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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 8 • Social Science • अध्याय 2
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

व्यापार से साम्राज्य तक (From Trade to Territory)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 इतिहास का दूसरा अध्याय "व्यापार से साम्राज्य तक: कंपनी की सत्ता स्थापित होती है" (From Trade to Territory: The Company Establishes Power) एक व्यापारिक कंपनी के एक विशाल साम्राज्य के संप्रभु राजनीतिक शासक बनने की अविश्वसनीय और क्रूर गाथा है। 1600 में महारानी एलिजाबेथ प्रथम से व्यापारिक एकाधिकार (Charter) लेकर आई ईस्ट इंडिया कंपनी किस प्रकार भारतीय राजाओं की आपसी फूट का लाभ उठाकर शासक बन बैठी, इसका विस्तृत अध्ययन यहाँ प्रस्तुत है। इस अध्याय में औरंगजेब की 1707 में मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य का विघटन, यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों (पुर्तगाली, डच, फ्रांसीसी, ब्रिटिश) की प्रतिस्पर्धा, 1757 का ऐतिहासिक प्लासी का युद्ध (मीर जाफर का विश्वासघात और रॉबर्ट क्लाइव की कूटनीति), 1764 का बक्सर का युद्ध तथा 1765 में बंगाल की दीवानी (Diwani Rights) की प्राप्ति, सहायक संधि (Subsidiary Alliance: लॉर्ड वेलेजली), टीपू सुल्तान (मैसूर का शेर) का अदम्य प्रतिरोध और 4 आंग्ल-मैसूर युद्ध, मराठों का पतन और आंग्ल-मराठा युद्ध, लॉर्ड हेस्टिंग्स की सर्वोच्चता की नीति (Paramountcy), लॉर्ड डलहौजी का कुख्यात विलय नीति / व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse) तथा कंपनी की नई सेना व प्रशासनिक ढाँचे का परीक्षा-उन्मुख, आलोचनात्मक व प्रामाणिक विश्लेषण संकलित है।

⚔️ एक विदेशी मसाला कंपनी जिसके पास केवल तराजू था, उसने तलवार थामकर 30 करोड़ की आबादी वाले पूरे भारत को अपना गुलाम कैसे बना लिया?

कल्पना कीजिए कि आज कोई बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) भारत में व्यापार करने आए और 50 वर्षों के भीतर अपनी खुद की सेना बनाकर देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को अपनी उंगलियों पर नचाने लगे! ईस्ट इंडिया कंपनी ने 18वीं शताब्दी में ठीक यही किया था। 1757 में प्लासी के मैदान में केवल 3,000 ब्रिटिश सैनिकों ने सिराजुद्दौला की 50,000 की विशाल सेना को कैसे हरा दिया? 1765 में जब मुगल बादशाह ने कंपनी को बंगाल की दीवानी सौंपी, तो कंपनी रातोंरात भारत की सबसे अमीर सत्ता कैसे बन गई? और टीपू सुल्तान के पास ऐसा कौन सा यांत्रिक बाघ (Mechanical Tiger) था जो ब्रिटिश सैनिकों के गले पर झपटता था? आइए, व्यापार से साम्राज्य तक की इस रोमांचक और त्रासद ऐतिहासिक दास्तान को जानें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह अध्याय भारतीय उपमहाद्वीप पर ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रभुत्व की नींव को उजागर करता है। झारखण्ड के रामगढ़, पलामू और छोटानागपुर क्षेत्र में कंपनी के शुरुआती सैनिक अभियानों और राजस्व शोषण की जड़ों को समझने के लिए प्लासी और बक्सर के युद्धों का ज्ञान अनिवार्य है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • मुगल साम्राज्य का पतन (औरंगजेब की 1707 में मृत्यु के उपरांत)।
  • यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन (वास्को डी गामा 1498) का सामान्य ज्ञान।
  • व्यापारिक एकाधिकार और चुंगी (Customs Duty) की मूल अवधारणा।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक संगठन से राजनीतिक सत्ता में रूपांतरण के चरणों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • प्लासी के युद्ध (1757) और बक्सर के युद्ध (1764) के कारणों और दूरगामी परिणामों का मूल्यांकन कर सकेंगे।
  • 1765 में बंगाल की दीवानी मिलने के आर्थिक व राजनीतिक प्रभावों को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • लॉर्ड वेलेजली की सहायक संधि (Subsidiary Alliance) तथा लॉर्ड डलहौजी के विलय सिद्धांत (Doctrine of Lapse) की कार्यप्रणाली समझ सकेंगे।
  • टीपू सुल्तान (मैसूर) तथा मराठों के प्रतिरोध और उनके पतन के कारणों की समीक्षा कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. व्यापारिक एकाधिकार, यूरोपीय प्रत...
2 2. प्लासी का युद्ध (1757), बक्सर का...
3 3. कंपनी के प्रसार की साम्राज्यवादी...
4 4. क्षेत्रीय प्रतिरोध: मैसूर के शेर...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. व्यापारिक एकाधिकार, यूरोपीय प्रतिस्पर्धा एवं बंगाल में कंपनी का विस्तार

सन् 1600 में इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने ईस्ट इंडिया कंपनी को पूरब के साथ व्यापार करने का एकाधिकार (Royal Charter) दिया। इसका अर्थ था कि इंग्लैंड की कोई अन्य व्यापारिक कंपनी इस कंपनी से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकती थी।

यूरोपीय कंपनियों की परस्पर प्रतिस्पर्धा:

किंतु यह चार्टर अन्य यूरोपीय देशों को नहीं रोक सकता था। पुर्तगाली पहले ही गोवा में स्थापित हो चुके थे (वास्को डी गामा ने 1498 में भारत की समुद्री खोज की थी), डच और फ्रांसीसी भी मैदान में आ गए।

  • सभी कंपनियाँ एक जैसी वस्तुएँ—बारीक सूती कपड़ा, रेशम, काली मिर्च, लौंग, इलायची और दालचीनी खरीदने में रुचि रखती थीं।
  • प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कीमतें बढ़ गईं और मुनाफा घटने लगा। अतः कंपनियों ने एक-दूसरे के जहाजों को डुबोना, रास्ते रोकना और व्यापारिक चौकियों की किलेबंदी (Fortification) शुरू कर दी।

बंगाल में व्यापार का आरंभ:

1651 में हुगली नदी के किनारे पहली ब्रिटिश फैक्ट्री शुरू हुई। 1717 में मुगल बादशाह फर्रुखसियर से कंपनी को बिना चुंगी चुकाए (Duty-Free) व्यापार करने का फरमान मिला। किंतु कंपनी के निजी अफसर भी कर चुकाए बिना व्यापार करने लगे, जिससे बंगाल को भारी राजस्व हानि हुई और नवाबों के साथ टकराव शुरू हुआ।

2. प्लासी का युद्ध (1757), बक्सर का युद्ध (1764) एवं दीवानी की प्राप्ति

A. प्लासी का युद्ध (23 जून 1757):

अलीवर्दी खान की मृत्यु के बाद सिराजुद्दौला बंगाल के नवाब बने। उन्होंने कंपनी को किलेबंदी रोकने, राजनीतिक मामलों में दखल न देने और राजस्व चुकाने का कड़ा आदेश दिया। जब बात नहीं बनी, तो नवाब ने कलकत्ता के कासिम बाजार की फैक्ट्री पर कब्जा कर लिया।

प्लासी में रॉबर्ट क्लाइव का विश्वासघात:

मद्रास से रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में सैनिक पहुँचे। क्लाइव ने नवाब के सेनापति मीर जाफर को नवाब बनाने का लालच देकर अपनी ओर मिला लिया। प्लासी के मैदान में मीर जाफर की टुकड़ियों ने युद्ध में भाग ही नहीं लिया। सिराजुद्दौला पराजित हुए और उन्हें मार डाला गया।

प्लासी का युद्ध भारत में ब्रिटिश राजनीतिक सत्ता की पहली बड़ी जीत थी!

B. बक्सर का युद्ध (1764) एवं कठपुतली नवाब:

मीर जाफर के बाद मीर कासिम नवाब बना। जब मीर कासिम ने कंपनी के हस्तक्षेप का विरोध किया, तो 1764 में बक्सर का युद्ध हुआ। मीर कासिम, अवध के नवाब शुजाउद्दौला और मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना को अंग्रेजों ने हेक्टर मुनरो के नेतृत्व में हरा दिया।

C. 1765: बंगाल की दीवानी (Diwani Rights):

दीवानी का युगांतरकारी प्रभाव:

1765 में मुगल बादशाह ने कंपनी को बंगाल प्रांत का दीवान (मुख्य राजस्व प्रशासक) नियुक्त कर दिया। अब कंपनी को ब्रिटेन से सोना-चाँदी लाने की आवश्यकता नहीं रही; बंगाल के विशाल राजस्व से ही वह भारतीय माल खरीदती थी और अपनी सेना का खर्च चलाती थी!

3. कंपनी के प्रसार की साम्राज्यवादी नीतियाँ: सहायक संधि एवं व्यपगत सिद्धांत

A. लॉर्ड वेलेजली की सहायक संधि (Subsidiary Alliance - 1798-1805):

इस व्यवस्था के अंतर्गत भारतीय शासकों को अपनी स्वतंत्र सेना रखने की अनुमति नहीं थी। उन्हें कंपनी की सेना (सहायक सेना) की सुरक्षा स्वीकार करनी पड़ती थी और इसके रखरखाव का खर्च उठाना पड़ता था।

  • यदि कोई शासक खर्च चुकाने में असमर्थ होता, तो उसका राज्य या क्षेत्र जुर्माने के रूप में छीन लिया जाता था।
  • सबसे पहले हैदराबाद के निजाम (1798) और अवध के नवाब (1801) के बड़े इलाके इसी बहाने छीने गए।
  • रियासतों के दरबार में ब्रिटिश रेजिडेंट (Resident) बैठाए गए जो आंतरिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप करते थे।

B. लॉर्ड हेस्टिंग्स की सर्वोच्चता की नीति (Claim to Paramountcy - 1813-1823):

कंपनी का दावा था कि उसकी सत्ता सर्वोच्च है, इसलिए वह किसी भी भारतीय रियासत पर कब्जा करने या उसे अधिग्रहण करने की धमकी देने का अधिकार रखती है। कित्तूर (कर्नाटक) की रानी चेनम्मा ने इसके विरुद्ध हथियार उठाए।

C. लॉर्ड डलहौजी का विलय सिद्धांत / व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse - 1848-1856):

व्यपगत सिद्धांत का नियम:

यदि किसी रियासत के शासक की मृत्यु बिना किसी प्राकृतिक पुरुष वारिस (Natural Male Heir) के हो जाए, तो उसका राज्य कंपनी के साम्राज्य में मिला लिया जाएगा (दत्तक पुत्र को उत्तराधिकारी नहीं माना जाएगा)।

हड़पे गए प्रमुख राज्य: सतारा (1848), संबलपुर (1850), उदयपुर (1852), नागपुर (1853) तथा झाँसी (1854)। 1856 में अवध को कुशासन (Misgovernance) का झूठा आरोप लगाकर हड़प लिया गया।

4. क्षेत्रीय प्रतिरोध: मैसूर के शेर (टीपू सुल्तान), मराठा युद्ध एवं नई प्रशासनिक व्यवस्था

A. मैसूर का अदम्य प्रतिरोध: हैदर अली एवं टीपू सुल्तान:

मैसूर शक्तिशाली शासकों—हैदर अली (1761-1782) और उनके प्रतापी पुत्र टीपू सुल्तान (1782-1799) के नेतृत्व में मालाबार तट के लाभदायक व्यापार को नियंत्रित करता था।

  • टीपू ने 1785 में चंदन, काली मिर्च और इलायची के निर्यात पर रोक लगा दी और फ्रांसीसी विशेषज्ञों की मदद से अपनी सेना का आधुनिकीकरण किया।
  • अंग्रेजों और मैसूर के बीच चार युद्ध हुए (1767-69, 1780-84, 1790-92, 1799)।
  • चौथा आंग्ल-मैसूर युद्ध (1799): श्रीरंगपट्टनम की रक्षा करते हुए टीपू सुल्तान वीरगति को प्राप्त हुए। मैसूर पर सहायक संधि थोप दी गई।

B. मराठों का दमन (आंग्ल-मराठा युद्ध):

1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई में मराठों का दिल्ली पर शासन का सपना टूट गया। तीन आंग्ल-मराठा युद्धों (1775-82, 1803-05, 1817-19) के बाद 1819 में पेशवा को हटाकर बिठूर भेज दिया गया और विंध्य के दक्षिण का संपूर्ण भूभाग कंपनी के नियंत्रण में आ गया।

C. कंपनी की नई फौज एवं सिविल सेवा:

लॉर्ड वारेन हेस्टिंग्स ने न्यायपालिका में फौजदारी व दीवानी अदालतें बनाईं। सिपाही (Sepoy) सेना में यूरोपीय प्रशिक्षण, ड्रिल और आधुनिक बंदूकों (Muskets व Matchlocks) का प्रवेश हुआ। कलेक्टर जिले का प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी बन गया।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

प्लासी का युद्ध (Battle of Plassey)
23 जून 1757: रॉबर्ट क्लाइव vs सिराजुद्दौला (मीर जाफर का विश्वासघात)
बंगाल पर अंग्रेजों की पहली निर्णायक विजय, जिसने भारत विजय का मार्ग प्रशस्त किया।
बक्सर का युद्ध एवं इलाहाबाद की संधि
बक्सर युद्ध (1764) → इलाहाबाद संधि (1765): बंगाल की दीवानी कंपनी को
कंपनी व्यापारिक शक्ति से पूर्ण भू-राजस्व शासक बन गई।
सहायक संधि प्रणाली (Subsidiary Alliance)
लॉर्ड वेलेजली (1798): कंपनी सेना का खर्च दो, वरना राज्य का हिस्सा खोओ
हैदराबाद (1798) और अवध (1801) सबसे पहले इस जाल में फँसे।
व्यपगत का सिद्धांत / विलय नीति (Doctrine of Lapse)
लॉर्ड डलहौजी (1848): कोई प्राकृतिक पुरुष वारिस नहीं = राज्य का विलय
सतारा (1848), झाँसी (1854), नागपुर (1853) को इसी नियम से हड़पा गया।
आंग्ल-मैसूर संघर्ष (Anglo-Mysore Wars)
4 युद्ध (1767-1799) → 1799: श्रीरंगपट्टनम में टीपू सुल्तान की शहादत
मैसूर के पतन के बाद दक्षिण भारत में अंग्रेजों की सर्वोच्चता स्थापित हुई।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्लासी के युद्ध (1757) के प्रमुख कारण और परिणाम क्या थे?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\nप्रमुख कारण:\n1. कंपनी का व्यापारिक फरमान का दुरुपयोग: कंपनी के निजी अफसर बिना चुंगी चुकाए व्यापार कर रहे थे जिससे बंगाल को भारी आर्थिक हानि हो रही थी।\n2. कलकत्ता की अनधिकृत किलेबंदी: सिराजुद्दौला के मना करने के बावजूद कंपनी ने फोर्ट विलियम की किलेबंदी जारी रखी।\n3. नवाब के राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप: कंपनी नवाब के विरोधियों को शरण दे रही थी।\n\nप्रमुख परिणाम:\n1. सिराजुद्दौला की पराजय और मृत्यु: सेनापति मीर जाफर के विश्वासघात के कारण नवाब पराजित हुए।\n2. मीर जाफर कठपुतली नवाब बना: कंपनी को 24 परगना की जमींदारी और अकूत धन मिला।\n3. राजनीतिक प्रभुत्व की शुरुआत: इस विजय ने कंपनी को केवल व्यापारिक संस्थान से भारत की राजनीतिक शक्ति में बदल दिया।
उदाहरण 2
1765 में बंगाल की दीवानी मिलने से ईस्ट इंडिया कंपनी को क्या लाभ हुआ?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\n1765 में मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय ने कंपनी को बंगाल का दीवान (राजस्व प्रशासक) नियुक्त किया। इससे कंपनी को निम्नलिखित युगांतरकारी लाभ हुए:\n1. भारत की दौलत से भारत की ही खरीद: इससे पहले कंपनी को भारतीय वस्तुएँ (रेशम, मसाले) खरीदने के लिए ब्रिटेन से सोना-चाँदी लाना पड़ता था। अब बंगाल के विशाल भू-राजस्व से ही वस्तुएँ खरीदी जाने लगीं।\n2. सेना और किलों का खर्च: बंगाल के राजस्व से कंपनी अपनी विशाल फौज का खर्च, किलेबंदी और प्रशासनिक व्यय आसानी से उठाने लगी।\n3. ब्रिटेन को अकूत मुनाफा: भारत के धन से ही ब्रिटेन का औद्योगीकरण समृद्ध हुआ और भारत की संपत्ति का निरंतर दोहन (Drain of Wealth) शुरू हुआ।
उदाहरण 3
लॉर्ड वेलेजली की सहायक संधि (Subsidiary Alliance) की मुख्य शर्तें क्या थीं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\nसहायक संधि की मुख्य शर्तें निम्नलिखित थीं:\n1. स्वतंत्र सेना की समाप्ति: संधि स्वीकार करने वाले भारतीय शासक को अपनी निजी सेना भंग करनी पड़ती थी।\n2. ब्रिटिश सेना का खर्च: सुरक्षा के बदले शासक को कंपनी की एक सहायक सैनिक टुकड़ी अपने यहाँ रखनी पड़ती थी और उसके भरण-पोषण का खर्च या जमीन का टुकड़ा देना पड़ता था।\n3. दरबार में ब्रिटिश रेजिडेंट: राजा के दरबार में एक ब्रिटिश अफसर (रेजिडेंट) बैठता था जो राज्य के आंतरिक मामलों में दखल देता था।\n4. विदेशी नीति पर पाबंदी: शासक बिना कंपनी की अनुमति के किसी अन्य राज्य से युद्ध, संधि या विदेशी कर्मचारी नहीं रख सकता था।
उदाहरण 4
लॉर्ड डलहौजी के व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse) के तहत किन-किन रियासतों का विलय किया गया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\nव्यपगत सिद्धांत के अनुसार यदि किसी रियासत के राजा की मृत्यु बिना किसी प्राकृतिक पुत्र वारिस के हो जाती, तो उसका दत्तक पुत्र (Adopted Son) गद्दी का हकदार नहीं होता था और राज्य कंपनी में मिला लिया जाता था।\nइसके तहत हड़पी गई प्रमुख रियासतें:\n1. सतारा (1848)\n2. संबलपुर (1850)\n3. उदयपुर (1852)\n4. नागपुर (1853)\n5. झाँसी (1854) - रानी लक्ष्मीबाई के दत्तक पुत्र दामोदर राव को उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया गया।\n6. अवध (1856) - यहाँ कुशासन का झूठा आरोप लगाकर नवाब वाजिद अली शाह को अपदस्थ कर दिया गया।
उदाहरण 5
टीपू सुल्तान को "मैसूर का शेर" क्यों कहा जाता है और अंग्रेजों के साथ उनके संघर्ष का क्या परिणाम हुआ?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\nटीपू सुल्तान अपनी असाधारण वीरता, स्वतंत्र चेतना और अंग्रेजों के प्रति अटूट विरोध के कारण "मैसूर का शेर" कहलाए।\nसंघर्ष के कारण और परिणाम:\n1. व्यापार पर नियंत्रण: टीपू ने 1785 में अपने बंदरगाहों से चंदन, काली मिर्च के ब्रिटिश व्यापार पर रोक लगा दी और स्थानीय व्यापारियों को भी कंपनी से व्यापार करने से मना किया।\n2. सेना का आधुनिकीकरण: फ्रांसीसी विशेषज्ञों की मदद से उन्होंने अपनी सेना, तोपखाने और रॉकेट तकनीक का आधुनिकीकरण किया।\n3. चार आंग्ल-मैसूर युद्ध: अंग्रेजों, मराठों और निजाम के संयुक्त गठबंधनों का टीपू ने डटकर मुकाबला किया।\n4. शहादत (1799): 4 मई 1799 को चौथे आंग्ल-मैसूर युद्ध में अपनी राजधानी श्रीरंगपट्टनम की रक्षा करते हुए टीपू सुल्तान वीरगति को प्राप्त हुए।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

प्लासी के युद्ध और बक्सर के युद्ध को एक ही मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्लासी का युद्ध 1757 में सिराजुद्दौला के विरुद्ध हुआ था, जबकि बक्सर का युद्ध 1764 में मीर कासिम, अवध के नवाब और मुगल बादशाह की संयुक्त सेना के विरुद्ध हुआ था।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सहायक संधि और व्यपगत सिद्धांत को एक ही गवर्नर जनरल से जोड़ देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सहायक संधि (Subsidiary Alliance) लॉर्ड वेलेजली ने चलाई थी, जबकि व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse) लॉर्ड डलहौजी ने चलाया था।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि कंपनी भारत में शुरू से ही शासन करने आई थी।

सही वैज्ञानिक तथ्य

कंपनी केवल व्यापार करने आई थी; भारतीय राजाओं की आपसी फूट, लालच और सैन्य कमजोरियों को देखकर उसने धीरे-धीरे साम्राज्यवादी सत्ता हथिया ली।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

व्यापार से साम्राज्य तक (Trade to Territory): सत्ता विस्तार का कालक्रम A. निर्णायक युद्ध एवं संधियाँ (1757-1799) 1757: प्लासी का युद्ध (Battle of Plassey) क्लाइव vs सिराजुद्दौला • मीर जाफर का विश्वासघात • कंपनी की पहली राजनीतिक जीत 1764: बक्सर का युद्ध (Battle of Buxar) मीर कासिम + अवध + मुगल सम्राट हारे • 1765 में बंगाल की दीवानी मिली 1799: चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध (टीपू की शहादत) श्रीरंगपट्टनम की रक्षा में टीपू सुल्तान वीरगति • दक्षिण भारत में कंपनी का प्रभुत्व 1817-1819: तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध मराठा शक्ति का पूर्ण दमन • पेशवा पद समाप्त • पूरे मध्य व पश्चिम भारत पर नियंत्रण B. साम्राज्य विस्तार के दो प्रमुख औजार 1. सहायक संधि (Subsidiary Alliance) - लॉर्ड वेलेजली • भारतीय शासक निजी सेना नहीं रख सकते थे • ब्रिटिश सेना का भारी खर्च उठाना अनिवार्य था • खर्च न देने पर राज्य का इलाका छीन लिया जाता था शिकार: हैदराबाद (1798), अवध (1801), मैसूर (1799) 2. व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse) - लॉर्ड डलहौजी • बिना प्राकृतिक पुत्र वारिस के राजा की मृत्यु पर राज्य का विलय • दत्तक पुत्र को वैध उत्तराधिकारी मानने से सीधा इनकार • 1856 में अवध को "कुशासन" के बहाने हड़पा गया शिकार: सतारा (1848), झाँसी (1854), नागपुर (1853)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. सन् 1600 में महारानी एलिजाबेथ प्रथम के चार्टर द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी को पूरब के साथ व्यापार का एकाधिकार मिला।
मुख्य बिंदु 2
  1. पुर्तगालियों (1498 वास्को डी गामा), डच, फ्रांसीसी और अंग्रेजों के बीच मसालों व कपड़ों के व्यापार की हिंसक प्रतिस्पर्धा हुई।
मुख्य बिंदु 3
  1. 1717 के शाही फरमान का कंपनी अफसरों द्वारा निजी व्यापार में दुरुपयोग बंगाल के नवाबों से टकराव का मुख्य कारण बना।
मुख्य बिंदु 4
  1. 1757 में प्लासी के युद्ध में रॉबर्ट क्लाइव ने मीर जाफर के विश्वासघात से सिराजुद्दौला को हराकर राजनीतिक सत्ता की नींव रखी।
मुख्य बिंदु 5
  1. 1764 में बक्सर के युद्ध में पराजय के बाद 1765 में कंपनी को बंगाल की दीवानी मिली, जिससे भारतीय राजस्व से व्यापारिक खरीद शुरू हुई।
मुख्य बिंदु 6
  1. लॉर्ड वेलेजली की सहायक संधि (Subsidiary Alliance) ने भारतीय शासकों की सेना भंग कर उन पर ब्रिटिश नियंत्रण लाद दिया।
मुख्य बिंदु 7
  1. मैसूर के हैदर अली और टीपू सुल्तान ने डटकर मुकाबला किया; 1799 में श्रीरंगपट्टनम की रक्षा में टीपू वीरगति को प्राप्त हुए।
मुख्य बिंदु 8
  1. तीन आंग्ल-मराठा युद्धों के बाद 1819 में पेशवा को हटाकर कंपनी ने मराठा साम्राज्य पर पूर्ण कब्जा कर लिया।
मुख्य बिंदु 9
  1. लॉर्ड डलहौजी ने व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse) के तहत सतारा, संबलपुर, झाँसी और नागपुर को ब्रिटिश राज में मिलाया।
मुख्य बिंदु 10
  1. कलेक्टर और आधुनिक हथियारों से लैस अनुशासित सिपाही सेना कंपनी के प्रशासनिक नियंत्रण के दो मुख्य आधार बने।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
प्लासी का युद्ध किस वर्ष हुआ था और इसमें अंग्रेजों का नेतृत्व किसने किया था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 23 जून 1757 को; अंग्रेजों का नेतृत्व रॉबर्ट क्लाइव ने किया था।
मीर जाफर के विश्वासघात के कारण नवाब सिराजुद्दौला पराजित हुए।
2
1765 में कंपनी को बंगाल की दीवानी मिलने का क्या महत्व था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कंपनी को बंगाल के विशाल भू-राजस्व पर सीधा नियंत्रण मिल गया।
अब कंपनी ब्रिटेन से सोना लाए बिना बंगाल के राजस्व से ही भारतीय माल खरीदने लगी।
3
सहायक संधि (Subsidiary Alliance) किस गवर्नर जनरल ने लागू की थी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: लॉर्ड वेलेजली (Lord Wellesley) ने।
1798 में हैदराबाद के निजाम ने सबसे पहले यह संधि स्वीकार की।
4
व्यपगत का सिद्धांत (Doctrine of Lapse) क्या था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: यदि किसी शासक की मृत्यु बिना किसी प्राकृतिक पुरुष वारिस के हो, तो उसका राज्य हड़प लिया जाता था।
लॉर्ड डलहौजी ने इस नीति से झाँसी, सतारा और नागपुर का विलय किया।
5
टीपू सुल्तान किस राज्य के शासक थे और उनकी शहादत कब हुई?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: मैसूर के शासक; 4 मई 1799 को चौथे आंग्ल-मैसूर युद्ध में श्रीरंगपट्टनम में।
उन्हें अदम्य साहस के कारण "मैसूर का शेर" कहा जाता है।
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कक्षा 8 Social Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: कैसे, कब और कहाँ (How, When and Where) अध्याय 2: व्यापार से साम्राज्य तक (From Trade to Territory) अध्याय 3: ग्रामीण क्षेत्र पर शासन चलाना (Ruling the Countryside) अध्याय 4: आदिवासी, दीकु और एक स्वर्ण युग की कल्पना (Tribals, Dikus and the Vision of a Golden Age) अध्याय 5: जब जनता बगावत करती है (1857 और उसके बाद) (When People Rebel) अध्याय 6: देशी जनता को सभ्य बनाना, राष्ट्र को शिक्षित करना (Civilising the Native, Educating the Nation) अध्याय 7: महिलाएं, जाति एवं सुधार (Women, Caste and Reform) अध्याय 8: राष्ट्रीय आंदोलन का संघटन: 1870 के दशक से 1947 तक (The Making of the National Movement: 1870s-1947) अध्याय 9: संसाधन (Resources) (Resources) अध्याय 10: भूमि, मृदा, जल, प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन संसाधन (Land, Soil, Water, Natural Vegetation and Wildlife Resources) अध्याय 11: कृषि (Agriculture) अध्याय 12: उद्योग (Industries) (Industries) अध्याय 13: मानव संसाधन (Human Resources) (Human Resources) अध्याय 14: भारतीय संविधान (The Indian Constitution) (The Indian Constitution) अध्याय 15: धर्मनिरपेक्षता की समझ (Understanding Secularism) अध्याय 16: संसद तथा कानूनों का निर्माण (Parliament and the Making of Laws) अध्याय 17: न्यायपालिका (Judiciary) (Judiciary) अध्याय 18: हाशियाकरण की समझ (Understanding Marginalisation) अध्याय 19: हाशियाकरण से निपटना (Confronting Marginalisation) अध्याय 20: जनसुविधाएं (Public Facilities) (Public Facilities) अध्याय 21: कानून और सामाजिक न्याय (Law and Social Justice)

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