1870 के दशक तक भारतीयों में यह स्पष्ट चेतना जाग चुकी थी कि "भारत भारतीयों का देश है" और जब तक ब्रिटिश नियंत्रण समाप्त नहीं होता, देश का विकास संभव नहीं है।
असंतोष को भड़काने वाले ब्रिटिश कानून:
- आर्म्स एक्ट (1878): भारतीयों द्वारा हथियार रखने पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गई।
- वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (1878): यदि कोई भारतीय समाचार-पत्र सरकार की आलोचना करता, तो उसकी प्रिंटिंग प्रेस जब्त कर ली जाती थी।
- इल्बर्ट बिल विवाद (1883): इस विधेयक में प्रावधान था कि भारतीय जज भी ब्रिटिश अपराधियों के मुकदमों की सुनवाई कर सकते हैं। अंग्रेजों के नस्लीय विरोध के कारण सरकार को यह बिल वापस लेना पड़ा, जिससे भारतीयों में गहरा रोष फैल गया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (दिसंबर 1885):
सेवानिवृत्त ब्रिटिश अफसर ए.ओ. ह्यूम के सहयोग से बंबई में 72 प्रतिनिधियों के साथ कांग्रेस की स्थापना हुई। इसके प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी (W.C. Bonnerjee) बने। दादाभाई नौरोजी ने अपनी पुस्तक "पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया" में धन की निकासी (Drain of Wealth) का सिद्धांत दिया।