प्रत्येक वस्तु जिसका उपयोग आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जा सकता है, वह संसाधन (Resource) है। किसी वस्तु की उपयोगिता अथवा प्रयोज्यता (Utility) ही उसे एक संसाधन बनाती है।
मूल्य (Value) क्या है?
मूल्य का अर्थ महत्व होता है। कुछ संसाधनों का आर्थिक मूल्य होता है (जैसे धातुओं, कोयले या फसलों को बेचकर धन कमाया जा सकता है), जबकि कुछ का सौंदर्यपरक मूल्य होता है (जैसे किसी मनोरम जलप्रपात या सूर्यास्त का दृश्य)। दोनों ही मानवीय संतोष और जीवन की गुणवत्ता के लिए समान रूप से आवश्यक हैं।
संसाधन रूपांतरण के दो प्रमुख कारक: समय और प्रौद्योगिकी
समय (Time) और प्रौद्योगिकी (Technology) दो सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं जो पदार्थों को संसाधन में परिवर्तित करते हैं। उदाहरण: आग की खोज से खाना पकाने की पद्धति विकसित हुई; पहिए के आविष्कार से परिवहन की आधुनिक प्रणालियाँ बनीं; और बहते जल में तेज गति का उपयोग कर पनबिजली (Hydroelectricity) बनाने की तकनीक ने पानी को ऊर्जा का विपुल भंडार बना दिया।