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CBSE • कक्षा 7 • Science • अध्याय 6
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

किशोरावस्था: वृद्धि और परिवर्तन की अवस्था

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) कक्षा 7 विज्ञान का पंचम अध्याय "भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन" (Physical and Chemical Changes) हमारे चारों ओर होने वाले परिवर्तनों के वैज्ञानिक वर्गीकरण का मुख्य आधार है। इसमें भौतिक बनाम रासायनिक परिवर्तन, मैग्नीशियम फीते का दहन, कॉपर सल्फेट-लोहा विस्थापन अभिक्रिया, कार्बन डाइऑक्साइड का चूने के पानी का परीक्षण, लोहे में जंग लगना व यशद-लेपन (गैल्वनीकरण), तथा क्रिस्टलीकरण का विस्तृत व प्रामाणिक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

🔬 क्या आपने कभी सोचा है?

🧊 बर्फ पिघलकर पानी बनती है और फिर जमने पर बर्फ बन जाती है, किंतु जब दूध एक बार फटकर दही बन जाता है, तो क्या आप दही से दोबारा दूध बना सकते हैं?

🪓 लोहे की नई चमकदार कुदाल या कील को कुछ दिन खुले मैदान में छोड़ देने पर उस पर कत्थई-लाल रंग की खुरदरी जंग क्यों लग जाती है, और वह लोहा कमजोर क्यों हो जाता है?

🧪 नीले रंग के कॉपर सल्फेट (तूतिया) के घोल में लोहे की कील डालने पर घोल का रंग हरा और कील पर तांबे जैसी लाल परत क्यों जम जाती है?

🍏 एक ताजे सेब को काटकर हवा में खुला छोड़ देने पर कटा हुआ भाग कुछ ही मिनटों में भूरा क्यों पड़ने लगता है?

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

प्रकृति और मानव सभ्यता में होने वाली हर घटना—खाना पकाने, ईंधन जलने, पाचन, पौधों में प्रकाश-संश्लेषण, प्लास्टिक निर्माण, दवाइयों के निर्माण और धातुओं के क्षरण तक—किसी न किसी परिवर्तन का परिणाम है। लोहे में जंग लगने से हर साल रेलवे पटरियों, पुलों, जहाजों और औद्योगिक संयंत्रों को खरबों रुपयों का नुकसान होता है। इस अध्याय को समझकर आप भौतिक और रासायनिक प्रक्रियाओं की पहचान, रासायनिक समीकरणों की समझ और संक्षारण से बहुमूल्य संसाधनों को बचाने की वैज्ञानिक तकनीकों से परिचित हो सकेंगे।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पदार्थ की भौतिक अवस्थाएँ (ठोस, द्रव, गैस) ताप और दाब बदलने पर एक-दूसरे में बदल सकती हैं।
  • परिवर्तन दो प्रकार के हो सकते हैं: जिन्हें उलटा जा सके (उत्क्रमणीय) और जिन्हें न उलटा जा सके (अनुत्क्रमणीय)।
  • हवा में ऑक्सीजन और जलवाष्प (नमी) उपस्थित होती है जो रसायनों से क्रिया कर सकती है।
  • तत्व आपस में मिलकर नए यौगिकों का निर्माण करते हैं।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • भौतिक परिवर्तन (Physical Change) और रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) में सुस्पष्ट अंतर व उदाहरण दे सकेंगे।
  • रासायनिक परिवर्तन के 5 मुख्य लक्षणों (ऊष्मा/प्रकाश निकलना, रंग बदलना, गैस बनना, गंध बदलना, ध्वनि होना) की पहचान कर सकेंगे।
  • मैग्नीशियम के दहन ($2Mg + O_2 \rightarrow 2MgO$) और भस्म के जलीय घोल ($MgO + H_2O \rightarrow Mg(OH)_2$) की रासायनिक व्याख्या कर सकेंगे।
  • कॉपर सल्फेट और लोहे की विस्थापन अभिक्रिया ($CuSO_4 + Fe \rightarrow FeSO_4 + Cu$) का समीकरण लिख सकेंगे।
  • कार्बन डाइऑक्साइड गैस की पहचान हेतु चूने के पानी के दूधिया होने की रासायनिक क्रिया समझा सकेंगे।
  • लोहे में जंग लगने की अनिवार्य शर्तों (ऑक्सीजन + नमी) और बचाव के उपायों—विशेष रूप से यशद-लेपन (गैल्वनीकरण)—का वर्णन कर सकेंगे।
  • क्रिस्टलीकरण (Crystallization) को शुद्ध ठोस प्राप्त करने के भौतिक प्रक्रम के रूप में सिद्ध कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. भौतिक परिवर्तन: लक्षण एवं उदाहरण...
2 2. रासायनिक परिवर्तन: लक्षण एवं रास...
3 3. तीन प्रसिद्ध प्रायोगिक रासायनिक...
4 4. लोहे में जंग लगना एवं रोकथाम: यश...
5 5. क्रिस्टलीकरण: शुद्ध ठोस प्राप्त...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. भौतिक परिवर्तन: लक्षण एवं उदाहरण (Physical Changes)

भौतिक गुण (Physical Properties): किसी पदार्थ का आकार (Shape), आमाप (Size), रंग (Color) और अवस्था (State: ठोस, द्रव, गैस) उसके भौतिक गुण कहलाते हैं।

भौतिक परिवर्तन (Physical Change): वह परिवर्तन जिसमें किसी पदार्थ के केवल भौतिक गुणों में परिवर्तन होता है और कोई नया रासायनिक पदार्थ नहीं बनता, भौतिक परिवर्तन कहलाता है।

प्रमुख लक्षण: यह परिवर्तन सामान्यतः उत्क्रमणीय (Reversible) होता है—अर्थात मूल पदार्थ को पुनः प्राप्त किया जा सकता है।

दैनिक जीवन के प्रमुख उदाहरण:

  • बर्फ का पिघलना और जल का वाष्पीकरण: अवस्था परिवर्तन में रासायनिक संघटक ($H_2O$) वही रहता है। भाप को ठंडा कर जल और जल को जमाकर पुनः बर्फ प्राप्त की जा सकती है।
  • कागज को छोटे-छोटे टुकड़ों में फाड़ना: आकार बदलता है, किंतु कागज के रासायनिक गुण वही रहते हैं।
  • चाक को पीसकर धूल बनाना: चाक का चूर्ण जल मिलाकर पुनः चाक की छड़ बन सकता है।
  • लोहार द्वारा लोहे को गर्म करना: गर्म करने पर लोहा लाल हो जाता है, किंतु ठंडा होने पर पुनः मूल रूप में आ जाता है।

2. रासायनिक परिवर्तन: लक्षण एवं रासायनिक अभिक्रियाएँ (Chemical Changes)

रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change): वह परिवर्तन जिसमें एक या एक से अधिक पूर्णतः नए पदार्थ (New Substances) बनते हैं, रासायनिक परिवर्तन कहलाता है।

रासायनिक परिवर्तन को ही रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction) कहते हैं। यह परिवर्तन प्रायः स्थायी और अनुत्क्रमणीय (Irreversible) होता है।

रासायनिक परिवर्तन के साथ होने वाले विशिष्ट लक्षण:

  1. ऊष्मा, प्रकाश या विकिरण का उत्सर्जन या अवशोषण (जैसे कोयले या मैग्नीशियम का जलना)।
  2. ध्वनि का उत्पन्न होना (जैसे पटाखों का फूटना)।
  3. गंध में स्थायी परिवर्तन (जैसे भोजन का बासी होकर दुर्गंध देना)।
  4. रंग में निश्चित परिवर्तन (जैसे कटे हुए सेब या बैंगन का हवा में भूरा पड़ना)।
  5. किसी गैस का बनना या बुलबुले निकलना (जैसे बेकिंग सोडा पर नींबू डालने से $CO_2$ के बुलबुले)।
मोमबत्ती का जलना — एक विशेष उदाहरण: मोमबत्ती के जलने में दोनों परिवर्तन एक साथ होते हैं। मोम का पिघलना एक भौतिक परिवर्तन है (पिघले मोम को पुनः जमाया जा सकता है), जबकि बत्ती का जलकर प्रकाश, ऊष्मा, $CO_2$ और कालिख बनाना एक रासायनिक परिवर्तन है।

3. तीन प्रसिद्ध प्रायोगिक रासायनिक अभिक्रियाएँ (3 Landmark Experiments)

(A) मैग्नीशियम फीते का दहन (Burning of Magnesium Ribbon):

जब मैग्नीशियम (Mg) के फीते को चिमटी से पकड़कर मोमबत्ती की लौ पर जलाया जाता है, तो यह चमकदार सफेद (डैज़लिंग) रोशनी के साथ जलता है और एक सफेद पाउडर जैसी भस्म (राख) छोड़ता है। यह भस्म मैग्नीशियम ऑक्साइड ($MgO$) है:

$$2Mg\text{ (मैग्नीशियम)} + O_2\text{ (ऑक्सीजन)} \longrightarrow 2MgO\text{ (मैग्नीशियम ऑक्साइड)}$$

जब इस भस्म ($MgO$) को पानी में घोला जाता है, तो एक नया क्षारक—मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड [$Mg(OH)_2$]—बनता है जो लाल लिटमस को नीला कर देता है:

$$MgO + H_2O \longrightarrow Mg(OH)_2\text{ (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड - क्षारकीय)}$$
(B) कॉपर सल्फेट एवं लोहे की अभिक्रिया (Displacement Reaction):

कांच के बीकर में नीले रंग का कॉपर सल्फेट (तूतिया / नीला थोथा) का जलीय घोल लें। उसमें एक साफ लोहे की कील या ब्लेड डाल दें। आधा घंटे बाद देखने पर:

  • घोल का नीला रंग बदलकर हल्का हरा (Light Green) हो जाता है (क्योंकि आयरन सल्फेट बन जाता है)।
  • लोहे की कील पर भूरे रंग की तांबे (Copper) की परत जम जाती है।
$$CuSO_4\text{ (कॉपर सल्फेट - नीला)} + Fe\text{ (लोहा)} \longrightarrow FeSO_4\text{ (आयरन सल्फेट - हरा)} + Cu\text{ (कॉपर - भूरा निक्षेप)}$$
(C) सिरका, बेकिंग सोडा एवं चूने का पानी ($CO_2$ Gas Test):

परखनली में सिरका (एसिटिक अम्ल) लेकर एक चुटकी खाने का सोडा (सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट) डालें। सनसनाहट के साथ गैस के बुलबुले निकलते हैं। यह गैस कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) है:

$$\text{सिरका} + \text{बेकिंग सोडा} \longrightarrow CO_2\uparrow + \text{अन्य उत्पाद}$$

जब इस $CO_2$ गैस को एक मुड़ी हुई नली द्वारा ताजे बने चूने के पानी [कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड - $Ca(OH)_2$] में प्रवाहित किया जाता है, तो चूने का पानी दूधिया (Milky) हो जाता है। ऐसा अघुलनशील कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) बनने के कारण होता है:

$$CO_2 + Ca(OH)_2 \longrightarrow CaCO_3\downarrow\text{ (कैल्शियम कार्बोनेट - दूधिया अवक्षेप)} + H_2O$$

4. लोहे में जंग लगना एवं रोकथाम: यशद-लेपन (Rusting of Iron & Galvanization)

जंग लगना (Rusting): जब लोहे की वस्तुएं वायुमंडल की नमी और हवा के संपर्क में खुली रहती हैं, तो उनकी सतह पर भूरे रंग की पपड़ीदार परत जम जाती है जिसे जंग (Rust) कहते हैं। जंग धीरे-धीरे लोहे को खाकर नष्ट कर देती है। जंग लोहे से पूर्णतः भिन्न एक नया रासायनिक यौगिक (जलयोजित आयरन ऑक्साइड) है।

जंग लगने का रासायनिक समीकरण:

$$4Fe\text{ (लोहा)} + 3O_2\text{ (ऑक्सीजन)} + 2xH_2O\text{ (जल/नमी)} \longrightarrow 2Fe_2O_3 \cdot xH_2O\text{ (जंग / Rust)}$$

जंग लगने की 2 अनिवार्य शर्तें: 1. ऑक्सीजन ($O_2$) की उपस्थिति और 2. जल या जलवाष्प (नमी) की उपस्थिति। यदि दोनों में से एक भी अनुपस्थित हो, तो लोहे में जंग कभी नहीं लग सकता। यही कारण है कि समुद्र तटीय क्षेत्रों में (हवा में अधिक नमी होने से) दिल्ली या राँची की तुलना में जंग बहुत तेजी से लगता है।

जंग से बचाव के प्रमुख उपाय:

  • पेंट या ग्रीस लगाना: लोहे की सतह को सीधे हवा और नमी के संपर्क में आने से रोकना।
  • यशद-लेपन (गैल्वनीकरण / Galvanization): लोहे की चादरों और पाइपों पर जस्ते (जिंक - Zinc) धातु की पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया को यशद-लेपन कहते हैं। जिंक की परत लोहे को वायुमंडल से पूरी तरह सुरक्षित रखती है। घरों में पानी की पाइपें और छतों के टीन शेड गैल्वनाइज्ड लोहे के होते हैं।
  • स्टेनलेस स्टील (मिश्रधातु): लोहे में कार्बन के साथ क्रोमियम, निकेल और मैंगनीज धातुएँ मिलाकर स्टेनलेस स्टील बनाया जाता है, जिसमें कभी जंग नहीं लगता। रसोई के बर्तन और सर्जिकल उपकरण इसी के बनते हैं।

5. क्रिस्टलीकरण: शुद्ध ठोस प्राप्त करने का भौतिक प्रक्रम (Crystallization)

समुद्र के जल का वाष्पीकरण करके जो नमक हमें मिलता है, वह शुद्ध नहीं होता और उसके कण बहुत छोटे होते हैं। किसी पदार्थ के गर्म संतृप्त विलयन से उसके बड़े आकार के शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त करने की वैज्ञानिक विधि को क्रिस्टलीकरण (Crystallization) कहते हैं।

यह एक भौतिक परिवर्तन है, क्योंकि इसमें कोई नया रासायनिक पदार्थ नहीं बनता; केवल कण एक नियमित सुंदर ज्यामितीय क्रिस्टल जालक में व्यवस्थित हो जाते हैं।

प्रयोग (कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल बनाना): बीकर में एक कप पानी लेकर उसमें तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की कुछ बूँदें डालें। पानी को बर्नर पर उबालें। उबलते पानी में कॉपर सल्फेट का चूर्ण तब तक मिलाते रहें जब तक कि और अधिक चूर्ण घुलना बंद न हो जाए (संतृप्त विलयन)। अब इसे फिल्टर पेपर से छान लें और बिना हिलाए ठंडा होने दें। कुछ घंटों बाद बीकर की तली में चमकदार सुंदर नीले क्रिस्टल दिखाई देते हैं।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

मैग्नीशियम दहन समीकरण
2Mg + O₂ → 2MgO (मैग्नीशियम ऑक्साइड राख)
रासायनिक परिवर्तन
विस्थापन अभिक्रिया (तूतिया + लोहा)
CuSO₄ (नीला) + Fe → FeSO₄ (हरा) + Cu (भूरा)
रंग परिवर्तन
CO₂ चूने का पानी परीक्षण
CO₂ + Ca(OH)₂ → CaCO₃↓ (दूधिया) + H₂O
दूधिया अवक्षेप
लोहे पर जंग लगने का समीकरण
4Fe + 3O₂ + 2xH₂O → 2Fe₂O₃·xH₂O (जंग)
नमी + ऑक्सीजन अनिवार्य

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
Q1 (प्रत्यास्मरण): भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन में दो मुख्य अंतर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
1. भौतिक परिवर्तन: इसमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता और यह सामान्यतः उत्क्रमणीय होता है (उदा. बर्फ का पिघलकर जल बनना)।
2. रासायनिक परिवर्तन: इसमें एक या अधिक नए रासायनिक गुण वाले पदार्थ बनते हैं और यह अपरिवर्तनीय होता है (उदा. दूध से दही जमना, लोहे में जंग लगना)।
उदाहरण 2
Q2 (अवधारणा): जब कॉपर सल्फेट के नीले घोल में लोहे की कील डाली जाती है, तो घोल का रंग बदलकर हरा क्यों हो जाता है और कील पर भूरी परत क्यों जमती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: लोहा (Fe) कॉपर (Cu) से अधिक क्रियाशील धातु है। लोहा कॉपर सल्फेट के घोल में से कॉपर को विस्थापित कर देता है और स्वयं आयरन सल्फेट ($FeSO_4$) बना लेता है, जो हरे रंग का होता है। विस्थापित हुआ तांबा (कॉपर) भूरे रंग के निक्षेप के रूप में लोहे की कील पर जम जाता है।
उदाहरण 3
Q3 (अनुप्रयोग): समुद्र तटीय शहरों (जैसे मुंबई, चेन्नई) में लोहे की ग्रिल और खिड़कियों पर राँची या जमशेदपुर की तुलना में बहुत जल्दी जंग क्यों लग जाती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: लोहे में जंग लगने के लिए ऑक्सीजन के साथ-साथ जलवाष्प (नमी) का होना अनिवार्य है। समुद्र तटीय क्षेत्रों में समुद्र के कारण हवा में आर्द्रता (नमी) का प्रतिशत बहुत अधिक होता है और हवा में समुद्री लवण (नमक) भी मिले होते हैं, जो जंग लगने की प्रक्रिया को कई गुना तेज कर देते हैं। अतः वहाँ लोहे की चीजें बहुत जल्दी संक्षारित होती हैं।
उदाहरण 4
Q4 (कारण व प्रभाव): मोमबत्ती के जलने की क्रिया में भौतिक और रासायनिक दोनों परिवर्तन एक साथ होते हैं। वैज्ञानिक आधार पर समझाइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: जब मोमबत्ती जलती है, तो ज्वाला की गर्मी से ठोस मोम पिघलकर द्रव बनता है। यह भौतिक परिवर्तन है क्योंकि ठंडा होने पर यह द्रव मोम पुनः ठोस मोम बन जाता है। साथ ही, बत्ती के साथ मोम वाष्प जलकर कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, कालिख, ऊष्मा और प्रकाश बनाती है। यह नया पदार्थ बनने के कारण रासायनिक परिवर्तन है।
उदाहरण 5
Q5 (उच्च स्तरीय चिंतन): सिरके में बेकिंग सोडा मिलाने पर निकलने वाली गैस को ताजे बने चूने के पानी में प्रवाहित करने पर चूने का पानी दूधिया क्यों हो जाता है? इसका संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: सिरके (एसिटिक अम्ल) और बेकिंग सोडा की क्रिया से कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) गैस उत्पन्न होती है। जब $CO_2$ गैस चूने के पानी [कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड - $Ca(OH)_2$] से गुजरती है, तो वह जल में अघुलनशील सफेद कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) बनाती है। जल में कैल्शियम कार्बोनेट के बारीक सफेद कण तैरने लगते हैं, जिससे पूरा घोल दूधिया दिखने लगता है।
समीकरण: $CO_2 + Ca(OH)_2 \rightarrow CaCO_3\downarrow + H_2O$।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

कागज फाड़ने को रासायनिक परिवर्तन मानना क्योंकि फटे कागज को दोबारा पहले जैसा नहीं जोड़ा जा सकता।

सही वैज्ञानिक तथ्य

कागज फाड़ना भौतिक परिवर्तन है क्योंकि कागज का कोई नया रासायनिक पदार्थ नहीं बनता; उसके टुकड़े अब भी केवल सेल्युलोज (कागज) ही हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

लोहा और जंग को एक ही पदार्थ का अलग-अलग रूप समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

लोहा ($Fe$) एक शुद्ध तत्व है, जबकि जंग ($Fe_2O_3 \cdot xH_2O$) लोहा, ऑक्सीजन और जल के रासायनिक संयोग से बना एक पूर्णतः नया यौगिक है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

क्रिस्टलीकरण को रासायनिक परिवर्तन समझना क्योंकि इसमें सुंदर ठोस क्रिस्टल बनते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

क्रिस्टलीकरण एक विशुद्ध भौतिक परिवर्तन है। इसमें पदार्थ के रासायनिक अणुओं में कोई परिवर्तन नहीं होता; केवल घुला हुआ ठोस अपनी मूल शुद्ध क्रिस्टलीय संरचना में वापस आ जाता है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

भौतिक बनाम रासायनिक परिवर्तन (Physical vs Chemical Change)
🔵 भौतिक परिवर्तन (Physical)
  • कोई नया पदार्थ नहीं बनता
  • सामान्यतः उत्क्रमणीय (Reversible)
  • केवल आकार, अवस्था बदलती है
  • उदा. बर्फ पिघलना, क्रिस्टलीकरण
VS
🔴 रासायनिक परिवर्तन (Chemical)
  • एक या अधिक नए पदार्थ बनते हैं
  • स्थायी एवं अनुत्क्रमणीय
  • ऊष्मा, प्रकाश, रंग में परिवर्तन
  • उदा. जंग लगना, भोजन का पचना

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
परिवर्तन दो प्रकार के होते हैं: भौतिक परिवर्तन और रासायनिक परिवर्तन।
मुख्य बिंदु 2
भौतिक परिवर्तन में केवल भौतिक गुणों (आकार, रंग, अवस्था) में बदलाव होता है; कोई नया पदार्थ नहीं बनता और यह प्रायः उत्क्रमणीय होता है।
मुख्य बिंदु 3
रासायनिक परिवर्तन में एक या अधिक नए पदार्थ बनते हैं; यह प्रायः स्थायी एवं अनुत्क्रमणीय होता है।
मुख्य बिंदु 4
मैग्नीशियम का जलना एक रासायनिक परिवर्तन है: 2Mg + O₂ → 2MgO; भस्म को जल में घोलने पर क्षारकीय Mg(OH)₂ बनता है।
मुख्य बिंदु 5
कॉपर सल्फेट (नीला) में लोहे की कील डालने पर विस्थापन अभिक्रिया से हरा आयरन सल्फेट (FeSO₄) और भूरा कॉपर (Cu) बनता है।
मुख्य बिंदु 6
सिरके व बेकिंग सोडा से CO₂ गैस बनती है, जो चूने के पानी को कैल्शियम कार्बोनेट बनने के कारण दूधिया कर देती है।
मुख्य बिंदु 7
लोहे में जंग लगना एक रासायनिक परिवर्तन है जिसके लिए ऑक्सीजन (हवा) और नमी (जलवाष्प) दोनों अनिवार्य हैं।
मुख्य बिंदु 8
लोहे को जंग से बचाने के लिए उस पर जस्ते (जिंक) की परत चढ़ाना यशद-लेपन (Galvanization) कहलाता है।
मुख्य बिंदु 9
लोहे में क्रोमियम, निकेल और कार्बन मिलाकर जंग-रोधी स्टेनलेस स्टील बनाया जाता है।
मुख्य बिंदु 10
संतृप्त घोल से शुद्ध ठोस के बड़े क्रिस्टल प्राप्त करना क्रिस्टलीकरण (Crystallization) कहलाता है जो एक भौतिक प्रक्रम है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन की परिभाषा देते हुए प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: भौतिक परिवर्तन: वह परिवर्तन जिसमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता (उदा. बर्फ का पिघलना)। रासायनिक परिवर्तन: वह परिवर्तन जिसमें एक या अधिक नए रासायनिक गुण वाले पदार्थ बनते हैं (उदा. लोहे पर जंग लगना, दूध से दही जमना)।
2
लोहे पर जंग लगने के लिए कौन-सी दो परिस्थितियाँ अनिवार्य हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: लोहे में जंग लगने के लिए ऑक्सीजन (वायु) और जल अथवा जलवाष्प (नमी) दोनों की एक साथ उपस्थिति अनिवार्य है।
3
यशद-लेपन (गैल्वनीकरण / Galvanization) किसे कहते हैं और इसका क्या उपयोग है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: लोहे की वस्तुओं को जंग और क्षरण से बचाने के लिए उन पर पिघले हुए जस्ते (जिंक धातु) की पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया को यशद-लेपन कहते हैं। इसका उपयोग पानी के पाइपों और छतों के टीन शेड में होता है।
4
कार्बन डाइऑक्साइड गैस की पहचान के लिए कौन-सा परीक्षण किया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कार्बन डाइऑक्साइड गैस को ताजे चूने के पानी में प्रवाहित करने पर अघुलनशील कैल्शियम कार्बोनेट बनने के कारण चूने का पानी दूधिया (Milky) हो जाता है।
5
क्रिस्टलीकरण (Crystallization) क्या है और इसे भौतिक परिवर्तन क्यों माना जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: किसी पदार्थ के गर्म संतृप्त विलयन से उसके शुद्ध व बड़े आकार के क्रिस्टल प्राप्त करने की विधि क्रिस्टलीकरण कहलाती है। इसे भौतिक परिवर्तन माना जाता है क्योंकि इसमें कोई नया रासायनिक पदार्थ नहीं बनता; केवल ठोस की शुद्ध ज्यामितीय संरचना प्राप्त होती है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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