फ्रांसीसी क्रांति ने समाज में नाटकीय परिवर्तन की संभावना के द्वार खोल दिए थे। परंतु यूरोप में सभी लोग समाज के पूर्ण पुनर्गठन के पक्ष में नहीं थे। विचारों के आधार पर तीन प्रमुख धाराएं उभरीं:
तीन राजनीतिक विचारधाराओं का तुलनात्मक विश्लेषण:
| वैचारिक धारा | धर्म व राजतंत्र पर विचार | मताधिकार (Voting Rights) | संपत्ति व विशेषाधिकार |
|---|---|---|---|
| उदारवादी (Liberals) | सभी धर्मों को बराबर सम्मान; राजाओं की अनियंत्रित सत्ता के विरोधी; न्यायपालिका द्वारा शासित संसदीय सरकार के पक्षधर। | वे लोकतंत्रवादी नहीं थे। केवल संपत्तिधारी पुरुषों को वोट का अधिकार चाहते थे; महिलाओं के मताधिकार के सख्त विरोधी थे। | व्यक्तिगत संपत्ति के समर्थक; जन्मना विशेषाधिकारों के विरोधी। |
| रेडिकल / परिवर्तनवादी (Radicals) | ऐसी सरकार चाहते थे जो देश की अधिकांश आबादी के बहुमत के समर्थन पर आधारित हो। | सार्वभौमिक मताधिकार के समर्थक; महिलाओं के मताधिकार आंदोलन (Suffragette Movement) का पुरजोर समर्थन किया। | जमींदारों और संपन्न उद्योगपतियों के विशेषाधिकारों के विरोधी; निजी संपत्ति के विरोधी नहीं थे, पर कुछ ही हाथों में संपत्ति के संकेंद्रण के विरोधी थे। |
| रूढ़िवादी (Conservatives) | आरंभ में किसी भी बदलाव के विरोधी; प्राचीन संस्थाओं और परंपराओं के समर्थक। | जनसाधारण के मताधिकार के विरोधी; कुलीन वर्ग के वर्चस्व के समर्थक। | 19वीं सदी तक आते-आते वे धीमी गति के क्रमिक बदलाव को स्वीकार करने लगे, परंतु अतीत का सम्मान अनिवार्य मानते थे। |
औद्योगिक क्रांति और समाजवाद का आगमन:
औद्योगिक क्रांति ने नए शहरों, रेलवे और कारखानों को जन्म दिया। इसके साथ ही पुरुषों, औरतों और बच्चों को 12 से 16 घंटे तक कारखानों में काम करना पड़ता था, मजदूरी बहुत कम थी और आवास व स्वच्छता की स्थिति दयनीय थी।
समाजवादी विचारक:
- रॉबर्ट ओवेन (Robert Owen - 1771-1858): एक अंग्रेज उद्योगपति जिन्होंने इंडियाना (अमेरिका) में 'न्यू हार्मनी' (New Harmony) नामक एक सहकारिता (Co-operative) समुदाय की स्थापना की। वे व्यक्तिगत पहल पर सहकारी समुदाय बनाना चाहते थे।
- लुई ब्लांक (Louis Blanc - 1813-1882): फ्रांस के विचारक जिनका मानना था कि केवल व्यक्तिगत प्रयास पर्याप्त नहीं हैं; सरकार को सहकारी समितियों को बढ़ावा देना चाहिए ताकि पूंजीवादी उद्यमों की जगह ली जा सके।
- कार्ल मार्क्स (Karl Marx - 1818-1883) और फ्रेडरिक एंगेल्स (Friedrich Engels - 1820-1895): मार्क्स ने तर्क दिया कि औद्योगिक समाज 'पूंजीवादी' (Capitalist) है। कारखानों में लगी पूंजी पर मालिकों का नियंत्रण है और उनका मुनाफा मजदूरों की मेहनत से पैदा होता है। जब तक निजी पूंजीपति मुनाफे पर कब्जा रखेंगे, मजदूरों की दशा नहीं सुधर सकती। मजदूरों को निजी संपत्ति के नियंत्रण को उखाड़ फेंकना होगा और एक कट्टर साम्यवादी समाज (Communist Society) बनाना होगा जहाँ सारी संपत्ति पर पूरे समाज का सामूहिक नियंत्रण हो।