हाशिए पर स्थित समुदायों ने अपने साथ होने वाले अन्याय के विरुद्ध संविधान के मौलिक अधिकारों का दो तरह से उपयोग किया है—पहला, सरकार को अपने बनाए वचनों पर अडिग रहने को बाध्य किया, और दूसरा, नए कानून बनाने का दबाव डाला:
- अनुच्छेद 15: भारत के किसी भी नागरिक के साथ धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। सिनेमाघरों, होटलों, कुओं, और सार्वजनिक परिवहन में सभी को समान प्रवेश का अधिकार है।
- अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का अंत): छुआछूत का किसी भी रूप में आचरण पूर्णतः प्रतिबंधित और कानूनन दंडनीय अपराध है। अब कोई भी किसी दलित को मंदिर जाने, पढ़ाई करने या सार्वजनिक नल से पानी भरने से नहीं रोक सकता।
- दलित (Dalit) शब्द का अर्थ: "दलित" का अर्थ है "दबाया गया" या "टूटा हुआ"। इस शब्द को चुनकर इस वर्ग ने यह रेखांकित किया कि उनका पिछड़ापन स्वाभाविक नहीं, बल्कि सामाजिक भेदभाव द्वारा थोपा गया है।