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NIOS • कक्षा X • Science & Technology (212) • अध्याय 31
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

खाद्य उत्पादन (Food Production)

भोजन सभी सजीव प्राणियों की प्राथमिक आवश्यकता है। यह हमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा (लिपिड), विटामिन तथा खनिज लवण प्रदान करता है, जो शारीरिक वृद्धि, विकास, स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा के लिए अनिवार्य हैं। भारत विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बन चुका है, जिसकी जनसंख्या 1.4 अरब से अधिक है। इस विशाल जनसंख्या के भरण-पोषण के लिए हमें प्रतिवर्ष अरबों टन खाद्यान्न, दालों, तिलहनों, दूध, अंडे और मांस की आवश्यकता होती है। चूँकि हमारे पास कृषि योग्य भूमि सीमित है और उसमें अधिक विस्तार संभव नहीं है, अतः उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र वैज्ञानिक उपाय प्रति हेक्टेयर कृषि भूमि की उत्पादकता में गुणात्मक एवं मात्रात्मक सुधार करना है। भारत में पूर्व में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए 'हरित क्रांति' (Green Revolution - डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन के नेतृत्व में) तथा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए 'श्वेत क्रांति' (White Revolution / ऑपरेशन फ्लड - डॉ. वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में) संचालित की गई। परंतु अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से मृदा की उर्वरता और पर्यावरण को भारी क्षति पहुँची है। अतः आज का वैज्ञानिक लक्ष्य संपोषणीय कृषि (Sustainable Agriculture) तथा जैविक खेती (Organic Farming) को अपनाना है। इस अध्याय में हम खाद्य उत्पादन सुधार की तीन प्रमुख वैज्ञानिक कार्यप्रणालियों का विस्तृत अध्ययन करेंगे: फसल की किस्मों में सुधार: संकरण (Hybridisation), आनुवंशिक रूपांतरण, उच्च उपज, रोग प्रतिरोधकता और व्यापक अनुकूलनशीलता। फसल उत्पादन प्रबंधन: 16 पोषक तत्वों का प्रबंधन, खाद (Compost, Vermicompost, Green Manure) बनाम रासायनिक उर्वरक, सिंचाई के वैज्ञानिक तंत्र (ड्रिप एवं स्प्रिंकलर प्रणाली), तथा मिश्रित फसल, अंतराफसलीकरण एवं फसल चक्र। फसल सुरक्षा प्रबंधन: खरपतवार नियंत्रण, कीट-पीड़क नियंत्रण तथा अनाजों का सुरक्षित वैज्ञानिक भंडारण। इसके साथ ही पशुधन संपदा को उन्नत करने के लिए पशुपालन (मवेशी पालन), कुक्कुट पालन (Poultry Farming), मत्स्य उत्पादन (मिश्रित मत्स्य संवर्धन) तथा मधुमक्खी पालन (Apiculture) का सर्वांगीण वैज्ञानिक विवेचन किया गया है। झारखंड अधिविद्य परिषद् (NIOS Class 9) बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से 6 से 8 अंकों के अत्यंत महत्वपूर्ण व्यावहारिक प्रश्न पूछे जाते हैं। खाद और उर्वरक में तुलनात्मक अंतर, अंतराफसलीकरण बनाम फसल चक्र के लाभ, संमिश्र मत्स्य संवर्धन (Composite Fish Culture) की विशेषताएं, तथा मधुमक्खी पालन में इटैलियन मक्खी (एपिस मेलीफेरा) के गुणों पर प्रश्न प्रतिवर्ष निश्चित रूप से पूछे जाते हैं।

🐟 एक ही छोटे से तालाब में 5 अलग-अलग प्रजातियों की 5000 मछलियाँ बिना एक-दूसरे का भोजन छीने और बिना लड़े एक साथ कैसे फलती-फूलती हैं?

सामान्यतया जब आप किसी सीमित स्थान या तालाब में विभिन्न प्रकारों के सामान को एक साथ रखते हैं, तो वे भोजन और स्थान के लिए भयानक अनुभव करते हैं और डर्बल आर्किटेक्चर नष्ट हो जाते हैं।

लेकिन भारत के आधुनिक मत्स्य पालन ने एक ऐसी जादुई तकनीक विकसित की है जिसे 'संमिश्र मत्स्य पालन' (समग्र मछली संस्कृति) कहा जाता है! एक ही तालाब में 5 से 6 विभिन्न जन्तुओं की मछलियाँ-जैसे कटाला, रोहू, मृगल, कॉमन कार्प और सिल्वर कार्प-एक साथ पाली जाती हैं, और आश्चर्यजनक रूप से उनका उत्पादन 10 गुना तक बढ़ जाता है!

वे इन लड़कियों में क्यों नहीं? क्योंकि कतला केवल पानी की सबसे ऊपरी सतह से भोजन की अनुमति है; रोहू तालाब के बीच के पानी से खाने की व्यवस्था है; मृगल और कॉमनवेल्थ कार्प तालाब की तलहटी (पेंडी) से भोजन चुनी जाती हैं; और सिल्वर कार्प केवल जलीय इंद्रधनुषों को साफ करता है! तालाब का एक भी कोना और भोजन का एक भी टुकड़ा विकल्प नहीं!

यही तो है कृषि एवं खाद्य विज्ञान का चमत्कार! आइए, व्यवसाय के निर्माण में वृद्धि, जैविक खाद निर्माण और उन्नत पोर्टफोलियो के इन वैज्ञानिक रहस्यों का विस्तार से अवलोकन!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह अध्याय आपकी वैज्ञानिक यात्रा एवं जीवन के लिए क्यों भिन्न है?

  1. **एनआईओएस बोर्ड परीक्षा में सरल एवं न्यूनतम अंतर में अंतर (3 अंक), फसल चक्र के लाभ (2 अंक), संमिश्र मत्स्य पालन (3 अंक), और कुक्कुट पालन के उद्देश्य हर साल पूछे जाते हैं।
  2. कृषि प्रधान राज्य झारखंड के लिए वैश्विक आभूषण:मोझारा के पूर्वी क्षेत्र में वर्षा जल संचयन, जैविक खाद (वर्मीकम्पोस्ट), लाह और कृषि क्षेत्र तथा देशी नस्लों के विविध का सतत सार्वभौमिक ज्ञान।
  3. खाद्य सुरक्षा एवं पर्यावरण संतुलन: रासायनिक रसायनों के रसायनों से बचना, जैविक खेती अपनाना, और सतत विकास (सतत विकास) के लक्ष्य को प्राप्त करना।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पौधों में पोषण (प्रकाश संश्लेषण) की आधारभूत समझ।
  • पौधों की वृद्धि के लिए मृदा और जल की आवश्यकता।
  • सजीवों में विभिन्न पोषक तत्वों (प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा) का ज्ञान।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • फसल सुधार के तीन प्रमुख चरणों (किस्म सुधार, उत्पादन प्रबंधन, सुरक्षा प्रबंधन) की व्याख्या कर सकेंगे।
  • पादपों के लिए आवश्यक 16 पोषक तत्वों का वृहत् (मैक्रो) एवं सूक्ष्म पोषक (माइक्रो) पोषक तत्वों में पोषक तत्व।
  • खाद (खाद) और रासायनिक ग्रेडिएंट (उर्वरक) के शानदार नुकसान का अधूरा चार्ट बना।
  • मिश्रित फ़सल (मिश्रित फ़सल), अंतराफ़सलीकरण (इंटरक्रॉपिंग) और फ़सल चक्र (फ़सल चक्र) वैज्ञानिक विभेद कर फ़ायदेमंद।
  • अनाज भंडारण में होने वाली जैविक एवं अजैविक हानियों तथा उनके निवारण के उपायों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • दुग्ध उत्पादन हेतु मवेशियों की देशी एवं विदेशी नस्लों के संकरण के लाभ समझ सकेंगे।
  • ब्रॉयलर (मांस) और लेयर (अंडे) कुक्कुट पालन के प्रबंधन अंतर को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • संमिश्र मत्स्य पालन (कम्पोजिट फिश कल्चर) और एडवांस्ड मछली पालन (इतालवी मक्खी - एपिस मेलीफेरा) की यात्रा का विवरण कर फ़ायदेमंद।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. फसल की किस्मों में सुधार एवं पोष...
2 2. खाद बनाम उर्वरक तथा फसल पैटर्न
3 3. फसल सुरक्षा प्रबंधन एवं अनाज भंड...
4 4. पशुधन प्रबंधन: पशुपालन, कुक्कुट,...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. फसल की किस्मों में सुधार एवं पोषक तत्व प्रबंधन

(क) खेती में सुधार का उद्देश्य

फसल की अच्छी लंबाई का विकास संकरण (संकरण - आनुवंशिक रूप से भिन्न सैद्धांतिक में क्रॉसिंग) या जीन समानता (आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलें) द्वारा किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य हैं:

  1. उच्च उपज (उच्च उपज): प्रति फसल की उत्पादकता।
  2. उन्नत गुणवत्ता (बेहतर गुणवत्ता): गेहूं में गेहूं की गुणवत्ता, दालों में प्रोटीन, तिलहनों में तेल तथा फल-सब्जियों में संरक्षण गुणवत्ता।
  3. जैविक एवं अजैविक यौगिक: जैविक कारक (रोग, कीट, सूत्रकृमि) तथा अजैविक कारक (सूखा, लवणता, भारी ताप/ठंड, पाला) को सहन करने की क्षमता।
  4. परिपक्वता काल में परिवर्तन (छोटी परिपक्वता अवधि): बीज हड्डी से काटने तक का समय कम होने से किसान एक वर्ष में कई फसल उगा सकते हैं।
  5. व्यापक अनुकूलनशीलता: एक ही वृक्ष विभिन्न जलवायु वाले क्षेत्रों में उगे जा सके।

(ख) पादप पोषण: 16 अनिवार्य पोषक तत्त्व

पौधों की स्वस्थ वृद्धि के लिए 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता है:

स्रोत पोषक तत्व
1. वायु (वायु) - 2 कार्बन (C) और ऑक्सीजन (O)
2. जल (पानी) - 1 हाइड्रोजन (एच)
3. मिट्टी (मिट्टी) - 13 • वृहत पोषक तत्व (मैक्रो-पोषक तत्व, अधिक मात्रा में आवश्यक - 6): डाइजेक्स (एन), फास्फोरस (पी), पोटेशियम (के), कैल्शियम (सीए), मैग्नीशियम (एमजी), मैग्नीशियम (एस)।
• सूक्ष्म पोषक तत्व (सूक्ष्म पोषक तत्व, अल्प मात्रा में आवश्यक - 7): आयरन (Fe), मैगनीज (Mn), बोरॉन (B), पाइथन (Zn), कॉपर (Cu), मोलिब्डेनम (Mo), वैलिडाइन (Cl)।

2. खाद बनाम उर्वरक तथा फसल पैटर्न

(क) खाद (खाद) बनाम रासायनिक उर्वरक (उर्वरक)

लक्षण खाद (खाद) रासायनिक ग्रेड (उर्वरक)
प्रकृति एवं स्रोत प्राकृतिक प्राकृतिक पदार्थ, जो गोबर, मलमूत्र वक्रोबा के चॉकलेट के अपघटन से बनता है। कारखानों में निर्मित अकार्बनिक रासायनिक लवण (जैसे सोडियम, एनपीके, अमोनियम अमोनियम)।
ह्यूमस की मात्रा मिट्टी को प्रचुर मात्रा में ह्यूमस (जीवांश) प्रदान करता है। मिट्टी को कोई भी ह्यूमस प्रदान नहीं करता है।
पोषक तत्व एकाग्रता पोषक तत्व में अलग-अलग कम सांद्रता होती है, धीरे-धीरे-धीरे-धीरे अवशोषित होती है। विशेष पोषक तत्व (एन, पी, के) में अत्यधिक समृद्ध, तत्काल उपचार मिलते हैं।
मृदा पर प्रभाव दीर्घकाल में मिट्टी की संरचना, जल-धारण क्षमता और उर्वरता में सुधार होता है। लगातार प्रयोग से मिट्टी की संरचना होती है, लवणता गुणात्मक होती है और रसायन गुणात्मक/अम्लीय हो जाती है।

(ख) फसल संरचना के प्रमुख तीन प्रकार

  1. मिश्रित फसल (मिश्रित फसल): एक ही खेत में एक साथ दो या अधिक फसलें बिना किसी निश्चित श्रेणी की फसल के उगाना (उदा: गेहूँ + चना, गेहूँ + उपज, मूँगफली + सूरजमुखी)। लाभ: एक फसल के नष्ट होने पर भी दूसरी फसल से सुरक्षा मिलती है (जोखिम कम)।
  2. अंतरफसलीकरण (इंटरक्रॉपिंग): एक ही खेत में दो या अधिक फसलें एक निश्चित फसल की, कुछ फसलें दूसरी फसल की, ओबाना में (उदा: सोयाबीन + मक्का, बाजारा + लोबिया)। लाभ: पोषक तत्वों का अधिकतम उपयोग होता है तथा कृषक-बीमारियां एक ही कृषि पर सीमित जीवन हैं।
  3. फसल चक्र (फसल चक्र): किसी भी खेत में क्रमवार पूर्व- योजनाबद्ध तरीके से विभिन्न फसलों को बदल-बदल कर लगाना। प्रायः अनाज वाली फसल (जैसे धान या गेहूँ) के बाद दलहनी फसल (जैसे चना, मटर, मूँग) उगाई जाती है, क्योंकि दलहनी पौधों की जड़ों में उपस्थित राइजोबियम जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करके मिट्टी को बिना खाद के स्वाभाविक रूप से उपजाऊ बना देते हैं।

3. फसल सुरक्षा प्रबंधन एवं अनाज भंडारण

(के) फसल सुरक्षा: स्लीपर एवं कीट नियंत्रण

  • खरपतवार (खरपतवार): कृषि भूमि में मुख्य फसल के साथ स्वतः उगने वाले व्यावहारिक उपाय (उदा: गोखरू / जैंथियम, गाजर घास / पारथेनियम, मोथा / साइप्रिनस)। ये सूर्य के प्रकाश, जल और पोषक तत्वों के लिए मुख्य फसल से उगाए जाते हैं जिससे उपज घटती है।
  • कीट-पीड़क (कीट कीट):सीया को तीन प्रकार से नुकसान पहुंचाते हैं: (1) जड़, तने और झींगा को काटना, (2) कोशिकीय रस डंकना, और (3) तने और पेड़ों में छेद करना (बोरर)।
  • रोकथाम: शाकनाशी व कृषकों का नियंत्रक उपकरण, ग्रीष्मकालीन जुताई (ग्रीष्मकालीन जुताई), तथा यांत्रिक विधि से रेशम उखाड़ना।

(ख) अनाज भण्डार में क्षति एवं नियंत्रण

कटाई के अभिलेखों में अनाजों को भारी क्षति होने वाले दो मुख्य कारण हैं:

  1. जैविक कारक (जैविक कारक): कीट, कीट, कीट, क्रांतक (चूहे), विषाणु, घुन, कवक (फफुंड) और जीवाणु।
  2. अजैविक कारक (अजैविक कारक): भंडार स्थान अथिक पदार्थ तथा अनुपयुक्त तापमान।

सुरक्षित भंडारगृहों के उपाय: भंडारगृहों से पूर्व दानों को धूप में अच्छी तरह सुखाना (9-10% से कम करना), गोदामों के रासायनिक धुंए (धूम्रीकरण / धूमन) द्वारा सफाई, तथा नीम के भंडारों का पारंपरिक उपयोग।

4. पशुधन प्रबंधन: पशुपालन, कुक्कुट, मत्स्य एवं मधुमक्खी पालन

(क) मवेशी पालन (मवेशी पालन)

कृषि में दो कृषि उत्पाद से पाला जाता है: (1) दुग्ध (दूध देने वाले पशु / दुधारू पशु) और (2) कृषि कार्य (हलचल, गाड़ी खींचने / खींचने वाला पशु)।

  • एनएसएल सुधार (क्रॉस ब्रीडिंग): विदेशी नस्लें (जैसे जर्सी, ब्राउन स्विस - उच्च दुग्ध श्रवण काल) और भारतीय देशी नस्लें (जैसे रेड सिंधी, साहीवाल - विशिष्ट रोग प्रतिभाएं) का सांकरण कराके दोनों उत्कृष्ट नस्लें नस्लें तैयार की जाती हैं।

(ख) कुक्कुट पालन (मुर्गी पालन)

मुर्गियों का पालन-पोषण दो संतों से होता है:

  1. लेयर (परतें - अन्य के लिए):सहायक कैल्शियम आहार दिया जाता है और प्रकाश प्रबंधन पर ध्यान दिया जाता है।
  2. ब्रॉयलर (ब्रॉयलर - मांस के लिए):विटामिन ए और के युक्त उच्च प्रोटीन व वसायुक्त आहार दिया जाता है और 6-8 सप्ताह में मांस का मांस तैयार किया जाता है। (भारतीय देशी नस्ल असील तथा विदेशी लेगहॉर्न का संकरण प्रचलित है)।

(जी) संमिश्र मत्स्य पालन (समग्र मछली पालन)

एक ही तालाब में 5-6 विभिन्न जनजाति की मछलियाँ खेलती हैं जो भोजन के लिए संयुक्त भोजन नहीं करतीं:

  • साथ पर भोजन लेने वाली: कटला (Catla)
  • मध्य क्षेत्र में भोजन लेने वाली: रोहू (Rohu)
  • पेंडी (तलहटी) से भोजन लेने वाली: मृगल (मृगल) और कॉमन कार्प (कॉमन कार्प)
  • जलीय पिज्जा खाने वाली: ग्रास कार्प (ग्रास कार्प)

(घ) मधुमक्खी पालन (मधुमक्खीपालन)

शहद और माँ के उत्पादन के लिए शाही छत्तों का रख-रखाव विद्वान है।

इटैलियन रेशा (एपिस मेलिफ़ेरा - एपिस मेलिफ़ेरा) के 4 प्रमुख लाभ:

  1. इनमें शहद एक साथ करने की क्षमता अत्यधिक उच्च होती है।
  2. ये बहुत कम डंक मारती हैं (शांत स्वभाव).
  3. ये नीचे दिए गए छत्ते में लंबे समय तक टिकी रहते हैं।
  4. इनमें जन्म की दर बहुत तेज होती है।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

पौधों के कुल आवश्यक पोषक तत्व
16 (वायु से 2, जल से 1, मृदा से 13)
पोषक तत्व पोषक तत्व (मैक्रो-पोषक तत्व, 6)
N, P, K, Ca, Mg, S
सूक्ष्म पोषक तत्व (सूक्ष्म पोषक तत्व, 7)
Fe, Mn, B, Zn, Cu, Mo, Cl
इटैलियन मधुमक्खी का वैज्ञानिक नाम
एपिस मेलीफेरा (Apis mellifera)
भारतीय देशी मधुमक्खी का नाम
एपिस सेरेना इंडिका (Apis cerana indica)
संमिश्र मत्स्य: सतह भोजी
कतला (Catla)
संमिश्र मत्स्य: मध्य भोजी
रोहू (Rohu)
संमिश्र मत्स्य: तलहटी भोजी
मृगल (Mrigal) एवं कॉमन कार्प (Common Carp)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
JAC मॉडल बोर्ड प्रश्न (3 अंक): खाद्य और पोषक तत्व में कोई तीन प्रमुख अंतर स्पष्ट है।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

खाद एवं उर्वरक में अंतर:

  1. उत्पत्ति: खाद एक प्राकृतिक कार्बनिक पदार्थ है जो पशुओं के गोबर, मलमूत्र एवं पौधों के अवशेषों के अपघटन से बनता है; जबकि उर्वरक कारखानों में निर्मित अकार्बनिक रासायनिक लवण है।
  2. ह्यूमस: खाद मिट्टी को प्रचुर मात्रा में ह्यूमस (जीवांश) प्रदान करती है जिससे मिट्टी की जल-धारण क्षमता सुधरती है; जबकि उर्वरक मिट्टी को कोई ह्यूमस प्रदान नहीं करता।
  3. पोषक तत्वों की सांद्रता: उर्वरक में विशिष्ट पादप पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम) प्रचुर मात्रा में होते हैं; जबकि खाद में पोषक तत्व अपेक्षाकृत कम मात्रा में होते हैं परंतु वे दीर्घकालिक उर्वरता बनाए रखते हैं।
उदाहरण 2
JAC बोर्ड 3 अंक प्रश्न: मिश्रित मछली पालन (कम्पोजिट फिश कल्चर) के क्या फायदे हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

संमिश्र मत्स्य संवर्धन में एक ही तालाब में 5-6 प्रजातियों की मछलियों का एक साथ पालन किया जाता है। लाभ:

  1. ये मछलियाँ आहार के लिए परस्पर कोई प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं क्योंकि उनके भोजन के क्षेत्र और आदतें भिन्न-भिन्न होती हैं।
  2. तालाब के प्रत्येक भाग (सतह, मध्य व तलहटी) में उपलब्ध समस्त भोजन का पूर्ण और कुशल उपयोग हो जाता है।
  3. इससे तालाब की मछली उत्पादन क्षमता में 8 से 10 गुना वृद्धि हो जाती है।

मछलियों का चयन:

  • सतह भोजी: कतला
  • मध्य क्षेत्र भोजी: रोहू
  • पेंदी भोजी: मृगल एवं कॉमन कार्प
  • खरपतवार भोजी: ग्रास कार्प।
उदाहरण 3
विभेदन कियो (3 अंक): अंतरफसलीकरण (इंटरक्रॉपिंग) और फसल चक्र (फसल चक्र) में अंतर।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

अंतर:

  1. अंतराफसलीकरण: एक ही खेत में एक ही समय पर दो या अधिक फसलों को निश्चित कतारों के अनुपात में उगाया जाता है (उदा. सोयाबीन + मक्का)। इससे भूमि व पोषक तत्वों का अधिकतम उपयोग होता है तथा एक फसल के कीट दूसरी फसल में आसानी से नहीं फैलते।
  2. फसल चक्र: एक ही खेत में विभिन्न फसलों को पूर्व-नियोजित योजना के अनुसार बदल-बदल कर क्रमानुसार उगाया जाता है (उदा. धान की फसल के बाद दलहन/चना उगाना)। इससे मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बनी रहती है और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है।
उदाहरण 4
कारण बताइए (2 अंक): व्यावसायिक शहद उत्पादन के लिए इटैलियन मधुमक्खी (एपिस मेलीफेरा) को क्यों प्राथमिकता दी जाती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

इटैलियन मधुमक्खी (एपिस मेलीफेरा) की निम्नलिखित विशेषताओं के कारण इसे प्राथमिकता दी जाती है:

  1. इसमें शहद एकत्र करने की क्षमता भारतीय देशी मक्खियों की तुलना में अत्यधिक उच्च होती है।
  2. यह बहुत कम डंक मारती है और दिए गए कृत्रिम छत्ते में लंबे समय तक टिकी रहती है, तथा इसमें तीव्र प्रजनन क्षमता होती है।
उदाहरण 5
विभेदन उत्तर (2 अंक): वृहत् पोषक तत्व (मैक्रो-पोषक तत्व) और सूक्ष्म पोषक तत्व (सूक्ष्म पोषक तत्व) से पोषक तत्व क्या है? उदाहरण दें।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
  • वृहत पोषक तत्त्व: वेवप्रोडक्टो को शारीरिक वृद्धि में अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है (उदा: फॉस्फोरस-एन, फॉस्फोरस-पी, पोटाशियम-के)। इनकी कुल संख्या 6 है।
  • सूक्ष्म पोषक तत्व: वे तत्व प्रोटोकॉल को अति अल्पावधि (सुक्ष्म) मात्रा में आवश्यक है (उदा: आयरन-फे, पियोन-जेडएन, बोरॉन-बी, कॉपर-सीयू)। इनकी कुल संख्या 7 है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

उर्वरक को पर्यावरण के लिए सदैव सुरक्षित और खाद से बेहतर मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

उर्वरक तुरंत पोषक तत्व देते हैं किंतु दीर्घकाल में मृदा की संरचना बिगाड़ते हैं और जल प्रदूषण फैलाते हैं। खाद मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और पर्यावरण के लिए कहीं अधिक सुरक्षित है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

संमिश्र मत्स्य संवर्धन में मांसाहारी मछलियों को शामिल मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

इसमें केवल शाकाहारी और विशिष्ट आहार वाली कार्प मछलियाँ चुनी जाती हैं जो एक-दूसरे को नहीं खातीं और भोजन के लिए नहीं लड़तीं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

ब्रॉयलर को अंडों के लिए पाला जाना लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ब्रॉयलर केवल मांस (मांस) उत्पादन 6-8 सप्ताह पीला हो जाता है; अंडों के लिए प्ले जाने वाली इंडिका को "लेयर्स" (परतें) कहा जाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पौधों के कुल पोषकों की संख्या 13 लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पौधों को कुल 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है: 3 वायु व जल से (C, H, O) तथा 13 मृदा से प्राप्त होते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

इटैलियन मधुमक्खी का नाम एपिस सेरेना इंडिका लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

एपिस सेरेना इंडिका भारतीय देशी लकीर है; इटैलियन वृतांत का वैज्ञानिक नाम "एपिस मेलिफ़ेरा" (एपिस मेलिफ़ेरा) है।

खाद्य संसाधन सुधार एवं संमिश्र मत्स्य पालन चार्ट (खाद्य संसाधन प्रबंधन)

खाद्य संसाधन सुधार एवं संमिश्र मत्स्य संवर्धन NCERT / JAC Board Class 9 Science Chapter 12 पौधों के 16 अनिवार्य पोषक तत्व वायु एवं जल (3): कार्बन (C), ऑक्सीजन (O), हाइड्रोजन (H) मृदा - वृहत् पोषक (Macro - 6): नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटैशियम (K) कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg), सल्फर (S) मृदा - सूक्ष्म पोषक (Micro - 7): आयरन (Fe), मैंगनीज (Mn), बोरॉन (B), जिंक (Zn) कॉपर (Cu), मोलिब्डेनम (Mo), क्लोरीन (Cl) खाद = जीवांश व उर्वरता | उर्वरक = NPK रासायनिक लवण संमिश्र मत्स्य संवर्धन (तालाब स्तर) 1. सतह भोजी (Surface Feeders): कतला (Catla) - प्लवकों का भक्षण 2. मध्य क्षेत्र भोजी (Middle Zone): रोहू (Rohu) - शैवाल व मध्य पादप 3. पेंदी भोजी (Bottom Feeders): मृगल (Mrigal) एवं कॉमन कार्प (Common Carp) ग्रास कार्प (Grass Carp) - जलीय खरपतवार शून्य प्रतिस्पर्धा → अधिकतम उत्पादन (10 गुना) संपोषणीय कृषि = जैविक खेती + फसल चक्र • इटैलियन मक्खी (एपिस मेलीफेरा) = उच्च शहद उत्पादन

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
खाद्यान्न सुरक्षा हेतु प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाना अनिवार्य है; हरित क्रांति (अनाज) व श्वेत क्रांति (दुग्ध) ने उत्पादन बढ़ाया।
मुख्य बिंदु 2
पौधों को 16 अनिवार्य पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है: 3 वायु व जल से तथा 13 मृदा से (6 वृहत् पोषक व 7 सूक्ष्म पोषक)।
मुख्य बिंदु 3
जो मिट्टी को समृद्ध सिंथेटिक पदार्थ कहते हैं; विभिन्न प्रकार के निर्मित रासायनिक लवण (NPK) हैं।
मुख्य बिंदु 4
मिश्रित फसल में दो फसलें एक साथ बिना कतार के, अंतराफसलीकरण में निश्चित कतारों में, तथा फसल चक्र में क्रमवार बदल कर उगाई जाती हैं।
मुख्य बिंदु 5
अनाज भंडारण में नमी तथा जैविक कारक (कीट, चूहे, कवक) हानि पहुँचाते हैं; धूप में सुखाना व धूम्रीकरण रोकथाम के उपाय हैं।
मुख्य बिंदु 6
पशुपालन में विदेशी नस्ल (लंबा दुग्धकाल) व देशी नस्ल (रोग प्रतिरोधक) का संकरण कराया जाता है।
मुख्य बिंदु 7
मुर्गियों में अंडों के लिए "लेयर्स" तथा मांस के लिए "ब्रॉयलर" का पालन किया जाता है।
मुख्य बिंदु 8
संमिश्र मत्स्य संवर्धन में कतला (सतह), रोहू (मध्य), मृगल व कॉमन कार्प (पेंदी) एक ही तालाब में बिना प्रतिस्पर्धा के पाली जाती हैं।
मुख्य बिंदु 9
इटैलियन मधुमक्खी (एपिस मेलीफेरा) शांत स्वभाव, कम डंक मारने तथा उच्च शहद संचय क्षमता के कारण सर्वश्रेष्ठ है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
वृहत् पोषक तत्व (मैक्रो-पोषक तत्व) किसे कहते हैं? इनका नाम लिखें।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: प्रोटीनयुक्त जिन पोषक तत्वों की अधिक मात्रा आवश्यक होती है, उन्हें वृहत् पोषक तत्व कहते हैं। ये 6 हैं: मैग्नीशियम (N), फास्फोरस (P), पोटेशियम (K), कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg) और फास्फोरस (S)।
2
फसल चक्र (फसल चक्र) में दलहनी फसल को ओबाना क्यों मिलती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि दलहनी पौधों (चना, मटर, मूँग आदि) की जड़ों की ग्रंथियों में राइजोबियम जीवाणु पाए जाते हैं, जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को नाइट्रेट में बदलकर मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को समृद्ध कर देते हैं।
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संमिश्र मत्स्य संवर्धन में रोहू और कतला किन-किन क्षेत्रों से भोजन लेती हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कटाला तालाब की सबसे ऊपरी सतह (सतह) से तथा रोहू तालाब के मध्य क्षेत्र (मध्य क्षेत्र) से भोजन की योजना है।
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कुक्कुट पालन में ब्रॉयलर और लेयर के आहार में क्या अंतर होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ब्रॉयलर को शीघ्र शारीरिक वृद्धि और मांस हेतु विटामिन A और K युक्त उच्च प्रोटीन व वसायुक्त आहार दिया जाता है, जबकि लेयर को अंडों के उत्पादन हेतु पर्याप्त कैल्शियम युक्त संतुलित आहार दिया जाता है।
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अनाज भंडारण से पूर्व दानों को धूप में अच्छी तरह क्यों सुखाया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ताकि बीजों में उपस्थित नमी की मात्रा 9-10% से कम हो जाए। अधिक नमी होने पर कवक (फफूंद), सूक्ष्मजीव एवं कीट तीव्रता से पनपते हैं जो बीजों को सड़ाकर उनकी अंकुरण क्षमता नष्ट कर देते हैं।
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कक्षा 10 Science & Technology (212) के सभी अध्याय

अध्याय 1: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में मापन (Measurement in Science & Tech) अध्याय 2: हमारे आस-पास के पदार्थ (Matter in Our Surroundings) अध्याय 3: परमाणु एवं अणु (Atom and Molecules) अध्याय 4: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण (Chemical Reactions & Equations) अध्याय 5: परमाणु संरचना (Atomic Structure) अध्याय 6: तत्वों का आवर्त वर्गीकरण (Periodic Classification of Elements) अध्याय 7: रासायनिक आबंधन (Chemical Bonding) अध्याय 8: अम्ल, क्षारक और लवण (Acids, Bases and Salts) अध्याय 9: गति और उसका वर्णन (Motion and its Description) अध्याय 10: बल एवं गति (Force and Motion) अध्याय 11: गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) अध्याय 12: ऊर्जा के स्रोत (Sources of Energy) अध्याय 13: कार्य एवं ऊर्जा (Work and Energy) अध्याय 14: ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy) अध्याय 15: प्रकाश ऊर्जा (Light Energy) अध्याय 16: विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) अध्याय 17: विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effects of Current) अध्याय 18: ध्वनि एवं संचार (Sound and Communication) अध्याय 19: सजीवों का वर्गीकरण (Classification of Living Organisms) अध्याय 20: पृथ्वी पर जीवन का इतिहास (History of Life on Earth) अध्याय 21: जीवन की इकाइयाँ: कोशिका एवं ऊतक (Cell and Tissues) अध्याय 22: जैव प्रक्रम-1: पोषण, वहन, श्वसन एवं उत्सर्जन (Life Processes - 1) अध्याय 23: जैव प्रक्रम-2: नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) अध्याय 24: जैव प्रक्रम-3: जनन (Reproduction) अध्याय 25: आनुवंशिकता (Heredity) अध्याय 26: वायु एवं जल (Air and Water) अध्याय 27: धातु और अधातु (Metals and Non-metals) अध्याय 28: कार्बन और उसके यौगिक (Carbon and Its Compounds) अध्याय 29: प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment) अध्याय 30: पर्यावरण पर मानवीय प्रभाव (Human Impact on Environment) अध्याय 31: खाद्य उत्पादन (Food Production) अध्याय 32: स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (Health and Hygiene)

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