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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 9 • Social Science • अध्याय 12
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? (What is Democracy? Why Democracy?)

लोकतंत्र समकालीन विश्व में शासन का सबसे लोकप्रिय और स्वीकृत रूप है। प्रस्तुत अध्याय लोकतंत्र के सरल अर्थ से लेकर इसकी गहन और वैज्ञानिक विशेषताओं की पड़ताल करता है। अब्राहम लिंकन के प्रसिद्ध कथन 'जनता का, जनता के लिए, और जनता द्वारा शासन' के आगे बढ़कर यह अध्याय उन मूलभूत पैमानों की समीक्षा करता है जो एक वास्तविक लोकतंत्र को महज दिखावटी या चुनावी तानाशाही से अलग करते हैं। पाकिस्तान (जनरल परवेज़ मुशर्रफ), चीन (कम्युनिस्ट पार्टी का एकाधिकार), मैक्सिको (PRI का 70 वर्षों का चुनावी छल), फिजी व सऊदी अरब (असमान मताधिकार), तथा जिम्बाब्वे (रॉबर्ट मुगाबे का शासन) के वैश्विक केस स्टडीज के माध्यम से लोकतंत्र की चार अनिवार्य विशेषताओं का प्रतिपादन किया गया है। अध्याय में लोकतंत्र के विपक्ष में तर्क (अस्थिरता, फैसले में देरी, भ्रष्टाचार) और पक्ष में अकाट्य तर्कों (जवाबदेही, बेहतर निर्णय, मतभेदों का शांतिपूर्ण समाधान, नागरिकों का आत्मसम्मान, गलतियों को सुधारने का अवसर) की तुलनात्मक समीक्षा की गई है। झारखंड अधिविद्य परिषद् (JAC) बोर्ड परीक्षा में लोकतंत्र की विशेषताएं, चीन व मैक्सिको की चुनावी व्यवस्था, 1958-61 के चीनी अकाल का भारतीय तुलनात्मक विश्लेषण और लोकतंत्र के गुण-दोष पर दीर्घ उत्तरीय प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

क्या केवल चुनाव करा लेना ही लोकतंत्र की गारंटी है? जनरल मुशर्रफ और मैक्सिको का आईना

कल्पना कीजिए एक ऐसे देश की जहाँ हर 5 साल पर चुनाव होते हैं, लोग कतारों में लगकर वोट डालते हैं, लेकिन जीतने वाला पहले से तय होता है, मीडिया पर सरकारी पहरा होता है, और अंतिम फैसले संसद के बजाय सेना का जनरल अपनी वर्दी की धौंस पर लेता है! क्या आप इसे लोकतंत्र कहेंगे? पाकिस्तान में अक्टूबर 1999 में जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंका, खुद को राष्ट्रपति घोषित किया और 'लीगल फ्रेमवर्क ऑर्डर' जारी कर चुनी हुई संसदों को बर्खास्त करने की शक्ति अपने हाथ में ले ली। ठीक इसी तरह मैक्सिको में 1930 से 2000 तक हर छह साल पर चुनाव हुए, परंतु हर बार केवल एक ही पार्टी—PRI—ने सरकारी तंत्र, अध्यापकों और मीडिया को धमकाकर जीत हासिल की। यह अध्याय हमें सिखाता है कि चुनाव कराना लोकतंत्र की केवल एक दिखावटी रस्म हो सकती है; असली लोकतंत्र की आत्मा कुछ ऐसी बुनियादी शर्तों में बसती है जिन्हें समझना हर जागरूक नागरिक और छात्र का परम कर्तव्य है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और झारखंड का जनजातीय समाज ऐतिहासिक रूप से मानकी-मुंडा, पड़हा पंचायत जैसी पारंपरिक लोकतांत्रिक व सहभागी संस्थाओं का प्रतीक रहा है। यह अध्याय छात्रों को एक निष्क्रिय मतदाता से एक प्रबुद्ध, सचेत और सवाल पूछने वाले नागरिक में रूपांतरित करता है। यह सिखाता है कि शासन से जवाबदेही कैसे मांगी जाए, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कैसे हो, और क्यों लोकतंत्र अन्य सभी शासन प्रणालियों (राजतंत्र, तानाशाही, सैनिक शासन) से श्रेष्ठ है। JAC बोर्ड परीक्षा में राजनीति विज्ञान खंड का यह सबसे बुनियादी और सर्वाधिक अंकदायी अध्याय है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • शासन प्रणालियों के विभिन्न रूपों (राजतंत्र, तानाशाही, लोकतंत्र) का प्रारंभिक अंतर।
  • मताधिकार और चुनाव की सामान्य समझ।
  • संसद, न्यायपालिका और नागरिकों के बुनियादी अधिकारों का परिचय।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • लोकतंत्र की मानक परिभाषा और इसके यूनानी मूल ('डेमोस' + 'क्रेटिया') को स्पष्ट करना।
  • वैश्विक केस स्टडीज के आधार पर वास्तविक लोकतंत्र की 4 अनिवार्य विशेषताओं का सप्रमाण विश्लेषण करना।
  • पाकिस्तान, चीन, मैक्सिको, सऊदी अरब और जिम्बाब्वे के उदाहरणों से गैर-लोकतांत्रिक प्रवृत्तियों की पहचान करना।
  • लोकतंत्र के विपक्ष में दिए जाने वाले तर्कों (अस्थिरता, निर्णयों में देरी, दलीय प्रतिस्पर्धा) का निष्पक्ष मूल्यांकन करना।
  • 1958-1961 के चीन के अकाल की भारत से तुलना करते हुए लोकतंत्र के जवाबदेह स्वरूप को सिद्ध करना।
  • लोकतंत्र के वृहत्तर अर्थ (निर्णय लेने की लोकतांत्रिक प्रक्रिया) को परिवार, विद्यालय और समाज के स्तर पर लागू करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. लोकतंत्र क्या है? सरल परिभाषा और...
2 2. लोकतंत्र की चार अनिवार्य विशेषता...
3 3. लोकतंत्र के विपक्ष में तर्क (दोष...
4 4. लोकतंत्र के पक्ष में अकाट्य तर्क...
5 5. लोकतंत्र का वृहत्तर अर्थ (Broade...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. लोकतंत्र क्या है? सरल परिभाषा और इसकी सीमाएं

लोकतंत्र (Democracy) यूनानी शब्द 'डेमोक्रेशिया' (Demokratia) से बना है। यूनानी में 'डेमोस' (Demos) का अर्थ होता है 'लोग' या 'जनता' तथा 'क्रेटिया' (Kratia) का अर्थ होता है 'शासन' या 'सत्ता'। अतः इसका शाब्दिक अर्थ है—'जनता का शासन'।

सरल परिभाषा:

'लोकतंत्र शासन का एक ऐसा रूप है जिसमें शासकों का चुनाव जनता करती है।' (Democracy is a form of government in which the rulers are elected by the people.)

सरल परिभाषा की आवश्यकता एवं सीमाएं:

  • यह परिभाषा हमें गैर-लोकतांत्रिक शासकों को अलग करने में मदद करती है: जैसे म्यांमार के सैनिक शासक, चिली में पिनोशे का फौजी तानाशाही शासन, सऊदी अरब और नेपाल के राजा जनता द्वारा नहीं चुने जाते थे।
  • परंतु यह परिभाषा पर्याप्त नहीं है: यदि हम केवल इस परिभाषा तक सीमित रहें, तो हमें उन सभी सरकारों को लोकतांत्रिक कहना पड़ेगा जो चुनाव करवाती हैं। जैसा कि 20वीं और 21वीं सदी में देखा गया है, कई तानाशाह जनता को भ्रमित करने के लिए दिखावटी चुनाव आयोजित करवाते हैं।
  • अतः हमें एक 'वास्तविक लोकतंत्र' (Real Democracy) और 'दिखावटी लोकतंत्र' (Pretended Democracy) के बीच स्पष्ट अंतर करने के लिए लोकतंत्र की बुनियादी विशेषताओं को गहराई से समझना होगा।

2. लोकतंत्र की चार अनिवार्य विशेषताएं (वैश्विक केस स्टडीज सहित)

एनसीईआरटी और जेएसी बोर्ड पाठ्यक्रम के अनुसार एक वास्तविक लोकतंत्र की निम्नलिखित चार बुनियादी विशेषताएं हैं:

विशेषता केस स्टडी (देश) वास्तविक घटना / गैर-लोकतांत्रिक तरीका लोकतांत्रिक सिद्धांत
1. प्रमुख फैसले निर्वाचित नेताओं के हाथ पाकिस्तान (जनरल परवेज़ मुशर्रफ, 1999-2002) मुशर्रफ ने चुनी सरकार का तख्तापलट किया। 2002 में 'लीगल फ्रेमवर्क ऑर्डर' द्वारा राष्ट्रपति को राष्ट्रीय व प्रांतीय असेंबलियों को भंग करने का अधिकार दिया। संसद चुने जाने के बावजूद अंतिम निर्णय की शक्ति सेना व मुशर्रफ के पास थी। अंतिम निर्णय लेने की शक्ति जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों के पास ही होनी चाहिए।
2. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी मुकाबला चीन और मैक्सिको चीन की संसद 'क्वांगुओ रेनमिन दाईबियाओ दाहुई' में चुनाव लड़ने हेतु केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की मंजूरी चाहिए। मैक्सिको में 1930 से 2000 तक केवल PRI पार्टी ने हर चुनाव जीता क्योंकि वह स्कूल शिक्षकों, सरकारी अधिकारियों और मीडिया का दुरुपयोग करती थी। चुनाव निष्पक्ष होने चाहिए जहाँ सत्ता में बैठे लोगों के हारने का वास्तविक अवसर हो।
3. एक व्यक्ति, एक वोट, एक मोल सऊदी अरब, एस्टोनिया, फिजी 2015 तक सऊदी अरब में महिलाओं को वोट का अधिकार नहीं था। एस्टोनिया में रूसी अल्पसंख्यकों को मतदान का अधिकार पाना कठिन था। फिजी में मूल फिजी नागरिकों के वोट का मूल्य भारतीय मूल के फिजी नागरिकों से अधिक था। हर वयस्क नागरिक का एक वोट होना चाहिए और प्रत्येक वोट का समान मूल्य होना चाहिए।
4. कानून का राज और अधिकारों का आदर जिम्बाब्वे (रॉबर्ट मुगाबे, ZANU-PF) 1980 में आजादी के बाद मुगाबे लोकप्रिय थे परंतु चुनाव जीतने हेतु अनुचित हथकंडे अपनाए। संविधान में बार-बार बदलाव कर राष्ट्रपति के अधिकार बढ़ाए, विपक्षी कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया और न्यायपालिका के आदेशों की अवहेलना की। लोकतांत्रिक सरकार संवैधानिक कानूनों और नागरिक अधिकारों द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर ही काम करती है।

3. लोकतंत्र के विपक्ष में तर्क (दोष व आलोचनाएं)

लोकतंत्र कोई जादू की छड़ी नहीं है जो सभी सामाजिक व आर्थिक समस्याओं को चुटकी में समाप्त कर दे। आलोचक इसके विपक्ष में निम्नलिखित प्रमुख तर्क प्रस्तुत करते हैं:

  1. नेताओं का निरंतर बदलना और अस्थिरता (Instability): लोकतंत्र में राजनीतिक दलों और नेताओं में सत्ता हासिल करने की होड़ मची रहती है। बार-बार सरकारें बदलने या गठबंधन टूटने से राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न होती है।
  2. नैतिकता का अभाव (Political Competition without Morality): चुनावी राजनीति केवल सत्ता, शक्ति और संख्या का खेल बन जाती है। यहाँ नैतिक मूल्यों और लोकहित के लिए अक्सर जगह नहीं बचती।
  3. फैसलों में भारी विलंब (Delays in Decision Making): लोकतंत्र में किसी भी कानून या नीति पर संसद, समितियों और जनता में व्यापक विचार-विमर्श करना पड़ता है। इससे निर्णय लेने में अक्सर बहुत समय लग जाता है जो आपातकाल में नुकसानदेह हो सकता है।
  4. खराब फैसलों की संभावना (Bad Decisions): चुने हुए नेताओं को हमेशा जनता के वास्तविक और दीर्घकालिक सर्वोत्तम हितों की सटीक जानकारी नहीं होती, जिससे कई बार गलत और अदूरदर्शी फैसले लिए जाते हैं।
  5. चुनावी भ्रष्टाचार (Electoral Corruption): चुनाव जीतने के लिए अत्यधिक धनबल, बाहुबल और अनुचित साधनों का प्रयोग होता है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।
  6. सामान्य जनता की अनभिज्ञता: कई बार अशिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण आम मतदाता यह तय नहीं कर पाते कि उनके लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा, जिससे वे भ्रामक नारों के शिकार हो जाते हैं।

4. लोकतंत्र के पक्ष में अकाट्य तर्क (गुण एवं श्रेष्ठता)

कमियों के बावजूद लोकतंत्र अन्य सभी गैर-लोकतांत्रिक विकल्पों (राजतंत्र, सैनिक तानाशाही, कुलीनतंत्र) की तुलना में कहीं बेहतर और मानवीय शासन प्रणाली है। इसके पक्ष में अकाट्य तर्क निम्नलिखित हैं:

1. अधिक जवाबदेह शासन प्रणाली (Accountable Governance):

लोकतांत्रिक सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है। इसे अगले चुनाव में जनता की अदालत में जाना होता है।

ऐतिहासिक प्रमाण: 1958-1961 का चीनी अकाल बनाम भारत की स्थिति
1958 से 1961 के दौरान चीन में पड़ा अकाल विश्व इतिहास का सबसे भयानक अकाल था, जिसमें लगभग 3 करोड़ लोग भूख से मारे गए। उन दिनों भारत की आर्थिक स्थिति चीन से बहुत बेहतर नहीं थी, फिर भी भारत में चीन जैसा अकाल कभी नहीं पड़ा। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इसका मूल कारण दोनों देशों की सरकारी नीतियां और राजनीतिक व्यवस्था थी। भारत में बहुदलीय लोकतंत्र, स्वतंत्र प्रेस और विपक्षी दल मौजूद थे जो भुखमरी पर सरकार की कड़ी आलोचना कर सकते थे, जिससे भारत सरकार ने खाद्य सुरक्षा के त्वरित उपाय किए। इसके विपरीत चीन में कोई विपक्षी दल नहीं था, न ही स्वतंत्र मीडिया था जो सरकार की विफलताओं को उजागर कर सके।

2. बेहतर और गुणवत्तापूर्ण निर्णय लेने की संभावना:

लोकतंत्र व्यापक चर्चा, बहस और परामर्श पर आधारित होता है। जब अनेक लोग मिलकर किसी समस्या पर विचार करते हैं, तो संभावित गलतियों और खामियों की पहचान पहले ही हो जाती है, जिससे जल्दबाजी और गैर-जिम्मेदाराना फैसलों की गुंजाइश कम होती है।

3. मतभेदों और टकरावों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का तरीका:

भारत जैसे विशाल देश में जहाँ विभिन्न भाषाओं, धर्मों, जातियों और संस्कृतियों के लोग रहते हैं, हितों का टकराव स्वाभाविक है। लोकतंत्र में कोई भी स्थायी विजेता या स्थायी पराजित नहीं होता। यह विविधतापूर्ण समाज को एक सूत्र में बांधने की शांतिपूर्ण युक्ति प्रदान करता है।

4. नागरिकों के आत्मसम्मान और गरिमा में वृद्धि:

लोकतंत्र राजनीतिक समानता के सिद्धांत पर आधारित है। यहाँ सबसे गरीब और अनपढ़ व्यक्ति को भी वही मताधिकार और सम्मान प्राप्त है जो सबसे अमीर और शिक्षित व्यक्ति को। नागरिक शासक की प्रजा नहीं, बल्कि स्वयं अपने शासक हैं।

5. अपनी गलतियों को सुधारने का अवसर (Scope to Correct Mistakes):

ऐसा कोई शासन नहीं है जिसमें गलतियां न हों। परंतु लोकतंत्र का सबसे बड़ा गुण यह है कि यहाँ गलतियों को छुपाया नहीं जा सकता; उन पर खुली सार्वजनिक बहस होती है और यदि शासक अपने फैसलों में सुधार न करें, तो जनता अगले चुनाव में उन्हें सत्ता से बेदखल कर सकती है।

5. लोकतंत्र का वृहत्तर अर्थ (Broader Meaning of Democracy)

अध्याय के अंतिम चरण में लोकतंत्र को केवल 'शासन के एक रूप' के संकुचित दायरे से निकालकर 'जीवन पद्धति' और 'मूल्य' के रूप में देखा गया है:

प्रतिनिधिक लोकतंत्र (Representative Democracy):

  • आधुनिक विशाल जनसंख्या वाले देशों में सभी नागरिक एक साथ बैठकर रोजमर्रा के फैसले नहीं ले सकते।
  • नागरिकों के पास सभी मामलों में निर्णय लेने का न तो समय होता है, न इच्छा और न ही आवश्यक कौशल।
  • इसलिए समकालीन विश्व में हम प्रतिनिधिक लोकतंत्र अपनाते हैं, जहाँ जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधियों (सांसदों व विधायकों) के माध्यम से शासन चलाती है।

निर्णय लेने की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का प्रसार:

लोकतंत्र केवल सरकारों तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग किसी भी संगठन, परिवार या विद्यालय में हो सकता है:

  • लोकतांत्रिक परिवार: जहाँ परिवार के किसी भी महत्वपूर्ण फैसले में सभी सदस्य (माता-पिता, बच्चे) मिलकर आपस में चर्चा करते हैं और सबकी राय का आदर होता है।
  • लोकतांत्रिक कक्षा: जहाँ शिक्षक विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने और अपनी शंकाएं व्यक्त करने की पूरी स्वतंत्रता देता है, न कि केवल एकतरफा आदेश देता है।
  • आदर्श लोकतंत्र: वास्तविक अर्थ में कोई भी देश पूर्णतः आदर्श लोकतंत्र नहीं है। परंतु लोकतांत्रिक मूल्य हमें वर्तमान व्यवस्था की कमियों को पहचानने और लगातार सुधार करने का मानक प्रदान करते हैं। एक देश का भविष्य केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि शासक क्या करते हैं, बल्कि इस पर निर्भर करता है कि हम नागरिक के रूप में क्या करते हैं।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

Demokratia (डेमोक्रेशिया)
Demos (जनता) + Kratia (शासन/सत्ता)
यूनानी भाषा से व्युत्पन्न, जिसका शाब्दिक अर्थ 'जनता का शासन' है।
अब्राहम लिंकन की परिभाषा
Government of the people, by the people, for the people
अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन द्वारा दी गई विश्व प्रसिद्ध लोकतांत्रिक परिभाषा।
लोकतंत्र की 4 कसौटियां
  1. निर्वाचित प्रतिनिधि 2. स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव 3. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार 4. विधि का शासन व मूल अधिकार
किसी देश को वास्तविक लोकतंत्र सिद्ध करने के 4 अनिवार्य संवैधानिक मानदंड।
लीगल फ्रेमवर्क ऑर्डर (2002)
जनरल परवेज़ मुशर्रफ (पाकिस्तान)
संविधान संशोधन जिसके तहत राष्ट्रपति ने चुनी हुई राष्ट्रीय व प्रांतीय संसदों को बर्खास्त करने की शक्ति हासिल की।
PRI (Institutional Revolutionary Party)
मैक्सिको (1930 - 2000)
70 वर्षों तक सत्ता का दुरुपयोग कर अनुचित चुनावी तिकड़मों से सत्ता में बने रहने वाली राजनीतिक पार्टी।
चीन का भीषण अकाल
1958 - 1961 ई. (लगभग 3 करोड़ मौतें)
लोकतांत्रिक जवाबदेही के अभाव में भुखमरी का विश्व इतिहास का सबसे दर्दनाक उदाहरण।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (लघु उत्तरीय): जनरल परवेज़ मुशर्रफ द्वारा शासन की बागडोर संभालने के बाद भी पाकिस्तान को एक लोकतांत्रिक देश क्यों नहीं माना जा सकता? कोई तीन कारण लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: अक्टूबर 1999 में सैनिक तख्तापलट के बाद जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने पाकिस्तान में चुनाव अवश्य कराए, फिर भी निम्नलिखित कारणों से पाकिस्तान को लोकतांत्रिक नहीं कहा जा सकता:

  1. अंतिम निर्णय की शक्ति सेना के पास: यद्यपि लोगों ने राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबलियों के लिए अपने प्रतिनिधि चुने थे, परंतु अंतिम निर्णय लेने की शक्ति निर्वाचित प्रतिनिधियों के पास नहीं, बल्कि सेना के अधिकारियों और जनरल मुशर्रफ के पास थी जो जनता द्वारा निर्वाचित नहीं थे।
  2. लीगल फ्रेमवर्क ऑर्डर (अगस्त 2002): मुशर्रफ ने इस आदेश द्वारा पाकिस्तान के संविधान को बदल डाला और राष्ट्रपति को राष्ट्रीय व प्रांतीय असेंबलियों को भंग करने का निरंकुश अधिकार दे दिया।
  3. मंत्रिपरिषद पर सैनिक निगरानी: नागरिक मंत्रिमंडल के कामकाज पर एक 'राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद' की निगरानी रखी गई जिसके अधिकांश सदस्य फौजी अधिकारी थे।

चूंकि लोकतंत्र की पहली बुनियादी शर्त है कि 'अंतिम निर्णय लेने की शक्ति जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथों में ही होनी चाहिए', अतः मुशर्रफ का पाकिस्तान अलोकतांत्रिक था।

अंक योजना (Marking Scheme): सैनिक तख्तापलट व अनिर्वाचित सैन्य निर्णय: 1 अंक, लीगल फ्रेमवर्क ऑर्डर 2002: 1 अंक, लोकतंत्र की पहली कसौटी से तुलना: 1 अंक। कुल = 3 अंक।
उदाहरण 2
प्रश्न 2 (दीर्घ उत्तरीय): 'लोकतंत्र अन्य सभी शासन प्रणालियों से बेहतर है।' इस कथन के समर्थन में किन्हीं पांच प्रमुख तर्कों की सविस्तार विवेचना कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: यद्यपि लोकतंत्र में कुछ कमियां हैं, फिर भी यह राजतंत्र, तानाशाही या सैनिक शासन की तुलना में सर्वश्रेष्ठ शासन प्रणाली है। इसके समर्थन में पांच प्रमुख तर्क निम्नलिखित हैं:

1. अधिक जवाबदेह शासन प्रणाली:

लोकतांत्रिक सरकार जनता की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के प्रति उत्तरदायी होती है। यदि सरकार जनता की उपेक्षा करती है, तो उसे अगले चुनाव में सत्ता गंवानी पड़ती है। 1958-61 के चीनी अकाल की तुलना में भारत की बेहतर खाद्य नीति इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।

2. बेहतर निर्णय लेने की गुणवत्ता:

लोकतंत्र में निर्णय किसी एक तानाशाह की सनक पर नहीं लिए जाते, बल्कि संसद, कैबिनेट और जनपरामर्श के माध्यम से व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिए जाते हैं। इससे जल्दबाजी और गैर-जिम्मेदाराना फैसलों की संभावना समाप्त हो जाती है।

3. मतभेदों और संघर्षों को सुलझाने की शांतिपूर्ण विधि:

विभिन्न जातियों, भाषाओं और धर्मों वाले समाज में हितों का टकराव होना स्वाभाविक है। लोकतंत्र में सत्ता का बंटवारा और संवाद के माध्यम से सभी समूहों को साथ लेकर चलने का शांतिपूर्ण अवसर मिलता है। यहाँ कोई स्थायी विजेता या स्थायी पराजित नहीं होता।

4. नागरिकों की गरिमा और आत्मसम्मान में वृद्धि:

लोकतंत्र राजनीतिक समानता के सिद्धांत पर आधारित है। यहाँ अमीर और गरीब, शिक्षित और अशिक्षित सभी को एक समान वोट का अधिकार प्राप्त है। नागरिक किसी राजा की लाचार प्रजा नहीं, बल्कि स्वयं देश के भाग्यविधाता हैं।

5. अपनी गलतियों को सुधारने का अवसर:

लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यहाँ गलतियों पर पर्दा नहीं डाला जा सकता। स्वतंत्र प्रेस और विपक्ष द्वारा कमियों को उजागर किया जाता है और शासकों को अपनी नीतियां बदलने का अवसर मिलता है। यदि वे नहीं बदलते, तो जनता शासक बदल देती है।

अंक योजना (Marking Scheme): प्रत्येक तर्क (जवाबदेही, बेहतर निर्णय, टकरावों का समाधान, नागरिकों की गरिमा, गलतियों में सुधार) का उपयुक्त शीर्षक व व्याख्या: 1 × 5 = 5 अंक।
उदाहरण 3
प्रश्न 3 (लघु उत्तरीय): चीन और मैक्सिको दोनों देशों में नियमित रूप से चुनाव होते हैं, फिर भी क्या उन्हें वास्तविक लोकतांत्रिक देश कहा जा सकता है? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: नियमित चुनाव होने के बावजूद चीन और मैक्सिको (2000 ई. से पहले) को वास्तविक लोकतंत्र नहीं माना जा सकता:

1. चीन की स्थिति:

  • चीन की संसद (राष्ट्रीय जन संसद) के लिए प्रति पांच वर्ष पर चुनाव होते हैं, जिसमें 3,000 सदस्य चुने जाते हैं।
  • परंतु चुनाव लड़ने से पहले प्रत्येक उम्मीदवार को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी या उससे संबद्ध छोटी पार्टियों की अनुमति लेनी पड़ती है।
  • देश में किसी अन्य विपक्षी दल को स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने या जीतने की अनुमति नहीं है। हमेशा कम्युनिस्ट पार्टी की ही सरकार बनती है। अतः यहाँ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी विकल्प का अभाव है।

2. मैक्सिको की स्थिति (1930 - 2000):

  • 1930 में आजादी के बाद से मैक्सिको में हर छह वर्ष पर राष्ट्रपति के चुनाव होते थे और कभी सैनिक शासन नहीं आया।
  • परंतु 2000 तक हर चुनाव केवल एक ही पार्टी—PRI (Institutional Revolutionary Party) ने जीता।
  • विपक्षी दल चुनाव लड़ते थे परंतु वे कभी जीत नहीं पाते थे क्योंकि PRI चुनाव जीतने के लिए सभी अनुचित हथकंडे अपनाती थी: सरकारी कर्मचारियों के लिए पार्टी बैठकों में जाना अनिवार्य था, सरकारी स्कूल शिक्षक छात्रों के माता-पिता पर PRI को वोट देने का दबाव बनाते थे, और मीडिया केवल विपक्षी दलों की आलोचना करता था।

निष्कर्ष: दोनों देशों में चुनाव केवल दिखावा थे; सत्ता में बैठे दलों के निष्पक्ष रूप से हारने का कोई वास्तविक अवसर नहीं था।

अंक योजना (Marking Scheme): चीन की एकदलीय व्यवस्था व कम्युनिस्ट पार्टी का एकाधिकार: 1.5 अंक, मैक्सिको में PRI द्वारा सत्ता का दुरुपयोग: 1.5 अंक। कुल = 3 अंक।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (लघु उत्तरीय): लोकतंत्र के विपक्ष में दिए जाने वाले किन्हीं तीन प्रमुख तर्कों का उल्लेख कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: आलोचकों द्वारा लोकतंत्र के विपक्ष में निम्नलिखित प्रमुख दोष गिनाए जाते हैं:

  1. राजनीतिक अस्थिरता (Political Instability): लोकतंत्र में सत्ता पाने के लिए दलों में निरंतर खींचतान मची रहती है। चुनावों में बार-बार नेताओं और सरकारों के बदलने से नीतियों में निरंतरता नहीं रह पाती।
  2. निर्णय लेने में अत्यधिक विलंब (Delay in Decision Making): किसी भी विधेयक या नीति को लागू करने से पहले विभिन्न समितियों, संसदों और जनप्रतिनिधियों से राय लेनी पड़ती है। अत्यधिक बहसों के कारण महत्वपूर्ण मामलों में त्वरित निर्णय नहीं लिए जा पाते।
  3. चुनावी प्रतिस्पर्धा और भ्रष्टाचार: चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार पानी की तरह पैसा बहाते हैं, जातिवाद व संप्रदायवाद को भड़काते हैं, जिससे राजनीतिक नैतिकता का हनन होता है और भ्रष्टाचार फैलता है।
अंक योजना (Marking Scheme): तीनों तर्कों (अस्थिरता, देरी, भ्रष्टाचार) का स्पष्ट उल्लेख: 1 × 3 = 3 अंक।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह मान लेना कि जिस देश में चुनाव होते हैं, वह स्वतः एक लोकतांत्रिक देश बन जाता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

चुनाव होना आवश्यक है परंतु पर्याप्त नहीं। चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और बहुदलीय होने चाहिए जहाँ सत्ता पक्ष के हारने का वास्तविक जोखिम हो (जैसे चीन या मुशर्रफ कालीन पाकिस्तान चुनाव कराने के बावजूद अलोकतांत्रिक थे)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

लोकतंत्र को सभी समस्याओं का रामबाण इलाज (रामबाण औषधि) समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

लोकतंत्र केवल निर्णय लेने की एक सहभागी प्रक्रिया और अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करता है; यह गरीबी या अशिक्षा को रातों-रात जादू से खत्म नहीं कर सकता। यह नागरिकों और चुनी हुई सरकार की सक्रियता पर निर्भर करता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

'प्रतिनिधिक लोकतंत्र' और 'प्रत्यक्ष लोकतंत्र' में भ्रमित होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्राचीन यूनान (एथेंस) या ग्राम सभा में प्रत्यक्ष लोकतंत्र संभव था, परंतु करोड़ों की जनसंख्या वाले आधुनिक राष्ट्र-राज्यों में 'प्रतिनिधिक लोकतंत्र' (जनप्रतिनिधियों के माध्यम से शासन) ही व्यावहारिक रूप है।

लोकतंत्र के 4 अनिवार्य स्तंभ एवं वैश्विक केस स्टडीज

लोकतंत्र की चार कसौटियां एवं वैश्विक तुलनात्मक अध्ययन What is Democracy? Key Features & Comparative Global Case Studies DEMOS जनता सर्वोच्च संप्रभु 1 प्रमुख फैसले निर्वाचित प्रतिनिधियों के हाथ • वास्तविक शासक: जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि। • केस स्टडी: पाकिस्तान (जनरल मुशर्रफ, 1999-2002) संसद के ऊपर सेना व राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का वर्चस्व। लोकतांत्रिक शर्त: अंतिम शक्ति जनता के प्रतिनिधियों में हो 2 स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावी मुकाबला • वास्तविक विकल्प: सत्ता पक्ष के हारने का वास्तविक खतरा। • केस स्टडी: चीन (कम्युनिस्ट एकाधिकार) व मैक्सिको (PRI) मैक्सिको में PRI द्वारा सरकारी मशीनरी व मीडिया का दुरुपयोग। लोकतांत्रिक शर्त: निष्पक्ष अवसर जहाँ सत्ता बदल सके 3 एक व्यक्ति, एक वोट, एक मोल • राजनीतिक समानता: प्रत्येक नागरिक का समान मताधिकार। • केस स्टडी: सऊदी अरब (महिलाओं से वंचित), फिजी, एस्टोनिया फिजी में मूल फिजी नागरिक के वोट का मूल्य भारतीय फिजी से अधिक। लोकतांत्रिक शर्त: प्रत्येक वयस्क नागरिक का समान मत मूल्य 4 विधि का शासन एवं अधिकारों का आदर • नागरिक स्वतंत्रता: न्यायपालिका की स्वतंत्रता व मानवाधिकार। • केस स्टडी: जिम्बाब्वे (रॉबर्ट मुगाबे, ZANU-PF दल) विपक्ष का दमन, अदालती फैसलों की अवहेलना, टीवी पर सेंसर। लोकतांत्रिक शर्त: सरकार संवैधानिक सीमाओं में काम करे JAC Class 9 Civics • लोकतंत्र: केवल चुनाव नहीं, बल्कि जवाबदेह एवं मूल्यपरक जीवन प्रणाली

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
लोकतंत्र यूनानी शब्द 'डेमोस' (जनता) और 'क्रेटिया' (शासन) से बना है, जिसका अर्थ है 'जनता का शासन' (अब्राहम लिंकन के अनुसार: जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा)।
मुख्य बिंदु 2
लोकतंत्र की पहली शर्त: अंतिम निर्णय लेने की शक्ति जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथों में ही होनी चाहिए (पाकिस्तान में मुशर्रफ के सैन्य नियंत्रण से भिन्न)।
मुख्य बिंदु 3
लोकतंत्र की दूसरी शर्त: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी मुकाबला होना चाहिए, जहाँ वर्तमान सत्ता पक्ष के हारने का वास्तविक अवसर हो (चीन और मैक्सिको के विपरीत)।
मुख्य बिंदु 4
लोकतंत्र की तीसरी शर्त: प्रत्येक वयस्क नागरिक का एक वोट होना चाहिए और प्रत्येक वोट का समान मूल्य होना चाहिए (सऊदी अरब, एस्टोनिया व फिजी के विपरीत)।
मुख्य बिंदु 5
लोकतंत्र की चौथी शर्त: सरकार को संविधान द्वारा तय बुनियादी कानूनों और नागरिक अधिकारों का आदर करते हुए काम करना चाहिए (जिम्बाब्वे में मुगाबे के विपरीत)।
मुख्य बिंदु 6
लोकतंत्र के विपक्ष में मुख्य तर्क: राजनीतिक अस्थिरता, निर्णयों में अत्यधिक विलंब, चुनावी भ्रष्टाचार, और नैतिकता का ह्रास।
मुख्य बिंदु 7
लोकतंत्र के पक्ष में प्रमुख तर्क: अधिक जवाबदेह शासन (1958-61 के चीनी अकाल बनाम भारत का अनुभव), बेहतर निर्णय प्रक्रिया, मतभेदों का शांतिपूर्ण समाधान, नागरिकों की गरिमा में वृद्धि, और गलतियों को सुधारने का अवसर।
मुख्य बिंदु 8
आधुनिक लोकतंत्र 'प्रतिनिधिक लोकतंत्र' (Representative Democracy) है, क्योंकि विशाल जनसंख्या में सभी नागरिक प्रत्यक्ष निर्णय नहीं ले सकते।
मुख्य बिंदु 9
लोकतांत्रिक मूल्य केवल सरकार तक सीमित नहीं हैं; परिवार, कक्षा और समाज में भी चर्चा और सहमति पर आधारित निर्णय 'लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया' कहलाते हैं।
मुख्य बिंदु 10
कोई भी देश पूर्णतः 'आदर्श लोकतंत्र' नहीं है; नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और सतर्कता ही एक वास्तविक लोकतंत्र को जीवित और मजबूत रखती है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
लोकतंत्र (Democracy) शब्द किस भाषा के मूल शब्द 'डेमोक्रेशिया' (Demokratia) से लिया गया है?
(A) लैटिन भाषा
(B) यूनानी (ग्रीक) भाषा
(C) फ्रेंच भाषा
(D) जर्मन भाषा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
लोकतंत्र यूनानी (ग्रीक) भाषा के शब्द 'डेमोस' (लोग) और 'क्रेटिया' (शासन) से मिलकर बना है।
2
पाकिस्तान में अक्टूबर 1999 में लोकतांत्रिक सरकार का तख्तापलट कर सत्ता हथियाने वाले सैनिक शासक कौन थे?
(A) जनरल जिया-उल-हक
(B) जनरल अयूब खान
(C) जनरल परवेज़ मुशर्रफ
(D) नवाज शरीफ
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने अक्टूबर 1999 में नवाज शरीफ की चुनी हुई सरकार को हटाकर सैन्य तख्तापलट किया था।
3
1958 से 1961 के दौरान पड़ा विश्व इतिहास का सबसे भयानक अकाल किस देश में आया था जिसमें लगभग 3 करोड़ लोग मारे गए थे?
(A) भारत
(B) चीन
(C) बांग्लादेश
(D) इथियोपिया
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
चीन में 1958-1961 का अकाल पड़ा था; गैर-लोकतांत्रिक शासन होने के कारण सरकार पर कोई जवाबदेही नहीं थी और खाद्य संकट विकराल हो गया।
4
मैक्सिको में 1930 से 2000 तक लगभग 70 वर्षों तक लगातार हर चुनाव जीतने वाली राजनीतिक पार्टी का क्या नाम था?
(A) कम्युनिस्ट पार्टी
(B) PRI (Institutional Revolutionary Party)
(C) डेमोक्रेटिक पार्टी
(D) नेशनल पीपुल्स कांग्रेस
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
मैक्सिको में PRI (संस्थागत क्रांतिकारी पार्टी) ने 70 वर्षों तक अनुचित चुनावी तिकड़मों के बल पर सत्ता बनाए रखी।
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अध्याय 1: फ्रांसीसी क्रांति (The French Revolution) अध्याय 2: यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति (Socialism in Europe and the Russian Revolution) अध्याय 3: नात्सीवाद और हिटलर का उदय (Nazism and the Rise of Hitler) अध्याय 4: वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद (Forest Society and Colonialism) अध्याय 5: आधुनिक विश्व में चरवाहे (Pastoralists in the Modern World) अध्याय 6: भारत - आकार और स्थिति (India - Size and Location) अध्याय 7: भारत का भौतिक स्वरूप (Physical Features of India) अध्याय 8: अपवाह (Drainage) अध्याय 9: जलवायु (Climate) अध्याय 10: प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी (Natural Vegetation and Wildlife) अध्याय 11: जनसंख्या (Population) अध्याय 12: लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? (What is Democracy? Why Democracy?) अध्याय 13: संविधान निर्माण (Constitutional Design) अध्याय 14: चुनावी राजनीति (Electoral Politics) अध्याय 15: संस्थाओं का कामकाज (Working of Institutions) अध्याय 16: लोकतांत्रिक अधिकार (Democratic Rights) अध्याय 17: पालमपुर गाँव की कहानी (The Story of Village Palampur) अध्याय 18: संसाधन के रूप में लोग (People as Resource) अध्याय 19: निर्धनता: एक चुनौती (Poverty as a Challenge) अध्याय 20: भारत में खाद्य सुरक्षा (Food Security in India)

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