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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 9 • Social Science • अध्याय 13
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

संविधान निर्माण (Constitutional Design)

संविधान किसी भी लोकतांत्रिक देश का सर्वोच्च और मौलिक कानूनी दस्तावेज होता है जो नागरिकों और सरकार के पारस्परिक संबंधों, शासन की शक्तियों, उनकी सीमाओं तथा नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निर्धारित करता है। यह अध्याय दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद (Apartheid) के क्रूर दमन के विरुद्ध नेल्सन मंडेला के 28 वर्षों के कारावास और संघर्ष के बाद विश्व के सबसे समावेशी 'इंद्रधनुषी संविधान' के निर्माण की प्रेरणादायी गाथा से प्रारंभ होता है। इसके पश्चात अध्याय भारतीय संविधान के निर्माण की ऐतिहासिक, चुनौतीपूर्ण एवं गौरवशाली पृष्ठभूमि का अनावरण करता है—विभाजन की विभीषिका (10 लाख से अधिक जानें), 565 देशी रियासतों के एकीकरण में सरदार वल्लभभाई पटेल का ऐतिहासिक योगदान, 1928 में मोतीलाल नेहरू और 1931 के कराची अधिवेशन में तय लोकतांत्रिक बुनियादी मूल्य। संविधान सभा (Constituent Assembly) की संरचना, डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता, प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर की विधिक मेधा, तथा झारखंड के महान आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा द्वारा संविधान सभा में आदिवासियों के अधिकारों की बुलंद आवाज को रेखांकित किया गया है। अध्याय में भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) के प्रत्येक दार्शनिक शब्द ('संप्रभु', 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष', 'लोकतांत्रिक', 'गणराज्य', 'न्याय', 'स्वतंत्रता', 'समता', 'बंधुता') का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। झारखंड बोर्ड (JAC) परीक्षा में संविधान की आवश्यकता, दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद, संविधान सभा की कार्यप्रणाली और प्रस्तावना के दर्शन पर विश्लेषणात्मक प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

28 साल कालकोठरी में काटकर जिस श्वेत शत्रु ने सताया, उसी के साथ मिलकर बनाया विश्व का सबसे सुंदर संविधान

1964 में जब नेल्सन मंडेला को दक्षिण अफ्रीका की रंगभेदी श्वेत सरकार ने देशद्रोह के आरोप में कुख्यात रोबेन द्वीप की कालकोठरी में बंद किया, तो किसी ने नहीं सोचा था कि 28 वर्षों की अमानवीय यातनाएं सहने के बाद जब यह महामानव बाहर निकलेगा, तो बदले की आग के बजाय सुलह और क्षमा का पैगाम देगा! 26 अप्रैल 1994 की मध्यरात्रि को जब दक्षिण अफ्रीका का नया तिरंगा लहराया, तो अश्वेत बहुसंख्यकों ने अपने पुराने श्वेत उत्पीड़कों से हाथ मिलाया और दो वर्षों के गहन विचार-विमर्श के बाद ऐसा संविधान बनाया जिसने दुनिया भर के लोकतंत्रों के सामने समावेशी सह-अस्तित्व की मिसाल कायम कर दी। ठीक इसी जज्बे से भारत में सदियों की गुलामी, विभाजन के खूनी दंगों और लाखों शरणार्थियों के आंसुओं के बीच डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान सभा के 299 महान मनीषियों ने विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान कैसे गढ़ा, यही इस अध्याय की सबसे गौरवशाली ऐतिहासिक दास्तान है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

संविधान केवल वकीलों का कोई रूखा-सूखा दस्तावेज नहीं है; यह 140 करोड़ भारतीयों की स्वतंत्रता, समानता और अस्मिता की ढाल है। झारखंड के संदर्भ में, संविधान सभा में छोटानागपुर के आदिवासी जननायक जयपाल सिंह मुंडा ने पाँचवीं व छठी अनुसूची तथा जनजातीय स्वशासन एवं भूमि संरक्षण के लिए ऐतिहासिक बहसें कीं। संविधान को समझना प्रत्येक छात्र के लिए अपने नागरिक अधिकारों को जानने और एक समतामूलक समाज के निर्माण में भागीदार बनने के लिए अनिवार्य है। JAC बोर्ड परीक्षा में यह अध्याय राजनीतिक विज्ञान का केंद्रीय स्तंभ है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • भारत के स्वतंत्रता संग्राम (1857 से 1947) और विभाजन की बुनियादी ऐतिहासिक घटनाएं।
  • लोकतंत्र, कानून के शासन और मौलिक अधिकारों की प्रारंभिक अवधारणा।
  • सरदार पटेल, महात्मा गांधी, डॉ. अंबेडकर और जवाहरलाल नेहरू के ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की जानकारी।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद नीति (Apartheid) और नेल्सन मंडेला के नेतृत्व में संविधान निर्माण के चरणों का विश्लेषण करना।
  • किसी भी लोकतांत्रिक समाज में संविधान की अनिवार्य आवश्यकता के 4 प्रमुख कारणों को तर्कसहित सिद्ध करना।
  • भारतीय संविधान निर्माण की कठिन परिस्थितियों (विभाजन, रियासतों का विलय) और उसके ऐतिहासिक क्रमिक विकास को समझना।
  • संविधान सभा के गठन (जुलाई 1946), प्रारूप समिति, 114 दिनों की कार्यप्रणाली और जयपाल सिंह मुंडा के योगदान का मूल्यांकन करना।
  • संविधान की प्रस्तावना (Preamble) के दार्शनिक मूल्यों—संप्रभु, पंथनिरपेक्ष, समाजवादी, गणराज्य आदि की शुद्ध व्याख्या करना।
  • संविधान के 'जीवंत दस्तावेज' (Living Document) होने और संवैधानिक संशोधनों की आवश्यकता को स्पष्ट करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. दक्षिण अफ्रीका में लोकतांत्रिक स...
2 2. हमें संविधान की आवश्यकता क्यों ह...
3 3. भारतीय संविधान निर्माण की ऐतिहास...
4 4. संविधान सभा (Constituent Assembl...
5 5. भारतीय संविधान के बुनियादी मूल्य...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. दक्षिण अफ्रीका में लोकतांत्रिक संविधान का निर्माण: रंगभेद से मुक्ति

दक्षिण अफ्रीका का संविधान निर्माण समकालीन विश्व में दमनकारी शासन से समावेशी लोकतंत्र में संक्रमण का सबसे उत्कृष्ट ऐतिहासिक उदाहरण है।

रंगभेद की व्यवस्था (Apartheid Regime):

  • 17वीं और 18वीं सदी में यूरोप के व्यापारिक देशों (ब्रिटेन व हॉलैंड) ने दक्षिण अफ्रीका को हथियारों के बल पर गुलाम बनाया और गोरे अल्पसंख्यक शासक बन बैठे।
  • इन्होंने रंगभेद (Apartheid) की व्यवस्था लागू की, जिसके तहत लोगों को उनकी चमड़ी के रंग के आधार पर विभाजित किया गया: श्वेत (गोरे), अश्वेत (काले - 3/4 जनसंख्या) और रंगीन चमड़ी वाले (भारतीय व मिश्रित नस्ल)।
  • क्रूर भेदभाव: अश्वेतों को गोरों की बस्तियों में रहने, उनके स्कूलों, अस्पतालों, बसों, ट्रेनों, यहाँ तक कि उनके चर्चों और समुद्र तटों (Separate Beaches) पर जाने की पूर्ण मनाही थी। इसे 'पृथक्करण' (Segregation) की नीति कहा गया। अश्वेतों को मतदान और संगठन बनाने का अधिकार नहीं था।

नेल्सन मंडेला और अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (ANC) का संघर्ष:

  • 1950 से ही अश्वेतों, रंगीन चमड़ी वालों और भारतीयों ने रंगभेद के विरुद्ध प्रदर्शन शुरू किए। इसका नेतृत्व अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (ANC) ने किया। अनेक संवेदनशील गोरे लोग भी इसमें शामिल हुए।
  • नेल्सन मंडेला और सात अन्य प्रमुख नेताओं को 1964 में रंगभेदी शासन का विरोध करने के अपराध में आजीवन कारावास दिया गया और उन्हें कुख्यात रोबेन द्वीप (Robben Island) की जेल में 28 वर्षों तक कैद रखा गया।

एक नए संविधान का उदय (1994):

26 अप्रैल 1994: स्वतंत्रता का सूर्योदय
विश्वव्यापी विरोध और आंतरिक जनविद्रोह के आगे झुकते हुए गोरी सरकार ने रंगभेदी कानून वापस लिए, राजनीतिक दलों से प्रतिबंध हटाया और 28 वर्षों बाद नेल्सन मंडेला जेल से रिहा हुए। 26 अप्रैल 1994 की आधी रात को दक्षिण अफ्रीका गणराज्य का नया झंडा फहराया गया।
  • अश्वेत नेताओं ने कहा कि वे गोरों पर बदला नहीं लेंगे, बल्कि सभी नस्लों की समानता, लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों पर आधारित एक नया दक्षिण अफ्रीका बनाएंगे।
  • दो वर्षों की व्यापक चर्चा के बाद एक ऐसा संविधान बना जिसने नागरिकों को दुनिया में सबसे व्यापक अधिकार दिए। जो देश कल तक 'अछूत' और दमनकारी माना जाता था, वह 'इंद्रधनुषी राष्ट्र' (Rainbow Nation) के रूप में लोकतंत्र का आदर्श बन गया।

2. हमें संविधान की आवश्यकता क्यों है? (चार प्रमुख कार्य)

संविधान केवल कानूनों की कोई किताब नहीं है, बल्कि यह किसी भी बहुलवादी समाज में शांति, विश्वास और न्याय की आधारशिला है। दक्षिण अफ्रीका और भारत दोनों के संदर्भ में संविधान के चार प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:

संविधान का कार्य दार्शनिक महत्व व्यावहारिक प्रभाव
1. भरोसा और सहयोग का निर्माण विभिन्न समूहों में परस्पर विश्वास विकसित करना यह साथ रह रहे विभिन्न जातियों, धर्मों और वर्गों के लोगों के बीच एक बुनियादी भरोसा और सहयोग विकसित करता है जो एक साथ रहने के लिए अनिवार्य है।
2. सरकार के गठन और शक्तियों का स्पष्टीकरण संवैधानिक संस्थाओं की शक्ति संरचना तय करना यह स्पष्ट करता है कि सरकार का गठन कैसे होगा, फैसले लेने का अधिकार किसके पास होगा (संसद, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति) और शक्तियां कैसे विभाजित होंगी।
3. सरकार की शक्तियों पर सीमाएं और नागरिकों के अधिकार तानाशाही और मनमानी पर कानूनी अंकुश यह सरकार के अधिकारों की सीमा तय करता है कि सरकार क्या कर सकती है और क्या नहीं, और नागरिकों को ऐसे मौलिक अधिकार देता है जिनका सरकार उल्लंघन नहीं कर सकती।
4. अच्छे समाज के निर्माण की जन-आकांक्षाएं सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का साधन यह अच्छे समाज के गठन के लिए लोगों की आकांक्षाओं और आदर्शों (जैसे अस्पृश्यता का अंत, आर्थिक समानता, धर्मनिरपेक्षता) को व्यक्त करता है।

3. भारतीय संविधान निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं चुनौतियां

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश के लिए संविधान बनाना कोई आसान काम नहीं था। 1947 में भारत किन कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था:

1. विभाजन की भयानक त्रासदी:

भारत और पाकिस्तान का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था। सीमा के दोनों ओर भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़के जिनमें 10 लाख से अधिक निर्दोष लोग मारे गए और करोड़ों लोग शरणार्थी बनकर बेघर हो गए।

2. 565 देशी रियासतों का एकीकरण:

अंग्रेजों ने भारत को छोड़ते समय 565 रजवाड़ों (देशी रियासतों) के राजाओं को यह विकल्प दे दिया था कि वे चाहें तो भारत में मिलें, पाकिस्तान में मिलें या स्वतंत्र रहें। इन रियासतों का भारत संघ में शांतिपूर्ण विलय कराना एक अत्यंत जटिल और कठिन कार्य था, जिसे देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल (लौह पुरुष) ने अपनी अद्वितीय कूटनीति से सफलतापूर्वक संपन्न किया।

3. भविष्य की अनिश्चितता:

जब संविधान लिखा जा रहा था, तब देश का भविष्य आज जितना सुरक्षित और सुनिश्चित नहीं दिखाई देता था। निर्माताओं को देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा की भारी चिंता थी।

संविधान निर्माण का पथ (पूर्व-अनुभव):

  • 1928 का मोतीलाल नेहरू ड्राफ्ट: 1928 में ही मोतीलाल नेहरू और कांग्रेस के आठ नेताओं ने भारत के लिए एक संविधान का मसौदा तैयार किया था।
  • 1931 का कराची अधिवेशन: इसमें प्रस्ताव पारित कर स्वतंत्र भारत के संविधान में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, स्वतंत्रता और समानता का अधिकार तथा अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की प्रतिबद्धता दोहराई गई थी।
  • औपनिवेशिक शासन के अनुभव: 1935 के 'भारत सरकार अधिनियम' (Government of India Act 1935) से बहुत सारे प्रशासनिक विवरण और संस्थागत प्रक्रियाओं को अपनाया गया। इसके अतिरिक्त निर्माताओं ने फ्रांसीसी क्रांति के आदर्शों, ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली, अमेरिका के अधिकारों के विधेयक (Bill of Rights) और रूस की समाजवादी क्रांति से प्रेरणा ली।

4. संविधान सभा (Constituent Assembly): गठन, कार्यप्रणाली और जयपाल सिंह मुंडा का योगदान

भारत के संविधान को एक विधिवत निर्वाचित प्रतिनिधि संस्था द्वारा बनाया गया जिसे संविधान सभा (Constituent Assembly) कहा जाता है।

संविधान सभा का गठन एवं तिथियां:

  • चुनाव: जुलाई 1946 में प्रांतीय असेंबलियों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव हुआ।
  • प्रथम बैठक: 9 दिसंबर 1946 को आयोजित हुई।
  • विभाजन के बाद सदस्य: देश के विभाजन के बाद संविधान सभा भी बंट गई। भारतीय संविधान लिखने वाली सभा में 299 सदस्य थे।
  • संविधान अंगीकृत (Adopted): 26 नवंबर 1949 को संविधान पर हस्ताक्षर किए गए और इसे अंगीकृत किया गया (इस दिन 'संविधान दिवस' मनाया जाता है)।
  • संविधान लागू (Enforced): 26 जनवरी 1950 को संविधान पूर्णतः लागू हुआ। इस दिन को हम हर वर्ष गणतंत्र दिवस (Republic Day) के रूप में मनाते हैं। (26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज्य दिवस की ऐतिहासिक स्मृति में यह तिथि चुनी गई थी)।

प्रारूप समिति और विचार-विमर्श की लोकतांत्रिक प्रक्रिया:

  • संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।
  • संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए एक प्रारूप समिति (Drafting Committee) बनाई गई जिसके अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे।
  • प्रारूप समिति ने चर्चा के लिए संविधान का एक मसौदा तैयार किया। इस पर धारावार कई दौर की खुली और सघन चर्चाएं हुईं।
  • 2,000 से अधिक संशोधनों पर विचार किया गया। तीन वर्षों में कुल 114 दिनों की गंभीर बैठकें हुईं। सभा में बोले गए प्रत्येक शब्द को रिकॉर्ड किया गया और सहेज कर रखा गया, जिसे 'कॉन्स्टिट्यूएंट असेंबली डिबेट्स' (Constituent Assembly Debates - 12 मोटे खंड) कहा जाता है।
झारखंड के परिप्रेक्ष्य में: जयपाल सिंह मुंडा (1903 - 1970) का ऐतिहासिक योगदान
झारखंड (तत्कालीन बिहार) के खूंटी क्षेत्र से संविधान सभा के सदस्य बने जयपाल सिंह मुंडा (1928 एम्सटर्डम ओलंपिक हॉकी स्वर्ण पदक विजेता कप्तान, ऑक्सफोर्ड स्कॉलर और आदिवासी महासभा के संस्थापक) ने संविधान सभा में भारत के करोड़ों शोषित आदिवासियों (मूल निवासियों) की आवाज बुलंद की। उन्होंने 19 दिसंबर 1946 के अपने ऐतिहासिक भाषण में कहा था:
"मैं एक आदिवासी होने के नाते संविधान सभा में बोल रहा हूँ... आदिवासियों को प्रजातंत्र सिखाने की जरूरत नहीं है; हमारा समाज तो सदियों से ही लोकतांत्रिक रहा है। हमें केवल बराबरी और सम्मान का अधिकार चाहिए।"
उनके अथक प्रयासों से ही संविधान में पाँचवीं और छठी अनुसूची तथा अनुसूचित जनजातियों (ST) के जल-जंगल-जमीन और स्वशासन अधिकारों की सुरक्षा के विशेष प्रावधान सुनिश्चित हुए।

5. भारतीय संविधान के बुनियादी मूल्य एवं प्रस्तावना (The Preamble)

संविधान की शुरुआत बुनियादी मूल्यों की एक छोटी सी उद्देशिका से होती है जिसे संविधान की प्रस्तावना (Preamble) अथवा संविधान की 'आत्मा' कहा जाता है।

प्रस्तावना के मूल आदर्श एवं उनका वैज्ञानिक अर्थ:

संवैधानिक शब्द अंग्रेजी शब्द विस्तृत संवैधानिक अर्थ एवं व्याख्या
हम भारत के लोग We, the People of India संविधान का निर्माण और अधिनियमन भारत की जनता ने अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से किया है, न कि इसे किसी राजा या बाहरी शक्ति ने सौंपा है। सर्वोच्च सत्ता जनता में निहित है।
संप्रभु Sovereign लोगों को अपने देश से जुड़े हर आंतरिक व बाह्य मामले में फैसला करने का सर्वोच्च अधिकार है। कोई भी विदेशी शक्ति भारत सरकार को आदेश नहीं दे सकती।
समाजवादी Socialist (42वां संशोधन 1976) समाज में संपदा का उत्पादन सामाजिक रूप से होता है और उसका बंटवारा समानता के साथ होना चाहिए। सरकार भूमि और उद्योग-धंधों की हकदारी से जुड़े कायदे-कानून ऐसे बनाए कि आर्थिक असमानताएं कम हों।
पंथनिरपेक्ष Secular (42वां संशोधन 1976) नागरिकों को किसी भी धर्म को मानने की पूरी स्वतंत्रता है। देश का कोई आधिकारिक धर्म नहीं है। सरकार सभी धार्मिक मान्यताओं और आचरणों को समान सम्मान देती है।
लोकतांत्रिक Democratic शासन का एक ऐसा रूप जिसमें लोगों को समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त हैं, लोग अपने शासन का चुनाव करते हैं और उसे जवाबदेह ठहराते हैं।
गणराज्य Republic शासन का प्रमुख (राष्ट्रपति) लोगों द्वारा चुना हुआ व्यक्ति होगा, न कि किसी वंश या राजघराने का (ब्रिटेन के राजा के विपरीत)।
न्याय Justice नागरिकों के साथ जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की गारंटी।
स्वतंत्रता, समता, बंधुता Liberty, Equality, Fraternity अभिव्यक्ति व विश्वास की स्वतंत्रता; कानून के समक्ष सभी की समानता; और देश के नागरिकों के बीच भाईचारे की भावना ताकि देश की एकता व अखंडता सुरक्षित रहे।

संवैधानिक संशोधन (Constitutional Amendments):

संविधान कोई जड़ या अपरिवर्तनीय पोथी नहीं है; यह एक 'जीवंत दस्तावेज' (Living Document) है। समय के साथ समाज में बदलाव आते हैं, इसलिए संविधान में समय-समय पर बदलाव करने का प्रावधान रखा गया है जिसे संवैधानिक संशोधन कहते हैं।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

रंगभेद (Apartheid)
दक्षिण अफ्रीका (1948 - 1994)
चमड़ी के रंग के आधार पर श्वेत अल्पसंख्यकों द्वारा अश्वेत बहुसंख्यकों पर थोपी गई क्रूर दमनकारी व्यवस्था।
नेल्सन मंडेला का कारावास
28 वर्ष (1964 - 1992 ई., रोबेन द्वीप)
रंगभेद के विरुद्ध संघर्ष हेतु आजीवन कारावास, बाद में दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति बने।
संविधान सभा की प्रमुख तिथियां
प्रथम बैठक: 9 Dec 1946 | अंगीकृत: 26 Nov 1949 | लागू: 26 Jan 1950
संविधान निर्माण में कुल 2 वर्ष, 11 महीने, 18 दिन लगे और 114 दिन गंभीर बैठकें हुईं।
प्रारूप समिति (Drafting Committee)
अध्यक्ष: डॉ. भीमराव अंबेडकर (संविधान के जनक)
संविधान सभा के अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद। कुल सदस्य (विभाजन बाद): 299।
42वां संविधान संशोधन (1976)
प्रस्तावना में 3 शब्द जुड़े: 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष', 'अखंडता'
लघु संविधान (Mini-Constitution) भी कहा जाता है।
जयपाल सिंह मुंडा का योगदान
संविधान सभा में आदिवासी अधिकारों व 5वीं/6वीं अनुसूची के पैरोकार
झारखंड के खूंटी से सदस्य, ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता और आदिवासी महासभा के संस्थापक।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (दीर्घ उत्तरीय): हमें संविधान की आवश्यकता क्यों है? किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए संविधान के चार प्रमुख कार्यों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: किसी भी लोकतांत्रिक समाज में विभिन्न जातियों, धर्मों और विचारधाराओं के लोग एक साथ रहते हैं। बिना एक स्वीकृत नियमावली के कोई भी समाज शांतिपूर्वक और व्यवस्थित ढंग से नहीं चल सकता। संविधान के चार प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:

  1. भरोसा और सहयोग का निर्माण: संविधान उन बुनियादी नियमों को तय करता है जिन्हें समाज के सभी सदस्य स्वीकार करते हैं। यह विभिन्न समूहों के बीच विश्वास पैदा करता है कि कोई भी वर्ग दूसरे का दमन नहीं करेगा।
  2. सरकार का गठन और निर्णय लेने की शक्ति: संविधान यह तय करता है कि सरकार कैसे चुनी जाएगी, संसद, कार्यपालिका और न्यायपालिका के क्या अधिकार होंगे और देश के लिए अंतिम कानून कौन बनाएगा।
  3. सरकार की शक्तियों पर अंकुश और नागरिक अधिकार: किसी भी सरकार को निरंकुश या तानाशाह बनने से रोकने के लिए संविधान उसकी शक्तियों की लक्ष्मण रेखा खींचता है। यह नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान करता है जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में कोई भी सरकार छीन नहीं सकती।
  4. अच्छे समाज की जन-आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति: संविधान केवल व्यवस्था बनाए रखने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक न्यायपूर्ण, समतामूलक और आधुनिक समाज बनाने के लोगों के सपनों (जैसे गरीबी उन्मूलन, जातिवाद का अंत, स्त्री-पुरुष समानता) को साकार करने का मार्ग प्रशस्त करता है।
अंक योजना (Marking Scheme): संविधान की अनिवार्यता की भूमिका: 1 अंक, चारों कार्यों (भरोसा, सरकार गठन, सीमाएं/अधिकार, जन-आकांक्षाएं) की व्याख्या: 4 अंक। कुल = 5 अंक।
उदाहरण 2
प्रश्न 2 (लघु उत्तरीय): दक्षिण अफ्रीका में 'रंगभेद' (Apartheid) से आप क्या समझते हैं? नेल्सन मंडेला और ANC ने इसके विरुद्ध किस प्रकार संघर्ष किया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

1. रंगभेद का अर्थ:

दक्षिण अफ्रीका में 1948 से 1994 तक श्वेत (गोरे) यूरोपीय अल्पसंख्यकों द्वारा वहाँ के अश्वेत (काले) और रंगीन चमड़ी वाले बहुसंख्यकों पर चमड़ी के रंग के आधार पर थोपी गई क्रूर एवं अमानवीय शासन प्रणाली को रंगभेद (Apartheid) कहा जाता है। इसके तहत अश्वेतों को मताधिकार नहीं था और उनके स्कूल, अस्पताल, ट्रेनें व बस्तियां गोरों से पूरी तरह अलग (पृथक्करण) रखी जाती थीं।

2. मंडेला और ANC का संघर्ष:

  • 1950 से अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (ANC) के नेतृत्व में हड़तालों, धरनों और जन-आंदोलनों का संचालन हुआ।
  • नेल्सन मंडेला ने गोरों की तानाशाही के विरुद्ध सशस्त्र व अहिंसक दोनों मोर्चों पर आवाज उठाई, जिसके कारण उन्हें 1964 में देशद्रोह के झूठे मुकदमे में 28 वर्षों के लिए रोबेन द्वीप की जेल में कैद कर दिया गया।
  • विश्वव्यापी प्रतिबंधों और आंतरिक जनक्रांति के दबाव में गोरी सरकार झुकी और 26 अप्रैल 1994 को दक्षिण अफ्रीका एक बहु-नस्लीय स्वतंत्र लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
अंक योजना (Marking Scheme): रंगभेद की परिभाषा व पृथक्करण: 1.5 अंक, ANC व नेल्सन मंडेला का 28 वर्षीय संघर्ष व परिणाम: 1.5 अंक। कुल = 3 अंक।
उदाहरण 3
प्रश्न 3 (लघु उत्तरीय): भारतीय संविधान की प्रस्तावना में वर्णित 'संप्रभु', 'पंथनिरपेक्ष' और 'गणराज्य' शब्दों का क्या अर्थ है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. संप्रभु (Sovereign): इसका अर्थ है कि भारत अपने आंतरिक और बाह्य सभी मामलों में पूर्णतः स्वतंत्र और सर्वोच्च है। कोई भी बाहरी देश या अंतरराष्ट्रीय संगठन भारत सरकार को उसकी नीतियों के संबंध में आदेश नहीं दे सकता।
  2. पंथनिरपेक्ष (Secular): इसका अर्थ है कि भारत राज्य का अपना कोई आधिकारिक राजकीय धर्म नहीं है। राज्य की दृष्टि में सभी धर्म समान हैं और नागरिकों को अपनी अंतरात्मा के अनुसार किसी भी धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की पूर्ण स्वतंत्रता है।
  3. गणराज्य (Republic): इसका अर्थ है कि देश का राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति) एक निश्चित अवधि के लिए जनता द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है। यहाँ पद वंशानुगत (राजा-रानी का पुत्र) नहीं होता, जैसा कि ब्रिटेन या जापान के राजतंत्र में होता है।
अंक योजना (Marking Scheme): प्रत्येक शब्द (संप्रभु, पंथनिरपेक्ष, गणराज्य) का सही और सटीक अर्थ: 1 × 3 = 3 अंक।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (लघु उत्तरीय): संविधान सभा में झारखंड के आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा की क्या भूमिका थी?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: झारखंड के महान जननायक जयपाल सिंह मुंडा संविधान सभा के एक प्रखर और ओजस्वी सदस्य थे:

  • उन्होंने 19 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में दिए गए अपने ऐतिहासिक भाषण में सदियों से उपेक्षित और शोषित आदिवासियों के आत्मसम्मान और लोकतांत्रिक विरासत को रेखांकित किया।
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासियों को किसी से लोकतंत्र सीखने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि जनजातीय समाज सदियों से स्वशासन और सामूहिक समानता पर आधारित रहा है।
  • उनके प्रयासों से भारतीय संविधान में अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातियों के संरक्षण हेतु पाँचवीं और छठी अनुसूची तथा आरक्षण व भूमि संरक्षण के विशेष संवैधानिक प्रावधान शामिल किए गए।
अंक योजना (Marking Scheme): जयपाल सिंह मुंडा का परिचय व भाषण: 1.5 अंक, आदिवासी अधिकारों व 5वीं/6वीं अनुसूची में योगदान: 1.5 अंक। कुल = 3 अंक।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

26 नवंबर 1949 और 26 जनवरी 1950 की तिथियों में भ्रमित होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा संविधान 'स्वीकृत/अंगीकृत' (Adopted) किया गया था (संविधान दिवस), जबकि इसे पूर्ण रूप से 26 जनवरी 1950 को 'लागू' (Enforced) किया गया था (गणतंत्र दिवस)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

डॉ. राजेंद्र प्रसाद और डॉ. भीमराव अंबेडकर के पदों में गड़बड़ी करना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

डॉ. राजेंद्र प्रसाद पूरी 'संविधान सभा के अध्यक्ष' (President of the Constituent Assembly) थे, जबकि डॉ. भीमराव अंबेडकर 'प्रारूप समिति के अध्यक्ष' (Chairman of the Drafting Committee) थे।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि 'समाजवादी' और 'पंथनिरपेक्ष' शब्द मूल संविधान में शुरू से ही थे।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ये दोनों शब्द मूल प्रस्तावना में नहीं थे; इन्हें 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया।

भारतीय संविधान निर्माण की यात्रा एवं प्रस्तावना का दर्शन

भारतीय संविधान निर्माण का ऐतिहासिक प्रवाह एवं दार्शनिक मूल्य Constitutional Design: Historical Journey, Assembly Architecture & Preamble Philosophy ऐतिहासिक आधारशिला (1928-1935) • 1928: मोतीलाल नेहरू संविधान प्रारूप • 1931: कराची अधिवेशन (वयस्क मताधिकार) • 1935: भारत सरकार अधिनियम (ढांचा) • 565 रियासतों का विलय (पटेल का योगदान) स्वतंत्रता व समानता के बुनियादी सिद्धांत संविधान सभा (1946-1949) • कुल 299 सदस्य | 114 दिन गंभीर बैठकें • अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद • प्रारूप समिति अध्यक्ष: डॉ. बी.आर. अंबेडकर • आदिवासी स्वर: जयपाल सिंह मुंडा (झारखंड) अंगीकृत: 26 नवंबर 1949 (संविधान दिवस) गणतंत्र एवं जीवंत दस्तावेज (1950+) • 26 जनवरी 1950: संविधान पूर्णतः लागू • भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना • संवैधानिक संशोधन: समय अनुसार बदलाव • 42वां संशोधन 1976: पंथनिरपेक्ष, समाजवादी विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान संविधान की उद्देशिका / प्रस्तावना (Preamble) के दार्शनिक आधार-स्तंभ हम भारत के लोग सर्वोच्च शक्ति जनता में निहित संप्रभु (Sovereign) आंतरिक व बाह्य निर्णयों में पूर्ण स्वतंत्र समाजवादी व पंथनिरपेक्ष समानता, कोई आधिकारिक राजकीय धर्म नहीं लोकतांत्रिक गणराज्य चुना हुआ राष्ट्राध्यक्ष, वंशानुगत नहीं न्याय (सामाजिक, आर्थिक, राज.) स्वतंत्रता (विचार, अभिव्यक्ति) समता (अवसर और प्रतिष्ठा की) बंधुता (देश की एकता व अखंडता) JAC Class 9 Civics • संविधान निर्माण: 140 करोड़ नागरिकों की स्वतंत्रता, समानता और न्याय का सुरक्षा कवच

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
दक्षिण अफ्रीका में 1948 से 1994 तक श्वेत अल्पसंख्यकों ने अश्वेत व रंगीन चमड़ी वाले लोगों पर अमानवीय 'रंगभेद' (Apartheid) व्यवस्था थोपी थी।
मुख्य बिंदु 2
नेल्सन मंडेला और ANC के नेतृत्व में लंबे संघर्ष और मंडेला के 28 वर्षों के कारावास (रोबेन द्वीप) के बाद 26 अप्रैल 1994 को दक्षिण अफ्रीका में नया लोकतांत्रिक संविधान बना।
मुख्य बिंदु 3
संविधान के 4 प्रमुख कार्य: भरोसा और सहयोग का निर्माण, सरकार के गठन व शक्तियों का निर्धारण, सरकार की शक्तियों पर सीमाएं व नागरिक अधिकार, और अच्छे समाज की जन-आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति।
मुख्य बिंदु 4
भारतीय संविधान का निर्माण विभाजन की विभीषिका (10 लाख मौतें) और 565 देशी रियासतों के विलय (सरदार पटेल की भूमिका) की कठिन परिस्थितियों में हुआ।
मुख्य बिंदु 5
1928 का मोतीलाल नेहरू ड्राफ्ट और 1931 का कराची अधिवेशन सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और नागरिक स्वतंत्रता के अग्रदूत बने।
मुख्य बिंदु 6
संविधान सभा का गठन जुलाई 1946 में हुआ; इसकी पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई और इसके कुल 299 सदस्य थे।
मुख्य बिंदु 7
डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे और डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष थे।
मुख्य बिंदु 8
खूंटी (झारखंड) के आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा ने संविधान सभा में आदिवासियों के अधिकारों और 5वीं व 6वीं अनुसूची के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया।
मुख्य बिंदु 9
संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया और 26 जनवरी 1950 को पूर्ण रूप से लागू हुआ (गणतंत्र दिवस)।
मुख्य बिंदु 10
प्रस्तावना (Preamble) संविधान की आत्मा है जिसमें 'संप्रभु', 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष', 'लोकतांत्रिक गणराज्य', 'न्याय', 'स्वतंत्रता', 'समता' और 'बंधुता' जैसे बुनियादी मूल्य समाहित हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
दक्षिण अफ्रीका के किस प्रसिद्ध नेता को रंगभेदी सरकार ने 1964 में आजीवन कारावास देकर 28 वर्षों तक रोबेन द्वीप में कैद रखा था?
(A) डेसमंड टूटू
(B) नेल्सन मंडेला
(C) रॉबर्ट मुगाबे
(D) कोफी अन्नान
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
नेल्सन मंडेला को 28 वर्षों तक रोबेन द्वीप की जेल में रखा गया था; 1994 में वे दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने।
2
भारतीय संविधान सभा की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?
(A) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
(B) जवाहरलाल नेहरू
(C) डॉ. भीमराव अंबेडकर
(D) सरदार वल्लभभाई पटेल
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे और उन्हें भारतीय संविधान का जनक माना जाता है।
3
भारतीय संविधान को संविधान सभा द्वारा किस तिथि को विधिवत अंगीकृत (Adopted) किया गया था?
(A) 15 अगस्त 1947
(B) 26 जनवरी 1950
(C) 26 नवंबर 1949
(D) 9 दिसंबर 1946
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
26 नवंबर 1949 को संविधान अंगीकृत हुआ (संविधान दिवस), जबकि 26 जनवरी 1950 को यह पूर्ण रूप से लागू हुआ (गणतंत्र दिवस)।
4
झारखंड के किस प्रसिद्ध नेता और हॉकी कप्तान ने संविधान सभा में आदिवासियों के अधिकारों की पुरजोर वकालत की थी?
(A) बिरसा मुंडा
(B) जयपाल सिंह मुंडा
(C) शिबू सोरेन
(D) कार्तिक उरांव
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
जयपाल सिंह मुंडा (1928 ओलंपिक हॉकी विजेता कप्तान) ने संविधान सभा में आदिवासियों के अधिकारों और पाँचवीं अनुसूची हेतु ऐतिहासिक बहसें कीं।
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अध्याय 1: फ्रांसीसी क्रांति (The French Revolution) अध्याय 2: यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति (Socialism in Europe and the Russian Revolution) अध्याय 3: नात्सीवाद और हिटलर का उदय (Nazism and the Rise of Hitler) अध्याय 4: वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद (Forest Society and Colonialism) अध्याय 5: आधुनिक विश्व में चरवाहे (Pastoralists in the Modern World) अध्याय 6: भारत - आकार और स्थिति (India - Size and Location) अध्याय 7: भारत का भौतिक स्वरूप (Physical Features of India) अध्याय 8: अपवाह (Drainage) अध्याय 9: जलवायु (Climate) अध्याय 10: प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी (Natural Vegetation and Wildlife) अध्याय 11: जनसंख्या (Population) अध्याय 12: लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? (What is Democracy? Why Democracy?) अध्याय 13: संविधान निर्माण (Constitutional Design) अध्याय 14: चुनावी राजनीति (Electoral Politics) अध्याय 15: संस्थाओं का कामकाज (Working of Institutions) अध्याय 16: लोकतांत्रिक अधिकार (Democratic Rights) अध्याय 17: पालमपुर गाँव की कहानी (The Story of Village Palampur) अध्याय 18: संसाधन के रूप में लोग (People as Resource) अध्याय 19: निर्धनता: एक चुनौती (Poverty as a Challenge) अध्याय 20: भारत में खाद्य सुरक्षा (Food Security in India)

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