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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 8 • Social Science • अध्याय 8
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

राष्ट्रीय आंदोलन का संघटन: 1870 के दशक से 1947 तक (The Making of the National Movement: 1870s-1947)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 इतिहास का आठवाँ अध्याय "राष्ट्रीय आंदोलन का संघटन: 1870 के दशक से 1947 तक" (The Making of the National Movement: 1870s-1947) भारत के स्वतंत्रता संग्राम की सबसे व्यापक, रोमांचक और निर्णायक गाथा है। 1857 के बाद भारतीय राष्ट्रवाद किस प्रकार विभिन्न चरणों से गुजरते हुए 1947 में पूर्ण स्वतंत्रता तक पहुँचा, इसका कालजयी अध्ययन यहाँ संकलित है। इस अध्याय में राष्ट्रवाद की चेतना का उदय (आर्म्स एक्ट 1878, वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट, इल्बर्ट बिल विवाद 1883), 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (ए.ओ. ह्यूम, डब्ल्यू.सी. बनर्जी, दादाभाई नौरोजी की "ड्रेन ऑफ वेल्थ" थ्योरी), नरमपंथी (Moderates) बनाम गरमपंथी/अतिवादी (Radicals: लाल-बाल-पाल), 1905 का बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन, 1906 मुस्लिम लीग, 1915 में महात्मा गांधी का दक्षिण अफ्रीका से भारत आगमन, चंपारण (1917), खेड़ा व अहमदाबाद मिल सत्याग्रह, रौलट एक्ट और 13 अप्रैल 1919 का नृशंस जलियांवाला बाग हत्याकांड, खिलाफत और असहयोग आंदोलन (1920-22), चौरी-चौरा की घटना, क्रांतिकारी राष्ट्रवाद (भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, एचएसआरए), 1929 लाहौर अधिवेशन में "पूर्ण स्वराज" का संकल्प, 1930 की ऐतिहासिक दांडी यात्रा और सविनय अवज्ञा आंदोलन, 1942 का "भारत छोड़ो" आंदोलन (करो या मरो), नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज (INA), कैबिनेट मिशन, तथा 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता एवं देश के विभाजन की त्रासदी का निष्पक्ष, प्रामाणिक व परीक्षा-उन्मुख विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

🌊 मुट्ठी भर नमक उठाकर एक 61 वर्षीय बूढ़े व्यक्ति ने दुनिया के सबसे बड़े ब्रिटिश साम्राज्य की नींव कैसे हिला दी?

12 मार्च 1930 को जब महात्मा गांधी ने अपने 78 आश्रमवासियों के साथ साबरमती से 240 मील दूर दांडी समुद्र तट तक पदयात्रा शुरू की, तो अंग्रेज अफसरों ने उनका मजाक उड़ाया कि "क्या नमक का पानी उबालने से साम्राज्य गिर जाएगा?" लेकिन 6 अप्रैल 1930 को जब गांधीजी ने समुद्र तट पर एक चुटकी प्राकृतिक नमक उठाकर ब्रिटिश नमक कानून को तोड़ा, तो पूरा देश जाग उठा! लाखों लोगों ने नमक बनाया, विदेशी कपड़ों की होली जलाई और जेलें भर दीं। भगत सिंह ने मात्र 23 वर्ष की उम्र में हँसते-हँसते फाँसी के फंदे को क्यों चूम लिया? नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा" कहकर भारत की सीमा पर तिरंगा कैसे फहराया? और भारत को 1947 की आजादी के साथ विभाजन का असह्य दंश क्यों झेलना पड़ा? आइए, स्वतंत्रता संग्राम के इस स्वर्णिम इतिहास को नमन करें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह अध्याय भारत के एक संप्रभु, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बनने की महागाथा है। झारखण्ड में टाना भगत आंदोलन, असहयोग व सविनय अवज्ञा में छोटानागपुर के आदिवासियों की भागीदारी तथा 1940 के ऐतिहासिक रामगढ़ कांग्रेस अधिवेशन के संदर्भ को समझने के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि और परिणाम।
  • ब्रिटिश आर्थिक नीतियों द्वारा भारत का आर्थिक शोषण (Drain of Wealth)।
  • राष्ट्र, राष्ट्रवाद और संप्रभुता (Sovereignty) की मूलभूत संकल्पना।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • 1870 के दशक में भारतीय राष्ट्रवाद के उदय के कारणों (दमनकारी कानूनों, प्रेस एक्ट, इल्बर्ट बिल) का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • 1885 में कांग्रेस की स्थापना और नरमपंथियों (Moderates) व गरमपंथियों (Radicals) की विचारधाराओं की तुलना कर सकेंगे।
  • 1905 के बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन के अखिल भारतीय प्रभावों का मूल्यांकन कर सकेंगे।
  • गांधीवादी युग (1915-1947) के प्रमुख जन-आंदोलनों—असहयोग, सविनय अवज्ञा (दांडी यात्रा) और भारत छोड़ो का चरणबद्ध अध्ययन कर सकेंगे।
  • क्रांतिकारी राष्ट्रवादियों (भगत सिंह, आजाद) और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के अद्वितीय योगदान को रेखांकित कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. राष्ट्रवाद का उदय, दमनकारी कानून...
2 2. नरमपंथी बनाम गरमपंथी, 1905 का बं...
3 3. गांधीजी का आगमन, रौलट सत्याग्रह,...
4 4. दांडी यात्रा, भारत छोड़ो आंदोलन,...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. राष्ट्रवाद का उदय, दमनकारी कानून एवं कांग्रेस की स्थापना (1885)

1870 के दशक तक भारतीयों में यह स्पष्ट चेतना जाग चुकी थी कि "भारत भारतीयों का देश है" और जब तक ब्रिटिश नियंत्रण समाप्त नहीं होता, देश का विकास संभव नहीं है।

असंतोष को भड़काने वाले ब्रिटिश कानून:

  • आर्म्स एक्ट (1878): भारतीयों द्वारा हथियार रखने पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गई।
  • वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (1878): यदि कोई भारतीय समाचार-पत्र सरकार की आलोचना करता, तो उसकी प्रिंटिंग प्रेस जब्त कर ली जाती थी।
  • इल्बर्ट बिल विवाद (1883): इस विधेयक में प्रावधान था कि भारतीय जज भी ब्रिटिश अपराधियों के मुकदमों की सुनवाई कर सकते हैं। अंग्रेजों के नस्लीय विरोध के कारण सरकार को यह बिल वापस लेना पड़ा, जिससे भारतीयों में गहरा रोष फैल गया।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (दिसंबर 1885):

सेवानिवृत्त ब्रिटिश अफसर ए.ओ. ह्यूम के सहयोग से बंबई में 72 प्रतिनिधियों के साथ कांग्रेस की स्थापना हुई। इसके प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी (W.C. Bonnerjee) बने। दादाभाई नौरोजी ने अपनी पुस्तक "पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया" में धन की निकासी (Drain of Wealth) का सिद्धांत दिया।

2. नरमपंथी बनाम गरमपंथी, 1905 का बंगाल विभाजन एवं स्वदेशी आंदोलन

A. नरमपंथी (Moderates) - प्रारंभिक 20 वर्ष:

दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता, गोपाल कृष्ण गोखले और बदरुद्दीन तैयबजी जैसे नेता ब्रिटिश न्यायप्रियता में विश्वास रखते थे। वे प्रार्थना-पत्रों, ज्ञापनों और सभाओं द्वारा संवैधानिक तरीके से प्रशासनिक सुधारों और परिषदों में भारतीयों की भागीदारी की माँग करते थे।

B. गरमपंथी / अतिवादी (Radicals) - लाल-बाल-पाल:

1890 के दशक तक बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल ने "निवेदन की राजनीति" (Politics of Prayers) का कड़ा विरोध किया। तिलक ने गर्जना की:

"स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा!"

C. 1905 का बंगाल विभाजन एवं स्वदेशी आंदोलन:

वायसराय लॉर्ड कर्जन ने 1905 में प्रशासनिक सुविधा का बहाना बनाकर बंगाल का विभाजन कर दिया। वास्तविक उद्देश्य हिंदू और मुस्लिम राष्ट्रवादियों को बाँटना और बंगाली प्रभाव को कमजोर करना था।

• स्वदेशी आंदोलन: इसके विरोध में पूरे देश में "वंदे मातरम्" के नारों के साथ स्वदेशी आंदोलन भड़क उठा। विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई और देशी उद्योगों, राष्ट्रीय शिक्षा और स्वावलंबन पर बल दिया गया। आंध्र के डेल्टा इलाकों में इसे वंदे मातरम् आंदोलन कहा गया।

• 1906 में ढाका में मुस्लिम लीग की स्थापना हुई जिसने मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचिका (Separate Electorates) की माँग की, जिसे 1909 के मार्ले-मिंटो सुधारों में मान लिया गया।

3. गांधीजी का आगमन, रौलट सत्याग्रह, जलियांवाला बाग एवं असहयोग आंदोलन

जनवरी 1915 में 46 वर्ष की आयु में महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका में नस्लभेदी शासन के विरुद्ध सफल सत्याग्रह के बाद भारत लौटे। 1917 में चंपारण (नील किसान), 1918 में खेड़ा (लगान माफी) और अहमदाबाद (सूती मिल मजदूर हड़ताल) में उनके शुरुआती सत्याग्रह सफल रहे।

रौलट एक्ट एवं जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919):

  • रौलट एक्ट (1919): किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए 2 वर्ष तक जेल में रखने का काला कानून ("ना वकील, ना अपील, ना दलील")। गांधीजी ने इसके खिलाफ 6 अप्रैल 1919 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया।
  • जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919): अमृतसर के जलियांवाला बाग में बैसाखी के दिन शांतिपूर्ण सभा कर रहे हजारों निहत्थे लोगों पर जनरल डायर ने बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता बंद कर अंधाधुंध गोलियाँ चलवाईं। सैकड़ों निर्दोष लोग मारे गए। इसके विरोध में रवींद्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश उपाधि "नाइटहुड" (Knighthood) लौटा दी।

खिलाफत एवं असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement - 1920-1922):

गांधीजी ने तुर्की के खलीफा के समर्थन में शुरू हुए खिलाफत आंदोलन को हिंदू-मुस्लिम एकता का स्वर्णिम अवसर मानकर 1920 में असहयोग आंदोलन शुरू किया:

  • सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, अदालतों, उपाधियों और विदेशी कपड़ों का पूर्ण बहिष्कार किया गया। झारखण्ड में टाना भगतों ने शराब की दुकानें बंद कराईं और विदेशी वस्त्र जलाए।
  • चौरी-चौरा कांड (फरवरी 1922): उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के चौरी-चौरा में गुस्साई भीड़ ने एक थाने में आग लगा दी, जिसमें 22 पुलिसकर्मी जलकर मर गए। अहिंसा के सिद्धांत से समझौता न करते हुए गांधीजी ने असहयोग आंदोलन तुरंत वापस ले लिया।

4. दांडी यात्रा, भारत छोड़ो आंदोलन, नेताजी की आजाद हिंद फौज एवं स्वतंत्रता (1947)

A. पूर्ण स्वराज एवं दांडी यात्रा (सविनय अवज्ञा आंदोलन - 1930):

दिसंबर 1929 में पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में "पूर्ण स्वराज" (Complete Independence) का प्रस्ताव पास हुआ और 26 जनवरी 1930 को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।

दांडी यात्रा (12 मार्च - 6 अप्रैल 1930):

गांधीजी ने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से 240 मील पैदल चलकर दांडी पहुँचकर 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़ा। नमक अमीर-गरीब सबके भोजन का अनिवार्य हिस्सा था, अतः इस प्रतीकात्मक सत्याग्रह ने पूरे देश में सविनय अवज्ञा की लहर दौड़ा दी।

B. क्रांतिकारी राष्ट्रवाद एवं भगत सिंह:

भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव और राजगुरु ने 1928 में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) बनाई। 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केंद्रीय असेंबली में पर्चे और खाली बम फेंके ("बहरों को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत होती है")। 23 मार्च 1931 को मात्र 23 वर्ष की उम्र में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फाँसी दी गई।

C. भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India - 1942) एवं आजाद हिंद फौज:

  • 8 अगस्त 1942 को बंबई अधिवेशन में गांधीजी ने "अंग्रेजो भारत छोड़ो" का प्रस्ताव पास किया और देश को ऐतिहासिक मंत्र दिया: "करो या मरो" (Do or Die)। सभी बड़े नेताओं की तत्काल गिरफ्तारी के बाद जनता ने स्वतःस्फूर्त क्रांति की।
  • सुभाष चंद्र बोस ने 1943 में सिंगापुर में आजाद हिंद फौज (Indian National Army - INA) की कमान संभाली और "दिल्ली चलो" व "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा" का आह्वान किया।

D. स्वतंत्रता और विभाजन की त्रासदी (1947):

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटिश साम्राज्य भारत को संभालने में असमर्थ हो गया। 1946 के कैबिनेट मिशन की विफलता के बाद मुस्लिम लीग ने 16 अगस्त 1946 को "प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस" (Direct Action Day) का आह्वान किया जिससे भयानक सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ, किंतु इसके साथ ही भारत और पाकिस्तान के विभाजन की भीषण मानवीय त्रासदी भी झेलनी पड़ी जिसमें लाखों लोग बेघर और मारे गए।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885)
दिसंबर 1885 (बंबई, गोकुलदास तेजपाल कॉलेज): ए.ओ. ह्यूम + 72 प्रतिनिधि | प्रथम अध्यक्ष: W.C. बनर्जी
दादाभाई नौरोजी: "पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया" (धन की निकासी सिद्धांत)।
बंगाल विभाजन एवं स्वदेशी आंदोलन (1905)
लॉर्ड कर्जन द्वारा विभाजन → स्वदेशी आंदोलन + वंदे मातरम् गान + विदेशी माल का बहिष्कार
1906 में मुस्लिम लीग का गठन (ढाका: नवाब सलीमुल्लाह)।
गांधीजी के आरंभिक आंदोलन (1917-1919)
चंपारण (1917, नील) → खेड़ा (1918, किसान) → अहमदाबाद (1918, मिल) → रौलट सत्याग्रह (1919)
13 अप्रैल 1919: जलियांवाला बाग हत्याकांड (जनरल डायर)।
सविनय अवज्ञा एवं दांडी यात्रा (1930)
12 मार्च से 6 अप्रैल 1930: साबरमती से दांडी (240 मील) → नमक कानून तोड़ा
1929 लाहौर अधिवेशन: पूर्ण स्वराज का ऐतिहासिक संकल्प (अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू)।
भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
8 अगस्त 1942 (बंबई): "अंग्रेजो भारत छोड़ो" | गांधीजी का नारा: "करो या मरो"
नेताजी सुभाष चंद्र बोस: आजाद हिंद फौज (1943, सिंगापुर) • "दिल्ली चलो"।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
1870 और 1880 के दशकों में ब्रिटिश शासन के प्रति भारतीयों में असंतोष के क्या कारण थे?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\n1870 और 1880 के दशकों में भारतीयों में तीव्र असंतोष के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:\n1. आर्म्स एक्ट (1878): इसके द्वारा भारतीयों से हथियार रखने का अधिकार छीन लिया गया, जबकि अंग्रेज हथियार रख सकते थे।\n2. वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (1878): भारतीय भाषाओं के समाचार-पत्रों की आवाज दबाने के लिए यह कठोर सेंसरशिप कानून लाया गया।\n3. इल्बर्ट बिल विवाद (1883): जब सरकार ने यह बिल पेश किया कि भारतीय जज भी यूरोपीय नागरिकों के मुकदमों की सुनवाई कर सकते हैं, तो अंग्रेजों ने घोर नस्लीय विरोध किया। सरकार द्वारा बिल वापस लेने से भारतीयों को ब्रिटिश न्याय का खोखलापन समझ आ गया।\n4. आर्थिक दोहन: भारत के अकाल पीड़ित होने के बावजूद ब्रिटेन को भारी मात्रा में अनाज निर्यात किया जा रहा था।
उदाहरण 2
कांग्रेस के प्रारंभिक दौर में नरमपंथियों (Moderates) और गरमपंथियों (Radicals) के विचारों में क्या अंतर था?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\n1. नरमपंथी (Moderates - नौरोजी, गोखले, बनर्जी):\n- वे ब्रिटिश न्यायप्रियता में आस्था रखते थे।\n- उनका मानना था कि अंग्रेज स्वतंत्रता और न्याय के पक्षधर हैं, अतः केवल प्रार्थना-पत्रों, ज्ञापनों और संवैधानिक सुधारों द्वारा अपनी माँगें मनवाई जा सकती हैं।\n- वे क्रमिक सुधारों और परिषदों में भारतीयों की भागीदारी की माँग करते थे।\n\n2. गरमपंथी (Radicals - तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल):\n- वे प्रार्थना और भिक्षावृत्ति की राजनीति के घोर विरोधी थे।\n- उन्होंने स्वावलंबन, रचनात्मक कार्य और जन-आंदोलनों पर बल दिया।\n- तिलक ने नारा दिया: "स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।"\n- उनका लक्ष्य प्रशासनिक रियायतें नहीं, बल्कि पूर्ण स्वराज था।
उदाहरण 3
गांधीजी ने 1930 में नमक को ही सविनय अवज्ञा आंदोलन का मुख्य मुद्दा क्यों बनाया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\nगांधीजी ने नमक कानून तोड़ने का फैसला इसलिए किया क्योंकि:\n1. सार्वभौमिक आवश्यकता: नमक अमीर हो या गरीब, प्रत्येक भारतीय के दैनिक भोजन का अनिवार्य हिस्सा था।\n2. प्रकृति की देन पर कर: समुद्र से स्वतः बनने वाले प्राकृतिक नमक पर अंग्रेजों ने एकाधिकार कर रखा था और उस पर भारी कर लगाया हुआ था।\n3. गहरा भावनात्मक जुड़ाव: नमक पर टैक्स ब्रिटिश शासन का सबसे अमानवीय और घिनौना चेहरा था।\n4. जनसामान्य की एकता: इस एक मुद्दे ने देश के हर वर्ग—किसान, मजदूर, महिला, व्यापारी और छात्र—को एक सूत्र में पिरो दिया।
उदाहरण 4
13 अप्रैल 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड का संक्षिप्त विवरण दीजिए और इसका क्या प्रभाव हुआ?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\n1. घटना: 13 अप्रैल 1919 (बैसाखी का दिन) को अमृतसर के जलियांवाला बाग में रौलट एक्ट के विरोध और अपने लोकप्रिय नेताओं (डॉ. सैफुद्दीन किचलू व डॉ. सत्यपाल) की गिरफ्तारी के विरोध में एक शांतिपूर्ण सभा हो रही थी।\n2. बर्बरता: ब्रिगेडियर जनरल डायर ने बाग के एकमात्र संकरे निकास द्वार को फौज और बख्तरबंद गाड़ियों से घेर लिया और बिना किसी चेतावनी के निहत्थी भीड़ पर 10 मिनट तक अंधाधुंध 1650 गोलियाँ चलवाईं। सैकड़ों निर्दोष पुरुष, महिलाएँ और बच्चे मारे गए।\n3. प्रभाव:\n- पूरे देश में आक्रोश की ज्वाला भड़क उठी।\n- रवींद्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश उपाधि "नाइटहुड" (Knighthood) त्याग दी।\n- महात्मा गांधी का ब्रिटिश न्याय व्यवस्था से पूरा विश्वास उठ गया और उन्होंने 1920 में ऐतिहासिक असहयोग आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया।
उदाहरण 5
1942 के "भारत छोड़ो" आंदोलन का क्या महत्व था?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\n8 अगस्त 1942 को बंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने ऐतिहासिक "भारत छोड़ो" (Quit India) प्रस्ताव पारित किया:\n1. "करो या मरो" का मंत्र: गांधीजी ने देशवासियों को करो या मरो का आह्वान किया।\n2. स्वतःस्फूर्त जनक्रांति: 9 अगस्त की सुबह गांधीजी सहित सभी प्रमुख नेता गिरफ्तार कर लिए गए। नेतृत्वविहीन होने के बावजूद जनता ने खुद कमान संभाल ली।\n3. समानांतर सरकारें: सतारा (महाराष्ट्र), बलिया (उत्तर प्रदेश) और मिदनापुर (बंगाल) में जनता ने अपनी स्वतंत्र सरकारें (प्रति सरकार) स्थापित कर लीं।\n4. छात्रों और मजदूरों की भागीदारी: संचार साधन, रेलवे पटरियाँ और पुलिस स्टेशन ध्वस्त कर दिए गए।\n5. परिणाम: इस जनविद्रोह ने अंग्रेजों को स्पष्ट संदेश दे दिया कि अब वे भारत पर बलपूर्वक शासन नहीं कर सकते और स्वतंत्रता केवल समय की बात रह गई है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

असहयोग आंदोलन (1920) और सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) को मिला देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

असहयोग आंदोलन 1920 में जलियांवाला बाग व खिलाफत के विरोध में शुरू हुआ था, जबकि सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में नमक सत्याग्रह (दांडी यात्रा) से शुरू हुआ था।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

चौरी-चौरा कांड के बाद आंदोलन बंद होने का कारण न समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

गांधीजी अहिंसा के सिद्धांत के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध थे; 22 पुलिसकर्मियों की हत्या के कारण उन्होंने आंदोलन वापस लिया।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भगत सिंह और क्रांतिकारियों को केवल "आतंकवादी" मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

वे समाजवादी सोच वाले महान बौद्धिक और देशभक्त क्रांतिकारी थे जिन्होंने शोषक व्यवस्था को खत्म करने के लिए अपना बलिदान दिया।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

राष्ट्रीय आंदोलन (1870-1947): प्रमुख पड़ाव एवं स्वतंत्रता संग्राम का पथ A. गांधीवादी युग के प्रमुख जन-आंदोलन 1919: रौलट सत्याग्रह एवं जलियांवाला बाग 13 अप्रैल 1919 बैसाखी नरसंहार • टैगोर ने "नाइटहुड" लौटाया 1920-1922: असहयोग एवं खिलाफत आंदोलन स्कूल, अदालत, विदेशी वस्त्र बहिष्कार • चौरी-चौरा कांड के बाद वापसी 1930: सविनय अवज्ञा आंदोलन एवं दांडी यात्रा 12 मार्च - 6 अप्रैल 1930 • 240 मील पदयात्रा • नमक कानून तोड़ा 1942: भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India) 8 अगस्त 1942 • गांधीजी का नारा: "करो या मरो" (Do or Die) 15 अगस्त 1947: भारत स्वतंत्र हुआ (विभाजन की त्रासदी सहित) B. क्रांतिकारी धाराएँ एवं आजाद हिंद फौज 1. क्रांतिकारी राष्ट्रवाद: भगत सिंह व साथी • 1928: हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) • 8 अप्रैल 1929: केंद्रीय असेंबली में बम धमाका 23 मार्च 1931: भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु की शहादत • चंद्रशेखर आजाद (अल्फ्रेड पार्क, प्रयागराज में अमर बलिदान) 2. नेताजी सुभाष चंद्र बोस एवं आजाद हिंद फौज • 1943 (सिंगापुर): आजाद हिंद फौज (INA) का पुनर्गठन • नारे: "दिल्ली चलो" | "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा" • रानी झाँसी रेजिमेंट (कैप्टन लक्ष्मी सहगल) कोहिमा व इंफाल मोर्चों पर ब्रिटिश सेना को सीधी सैन्य चुनौती

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. 1870 के दशक में आर्म्स एक्ट, वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट और इल्बर्ट बिल विवाद से राष्ट्रीय चेतना प्रखर हुई।
मुख्य बिंदु 2
  1. दिसंबर 1885 में बंबई में ए.ओ. ह्यूम के सहयोग से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई (प्रथम अध्यक्ष: W.C. बनर्जी)।
मुख्य बिंदु 3
  1. आरंभिक 20 वर्षों में नरमपंथियों (गोखले, नौरोजी) ने संवैधानिक प्रार्थना-पत्रों द्वारा सुधारों की माँग की।
मुख्य बिंदु 4
  1. 1890 के दशक में तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल ने "स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है" का उद्घोष किया।
मुख्य बिंदु 5
  1. 1905 में लॉर्ड कर्जन द्वारा किए गए बंगाल विभाजन के विरोध में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन भड़का।
मुख्य बिंदु 6
  1. जनवरी 1915 में गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से लौटे; चंपारण (1917) व खेड़ा में उनके शुरुआती सत्याग्रह सफल रहे।
मुख्य बिंदु 7
  1. रौलट एक्ट के विरोध के दौरान 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में जनरल डायर ने भीषण नरसंहार किया।
मुख्य बिंदु 8
  1. गांधीजी ने 1920 में असहयोग आंदोलन शुरू किया, जिसे चौरी-चौरा हिंसा (1922) के बाद वापस ले लिया गया।
मुख्य बिंदु 9
  1. 1930 में गांधीजी ने साबरमती से दांडी पदयात्रा कर नमक कानून तोड़ा और सविनय अवज्ञा आंदोलन का बिगुल फूँका।
मुख्य बिंदु 10
  1. 1942 में गांधीजी ने "भारत छोड़ो" का नारा और "करो या मरो" का मंत्र दिया; 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब, कहाँ और किसके प्रयासों से हुई थी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: दिसंबर 1885 में बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में, ए.ओ. ह्यूम के प्रयासों से।
इसके प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी (W.C. Bonnerjee) थे।
2
"स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" यह प्रसिद्ध उद्घोष किसका था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: बाल गंगाधर तिलक (लोकमान्य तिलक) का।
तिलक ने गरमपंथी राष्ट्रवाद का नेतृत्व किया।
3
जलियांवाला बाग हत्याकांड कब और किस शहर में हुआ था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 13 अप्रैल 1919 (बैसाखी के दिन) को अमृतसर में।
जनरल डायर ने निहत्थी सभा पर गोलियाँ चलवाई थीं।
4
गांधीजी ने दांडी यात्रा कब शुरू की और किस तारीख को नमक कानून तोड़ा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 12 मार्च 1930 को साबरमती से शुरू की तथा 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक कानून तोड़ा।
यह सविनय अवज्ञा आंदोलन का ऐतिहासिक शुभारंभ था।
5
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में महात्मा गांधी का प्रसिद्ध मंत्र क्या था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: "करो या मरो" (Do or Die)।
8 अगस्त 1942 को बंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में यह ऐतिहासिक आह्वान किया गया था।
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कक्षा 8 Social Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: कैसे, कब और कहाँ (How, When and Where) अध्याय 2: व्यापार से साम्राज्य तक (From Trade to Territory) अध्याय 3: ग्रामीण क्षेत्र पर शासन चलाना (Ruling the Countryside) अध्याय 4: आदिवासी, दीकु और एक स्वर्ण युग की कल्पना (Tribals, Dikus and the Vision of a Golden Age) अध्याय 5: जब जनता बगावत करती है (1857 और उसके बाद) (When People Rebel) अध्याय 6: देशी जनता को सभ्य बनाना, राष्ट्र को शिक्षित करना (Civilising the Native, Educating the Nation) अध्याय 7: महिलाएं, जाति एवं सुधार (Women, Caste and Reform) अध्याय 8: राष्ट्रीय आंदोलन का संघटन: 1870 के दशक से 1947 तक (The Making of the National Movement: 1870s-1947) अध्याय 9: संसाधन (Resources) (Resources) अध्याय 10: भूमि, मृदा, जल, प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन संसाधन (Land, Soil, Water, Natural Vegetation and Wildlife Resources) अध्याय 11: कृषि (Agriculture) अध्याय 12: उद्योग (Industries) (Industries) अध्याय 13: मानव संसाधन (Human Resources) (Human Resources) अध्याय 14: भारतीय संविधान (The Indian Constitution) (The Indian Constitution) अध्याय 15: धर्मनिरपेक्षता की समझ (Understanding Secularism) अध्याय 16: संसद तथा कानूनों का निर्माण (Parliament and the Making of Laws) अध्याय 17: न्यायपालिका (Judiciary) (Judiciary) अध्याय 18: हाशियाकरण की समझ (Understanding Marginalisation) अध्याय 19: हाशियाकरण से निपटना (Confronting Marginalisation) अध्याय 20: जनसुविधाएं (Public Facilities) (Public Facilities) अध्याय 21: कानून और सामाजिक न्याय (Law and Social Justice)

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