एक समय था जब इतिहास को केवल तारीखों का पर्याय (Synonym of Dates) माना जाता था—राजा कब गद्दी पर बैठा, कब युद्ध हुआ, कब संधि हुई। यह इतिहास का एक संकीर्ण दृष्टिकोण था।
आधुनिक इतिहास का दृष्टिकोण:
आधुनिक इतिहास केवल "क्या हुआ" तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात की पड़ताल करता है कि चीजें पहले कैसी थीं और उनमें क्या-क्या बदलाव आए।
- प्रक्रियाएँ बनाम निश्चित तारीखें: भारत में लोगों ने चाय पीना किसी एक दिन शुरू नहीं किया था; यह स्वाद धीरे-धीरे विकसित हुआ। इसी प्रकार ब्रिटिश शासन की स्थापना, राष्ट्रीय आंदोलन का उभार या आर्थिक नीतियाँ किसी एक तारीख को घटित नहीं हुईं, बल्कि ये दशकों लंबी प्रक्रियाएँ (Long Processes) थीं।
- तारीखें महत्वपूर्ण क्यों बनती हैं? कोई तारीख अपने आप में महत्वपूर्ण नहीं होती; वह इसलिए महत्वपूर्ण बनती है क्योंकि हम किसी खास घटना (जैसे 1857 का विद्रोह, 1947 की स्वतंत्रता) को केंद्रीय मानकर इतिहास बुनते हैं। जब अध्ययन का केंद्र बदलता है (जैसे आम जनता या आदिवासियों का इतिहास), तो महत्वपूर्ण तारीखें भी बदल जाती हैं।