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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 7 • Mathematics • अध्याय 5
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

रेखाएँ और कोण (Lines and Angles)

झारखण्ड शैक्षिक परिषद् (JAC) एवं NCERT कक्षा 7 गणित का पंचम अध्याय "रेखा एवं कोण" (Lines and Angles) ज्यामिति (Geometry) की आधारशिला है। हमारे चारों ओर दिखाई देने वाली हर भौतिक वस्तु, इमारत, पुल, सड़क और कलाकृति सीधी रेखाओं और उनके बीच बनने वाले कोणों से मिलकर बनी है। इस अध्याय में रेखा, रेखाखंड, किरण, कोणों के विशेष युग्म—पूरक कोण (Complementary Angles), संपूरक कोण (Supplementary Angles), आसन्न कोण (Adjacent Angles), रैखिक युग्म (Linear Pair), शीर्षाभिमुख कोण (Vertically Opposite Angles) तथा समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करने वाली तिर्यक रेखा (Transversal) द्वारा निर्मित संगत कोण, एकांतर कोण व अंतः कोणों के वैज्ञानिक गुणधर्मों का गहन अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

📐 क्या आपने कभी सोचा है?

🛤️ रेलवे की दोनों पटरियाँ मीलों दूर तक एक-दूसरे से हमेशा समान दूरी पर क्यों रहती हैं और कभी आपस में क्यों नहीं टकरातीं?

🌉 हावड़ा ब्रिज या किसी बड़े रेलवे पुल के लोहे के गर्डर हमेशा त्रिभुजाकार और परस्पर प्रतिच्छेदी रेखाओं के जाल के रूप में ही क्यों डिज़ाइन किए जाते हैं?

✂️ जब कैंची खुलती है, तो आगे के दोनों फलकों (Blades) के बीच का कोण और पीछे के दोनों हत्थों (Handles) के बीच का कोण बिल्कुल बराबर क्यों होता है?

इन सभी वास्तुशिल्पीय, भौतिक और ज्यामितीय चमत्कारों का रहस्य रेखा एवं कोण (Lines and Angles) के सिद्धांतों में निहित है। इस अध्याय को समझकर आप ब्रह्मांड की आकृतियों को गणितीय दृष्टि से देखना और मापना सीख जाएँगे।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

स्थापत्य कला (Architecture), सिविल इंजीनियरिंग, रोबोटिक्स, 3D एनीमेशन और यहाँ तक कि बढ़ई द्वारा मेज-कुर्सी बनाने में रेखाओं और कोणों के नियमों का सीधा प्रयोग होता है। यदि दो दीवारों के बीच ठीक $90^\circ$ का कोण (लंबवत) न हो, तो मकान कभी मजबूत नहीं बन सकता। खगोलीय दूरबीन को किसी तारे की ओर मोड़ने के लिए भी कोणों की अत्यधिक सटीक माप की आवश्यकता होती है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • बिंदु (Point), रेखा (Line), रेखाखंड (Line Segment) एवं किरण (Ray) की बुनियादी पहचान।
  • कोण (Angle) की संकल्पना: न्यून कोण ($< 90^\circ$), समकोण ($90^\circ$), अधिक कोण ($> 90^\circ$), सरल कोण ($180^\circ$)।
  • चाँदे (Protractor) की सहायता से कोणों का मापन करना।
  • समीकरणों को हल करने के बुनियादी नियम।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • पूरक कोण (Complementary Angles) की परिभाषा और दो कोणों का योग $90^\circ$ होने पर अज्ञात कोण निकाल सकेंगे।
  • संपूरक कोण (Supplementary Angles) की संकल्पना (योग = $180^\circ$) को समझकर समस्याओं को हल कर सकेंगे।
  • आसन्न कोणों (Adjacent Angles) की तीन अनिवार्य शर्तों की पहचान कर सकेंगे।
  • रैखिक युग्म (Linear Pair) के अभिगृहीत को सिद्ध कर सकेंगे तथा अज्ञात कोण का मान ज्ञात कर सकेंगे।
  • शीर्षाभिमुख कोणों (Vertically Opposite Angles) की समानता का प्रमेय सिद्ध कर सकेंगे।
  • तिर्यक छेदी रेखा (Transversal) द्वारा दो रेखाओं को काटने पर बने 8 कोणों का नामकरण कर सकेंगे।
  • समांतर रेखाओं पर संगत कोण (Corresponding Angles) एवं एकांतर अंतः कोण (Alternate Interior Angles) की समानता के नियम लागू कर सकेंगे।
  • तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों के संपूरक होने के गुणधर्म से अज्ञात कोणों की गणना कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. संबंधित कोणों के विशेष युग्म: पू...
2 2. आसन्न कोण, रैखिक युग्म एवं शीर्ष...
3 3. तिर्यक छेदी रेखा एवं निर्मित कोण...
4 4. समांतर रेखाओं के विशेष ज्यामितीय...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. संबंधित कोणों के विशेष युग्म: पूरक एवं संपूरक कोण (Complementary & Supplementary Angles)

1. पूरक कोण (Complementary Angles)

जब दो कोणों के मापों का योग $90^\circ$ होता है, तो ये कोण एक-दूसरे के पूरक कोण कहलाते हैं।

$$\angle A + \angle B = 90^\circ \implies \angle A \text{ का पूरक } = 90^\circ - \angle A$$ उदाहरण: $30^\circ$ का पूरक कोण = $90^\circ - 30^\circ = 60^\circ$ है।
2. संपूरक कोण (Supplementary Angles)

जब दो कोणों के मापों का योग $180^\circ$ होता है, तो ये कोण एक-दूसरे के संपूरक कोण कहलाते हैं।

$$\angle A + \angle B = 180^\circ \implies \angle A \text{ का संपूरक } = 180^\circ - \angle A$$ उदाहरण: $110^\circ$ का संपूरक कोण = $180^\circ - 110^\circ = 70^\circ$ है।

2. आसन्न कोण, रैखिक युग्म एवं शीर्षाभिमुख कोण (Adjacent, Linear Pair & Vertically Opposite)

1. आसन्न कोण (Adjacent Angles)

दो कोण आसन्न कोण कहलाते हैं यदि उनमें निम्नलिखित 3 शर्तें पूरी हों:

  • उनका एक उभयनिष्ठ शीर्ष (Common Vertex) हो।
  • उनकी एक उभयनिष्ठ भुजा (Common Arm) हो।
  • उनकी जो भुजाएं उभयनिष्ठ नहीं हैं, वे उभयनिष्ठ भुजा के विपरीत ओर स्थित हों।
2. रैखिक युग्म (Linear Pair)

ऐसे आसन्न कोण जिनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ परस्पर विपरीत किरणें (एक सीधी रेखा) बनाती हों, रैखिक युग्म कहलाते हैं।

अभिगृहीत: एक रैखिक युग्म के कोणों का योग सदैव $180^\circ$ (संपूरक) होता है।
$$\angle 1 + \angle 2 = 180^\circ$$
3. शीर्षाभिमुख कोण (Vertically Opposite Angles)

जब दो रेखाएँ एक-दूसरे को किसी बिंदु पर काटती (प्रतिच्छेद करती) हैं, तो आमने-सामने बनने वाले कोण शीर्षाभिमुख कोण कहलाते हैं।

महत्वपूर्ण प्रमेय: दो प्रतिच्छेदी रेखाओं द्वारा बने शीर्षाभिमुख कोण माप में परस्पर बराबर होते हैं।
$$\angle 1 = \angle 3 \quad \text{तथा} \quad \angle 2 = \angle 4$$

3. तिर्यक छेदी रेखा एवं निर्मित कोण (Transversal & Angles Formed)

तिर्यक रेखा (Transversal) की परिभाषा

वह रेखा जो दो या दो से अधिक रेखाओं को भिन्न-भिन्न बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करती है, तिर्यक छेदी रेखा कहलाती है। जब एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं को काटती है, तो कुल 8 कोण बनते हैं:

कोणों का प्रकार पहचानने की ज्यामितीय आकृति स्थान / स्थिति
अंतः कोण (Interior Angles) दोनों रेखाओं के अंदरूनी भाग में दोनों रेखाओं के बीच स्थित 4 कोण (जैसे $\angle 3, \angle 4, \angle 5, \angle 6$)
बाह्य कोण (Exterior Angles) दोनों रेखाओं के बाहरी भाग में ऊपर व नीचे स्थित 4 कोण (जैसे $\angle 1, \angle 2, \angle 7, \angle 8$)
संगत कोण (Corresponding Angles) ‘F’ आकृति जैसी स्थिति तिर्यक रेखा के एक ही ओर, एक अंतः व एक बाह्य कोण का युग्म
एकांतर अंतः कोण (Alternate Interior) ‘Z’ आकृति जैसी स्थिति दोनों रेखाओं के अंदर, तिर्यक रेखा के विपरीत ओर स्थित कोण
एक ही ओर के अंतः कोण (Co-interior) ‘C’ या ‘U’ आकृति दोनों रेखाओं के अंदर, तिर्यक रेखा के एक ही ओर स्थित कोण

4. समांतर रेखाओं के विशेष ज्यामितीय नियम (Parallel Lines & Transversal Axioms)

यदि दो समांतर रेखाओं ($l \parallel m$) को एक तिर्यक रेखा काटे, तो:
  1. संगत कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है:
    $$\angle 1 = \angle 5, \quad \angle 2 = \angle 6, \quad \angle 4 = \angle 8, \quad \angle 3 = \angle 7$$
  2. एकांतर अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है (‘Z’ नियम):
    $$\angle 3 = \angle 5, \quad \angle 4 = \angle 6$$
  3. तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोण संपूरक (योग = $180^\circ$) होते हैं (‘C’ नियम):
    $$\angle 3 + \angle 6 = 180^\circ, \quad \angle 4 + \angle 5 = 180^\circ$$
विलोम (Converse) नियम: यदि किसी तिर्यक रेखा द्वारा काटने पर संगत कोण बराबर हों, या एकांतर अंतः कोण बराबर हों, या एक ही ओर के अंतः कोणों का योग $180^\circ$ हो, तो वे दोनों रेखाएं अनिवार्य रूप से समांतर होती हैं।

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

पूरक कोण योग सूत्र
$$\angle A + \angle B = 90^\circ \implies \angle B = 90^\circ - \angle A$$
दो पूरक कोणों का योग सदैव एक समकोण (90°) होता है।
संपूरक कोण एवं रैखिक युग्म सूत्र
$$\angle 1 + \angle 2 = 180^\circ \implies \angle 2 = 180^\circ - \angle 1$$
एक सीधी रेखा पर बने आसन्न कोणों का योग 180° होता है।
शीर्षाभिमुख कोण समानता नियम
$$\angle \text{VOP}_1 = \angle \text{VOP}_2$$
दो प्रतिच्छेदी रेखाओं के आमने-सामने के कोण बराबर होते हैं।
समांतर रेखाओं पर एकांतर कोण नियम
$$l \parallel m \implies \angle \text{Alt-Int}_1 = \angle \text{Alt-Int}_2$$
Z आकृति वाले एकांतर अंतः कोण परस्पर बराबर होते हैं।
सह-अंतः कोण (Co-interior Angles) योग सूत्र
$$\angle \text{Int}_L + \angle \text{Int}_R = 180^\circ$$
तिर्यक रेखा के एक ही ओर स्थित दोनों अंतः कोणों का योग 180° होता है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
वह कोण ज्ञात कीजिए जो अपने पूरक कोण के बराबर है।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
मान लीजिए: अभीष्ट कोण की माप = $x^\circ$
चूँकि यह कोण अपने पूरक कोण के बराबर है, अतः इसका पूरक कोण भी = $x^\circ$ होगा।
पूरक कोणों के योग सूत्रानुसार:
$$x + x = 90^\circ$$
$$2x = 90^\circ$$
$$x = \frac{90}{2} = 45^\circ$$
उत्तर: वह कोण $45^\circ$ है।
उदाहरण 2
वह कोण ज्ञात कीजिए जो अपने संपूरक कोण का दुगुना है।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
मान लीजिए: कोण की माप = $y^\circ$
इसका संपूरक कोण = $(180 - y)^\circ$
प्रश्न की शर्त के अनुसार, कोण अपने संपूरक का दुगुना है:
$$y = 2(180 - y)$$
$$y = 360 - 2y$$
पक्षांतरण करने पर:
$$y + 2y = 360$$
$$3y = 360$$
$$y = \frac{360}{3} = 120^\circ$$
उत्तर: अभीष्ट कोण $120^\circ$ है (और इसका संपूरक $60^\circ$ है)।
उदाहरण 3
दो रेखाएं AB और CD बिंदु O पर प्रतिच्छेद करती हैं। यदि $\angle AOC = 50^\circ$ है, तो $\angle BOD, \angle AOD$ और $\angle BOC$ का मान ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
(i) $\angle BOD$ का मान:
$\angle AOC$ और $\angle BOD$ शीर्षाभिमुख कोण (Vertically Opposite Angles) हैं।
अतः $\angle BOD = \angle AOC = 50^\circ$।

(ii) $\angle AOD$ का मान:
रेखा CD पर बिंदु O पर किरण OA स्थित है, अतः $\angle AOC$ और $\angle AOD$ एक रैखिक युग्म बनाते हैं:
$$\angle AOC + \angle AOD = 180^\circ$$
$$50^\circ + \angle AOD = 180^\circ$$
$$\angle AOD = 180^\circ - 50^\circ = 130^\circ$$

(iii) $\angle BOC$ का मान:
$\angle BOC$ कोण $\angle AOD$ का शीर्षाभिमुख कोण है:
$$\angle BOC = \angle AOD = 130^\circ$$
उत्तर: $\angle BOD = 50^\circ, \angle AOD = 130^\circ, \angle BOC = 130^\circ$
उदाहरण 4
दिए गए चित्र में दो समांतर रेखाओं $l$ और $m$ को एक तिर्यक रेखा $t$ काटती है। यदि एक कोण $70^\circ$ है, तो शेष सभी 7 कोणों के मान ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

मान लीजिए $\angle 1 = 70^\circ$
1. शीर्षाभिमुख कोण: $\angle 3 = \angle 1 = 70^\circ$
2. रैखिक युग्म: $\angle 2 = 180^\circ - 70^\circ = 110^\circ$
3. शीर्षाभिमुख कोण: $\angle 4 = \angle 2 = 110^\circ$
4. संगत कोण नियम ($l \parallel m$):
$\angle 5 = \angle 1 = 70^\circ$
$\angle 6 = \angle 2 = 110^\circ$
$\angle 7 = \angle 3 = 70^\circ$
$\angle 8 = \angle 4 = 110^\circ$
निष्कर्ष: सभी 8 कोणों में से 4 कोण $70^\circ$ के हैं तथा 4 कोण $110^\circ$ के हैं।
उत्तर: कोणों के मान $70^\circ$ और $110^\circ$ हैं।

उदाहरण 5
यदि तिर्यक रेखा के एक ही ओर के दो अंतः कोण $(2x - 10)^\circ$ और $(3x + 20)^\circ$ हों तथा दोनों रेखाएं समांतर हों, तो $x$ का मान ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
समांतर रेखाओं के लिए तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोण संपूरक (योग = $180^\circ$) होते हैं:
$$(2x - 10) + (3x + 20) = 180^\circ$$
$$2x + 3x - 10 + 20 = 180$$
$$5x + 10 = 180$$
$$5x = 180 - 10 = 170$$
$$x = \frac{170}{5} = 34$$
कोणों की जाँच:
पहला कोण = $2(34) - 10 = 68 - 10 = 58^\circ$
दूसरा कोण = $3(34) + 20 = 102 + 20 = 122^\circ$
योग = $58^\circ + 122^\circ = 180^\circ$ (सत्य)।
उत्तर: $x = 34$

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पूरक (90°) और संपूरक (180°) कोणों के योग मान में भ्रमित हो जाना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

याद रखने की सरल ट्रिक: अंग्रेजी वर्णमाला में C (Complementary) पहले आता है तो 90°, और S (Supplementary) बाद में आता है तो 180°। हिंदी में पूरक (2 अक्षर) = 90°, संपूरक (3 अक्षर) = 180°।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

किन्हीं भी दो रेखाओं पर एकांतर और संगत कोणों को बराबर मान लेना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

संगत और एकांतर कोण केवल और केवल तभी बराबर होते हैं जब दोनों मूल रेखाएं परस्पर समांतर (Parallel) हों। असमांतर रेखाओं पर ये कोण बराबर नहीं होते।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों को भी बराबर मान लेना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

एक ही ओर के अंतः कोण बराबर नहीं होते (जब तक कि प्रत्येक 90° न हो), बल्कि उनका योग 180° (संपूरक) होता है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

समांतर रेखाएँ एवं तिर्यक छेदी रेखा द्वारा निर्मित 8 कोण (Parallel Lines & Transversal) l m (l ∥ m) t (तिर्यक रेखा) 1 2 3 4 5 6 7 8 संगत कोण (पीले): ∠1 = ∠5, ∠4 = ∠8 | एकांतर कोण (नीले): ∠3 = ∠5, ∠4 = ∠6 | एक ही ओर के अंतः कोण: ∠3 + ∠6 = 180°

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
जब दो कोणों का योग $90^\circ$ होता है, तो वे परस्पर पूरक कोण कहलाते हैं।
मुख्य बिंदु 2
जब दो कोणों का योग $180^\circ$ होता है, तो वे परस्पर संपूरक कोण कहलाते हैं।
मुख्य बिंदु 3
आसन्न कोणों में एक उभयनिष्ठ शीर्ष और एक उभयनिष्ठ भुजा होती है।
मुख्य बिंदु 4
रैखिक युग्म के दोनों आसन्न कोणों का योग सदैव $180^\circ$ (संपूरक) होता है।
मुख्य बिंदु 5
दो रेखाओं के प्रतिच्छेद करने पर बने शीर्षाभिमुख कोण आपस में बराबर होते हैं।
मुख्य बिंदु 6
तिर्यक रेखा द्वारा दो रेखाओं को काटने पर 4 अंतः कोण और 4 बाह्य कोण बनते हैं।
मुख्य बिंदु 7
यदि दो रेखाएं समांतर हों, तो संगत कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है (‘F’ आकार)।
मुख्य बिंदु 8
समांतर रेखाओं पर एकांतर अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है (‘Z’ आकार)।
मुख्य बिंदु 9
समांतर रेखाओं पर तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों का योग $180^\circ$ होता है (‘C’ आकार)।
मुख्य बिंदु 10
यदि संगत कोण या एकांतर कोण बराबर हों, तो वे रेखाएं अनिवार्यतः समांतर होती हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
$65^\circ$ के कोण का पूरक कोण क्या होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: $25^\circ$
पूरक कोणों का योग $90^\circ$ होता है। अतः पूरक कोण = $90^\circ - 65^\circ = 25^\circ$।
2
क्या दो अधिक कोण (Obtuse Angles) एक-दूसरे के संपूरक हो सकते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: नहीं
अधिक कोण $90^\circ$ से बड़ा होता है। दो अधिक कोणों का योग सदैव $180^\circ$ से अधिक होगा, अतः वे संपूरक नहीं हो सकते।
3
यदि एक रैखिक युग्म का एक कोण $80^\circ$ है, तो दूसरा कोण कितना होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: $100^\circ$
रैखिक युग्म का योग $180^\circ$ होता है। अतः दूसरा कोण = $180^\circ - 80^\circ = 100^\circ$।
4
दो समांतर रेखाओं को एक तिर्यक रेखा काटती है। यदि एक एकांतर अंतः कोण $55^\circ$ है, तो दूसरा एकांतर अंतः कोण कितना होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: $55^\circ$
समांतर रेखाओं पर एकांतर अंतः कोण परस्पर समान (बराबर) होते हैं।
5
शीर्षाभिमुख कोणों का क्या संबंध होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: वे सदैव परस्पर बराबर होते हैं।
दो प्रतिच्छेदी रेखाओं के आमने-सामने बनने वाले शीर्षाभिमुख कोण माप में सदैव बराबर होते हैं।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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