जब दो कोणों के मापों का योग $90^\circ$ होता है, तो ये कोण एक-दूसरे के पूरक कोण कहलाते हैं।
जब दो कोणों के मापों का योग $180^\circ$ होता है, तो ये कोण एक-दूसरे के संपूरक कोण कहलाते हैं।
झारखण्ड शैक्षिक परिषद् (JAC) एवं NCERT कक्षा 7 गणित का पंचम अध्याय "रेखा एवं कोण" (Lines and Angles) ज्यामिति (Geometry) की आधारशिला है। हमारे चारों ओर दिखाई देने वाली हर भौतिक वस्तु, इमारत, पुल, सड़क और कलाकृति सीधी रेखाओं और उनके बीच बनने वाले कोणों से मिलकर बनी है। इस अध्याय में रेखा, रेखाखंड, किरण, कोणों के विशेष युग्म—पूरक कोण (Complementary Angles), संपूरक कोण (Supplementary Angles), आसन्न कोण (Adjacent Angles), रैखिक युग्म (Linear Pair), शीर्षाभिमुख कोण (Vertically Opposite Angles) तथा समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करने वाली तिर्यक रेखा (Transversal) द्वारा निर्मित संगत कोण, एकांतर कोण व अंतः कोणों के वैज्ञानिक गुणधर्मों का गहन अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
🛤️ रेलवे की दोनों पटरियाँ मीलों दूर तक एक-दूसरे से हमेशा समान दूरी पर क्यों रहती हैं और कभी आपस में क्यों नहीं टकरातीं?
🌉 हावड़ा ब्रिज या किसी बड़े रेलवे पुल के लोहे के गर्डर हमेशा त्रिभुजाकार और परस्पर प्रतिच्छेदी रेखाओं के जाल के रूप में ही क्यों डिज़ाइन किए जाते हैं?
✂️ जब कैंची खुलती है, तो आगे के दोनों फलकों (Blades) के बीच का कोण और पीछे के दोनों हत्थों (Handles) के बीच का कोण बिल्कुल बराबर क्यों होता है?
इन सभी वास्तुशिल्पीय, भौतिक और ज्यामितीय चमत्कारों का रहस्य रेखा एवं कोण (Lines and Angles) के सिद्धांतों में निहित है। इस अध्याय को समझकर आप ब्रह्मांड की आकृतियों को गणितीय दृष्टि से देखना और मापना सीख जाएँगे।
स्थापत्य कला (Architecture), सिविल इंजीनियरिंग, रोबोटिक्स, 3D एनीमेशन और यहाँ तक कि बढ़ई द्वारा मेज-कुर्सी बनाने में रेखाओं और कोणों के नियमों का सीधा प्रयोग होता है। यदि दो दीवारों के बीच ठीक $90^\circ$ का कोण (लंबवत) न हो, तो मकान कभी मजबूत नहीं बन सकता। खगोलीय दूरबीन को किसी तारे की ओर मोड़ने के लिए भी कोणों की अत्यधिक सटीक माप की आवश्यकता होती है।
जब दो कोणों के मापों का योग $90^\circ$ होता है, तो ये कोण एक-दूसरे के पूरक कोण कहलाते हैं।
जब दो कोणों के मापों का योग $180^\circ$ होता है, तो ये कोण एक-दूसरे के संपूरक कोण कहलाते हैं।
दो कोण आसन्न कोण कहलाते हैं यदि उनमें निम्नलिखित 3 शर्तें पूरी हों:
ऐसे आसन्न कोण जिनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ परस्पर विपरीत किरणें (एक सीधी रेखा) बनाती हों, रैखिक युग्म कहलाते हैं।
जब दो रेखाएँ एक-दूसरे को किसी बिंदु पर काटती (प्रतिच्छेद करती) हैं, तो आमने-सामने बनने वाले कोण शीर्षाभिमुख कोण कहलाते हैं।
वह रेखा जो दो या दो से अधिक रेखाओं को भिन्न-भिन्न बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करती है, तिर्यक छेदी रेखा कहलाती है। जब एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं को काटती है, तो कुल 8 कोण बनते हैं:
| कोणों का प्रकार | पहचानने की ज्यामितीय आकृति | स्थान / स्थिति |
|---|---|---|
| अंतः कोण (Interior Angles) | दोनों रेखाओं के अंदरूनी भाग में | दोनों रेखाओं के बीच स्थित 4 कोण (जैसे $\angle 3, \angle 4, \angle 5, \angle 6$) |
| बाह्य कोण (Exterior Angles) | दोनों रेखाओं के बाहरी भाग में | ऊपर व नीचे स्थित 4 कोण (जैसे $\angle 1, \angle 2, \angle 7, \angle 8$) |
| संगत कोण (Corresponding Angles) | ‘F’ आकृति जैसी स्थिति | तिर्यक रेखा के एक ही ओर, एक अंतः व एक बाह्य कोण का युग्म |
| एकांतर अंतः कोण (Alternate Interior) | ‘Z’ आकृति जैसी स्थिति | दोनों रेखाओं के अंदर, तिर्यक रेखा के विपरीत ओर स्थित कोण |
| एक ही ओर के अंतः कोण (Co-interior) | ‘C’ या ‘U’ आकृति | दोनों रेखाओं के अंदर, तिर्यक रेखा के एक ही ओर स्थित कोण |
मान लीजिए $\angle 1 = 70^\circ$
1. शीर्षाभिमुख कोण: $\angle 3 = \angle 1 = 70^\circ$
2. रैखिक युग्म: $\angle 2 = 180^\circ - 70^\circ = 110^\circ$
3. शीर्षाभिमुख कोण: $\angle 4 = \angle 2 = 110^\circ$
4. संगत कोण नियम ($l \parallel m$):
$\angle 5 = \angle 1 = 70^\circ$
$\angle 6 = \angle 2 = 110^\circ$
$\angle 7 = \angle 3 = 70^\circ$
$\angle 8 = \angle 4 = 110^\circ$
निष्कर्ष: सभी 8 कोणों में से 4 कोण $70^\circ$ के हैं तथा 4 कोण $110^\circ$ के हैं।
उत्तर: कोणों के मान $70^\circ$ और $110^\circ$ हैं।
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