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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 8 • Social Science • अध्याय 19
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

हाशियाकरण से निपटना (Confronting Marginalisation)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 नागरिक शास्त्र का छठा अध्याय "हाशियाकरण से निपटना" (Confronting Marginalisation) हाशिए पर धकेले गए शोषित वर्गों द्वारा अपने आत्मसम्मान, अधिकारों और समानता की पुनःप्राप्ति हेतु किए गए संवैधानिक व कानूनी संघर्षों की प्रेरणादायी गाथा प्रस्तुत करता है। दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों ने कभी भी अपनी दयनीय स्थिति को भाग्य मानकर स्वीकार नहीं किया, बल्कि भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों (विशेषकर अनुच्छेद 15 और 17) को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। इस अध्याय में यह सविस्तार उद्घाटित किया गया है कि राज्य वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कैसे नीतियां बनाता है—आरक्षण नीति (Reservation Policy) का सामाजिक न्याय दर्शन, न्यूनतम अंक अर्हता, और छात्रवृत्तियाँ। अध्याय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Prevention of Atrocities Act, 1989) की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इसके तहत गैर-दलितों द्वारा किए जाने वाले अमानवीय कृत्यों पर कठोर दंडात्मक प्रावधान (जैसे कबीर पंथी रथनम का ऐतिहासिक केस), सिर पर मैला ढोने की अमानवीय प्रथा (Manual Scavenging) पर 1993 और 2013 के कानूनी प्रतिबंध व पुनर्वास अभियान, तथा सी. के. जानू जैसे आदिवासी कार्यकर्ताओं द्वारा 1989 के कानून के आधार पर गैर-आदिवासियों द्वारा छीनी गई जमीनों की वापसी की मांग का विस्तृत, झारखण्ड-उन्मुख और परीक्षा-सटीक विश्लेषण संकलित है।

⚡ एक 20 वर्षीय दलित इंजीनियरिंग छात्र रथनम ने जब मंदिर के पुजारी के पैर धोने का गंदा पानी पीने से इनकार किया, तो पूरे गांव ने उसका हुक्का-पानी बंद कर दिया—फिर उसने 1989 के किस जादुई कानून से पूरे सामंती तंत्र को घुटनों पर ला दिया?

क्या आप सोच सकते हैं कि आजाद भारत में किसी इंसान को दूसरे इंसानों का मल अपने सिर पर ढोने के लिए मजबूर किया जाए, और जब वह मना करे तो उसे गांव से निकाल दिया जाए? सदियों तक जाति और नस्ल के नाम पर दमन सहने वाले दलितों और आदिवासियों ने कहा—"बस, अब और नहीं!" उन्होंने संविधान की किताबों को उठाया और अदालत के दरवाजे खटखटा दिए। डॉ. अंबेडकर के सपनों का भारत बनाने के लिए कौन-कौन से कानून बने? जब सरकार आदिवासियों की जमीन उद्योगपतियों को देती है, तो आदिवासी किस कानून के तहत सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर देते हैं? आइए जानें हाशियाकरण को मात देने वाली इस महाक्रांति को!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह अध्याय सिखाता है कि कानून केवल कागजों पर लिखी इबारत नहीं, बल्कि कमजोरों का सबसे शक्तिशाली कवच है। झारखण्ड के सीएनटी एक्ट (CNT Act - 1908) और एसपीटी एक्ट (SPT Act - 1949) के साथ-साथ 1989 का अत्याचार निवारण कानून राज्य के आदिवासियों और दलितों की आत्मरक्षा की रीढ़ है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • हाशियाकरण (Marginalisation) की बुनियादी समझ।
  • संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 17 में उल्लिखित मौलिक अधिकार।
  • भारत में जाति प्रथा और अस्पृश्यता की ऐतिहासिक बुराइयाँ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • हाशिए के समूहों द्वारा मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 15, 17, 21) के प्रयोग के तरीकों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • सकारात्मक भेदभाव (Affirmative Action) और आरक्षण नीति के सामाजिक न्याय दर्शन को समझ सकेंगे।
  • अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धाराओं और ऐतिहासिक महत्व की व्याख्या कर सकेंगे।
  • सिर पर मैला ढोने की प्रथा (Manual Scavenging) के उन्मूलन हेतु बने कानूनों और सफाई कर्मचारी आंदोलन की समीक्षा कर सकेंगे।
  • आदिवासी अधिकारों के संरक्षण में 1989 के कानून और सी. के. जानू के संघर्ष का मूल्यांकन कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. मौलिक अधिकारों का प्रयोग (Invoki...
2 2. सामाजिक न्याय को प्रोत्साहन: आरक...
3 3. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजात...
4 4. मैला ढोने की प्रथा पर रोक और आदि...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. मौलिक अधिकारों का प्रयोग (Invoking Fundamental Rights)

हाशिए पर स्थित समुदायों ने अपने साथ होने वाले अन्याय के विरुद्ध संविधान के मौलिक अधिकारों का दो तरह से उपयोग किया है—पहला, सरकार को अपने बनाए वचनों पर अडिग रहने को बाध्य किया, और दूसरा, नए कानून बनाने का दबाव डाला:

  • अनुच्छेद 15: भारत के किसी भी नागरिक के साथ धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। सिनेमाघरों, होटलों, कुओं, और सार्वजनिक परिवहन में सभी को समान प्रवेश का अधिकार है।
  • अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का अंत): छुआछूत का किसी भी रूप में आचरण पूर्णतः प्रतिबंधित और कानूनन दंडनीय अपराध है। अब कोई भी किसी दलित को मंदिर जाने, पढ़ाई करने या सार्वजनिक नल से पानी भरने से नहीं रोक सकता।
  • दलित (Dalit) शब्द का अर्थ: "दलित" का अर्थ है "दबाया गया" या "टूटा हुआ"। इस शब्द को चुनकर इस वर्ग ने यह रेखांकित किया कि उनका पिछड़ापन स्वाभाविक नहीं, बल्कि सामाजिक भेदभाव द्वारा थोपा गया है।

2. सामाजिक न्याय को प्रोत्साहन: आरक्षण नीति (Promoting Social Justice & Reservation)

संविधान केवल समानता की घोषणा नहीं करता, बल्कि ऐतिहासिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए ठोस सकारात्मक कदम उठाता है:

योजना / नीतिसंवैधानिक आधारकार्यप्रणाली व उद्देश्य
आरक्षण नीति (Reservation)अनुच्छेद 15(4) एवं 16(4)सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थानों (मेडिकल, इंजीनियरिंग, विश्वविद्यालय) में SC, ST और OBC के लिए सीटें आरक्षित करना, ताकि सदियों से वंचित वर्गों को सत्ता व शासन में उचित प्रतिनिधित्व मिले।
कट-ऑफ अंक अर्हतासकारात्मक भेदभाव (Affirmative Action)आरक्षित वर्गों के लिए न्यूनतम योग्यता अंकों में विशेष रियायत, ताकि संसाधनों के अभाव में पढ़े छात्रों को बराबरी का मंच मिल सके।
विशेष छात्रवृत्तियाँ व छात्रावासकल्याणकारी राज्य के नीति-निर्देशक तत्वदलित और आदिवासी विद्यार्थियों के लिए मुफ्त आवास, भोजन, किताबें और आर्थिक सहायता प्रदान करना।

3. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989

1970 और 1980 के दशक में जब दलितों ने अपने कानूनी अधिकारों के लिए आवाज उठाई, तो दबंग जातियों ने उन पर हिंसक हमले शुरू कर दिए। इसके जवाब में संसद ने 1989 का यह ऐतिहासिक कठोर कानून पारित किया:

  • अपराधों का वर्गीकरण: (1) शारीरिक व मानसिक रूप से घिनौने कृत्य (जैसे मैला या अखाद्य पदार्थ खाने पर मजबूर करना, चेहरे पर कालिख पोतना, नग्न घुमाना), (2) संपत्ति से बेदखली (दलित/आदिवासी की जमीन पर अवैध कब्जा करना), तथा (3) महिलाओं के शीलभंग व यौन उत्पीड़न के विरुद्ध कठोर गैर-जमानती सजा।
  • रथनम का ऐतिहासिक केस: तमिलनाडु के मेलावलव गांव में रथनम (इंजीनियरिंग छात्र) ने मंदिर उत्सव में पुजारियों के पैर धोने का गंदा पानी पीने की परंपरा से इनकार कर दिया। गांव के दबंगों ने उसके परिवार का बहिष्कार किया और झोपड़ी जला दी। रथनम ने 1989 के एक्ट के तहत केस दर्ज कराया और पूरे गांव के सामंती अत्याचार को उजागर कर सुरक्षा हासिल की।

4. मैला ढोने की प्रथा पर रोक और आदिवासी जमीनों की सुरक्षा (Scavenging & Adivasi Land Rights)

दो अन्य ऐतिहासिक संघर्षों ने हाशिए के समुदायों को नए कानूनी हथियार दिए:

  • सिर पर मैला ढोने की प्रथा (Manual Scavenging): इंसानी मल को सिर पर टोकरियों में ढोना मानव गरिमा पर सबसे कलंककारी आघात था। सफाई कर्मचारी आंदोलन और अन्य संगठनों की जनहित याचिका (PIL) के दबाव में 1993 में कानून बना, और 2013 में हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम पारित कर इसे पूर्णतः प्रतिबंधित और दंडनीय बनाया गया।
  • आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा (सी. के. जानू का आंदोलन): आदिवासी कार्यकर्ता सी. के. जानू ने रेखांकित किया कि 1989 के कानून के अनुसार गैर-आदिवासी लोग आदिवासियों की जमीन नहीं खरीद सकते। यदि किसी सरकार या निजी कंपनी ने अवैध रूप से जमीन छीनी है, तो 1989 के कानून के तहत उन्हें दंडित कर आदिवासियों को उनकी जमीन वापस लौटाई जानी चाहिए। झारखण्ड में सीएनटी (CNT) एक्ट भी इसी सिद्धांत की रक्षा करता है।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

अस्पृश्यता का पूर्ण उन्मूलन
अनुच्छेद 17 (भारतीय संविधान, भाग III)
छुआछूत का किसी भी रूप में आचरण गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध है।
धर्म, जाति व लिंग के आधार पर भेदभाव निषेध
अनुच्छेद 15 (सार्वजनिक स्थलों पर पूर्ण समानता)
दुकानों, भोजनालयों, कुओं और घाटों पर किसी भी नागरिक के प्रवेश पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम
The Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989
दलितों और आदिवासियों पर होने वाले सामाजिक, शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कानून।
हाथ से मैला उठाने की प्रथा पर प्रतिबंध कानून
1993 अधिनियम एवं 2013 का संशोधित पुनर्वास अधिनियम
मानव मल को हाथ से साफ करने और सूखे शौचालयों के निर्माण को पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया।
झारखण्ड आदिवासी भूमि संरक्षण
छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act - 1908) एवं SPT Act (1949)
आदिवासी भूमि का गैर-आदिवासियों को हस्तांतरण कानूनन प्रतिबंधित।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 17 हाशिए के समुदायों (विशेषकर दलितों) को किस प्रकार सुरक्षा प्रदान करते हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: ये दोनों अनुच्छेद दलितों और वंचितों के आत्मसम्मान के संवैधानिक स्तंभ हैं:

  1. अनुच्छेद 15: यह स्पष्ट करता है कि भारत के किसी भी नागरिक के साथ धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। यह सार्वजनिक कुओं, तालाबों, मंदिरों, होटलों और रास्तों के उपयोग में पूर्ण बराबरी की गारंटी देता है।
  2. अनुच्छेद 17: यह ऐतिहासिक रूप से चली आ रही छुआछूत (अस्पृश्यता) को जड़ से समाप्त करता है। इसके तहत किसी दलित को अछूत कहकर बुलाना, उसका सामाजिक बहिष्कार करना या मंदिर प्रवेश से रोकना दंडनीय अपराध घोषित किया गया है।
उदाहरण 2
प्रश्न 2: अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 क्यों बनाया गया? इसकी मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1989 का कानून बनने की पृष्ठभूमि: 1970 और 1980 के दशक में जब दलित और आदिवासी समुदायों ने अपने अधिकारों, मजदूरी और जमीन के लिए आवाज उठाई, तो पारंपरिक सामंती और दबंग जातियों ने उन्हें दबाने के लिए क्रूर हिंसा और सामाजिक बहिष्कार का सहारा लिया। दलित-आदिवासी संगठनों के भारी दबाव में संसद ने 1989 में यह सख्त कानून बनाया। मुख्य विशेषताएं:

  1. शारीरिक और मानसिक अपमान के घिनौने कृत्यों (जैसे अखाद्य पदार्थ खिलाना, नग्न घुमाना) को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना गया।
  2. दलितों या आदिवासियों की पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जा करने या उन्हें बेदखल करने वालों पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया।
  3. दलित और आदिवासी महिलाओं पर होने वाले यौन हमलों और अत्याचारों के लिए विशेष त्वरित अदालतों (Special Courts) की व्यवस्था की गई।
उदाहरण 3
प्रश्न 3: तमिलनाडु के रथनम के मामले ने 1989 के अत्याचार निवारण कानून के महत्व को कैसे सिद्ध किया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: रथनम का मामला:

  1. घटना: रथनम एक 20 वर्षीय दलित छात्र था जो इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। गांव के स्थानीय मंदिर उत्सव में एक कुप्रथा थी कि दलित व्यक्ति सभी पुजारियों के पैर धोए और उस गंदे पानी से स्नान करे। रथनम ने इस अपमानजनक प्रथा को मानने से साफ इनकार कर दिया।
  2. प्रतिशोध: नाराज दबंग जातियों ने रथनम के परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया, पड़ोसियों को उनसे बात करने से रोका और अंततः उनकी झोपड़ी में आग लगा दी।
  3. कानून का उपयोग: रथनम ने 1989 के एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून के तहत पुलिस में मामला दर्ज कराया। इस कानून की कठोरता के कारण मीडिया का ध्यान आकर्षित हुआ, पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी और दबंगों को झुकना पड़ा। इसने साबित किया कि यह कानून कमजोरों की ढाल है।
उदाहरण 4
प्रश्न 4: "सिर पर मैला ढोने की प्रथा" (Manual Scavenging) क्या है और इसे समाप्त करने के लिए क्या कानूनी कदम उठाए गए?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: सिर पर मैला ढोने की प्रथा: यह भारत की सर्वाधिक अमानवीय और घृणित सामाजिक कुप्रथा थी, जिसमें अछूत मानी जाने वाली जातियों (मुख्यतः वाल्मीकि, हेला आदि) के लोगों को सूखे शौचालयों से मानव मल को झाड़ू व टीन की तश्तरियों से उठाकर सिर पर टोकरी रखकर दूर फेंकने पर मजबूर किया जाता था। उठाए गए कानूनी कदम:

  1. 1993 में सरकार ने "रोजगार और शुष्क शौचालय (निर्माण) प्रतिषेध अधिनियम" बनाया।
  2. 2003 में सफाई कर्मचारी आंदोलन ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की जिसके बाद अदालतों ने सरकारों को कड़ी फटकार लगाई।
  3. 2013 में संसद ने नया कठोर कानून "हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम" पारित किया, जिसके तहत इस काम में किसी को लगाना पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया और पीड़ितों को आर्थिक मुआवजा व वैकल्पिक रोजगार देने का निर्देश दिया गया।
उदाहरण 5
प्रश्न 5: आदिवासी अधिकारों के संदर्भ में सामाजिक कार्यकर्ता सी. के. जानू का क्या दृष्टिकोण है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: सी. के. जानू और आदिवासी भूमि अधिकार:

  1. सी. के. जानू ने स्पष्ट किया कि 1989 के अत्याचार निवारण कानून का उपयोग केवल शारीरिक हमलों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि आदिवासी जमीनों की रक्षा के लिए भी किया जा सकता है।
  2. कानून कहता है कि किसी आदिवासी की पारंपरिक जमीन को कोई भी गैर-आदिवासी न तो खरीद सकता है और न ही छीन सकता है।
  3. जानू का तर्क है कि जो राज्य सरकारें या उद्योगपति आदिवासियों को उनकी जमीनों से बेदखल कर रहे हैं, वे स्वयं 1989 के कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। अतः आदिवासियों को अपनी छीनी गई जमीनों पर पुनः कब्जा पाने का पूर्ण नैतिक और कानूनी अधिकार है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

छात्र अक्सर सोचते हैं कि आरक्षण केवल राजनीतिक लाभ के लिए दिया जाता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आरक्षण का मुख्य उद्देश्य सदियों से शिक्षा और सत्ता से वंचित रहे शोषित वर्गों को ऐतिहासिक अन्याय से उबारकर निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में समान भागीदारी देना (सामाजिक न्याय) है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह भ्रम होना कि 1989 का कानून केवल शारीरिक मारपीट के मामलों में लागू होता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

यह कानून शारीरिक हिंसा के साथ-साथ जातिसूचक गालियाँ देने, सामाजिक बहिष्कार करने, जमीन छीनने और महिलाओं के शीलभंग जैसे सभी अपराधों पर समान रूप से लागू होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह मान लेना कि सिर पर मैला ढोने की प्रथा आज भारत में पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

कानूनी रूप से यह पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन आज भी सीवरों और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक मैनुअल सफाई की घटनाएं सामने आती हैं जिसके खिलाफ सफाई कर्मचारी आंदोलन लगातार संघर्षरत है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

हाशियाकरण से मुकाबला: संवैधानिक एवं कानूनी ढाल समानता, गरिमा और सामाजिक न्याय के लिए ऐतिहासिक सुरक्षा तंत्र संवैधानिक मौलिक अधिकार • अनुच्छेद 15: धर्म, जाति, लिंग पर भेदभाव का पूर्ण निषेध • समान पहुँच • अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता (छुआछूत) का अंत आचरण गैर-कानूनी व दंडनीय न्यायिक गारंटी: अनुच्छेद 32 SC/ST अत्याचार निवारण (1989) • घिनौने कृत्यों पर रोक: अपमानजनक पदार्थ खिलाना, नग्न घुमाने पर कड़ी कैद • जमीन पर अवैध कब्जा: दलित/आदिवासी भूमि बेदखली कानूनन गैर-जमानती अपराध रथनम केस: ऐतिहासिक मिसाल मैला प्रथा पर प्रतिबंध कानून • 1993 व 2013 अधिनियम: सिर पर मैला ढोने पर पूर्ण रोक शुष्क शौचालयों का उन्मूलन • पुनर्वास व सहायता: सफाई कर्मचारी आंदोलन (PIL) वैकल्पिक आजीविका व मुआवजा मानवीय गरिमा की पुनर्स्थापना सकारात्मक भेदभाव एवं सामाजिक न्याय: आरक्षण नीति (Reservation Policy) • उच्च शिक्षण संस्थानों व सरकारी नौकरियों में SC, ST व OBC हेतु सीटों का आरक्षण। • विशेष रियायती कट-ऑफ अंक, छात्रवृत्तियाँ और सरकारी छात्रावासों की व्यवस्था। • उद्देश्य: ऐतिहासिक वंचना को दूर कर देश की सत्ता और निर्णय प्रक्रियाओं में साझीदारी सुनिश्चित करना।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. हाशिए पर स्थित शोषित वर्गों ने अपनी स्थिति को भाग्य नहीं माना, बल्कि समानता और न्याय के लिए सतत संघर्ष किया।
मुख्य बिंदु 2
  1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव को पूर्णतः रोकता है।
मुख्य बिंदु 3
  1. अनुच्छेद 17 द्वारा छुआछूत (अस्पृश्यता) को कानूनी दंडनीय अपराध घोषित कर सामाजिक समानता स्थापित की गई।
मुख्य बिंदु 4
  1. "दलित" शब्द का अर्थ "दबाया गया" है, जो यह दर्शाता है कि उनका पिछड़ापन स्वाभाविक नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय की देन है।
मुख्य बिंदु 5
  1. सरकारों द्वारा चलाई जाने वाली आरक्षण नीति (Reservation) वंचित वर्गों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व देती है।
मुख्य बिंदु 6
  1. 1989 का अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम दलितों और आदिवासियों पर होने वाली हिंसा के विरुद्ध अत्यंत कठोर कानून है।
मुख्य बिंदु 7
  1. तमिलनाडु के छात्र रथनम ने मंदिर उत्सव में अपमानजनक कुप्रथा का विरोध कर 1989 के कानून के तहत दबंगों के खिलाफ ऐतिहासिक संघर्ष किया।
मुख्य बिंदु 8
  1. सिर पर मैला ढोने की अमानवीय प्रथा को 1993 और 2013 के कानूनों द्वारा पूरी तरह प्रतिबंधित कर कर्मियों के पुनर्वास का आदेश दिया गया।
मुख्य बिंदु 9
  1. सफाई कर्मचारी आंदोलन जैसे संगठनों ने जनहित याचिकाओं (PIL) के माध्यम से मैला ढोने की प्रथा के विरुद्ध न्यायपालिका में लड़ाई लड़ी।
मुख्य बिंदु 10
  1. आदिवासी कार्यकर्ता सी. के. जानू ने 1989 के कानून का प्रयोग कर गैर-आदिवासियों द्वारा अवैध रूप से छीनी गई जमीनों की वापसी की मांग उठाई।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद द्वारा छुआछूत (अस्पृश्यता) का पूर्ण उन्मूलन किया गया है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: अनुच्छेद 17
अनुच्छेद 17 छुआछूत का किसी भी रूप में आचरण पूर्णतः प्रतिबंधित और कानूनन दंडनीय अपराध घोषित करता है।
2
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 1989 में
1989 में यह कठोर कानून दलितों और आदिवासियों को सामाजिक अपमान और हिंसा से सुरक्षा देने हेतु बनाया गया।
3
शब्द "दलित" का शाब्दिक अर्थ क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: दबाया गया या टूटा हुआ (Broken / Crushed)
दलित शब्द का अर्थ दबाया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनका पिछड़ापन समाज द्वारा थोपा गया अन्याय है।
4
सिर पर मैला ढोने की प्रथा के पूर्ण प्रतिबंध और पुनर्वास हेतु संसद ने किस वर्ष नया संशोधित अधिनियम पारित किया?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 2013 में
2013 में हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम पारित किया गया।
5
सी. के. जानू मुख्य रूप से किस वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: आदिवासियों के भूमि अधिकारों हेतु
सी. के. जानू ने 1989 के कानून के आधार पर गैर-आदिवासियों द्वारा छीनी गई आदिवासी जमीनों की वापसी हेतु आंदोलन चलाया।
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अध्याय 1: कैसे, कब और कहाँ (How, When and Where) अध्याय 2: व्यापार से साम्राज्य तक (From Trade to Territory) अध्याय 3: ग्रामीण क्षेत्र पर शासन चलाना (Ruling the Countryside) अध्याय 4: आदिवासी, दीकु और एक स्वर्ण युग की कल्पना (Tribals, Dikus and the Vision of a Golden Age) अध्याय 5: जब जनता बगावत करती है (1857 और उसके बाद) (When People Rebel) अध्याय 6: देशी जनता को सभ्य बनाना, राष्ट्र को शिक्षित करना (Civilising the Native, Educating the Nation) अध्याय 7: महिलाएं, जाति एवं सुधार (Women, Caste and Reform) अध्याय 8: राष्ट्रीय आंदोलन का संघटन: 1870 के दशक से 1947 तक (The Making of the National Movement: 1870s-1947) अध्याय 9: संसाधन (Resources) (Resources) अध्याय 10: भूमि, मृदा, जल, प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन संसाधन (Land, Soil, Water, Natural Vegetation and Wildlife Resources) अध्याय 11: कृषि (Agriculture) अध्याय 12: उद्योग (Industries) (Industries) अध्याय 13: मानव संसाधन (Human Resources) (Human Resources) अध्याय 14: भारतीय संविधान (The Indian Constitution) (The Indian Constitution) अध्याय 15: धर्मनिरपेक्षता की समझ (Understanding Secularism) अध्याय 16: संसद तथा कानूनों का निर्माण (Parliament and the Making of Laws) अध्याय 17: न्यायपालिका (Judiciary) (Judiciary) अध्याय 18: हाशियाकरण की समझ (Understanding Marginalisation) अध्याय 19: हाशियाकरण से निपटना (Confronting Marginalisation) अध्याय 20: जनसुविधाएं (Public Facilities) (Public Facilities) अध्याय 21: कानून और सामाजिक न्याय (Law and Social Justice)

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