Follow Us
Select Medium / माध्यम चुनें:
Eng (English) Hindi (हिन्दी)
JAC • Class XII • Physics • Ch 9
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Ray Optics and Optical Instruments

प्रकाश का ऋजुरेखीय संचरण और किरण रूप में उसका व्यवहार किरण प्रकाशिकी (Ray Optics) की आधारशिला है। दर्पणों द्वारा परावर्तन से लेकर विभिन्न सघन-विरल माध्यमों में अपवर्तन (स्नेल का नियम $\frac{\sin i}{\sin r} = \frac{n_2}{n_1}$) तक प्रकाश प्रकृति के विस्मयकारी दृश्यों को जन्म देता है। जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाते समय क्रांतिक कोण ($i > i_c$) से बड़े कोण पर आपतित होता है, तो पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection - $\sin i_c = 1/n$) घटित होता है, जो आधुनिक इंटरनेट क्रांति की रीढ़—ऑप्टिकल फाइबर (Optical Fibre)—का कार्य सिद्धांत है। वक्र पृष्ठों पर अपवर्तन का सार्वभौमिक सूत्र $\frac{n_2}{v} - \frac{n_1}{u} = \frac{n_2 - n_1}{R}$ तथा चश्मा लेंसों के निर्माण का आधार लेंस निर्माता का सूत्र (Lens Maker's Formula: $\frac{1}{f} = (n-1)(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2})$) इस अध्याय के सर्वोच्च गणितीय स्तंभ हैं। प्रिज्म द्वारा वर्ण-विक्षेपण, न्यूनतम विचलन कोण ($D_m$) से अपवर्तनांक ज्ञात करने का सूत्र [$n = \frac{\sin((A+D_m)/2)}{\sin(A/2)}$] तथा रैले का प्रकीर्णन नियम ($I \propto 1/\lambda^4$, आकाश का नीला रंग व लाल सूर्यास्त) प्राकृतिक दृश्यों की वैज्ञानिक मीमांसा करते हैं। अंततः, मानव नेत्र की सीमाओं को लांघकर अदृश्य सूक्ष्म जीवों को दिखाने वाला संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope) तथा ब्रह्मांड के दूरस्थ तारों को पास लाने वाला खगोलीय दूरदर्शी (Astronomical Telescope: अपवर्ती व कैसेग्रेन परावर्ती) इस अध्याय की प्रायोगिक व तकनीकी पराकाष्ठा हैं।

रेगिस्तान की जलती रेत पर प्यासे यात्री को चमचमाती झील और उल्टा पेड़ क्यों दिखाई देता है?

गर्मी की चिलचिलाती धूप में थार या सहारा के रेगिस्तान में दूर देखने पर ऐसा लगता है जैसे सामने पानी का विशाल तालाब लहरा रहा हो! परंतु जब प्यासा यात्री दौड़कर वहां पहुँचता है, तो वहां सिर्फ तपती हुई सूखी रेत मिलती है! इसे 'मरीचिका' (Mirage) कहते हैं। यह कोई जादुई भ्रम नहीं, बल्कि भौतिकी का अत्यंत खूबसूरत चमत्कार है! रेत के संपर्क में आने वाली हवा अत्यधिक गर्म होकर विरल हो जाती है, जबकि ऊपर की हवा ठंडी व सघन रहती है। पेड़ से नीचे आती प्रकाश की किरणें जब सघन से विरल परतों में प्रवेश करती हैं, तो वे अभिलंब से दूर हटती जाती हैं और अंततः क्रांतिक कोण से बड़ा कोण बनते ही 'पूर्ण आंतरिक परावर्तन' (TIR) होकर ऊपर की ओर मुड़ जाती हैं! देखने वाले की आँखों को लगता है कि प्रकाश नीचे जमीन में स्थित पानी से परावर्तित होकर आ रहा है! आइए जानें प्रकाश के इस जादुई रास्ते का संपूर्ण विज्ञान!

Why This Chapter Matters

JAC और CBSE कक्षा 12वीं भौतिकी बोर्ड परीक्षा में 'किरण प्रकाशिकी' संपूर्ण पाठ्यक्रम का सबसे भारी अंक-भार वाला अध्याय है। पूर्ण आंतरिक परावर्तन की दो शर्तें, क्रांतिक कोण संबंध ($\sin i_c = 1/n$) और ऑप्टिकल फाइबर की कार्यप्रणाली, गोलीय अवतल/उत्तल पृष्ठ पर अपवर्तन सूत्र ($\frac{n_2}{v} - \frac{n_1}{u} = \frac{n_2 - n_1}{R}$) का निगमन, लेंस निर्माता सूत्र (Lens Maker's Formula) का संपूर्ण निगमन और माध्यम बदलने पर फोकस दूरी में परिवर्तन, प्रिज्म के अपवर्तनांक का सूत्र ($n = \frac{\sin((A+D_m)/2)}{\sin(A/2)}$) एवं रैले प्रकीर्णन नियम, तथा संयुक्त सूक्ष्मदर्शी और खगोलीय दूरदर्शी (अपवर्ती व परावर्ती) के किरण आरेख, आवर्धन क्षमता के सूत्र ($m$) तथा परावर्ती दूरदर्शी की श्रेष्ठता पर प्रतिवर्ष 5 अंकों का दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न शत-प्रतिशत पूछा जाता है।

Before You Begin (Prerequisites)

  • समतल व गोलीय दर्पणों के परावर्तन नियम एवं चिन्ह परिपाटी (Cartesian Sign Convention)।
  • स्नेल का अपवर्तन नियम तथा अपवर्तनांक ($n = c/v$) की सामान्य समझ।
  • ज्यामिति (त्रिभुज के बहिष्कोण प्रमेय, समरूप त्रिभुज) तथा त्रिकोणमिति की प्राथमिक समझ।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • दर्पण सूत्र, आवर्धन तथा पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR) व ऑप्टिकल फाइबर की संरचना का विश्लेषण करना।
  • एकल गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन सूत्र तथा लेंस निर्माता सूत्र (Lens Maker's Formula) का निगमन करना।
  • प्रिज्म द्वारा प्रकाश के अपवर्तन, न्यूनतम विचलन कोण ($D_m$) एवं वर्ण-विक्षेपण क्षमता का परिकलन करना।
  • रैले के प्रकीर्णन नियम के आधार पर आकाश के नीले रंग तथा सूर्योदय/सूर्यास्त के लाल रंग की व्याख्या करना।
  • संयुक्त सूक्ष्मदर्शी एवं खगोलीय दूरदर्शी (अपवर्ती व परावर्ती) के किरण आरेख बनाना और आवर्धन क्षमता के सूत्रों का निगमन करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. प्रकाश का अपवर्तन, पूर्ण आंतरिक...
2 2. गोलीय पृष्ठों पर अपवर्तन एवं लें...
3 3. प्रिज्म द्वारा अपवर्तन, वर्ण-विक...
4 4. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound M...
5 5. खगोलीय दूरदर्शी: अपवर्ती एवं कैस...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. प्रकाश का अपवर्तन, पूर्ण आंतरिक परावर्तन एवं ऑप्टिकल फाइबर

1.1 अपवर्तन के नियम एवं वास्तविक व आभासी गहराई

जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में जाती है, तो अपने मार्ग से विचलित हो जाती है:

  • स्नेल का नियम (Snell's Law): $\mathbf{\frac{\sin i}{\sin r} = \frac{n_2}{n_1} = {_1n_2}}$ (जहाँ $n = \frac{c}{v}$ निरपेक्ष अपवर्तनांक है)।
  • वास्तविक एवं आभासी गहराई (Real & Apparent Depth): जब सघन माध्यम (अपवर्तनांक $n$) में रखी वस्तु को विरल माध्यम (वायु) से देखते हैं:
    $$\mathbf{d_{\text{apparent}} = \frac{d_{\text{real}}}{n}} \quad \implies \text{उठाव (Shift) } \Delta y = d\left(1 - \frac{1}{n}\right)$$उदाहरण: पानी में पड़ी पेंसिल का मुड़ी हुई दिखना, सिक्का ऊपर उठा दिखना।

1.2 पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection - TIR)

परिभाषा: जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम के अंतरापृष्ठ पर आपतित होती है और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical Angle - $i_c$) से अधिक हो जाता है, तो किरण विरल माध्यम में अपवर्तित होने के बजाय संपूर्ण रूप से सघन माध्यम में ही परावर्तित हो जाती है। इसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं。

दो अनिवार्य शर्तें (Two Mandatory Conditions):
1. प्रकाश की किरण सर्वदा सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जानी चाहिए।
2. सघन माध्यम में आपतन कोण का मान उस माध्यम युग्म के क्रांतिक कोण से बड़ा होना चाहिए ($i > i_c$)।

क्रांतिक कोण व अपवर्तनांक में संबंध:
स्नेल के नियमानुसार: $n_1 \sin i_c = n_2 \sin 90^\circ \implies n \sin i_c = 1 \times 1$
$$\mathbf{\sin i_c = \frac{1}{n} \quad \iff \quad n = \frac{1}{\sin i_c}}$$विशेष मान: हीरे के लिए $n \approx 2.42 \implies i_c \approx 24.4^\circ$ (अत्यंत कम क्रांतिक कोण के कारण तराशा गया हीरा अंदर ही बार-बार TIR करके जगमगाता है)।

1.3 प्रकाशिक तंतु (Optical Fibre) की संरचना एवं कार्यप्रणाली

ऑप्टिकल फाइबर पूर्ण आंतरिक परावर्तन पर आधारित अति-तीव्र दूरसंचार युक्ति है:

  • संरचना: यह उच्च गुणवत्ता वाले सिलिका या क्वार्ट्ज कांच की अत्यधिक पतली नली (बाल जितनी महीन) होती है। इसके दो मुख्य भाग होते हैं:
    1. क्रोड (Core): केंद्रीय आंतरिक भाग जिसका अपवर्तनांक उच्च ($n_1 \approx 1.5$) होता है।
    2. आवरण / क्लैडिंग (Cladding): क्रोड के चारों ओर कांच/प्लास्टिक की सुरक्षात्मक परत जिसका अपवर्तनांक अपेक्षाकृत कम ($n_2 < n_1, n_2 \approx 1.45$) होता है।
  • कार्यप्रणाली: जब प्रकाश सिग्नल को एक सिरे से क्रोड-क्लैडिंग अंतरापृष्ठ पर $i > i_c$ कोण पर प्रवेश कराया जाता है, तो किरण बिना किसी ऊर्जा क्षय के बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तित होकर किलोमीटरों दूर दूसरे सिरे पर प्रकाश के वेग से पहुँच जाती है।
  • अनुप्रयोग: उच्च-गति इंटरनेट (ब्राडबैंड), चिकित्सा में एंडोस्कोपी (आंतरिक अंगों की जांच)।

2. गोलीय पृष्ठों पर अपवर्तन एवं लेंस निर्माता का सूत्र

2.1 एकल गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन का सूत्र (Refraction at Spherical Surface)

जब प्रकाश $n_1$ अपवर्तनांक वाले माध्यम से $R$ वक्रता त्रिज्या वाले गोलीय पृष्ठ (उत्तल अथवा अवतल) से $n_2$ अपवर्तनांक वाले माध्यम में प्रवेश करता है:

$$\mathbf{\frac{n_2}{v} - \frac{n_1}{u} = \frac{n_2 - n_1}{R}}$$जहाँ $u$ = बिंब दूरी, $v$ = प्रतिबिंब दूरी, $R$ = वक्रता त्रिज्या (चिन्ह परिपाटी के साथ)।

2.2 लेंस निर्माता का सूत्र (Lens Maker's Formula) का संपूर्ण निगमन

माना $n_2$ अपवर्तनांक के कांच का एक पतला लेंस $n_1$ अपवर्तनांक वाले माध्यम में रखा है, जिसके पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याएं $R_1$ व $R_2$ हैं।

  • प्रथम पृष्ठ ($R_1$) पर अपवर्तन: बिंब $O$ का आभासी प्रतिबिंब $I'$ पर बनता है ($v = v'$):$$\frac{n_2}{v'} - \frac{n_1}{u} = \frac{n_2 - n_1}{R_1} \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$
  • द्वितीय पृष्ठ ($R_2$) पर अपवर्तन: आभासी प्रतिबिंब $I'$ द्वितीय पृष्ठ के लिए आभासी बिंब का कार्य करता है ($u = v'$) और अंतिम प्रतिबिंब $I$ पर बनता है ($v$ दूरी पर):$$\frac{n_1}{v} - \frac{n_2}{v'} = \frac{n_1 - n_2}{R_2} = -\frac{n_2 - n_1}{R_2} \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$
  • समीकरण (1) और (2) को जोड़ने पर $\frac{n_2}{v'}$ निरस्त हो जाता है:$$\frac{n_1}{v} - \frac{n_1}{u} = (n_2 - n_1)\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right)$$
  • $n_1$ से दोनों पक्षों में भाग देने पर:$$\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \left(\frac{n_2}{n_1} - 1\right)\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right)$$
  • जब बिंब अनंत पर हो ($u = \infty$), तो प्रतिबिंब फोकस पर बनता है ($v = f$): $\frac{1}{f} - \frac{1}{\infty} = \frac{1}{f}$।
$$\mathbf{\frac{1}{f} = (n - 1)\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right)}$$ (Lens Maker's Formula)
जहाँ $n = \frac{n_2}{n_1}$ लेंस के पदार्थ का माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक है。
• लेंस सूत्र: $\mathbf{\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}}$
• लेंस की क्षमता (Power): $\mathbf{P = \frac{1}{f\text{ (m)}} = \frac{100}{f\text{ (cm)}}}$ (मात्रक: डायोप्टर - $\text{D}$)।
• संयोजन: $\mathbf{P = P_1 + P_2 \implies \frac{1}{F} = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{f_2}}$ तथा $m = m_1 \times m_2$।

3. प्रिज्म द्वारा अपवर्तन, वर्ण-विक्षेपण एवं प्रकाश का प्रकीर्णन

3.1 प्रिज्म द्वारा अपवर्तन एवं न्यूनतम विचलन का सूत्र

जब प्रकाश एक $A$ अपवर्तक कोण वाले कांच के प्रिज्म से गुजरता है, तो आपतन कोण $i$ तथा निर्गत कोण $e$ के साथ विचलन कोण $\delta$ का संबंध है: $\mathbf{A + \delta = i + e}$।

  • न्यूनतम विचलन की स्थिति (Condition of Minimum Deviation - $\delta = D_m$):
    इस विशेष स्थिति में किरण प्रिज्म के आधार के समांतर गुजरती है: $i = e$ तथा $r_1 = r_2 = r$।
    अतः: $A = r + r = 2r \implies \mathbf{r = \frac{A}{2}}$
    तथा: $A + D_m = i + i = 2i \implies \mathbf{i = \frac{A + D_m}{2}}$
  • स्नेल के नियम ($n = \frac{\sin i}{\sin r}$) में मान रखने पर प्रिज्म के अपवर्तनांक का सूत्र:$$\mathbf{n = \frac{\sin\left(\frac{A + D_m}{2}\right)}{\sin\left(\frac{A}{2}\right)}}$$
  • पतले प्रिज्म हेतु विचलन: $\mathbf{\delta = (n - 1) A}$।

3.2 वर्ण-विक्षेपण एवं रैले का प्रकीर्णन नियम (Dispersion & Scattering)

  • वर्ण-विक्षेपण (Dispersion): श्वेत प्रकाश का प्रिज्म से गुजरने पर अपने सात अवयवी रंगों (VIBGYOR) में विभक्त होना। कॉशी के सूत्र ($n = a + b/\lambda^2$) के अनुसार बैंगनी रंग की तरंगदैर्ध्य न्यूनतम होने से अपवर्तनांक $n_v$ सर्वाधिक होता है, अतः बैंगनी रंग का विचलन सबसे अधिक तथा लाल रंग का विचलन सबसे कम होता है।
  • रैले का प्रकीर्णन नियम (Rayleigh's Law of Scattering): जब प्रकीर्णक कणों का आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य से बहुत छोटा हो ($a \ll \lambda$):$$\mathbf{I \propto \frac{1}{\lambda^4}}$$• आकाश का नीला रंग: नीले रंग की तरंगदैर्ध्य लाल की तुलना में लगभग आधी होती है, अतः वायुमंडल के कण नीले प्रकाश को लाल की तुलना में $2^4 = 16$ गुना अधिक प्रकीर्णित करते हैं, जिससे आकाश नीला दिखाई देता है।
    • सूर्योदय व सूर्यास्त के समय सूर्य का रक्ताभ (लाल) दिखना: क्षितिज पर सूर्य की किरणों को वायुमंडल की अत्यधिक मोटी परत से गुजरना पड़ता है। कम तरंगदैर्ध्य वाला नीला-बैंगनी प्रकाश मार्ग में ही प्रकीर्णित होकर बिखर जाता है, और केवल अधिकतम तरंगदैर्ध्य वाला लाल प्रकाश ही सीधे हमारी आँखों तक पहुँच पाता है।
    • खतरे के सिग्नल लाल होना: लाल प्रकाश का प्रकीर्णन न्यूनतम होने से यह कोहरे में भी दूर से स्पष्ट दिखता है।

4. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope)

4.1 संरचना एवं किरण आरेख

अतिसूक्ष्म वस्तुओं (जैसे जीवाणु, रक्त कणिकाएं) को अत्यधिक आवर्धित करके देखने हेतु प्रयुक्त प्रकाशिक यंत्र। इसमें दो उत्तल लेंस एक समाक्षीय नली में लगे होते हैं:

  1. अभिदृश्यक लेंस (Objective Lens - $O$): वस्तु की ओर वाला लेंस। इसका द्वारक (Aperture) तथा फोकस दूरी ($f_o$) दोनों अत्यंत छोटे होते हैं, ताकि वस्तु द्वारा विशाल कोण अंतरित हो सके। यह वस्तु का वास्तविक, उल्टा व आवर्धित प्रतिबिंब $A'B'$ बनाता है।
  2. नेत्रिका (Eyepiece - $E$): आँख की ओर वाला लेंस। इसकी फोकस दूरी ($f_e$) तथा द्वारक अभिदृश्यक की तुलना में बड़ा होता है। यह एक सरल सूक्ष्मदर्शी की भांति कार्य करके $A'B'$ का काल्पनिक, सीधा (मूल वस्तु के सापेक्ष उल्टा) व अत्यधिक विशाल अंतिम प्रतिबिंब $A''B''$ बनाता है।

4.2 आवर्धन क्षमता ($m$) के सूत्र

कुल आवर्धन क्षमता दोनों लेंसों के आवर्धन का गुणनफल होती है: $m = m_o \times m_e = \left(-\frac{v_o}{u_o}\right) \times m_e$

  • केस 1: जब अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी ($D = 25\text{ cm}$) पर बने:$$\mathbf{m = -\frac{v_o}{u_o} \left(1 + \frac{D}{f_e}\right)} \approx -\frac{L}{f_o} \left(1 + \frac{D}{f_e}\right)$$सूक्ष्मदर्शी की नली की लंबाई: $\mathbf{L = v_o + u_e}$
  • केस 2: सामान्य समायोजन (Normal Adjustment - अंतिम प्रतिबिंब अनंत $\infty$ पर बने):$$\mathbf{m = -\frac{v_o}{u_o} \left(\frac{D}{f_e}\right)} \approx -\frac{L}{f_o} \left(\frac{D}{f_e}\right)$$नली की लंबाई: $\mathbf{L = v_o + f_e}$ (जहाँ $L$ अभिदृश्यक व नेत्रिका के बीच की दूरी है)।
उच्च आवर्धन प्राप्त करने की शर्त: $f_o$ तथा $f_e$ दोनों का मान जितना संभव हो छोटा (न्यूनतम) होना चाहिए।

5. खगोलीय दूरदर्शी: अपवर्ती एवं कैसेग्रेन परावर्ती

5.1 अपवर्ती खगोलीय दूरदर्शी (Refracting Astronomical Telescope)

दूर स्थित आकाशीय पिंडों (ग्रह, चंद्रमा, तारे) को देखने हेतु प्रयुक्त यंत्र:

  • अभिदृश्यक लेंस: वस्तु (तारे) की ओर वाला लेंस। इसकी फोकस दूरी ($f_o$) तथा द्वारक अत्यधिक विशाल होते हैं ताकि दूरस्थ तारों से अधिक से अधिक प्रकाश एकत्रित कर चमकीला प्रतिबिंब बना सके।
  • नेत्रिका: आँख की ओर वाला छोटा लेंस, जिसकी फोकस दूरी ($f_e$) तथा द्वारक छोटे होते हैं।
  • आवर्धन क्षमता ($m$):$$\text{सामान्य समायोजन (प्रतिबिंब } \infty \text{ पर): } \mathbf{m = -\frac{f_o}{f_e}} \quad \text{तथा नली की लंबाई } \mathbf{L = f_o + f_e}$$$$\text{प्रतिबिंब } D \text{ पर: } \mathbf{m = -\frac{f_o}{f_e}\left(1 + \frac{f_e}{D}\right)} \quad \text{तथा नली की लंबाई } \mathbf{L = f_o + u_e}$$
  • उच्च आवर्धन की शर्त: $f_o$ का मान अत्यधिक बड़ा तथा $f_e$ का मान अत्यंत छोटा होना चाहिए।

5.2 परावर्ती दूरदर्शी (Cassegrain Reflecting Telescope) एवं इसकी श्रेष्ठता

आधुनिक खगोल विज्ञान में अपवर्ती दूरदर्शी के स्थान पर परावर्ती दूरदर्शी का उपयोग किया जाता है, जिसमें अभिदृश्यक के रूप में एक विशाल अवतल परवलयाकार दर्पण (Parabolic Mirror) तथा द्वितीयक उत्तल दर्पण का प्रयोग होता है।

परावर्ती दूरदर्शी अपवर्ती दूरदर्शी से श्रेष्ठ क्यों है? (4 अकाट्य कारण):
1. वर्ण विपथन से पूर्ण मुक्ति (Free from Chromatic Aberration): दर्पण में प्रकाश का परावर्तन होता है, अपवर्तन नहीं। चूंकि परावर्तन में सभी रंग समान रूप से परावर्तित होते हैं, अतः इसमें रंगीन धुंधलापन (वर्ण विपथन) बिल्कुल नहीं होता।
2. गोलीय विपथन से मुक्ति (Free from Spherical Aberration): परवलयाकार दर्पण प्रयुक्त करने से सभी किरणें बिल्कुल एक ही बिंदु फोकस पर केंद्रित होती हैं।
3. अत्यधिक हल्का व यांत्रिक सहारा सुगम: विशाल कांच के भारी लेंस को केवल किनारों से पकड़ा जा सकता है जिससे वह अपने वजन से मुड़ जाता है, जबकि भारी दर्पण को उसके पूरे पिछले हिस्से से आसानी से सहारा दिया जा सकता है।
4. विशाल प्रकाश सुग्राहिता एवं उच्च विभेदन: कई मीटर व्यास के दर्पण बनाना लेंस की तुलना में अत्यंत आसान और सस्ता होता है, जिससे सुदूर मंद मंदाकिनियों के भी अत्यंत स्पष्ट व चमकीले चित्र प्राप्त होते हैं।

Key Formulas, Laws & Physical Constants

दर्पण सूत्र व आवर्धन
$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}; \quad m = -\frac{v}{u} = \frac{f - v}{f} = \frac{f}{f - u}$$
स्नेल का नियम व अपवर्तनांक
$$\frac{\sin i}{\sin r} = \frac{n_2}{n_1} = {_1n_2}; \quad n = \frac{c}{v} = \frac{\lambda_{\text{air}}}{\lambda_{\text{med}}}$$
आभासी गहराई व उठाव
$$d_{\text{app}} = \frac{d}{n}; \quad \Delta y = d\left(1 - \frac{1}{n}\right)$$
पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR)
i_c = {1}{n} ⇔ n = {1}{ i_c} (i > i_c, सघन से विरल)
एकल गोलीय पृष्ठ अपवर्तन
$$\frac{n_2}{v} - \frac{n_1}{u} = \frac{n_2 - n_1}{R}$$
लेंस निर्माता सूत्र
$$\frac{1}{f} = (n - 1)\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right); \quad \frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}$$
लेंस क्षमता व संयोजन
$$P = \frac{1}{f\text{ (m)}} = \frac{100}{f\text{ (cm)}} \text{ (Dioptre)}; \quad P_{\text{net}} = P_1 + P_2, \frac{1}{F} = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{f_2}$$
प्रिज्म अपवर्तनांक सूत्र
n = {≤ft({A + D_m}{2})}{≤ft({A}{2})}; = (n - 1)A (पतले प्रिज्म हेतु)
रैले प्रकीर्णन नियम
I {1}{^4} (आकाश नीला, सूर्योदय/सूर्यास्त लाल)
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी आवर्धन
m = -{v_o}{u_o}≤ft(1 + {D}{f_e}) (D पर); m = -{v_o}{u_o}≤ft({D}{f_e}) (अनंत पर)
खगोलीय दूरदर्शी आवर्धन
m = -{f_o}{f_e} (L = f_o + f_e, सामान्य समायोजन)
परावर्ती दूरदर्शी लाभ
वर्ण विपथन व गोलीय विपथन से पूर्ण मुक्त; परवलयाकार दर्पण प्रयुक्त

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
कांच ($n = 1.5$) के उभयोत्तल (Double Convex) लेंस के दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याएं क्रमशः $20\text{ cm}$ तथा $30\text{ cm}$ हैं। लेंस की फोकस दूरी तथा क्षमता ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दिया है:
लेंस का अपवर्तनांक $n = 1.5$
प्रथम पृष्ठ की वक्रता त्रिज्या $R_1 = +20\text{ cm} = +0.2\text{ m}$
द्वितीय पृष्ठ की वक्रता त्रिज्या $R_2 = -30\text{ cm} = -0.3\text{ m}$

सूत्र:
लेंस निर्माता के सूत्र से:
$$\frac{1}{f} = (n - 1)\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right)$$
गणना:
$$\frac{1}{f} = (1.5 - 1)\left(\frac{1}{20} - \frac{1}{-30}\right) = 0.5 \times \left(\frac{1}{20} + \frac{1}{30}\right)$$
$$\frac{1}{f} = 0.5 \times \left(\frac{3 + 2}{60}\right) = 0.5 \times \frac{5}{60} = \frac{2.5}{60} = \frac{1}{24}$$
$$\mathbf{f = +24\text{ cm} = +0.24\text{ m}}$$
लेंस की क्षमता ($P$):
$$P = \frac{100}{f\text{ (cm)}} = \frac{100}{24} = \mathbf{+4.17\text{ Dioptre (D)}}$$
उत्तर: लेंस की फोकस दूरी $\mathbf{+24\text{ cm}}$ तथा क्षमता $\mathbf{+4.17\text{ D}}$ है।
Example 2
एक समबाहु कांच के प्रिज्म ($A = 60^\circ$) के लिए न्यूनतम विचलन कोण $D_m = 30^\circ$ है। कांच का अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए। यदि इस प्रिज्म को जल ($n_w = 4/3$) में डुबो दिया जाए तो नया न्यूनतम विचलन कोण क्या होगा?
Step-by-Step Solution:
दिया है:
प्रिज्म कोण $A = 60^\circ$, न्यूनतम विचलन $D_m = 30^\circ$

1. वायु में कांच का अपवर्तनांक ($n_g$):
$$n_g = \frac{\sin\left(\frac{A + D_m}{2}\right)}{\sin\left(\frac{A}{2}\right)} = \frac{\sin\left(\frac{60^\circ + 30^\circ}{2}\right)}{\sin\left(\frac{60^\circ}{2}\right)} = \frac{\sin 45^\circ}{\sin 30^\circ}$$
$$n_g = \frac{1/\sqrt{2}}{1/2} = \frac{2}{\sqrt{2}} = \mathbf{\sqrt{2} \approx 1.414}$$

2. जल में डुबोने पर नया आपेक्षिक अपवर्तनांक:
$$_w n_g = \frac{n_g}{n_w} = \frac{\sqrt{2}}{4/3} = \frac{3\sqrt{2}}{4} = \frac{3 \times 1.414}{4} \approx 1.06$$
जल में न्यूनतम विचलन कोण $D_m'$ हेतु:
$$\sin\left(\frac{60^\circ + D_m'}{2}\right) = {_w n_g} \sin 30^\circ = 1.06 \times 0.5 = 0.53$$
चूंकि $\sin 32^\circ \approx 0.53$:
$$\frac{60^\circ + D_m'}{2} = 32^\circ \implies 60^\circ + D_m' = 64^\circ \implies \mathbf{D_m' \approx 4^\circ}$$
निष्कर्ष: जल में डुबोने पर विचलन कोण $30^\circ$ से घटकर मात्र $\approx 4^\circ$ रह जाता है।
Example 3
पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) से क्या तात्पर्य है? इसकी दो आवश्यक शर्तें लिखिए तथा क्रांतिक कोण एवं माध्यम के अपवर्तनांक में संबंध स्थापित कीजिए।
Step-by-Step Solution:
पूर्ण आंतरिक परावर्तन की परिभाषा:
जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम के अंतरापृष्ठ पर आपतित होती है और आपतन कोण का मान उस माध्यम युग्म के क्रांतिक कोण ($i_c$) से बड़ा हो जाता है, तो किरण विरल माध्यम में अपवर्तित होने के बजाय संपूर्ण रूप से सघन माध्यम में ही 100% परावर्तित हो जाती है। इस घटना को पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं。

दो आवश्यक शर्तें (Mandatory Conditions):
1. प्रकाश की किरण को सदैव सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर गमन करना चाहिए।
2. सघन माध्यम में आपतन कोण ($i$) का मान दोनों माध्यमों के क्रांतिक कोण ($i_c$) से अधिक होना चाहिए ($i > i_c$)।

संबंध का निगमन:
1. क्रांतिक कोण वह विशेष आपतन कोण है जिस पर विरल माध्यम में अपवर्तन कोण $r = 90^\circ$ हो जाता है。
2. स्नेल के नियमानुसार:
$$n_1 \sin i_c = n_2 \sin 90^\circ$$
जहाँ $n_1 = n$ (सघन माध्यम) तथा $n_2 = 1$ (वायु या विरल माध्यम):
$$n \sin i_c = 1 \times 1 = 1$$
$$\mathbf{\sin i_c = \frac{1}{n} \quad \iff \quad n = \frac{1}{\sin i_c}}$$ (इति सिद्धम्)
Example 4
एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope) में अभिदृश्यक की फोकस दूरी $1.0\text{ cm}$ तथा नेत्रिका की फोकस दूरी $2.5\text{ cm}$ है। एक वस्तु अभिदृश्यक से $1.2\text{ cm}$ की दूरी पर रखी है। यदि अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी ($D = 25\text{ cm}$) पर बनता है, तो सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता तथा नली की लंबाई ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दिया है:
$f_o = 1.0\text{ cm}$, $u_o = -1.2\text{ cm}$
$f_e = 2.5\text{ cm}$, $D = 25\text{ cm}$

1. अभिदृश्यक द्वारा प्रतिबिंब दूरी ($v_o$):
लेंस सूत्र: $\frac{1}{f_o} = \frac{1}{v_o} - \frac{1}{u_o}$
$$\frac{1}{1.0} = \frac{1}{v_o} - \frac{1}{-1.2} = \frac{1}{v_o} + \frac{1}{1.2}$$
$$\frac{1}{v_o} = 1 - \frac{1}{1.2} = 1 - \frac{5}{6} = \frac{1}{6} \implies \mathbf{v_o = +6.0\text{ cm}}$$

2. नेत्रिका हेतु बिंब दूरी ($u_e$):
नेत्रिका का अंतिम प्रतिबिंब $v_e = -D = -25\text{ cm}$ पर बनता है:
$$\frac{1}{f_e} = \frac{1}{v_e} - \frac{1}{u_e} \implies \frac{1}{2.5} = -\frac{1}{25} - \frac{1}{u_e}$$
$$\frac{1}{u_e} = -\frac{1}{25} - \frac{10}{25} = -\frac{11}{25} \implies |u_e| = \frac{25}{11} \approx \mathbf{2.27\text{ cm}}$$

3. आवर्धन क्षमता ($m$):
$$m = -\frac{v_o}{|u_o|} \left(1 + \frac{D}{f_e}\right) = -\frac{6.0}{1.2} \left(1 + \frac{25}{2.5}\right) = -5 \times (1 + 10) = -5 \times 11 = \mathbf{-55}$$

4. नली की कुल लंबाई ($L$):
$$L = v_o + |u_e| = 6.0 + 2.27 = \mathbf{8.27\text{ cm}}$$
Example 5
खगोलीय दूरदर्शी में परावर्ती दूरदर्शी (Reflecting Telescope) अपवर्ती दूरदर्शी (Refracting Telescope) की तुलना में श्रेष्ठ क्यों माना जाता है? किन्हीं चार मुख्य कारणों को स्पष्ट कीजिए।
Step-by-Step Solution:
परावर्ती दूरदर्शी (जैसे कैसेग्रेन दूरदर्शी) अपवर्ती दूरदर्शी से निम्नलिखित 4 मुख्य कारणों से श्रेष्ठ होता है:

1. वर्ण विपथन से पूर्ण मुक्ति (Free from Chromatic Aberration):
अपवर्ती दूरदर्शी में कांच का बड़ा लेंस प्रकाश का अपवर्तन करता है जिससे विभिन्न रंग अलग-अलग बिंदुओं पर फोकस होते हैं, जिससे प्रतिबिंब के किनारों पर अवांछित रंगीन धुंधलापन (वर्ण विपथन) आ जाता है। परावर्ती दूरदर्शी में अभिदृश्यक एक अवतल दर्पण होता है; चूंकि परावर्तन के नियम सभी रंगों के लिए समान होते हैं, अतः इसमें वर्ण विपथन शून्य होता है。

2. गोलीय विपथन से मुक्ति (Free from Spherical Aberration):
अवतल परवलयाकार दर्पण (Parabolic Mirror) का उपयोग करके सीमांत एवं अक्षीय किरणों को बिल्कुल एक ही बिंदु पर केंद्रित किया जा सकता है, जिससे गोलीय विपथन पूर्णतः समाप्त हो जाता है。

3. यांत्रिक संरचना एवं सुदृढ़ सहारा:
विशाल लेंस (जैसे 1 मीटर व्यास) का वजन कई टन होता है और उसे केवल उसके किनारों की परिधि से ही सहारा दिया जा सकता है, जिससे लेंस अपने ही भार के कारण मुड़कर विकृत हो जाता है। इसके विपरीत, भारी दर्पण को उसके पूरे पृष्ठ भाग (Back Surface) से सरलतापूर्वक यांत्रिक सहारा दिया जा सकता है。

4. उच्च प्रकाश ग्राही क्षमता एवं सस्ता निर्माण:
दोषरहित विशाल लेंस का ढलाई कार्य अत्यंत कठिन और खर्चीला होता है। दर्पण के निर्माण में केवल एक परावर्तक पृष्ठ को पॉलिश करना होता है। अतः कई मीटर चौड़े विशाल दर्पण (जैसे 10 मीटर व्यास के केक दूरबीन) बनाकर सुदूर मंद आकाशगंगाओं के अत्यंत तीक्ष्ण व चमकीले चित्र प्राप्त किए जा सकते हैं।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

लेंस निर्माता सूत्र में चिन्ह परिपाटी ($R_1, R_2$) का ध्यान न रखना।

Scientific Reality & Correction

उत्तल लेंस हेतु $R_1$ धनात्मक ($+R_1$) तथा $R_2$ ऋणात्मक ($-R_2$) लिया जाता है, जिससे $(1/R_1 - 1/R_2)$ जुड़कर धनात्मक हो जाता है।

Common Misconception

पूर्ण आंतरिक परावर्तन हेतु किसी भी दिशा में प्रकाश जाने की छूट मान लेना।

Scientific Reality & Correction

TIR केवल और केवल तभी हो सकता है जब प्रकाश 'सघन माध्यम से विरल माध्यम' में जा रहा हो, कभी भी विरल से सघन में नहीं।

Common Misconception

खगोलीय दूरदर्शी में अभिदृश्यक को नेत्रिका से छोटा मान लेना।

Scientific Reality & Correction

दूरदर्शी में अभिदृश्यक बड़ा ($f_o$ विशाल) होता है ताकि अधिक प्रकाश एकत्र हो सके; जबकि सूक्ष्मदर्शी में अभिदृश्यक बहुत छोटा ($f_o$ अल्प) होता है।

Common Misconception

सूर्योदय व सूर्यास्त के समय लाल रंग का कारण अपवर्तन बता देना।

Scientific Reality & Correction

सूर्योदय व सूर्यास्त के समय सूर्य का रक्ताभ (लाल) दिखना 'प्रकाश के प्रकीर्णन' (Scattering of Light - $I \propto 1/\lambda^4$) के कारण होता है।

Common Misconception

कांच के लेंस को पानी में डुबोने पर उसकी फोकस दूरी को अपरिवर्तित मानना।

Scientific Reality & Correction

जल में आपेक्षिक अपवर्तनांक $n_g / n_w$ घट जाता है, जिससे लेंस निर्माता सूत्रानुसार लेंस की फोकस दूरी लगभग 4 गुना बढ़ जाती है और क्षमता घट जाती है।

किरण प्रकाशिकी: TIR, लेंस निर्माता सूत्र, प्रिज्म विचलन व दूरदर्शी

किरण प्रकाशिकी: पूर्ण आंतरिक परावर्तन, लेंस निर्माता सूत्र व प्रकाशिक यंत्र1. TIR व प्रिज्म अपवर्तनक्रांतिक कोण व न्यूनतम विचलन• TIR की 2 अनिवार्य शर्तें:1. सघन से विरल माध्यम2. आपतन कोण i > i_c (क्रांतिक)• संबंध: sin(i_c) = 1/nहीरा i_c = 24.4°, ऑप्टिकल फाइबर• प्रिज्म सूत्र:n = sin[(A + D_m)/2] / sin[A/2]• रैले प्रकीर्णन I ∝ 1/λ⁴आकाश नीला, सूर्योदय/सूर्यास्त लाल2. गोलीय पृष्ठ व लेंस सूत्रLens Maker's Formula• एकल गोलीय अपवर्तन सूत्र:n₂/v - n₁/u = (n₂ - n₁)/R• लेंस निर्माता सूत्र (Lens Maker):1/f = (n - 1) [1/R₁ - 1/R₂]कांच लेंस पानी में f ≈ 4 गुना बढ़ती• पतला लेंस सूत्र:1/f = 1/v - 1/u, आवर्धन m = v/u• लेंस क्षमता P = 1/f (m) (Dioptre)संयोजन: P = P₁ + P₂, 1/F = 1/f₁ + 1/f₂3. सूक्ष्मदर्शी व दूरदर्शीआवर्धन एवं किरण आरेख• संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Microscope):अभिदृश्यक छोटा (f_o), नेत्रिका बड़ी (f_e)m = -(v_o / u_o) [1 + D/f_e]• खगोलीय दूरदर्शी (Telescope):अभिदृश्यक बड़ा (f_o), नेत्रिका छोटी (f_e)m = -f_o / f_e (अनंत पर, L = f_o + f_e)• परावर्ती दूरदर्शी की श्रेष्ठता:1. वर्ण विपथन से पूर्ण मुक्त2. गोलीय विपथन मुक्त (परवलयाकार)3. हल्का व विशाल प्रकाशग्राहीबोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Ray Optics Capsule)TIR व फाइबर:सघन से विरल (i > i_c), sin(i_c) = 1/n; ऑप्टिकल फाइबर क्रोड n₁ > क्लैडिंग n₂।लेंस निर्माता सूत्र:1/f = (n - 1) [1/R₁ - 1/R₂]; पानी में कांच के लेंस की f लगभग 4 गुना बढ़ जाती है।परावर्ती दूरदर्शी:दर्पण परावर्तन के कारण वर्ण विपथन व गोलीय विपथन से पूर्ण मुक्त होता है।

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
स्नेल का नियम sin i / sin r = n₂ / n₁; वास्तविक व आभासी गहराई d_app = d / n होती है।
Takeaway 2
पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR) हेतु सघन से विरल तथा i > i_c अनिवार्य है; sin(i_c) = 1/n।
Takeaway 3
ऑप्टिकल फाइबर TIR पर कार्य करता है (क्रोड का अपवर्तनांक n₁ > क्लैडिंग n₂)।
Takeaway 4
एकल गोलीय अपवर्तन सूत्र: n₂/v - n₁/u = (n₂ - n₁)/R होता है।
Takeaway 5
लेंस निर्माता का सूत्र: 1/f = (n - 1) [1/R₁ - 1/R₂]; क्षमता P = 1/f(m) डायोप्टर (D)।
Takeaway 6
प्रिज्म अपवर्तनांक सूत्र n = sin[(A + D_m)/2] / sin[A/2] (न्यूनतम विचलन पर r = A/2)।
Takeaway 7
रैले का प्रकीर्णन नियम I ∝ 1/λ⁴; इसी से आकाश नीला व सूर्योदय/सूर्यास्त लाल दिखता है।
Takeaway 8
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में f_o व f_e दोनों छोटे होते हैं; m = -(v_o/u_o)(1 + D/f_e)।
Takeaway 9
खगोलीय दूरदर्शी में f_o बहुत बड़ा व f_e छोटा होता है; m = -f_o/f_e (सामान्य समायोजन)।
Takeaway 10
परावर्ती दूरदर्शी परवलयाकार दर्पण प्रयुक्त करने से वर्ण विपथन व गोलीय विपथन से पूर्ण मुक्त होता है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की दो आवश्यक शर्तें लिखिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer:
  1. प्रकाश की किरण को सदैव सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर गमन करना चाहिए। 2. सघन माध्यम में आपतन कोण (i) का मान क्रांतिक कोण (i_c) से अधिक होना चाहिए (i > i_c)।

2
लेंस निर्माता का सूत्र (Lens Maker's Formula) लिखिए तथा इसके प्रयुक्त प्रतीकों को स्पष्ट कीजिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: 1/f = (n - 1) [1/R₁ - 1/R₂]। जहाँ f = लेंस की फोकस दूरी, n = लेंस के पदार्थ का माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक, तथा R₁ व R₂ लेंस के दोनों गोलीय पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याएं हैं।
3
खगोलीय दूरदर्शी में अभिदृश्यक लेंस का द्वारक तथा फोकस दूरी बड़ी क्यों रखी जाती है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: ताकि दूर स्थित मंद तारों से अधिक से अधिक प्रकाश एकत्रित हो सके जिससे प्रतिबिंब अत्यंत चमकीला बने और दूरदर्शी की विभेदन क्षमता (Resolving Power) उच्च हो सके, साथ ही आवर्धन m = -f_o/f_e का मान अधिक प्राप्त हो।
4
सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य लाल (रक्ताभ) क्यों दिखाई देता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: रैले के प्रकीर्णन नियमानुसार (I ∝ 1/λ⁴), कम तरंगदैर्ध्य वाला नीला-बैंगनी प्रकाश वायुमंडल में अत्यधिक प्रकीर्णित होकर बिखर जाता है। क्षितिज पर लंबी दूरी तय करने के कारण केवल सर्वाधिक तरंगदैर्ध्य वाला लाल प्रकाश ही न्यूनतम प्रकीर्णित होकर हमारी आँखों तक पहुँच पाता है।
5
परावर्ती दूरदर्शी (Reflecting Telescope) में वर्ण विपथन (Chromatic Aberration) क्यों नहीं होता?
Reveal Answer & Explanation
Answer: क्योंकि परावर्ती दूरदर्शी में अभिदृश्यक के रूप में लेंस के स्थान पर अवतल दर्पण प्रयुक्त होता है। दर्पण द्वारा प्रकाश का परावर्तन होता है, अपवर्तन नहीं; और परावर्तन का नियम सभी रंगों के प्रकाश के लिए बिल्कुल समान रहता है।
Finished Studying This Chapter?
READY TO PRACTICE?

Timed CBT Practice Tests (Exam Simulator)

Put your concepts to the test with official curriculum-aligned Foundation and Advanced practice tests. Get instant accuracy scores, time metrics, and step-by-step verified explanations.