मानव नेत्र एक प्रकाश-संवेदी अंग है जो लगभग 2.3 सेमी व्यास का एक गोलाकार पिंड होता है। इसके प्रमुख भाग निम्नलिखित हैं:
| नेत्र का भाग | संरचना एवं स्थिति | प्रमुख कार्य |
|---|---|---|
| 1. कॉर्निया (स्वच्छ मंडल) | नेत्र गोलक के सामने का पारदर्शी, उभरा हुआ अग्र भाग। | नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश का अधिकांश अपवर्तन (लगभग 80%) कॉर्निया की बाहरी सतह पर ही संपन्न होता है। |
| 2. परितारिका (Iris) | कॉर्निया के पीछे स्थित गहरा, पेशीय डायफ्राम (आँख की पुतली का पर्दा)। | यह पुतली के आकार को नियंत्रित करती है और आँख के विशिष्ट रंग (काला, भूरा, नीला) का निर्धारण करती है। |
| 3. पुतली (Pupil) | परितारिका के केंद्र में स्थित एक सूक्ष्म छिद्र। | नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है। मंद प्रकाश में फैलती है, तीव्र प्रकाश में सिकुड़ती है। |
| 4. क्रिस्टलीय लेंस | रेशेदार, जेली जैसे लचीले पारदर्शी पदार्थ का बना द्वित्तल लेंस। | विभिन्न दूरियों की वस्तुओं का रेटिना पर सूक्ष्म फोकस समायोजन करना। |
| 5. पक्ष्माभी पेशियां (Ciliary Muscles) | लेंस को दोनों ओर से पकड़े रखने वाली पेशियां। | लेंस के तनाव को बदलकर उसकी वक्रता एवं फोकस दूरी का समंजन करती हैं। |
| 6. रेटिना (दृष्टि पटल) | नेत्र का सबसे पिछला प्रकाश-संवेदी पर्दा (स्क्रीन)। | इस पर वस्तु का वास्तविक एवं उल्टा प्रतिबिंब बनता है। इसमें लाखों शलाकाएं (Rods - प्रकाश तीव्रता) तथा शंकु (Cones - रंग संवेदी) कोशिकाएं होती हैं। |
| 7. दृक तंत्रिकाएं (Optic Nerves) | रेटिना से मस्तिष्क तक जाने वाली तंत्रिकाएं। | प्रकाश-संवेदी कोशिकाओं द्वारा उत्पन्न विद्युत सिग्नलों को मस्तिष्क तक ले जाती हैं, जहाँ मस्तिष्क उल्टे प्रतिबिंब को सीधा करके समझता है। |
(ख) नेत्र की समंजन क्षमता (Power of Accommodation)
पक्ष्माभी पेशियों द्वारा नेत्र लेंस की फोकस दूरी को आवश्यकतानुसार घटाने या बढ़ाने की सामर्थ्य को समंजन क्षमता कहते हैं:
- दूर की वस्तुओं को देखना: पक्ष्माभी पेशियां शिथिल (Relax) हो जाती हैं $\to$ लेंस पतला हो जाता है $\to$ वक्रता घट जाती है $\to$ फोकस दूरी अधिकतम हो जाती है $\to$ दूर की वस्तु रेटिना पर स्पष्ट फोकस होती है।
- पास की वस्तुओं को देखना: पक्ष्माभी पेशियां सिकुड़ती (Contract) हैं $\to$ लेंस मोटा हो जाता है $\to$ वक्रता बढ़ जाती है $\to$ फोकस दूरी घट जाती है $\to$ निकट की वस्तु रेटिना पर स्पष्ट फोकस होती है।
• निकट बिंदु (Near Point / सुस्पष्ट दर्शन की न्यूनतम दूरी - $D$): वह न्यूनतम दूरी जहाँ रखी वस्तु को आँख बिना किसी तनाव के स्पष्ट देख सकती है = 25 सेमी ($25\text{ cm}$)।
• दूर बिंदु (Far Point): वह अधिकतम दूरी जहाँ तक आँख वस्तुओं को स्पष्ट देख सकती है = अनंत ($\infty$)।
• एक सामान्य आँख का दृष्टि परास 25 सेमी से लेकर अनंत तक होता है।