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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 8 • Social Science • अध्याय 10
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

भूमि, मृदा, जल, प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन संसाधन (Land, Soil, Water, Natural Vegetation and Wildlife Resources)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 भूगोल का दूसरा अध्याय "भूमि, मृदा, जल, प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन संसाधन" (Land, Soil, Water, Natural Vegetation and Wildlife Resources) पृथ्वी के जीवमंडल (Biosphere) के पाँच मूलभूत प्राकृतिक संसाधनों का समग्र भौगोलिक अध्ययन है। विश्व के विभिन्न भागों में जीवन की गुणवत्ता और जनसंख्या वितरण इन्हीं संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करता है। इस अध्याय में भूमि उपयोग (Land Use: कृषि, वानिकी, खनन, आवास), साझा संपत्ति संसाधन (Common Property Resources), भूस्खलन (Landslides) के कारण व न्यूनीकरण प्रविधियाँ, मृदा परिच्छेदिका (Soil Profile: ह्यूमस, संस्तर, जनक चट्टान), मृदा निर्माण को प्रभावित करने वाले पाँच कारक (जनक शैल, जलवायु, उच्चावच, जैव सामग्री, समय), मृदा अपरदन और उसके संरक्षण की वैज्ञानिक विधियाँ (मल्च बनाना, वेदिका फार्म, समोच्च रेखीय जुताई, रक्षक मेखलाएँ, समोच्च रेखीय रोधिकाएँ), वैश्विक जल संकट, अलवण जल की सीमितता (केवल 2.7%), जल संरक्षण की प्रणालियाँ (वर्षा जल संचयन / Rainwater Harvesting), प्राकृतिक वनस्पति के प्रकार (सदाबहार वन, पर्णपाती वन, घासस्थल, गुल्म व टुंड्रा), पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) का संतुलन, तथा संकटग्रस्त वन्यजीवों के संरक्षण हेतु राष्ट्रीय उद्यान, जैवमंडल निचय (Biosphere Reserves) व अंतरराष्ट्रीय CITES समझौते का गहन व परीक्षा-उन्मुख विश्लेषण संकलित है।

💧 पृथ्वी को "नीला ग्रह" (Water Planet) कहा जाता है क्योंकि इसकी 71% सतह जल से ढकी है, फिर भी दुनिया के 8 अरब लोग पानी की एक-एक बूँद के लिए क्यों तरस रहे हैं?

क्या आप जानते हैं कि पृथ्वी पर कुल जल का 97% से अधिक भाग खारा (समुद्री) है जिसे पिया नहीं जा सकता? केवल 2.7% जल ही अलवण (मीठा) है, और उसमें से भी लगभग 70% जल अंटार्कटिका, ग्रीनलैंड और पर्वतों पर बर्फ की मोटी चादरों के रूप में जमा है! यानी मानव उपयोग के लिए केवल 1% से भी कम मीठा पानी उपलब्ध है! 1 सेमी उपजाऊ मिट्टी बनने में प्रकृति को सैकड़ों वर्ष लग जाते हैं, किंतु एक ही तेज बारिश या आँधी उसे कुछ ही मिनटों में बहा ले जाती है। जंगलों के कटने से हाथी, बाघ और गिद्ध क्यों विलुप्त हो रहे हैं? और क्या छत पर गिरने वाले बारिश के पानी को सहेजकर हम अपने गाँव और शहर को सूखे से बचा सकते हैं? आइए, इन जीवनदायी संसाधनों की सुरक्षा के वैज्ञानिक उपायों को समझें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

झारखण्ड की 29% से अधिक भूमि वनों से आच्छादित है। यहाँ की दामोदर, स्वर्णरेखा नदियों में प्रदूषण, लाल व लेटेराइट मिट्टी का अपरदन, तथा दलमा व बेतला राष्ट्रीय उद्यानों में हाथियों और वन्यजीवों का मानव-संघर्ष राज्य के पर्यावरण की ज्वलंत चुनौतियाँ हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • जल चक्र (Water Cycle: वाष्पीकरण, संघनन, वर्षण) की मूल प्रक्रिया।
  • स्थलमंडल, जलमंडल, वायुमंडल और जीवमंडल की प्राथमिक संकल्पना।
  • पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) और खाद्य शृंखला का सामान्य ज्ञान।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • भूमि उपयोग के प्रारूप और भूस्खलन न्यूनीकरण की तकनीकों की व्याख्या कर सकेंगे।
  • मृदा निर्माण के कारकों और मृदा परिच्छेदिका (Soil Profile) के विभिन्न संस्तरों को समझ सकेंगे।
  • मृदा संरक्षण की पाँच प्रमुख विधियों (मल्चिंग, कंटूर बंडिंग, शेल्टर बेल्ट आदि) का सोदाहरण वर्णन कर सकेंगे।
  • वैश्विक जल संकट के कारणों का विश्लेषण कर वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) के लाभ बता सकेंगे।
  • वनों के प्रकार, पारिस्थितिक तंत्र के महत्व और CITES समझौते के प्रावधानों की समीक्षा कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. भूमि संसाधन: भूमि उपयोग, साझा सं...
2 2. मृदा संसाधन: निर्माण के कारक, पर...
3 3. जल संसाधन: जल चक्र, संकट एवं वर्...
4 4. प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन:...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. भूमि संसाधन: भूमि उपयोग, साझा संपत्ति एवं भूस्खलन न्यूनीकरण

भूपृष्ठ के कुल क्षेत्रफल का लगभग 30% भाग भूमि है। भूमि और जलवायु के भिन्न-भिन्न लक्षणों के कारण विश्व में जनसंख्या का वितरण अत्यंत असमान है (उबड़-खाबड़ पर्वतों और मरुस्थलों में विरल आबादी तथा नदी घाटियों में सघन आबादी)।

भूमि उपयोग (Land Use):

भूमि का उपयोग विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है; जैसे कृषि, वानिकी, खनन, सड़कें व उद्योग स्थापित करना। स्वामित्व के आधार पर भूमि दो प्रकार की होती है: निजी भूमि (व्यक्तियों के स्वामित्व वाली) तथा सामुदायिक भूमि / साझा संपत्ति संसाधन (Common Property Resource) जिस पर पूरे समुदाय का चारा, फल, जड़ी-बूटियाँ इकट्ठा करने का साझा अधिकार होता है।

भूस्खलन (Landslides) एवं न्यूनीकरण क्रियाविधि:

भूस्खलन क्या है?

शैल, मलबे या ढाल से गिरती हुई मिट्टी के वृहद् संचलन को भूस्खलन कहते हैं। यह भूकंप, बाढ़, ज्वालामुखी और भारी वर्षा से होता है।

रोकथाम (न्यूनीकरण) की प्रविधियाँ:

  • भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों का मानचित्र बनाकर वहाँ बस्तियाँ बसाने से बचना।
  • ढाल को खिसकने से रोकने के लिए प्रतिधारी दीवार (Retention Wall) का निर्माण करना।
  • वनस्पति आवरण (पेड़-पौधे) लगाना, जो मिट्टी को खिसकने से रोकते हैं।
  • सतही अपवाह तथा झरना प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए अपवाह नियंत्रण प्रणाली विकसित करना।

2. मृदा संसाधन: निर्माण के कारक, परिच्छेदिका एवं संरक्षण विधियाँ

पृथ्वी के पृष्ठ पर दानेदार कणों के आवरण की पतली परत मृदा (Soil) कहलाती है। यह भूमि से निकटता से जुड़ी है। केवल 1 सेमी उपजाऊ मिट्टी बनने में सैकड़ों वर्ष लग जाते हैं।

मृदा निर्माण को प्रभावित करने वाले 5 कारक:

  • जनक शैल (Parent Rock): मृदा के रंग, गठन, रासायनिक गुणधर्म और खनिज मात्रा को तय करता है।
  • जलवायु (Climate): तापमान और वर्षा अपक्षय (Weathering) तथा ह्यूमस निर्माण की दर को प्रभावित करते हैं।
  • उच्चावच (Relief): तुंगता और ढाल मृदा के संचय को तय करते हैं (तीव्र ढाल पर पतली परत, समतल मैदान में गहरी परत)।
  • वनस्पतिजात, प्राणिजात व सूक्ष्मजीव: ह्यूमस निर्माण की दर को प्रभावित करते हैं।
  • समय (Time): मृदा परिच्छेदिका की मोटाई को तय करता है।

मृदा संरक्षण की वैज्ञानिक विधियाँ:

1. मल्च बनाना (Mulching):

पौधों के बीच खाली जमीन को पुआल या जैव पदार्थ की परत से ढँकना ताकि मिट्टी की नमी सुरक्षित रहे।

2. वेदिका फार्म (Terrace Farming):

तीव्र ढालों पर सीढ़ीनुमा सपाट सोपान बनाना ताकि सतही अपवाह कम हो और फसल उगाई जा सके।

3. समोच्च रेखीय जुताई (Contour Ploughing):

पहाड़ी ढाल पर समोच्च रेखाओं के समांतर जुताई करना, जिससे जल के नीचे बहने की गति रुक जाती है।

4. रक्षक मेखलाएँ (Shelter Belts):

तटीय और शुष्क प्रदेशों में पवन की गति रोकने के लिए कतारों में पेड़ लगाना ताकि मृदा का कटाव न हो।

3. जल संसाधन: जल चक्र, संकट एवं वर्षा जल संचयन

जल एक महत्वपूर्ण नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन है। पृथ्वी का तीन-चौथाई भाग जल से ढका है, इसलिए इसे "जल ग्रह" कहते हैं।

जल की उपलब्धता की स्थिति:

  • महासागरों का जल खारा (Saline) है और मानव उपभोग के लिए उपयुक्त नहीं है (कुल जल का 97.3%)।
  • अलवण जल (Fresh Water) केवल 2.7% है। इसका लगभग 70% भाग बर्फ की चादरों (अंटार्कटिका, ग्रीनलैंड) के रूप में जमा है।
  • मानव उपभोग के लिए केवल लगभग 1% अलवण जल उपलब्ध है, जो भौम जल (Groundwater), नदियों, झीलों और वायुमंडल में जलवाष्प के रूप में है।

वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting):

छतों और खुले आँगनों पर गिरने वाले वर्षा जल को पाइपों के माध्यम से भूमिगत टैंकों, सोख्ता गड्ढों या कुओं में एकत्र कर भूजल स्तर को रिचार्ज करना वर्षा जल संचयन कहलाता है।

तथ्य: औसतन 2 घंटे की सामान्य बारिश में छत से लगभग 8,000 लीटर जल संचित किया जा सकता है!

4. प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन: प्रकार, पारिस्थितिक तंत्र एवं CITES

प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन केवल जीवमंडल (Biosphere) में ही पाए जाते हैं, जहाँ स्थलमंडल, जलमंडल और वायुमंडल परस्पर संपर्क में आते हैं।

पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem):

जीवमंडल में सभी जीवधारी जीवित रहने के लिए एक-दूसरे पर परस्पर निर्भर और संबंधित रहते हैं। इस जीवन-आधारक तंत्र को पारिस्थितिक तंत्र कहते हैं। गिद्ध जैसे मृतोपजीवी जीव मृत पशुओं को खाकर पर्यावरण को साफ रखते हैं (सफाईकर्मी / Scavenger)।

वनों का वर्गीकरण:

  • सदाबहार वन (Evergreen Forests): जहाँ पेड़ वर्ष के किसी भी मौसम में अपनी पत्तियाँ एक साथ नहीं गिराते और हमेशा हरे-भरे रहते हैं।
  • पर्णपाती वन (Deciduous Forests): वाष्पोत्सर्जन से नमी की हानि रोकने के लिए शुष्क मौसम में अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं (झारखण्ड में मुख्यतः पर्णपाती साल व महुआ वन पाए जाते हैं)।

संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय प्रयास (CITES):

CITES (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora):

सरकारों के बीच एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वन्य प्राणियों और पौधों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार से उनके अस्तित्व को खतरा न पहुँचे। इसके तहत भालू, डॉल्फिन, कैक्टस, प्रवाल और आर्किड की लगभग 5,000 पशु प्रजातियों और 28,000 पादप प्रजातियों के व्यापार पर कड़ा प्रतिबंध लगाया गया है।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

मृदा निर्माण के 5 नियंत्रक कारक
मृदा = f(जनक शैल, जलवायु, उच्चावच, जैव सामग्री, समय)
Soil = f(Parent rock, Climate, Relief, Flora/Fauna, Time)।
मृदा संरक्षण की 5 विधियाँ
मल्चिंग + वेदिका फार्म + समोच्च जुताई + रक्षक मेखलाएँ + समोच्च रोधिकाएँ
ढालू और शुष्क क्षेत्रों में मृदा अपरदन रोकने की वैज्ञानिक तकनीकें।
वैश्विक जल विभाजन अनुपात
कुल जल: 97.3% खारा (समुद्र) + 2.7% अलवण (मीठा) [उपलब्ध केवल < 1%]
जल सीमित है, अतः वर्षा जल संचयन अनिवार्य है।
पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) की संकल्पना
जैविक घटक (पादप + जंतु) + अजैविक घटक (मृदा + जल + वायु) = संतुलन
एक भी प्रजाति के लुप्त होने से पूरी खाद्य शृंखला प्रभावित होती है।
CITES अंतरराष्ट्रीय समझौता
वन्य जीवों और वनस्पतियों की संकटापन्न प्रजातियों के वैश्विक व्यापार पर प्रतिबंध
लगभग 33,000 प्रजातियों को संरक्षण प्रदान करता है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
मृदा निर्माण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\nमृदा निर्माण को प्रभावित करने वाले पाँच प्रमुख कारक हैं:\n1. जनक शैल (Parent Rock): यह मृदा के मूल रंग, रासायनिक संरचना और खनिजों की मात्रा को तय करता है।\n2. जलवायु (Climate): तापमान और वर्षा अपक्षय (Weathering) की गति तथा ह्यूमस निर्माण की दर को निर्धारित करते हैं।\n3. उच्चावच और ढाल (Relief & Slope): तीव्र ढालों पर मिट्टी बह जाती है और परत पतली रहती है, जबकि समतल मैदानों में गहरी और मोटी परत जमती है।\n4. जैव सामग्री (Flora & Fauna): पेड़-पौधों के सड़े-गले अवशेष और सूक्ष्मजीव मिट्टी में पोषक तत्व (ह्यूमस) मिलाते हैं।\n5. समय (Time): समय बीतने के साथ मिट्टी के संस्तर (Layers) परिपक्व और मोटे होते हैं।
उदाहरण 2
पहाड़ी और शुष्क क्षेत्रों में मृदा संरक्षण के लिए कौन-सी विधियाँ अपनाई जाती हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\n1. पहाड़ी क्षेत्रों के लिए:\n- वेदिका फार्म (Terrace Farming): तीव्र पहाड़ी ढालों पर सीढ़ीनुमा खेत बनाए जाते हैं ताकि ढाल कट सके और मिट्टी न बहे।\n- समोच्च रेखीय जुताई (Contour Ploughing): ढाल के आड़े (समोच्च रेखाओं के समांतर) जुताई की जाती है जिससे पानी की धार प्राकृतिक अवरोधों से धीमी पड़ जाती है।\n\n2. शुष्क और तटीय क्षेत्रों के लिए:\n- रक्षक मेखलाएँ (Shelter Belts): खेतों की सीमाओं पर कतारों में मजबूत पेड़ लगाए जाते हैं ताकि तेज आँधी और हवा मिट्टी की ऊपरी परत को उड़ाकर न ले जा सके।\n- मल्च बनाना (Mulching): मिट्टी पर पुआल या पत्तों की परत बिछाई जाती है जिससे वाष्पीकरण रुकता है और नमी बनी रहती है।
उदाहरण 3
पृथ्वी पर जल की प्रचुरता के बावजूद आज दुनिया के अधिकांश भाग भीषण जल संकट का सामना क्यों कर रहे हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\nविश्व में जल संकट के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:\n1. अलवण जल की अत्यंत सीमित मात्रा: पृथ्वी पर कुल जल का 97.3% खारा है। केवल 2.7% मीठा पानी है, जिसमें से भी 70% बर्फ के रूप में अंटार्कटिका व पहाड़ों पर जमा है। मानव उपयोग के लिए केवल 1% से कम मीठा पानी उपलब्ध है।\n2. तेजी से बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण: पेयजल, घरेलू कार्यों और अन्न उत्पादन के लिए पानी की माँग कई गुना बढ़ गई है।\n3. जल प्रदूषण: औद्योगिक रसायनों, सीवेज और कृषि कीटनाशकों को बिना शोधित किए नदियों और झीलों में बहाने से उपलब्ध जल जहरीला हो रहा है।\n4. भूजल का अंधाधुंध दोहन: नलकूपों और बोरवेल से अत्यधिक पानी खींचने के कारण भूमिगत जल स्तर (Water Table) खतरनाक रूप से नीचे गिर गया है।
उदाहरण 4
वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) क्या है और इसके क्या लाभ हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\nवर्षा के जल को नालियों में बहकर बर्बाद होने से रोककर उसे छतों या खुले स्थानों से पाइपों द्वारा भूमिगत टैंकों या सोख्ता कुओं में एकत्र करना वर्षा जल संचयन कहलाता है।\nप्रमुख लाभ:\n1. भूजल का पुनर्भरण (Recharge): यह गिरते हुए भूमिगत जल स्तर को ऊपर उठाने का सबसे सस्ता और प्राकृतिक उपाय है।\n2. जल संकट से मुक्ति: शुष्क और गर्मी के महीनों में जब नलों में पानी नहीं आता, संचित जल घरेलू और बागवानी कार्यों में काम आता है।\n3. मृदा अपरदन और बाढ़ की रोकथाम: वर्षा जल के तेज सतही बहाव को रोककर यह मिट्टी के कटाव और शहरी जलभराव (Waterlogging) को कम करता है।
उदाहरण 5
पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) के संतुलन को बनाए रखने में वन्यजीवों की क्या भूमिका है? CITES क्या है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\n1. वन्यजीवों की भूमिका: जीवमंडल में प्रत्येक प्राणी (चाहे वह बड़ा हाथी हो या सूक्ष्म कीड़ा) खाद्य शृंखला का हिस्सा है। जैसे मधुमक्खियाँ फसलों के परागण (Pollination) में मदद करती हैं, पक्षी कीटों को नियंत्रित करते हैं, और गिद्ध मरे हुए पशुओं को खाकर बीमारियों को फैलने से रोकते हैं। किसी भी एक प्रजाति के विलुप्त होने से पूरा पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ जाता है।\n2. CITES (Convention on International Trade in Endangered Species): यह संकटापन्न वन्य जीवों और वनस्पतियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर नियंत्रण लगाने वाला वैश्विक समझौता है। यह सुनिश्चित करता है कि खाल, दाँत, हड्डियों या लकड़ी के लिए दुर्लभ जीवों (बाघ, हाथी, गैंडा) का शिकार और अवैध व्यापार न हो।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मृदा (Soil) और भूमि (Land) को एक ही समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

भूमि पृथ्वी की कुल ठोस सतह (30%) है, जबकि मृदा भूपृष्ठ पर दानेदार खनिजों और जैव पदार्थों की केवल ऊपरी बारीक परत है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि वर्षा जल संचयन केवल बहुत अमीर लोग ही कर सकते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

साधारण पीवीसी पाइप और एक गड्ढा बनाकर कोई भी ग्रामीण या शहरी घर आसानी से वर्षा जल संचयन कर सकता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सदाबहार और पर्णपाती वनों के अंतर को न समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सदाबहार वन कभी अपनी पत्तियाँ एक साथ नहीं गिराते, जबकि पर्णपाती वन नमी बचाने के लिए शुष्क मौसम में अपनी सारी पत्तियाँ एक साथ गिरा देते हैं।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

भूमि, मृदा एवं जल संसाधन: परिच्छेदिका, संरक्षण एवं जल चक्र A. मृदा परिच्छेदिका (Soil Profile) शीर्ष मृदा (Topsoil): ह्यूमस व वनस्पति सर्वाधिक उपजाऊ परत • पौधों की जड़ों का आधार उप-मृदा (Subsoil): बालू, गाद व क्ले खनिजों का संचयन • वर्षा जल का रिसाव अपक्षयित शैल सामग्री (Weathered Rock) टूटे हुए पत्थरों के टुकड़े • जनक शैल का रूपांतरण जनक शैल (Parent Bedrock) कठोर मूल चट्टान • मृदा के रंग व खनिजों का निर्धारक 1 सेमी उपजाऊ मृदा बनने में सैकड़ों वर्ष लगते हैं B. जल उपलब्धता एवं मृदा संरक्षण विधियाँ जल उपलब्धता का वैश्विक यथार्थ: • 97.3% महासागरीय जल (खारा, अनुपयोगी) • 2.7% अलवण जल (70% बर्फ की चादरों में जमा) • मानव उपभोग हेतु उपलब्ध अलवण जल केवल < 1% मृदा संरक्षण की प्रमुख विधियाँ: 1. मल्चिंग (Mulching): नमी रोकने हेतु पुआल की परत 2. वेदिका फार्म (Terrace): पहाड़ी ढालों पर सोपान बनाना 3. समोच्च जुताई (Contour): ढाल के समांतर आड़ी जुताई 4. रक्षक मेखला (Shelterbelt): तेज पवन रोकने हेतु कतारबद्ध पेड़ वर्षा जल संचयन: 2 घंटे की वर्षा = 8,000 लीटर संचित जल CITES: संकटापन्न वन्यजीवों व पादपों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर रोक

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. भूपृष्ठ का 30% भाग भूमि है; भूमि और जलवायु की भिन्नता के कारण जनसंख्या वितरण अत्यधिक असमान है।
मुख्य बिंदु 2
  1. निजी भूमि व्यक्तियों की होती है, जबकि सामुदायिक भूमि (साझा संपत्ति) पर पूरे समाज का अधिकार होता है।
मुख्य बिंदु 3
  1. ढाल से मिट्टी व मलबे का गिरना भूस्खलन कहलाता है; इसे प्रतिधारी दीवार और वनस्पति आवरण से रोका जा सकता है।
मुख्य बिंदु 4
  1. मृदा का निर्माण जनक शैल, जलवायु, उच्चावच, समय और जैव पदार्थों की अंतःक्रिया से होता है।
मुख्य बिंदु 5
  1. 1 सेमी उपजाऊ मिट्टी बनने में सैकड़ों वर्ष लगते हैं; मल्चिंग, वेदिका फार्म, समोच्च जुताई और रक्षक मेखलाएँ इसके संरक्षण के उपाय हैं।
मुख्य बिंदु 6
  1. पृथ्वी पर कुल जल का 97.3% खारा है; अलवण (मीठा) जल केवल 2.7% है और मानव उपयोग के लिए केवल 1% से कम उपलब्ध है।
मुख्य बिंदु 7
  1. वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) छतों पर गिरने वाले पानी को संचित कर भूजल स्तर को रिचार्ज करने की श्रेष्ठ विधि है।
मुख्य बिंदु 8
  1. जीवमंडल में सभी जीवधारी जीवित रहने के लिए एक-दूसरे पर परस्पर निर्भर रहते हैं, जिसे पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) कहते हैं।
मुख्य बिंदु 9
  1. सदाबहार वन हमेशा हरे-भरे रहते हैं, जबकि पर्णपाती वन शुष्क मौसम में नमी बचाने के लिए अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं।
मुख्य बिंदु 10
  1. CITES एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है जो 33,000 से अधिक संकटग्रस्त वन्यजीवों और पादपों के व्यापार पर प्रतिबंध लगाता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
मृदा निर्माण में "जनक शैल" (Parent Rock) की क्या भूमिका होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: यह मृदा के रंग, गठन, रासायनिक गुणों और खनिजों की मात्रा को निर्धारित करता है।
मूल चट्टान के अपक्षय (टूटना) से ही मिट्टी के कण बनते हैं।
2
पहाड़ी ढालों पर मृदा अपरदन रोकने की सर्वोत्तम विधि कौन-सी है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: वेदिका फार्म (Terrace Farming) और समोच्च रेखीय जुताई (Contour Ploughing)।
सीढ़ीनुमा खेत बनाने से पानी के तेज बहाव की गति धीमी हो जाती है।
3
पृथ्वी पर मानव उपभोग के लिए कितना अलवण (मीठा) जल उपलब्ध है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: लगभग 1% से भी कम।
97.3% खारा समुद्र है और शेष का अधिकांश भाग बर्फ की चादरों में जमा है।
4
रक्षक मेखलाएँ (Shelter Belts) कहाँ और क्यों लगाई जाती हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: तटीय और शुष्क क्षेत्रों में; पवन की गति रोककर मृदा अपरदन को रोकने के लिए।
कतारों में लगे पेड़ तेज हवा से मिट्टी को उड़ने से बचाते हैं।
5
CITES का पूर्ण रूप क्या है और इसका क्या उद्देश्य है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora; संकटापन्न वन्यजीवों और वनस्पतियों के अवैध व्यापार पर रोक लगाना।
यह प्रजातियों के अस्तित्व की रक्षा हेतु सरकारों के बीच वैश्विक संधि है।
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