(A) प्रकाश का सरल रेखीय गमन (Rectilinear Propagation):
प्रकाश सदैव एक सीधी रेखा (सरल रेखा) में गमन करता है।
- प्रयोग: जब हम एक सीधे रबर पाइप से जलती हुई मोमबत्ती की लौ को देखते हैं, तो लौ स्पष्ट दिखाई देती है। किंतु जैसे ही पाइप को थोड़ा सा मोड़ दिया जाता है, मोमबत्ती की लौ दिखना पूरी तरह बंद हो जाती है। यह सिद्ध करता है कि प्रकाश मुड़कर नहीं चल सकता।
(B) समतल दर्पण में परावर्तन के लक्षण:
जब किसी पॉलिशदार चमकदार सतह पर प्रकाश पड़ता है, तो वह दिशा बदलकर वापस लौटता है, जिसे परावर्तन (Reflection) कहते हैं। समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब के 5 विशिष्ट लक्षण होते हैं:
- सीधा (Erect): मोमबत्ती की लौ ऊपर की ओर ही दिखाई देती है (सिर ऊपर, पैर नीचे)।
- समान आकार (Same Size): प्रतिबिंब का आकार वस्तु (बिंब) के बिल्कुल बराबर होता है।
- समान दूरी (Equidistant): दर्पण के पीछे प्रतिबिंब उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के आगे रखी होती है।
- आभासी (Virtual): इस प्रतिबिंब को किसी पर्दे (Screen) पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
- पार्श्व परावर्तन (Lateral Inversion): दर्पण में देखने पर बिंब का बायाँ भाग प्रतिबिंब का दायाँ भाग दिखाई देता है, और बिंब का दायाँ भाग बायाँ दिखाई देता है।