होते हैं: $v_\parallel = v\cos\theta$ (क्षेत्र के अनुदिश, कोई बल नहीं) तथा $v_\perp = v\sin\theta$ (क्षेत्र के लंबवत, वृत्तीय गति कराता है)। इन दोनों के संयुक्त प्रभाव से कण का पथ एक कुंडलिनी (Helix) बन जाता है:
    त्रिज्या $r = \frac{m v_\perp}{q B} = \frac{m v \sin\theta}{q B}$ तथा पिच (Pitch - एक आवर्तकाल में तय रेखीय दूरी) $p = v_\parallel \times T = \frac{2\pi m v \cos\theta}{q B}$।

2. बायो-सावर्ट का नियम एवं वृत्ताकार धारा लूप का चुंबकीय क्षेत्र

2.1 बायो-सावर्ट का नियम (Biot-Savart Law)

सन् 1820 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक ज्यां-बैप्टिस्ट बायो और फेलिक्स सावर्ट ने धारावाही चालक के किसी सूक्ष्म अल्पांश ($d\vec{l}$) द्वारा किसी बिंदु $P$ पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र ($d\vec{B}$) का नियम दिया:

कथन: धारावाही अल्पांश $I d\vec{l}$ के कारण $r$ दूरी पर स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र $dB$:
1. धारा $I$ के अनुक्रमानुपाती ($dB \propto I$),
2. अल्पांश लंबाई $dl$ के अनुक्रमानुपाती ($dB \propto dl$),
3. अल्पांश तथा बिंदु को मिलाने वाली रेखा के बीच के कोण की ज्या के अनुक्रमानुपाती ($dB \propto \sin\theta$), तथा
4. दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती ($dB \propto \frac{1}{r^2}$) होता है।

$$dB = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl \sin\theta}{r^2} \quad \text{अथवा सदिश रूप:} \quad \mathbf{d\vec{B} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I (d\vec{l} \times \hat{r})}{r^2}}$$जहाँ $\mu_0$ (म्यू नॉट) निर्वात की चुंबकशीलता (Permeability of Free Space) है:
$$\frac{\mu_0}{4\pi} = 10^{-7} \text{ T}\cdot\text{m/A} \implies \mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \text{ T}\cdot\text{m/A}$$• प्रकाश के वेग से संबंध: $\mathbf{c = \frac{1}{\sqrt{\mu_0 \varepsilon_0}} = 3 \times 10^8 \text{ m/s}}$।

2.2 धारावाही वृत्ताकार कुंडली की अक्ष पर चुंबकीय क्षेत्र का निगमन

त्रिज्या $R$ तथा $N$ फेरों वाली एक वृत्ताकार कुंडली में धारा $I$ प्रवाहित है। कुंडली के केंद्र $O$ से अक्ष पर $x$ दूरी पर स्थित बिंदु $P$ पर:

  • अल्पांश $dl$ से बिंदु की दूरी $r = \sqrt{R^2 + x^2}$
  • अक्ष के लंबवत घटक ($dB\cos\phi$) सममिति के कारण परस्पर निरस्त हो जाते हैं, जबकि अक्ष के अनुदिश घटक ($dB\sin\phi$) जुड़ जाते हैं:
  • $B = \int dB \sin\phi = \int \left( \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl}{r^2} \right) \left( \frac{R}{r} \right) = \frac{\mu_0 I R}{4\pi r^3} \int dl = \frac{\mu_0 I R}{4\pi r^3} (2\pi R)$
  • $N$ फेरों के लिए:$$\mathbf{B = \frac{\mu_0 N I R^2}{2(R^2 + x^2)^{3/2}}}$$
  • विशेष स्थिति 1: कुंडली के केंद्र पर ($x = 0$):$$\mathbf{B_{\text{center}} = \frac{\mu_0 N I}{2R}}$$
  • विशेष स्थिति 2: अत्यधिक दूरी पर ($x \gg R$): $R^2$ की उपेक्षा करने पर:$$B = \frac{\mu_0 N I R^2}{2 x^3} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2(N I \cdot \pi R^2)}{x^3} = \mathbf{\frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{x^3}}$$
    जहाँ $M = N I A = N I (\pi R^2)$ चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण है (यह विद्युत द्विध्रुव के अक्षीय सूत्र $\frac{1}{4\pi\varepsilon_0}\frac{2p}{x^3}$ के बिल्कुल समरूप है!)।

3. ऐम्पियर का परिपथीय नियम, परिनालिका एवं टोरॉइड

3.1 ऐम्पियर का परिपथीय नियम (Ampere's Circuital Law)

कथन: किसी बंद समतल वक्र (ऐम्पियर लूप) के अनुदिश चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ का रेखीय समाकलन (Line Integral) उस बंद पाश द्वारा परिबद्ध कुल नेट धारा ($I_{\text{enclosed}}$) का $\mu_0$ गुना होता है:

$$\mathbf{\oint_C \vec{B}\cdot d\vec{l} = \mu_0 I_{\text{enclosed}}}$$महत्व: यह स्थिरवैद्युतिकी में गाउस के नियम के समतुल्य है और सममित धारा वितरणों का चुंबकीय क्षेत्र निकालने में अत्यंत उपयोगी है।

3.2 ऐम्पियर नियम के प्रमुख अनुप्रयोग

  1. 1. अनंत लंबे सीधे धारावाही चालक का चुंबकीय क्षेत्र:
    तार से $r$ दूरी पर $r$ त्रिज्या का वृत्ताकार लूप लेने पर: $\oint B\,dl\cos 0^\circ = B(2\pi r) = \mu_0 I$
    $$\mathbf{B = \frac{\mu_0 I}{2\pi r}} \quad \implies B \propto \frac{1}{r}$$
  2. 2. लंबी धारावाही परिनालिका (Ideal Solenoid) के भीतर चुंबकीय क्षेत्र:
    एक आयताकार ऐम्पियर लूप $abcd$ लेने पर (बाहर $B=0$, लंबवत भुजाओं पर $\vec{B}\perp d\vec{l}$):
    $\oint \vec{B}\cdot d\vec{l} = B L = \mu_0 (N I) = \mu_0 (n L I)$
    $$\mathbf{B = \mu_0 n I}$$
    जहाँ $n = \frac{N}{L}$ परिनालिका की प्रति मीटर लंबाई में फेरों की संख्या है। परिनालिका के सिरों पर चुंबकीय क्षेत्र आधा हो जाता है: $B_{\text{end}} = \frac{1}{2}\mu_0 n I$।
  3. 3. टोरॉइड (Toroid - बंद वृत्ताकार परिनालिका):
    $$\mathbf{B = \mu_0 n I = \frac{\mu_0 N I}{2\pi r}}$$
    टोरॉइड के भीतर क्रोड में एकसमान चुंबकीय क्षेत्र होता है, जबकि इसके खुले आंतरिक और बाह्य स्थान में चुंबकीय क्षेत्र शून्य ($B=0$) होता है।

4. दो समांतर धाराओं के बीच बल एवं 1 एम्पियर की परिभाषा

4.1 दो समांतर धारावाही चालकों के मध्य बल का निगमन

माना निर्वात में दूरी $d$ पर रखे दो लंबे सीधे तारों में क्रमशः $I_1$ तथा $I_2$ धाराएं प्रवाहित हैं:

  • तार 1 द्वारा तार 2 की स्थिति पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र: $B_1 = \frac{\mu_0 I_1}{2\pi d}$ (कागज के तल के लंबवत नीचे की ओर)
  • इस चुंबकीय क्षेत्र $B_1$ में स्थित तार 2 की $L$ लंबाई पर लगने वाला चुंबकीय बल: $F_2 = I_2 L B_1 \sin 90^\circ = I_2 L \left( \frac{\mu_0 I_1}{2\pi d} \right)$
  • अतः तारों की प्रति एकांक लंबाई पर लगने वाला पारस्परिक बल:$$\mathbf{\frac{F}{L} = \frac{\mu_0}{2\pi} \frac{I_1 I_2}{d}} \quad (\text{SI मात्रक: N/m})$$
बलों की प्रकृति (Nature of Force):
• यदि दोनों तारों में धाराएं समान दिशा (Same Direction) में बह रही हों $\implies$ आकर्षण बल (Attraction) लगता है।
• यदि धाराएं परस्पर विपरीत दिशा (Opposite Direction) में बह रही हों $\implies$ प्रतिकर्षण बल (Repulsion) लगता है。
(सावधानी: यह स्थिरवैद्युतिकी के आवेशों से उल्टा है; समान धाराएं आकर्षित तथा विपरीत धाराएं प्रतिकर्षित करती हैं!)

4.2 'एक एम्पियर' की मानक अंतरराष्ट्रीय परिभाषा (Definition of 1 Ampere)

सूत्र $\frac{F}{L} = \frac{\mu_0}{2\pi} \frac{I_1 I_2}{d}$ में $I_1 = I_2 = 1\text{ A}$ तथा $d = 1\text{ m}$ रखने पर:
$$\frac{F}{L} = \frac{4\pi \times 10^{-7}}{2\pi} \frac{1 \times 1}{1} = \mathbf{2 \times 10^{-7} \text{ N/m}}$$
मानक परिभाषा: 1 एम्पियर वह नियत विद्युत धारा है जो निर्वात में परस्पर 1 मीटर की दूरी पर स्थित अनंत लंबाई एवं नगण्य वृत्ताकार अनुप्रस्थ काट वाले दो सीधे समांतर चालकों में प्रवाहित होने पर, चालकों के मध्य प्रति मीटर लंबाई पर $2 \times 10^{-7}$ न्यूटन का आकर्षण अथवा प्रतिकर्षण बल उत्पन्न करती है।

5. धारा लूप पर बल आघूर्ण एवं चल कुंडली गैल्वेनोमीटर

5.1 एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में धारा लूप पर बल आघूर्ण

क्षेत्रफल $A$ तथा $N$ फेरों वाली आयताकार कुंडली जब चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ में रखी जाती है, तो उस पर नेट बल शून्य होता है, परंतु विपरीत भुजाओं के बलों के कारण एक बल आघूर्ण (Torque - $\vec{\tau}$) लगता है:

$$\mathbf{\vec{\tau} = \vec{M} \times \vec{B}} \implies \tau = M B \sin\theta = N I A B \sin\theta$$जहाँ $\vec{M} = N I \vec{A}$ कुंडली का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण है (मात्रक: $\text{A}\cdot\text{m}^2$)।

5.2 चल कुंडली गैल्वेनोमीटर (Moving Coil Galvanometer)

कार्य सिद्धांत: जब किसी धारावाही कुंडली को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में लटकाया जाता है, तो उस पर एक विक्षेपक बल आघूर्ण कार्य करता है जो कुंडली को घुमाने का प्रयास करता है।

  • त्रिज्य चुंबकीय क्षेत्र (Radial Magnetic Field): अवतल (बेलनाकार कटे) चुंबक ध्रुवों तथा बीच में नर्म लोहे के बेलनाकार क्रोड का उपयोग करके चुंबकीय क्षेत्र को 'त्रिज्य' बनाया जाता है। इससे कुंडली का तल चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के सदैव समांतर रहता है ($\theta = 90^\circ$), जिससे विक्षेपक बल आघूर्ण सदैव अधिकतम रहता है:
    $$\tau_{\text{deflecting}} = N I A B$$
  • संतुलन की अवस्था: फॉस्फर-ब्रांज की पत्ती में उत्पन्न प्रत्यानयन बल आघूर्ण $\tau_{\text{restoring}} = C \phi$ (जहाँ $C$ ऐंठन दृढ़ता तथा $\phi$ विक्षेप कोण है):
    $$N I A B = C \phi \implies \mathbf{\phi = \left( \frac{NAB}{C} \right) I \implies \phi \propto I}$$
    अतः विक्षेप सीधे प्रवाहित धारा के समानुपाती होता है (पैमाना रैखिक होता है)।
  • धारा सुग्राहिता (Current Sensitivity): $S_i = \frac{\phi}{I} = \frac{NAB}{C}$ (प्रति एकांक धारा पर विक्षेप)।
  • वोल्टता सुग्राहिता (Voltage Sensitivity): $S_v = \frac{\phi}{V} = \frac{NAB}{C R_G}$ (प्रति एकांक वोल्ट पर विक्षेप)।

5.3 गैल्वेनोमीटर का अमीटर एवं वोल्टमीटर में रूपांतरण

पैमानाअमीटर में रूपांतरण (Conversion to Ammeter)वोल्टमीटर में रूपांतरण (Conversion to Voltmeter)
परिपथ व्यवस्थागैल्वेनोमीटर कुंडली ($R_G$) के समांतर क्रम में एक अति अल्प प्रतिरोध (शंट - $S$) जोड़ा जाता है।गैल्वेनोमीटर कुंडली ($R_G$) के श्रेणी क्रम में एक अति उच्च प्रतिरोध ($R$) जोड़ा जाता है।
सूत्र निगमनविभवांतर समान: $I_g R_G = (I - I_g) S$
$$\mathbf{S = \frac{I_g R_G}{I - I_g}}$$
कुल विभवांतर: $V = I_g (R_G + R)$
$$\mathbf{R = \frac{V}{I_g} - R_G}$$
आदर्श उपकरणआदर्श अमीटर का प्रतिरोध शून्य ($R_A = 0$) होना चाहिए ताकि परिपथ की धारा न बदले।आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनंत ($R_V = \infty$) होना चाहिए ताकि वह कोई धारा न खींचे।

Key Formulas, Laws & Physical Constants

चुंबकीय लॉरेंट्ज बल
$$\vec{F}_m = q(\vec{v} \times \vec{B}) \implies F_m = q v B \sin\theta \quad (W = 0)$$
वृत्ताकार पथ की त्रिज्या
$$r = \frac{m v}{q B} = \frac{p}{q B} = \frac{\sqrt{2mK}}{qB}$$
साइक्लोट्रॉन आवर्तकाल व आवृत्ति
T = {2 m}{q B}; = {q B}{2 m} (v व r पर स्वतंत्र)
बायो-सावर्ट का नियम
$$d\vec{B} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I (d\vec{l} \times \hat{r})}{r^2}; \quad \frac{\mu_0}{4\pi} = 10^{-7}\text{ T}\cdot\text{m/A}$$
वृत्ताकार कुंडली केंद्र पर क्षेत्र
$$B_{\text{center}} = \frac{\mu_0 N I}{2R}$$
वृत्ताकार कुंडली अक्ष पर क्षेत्र
$$B_{\text{axis}} = \frac{\mu_0 N I R^2}{2(R^2 + x^2)^{3/2}} \approx \frac{\mu_0}{4\pi}\frac{2M}{x^3}$$
ऐम्पियर का परिपथीय नियम
$$\oint \vec{B}\cdot d\vec{l} = \mu_0 I_{\text{in}}$$
लंबी परिनालिका क्षेत्र
$$B = \mu_0 n I \quad (n = N/L); \quad B_{\text{end}} = \frac{1}{2}\mu_0 n I$$
समांतर तारों के बीच बल
{F}{L} = {_0}{2} {I_1 I_2}{d} (समान धारा = आकर्षण)
धारा लूप पर बल आघूर्ण
$$\vec{\tau} = \vec{M} \times \vec{B} = N I A B \sin\theta \quad (M = N I A)$$
अमीटर हेतु शंट प्रतिरोध
S = {I_g R_G}{I - I_g} (समांतरक्रम में अल्प प्रतिरोध)
वोल्टमीटर हेतु श्रेणी प्रतिरोध
R = {V}{I_g} - R_G (श्रेणीक्रम में उच्च प्रतिरोध)

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
एक इलेक्ट्रॉन $5.0 \times 10^7\text{ m/s}$ के वेग से $0.20\text{ T}$ के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में क्षेत्र के लंबवत प्रवेश करता है। (a) इलेक्ट्रॉन पर कार्यरत चुंबकीय बल, तथा (b) इसके वृत्ताकार पथ की त्रिज्या ज्ञात कीजिए। ($m_e = 9.1 \times 10^{-31}\text{ kg}$, $e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$)
Step-by-Step Solution:
दिया है:
वेग $v = 5.0 \times 10^7\text{ m/s}$
चुंबकीय क्षेत्र $B = 0.20\text{ T}$
प्रवेश कोण $\theta = 90^\circ \implies \sin 90^\circ = 1$
इलेक्ट्रॉन आवेश $e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$
इलेक्ट्रॉन द्रव्यमान $m = 9.1 \times 10^{-31}\text{ kg}$

(a) चुंबकीय बल ($F_m$):
$$F_m = q v B \sin\theta = (1.6 \times 10^{-19}) \times (5.0 \times 10^7) \times (0.20) \times 1$$
$$F_m = 1.6 \times 1.0 \times 10^{-19 + 7} = \mathbf{1.6 \times 10^{-12}\text{ N}}$$

(b) वृत्ताकार पथ की त्रिज्या ($r$):
$$r = \frac{m v}{q B} = \frac{(9.1 \times 10^{-31}) \times (5.0 \times 10^7)}{(1.6 \times 10^{-19}) \times (0.20)}$$
$$r = \frac{45.5 \times 10^{-24}}{0.32 \times 10^{-19}} = 142.19 \times 10^{-5}\text{ m} \approx \mathbf{1.42 \times 10^{-3}\text{ m} = 1.42\text{ mm}}$$
Example 2
$10\text{ cm}$ त्रिज्या की एक 100 फेरों वाली वृत्ताकार कुंडली में $1.0\text{ A}$ की धारा बह रही है। कुंडली के केंद्र पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का मान ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दिया है:
त्रिज्या $R = 10\text{ cm} = 0.1\text{ m}$
फेरों की संख्या $N = 100$
धारा $I = 1.0\text{ A}$
$\mu_0 = 4\pi \times 10^{-7}\text{ T}\cdot\text{m/A}$

सूत्र:
कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र:
$$B = \frac{\mu_0 N I}{2R}$$
गणना:
$$B = \frac{(4\pi \times 10^{-7}) \times 100 \times 1.0}{2 \times 0.1} = \frac{4\pi \times 10^{-5}}{0.2} = 20\pi \times 10^{-5}\text{ T}$$
$$B = 20 \times 3.1416 \times 10^{-5} \approx 62.83 \times 10^{-5}\text{ T} = \mathbf{6.28 \times 10^{-4}\text{ T}}$$
Example 3
दो लंबे समांतर तार परस्पर $10\text{ cm}$ की दूरी पर स्थित हैं। इनमें क्रमशः $4\text{ A}$ तथा $6\text{ A}$ की धाराएं एक ही दिशा में प्रवाहित हो रही हैं। तारों के बीच प्रति मीटर लंबाई पर लगने वाला बल ज्ञात कीजिए तथा इसकी प्रकृति बताइए। यदि धाराओं की दिशा परस्पर विपरीत कर दी जाए तो क्या परिवर्तन होगा?
Step-by-Step Solution:
दिया है:
$I_1 = 4\text{ A}$, $I_2 = 6\text{ A}$
दूरी $d = 10\text{ cm} = 0.1\text{ m}$
स्थिरांक $\frac{\mu_0}{2\pi} = 2 \times 10^{-7}\text{ T}\cdot\text{m/A}$

सूत्र:
$$\frac{F}{L} = \frac{\mu_0}{2\pi} \frac{I_1 I_2}{d}$$
गणना:
$$\frac{F}{L} = (2 \times 10^{-7}) \times \frac{4 \times 6}{0.1} = (2 \times 10^{-7}) \times 240 = \mathbf{4.8 \times 10^{-5}\text{ N/m}}$$
• प्रकृति (जब धाराएं समान दिशा में हों): बल की प्रकृति आकर्षण (Attractive) होगी。
• जब धाराएं विपरीत दिशा में हों: बल का परिमाण वही ($4.8 \times 10^{-5}\text{ N/m}$) रहेगा, परंतु इसकी प्रकृति बदलकर प्रतिकर्षण (Repulsive) हो जाएगी।
Example 4
ऐम्पियर का परिपथीय नियम लिखिए। इसकी सहायता से एक लंबी धारावाही परिनालिका (Solenoid) के भीतर चुंबकीय क्षेत्र का व्यंजक ($B = \mu_0 n I$) निगमित कीजिए।
Step-by-Step Solution:
ऐम्पियर का परिपथीय नियम:
किसी बंद वक्र (ऐम्पियर लूप) के अनुदिश चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ का रेखीय समाकलन उस बंद लूप द्वारा परिबद्ध कुल धारा ($I_{\text{in}}$) का $\mu_0$ गुना होता है:
$$\oint_C \vec{B}\cdot d\vec{l} = \mu_0 I_{\text{in}}$$

लंबी परिनालिका के चुंबकीय क्षेत्र का निगमन:
1. माना एक लंबी परिनालिका की प्रति एकांक लंबाई में फेरों की संख्या $n$ तथा इसमें प्रवाहित धारा $I$ है。
2. परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान तथा अक्ष के समांतर होता है, जबकि बाहर चुंबकीय क्षेत्र लगभग शून्य ($B \approx 0$) होता है。
3. एक आयताकार बंद लूप $abcd$ चुनते हैं जिसकी भुजा $ab = L$ परिनालिका के भीतर अक्ष के समांतर है तथा भुजा $cd$ बाहर है。
4. संपूर्ण लूप $abcd$ के लिए रेखीय समाकलन:
$$\oint \vec{B}\cdot d\vec{l} = \int_a^b \vec{B}\cdot d\vec{l} + \int_b^c \vec{B}\cdot d\vec{l} + \int_c^d \vec{B}\cdot d\vec{l} + \int_d^a \vec{B}\cdot d\vec{l}$$
• भुजा $ab$ के लिए: $\vec{B}$ और $d\vec{l}$ एक ही दिशा में हैं ($\theta = 0^\circ$) $\implies \int_a^b B\,dl = B L$।
• भुजाओं $bc$ व $da$ के लिए: $\vec{B} \perp d\vec{l}$ ($\theta = 90^\circ$) $\implies \int = 0$।
• भुजा $cd$ के लिए: बाहर $B = 0$ $\implies \int = 0$।
अतः कुल समाकलन: $\oint \vec{B}\cdot d\vec{l} = B L$。
5. लूप $abcd$ द्वारा परिबद्ध कुल धारा:
कुल फेरे $= n L \implies I_{\text{in}} = (n L) I$。
6. ऐम्पियर के परिपथीय नियम से:
$$B L = \mu_0 (n L I) \implies \mathbf{B = \mu_0 n I}$$ (इति सिद्धम्)
Example 5
एक गैल्वेनोमीटर की कुंडली का प्रतिरोध $12\text{ }\Omega$ है और यह $3\text{ mA}$ की धारा पर पूर्ण पैमाना विक्षेप देता है। इसे (a) $0$ से $6\text{ A}$ परास वाले अमीटर में, तथा (b) $0$ से $18\text{ V}$ परास वाले वोल्टमीटर में कैसे रूपांतरित करेंगे?
Step-by-Step Solution:
दिया है:
गैल्वेनोमीटर प्रतिरोध $R_G = 12\text{ }\Omega$
पूर्ण पैमाना विक्षेप धारा $I_g = 3\text{ mA} = 3 \times 10^{-3}\text{ A} = 0.003\text{ A}$

(a) अमीटर में रूपांतरण ($I = 6\text{ A}$):
गैल्वेनोमीटर के समांतर क्रम में एक अल्प प्रतिरोध (शंट $S$) जोड़ना होगा:
$$S = \frac{I_g R_G}{I - I_g} = \frac{(0.003) \times 12}{6 - 0.003} = \frac{0.036}{5.997} \approx \mathbf{0.006\text{ }\Omega = 6 \times 10^{-3}\text{ }\Omega}$$
निष्कर्ष: $0.006\text{ }\Omega$ का शंट प्रतिरोध समांतरक्रम में जोड़ना होगा。

(b) वोल्टमीटर में रूपांतरण ($V = 18\text{ V}$):
गैल्वेनोमीटर के श्रेणी क्रम में एक उच्च प्रतिरोध $R$ जोड़ना होगा:
$$R = \frac{V}{I_g} - R_G = \frac{18}{3 \times 10^{-3}} - 12 = 6000 - 12 = \mathbf{5988\text{ }\Omega}$$
निष्कर्ष: $5988\text{ }\Omega$ का प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

चुंबकीय बल द्वारा गतिमान आवेश पर कार्य होने का अनुमान लगाना।

Scientific Reality & Correction

चुंबकीय लॉरेंट्ज बल सदैव वेग के लंबवत होता है ($\vec{F} \perp \vec{v}$), अतः चुंबकीय बल द्वारा किया गया कार्य सदैव शून्य ($W = 0$) होता है।

Common Misconception

स्थिर आवेश पर चुंबकीय बल की गणना कर देना।

Scientific Reality & Correction

यदि आवेश का वेग शून्य है ($v = 0$), तो उस पर चुंबकीय बल सदैव शून्य होगा; केवल गतिमान आवेश ही चुंबकीय बल अनुभव करता है।

Common Misconception

समान दिशा की धाराओं में स्थिरवैद्युत नियमों की तरह प्रतिकर्षण मान लेना।

Scientific Reality & Correction

समान दिशा में बहने वाली दो धाराएं एक-दूसरे को 'आकर्षित' करती हैं तथा विपरीत दिशा वाली धाराएं 'प्रतिकर्षित' करती हैं।

Common Misconception

गैल्वेनोमीटर को अमीटर बनाते समय प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जोड़ देना।

Scientific Reality & Correction

अमीटर बनाने हेतु अल्प प्रतिरोध (शंट) सदैव 'समांतरक्रम' में तथा वोल्टमीटर बनाने हेतु उच्च प्रतिरोध 'श्रेणीक्रम' में जोड़ा जाता है।

Common Misconception

आदर्श अमीटर का प्रतिरोध अनंत मान लेना।

Scientific Reality & Correction

आदर्श अमीटर का प्रतिरोध शून्य ($R_A = 0$) होता है, जबकि आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनंत ($R_V = \infty$) होता है।

गतिमान आवेश और चुंबकत्व: लॉरेंट्ज बल, बायो-सावर्ट, परिनालिका व गैल्वेनोमीटर

गतिमान आवेश और चुंबकत्व: लॉरेंट्ज बल, बायो-सावर्ट नियम व गैल्वेनोमीटर1. लॉरेंट्ज बल व गतिशून्य कार्य प्रमेय• F_m = q (v x B) = qvB sinθF ⊥ v ⇒ किया गया कार्य W = 0(चाल व गतिज ऊर्जा नियत रहती है)• वृत्ताकार पथ की त्रिज्या:r = mv / (qB) = p / (qB)• आवर्तकाल T = 2πm / (qB)आवृत्ति ν = qB / (2πm)(वेग व त्रिज्या पर निर्भर नहीं!)• हेलिकल पथ जब θ ≠ 90°2. बायो-सावर्ट व ऐम्पियरक्षेत्र निर्धारण नियम• बायो-सावर्ट: dB = (μ₀/4π) (Idl sinθ/r²)μ₀/4π = 10^-7 T m/A• वृत्ताकार कुंडली केंद्र: B = μ₀NI / 2R• ऐम्पियर नियम: ∮ B·dl = μ₀ I_in• लंबी परिनालिका: B = μ₀ n Iसिरों पर: B_end = ½ μ₀ n I• समांतर तारों में बल:F/L = (μ₀/2π) (I₁I₂ / d)समान धारा = आकर्षण, विपरित = प्रतिकर्षण3. चल कुंडली गैल्वेनोमीटरत्रिज्य क्षेत्र व रूपांतरण• बल आघूर्ण τ = NIAB sinθ• त्रिज्य क्षेत्र (Radial): θ = 90°NIAB = C φ ⇒ φ ∝ I (रैखिक)• अमीटर में रूपांतरण:समांतर में शंट S = I_g R_G / (I - I_g)आदर्श अमीटर प्रतिरोध = 0• वोल्टमीटर में रूपांतरण:श्रेणी में उच्च R = V/I_g - R_Gआदर्श वोल्टमीटर प्रतिरोध = ∞बोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Magnetism Capsule)चुंबकीय बल W = 0:F_m ⊥ v अतः कार्य शून्य; केवल दिशा बदलती है, चाल व गतिज ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।1 एम्पियर परिभाषा:1 m दूरी पर स्थित तारों में प्रति मीटर 2 x 10^-7 N बल उत्पन्न करने वाली नियत धारा।गैल्वेनोमीटर रूपांतरण:अमीटर = समांतर में अल्प शंट (R_A→0); वोल्टमीटर = श्रेणी में उच्च प्रतिरोध (R_V→∞)।

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
गतिमान आवेश विद्युत क्षेत्र के साथ-साथ चुंबकीय क्षेत्र (B, मात्रक टेस्ला = Wb/m²) उत्पन्न करते हैं।
Takeaway 2
चुंबकीय लॉरेंट्ज बल F_m = q(v x B) = qvB sinθ सदैव वेग के लंबवत होता है, अतः किया गया कार्य शून्य (W=0) होता है।
Takeaway 3
लंबवत क्षेत्र में आवेशित कण वृत्ताकार पथ पर घूमता है; त्रिज्या r = mv/(qB) तथा आवर्तकाल T = 2πm/(qB) होता है।
Takeaway 4
बायो-सावर्ट नियम: dB = (μ₀/4π) (Idl sinθ / r²); वृत्ताकार कुंडली केंद्र पर B = μ₀NI / (2R) होता है।
Takeaway 5
ऐम्पियर का परिपथीय नियम ∮ B·dl = μ₀ I_in है; लंबी परिनालिका के भीतर B = μ₀ n I होता है।
Takeaway 6
दो समांतर तारों के बीच बल प्रति एकांक लंबाई F/L = (μ₀/2π) (I₁I₂/d) होता है।
Takeaway 7
समान दिशा की धाराएं परस्पर आकर्षित तथा विपरीत दिशा की धाराएं प्रतिकर्षित करती हैं।
Takeaway 8
1 एम्पियर वह धारा है जो 1 m दूरी पर स्थित तारों में 2 x 10^-7 N/m का बल उत्पन्न करती है।
Takeaway 9
चल कुंडली गैल्वेनोमीटर में त्रिज्य चुंबकीय क्षेत्र द्वारा विक्षेप कोण धारा के समानुपाती (φ ∝ I) होता है।
Takeaway 10
अमीटर बनाने हेतु समांतर में अल्प शंट S = I_g R_G / (I - I_g) तथा वोल्टमीटर हेतु श्रेणी में उच्च प्रतिरोध R = V/I_g - R_G जोड़ते हैं।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान किसी आवेशित कण पर चुंबकीय बल द्वारा किया गया कार्य शून्य (W = 0) क्यों होता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: क्योंकि चुंबकीय लॉरेंट्ज बल सदैव कण के वेग के लंबवत (F ⊥ v) कार्य करता है। चूंकि बल और विस्थापन के बीच कोण 90° होता है (cos 90° = 0), अतः तात्क्षणिक शक्ति और किया गया कुल कार्य सदैव शून्य होता है।
2
चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान आवेशित कण के वृत्ताकार पथ के आवर्तकाल का सूत्र लिखिए। क्या यह कण के वेग पर निर्भर करता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: आवर्तकाल T = 2πm / (qB)। नहीं, यह कण के वेग (v) तथा पथ की त्रिज्या (r) पर बिल्कुल निर्भर नहीं करता।
3
दो समांतर धारावाही चालकों के बीच लगने वाले बल के आधार पर 'एक एम्पियर' (1 Ampere) की मानक परिभाषा लिखिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: 1 एम्पियर वह नियत विद्युत धारा है जो निर्वात में परस्पर 1 मीटर की दूरी पर स्थित दो सीधे, लंबे व समांतर तारों में प्रवाहित होने पर, तारों के मध्य प्रति मीटर लंबाई पर 2 x 10^-7 न्यूटन का बल उत्पन्न करती है।
4
चल कुंडली गैल्वेनोमीटर में 'त्रिज्य चुंबकीय क्षेत्र' (Radial Magnetic Field) उत्पन्न करने का क्या उद्देश्य है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: त्रिज्य क्षेत्र यह सुनिश्चित करता है कि कुंडली की प्रत्येक स्थिति में कुंडली का तल चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के सदैव समांतर रहे (θ = 90°), जिससे विक्षेपक बल आघूर्ण सदैव अधिकतम (τ = NIAB) रहे और विक्षेप कोण सीधे धारा के समानुपाती (φ ∝ I) बना रहे।
5
एक गैल्वेनोमीटर को अमीटर तथा वोल्टमीटर में कैसे रूपांतरित किया जाता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer:
  1. अमीटर बनाने के लिए: गैल्वेनोमीटर कुंडली के साथ समांतर क्रम में एक अल्प प्रतिरोध (शंट) जोड़ा जाता है। 2. वोल्टमीटर बनाने के लिए: गैल्वेनोमीटर कुंडली के साथ श्रेणी क्रम में एक अति उच्च प्रतिरोध जोड़ा जाता है।

Finished Studying This Chapter?
READY TO PRACTICE?

Timed CBT Practice Tests (Exam Simulator)

Put your concepts to the test with official curriculum-aligned Foundation and Advanced practice tests. Get instant accuracy scores, time metrics, and step-by-step verified explanations.