सन् 1600 में इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने ईस्ट इंडिया कंपनी को पूरब के साथ व्यापार करने का एकाधिकार (Royal Charter) दिया। इसका अर्थ था कि इंग्लैंड की कोई अन्य व्यापारिक कंपनी इस कंपनी से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकती थी।
यूरोपीय कंपनियों की परस्पर प्रतिस्पर्धा:
किंतु यह चार्टर अन्य यूरोपीय देशों को नहीं रोक सकता था। पुर्तगाली पहले ही गोवा में स्थापित हो चुके थे (वास्को डी गामा ने 1498 में भारत की समुद्री खोज की थी), डच और फ्रांसीसी भी मैदान में आ गए।
- सभी कंपनियाँ एक जैसी वस्तुएँ—बारीक सूती कपड़ा, रेशम, काली मिर्च, लौंग, इलायची और दालचीनी खरीदने में रुचि रखती थीं।
- प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कीमतें बढ़ गईं और मुनाफा घटने लगा। अतः कंपनियों ने एक-दूसरे के जहाजों को डुबोना, रास्ते रोकना और व्यापारिक चौकियों की किलेबंदी (Fortification) शुरू कर दी।
बंगाल में व्यापार का आरंभ:
1651 में हुगली नदी के किनारे पहली ब्रिटिश फैक्ट्री शुरू हुई। 1717 में मुगल बादशाह फर्रुखसियर से कंपनी को बिना चुंगी चुकाए (Duty-Free) व्यापार करने का फरमान मिला। किंतु कंपनी के निजी अफसर भी कर चुकाए बिना व्यापार करने लगे, जिससे बंगाल को भारी राजस्व हानि हुई और नवाबों के साथ टकराव शुरू हुआ।