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JAC • Class 9 • Social Science • Ch 2
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Socialism in Europe and the Russian Revolution

1917 की रूसी क्रांति (Russian Revolution) आधुनिक विश्व के इतिहास की वह घटना थी जिसने पहली बार समाजवाद (Socialism) को केवल एक दार्शनिक सिद्धांत से निकालकर एक सशक्त वैश्विक महाशक्ति के शासन तंत्र में रूपांतरित किया। यह अध्याय 19वीं सदी के यूरोप में तीन वैचारिक धाराओं—उदारवादी (Liberals), परिवर्तनवादी (Radicals) और रूढ़िवादी (Conservatives)—के टकराव, कार्ल मार्क्स (Karl Marx) के वैज्ञानिक समाजवाद, ज़ार निकोलस द्वितीय (Tsar Nicholas II) के निरंकुश शासन, 1905 के खूनी रविवार (Bloody Sunday), प्रथम विश्व युद्ध के भयावह प्रभावों, 1917 की फरवरी क्रांति (February Revolution) द्वारा ज़ारशाही के पतन, व्लादिमीर लेनिन (Vladimir Lenin) की 'अप्रैल थीसिस' (April Theses), अक्टूबर क्रांति (October Revolution) द्वारा बोल्शेविक सत्ता की स्थापना, गृहयुद्ध (Civil War), और स्टालिन (Joseph Stalin) के सामूहिकीकरण कार्यक्रम (Collectivisation Programme) का समग्र और प्रमाणिक ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत करता है। झारखंड अधिविद्य परिषद् (JAC) बोर्ड परीक्षा में 'खूनी रविवार', 'लेनिन की अप्रैल थीसिस', 'फरवरी और अक्टूबर क्रांति में अंतर', तथा 'स्टालिन के सामूहिकीकरण की नीतियां' से जुड़े प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

खूनी रविवार 1905: विंटर पैलेस की बर्फीली सड़कों पर लिखा गया क्रांति का पहला अध्याय

22 जनवरी 1905 को सेंट पीटर्सबर्ग (St. Petersburg) की जमा देने वाली सर्दी में पादरी गैपॉन (Father Gapon) के नेतृत्व में एक लाख से अधिक निहत्थे मजदूर, औरतें और बच्चे अपने आराध्य 'ज़ार' (Tsar) को अपनी नारकीय जीवन स्थितियों की गुहार लगाने विंटर पैलेस (Winter Palace) की ओर शांतिपूर्वक बढ़ रहे थे। उनके हाथों में ज़ार की तस्वीरें और धार्मिक झंडे थे। लेकिन ज़ार की पुलिस और कॉसैक्स (Cossacks) घुड़सवार सेना ने उन पर अंधाधुंध गोलियों की बौछार कर दी। 100 से अधिक मजदूर शहीद हुए और 300 से अधिक घायल होकर बर्फ पर खून से लथपथ तड़पते रहे। उस रविवार ने जनता के मन से ज़ार के प्रति शताब्दियों पुराने अंधविश्वास को सदा के लिए मिटा दिया और 1905 की पहली रूसी क्रांति का बिगुल फूंक दिया।

Why This Chapter Matters

रूसी क्रांति ने सिद्ध किया कि किसानों और श्रमिकों के हाथों में सत्ता संभव है। इसने दुनिया भर में उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलनों (Anti-colonial Movements) को नई ऊर्जा दी। भारत के स्वाधीनता आंदोलन में जवाहरलाल नेहरू, एम. एन. रॉय और भगत सिंह जैसे नेताओं ने सोवियत संघ के आर्थिक नियोजन (Planning) और समाजवाद से प्रेरणा ली। भारतीय संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' शब्द और योजना आयोग (अब नीति आयोग) द्वारा पंचवर्षीय योजनाओं की परंपरा इसी ऐतिहासिक परिघटना की दूरगामी विरासत है। JAC बोर्ड परीक्षा में इतिहास खंड में यह अध्याय सबसे अधिक अंकदायी अध्यायों में शामिल है।

Before You Begin (Prerequisites)

  • पूंजीवाद (Capitalism) और समाजवाद (Socialism) की बुनियादी अवधारणाओं की समझ।
  • यूरोप में औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) के कारण सामाजिक व श्रमिक वर्ग में आए परिवर्तन।
  • प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के प्रमुख गठबंधनों (मित्र राष्ट्र व केंद्रीय शक्तियां) का ज्ञान।
  • रूस के मानचित्र पर सेंट पीटर्सबर्ग (पेट्रोग्राद) और मॉस्को की भौगोलिक अवस्थिति।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • 19वीं सदी के यूरोप में उदारवादी, रेडिकल और रूढ़िवादी विचारधाराओं के सामाजिक दृष्टिकोण में अंतर स्पष्ट करना।
  • कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स के साम्यवादी सिद्धांतों तथा रॉबर्ट ओवेन व लुई ब्लांक के सहकारिता मॉडलों का विश्लेषण करना।
  • 1905 की क्रांति के कारणों, 'खूनी रविवार' की घटना और डूमा (Duma) के गठन की परिस्थितियों को समझना।
  • प्रथम विश्व युद्ध के कारण रूस में उत्पन्न आर्थिक, सैन्य और खाद्य संकट का मूल्यांकन करना।
  • 1917 की फरवरी क्रांति (जारशाही का पतन) और अक्टूबर क्रांति (बोल्शेविकों का नियंत्रण) की घटनाओं की तुलना करना।
  • लेनिन की 'अप्रैल थीसिस' और स्टालिन के सामूहिकीकरण (Kolkhoz) तथा कुलाकों (Kulaks) के विरुद्ध अभियानों की समीक्षा करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. 19वीं सदी का यूरोप: सामाजिक परिव...
2 2. 1914 में रूसी साम्राज्य: अर्थव्य...
3 3. 1905 की उथल-पुथल: खूनी रविवार और...
4 4. प्रथम विश्व युद्ध और 1917 की फरव...
5 5. लेनिन की 'अप्रैल थीसिस' और अक्टू...
6 6. गृहयुद्ध, आर्थिक नियोजन और स्टाल...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. 19वीं सदी का यूरोप: सामाजिक परिवर्तन और राजनीतिक धाराएं

फ्रांसीसी क्रांति ने समाज में नाटकीय परिवर्तन की संभावना के द्वार खोल दिए थे। परंतु यूरोप में सभी लोग समाज के पूर्ण पुनर्गठन के पक्ष में नहीं थे। विचारों के आधार पर तीन प्रमुख धाराएं उभरीं:

तीन राजनीतिक विचारधाराओं का तुलनात्मक विश्लेषण:

वैचारिक धाराधर्म व राजतंत्र पर विचारमताधिकार (Voting Rights)संपत्ति व विशेषाधिकार
उदारवादी (Liberals)सभी धर्मों को बराबर सम्मान; राजाओं की अनियंत्रित सत्ता के विरोधी; न्यायपालिका द्वारा शासित संसदीय सरकार के पक्षधर।वे लोकतंत्रवादी नहीं थे। केवल संपत्तिधारी पुरुषों को वोट का अधिकार चाहते थे; महिलाओं के मताधिकार के सख्त विरोधी थे।व्यक्तिगत संपत्ति के समर्थक; जन्मना विशेषाधिकारों के विरोधी।
रेडिकल / परिवर्तनवादी (Radicals)ऐसी सरकार चाहते थे जो देश की अधिकांश आबादी के बहुमत के समर्थन पर आधारित हो।सार्वभौमिक मताधिकार के समर्थक; महिलाओं के मताधिकार आंदोलन (Suffragette Movement) का पुरजोर समर्थन किया।जमींदारों और संपन्न उद्योगपतियों के विशेषाधिकारों के विरोधी; निजी संपत्ति के विरोधी नहीं थे, पर कुछ ही हाथों में संपत्ति के संकेंद्रण के विरोधी थे।
रूढ़िवादी (Conservatives)आरंभ में किसी भी बदलाव के विरोधी; प्राचीन संस्थाओं और परंपराओं के समर्थक।जनसाधारण के मताधिकार के विरोधी; कुलीन वर्ग के वर्चस्व के समर्थक।19वीं सदी तक आते-आते वे धीमी गति के क्रमिक बदलाव को स्वीकार करने लगे, परंतु अतीत का सम्मान अनिवार्य मानते थे।

औद्योगिक क्रांति और समाजवाद का आगमन:

औद्योगिक क्रांति ने नए शहरों, रेलवे और कारखानों को जन्म दिया। इसके साथ ही पुरुषों, औरतों और बच्चों को 12 से 16 घंटे तक कारखानों में काम करना पड़ता था, मजदूरी बहुत कम थी और आवास व स्वच्छता की स्थिति दयनीय थी।

समाजवादी विचारक:

  • रॉबर्ट ओवेन (Robert Owen - 1771-1858): एक अंग्रेज उद्योगपति जिन्होंने इंडियाना (अमेरिका) में 'न्यू हार्मनी' (New Harmony) नामक एक सहकारिता (Co-operative) समुदाय की स्थापना की। वे व्यक्तिगत पहल पर सहकारी समुदाय बनाना चाहते थे।
  • लुई ब्लांक (Louis Blanc - 1813-1882): फ्रांस के विचारक जिनका मानना था कि केवल व्यक्तिगत प्रयास पर्याप्त नहीं हैं; सरकार को सहकारी समितियों को बढ़ावा देना चाहिए ताकि पूंजीवादी उद्यमों की जगह ली जा सके।
  • कार्ल मार्क्स (Karl Marx - 1818-1883) और फ्रेडरिक एंगेल्स (Friedrich Engels - 1820-1895): मार्क्स ने तर्क दिया कि औद्योगिक समाज 'पूंजीवादी' (Capitalist) है। कारखानों में लगी पूंजी पर मालिकों का नियंत्रण है और उनका मुनाफा मजदूरों की मेहनत से पैदा होता है। जब तक निजी पूंजीपति मुनाफे पर कब्जा रखेंगे, मजदूरों की दशा नहीं सुधर सकती। मजदूरों को निजी संपत्ति के नियंत्रण को उखाड़ फेंकना होगा और एक कट्टर साम्यवादी समाज (Communist Society) बनाना होगा जहाँ सारी संपत्ति पर पूरे समाज का सामूहिक नियंत्रण हो।

2. 1914 में रूसी साम्राज्य: अर्थव्यवस्था, समाज और निरंकुश ज़ारशाही

1914 में रूस और उसके विशाल साम्राज्य पर ज़ार निकोलस द्वितीय (Tsar Nicholas II) का शासन था। रूसी साम्राज्य में आज के फिनलैंड, लातविया, लिथुआनिया, एस्टोनिया, पोलैंड, यूक्रेन, बेलारूस, जॉर्जिया, आर्मेनिया, अज़रबैजान और मध्य एशियाई देश शामिल थे। बहुसंख्यक धर्म रूसी रूढ़िवादी ईसाईयत (Russian Orthodox Christianity) था, पर साम्राज्य में कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट, मुस्लिम और बौद्ध भी रहते थे।

रूसी समाज की अनूठी विशेषताएं:

  • कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था: 20वीं सदी की शुरुआत में रूस की आबादी का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर था (जबकि फ्रांस और जर्मनी में यह अनुपात 40 से 50 प्रतिशत था)। रूस अनाज का एक बड़ा निर्यातक था।
  • उद्योगों का संकेंद्रण: उद्योग बहुत कम थे—मुख्यतः सेंट पीटर्सबर्ग और मॉस्को में। धातु और कोयला उत्पादन में भारी वृद्धि हुई थी। विदेशी पूंजी से चलने वाले कारखानों में सरकार नजर रखती थी, फिर भी कार्य दिवस 15 घंटे तक लंबा होता था।
  • विभाजित मजदूर वर्ग: मजदूर अपने सामाजिक मूल और कौशल के आधार पर बंटे हुए थे। जैसे सेंट पीटर्सबर्ग के धातु मजदूर स्वयं को 'अभिजात' मानते थे क्योंकि उनके काम में प्रशिक्षण की अधिक आवश्यकता थी। महिलाओं की संख्या 31% थी, पर उन्हें पुरुषों की तुलना में कम वेतन (आधा से तीन-चौथाई) मिलता था। विभाजन के बावजूद हड़तालों के समय मजदूर एकजुट हो जाते थे।
  • किसानों का 'मीर' (Commune): रूस के किसान अन्य यूरोपीय किसानों से भिन्न थे। वे समय-समय पर अपनी जमीन अपने समुदाय 'मीर' (Mir) को सौंप देते थे और फिर प्रत्येक परिवार की आवश्यकतानुसार जमीन बांटी जाती थी। इसी कारण बहुत से रूसी समाजवादियों का मानना था कि रूसी किसान स्वाभाविक रूप से 'समाजवादी' हैं और रूस यूरोप में समाजवाद का पहला केंद्र बनेगा।

राजनीतिक दल:

1914 से पहले रूस में सभी राजनीतिक दल गैर-कानूनी थे। 1898 में 'रशियन सोशल डेमोक्रेटिक वर्कर्स पार्टी' बनी, जो बाद में दो धड़ों में बंट गई:

  1. बोल्शेविक (Bolsheviks): बहुमत वाला गुट, जिसका नेता व्लादिमीर लेनिन था। लेनिन का मानना था कि ज़ारशाही के दमनकारी शासन में पार्टी को अत्यंत अनुशासित और चुनिंदा समर्पित कार्यकर्ताओं की होनी चाहिए।
  2. मेन्शेविक (Mensheviks): अल्पसंख्यक गुट, जिसका नेता मार्तोव था। वे पार्टी को जर्मनी की तरह सभी के लिए खुली रखने के पक्षधर थे।

3. 1905 की उथल-पुथल: खूनी रविवार और पहली संसद (डूमा)

रूस एक निरंकुश राजतंत्र था। ज़ार संसद के प्रति जवाबदेह नहीं था। 1904 का वर्ष रूसी मजदूरों के लिए बुरा रहा; जरूरी चीजों के दाम तेजी से बढ़े और वास्तविक वेतन में 20% की गिरावट आई।

खूनी रविवार (Bloody Sunday) की घटना:

जब पुतिलोव आयरन वर्क्स के 4 मजदूरों को निकाल दिया गया, तो सेंट पीटर्सबर्ग में 1,10,000 से अधिक मजदूर 8 घंटे के कार्य दिवस, मजदूरी में वृद्धि और कार्य स्थितियों में सुधार की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए। 22 जनवरी 1905 (रविवार) को जब पादरी गैपॉन के नेतृत्व में मजदूरों का शांतिपूर्ण जुलूस ज़ार के विंटर पैलेस पहुंचा, तो पुलिस और कॉसैक्स ने उन पर हमला कर दिया। 100 से अधिक मजदूर मारे गए और लगभग 300 घायल हुए।

1905 की क्रांति के परिणाम:

  • देशभर में हड़तालों की लहर दौड़ गई, विश्वविद्यालयों को बंद कर दिया गया, वकीलों, डॉक्टरों और इंजीनियरों ने 'यूनियन ऑफ यूनियंस' बनाकर संविधान सभा की मांग की।
  • अभूतपूर्व जनदबाव के कारण ज़ार निकोलस द्वितीय ने एक निर्वाचित परामर्शदाता संसद—डूमा (Duma)—के गठन को मंजूरी दी।
  • परंतु ज़ार ने अपनी सत्ता को सीमित नहीं होने दिया। उसने मात्र 75 दिनों के भीतर पहली डूमा को बर्खास्त कर दिया और 3 महीने के भीतर दूसरी डूमा को भी भंग कर दिया। तीसरी डूमा में उसने मतदान कानूनों में हेरफेर करके केवल रूढ़िवादी राजभक्तों को भरा।

4. प्रथम विश्व युद्ध और 1917 की फरवरी क्रांति (ज़ारशाही का पतन)

1914 में प्रथम विश्व युद्ध छिड़ा। रूस मित्र राष्ट्रों (ब्रिटेन, फ्रांस, बाद में अमेरिका) के साथ था, जबकि उसके विरुद्ध केंद्रीय शक्तियां (जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी और तुर्की) थीं।

युद्ध का रूस पर विनाशकारी प्रभाव:

  • रूस की सेनाएं जर्मनी और ऑस्ट्रिया के हाथों भारी पराजित हुईं। 1917 तक रूस के 70 लाख सैनिक मारे जा चुके थे। पीछे हटती रूसी सेना ने फसलों और इमारतों को नष्ट कर दिया ताकि दुश्मन उनका उपयोग न कर सके, जिससे रूस में 30 लाख से अधिक लोग शरणार्थी बन गए।
  • जर्मनी द्वारा बाल्टिक सागर का नियंत्रण कर लिए जाने से रूस का आयात-निर्यात कट गया। रेलवे लाइनें टूट गईं। 1916 तक रोटी और आटे की भारी किल्लत हो गई और दुकानों पर दंगे आम बात हो गए।
  • ज़ार की पत्नी रानी एलेक्जेंड्रा के जर्मन मूल और उसके भ्रष्ट संत सलाहकार रासपुतिन (Rasputin) ने राजशाही को अत्यधिक अलोकप्रिय बना दिया था।

फरवरी 1917 की क्रांति (पेट्रोग्राद):

सर्दियों में भारी बर्फबारी और रोटी के अभाव के बीच 22 फरवरी 1917 को पेट्रोग्राद की नेवा नदी के दाएं तट पर स्थित एक कारखाने में तालाबंदी हो गई। अगले दिन 50 कारखानों के मजदूरों ने हड़ताल की। इस आंदोलन का नेतृत्व बहुत से कारखानों में महिलाओं ने किया, इसलिए 23 फरवरी (रूसी कैलेंडर) को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में जाना गया।

25 फरवरी को सरकार ने डूमा को निलंबित कर दिया। 27 फरवरी को प्रदर्शनकारियों ने पुलिस मुख्यालयों को तहस-नहस कर दिया। जब सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के लिए घुड़सवार सेना बुलाई, तो सैनिकों ने मजदूरों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया और वे खुद हड़ताली मजदूरों के साथ आ मिले। उसी शाम सैनिकों और मजदूरों ने मिलकर उसी भवन में, जहाँ डूमा मिलती थी, 'पेट्रोग्राद सोवियत' (Petrograd Soviet) की स्थापना की।

सैनिक कमांडरों की सलाह पर 2 मार्च 1917 को ज़ार निकोलस द्वितीय ने गद्दी छोड़ दी (Abdicated)। सोवियत और डूमा के नेताओं ने मिलकर देश का शासन चलाने के लिए एक अस्थायी सरकार (Provisional Government) का गठन किया, जिसका नेतृत्व केरेन्स्की (Alexander Kerensky) के हाथों में आया। इस प्रकार बिना किसी बड़े रक्तपात के शताब्दियों पुरानी निरंकुश ज़ारशाही का अंत हो गया।

5. लेनिन की 'अप्रैल थीसिस' और अक्टूबर 1917 की बोल्शेविक क्रांति

अप्रैल 1917 में बोल्शेविक नेता व्लादिमीर लेनिन निर्वासन (Exile) से रूस लौटे। लेनिन और बोल्शेविक 1914 से ही युद्ध का विरोध कर रहे थे। उन्होंने महसूस किया कि अब सोवियतों को सत्ता अपने हाथ में ले लेनी चाहिए।

लेनिन की प्रसिद्ध 'अप्रैल थीसिस' (Lenin's April Theses):

लेनिन ने तीन बुनियादी मांगें रखीं जिन्हें 'अप्रैल थीसिस' कहा जाता है:

  1. युद्ध को तुरंत समाप्त किया जाए (War be brought to a close)।
  2. सारी जमीन किसानों के हवाले की जाए (Land be transferred to the peasants)।
  3. बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जाए (Banks be nationalised)।

उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि बोल्शेविक पार्टी का नाम बदलकर कम्युनिस्ट पार्टी रख दिया जाए।

अक्टूबर 1917 की क्रांति:

अस्थायी सरकार और बोल्शेविकों के बीच टकराव बढ़ता गया। केरेन्स्की की सरकार ने बोल्शेविकों के खिलाफ दमनकारी कदम उठाए। 16 अक्टूबर 1917 को लेनिन ने पेट्रोग्राद सोवियत और बोल्शेविक पार्टी को सत्ता पर कब्जा करने के लिए राजी कर लिया। लियोन ट्रॉटस्की (Leon Trotsky) के नेतृत्व में सोवियत ने एक 'सैनिक क्रांतिकारी समिति' (Military Revolutionary Committee) का गठन किया।

24 अक्टूबर 1917 को विद्रोह शुरू हुआ। प्रधानमंत्री केरेन्स्की शहर छोड़कर भाग गया। रात होते-होते युद्धपोत 'ऑरोरा' (Aurora) ने विंटर पैलेस पर बमबारी की और क्रांतिकारी सैनिकों ने सभी सरकारी दफ्तरों, टेलीग्राफ स्टेशनों और मंत्रालयों पर नियंत्रण कर लिया। ऑल रशियन कांग्रेस ऑफ सोवियट्स ने बोल्शेविक कार्रवाई को मंजूरी दे दी। दिसंबर तक मॉस्को-पेट्रोग्राद क्षेत्र पर बोल्शेविकों का पूर्ण नियंत्रण हो गया।

अक्टूबर क्रांति के बाद आए प्रमुख परिवर्तन:

  • नवंबर 1917 में अधिकांश उद्योगों और बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।
  • भूमि को सामाजिक संपत्ति घोषित किया गया और किसानों को कुलीनों की जमीन पर कब्जा करने की खुली छूट दी गई।
  • अभिजात वर्ग की पुरानी पदवियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। सेना और अधिकारियों की नई वर्दियां बनाई गईं (जैसे सोवियत टोपी - बुदियोनोव्का)।
  • रूस ने मार्च 1918 में ब्रेस्ट-लिटोव्स्क में जर्मनी के साथ शांति संधि करके प्रथम विश्व युद्ध से अलग होने का फैसला किया।

6. गृहयुद्ध, आर्थिक नियोजन और स्टालिन का सामूहिकीकरण (Collectivisation)

बोल्शेविकों की भूमि पुनर्वितरण की नीति से रूसी सेना बिखरने लगी क्योंकि अधिकांश सैनिक किसान थे और जमीन पाने के लिए घर लौटने लगे। गैर-बोल्शेविक समाजवादियों, उदारवादियों और ज़ार के समर्थकों ने बोल्शेविकों के खिलाफ विद्रोह किया।

गृहयुद्ध (Civil War - 1918-1920):

रूस में तीन गुटों के बीच खूनी संघर्ष छिड़ा:

  • रेड्स (Reds): बोल्शेविक कम्युनिस्ट।
  • ग्रीन्स (Greens): समाजवादी क्रांतिकारी (Socialist Revolutionaries)।
  • व्हाइट्स (Whites): ज़ार समर्थक (Pro-Tsarists)।

व्हाइट्स और ग्रीन्स को फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका और जापान की सैन्य सहायता मिली, जो रूस में समाजवाद के प्रसार से भयभीत थे। परंतु जनवरी 1920 तक बोल्शेविकों ने गैर-रूसी राष्ट्रीयताओं और मुस्लिम 'जदीदियों' (Jadidists) के सहयोग से अधिकांश रूसी साम्राज्य पर विजय प्राप्त कर ली। दिसंबर 1922 में सोवियत संघ—यूएसएसआर (USSR - Union of Soviet Socialist Republics) की औपचारिक स्थापना हुई।

केंद्रीकृत नियोजन और पंचवर्षीय योजनाएं:

सोवियत संघ ने आर्थिक विकास के लिए पंचवर्षीय योजनाएं (Five Year Plans) लागू कीं (पहली योजना 1927-1932 और दूसरी 1933-1938)। सरकार ने सभी औद्योगिक उत्पादों की कीमतें तय कीं। तेल, कोयला और स्टील के उत्पादन में शत-प्रतिशत वृद्धि हुई। एक विस्तारित शिक्षा प्रणाली विकसित की गई और फैक्ट्रियों में मजदूरों के बच्चों के लिए बालवाड़ियां (Crèches) स्थापित की गईं।

स्टालिन का सामूहिकीकरण कार्यक्रम (1929):

1927-1928 में सोवियत शहरों में अनाज का भारी संकट पैदा हो गया। किसान सरकार द्वारा तय कीमतों पर अनाज बेचने को तैयार नहीं थे। लेनिन की मृत्यु (1924) के बाद पार्टी के सर्वेसर्वा बने जोसेफ स्टालिन ने कठोर कदम उठाए:

  • कुलाकों (Kulaks) का उन्मूलन: संपन्न किसानों को 'कुलाक' कहा जाता था। स्टालिन का मानना था कि कुलाक अधिक मुनाफे के लिए अनाज की जमाखोरी कर रहे हैं। 1928 में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कुलाकों के ठिकानों पर छापे मारे और उनके अनाज के भंडार जब्त किए।
  • कोलखोज (Kolkhoz - सामूहिक खेत): 1929 से पार्टी ने सभी किसानों को सामूहिक खेतों (कोलखोज) में काम करने के लिए बाध्य किया। अधिकांश जमीन और औजार सामूहिक खेतों के सुपुर्द कर दिए गए। सारे किसान मिलकर काम करते थे और मुनाफे को बराबर बांटा जाता था।
  • किसानों का विरोध और भयंकर अकाल: किसानों ने इस जबरन सामूहिकीकरण का भारी विरोध किया और अपने मवेशियों को मार डाला (1929 से 1931 के बीच मवेशियों की संख्या में एक-तिहाई की कमी आई)। विरोध करने वालों को कड़ी सजा दी गई, देश निकाला दिया गया या साइबेरिया भेज दिया गया।
  • सामूहिकीकरण के तुरंत बाद उत्पादन में वृद्धि नहीं हुई, बल्कि 1930-1933 के बीच सोवियत इतिहास का सबसे विनाशकारी अकाल पड़ा, जिसमें 40 लाख से अधिक लोग मारे गए।

Key Historical Terms, Chronology & Administrative Principles

1848 ई.
द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो (The Communist Manifesto)
कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स द्वारा वैज्ञानिक समाजवाद की घोषणा।
22 जनवरी 1905
खूनी रविवार (Bloody Sunday)
सेंट पीटर्सबर्ग में पादरी गैपॉन के जुलूस पर गोलीबारी; 1905 की पहली क्रांति का आरंभ।
2 मार्च 1917
ज़ार निकोलस द्वितीय का पदत्याग (Abdication)
फरवरी क्रांति की सफलता; 300 वर्ष पुराने रोमानोव राजवंश का अंत।
अप्रैल 1917
लेनिन की 'अप्रैल थीसिस' (April Theses)
तीन मांगें: युद्ध समाप्ति, जमीन किसानों को, और बैंकों का राष्ट्रीयकरण।
24-25 अक्टूबर 1917
अक्टूबर क्रांति (Bolshevik Takeover)
अस्थायी सरकार का तख्तापलट और सोवियत सत्ता की स्थापना।
1929 ई.
स्टालिन का सामूहिकीकरण (Collectivisation Drive)
सामूहिक खेती 'कोलखोज' की शुरुआत और कुलाकों का दमन।

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
प्रश्न 1 (लघु उत्तरीय): 'खूनी रविवार' (Bloody Sunday) से आप क्या समझते हैं? रूसी इतिहास में इसका क्या महत्व है?
Step-by-Step Solution:

उत्तर: 22 जनवरी 1905 को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में पादरी गैपॉन के नेतृत्व में मजदूरों का एक शांतिपूर्ण जुलूस कार्य स्थितियों में सुधार और 8 घंटे के कार्य दिवस की याचिका लेकर विंटर पैलेस की ओर जा रहा था।

जब यह जुलूस विंटर पैलेस पहुंचा, तो ज़ार की पुलिस और कॉसैक्स सेना ने निहत्थे मजदूरों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। इसमें 100 से अधिक मजदूर मारे गए और लगभग 300 घायल हुए। चूंकि यह घटना रविवार के दिन घटी थी, इसलिए इसे 'खूनी रविवार' कहा जाता है।

महत्व: इस घटना ने 1905 की पहली रूसी क्रांति को जन्म दिया, देशभर में हड़तालों की लहर दौड़ा दी और ज़ार को पहली बार एक निर्वाचित संसद—'डूमा' के गठन की अनुमति देने पर विवश किया।

अंक योजना (Marking Scheme): घटना की पृष्ठभूमि व तिथि: 1 अंक, पुलिस कार्रवाई व हताहतों का उल्लेख: 1 अंक, ऐतिहासिक महत्व व डूमा का गठन: 1 अंक। कुल = 3 अंक।
Example 2
प्रश्न 2 (दीर्घ उत्तरीय): 1917 की 'फरवरी क्रांति' और 'अक्टूबर क्रांति' के बीच प्रमुख अंतरों का तुलनात्मक वर्णन कीजिए।
Step-by-Step Solution:

उत्तर: 1917 में रूस में दो क्रांतियां हुईं, जिनके उद्देश्य और परिणाम एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न थे:

तुलना का आधारफरवरी क्रांति (1917)अक्टूबर क्रांति (1917)
मुख्य नेतृत्वजनसाधारण, महिला मजदूर और विद्रोही सैनिक (स्वतःस्फूर्त आंदोलन)।व्लादिमीर लेनिन और बोल्शेविक पार्टी (सुव्यवस्थित व सुनियोजित)।
क्रांति का लक्ष्यरोटी की मांग और निरंकुश ज़ारशाही (Tsarism) का अंत करना।अस्थायी पूंजीवादी सरकार को हटाकर सोवियत सत्ता स्थापित करना।
तात्कालिक परिणामज़ार निकोलस द्वितीय का पदत्याग और केरेन्स्की की 'अस्थायी सरकार' का गठन।केरेन्स्की सरकार का पतन, लेनिन के नेतृत्व में पहली कम्युनिस्ट सरकार की स्थापना।
आर्थिक नीतियांनिजी संपत्ति और प्रथम विश्व युद्ध में भागीदारी जारी रखी गई।युद्ध से तुरंत वापसी, बैंकों व उद्योगों का राष्ट्रीयकरण और भूमि का पुनर्वितरण।
अंक योजना (Marking Scheme): नेतृत्व व स्वरूप में अंतर: 1.5 अंक, लक्ष्य व तात्कालिक परिणाम: 2 अंक, आर्थिक नीतियों में अंतर व निष्कर्ष: 1.5 अंक। कुल = 5 अंक।
Example 3
प्रश्न 3 (विश्लेषणात्मक): लेनिन की 'अप्रैल थीसिस' (April Theses) क्या थी? बोल्शेविकों ने सत्ता में आने के बाद कौन-से आमूलचूल परिवर्तन किए?
Step-by-Step Solution:

उत्तर: अप्रैल 1917 में निर्वासन से लौटने के बाद व्लादिमीर लेनिन ने बोल्शेविक पार्टी के समक्ष तीन ऐतिहासिक मांगें रखीं, जिन्हें 'अप्रैल थीसिस' कहा जाता है:

  1. प्रथम विश्व युद्ध की तुरंत समाप्ति: रूस युद्ध से तुरंत अलग हो।
  2. भूमि का हस्तांतरण: सारी जमीन किसानों के हवाले की जाए।
  3. बैंकों का राष्ट्रीयकरण: सभी निजी बैंकों का सरकार द्वारा अधिग्रहण किया जाए।

अक्टूबर क्रांति के बाद किए गए प्रमुख परिवर्तन:

  • उद्योगों और बैंकों का राष्ट्रीयकरण: नवंबर 1917 में सभी वित्तीय संस्थानों का नियंत्रण राज्य ने संभाल लिया।
  • सामंती भूमि का वितरण: कुलीनों और चर्च की जमीनों को सामाजिक संपत्ति घोषित कर किसानों में बांट दिया गया।
  • शहरों में आवास पुनर्गठन: बड़े मकानों का परिवार के आकार के अनुसार बंटवारा किया गया।
  • वस्त्र व पदवी सुधार: कुलीन वर्ग की पुरानी पदवियों पर रोक लगाई गई और सेना के लिए 'बुदियोनोव्का' टोपी जैसी नई वर्दियां लागू हुईं।
अंक योजना (Marking Scheme): अप्रैल थीसिस की तीनों मांगें: 2 अंक, सत्ता प्राप्ति के बाद के 4 मुख्य सुधार: 2 अंक, निष्कर्ष: 1 अंक। कुल = 5 अंक।
Example 4
प्रश्न 4 (लघु उत्तरीय): स्टालिन का 'सामूहिकीकरण कार्यक्रम' (Collectivisation Programme) क्या था? किसानों ने इसका विरोध क्यों किया?
Step-by-Step Solution:

उत्तर: 1927-28 के अनाज संकट के समाधान हेतु स्टालिन ने 1929 में खेतों के सामूहिकीकरण की नीति लागू की।

  • स्वरूप: छोटे और बिखरे हुए खेतों को मिलाकर विशाल सामूहिक खेत 'कोलखोज' (Kolkhoz) बनाए गए। किसानों को सामूहिक रूप से आधुनिक मशीनों से खेती करने और मुनाफे को आपस में बांटने का आदेश दिया गया।
  • कुलाकों का खात्मा: संपन्न किसानों (कुलाकों) की जमीनें और संपत्तियां जबरन छीन ली गईं।
  • विरोध का कारण: किसानों को अपनी निजी जमीन और स्वतंत्रता खोने का डर था। उन्होंने विरोध में अपने मवेशियों को मार डाला (मवेशियों की संख्या एक-तिहाई घट गई)। सरकार ने विरोधियों को बेरहमी से निर्वासित और दंडित किया।
अंक योजना (Marking Scheme): सामूहिकीकरण की अवधारणा व कोलखोज: 1.5 अंक, कुलाकों पर कार्रवाई व किसानों के विरोध के कारण: 1.5 अंक। कुल = 3 अंक।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

फरवरी क्रांति और अक्टूबर क्रांति की तिथियों में भ्रम होना (जूलियन बनाम ग्रेगोरियन कैलेंडर)।

Scientific Reality & Correction

रूस 1 फरवरी 1918 तक जूलियन कैलेंडर का उपयोग करता था, जो आधुनिक ग्रेगोरियन कैलेंडर से 13 दिन पीछे था। अतः रूसी 'फरवरी क्रांति' वास्तव में 12 मार्च को और 'अक्टूबर क्रांति' 7 नवंबर को घटी थी।

Common Misconception

'बोल्शेविक' और 'मेन्शेविक' को एक ही दल समझना।

Scientific Reality & Correction

बोल्शेविक लेनिन के नेतृत्व वाला अनुशासित और कठोर कैडर आधारित दल था, जबकि मेन्शेविक मार्तोव के नेतृत्व वाला उदारवादी और सभी के लिए खुला दल था।

Common Misconception

'खूनी रविवार' (1905) को 1917 की क्रांति का हिस्सा मानना।

Scientific Reality & Correction

खूनी रविवार 22 जनवरी 1905 को हुआ था, जिसने 1905 की असफल क्रांति को जन्म दिया। 1917 की क्रांतियां प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 12 वर्ष बाद हुईं।

Common Misconception

'कुलाक' और 'कोलखोज' शब्दों के अर्थ को उलट देना।

Scientific Reality & Correction

'कुलाक' रूस के संपन्न किसानों को कहा जाता था, जबकि 'कोलखोज' सरकार द्वारा स्थापित विशाल सामूहिक खेतों को कहा जाता था।

रूसी क्रांति की ऐतिहासिक समयरेखा एवं वैचारिक संक्रमण (1905-1929)

रूसी क्रांति (1905-1917) एवं सोवियत समाजवाद का विकास पथ 1. 1905: खूनी रविवार (Bloody Sunday) • पादरी गैपॉन के नेतृत्व में मजदूरों पर गोलीबारी • 100+ की मृत्यु, 300+ घायल • राष्ट्रव्यापी हड़तालें व 'डूमा' का गठन जार का निरंकुश चरित्र उजागर 2. 1914-17: प्रथम विश्व युद्ध का संकट • 70 लाख रूसी सैनिक हताहत • 30 लाख शरणार्थी, अनाज की भारी किल्लत • रानी का जर्मन मूल व रासपुतिन का प्रभाव राजशाही के प्रति भारी जन-आक्रोश 3. फरवरी 1917: ज़ारशाही का अंत • पेट्रोग्राद में रोटी हेतु स्वतःस्फूर्त हड़ताल • सैनिकों का मजदूरों से हाथ मिलाना • 2 मार्च: ज़ार निकोलस II का पदत्याग केरेन्स्की की 'अस्थायी सरकार' बनी 4. अप्रैल 1917: लेनिन की अप्रैल थीसिस • 1. प्रथम विश्व युद्ध की तुरंत समाप्ति • 2. जमीन किसानों के हवाले की जाए • 3. सभी बैंकों का राष्ट्रीयकरण "सारी सत्ता सोवियतों को!" का नारा 5. अक्टूबर 1917: बोल्शेविक सत्ता • विंटर पैलेस पर कब्जा व केरेन्स्की का पलायन • बैंकों और उद्योगों का पूर्ण राष्ट्रीयकरण • भूमि सामाजिक संपत्ति घोषित विश्व की पहली समाजवादी सरकार 6. 1929: स्टालिन का सामूहिकीकरण • 'कोलखोज' (सामूहिक खेत) का गठन • 'कुलाकों' (संपन्न किसान) का जबरन दमन • पंचवर्षीय योजनाओं द्वारा भारी औद्योगीकरण सोवियत संघ वैश्विक महाशक्ति बना

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
19वीं सदी के यूरोप में सामाजिक बदलाव के तीन मुख्य दृष्टिकोण थे: उदारवादी (व्यक्तिगत संपत्ति व कानून का शासन), रेडिकल (बहुमत का शासन व मताधिकार) और रूढ़िवादी (धीमा बदलाव व अतीत का सम्मान)।
Takeaway 2
कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने तर्क दिया कि पूंजीपति मजदूरों के श्रम का शोषण करते हैं, अतः साम्यवादी समाज की स्थापना ही स्थायी समाधान है।
Takeaway 3
1914 में रूस पर ज़ार निकोलस द्वितीय का निरंकुश शासन था; 85% आबादी कृषि पर निर्भर थी और किसान अपनी जमीन 'मीर' (कम्यून) को सौंपकर खेती करते थे।
Takeaway 4
22 जनवरी 1905 को पादरी गैपॉन के शांतिपूर्ण जुलूस पर पुलिसिया गोलीबारी को 'खूनी रविवार' कहा गया, जिसने 1905 की पहली क्रांति और 'डूमा' के गठन को प्रेरित किया।
Takeaway 5
प्रथम विश्व युद्ध में 70 लाख सैनिकों के मारे जाने, भोजन की किल्लत और आर्थिक तबाही ने ज़ारशाही के प्रति भारी जन-विद्रोह को जन्म दिया।
Takeaway 6
फरवरी 1917 में पेट्रोग्राद में रोटी की कमी के विरुद्ध मजदूरों और सैनिकों के संयुक्त विद्रोह के कारण 2 मार्च 1917 को ज़ार ने गद्दी छोड़ दी।
Takeaway 7
ज़ारशाही के पतन के बाद बनी 'अस्थायी सरकार' ने युद्ध जारी रखा और भूमि सुधार नहीं किए, जिससे जनता में असंतोष बना रहा।
Takeaway 8
अप्रैल 1917 में लौटे लेनिन ने तीन मांगों (युद्ध समाप्ति, किसानों को भूमि, बैंकों का राष्ट्रीयकरण) वाली 'अप्रैल थीसिस' प्रस्तुत की।
Takeaway 9
24-25 अक्टूबर 1917 को बोल्शेविकों ने विंटर पैलेस पर कब्जा कर अस्थायी सरकार का तख्तापलट किया और विश्व की पहली समाजवादी सरकार बनाई।
Takeaway 10
1929 में स्टालिन ने खाद्यान्न संकट से निपटने हेतु 'कोलखोज' (सामूहिक खेत) शुरू किए और 'कुलाकों' का कठोरतापूर्वक दमन किया।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
रूस में 1905 की क्रांति के दौरान 'खूनी रविवार' (Bloody Sunday) के जुलूस का नेतृत्व किसने किया था?
(A) व्लादिमीर लेनिन
(B) पादरी गैपॉन (Father Gapon)
(C) लियोन ट्रॉटस्की
(D) अलेक्जेंडर केरेन्स्की
Reveal Answer & Explanation
Answer: B
22 जनवरी 1905 को पादरी गैपॉन के नेतृत्व में मजदूरों का शांतिपूर्ण जुलूस ज़ार को याचिका सौंपने विंटर पैलेस जा रहा था जब उन पर गोलीबारी हुई।
2
व्लादिमीर लेनिन द्वारा अप्रैल 1917 में प्रस्तुत 'अप्रैल थीसिस' (April Theses) में निम्नलिखित में से कौन-सी मांग शामिल नहीं थी?
(A) प्रथम विश्व युद्ध को तुरंत बंद किया जाए
(B) सारी जमीन किसानों के हवाले की जाए
(C) बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जाए
(D) ज़ार निकोलस द्वितीय को पुनः गद्दी पर बैठाया जाए
Reveal Answer & Explanation
Answer: D
लेनिन की तीन प्रमुख मांगें थीं: युद्ध समाप्ति, किसानों को जमीन का हस्तांतरण, और बैंकों का राष्ट्रीयकरण। ज़ार को पुनः गद्दी पर बैठाने का कोई प्रश्न ही नहीं था।
3
सोवियत संघ में स्टालिन के शासनकाल में 'कुलाक' (Kulak) शब्द का क्या अर्थ था?
(A) कारखानों के दिहाड़ी मजदूर
(B) रूस के संपन्न और धनी किसान
(C) सामूहिक खेतों में काम करने वाले भूमिहीन कृषक
(D) ज़ार की गुप्तचर पुलिस के अधिकारी
Reveal Answer & Explanation
Answer: B
रूस में संपन्न और समृद्ध किसानों को 'कुलाक' कहा जाता था। स्टालिन ने सामूहिकीकरण को सफल बनाने के लिए कुलाकों का सफाया करने का अभियान चलाया।
4
रूस में सामूहिक खेतों को किस रूसी नाम से जाना जाता था?
(A) मीर (Mir)
(B) डूमा (Duma)
(C) कोलखोज (Kolkhoz)
(D) सोवियत (Soviet)
Reveal Answer & Explanation
Answer: C
स्टालिन के सामूहिकीकरण कार्यक्रम के तहत बनाए गए बड़े सामूहिक खेतों को रूसी भाषा में 'कोलखोज' (Kolkhoz) कहा जाता था।
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