दो सदी पहले भारत में महिलाओं और तथाकथित निचली जातियों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी:
- महिलाओं की स्थिति: बहुत कम उम्र में बाल विवाह कर दिया जाता था। देश के कई भागों में पति की मृत्यु पर जीवित पत्नी को उसकी चिता पर जिंदा जला दिया जाता था, जिसे "सती" (सदाचारी स्त्री) कहा जाता था। संपत्ति में महिलाओं का कोई अधिकार नहीं था और शिक्षा पर पूर्ण पाबंदी थी।
- जातिगत विभाजन: समाज कठोर जातिगत ढाँचे में बँटा था। तथाकथित "अछूतों" को सवर्णों के कुएँ से पानी भरने, मंदिरों में प्रवेश करने या गाँव के मुख्य रास्तों पर चलने की मनाही थी। उन्हें केवल मैला उठाने या चमड़े का काम करने वाला माना जाता था।
- परिवर्तन की बयार (मुद्रण क्रांति): 19वीं सदी में छापेखानों के आने से पहली बार किताबें, अखबार, पत्रिकाएँ और पर्चे सस्ते दामों पर आम लोगों तक पहुँचे। आम जनता अपनी ही भाषाओं में सामाजिक रीति-रिवाजों, कुरीतियों और धर्मग्रंथों पर स्वतंत्र रूप से बहस करने लगी।