Follow Us
माध्यम चुनें / Select Medium:
Eng (English) Hindi (हिन्दी)
झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 9 • Social Science • अध्याय 10
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी (Natural Vegetation and Wildlife)

हमारा देश भारत विश्व के मुख्य 12 जैव विविधता (Mega Bio-diversity) वाले देशों में से एक है। लगभग 47,000 पादप प्रजातियों के साथ भारत विश्व में 10वें और एशिया में चौथे स्थान पर है। साथ ही भारत में लगभग 90,000 जातियों के जीव-जंतु पाए जाते हैं। यह अध्याय प्राकृतिक या अक्षत वनस्पति (Virgin Vegetation), देशी (Endemic) व विदेशी (Exotic) प्रजातियों, वनस्पति को प्रभावित करने वाले उच्चावच व जलवायु कारकों, भारत के 5 प्रमुख वनस्पति प्रकारों—उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन (Evergreen), उष्णकटिबंधीय पर्णपाती या मानसूनी वन (Deciduous), कंटीले वन व झाड़ियां (Thorn Forests), पर्वतीय वन (Montane), तथा मैंग्रोव या ज्वारीय वन (Mangrove)—का गहन तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसके अतिरिक्त यह भारत के अद्वितीय वन्यजीवों (एशियाई शेर, रॉयल बंगाल टाइगर, एक सींग वाला गैंडा), 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 18 जीवमंडल निचय (Biosphere Reserves), प्रोजेक्ट टाइगर, तथा झारखंड के समृद्ध वनों (साल/सखुआ—राजकीय वृक्ष) एवं बेतला राष्ट्रीय उद्यान (Betla National Park) व दलमा अभयारण्य का प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत करता है। झारखंड अधिविद्य परिषद् (JAC) बोर्ड परीक्षा में 'सदाबहार और पर्णपाती वनों में अंतर', 'मैंग्रोव वन की विशेषताएं', 'भारत में वन विनाश के कारण व संरक्षण के उपाय', तथा 'जीवमंडल निचय (बायोस्फीयर रिजर्व)' से जुड़े प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

सुंदरी के पेड़ और रॉयल बंगाल टाइगर: पानी में डूबी जड़ों वाला मैंग्रोव रहस्य

गंगा और ब्रह्मपुत्र के मुहाने पर फैला 'सुंदरवन' दुनिया का सबसे रहस्यमय जंगल है। यहाँ के पेड़—'सुंदरी' (Sundari)—दिन में दो बार समुद्र के खारे ज्वार के पानी में पूरी तरह जलमग्न हो जाते हैं। जब जमीन में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, तो इन पेड़ों की जड़ें गुरुत्वाकर्षण के विपरीत जमीन से ऊपर नुकीली खूंटियों (Pneumatophores) की तरह हवा में सांस लेने के लिए बाहर निकल आती हैं! इन्हीं खारे दलदली वनों में दुनिया का सबसे खतरनाक और सुंदर शिकारी—'रॉयल बंगाल टाइगर' तैरते हुए शिकार करता है। प्रकृति का यह अद्भूत तालमेल भारत की बेजोड़ जैव विविधता का जीता-जागता प्रमाण है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

वन केवल हरियाली नहीं हैं; वे वर्षा लाते हैं, मिट्टी का कटाव रोकते हैं, भूजल का पुनर्भरण करते हैं और वायुमंडल से कार्बन सोखते हैं। भारत का औषधीय ज्ञान (आयुर्वेद—सर्पगंधा, जामुन, तुलसी, नीम) इन्हीं वनों पर आधारित है। झारखंड का शाब्दिक अर्थ ही 'झाड़ियों या वनों का प्रदेश' (Land of Forests) है, जहाँ की 29% से अधिक भूमि वनाच्छादित है और आदिवासी संस्कृति (सरहुल, कर्मा) प्रकृति की पूजा से जुड़ी है। वनों की अवैध कटाई और वन्यजीवों के शिकार से आज अनेक प्रजातियां लुप्त होने की कगार पर हैं। JAC बोर्ड परीक्षा में भूगोल खंड का यह अध्याय पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से सर्वाधिक प्रासंगिक है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) और जैव विविधता (Biodiversity) की मूल अवधारणा।
  • वर्षा की मात्रा और वनस्पति के प्रकार के बीच सीधा संबंध।
  • सदाबहार (पत्ते न गिराने वाले) और पर्णपाती (पत्ते गिराने वाले) वृक्षों में अंतर।
  • भारत के मानचित्र पर प्रमुख राज्यों और वनीय क्षेत्रों की भौगोलिक अवस्थिति।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • प्राकृतिक (अक्षत) वनस्पति की परिभाषा और देशज (Endemic) व विदेशज (Exotic) प्रजातियों में भेद करना।
  • वनस्पति विविधता को प्रभावित करने वाले 5 कारकों (भूमि, मृदा, तापमान, सूर्य का प्रकाश, वर्षण) का विश्लेषण करना।
  • भारत के 5 प्रमुख वनस्पति प्रकारों—सदाबहार, पर्णपाती, कंटीले, पर्वतीय और मैंग्रोव वनों की भौगोलिक दशाओं व वृक्षों की तुलना करना।
  • उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनों को भारत के सबसे विस्तृत वन के रूप में समझना और आद्र व शुष्क पर्णपाती वनों में अंतर स्पष्ट करना।
  • भारत के समृद्ध वन्यजीव संसाधनों और उनके भौगोलिक वितरण (शेर, बाघ, हाथी, गैंडा) को जानना।
  • 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, प्रोजेक्ट टाइगर, बायोस्फीयर रिजर्व तथा झारखंड के बेतला राष्ट्रीय उद्यान के महत्व की समीक्षा करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. प्राकृतिक वनस्पति: अवधारणा एवं व...
2 2. भारत के वनस्पति प्रकार: उष्णकटिब...
3 3. कंटीले वन, पर्वतीय वन एवं मैंग्र...
4 4. भारत का वन्य प्राणी जगत और संकटग...
5 5. वन्यजीव संरक्षण, 18 जीवमंडल निचय...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. प्राकृतिक वनस्पति: अवधारणा एवं विविधता को प्रभावित करने वाले कारक

प्राकृतिक वनस्पति (Natural Vegetation): वनस्पति का वह भाग जो मनुष्य की सहायता के बिना अपने आप पैदा होता है और लंबे समय तक उस पर मानवीय प्रभाव नहीं पड़ता, उसे अक्षत वनस्पति (Virgin Vegetation) कहते हैं।

  • देशज या स्थानिक प्रजातियां (Endemic Species): वह वनस्पति जो मूल रूप से भारतीय है।
  • विदेशज प्रजातियां (Exotic Species): जो पौधे भारत के बाहर से लाए गए हैं (जैसे लेंटाना, जलकुंभी, विलायती बबूल)।
  • फ्लोरा (Flora): किसी क्षेत्र विशेष या अवधि के पादप जगत (पेड़-पौधे)।
  • फौना (Fauna): किसी क्षेत्र विशेष के वन्य प्राणी जगत (जीव-जंतु)।

वनस्पति और वन्यजीव विविधता को प्रभावित करने वाले 5 प्रमुख कारक:

  1. 1. धरातल - भूमि (Land): भूमि की प्रकृति का वनस्पति पर सीधा प्रभाव पड़ता है। उपजाऊ समतल भूमि पर कृषि की जाती है, जबकि ऊबड़-खाबड़ और असमतल भूभागों पर जंगल तथा घास के मैदान विकसित होते हैं जो वन्यजीवों को आश्रय देते हैं।
  2. 2. धरातल - मृदा (Soil): विभिन्न स्थानों पर भिन्न मृदा पाई जाती है। मरुस्थल की बलुई मृदा में कंटीली झाड़ियां उगती हैं, जबकि नदियों के डेल्टा में दलदली व मैंग्रोव वन और पर्वतों की ढलानों पर शंकुधारी वन पाए जाते हैं।
  3. 3. जलवायु - तापमान (Temperature): वनस्पति की विविधता और विशेषताएं तापमान और वायु की नमी पर निर्भर करती हैं। हिमालय की 915 मीटर से अधिक ऊंचाई पर तापमान गिरने से वनस्पति उष्णकटिबंधीय से उपोष्ण, शीतोष्ण और अल्पाइन में बदल जाती है।
  4. 4. जलवायु - सूर्य का प्रकाश (Photoperiod): अक्षांश, समुद्र तल से ऊंचाई और ऋतु के कारण किसी स्थान पर सूर्य के प्रकाश का समय बदलता रहता है। अधिक समय तक प्रकाश मिलने के कारण गर्मियों में वृक्ष तेजी से बढ़ते हैं।
  5. 5. जलवायु - वर्षण (Precipitation): भारत में लगभग सारी वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है। भारी वर्षा वाले क्षेत्रों (पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर) में कम वर्षा वाले क्षेत्रों की तुलना में सघन वन पाए जाते हैं।

2. भारत के वनस्पति प्रकार: उष्णकटिबंधीय सदाबहार एवं पर्णपाती वन

भारत में पाई जाने वाली प्राकृतिक वनस्पति को 5 मुख्य वर्गों में विभाजित किया गया है:

1. उष्णकटिबंधीय वर्षा वन या सदाबहार वन (Tropical Evergreen Forests):

  • भौगोलिक दशाएं: यह उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ 200 सेमी से अधिक वार्षिक वर्षा होती है और एक छोटा शुष्क मौसम होता है।
  • वितरण: पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, असम के ऊपरी भाग और तमिलनाडु का तट।
  • वृक्षों के लक्षण: वृक्ष 60 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई तक बढ़ते हैं। यहाँ वर्ष भर तापमान ऊंचा और आर्द्रता रहती है। वृक्षों के पत्ते गिराने का कोई निश्चित समय नहीं होता, इसलिए ये वन हमेशा हरे-भरे दिखाई देते हैं।
  • प्रमुख व्यापारिक वृक्ष: आबनूस (Ebony), महोगनी (Mahogany), रोजवुड (Rosewood), रबर (Rubber) और सिकोना (Cinchona - जिससे मलेरिया की दवा कुनैन बनती है)।
  • वन्यजीव: हाथी, बंदर, लैमूर, हिरण, एक सींग वाला गैंडा (असम व प. बंगाल के दलदल में), चमगादड़ और कई प्रकार के पक्षी।

2. उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन या मानसूनी वन (Tropical Deciduous Forests):

यह भारत में सबसे बड़े क्षेत्रफल में फैले हुए वन हैं। इन्हें 'मानसूनी वन' भी कहा जाता है। ये 70 सेमी से 200 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। जल की कमी होने पर शुष्क ग्रीष्मकाल में ये वृक्ष 6 से 8 सप्ताह के लिए अपने पत्ते गिरा देते हैं। जल की उपलब्धता के आधार पर इन्हें दो भागों में बांटा गया है:

उप-प्रकारवार्षिक वर्षा व वितरणप्रमुख वृक्ष प्रजातियां
आर्द्र पर्णपाती वन (Moist Deciduous)100 से 200 सेमी वर्षा; उत्तर-पूर्वी राज्य, हिमालय के गिरिपाद, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड (छोटानागपुर) तथा पश्चिमी घाट के पूर्वी ढाल।सागौन (Teak - सबसे प्रमुख), साल (Sal - सखुआ), शीशम, चंदन, खैर, कुसुम, अर्जुन और शहतूत।
शुष्क पर्णपाती वन (Dry Deciduous)70 से 100 सेमी वर्षा; प्रायद्वीपीय पठार के वर्षा वाले भाग, उत्तर प्रदेश और बिहार के मैदानी इलाके।सागौन, साल, पीपल और नीम। कृषि विस्तार के लिए इनका बड़ा भाग साफ कर दिया गया है।

3. कंटीले वन, पर्वतीय वन एवं मैंग्रोव वन

3. कंटीले वन तथा झाड़ियां (Tropical Thorn Forests and Scrubs):

  • भौगोलिक दशाएं: जिन क्षेत्रों में 70 सेमी से कम वार्षिक वर्षा होती है, वहाँ यह वनस्पति पाई जाती है।
  • वितरण: भारत का उत्तर-पश्चिमी भाग—गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के अर्ध-शुष्क इलाके।
  • पादप लक्षण: वृक्ष बिखरे हुए होते हैं। पौधों की जड़ें लंबी होती हैं जो जल की खोज में गहराई तक फैली होती हैं। वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) कम करने के लिए पत्तियां छोटी, मोटी और कांटों (Spines) में रूपांतरित हो जाती हैं।
  • प्रमुख वनस्पतियां: अकासिया (बबूल/कीकर), यूफोरबिया (Euphorbia), खजूर (Palm) और कैक्टस (नागफनी)। चूहे, खरगोश, लोमड़ी, भेड़िए, शेर, जंगली गधा और ऊंट यहाँ के मुख्य जीव हैं।

4. पर्वतीय वन (Montane Forests):

पर्वतीय क्षेत्रों में ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान में गिरावट के कारण वनस्पति के प्रकारों में स्पष्ट क्रमिक बदलाव देखा जाता है:

  1. 1,000 से 2,000 मीटर: आर्द्र शीतोष्ण कटिबंधीय वन; चौड़ी पत्ती वाले ओक (Oak) तथा चेस्टनट (Chestnut) के वृक्ष।
  2. 1,500 से 3,000 मीटर: शीतोष्ण कटिबंधीय शंकुधारी वन (Coniferous Forests); सीधे व नुकीली पत्तियों वाले वृक्ष—चीड़ (Pine), देवदार (Deodar), सिल्वर फर, स्प्रूस और सीडार (सीताशोक)।
  3. 3,600 मीटर से अधिक ऊंचाई: अल्पाइन वनस्पति (Alpine Vegetation); सिल्वर फर, जूनिपर, पाइन व बर्च के वृक्ष। हिमरेखा के निकट यह केवल झाड़ियों के रूप में रह जाते हैं। इनका उपयोग गुज्जर और बकरवाल जैसे घुमंतू चरवाहों द्वारा चराई के लिए किया जाता है। अति-उच्च बर्फीले क्षेत्रों में टुंड्रा वनस्पति (मॉस व लाइकेन) पाई जाती है।

5. मैंग्रोव वन या ज्वारीय वन (Mangrove Forests):

  • यह तटवर्ती क्षेत्रों में जहाँ ज्वार-भाटा (Tides) आते हैं, वहाँ की सबसे महत्वपूर्ण वनस्पति है। मिट्टी और बालू तटों पर संचित हो जाते हैं।
  • अनुकूलन: इस वनस्पति की जड़ें खारे पानी में डूबी रहती हैं और ऑक्सीजन हेतु हवा में बाहर निकलती हैं।
  • वितरण: गंगा, ब्रह्मपुत्र, महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों के डेल्टा भाग में।
  • सुंदरी वृक्ष (Sundari Tree): गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में बहुतायत में पाया जाता है जिससे कठोर और टिकाऊ मजबूत लकड़ी मिलती है। ताड़, नारियल, केवड़ा और एंगार के पेड़ भी पाए जाते हैं।
  • प्रसिद्ध जीव: विश्व प्रसिद्ध रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), मगरमच्छ, घड़ियाल और समुद्री कछुए।

4. भारत का वन्य प्राणी जगत और संकटग्रस्त प्रजातियां

भारत अपने जीव-जंतुओं की विविधता में भी अत्यंत धनी है। यहाँ मछलियों की 2,546 प्रजातियां (विश्व का 12%) और पक्षियों की 2,000 से अधिक प्रजातियां (विश्व का 13%) पाई जाती हैं।

प्रमुख वन्यजीव और उनके प्राकृतिक आवास:

  • हाथी (Elephant): असम, कर्नाटक और केरल के उष्ण व आर्द्र वनों के विशाल स्तनधारी प्राणी।
  • एक सींग वाला गैंडा (One-horned Rhinoceros): असम (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान) और पश्चिम बंगाल के दलदली वनों में पाया जाता है।
  • जंगली गधा (Wild Ass) और ऊंट: क्रमशः कच्छ के रण और थार मरुस्थल के जीव हैं।
  • शेर और बाघ का अद्वितीय देश: भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जहाँ शेर (Lion) और बाघ (Tiger) दोनों पाए जाते हैं। भारतीय एशियाई शेर का एकमात्र प्राकृतिक वास गुजरात का गिर जंगल (Gir Forest) है; जबकि बाघ मध्य प्रदेश, सुंदरवन और हिमालयी क्षेत्रों में रहते हैं।
  • लद्दाख के बर्फीले जीव: याक (गुच्छेदार सींगों वाला बैल - 1 टन वजन), तिब्बती बारहसिंगा, भारल (नीली भेड़), जंगली भेड़, कियांग (जंगली गधा), तथा अत्यंत दुर्लभ हिम तेंदुआ (Snow Leopard)।

पारिस्थितिक संकट के कारण:

मनुष्य द्वारा अपने लालच के लिए वनों की कटाई, अवैध शिकार (Poaching), रासायनिक व औद्योगिक कचरे द्वारा प्रदूषण, और विदेशी प्रजातियों के अतिक्रमण के कारण पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन बिगड़ गया है। लगभग 1,300 पादप प्रजातियां संकटग्रस्त हैं और 20 प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं।

5. वन्यजीव संरक्षण, 18 जीवमंडल निचय एवं झारखंड के वन

वनस्पति और जीव-संपत्ति की सुरक्षा के लिए भारत सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं:

1. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 (Wildlife Protection Act 1972):

वन्यजीवों के अवैध शिकार और व्यापार पर पूर्ण रोक लगाने तथा उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के लिए 1972 में यह ऐतिहासिक व्यापक कानून लागू किया गया।

2. 18 जीवमंडल निचय (Biosphere Reserves):

पारिस्थितिक तंत्र के समग्र संरक्षण के लिए देश में 18 बायोस्फीयर रिजर्व स्थापित किए गए हैं। इनमें से 12 (नीलगिरि, सुंदरवन, नंदा देवी, मन्नार की खाड़ी, नोकरेक, पंचमढ़ी, सिमलीपाल, अचानकमार-अमरकंटक आदि) यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में शामिल हैं। नीलगिरि (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक) भारत का पहला बायोस्फीयर रिजर्व (1986) था।

3. विशेष वन्यजीव परियोजनाएं:

बाघों की घटती संख्या को बचाने के लिए 1973 में 'प्रोजेक्ट टाइगर' (Project Tiger) शुरू किया गया। इसी प्रकार 'प्रोजेक्ट राइनो', 'प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' तथा 'प्रोजेक्ट एलिफेंट' चलाए जा रहे हैं। आज भारत में 100 से अधिक राष्ट्रीय उद्यान और 500 से अधिक वन्यजीव अभयारण्य हैं।

झारखंड के वन और वन्यजीव अभयारण्य:

  • झारखंड में उष्णकटिबंधीय आर्द्र और शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं। राज्य का कुल वन क्षेत्र लगभग 29.76% है (राष्ट्रीय औसत से अधिक)।
  • राजकीय वृक्ष 'साल' (सखुआ - Shorea robusta): साल झारखंड के वनों का प्रमुख वृक्ष है। आदिवासी समाज में सरहुल पर्व पर साल के फूलों की पूजा की जाती है। इसकी लकड़ी अत्यंत मजबूत और इमारती होती है।
  • बेतला राष्ट्रीय उद्यान (Betla National Park - लातेहार/पलामू): 1986 में स्थापित यह झारखंड का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है। 1973-74 में देश के पहले 9 'प्रोजेक्ट टाइगर' रिजर्वों में पलामू टाइगर रिजर्व शामिल था।
  • दलमा वन्यजीव अभयारण्य (Dalma Wildlife Sanctuary - पूर्वी सिंहभूम): हाथियों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध 'गज अभयारण्य' (Elephant Reserve) है।
  • हजारीबाग वन्यजीव अभयारण्य: सांभर, चीतल, तेंदुए और जंगली भालू के लिए प्रसिद्ध है।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

सदाबहार वन
वार्षिक वर्षा: 200+ सेमी | ऊंचाई: 60+ मीटर
आबनूस, महोगनी, रोजवुड, रबर, सिकोना; पत्ते गिराने का निश्चित समय नहीं।
पर्णपाती (मानसूनी) वन
वार्षिक वर्षा: 70 से 200 सेमी | भारत में सर्वाधिक
ग्रीष्मकाल में 6-8 सप्ताह पत्ते गिराते हैं; सागौन (Teak) व साल (सखुआ)।
कंटीले वन
वार्षिक वर्षा: 70 सेमी से कम
बबूल, कैक्टस, खजूर; पत्तियां छोटी व कांटों में रूपांतरित।
1972 ई.
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act)
शिकार पर पूर्ण कानूनी प्रतिबंध और अभयारण्यों का गठन।
1973 ई.
प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger)
पलामू (झारखंड) सहित देश भर में बाघ संरक्षण परियोजना।
नीलगिरि
भारत का प्रथम बायोस्फीयर रिजर्व (1986)
तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के संगम पर स्थित।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (लघु उत्तरीय): उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन और उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन में मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: सदाबहार और पर्णपाती वनों में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

लक्षणसदाबहार वन (Evergreen)पर्णपाती वन (Deciduous)
वर्षा की मात्रा200 सेमी से अधिक भारी वर्षा वाले क्षेत्र।70 से 200 सेमी मध्यम वर्षा वाले क्षेत्र।
पत्ते गिराने की प्रकृतिपत्ते गिराने का कोई निश्चित समय नहीं होता; वर्ष भर हरे-भरे दिखते हैं।शुष्क ग्रीष्मकाल में जल संरक्षण हेतु 6 से 8 सप्ताह के लिए पत्ते गिरा देते हैं।
प्रमुख वृक्षआबनूस, महोगनी, रोजवुड, रबर, सिकोना।सागौन (Teak), साल (सखुआ), शीशम, चंदन, नीम।
अंक योजना (Marking Scheme): वर्षा में अंतर: 1 अंक, पत्ते गिराने की प्रकृति में अंतर: 1 अंक, प्रमुख वृक्षों के उदाहरण: 1 अंक। कुल = 3 अंक।
उदाहरण 2
प्रश्न 2 (दीर्घ उत्तरीय): भारत में वनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वनों के ह्रास (Deforestation) के प्रमुख कारणों तथा संरक्षण के उपायों का वर्णन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: वन राष्ट्र की अमूल्य प्राकृतिक संपदा हैं:

1. वनों का महत्व:

  • पारिस्थितिक संतुलन: ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, वर्षा को आकर्षित करते हैं और मृदा अपरदन को रोकते हैं।
  • आर्थिक संसाधन: इमारती लकड़ी (साल, सागौन), जलावन, कागज उद्योग के लिए लुगदी, तथा महुआ, लाख, गोंद व औषधियां प्रदान करते हैं।

2. वन विनाश के प्रमुख कारण:

  • कृषि भूमि का विस्तार: बढ़ती जनसंख्या का पेट भरने के लिए वनों को काटकर खेत बनाए गए।
  • नगरीकरण व उद्योग: शहरों के फैलाव, सड़कों, रेलवे लाइनों और कारखानों की स्थापना के लिए अंधाधुंध कटाई।
  • खनन कार्य: विशेषकर झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में कोयला, लोहा व बॉक्साइट खदानों के लिए लाखों हेक्टेयर वन नष्ट हुए।
  • नदी घाटी परियोजनाएं: बड़े बांधों के बनने से विशाल वन क्षेत्र जलमग्न हो गए।

3. वन संरक्षण के उपाय:

  1. वनों की अंधाधुंध कटाई पर कड़ा कानूनी प्रतिबंध लगाना।
  2. 'वन महोत्सव' और व्यापक स्तर पर सामाजिक वानिकी (Social Forestry) को बढ़ावा देना।
  3. स्थानांतरी (झूम) खेती पर रोक लगाकर स्थायी कृषि को प्रोत्साहित करना।
  4. स्थानीय जनजातीय समुदायों को 'संयुक्त वन प्रबंधन' (JFM) में भागीदार बनाना।
अंक योजना (Marking Scheme): वनों का महत्व: 1.5 अंक, ह्रास के कारण: 1.5 अंक, संरक्षण के 4 उपाय: 2 अंक। कुल = 5 अंक।
उदाहरण 3
प्रश्न 3 (लघु उत्तरीय): 'मैंग्रोव वन' (Mangrove Forests) क्या हैं? इनकी प्रमुख विशेषताएं एवं इनमें पाए जाने वाले प्रसिद्ध वन्यजीव का नाम बताइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

मैंग्रोव वन:

समुद्र तटीय क्षेत्रों में जहाँ ज्वार-भाटा आते हैं, खारे और मीठे पानी के संगम पर विकसित होने वाली ज्वारीय वनस्पति को मैंग्रोव वन कहते हैं।

प्रमुख विशेषताएं:

  • इन पौधों की जड़ें खारे पानी में डूबी रहती हैं और सांस लेने के लिए खूंटियों की तरह जमीन से बाहर निकलती हैं।
  • गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में प्रसिद्ध 'सुंदरी' वृक्ष पाया जाता है जिससे कठोर व टिकाऊ लकड़ी मिलती है।
  • प्रसिद्ध वन्यजीव: विश्व प्रसिद्ध रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger) इन वनों का मुख्य शिकारी जीव है। इसके अलावा घड़ियाल और कछुए भी पाए जाते हैं।
अंक योजना (Marking Scheme): मैंग्रोव वन की परिभाषा: 1 अंक, जड़ें व सुंदरी वृक्ष की विशेषताएं: 1 अंक, रॉयल बंगाल टाइगर का उल्लेख: 1 अंक। कुल = 3 अंक।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (विश्लेषणात्मक): झारखंड के संदर्भ में राज्य की वन संपदा, प्रमुख वृक्ष 'साल' (सखुआ) और 'बेतला राष्ट्रीय उद्यान' के महत्व की समीक्षा कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

1. झारखंड की वन संपदा:

झारखंड का लगभग 29.76% भूभाग वनों से आच्छादित है। यहाँ मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय आर्द्र और शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं।

2. 'साल' (सखुआ) वृक्ष का महत्व:

  • 'साल' (Shorea robusta) झारखंड का राजकीय वृक्ष है।
  • यह अत्यंत कठोर और दीमक-रोधी लकड़ी प्रदान करता है जिसका उपयोग रेलवे स्लीपर, घर की चौखट और खंभे बनाने में होता है।
  • आदिवासी संस्कृति में इसका धार्मिक स्थान है; सरहुल पर्व पर सखुआ के फूलों की पूजा कर नए साल का स्वागत किया जाता है। इसके पत्तों से पत्तल और बीजों से तेल निकाला जाता है।

3. बेतला राष्ट्रीय उद्यान (Betla National Park):

लातेहार/पलामू जिले में स्थित यह झारखंड का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है। 1973 में शुरू हुए 'प्रोजेक्ट टाइगर' के तहत पहली बाघ गणना यहीं हुई थी। यहाँ हाथी, चीतल, तेंदुआ और सांभर सुरक्षित हैं।

अंक योजना (Marking Scheme): झारखंड के वनों का प्रतिशत व प्रकार: 1 अंक, साल/सखुआ का आर्थिक व सांस्कृतिक महत्व: 1 अंक, बेतला राष्ट्रीय उद्यान का महत्व: 1 अंक। कुल = 3 अंक।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भारत में सबसे अधिक क्षेत्रफल पर सदाबहार वन फैले होने का दावा करना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

भारत में सबसे बड़े क्षेत्रफल में 'उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन' (मानसूनी वन) फैले हैं; सदाबहार वन केवल अत्यधिक वर्षा वाले सीमित तटीय और पर्वतीय भागों में पाए जाते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

काजीरंगा और गिर के मुख्य वन्यजीवों को आपस में मिला देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

असम का 'काजीरंगा' एक सींग वाले गैंडे के लिए प्रसिद्ध है; जबकि गुजरात का 'गिर' एशियाई शेरों (Asiatic Lions) का एकमात्र प्राकृतिक आवास है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

झारखंड के बेतला राष्ट्रीय उद्यान को रांची या धनबाद में बताना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

बेतला राष्ट्रीय उद्यान झारखंड के लातेहार/पलामू जिले में स्थित है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

बायोस्फीयर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यान में अंतर न समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

राष्ट्रीय उद्यान केवल वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पूर्णतः संरक्षित क्षेत्र है, जबकि बायोस्फीयर रिजर्व एक विशाल पारिस्थितिक तंत्र है जहाँ पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय जनजातियों के पारंपरिक जीवन को भी संरक्षित किया जाता है।

भारत के 5 प्रमुख वनस्पति प्रकार एवं वन्यजीव संरक्षण तंत्र

प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य प्राणी: 5 वनस्पति प्रकार, जैव विविधता एवं संरक्षण 1. सदाबहार व पर्णपाती वन • उष्णकटिबंधीय सदाबहार (200+ सेमी): - 60+ मीटर ऊंचे, सदैव हरे-भरे - पश्चिमी घाट, असम, अंडमान-निकोबार - आबनूस, महोगनी, रोजवुड, रबर, सिकोना • उष्णकटिबंधीय पर्णपाती (मानसूनी): - भारत में सर्वाधिक क्षेत्रफल पर विस्तृत - ग्रीष्मकाल में 6-8 सप्ताह पत्ते गिराते हैं - सागौन (Teak), साल (सखुआ), शीशम झारखंड का राजकीय वृक्ष: साल (सखुआ) • सरहुल पर्व पर फूलों की पूजा • राज्य में 29.76% वनाच्छादन • छोटानागपुर के आर्द्र पर्णपाती वन 2. कंटीले, पर्वतीय व मैंग्रोव • कंटीले वन (वर्षा < 70 सेमी): - राजस्थान, गुजरात, म.प्र., दक्कन पठार - बबूल, कीकर, कैक्टस (पत्तियां कांटों में) • पर्वतीय वन (ऊंचाई अनुसार बदलाव): - 1500-3000 मी.: शंकुधारी (चीड़, देवदार) - 3600 मी.+: अल्पाइन (सिल्वर फर, बर्च) - टुंड्रा: काई (मॉस) और लाइकेन • मैंग्रोव वन (ज्वारीय वनस्पति): - खारे पानी में डूबी सांस लेने वाली जड़ें - सुंदरी वृक्ष (मजबूत इमारती लकड़ी) - गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा (सुंदरवन) रॉयल बंगाल टाइगर का वास स्थल तटीय अपरदन से रक्षा करते हैं 3. वन्यजीव एवं संरक्षण • भारत के गौरवशाली वन्यजीव: - एशियाई शेर (केवल गिर वन, गुजरात) - एक सींग वाला गैंडा (काजीरंगा, असम) - हाथी (असम, केरल, कर्नाटक) • कानूनी संरक्षण एवं योजनाएं: - 1972: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम - 1973: प्रोजेक्ट टाइगर - 18 बायोस्फीयर रिजर्व (नीलगिरि 1986) - 100+ नेशनल पार्क, 500+ अभयारण्य झारखंड के प्रमुख अभयारण्य • बेतला नेशनल पार्क (लातेहार/पलामू) • दलमा गज अभयारण्य (जमशेदपुर) • हजारीबाग वन्यजीव अभयारण्य

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
भारत 47,000 पादप और 90,000 प्राणी प्रजातियों के साथ विश्व के 12 महा-जैव विविधता (Mega Bio-diversity) वाले देशों में से एक है।
मुख्य बिंदु 2
मनुष्य के बिना उगने वाली वनस्पति को 'अक्षत वनस्पति' कहते हैं; भारत में उत्पन्न पौधे 'देशज' और बाहर से आए पौधे 'विदेशज' कहलाते हैं।
मुख्य बिंदु 3
वनस्पति विविधता को नियंत्रित करने वाले 5 मुख्य कारक हैं: भूमि, मृदा, तापमान, सूर्य का प्रकाश और वर्षण।
मुख्य बिंदु 4
उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन 200 सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं; 60 मीटर से ऊंचे आबनूस, महोगनी, रोजवुड और रबर यहाँ के मुख्य वृक्ष हैं।
मुख्य बिंदु 5
उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन भारत के सबसे बड़े भूभाग में फैले हैं; शुष्क ग्रीष्मकाल में 6-8 सप्ताह पत्ते गिराते हैं; सागौन और साल (सखुआ) मुख्य वृक्ष हैं।
मुख्य बिंदु 6
कंटीले वन 70 सेमी से कम वर्षा वाले राजस्थान और गुजरात में पाए जाते हैं जहाँ बबूल, कीकर और कैक्टस की पत्तियां कांटों में बदल जाती हैं।
मुख्य बिंदु 7
पर्वतीय वनों में ऊंचाई के साथ बदलाव आता है—1,500-3,000 मी. पर शंकुधारी वन (चीड़, देवदार) और 3,600 मी. पर अल्पाइन वनस्पति पाई जाती है।
मुख्य बिंदु 8
मैंग्रोव वन गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में खारे पानी में पाए जाते हैं जहाँ सुंदरी वृक्ष और रॉयल बंगाल टाइगर निवास करते हैं।
मुख्य बिंदु 9
गुजरात का गिर वन एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक वास है; काजीरंगा में एक सींग वाला गैंडा पाया जाता है।
मुख्य बिंदु 10
1972 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर लागू किया गया; झारखंड में बेतला राष्ट्रीय उद्यान और दलमा अभयारण्य प्रमुख हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
भारत में सबसे बड़े भौगोलिक क्षेत्रफल में निम्नलिखित में से कौन-सा वनस्पति प्रकार फैला हुआ है?
(A) उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
(B) उष्णकटिबंधीय पर्णपाती (मानसूनी) वन
(C) कंटीले वन तथा झाड़ियां
(D) मैंग्रोव (ज्वारीय) वन
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
उष्णकटिबंधीय पर्णपाती (मानसूनी) वन 70 से 200 सेमी वर्षा वाले विशाल भूभाग पर भारत में सबसे विस्तृत रूप से फैले हुए हैं।
2
सदाबहार वनों में पाए जाने वाले किस प्रसिद्ध वृक्ष की छाल से मलेरिया की दवा 'कुनैन' (Quinine) बनाई जाती है?
(A) महोगनी
(B) आबनूस
(C) सिकोना (Cinchona)
(D) रोजवुड
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
सिकोना (Cinchona) वृक्ष की छाल से मलेरिया की अचूक दवा कुनैन बनाई जाती है, जो उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में उगता है।
3
गुजरात का 'गिर जंगल' (Gir Forest) विश्व में किस दुर्लभ वन्य प्राणी का एकमात्र शेष प्राकृतिक आवास स्थल है?
(A) रॉयल बंगाल टाइगर
(B) एक सींग वाला गैंडा
(C) एशियाई शेर (Asiatic Lion)
(D) हिम तेंदुआ
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
गुजरात का गिर जंगल एशियाई शेरों (Asiatic Lions) का दुनिया में एकमात्र प्राकृतिक आवास है।
4
झारखंड का 'राजकीय वृक्ष' (State Tree) कौन-सा है, जिसकी पूजा सरहुल पर्व पर की जाती है?
(A) सागौन (Teak)
(B) साल या सखुआ (Sal)
(C) शीशम
(D) महुआ
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
साल (सखुआ - Shorea robusta) झारखंड का राजकीय वृक्ष है और इसके फूलों की पूजा सरहुल के पावन पर्व पर की जाती है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

ऑनलाइन CBT टेस्ट देकर तैयारी का मूल्यांकन करें

झारखण्ड बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का ऑनलाइन टेस्ट दें। तुरंत परिणाम, समय विश्लेषण और प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत हल प्राप्त करें।

कक्षा 9 Social Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: फ्रांसीसी क्रांति (The French Revolution) अध्याय 2: यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति (Socialism in Europe and the Russian Revolution) अध्याय 3: नात्सीवाद और हिटलर का उदय (Nazism and the Rise of Hitler) अध्याय 4: वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद (Forest Society and Colonialism) अध्याय 5: आधुनिक विश्व में चरवाहे (Pastoralists in the Modern World) अध्याय 6: भारत - आकार और स्थिति (India - Size and Location) अध्याय 7: भारत का भौतिक स्वरूप (Physical Features of India) अध्याय 8: अपवाह (Drainage) अध्याय 9: जलवायु (Climate) अध्याय 10: प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी (Natural Vegetation and Wildlife) अध्याय 11: जनसंख्या (Population) अध्याय 12: लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? (What is Democracy? Why Democracy?) अध्याय 13: संविधान निर्माण (Constitutional Design) अध्याय 14: चुनावी राजनीति (Electoral Politics) अध्याय 15: संस्थाओं का कामकाज (Working of Institutions) अध्याय 16: लोकतांत्रिक अधिकार (Democratic Rights) अध्याय 17: पालमपुर गाँव की कहानी (The Story of Village Palampur) अध्याय 18: संसाधन के रूप में लोग (People as Resource) अध्याय 19: निर्धनता: एक चुनौती (Poverty as a Challenge) अध्याय 20: भारत में खाद्य सुरक्षा (Food Security in India)

AI अध्ययन मित्र

त्वरित शंका समाधान

प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी (Natural Vegetation and Wildlife) में कोई संदेह या प्रश्न है? हमारे AI अध्ययन मित्र से तुरंत समझें।