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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा X • Science • अध्याय 10
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

मानव आँख और रंगीन दुनिया (Human Eye and the Colourful World)

मानव नेत्र (Human Eye) प्रकृति द्वारा प्रदत्त एक अत्यंत संवेदनशील और अनमोल ज्ञानेंद्रिय है जो एक अद्भुत प्राकृतिक कैमरे की भाँति कार्य करती है। नेत्र का लगभग गोलीय व्यास 2.3 सेमी होता है। इसके प्रमुख अंगों में स्वच्छ मंडल (कॉर्निया), परितारिका (आइरिस), पुतली (प्यूपिल), क्रिस्टलीय लेंस, पक्ष्माभी पेशियां (सिलियरी मांसपेशियां), दृष्टि पटल (रेटिना) तथा दृक तंत्रिकाएं (ऑप्टिक नर्व्स) सम्मिलित हैं। पक्ष्माभी पेशियों द्वारा क्रिस्टलीय लेंस की वक्रता और फोकस दूरी को समायोजित करने की क्षमता को समंजन क्षमता (Power of Accommodation) कहते हैं। एक सामान्य स्वस्थ वयस्क आँख के लिए निकट बिंदु (Near point) 25 सेमी तथा दूर बिंदु (Far point) अनंत ($\infty$) पर होता है। जब आँख की समंजन क्षमता घट जाती है या नेत्र गोलक का आकार विकृत हो जाता है, तो दृष्टि दोष उत्पन्न होते हैं: (1) निकट दृष्टि दोष (Myopia / Short-sightedness)—जिसमें व्यक्ति पास की वस्तुएं तो स्पष्ट देख पाता है किंतु दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं (नेत्र लेंस की वक्रता अधिक होना या गोलक लंबा होना; दूर बिंदु अनंत से पास आ जाता है; उचित क्षमता के अवतल लेंस से संशोधन), (2) दीर्घ दृष्टि दोष (Hypermetropia / Long-sightedness)—जिसमें दूर की वस्तुएं स्पष्ट दिखती हैं पर पास की धुंधली (निकट बिंदु 25 सेमी से दूर हट जाता है; उचित क्षमता के उत्तल लेंस से संशोधन), तथा (3) जरा-दूरदृष्टिता (Presbyopia)—वृद्धावस्था में पेशियों की दुर्बलता से उत्पन्न दोष, जिसका संशोधन द्विफोकसी लेंस (Bifocal lens - ऊपरी अवतल, निचला उत्तल) द्वारा किया जाता है। यह अध्याय प्रकाश के विस्मयकारी प्राकृतिक चमत्कारों को भी उजागर करता है: काँच के त्रिकोणीय प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश का अपने अवयवी रंगों—बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल (VIBGYOR)—में विभाजन, जिसे वर्ण-विक्षेपण (Dispersion) कहते हैं। वर्षा के उपरांत आकाश में जल की बूंदों द्वारा विक्षेपण, आंतरिक परावर्तन और अपवर्तन से बनने वाला इंद्रधनुष (Rainbow); पृथ्वी के वायुमंडल के विभिन्न घनत्व के स्तरों द्वारा तारों का टिमटिमाना (Twinkling of Stars); अग्रिम सूर्योदय एवं विलंबित सूर्यास्त (प्रत्येक 2 मिनट का विचलन, जिससे दिन 4 मिनट लंबा हो जाता है); तथा कोलाइडल कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering - टिंडल प्रभाव) के कारण आकाश का नीला रंग और सूर्योदय/सूर्यास्त के समय सूर्य का रक्ताभ (लाल) दिखाई देना। झारखंड बोर्ड (JAC Class 10) में दृष्टि दोष संशोधन किरण आरेख, इंद्रधनुष निर्माण और वायुमंडलीय अपवर्तन पर 6 से 8 अंक के प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं।

🌈 क्या आपने कभी सोचा है: रात में तारे हीरों की तरह क्यों टिमटिमाते हैं, और ढलती शाम का सूरज आग का लाल गोला क्यों बन जाता है?

जरा सोचिए: जब आप रात के शांत आकाश की ओर देखते हैं, तो दूर स्थित तारे लगातार अपनी चमक बदलते हुए टिमटिमाते (Twinkle) नजर आते हैं, जबकि हमारे चंद्रमा और ग्रहों की रोशनी बिल्कुल स्थिर रहती है—ऐसा क्यों? क्या तारे सचमुच बुझते और जलते हैं? और उससे भी बड़ा रहस्य: दिन के 12 बजे जब आप आकाश को देखते हैं, तो वह गहरा नीला दिखाई देता है; किंतु वही आकाश शाम को सूर्यास्त के समय अचानक सिंदूरी लाल और नारंगी रंग में कैसे रंग जाता है? क्या सूर्य अपना रंग बदल लेता है? इतना ही नहीं, जब आप सुबह उठकर सूर्योदय देखते हैं, तो खगोल विज्ञान का सच जानकर आप चौंक जाएंगे—सूर्य वास्तव में उस समय तक क्षितिज के नीचे छिपा होता है! यानी हम जो सूर्य देख रहे होते हैं, वह वास्तविक सूर्य नहीं बल्कि वायुमंडल द्वारा 2 मिनट पहले दिखाया गया एक 'आभासी सूर्य' होता है! आइए, मानव नेत्र की अद्भुत बनावट और हमारे वायुमंडल के इस जादुई रंगबिरंगे संसार की वैज्ञानिक सैर पर चलें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

इस अध्याय का अध्ययन आपके लिए क्यों अनिवार्य है?

  1. बोर्ड परीक्षा में उच्च स्कोरिंग: JAC कक्षा 10वीं विज्ञान परीक्षा में "निकट दृष्टि दोष एवं दीर्घ दृष्टि दोष के कारण, निवारण तथा किरण आरेख", "प्रिज्म द्वारा प्रकाश का विक्षेपण (VIBGYOR)", "तारों का टिमटिमाना", तथा "आकाश का नीला रंग" पर प्रतिवर्ष 3 से 5 अंक के प्रश्न अनिवार्य रूप से आते हैं।
  2. दृष्टि स्वास्थ्य एवं नेत्र देखभाल: चश्मे के नंबर (+ और - डायोप्टर), मोतियाबिंद (Cataract), और डिजिटल स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से आँखों के बचाव की वैज्ञानिक जानकारी।
  3. पर्यावरणीय प्रकाशिकी (Atmospheric Physics): मौसम विज्ञान, खगोल विज्ञान तथा वायुमंडलीय परिघटनाओं की तार्किक समझ विकसित करना।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • प्रकाश का अपवर्तन, स्नेल का नियम तथा माध्यम का अपवर्तनांक।
  • उत्तल एवं अवतल लेंसों की अभिसारी व अपसारी प्रकृति तथा लेंस की क्षमता (Dioptre)।
  • तरंगदैर्घ्य (Wavelength) एवं प्रकाश की चाल के मध्य संबंध।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • मानव नेत्र के सभी प्रमुख भागों (कॉर्निया, आइरिस, पुतली, लेंस, सिलियरी पेशियां, रेटिना, दृक तंत्रिका) के कार्यों की व्याख्या कर सकेंगे।
  • समंजन क्षमता, निकट बिंदु (25 सेमी) और दूर बिंदु (अनंत) को परिभाषित कर सकेंगे।
  • मायोपिया (निकट दृष्टि दोष), हाइपरमेट्रोपिया (दीर्घ दृष्टि दोष) तथा प्रेसबायोपिया के कारणों का विश्लेषण कर संशोधक लेंस की क्षमता की गणना कर सकेंगे।
  • काँच के प्रिज्म से अपवर्तन, विचलन कोण ($\delta$), तथा श्वेत प्रकाश के विक्षेपण (VIBGYOR) और न्यूटन के पुनर्संयोजन प्रयोग का सचित्र वर्णन कर सकेंगे।
  • वायुमंडलीय अपवर्तन (तारों का टिमटिमाना, अग्रिम सूर्योदय/विलंबित सूर्यास्त) तथा प्रकीर्णन (टिंडल प्रभाव, नीला आकाश, रक्ताभ सूर्य) के भौतिक कारणों को वैज्ञानिक तर्कों से सिद्ध कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. मानव नेत्र की संरचना एवं समंजन क...
2 2. दृष्टि दोष एवं उनका संशोधन (Defe...
3 3. प्रिज्म से अपवर्तन एवं वर्ण-विक्...
4 4. वायुमंडलीय अपवर्तन की परिघटनाएं...
5 5. प्रकाश का प्रकीर्णन एवं टिंडल प्...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. मानव नेत्र की संरचना एवं समंजन क्षमता (Structure of Eye & Accommodation)

मानव नेत्र एक प्रकाश-संवेदी अंग है जो लगभग 2.3 सेमी व्यास का एक गोलाकार पिंड होता है। इसके प्रमुख भाग निम्नलिखित हैं:

नेत्र का भाग संरचना एवं स्थिति प्रमुख कार्य
1. कॉर्निया (स्वच्छ मंडल) नेत्र गोलक के सामने का पारदर्शी, उभरा हुआ अग्र भाग। नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश का अधिकांश अपवर्तन (लगभग 80%) कॉर्निया की बाहरी सतह पर ही संपन्न होता है।
2. परितारिका (Iris) कॉर्निया के पीछे स्थित गहरा, पेशीय डायफ्राम (आँख की पुतली का पर्दा)। यह पुतली के आकार को नियंत्रित करती है और आँख के विशिष्ट रंग (काला, भूरा, नीला) का निर्धारण करती है।
3. पुतली (Pupil) परितारिका के केंद्र में स्थित एक सूक्ष्म छिद्र। नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है। मंद प्रकाश में फैलती है, तीव्र प्रकाश में सिकुड़ती है।
4. क्रिस्टलीय लेंस रेशेदार, जेली जैसे लचीले पारदर्शी पदार्थ का बना द्वित्तल लेंस। विभिन्न दूरियों की वस्तुओं का रेटिना पर सूक्ष्म फोकस समायोजन करना।
5. पक्ष्माभी पेशियां (Ciliary Muscles) लेंस को दोनों ओर से पकड़े रखने वाली पेशियां। लेंस के तनाव को बदलकर उसकी वक्रता एवं फोकस दूरी का समंजन करती हैं।
6. रेटिना (दृष्टि पटल) नेत्र का सबसे पिछला प्रकाश-संवेदी पर्दा (स्क्रीन)। इस पर वस्तु का वास्तविक एवं उल्टा प्रतिबिंब बनता है। इसमें लाखों शलाकाएं (Rods - प्रकाश तीव्रता) तथा शंकु (Cones - रंग संवेदी) कोशिकाएं होती हैं।
7. दृक तंत्रिकाएं (Optic Nerves) रेटिना से मस्तिष्क तक जाने वाली तंत्रिकाएं। प्रकाश-संवेदी कोशिकाओं द्वारा उत्पन्न विद्युत सिग्नलों को मस्तिष्क तक ले जाती हैं, जहाँ मस्तिष्क उल्टे प्रतिबिंब को सीधा करके समझता है।

(ख) नेत्र की समंजन क्षमता (Power of Accommodation)

पक्ष्माभी पेशियों द्वारा नेत्र लेंस की फोकस दूरी को आवश्यकतानुसार घटाने या बढ़ाने की सामर्थ्य को समंजन क्षमता कहते हैं:

  • दूर की वस्तुओं को देखना: पक्ष्माभी पेशियां शिथिल (Relax) हो जाती हैं $\to$ लेंस पतला हो जाता है $\to$ वक्रता घट जाती है $\to$ फोकस दूरी अधिकतम हो जाती है $\to$ दूर की वस्तु रेटिना पर स्पष्ट फोकस होती है।
  • पास की वस्तुओं को देखना: पक्ष्माभी पेशियां सिकुड़ती (Contract) हैं $\to$ लेंस मोटा हो जाता है $\to$ वक्रता बढ़ जाती है $\to$ फोकस दूरी घट जाती है $\to$ निकट की वस्तु रेटिना पर स्पष्ट फोकस होती है।
दृष्टि परास (Range of Vision):
• निकट बिंदु (Near Point / सुस्पष्ट दर्शन की न्यूनतम दूरी - $D$): वह न्यूनतम दूरी जहाँ रखी वस्तु को आँख बिना किसी तनाव के स्पष्ट देख सकती है = 25 सेमी ($25\text{ cm}$)।
• दूर बिंदु (Far Point): वह अधिकतम दूरी जहाँ तक आँख वस्तुओं को स्पष्ट देख सकती है = अनंत ($\infty$)।
• एक सामान्य आँख का दृष्टि परास 25 सेमी से लेकर अनंत तक होता है।

2. दृष्टि दोष एवं उनका संशोधन (Defects of Vision & Correction)

जब आँख अपनी समंजन क्षमता खो देती है, तो दृष्टि धुंधली हो जाती है। प्रमुख तीन अपवर्तक दृष्टि दोष निम्नलिखित हैं:

दोष का नाम लक्षण एवं प्रभाव उत्पन्न होने के दो कारण संशोधक लेंस एवं सिद्धांत
1. निकट दृष्टि दोष (Myopia) पास की वस्तुएं साफ दिखती हैं, किंतु दूर की वस्तुएं धुंधली दिखती हैं। दूर बिंदु अनंत से घटकर पास आ जाता है। दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के पहले (आगे) ही बन जाता है। (1) अभिनेत्र लेंस की वक्रता का अत्यधिक होना (लेंस मोटा होना / फोकस दूरी घटना)।
(2) नेत्र गोलक का लंबा हो जाना।
उचित क्षमता का अवतल लेंस (Concave Lens):
यह अपसारी लेंस अनंत से आने वाली किरणों को अपसारित करके दोषयुक्त आँख के दूर बिंदु ($F$) से आती हुई प्रतीत कराता है, जिससे प्रतिबिंब पुनः रेटिना पर बन जाता है। ($f = -d$, क्षमता ऋणात्मक)।
2. दीर्घ दृष्टि दोष (Hypermetropia) दूर की वस्तुएं साफ दिखती हैं, पर पास की वस्तुएं धुंधली दिखती हैं। निकट बिंदु 25 सेमी से दूर हट जाता है (उदा. 50 सेमी या 1 मीटर)। पास की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है। (1) अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी का अत्यधिक बढ़ जाना (लेंस बहुत पतला होना)।
(2) नेत्र गोलक का छोटा हो जाना।
उचित क्षमता का उत्तल लेंस (Convex Lens):
यह अभिसारी लेंस 25 सेमी पर रखी वस्तु से आने वाली किरणों को अतिरिक्त अभिसरण प्रदान कर दोषयुक्त आँख के निकट बिंदु ($N'$) पर आभासी बिंब बनाता है, जिससे प्रतिबिंब ठीक रेटिना पर फोकस हो जाता है। (क्षमता धनात्मक)।
3. जरा-दूरदृष्टिता (Presbyopia) वृद्धावस्था में निकट की वस्तुएं पढ़ने में कठिनाई होती है। कभी-कभी निकट और दूर दोनों दोष एक साथ हो जाते हैं। पक्ष्माभी पेशियों की दुर्बलता तथा क्रिस्टलीय लेंस के लचीलेपन में कमी। द्विफोकसी लेंस (Bifocal Lenses):
ऊपरी भाग अवतल लेंस (दूर देखने हेतु) तथा निचला भाग उत्तल लेंस (पढ़ने/निकट देखने हेतु) होता है।
मोतियाबिंद (Cataract): अधिक आयु में कुछ व्यक्तियों के क्रिस्टलीय लेंस पर एक दूधिया, धुंधली परत जम जाती है जिससे लेंस अपारदर्शी हो जाता है और दृष्टि पूरी तरह समाप्त हो सकती है। इसे मोतियाबिंद कहते हैं। इसका संशोधन किसी चश्मे से नहीं होता, केवल शल्य चिकित्सा (Surgery) द्वारा मोतियाबिंद युक्त लेंस को हटाकर कृत्रिम लेंस (Intraocular lens) लगाकर दृष्टि वापस पाई जा सकती है।

3. प्रिज्म से अपवर्तन एवं वर्ण-विक्षेपण (Refraction through Prism & Dispersion)

प्रिज्म एक समांगी पारदर्शी माध्यम है जो दो त्रिभुजाकार आधारों और तीन आयताकार पार्श्व पृष्ठों से घिरा होता है। दोनों पार्श्व पृष्ठों के बीच के कोण को प्रिज्म कोण ($A$) कहते हैं।

(क) प्रिज्म द्वारा अपवर्तन एवं विचलन कोण (Angle of Deviation - $\delta$)

  • जब प्रकाश की किरण हवा से प्रिज्म के प्रथम फलक पर प्रवेश करती है, तो वह अभिलंब की ओर झुकती है।
  • जब यह दूसरे फलक से बाहर हवा में निकलती है, तो अभिलंब से दूर हटकर प्रिज्म के आधार की ओर मुड़ जाती है।
  • आपतित किरण की मूल आगे बढ़ाई गई दिशा और निर्गत किरण की पीछे बढ़ाई गई दिशा के मध्य बने कोण को विचलन कोण ($\delta$ या $D$) कहते हैं।
  • संबंध: $i + e = A + \delta$ (जहाँ $i$ = आपतन कोण, $e$ = निर्गत कोण, $A$ = प्रिज्म कोण, $\delta$ = विचलन कोण)।

(ख) प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण (Dispersion of White Light)

जब सूर्य का श्वेत प्रकाश किसी काँच के प्रिज्म से होकर गुजरता है, तो वह अपने अवयवी सात रंगों के बैंड में विभाजित हो जाता है। इस परिघटना को प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण कहते हैं और प्राप्त सात रंगों की रंगीन पट्टी को वर्णक्रम (स्पेक्ट्रम / Spectrum) कहते हैं।

  • रंगों का क्रम (नीचे से ऊपर): V I B G Y O R (बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल / बैंजानीहपीनाला)।
  • विक्षेपण का कारण: काँच के प्रिज्म में भिन्न-भिन्न रंगों के प्रकाश की चाल भिन्न-भिन्न होती है।
    • लाल प्रकाश (Red): तरंगदैर्घ्य सर्वाधिक ($\lambda \approx 700\text{ nm}$) $\to$ काँच में चाल सर्वाधिक $\to$ अपवर्तनांक सबसे कम $\to$ झुकाव / विचलन सबसे कम (न्यूनतम) होता है।
    • बैंगनी प्रकाश (Violet): तरंगदैर्घ्य सबसे कम ($\lambda \approx 400\text{ nm}$) $\to$ काँच में चाल सबसे कम $\to$ अपवर्तनांक सबसे अधिक $\to$ झुकाव / विचलन सबसे अधिक (अधिकतम) होता है।

(ग) न्यूटन का स्पेक्ट्रम पुनर्संयोजन प्रयोग (Recombination of Spectrum)

सर आइजक न्यूटन ने सिद्ध किया कि सूर्य का प्रकाश वास्तव में सात रंगों से मिलकर बना है। उन्होंने एक सीधा प्रिज्म लेकर श्वेत प्रकाश का स्पेक्ट्रम प्राप्त किया, और फिर उसके ठीक आगे एक दूसरा समरूप प्रिज्म उल्टा (Inverted) रख दिया। उल्टे प्रिज्म ने सातों रंगों को पुनः संयोजित कर दिया और दूसरे सिरे से पुनः शुद्ध श्वेत प्रकाश किरण पुंज बाहर निकला। इससे सिद्ध हुआ कि श्वेत प्रकाश सात रंगों का सम्मिश्रण है।

(घ) प्राकृतिक स्पेक्ट्रम: इंद्रधनुष का निर्माण (Rainbow Formation)

इंद्रधनुष वर्षा के पश्चात आकाश में सूर्य के ठीक विपरीत दिशा में दिखाई देने वाला एक प्राकृतिक स्पेक्ट्रम है:

  1. वायुमंडल में तैरती वर्षा की नन्हीं जल की बूंदें छोटे-छोटे प्रिज्मों की भाँति कार्य करती हैं।
  2. जब सूर्य का प्रकाश जल की बूंद में प्रवेश करता है, तो बूंद की अग्र सतह पर प्रकाश का अपवर्तन एवं वर्ण-विक्षेपण होता है और वह सात रंगों में बँट जाता है।
  3. बूंद की पिछली आंतरिक सतह पर इन रंगों का पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Internal Reflection) होता है।
  4. अंततः जब प्रकाश की किरणें बूंद से बाहर निकलती हैं, तो उनका पुनः अपवर्तन होता है और प्रेक्षक की आँख में पहुँचकर एक सुंदर रंगीन चाप (इंद्रधनुष) बनाती हैं।

4. वायुमंडलीय अपवर्तन की परिघटनाएं (Atmospheric Refraction)

पृथ्वी का वायुमंडल सर्वत्र एक समान नहीं है। नीचे की वायु ठंडी और सघन होती है, जबकि ऊपर की वायु गर्म और विरल होती है। जब आकाशीय पिंडों का प्रकाश वायुमंडल की विभिन्न परतों से होकर गुजरता है, तो उसका लगातार अपवर्तन होता है जिसे वायुमंडलीय अपवर्तन कहते हैं:

(क) तारों का टिमटिमाना (Twinkling of Stars)

  1. तारे पृथ्वी से अत्यधिक दूरी पर स्थित हैं, अतः वे प्रकाश के बिंदु-स्रोत (Point sources) की भाँति व्यवहार करते हैं।
  2. तारों का प्रकाश जब विभिन्न घनत्व और तापमान वाली वायुमंडलीय परतों से गुजरता है, तो उसका मार्ग लगातार थोड़ा-थोड़ा विचलित होता रहता है।
  3. वायुमंडल की भौतिक स्थितियां स्थिर नहीं हैं (हवा चलती रहती है, तापमान बदलता है), जिसके कारण आँख में प्रवेश करने वाले तारे के प्रकाश की मात्रा लगातार घटती-बढ़ती रहती है।
  4. कभी तारा चमकीला और कभी धुंधला दिखाई देता है। इसे ही तारों का टिमटिमाना कहते हैं।

ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते? (JAC Board 2 अंक):

ग्रह पृथ्वी के अत्यंत निकट हैं, अतः वे बिंदु स्रोत न होकर प्रकाश के विस्तृत स्रोत (Extended sources) की भाँति कार्य करते हैं। एक ग्रह को करोड़ों बिंदु-स्रोतों का समूह माना जा सकता है। सभी व्यक्तिगत बिंदु-स्रोतों से आँख में आने वाले प्रकाश की मात्रा में होने वाले परिवर्तनों का कुल औसत मान शून्य हो जाता है, जिससे ग्रहों की चमक स्थिर रहती है और वे टिमटिमाते नहीं हैं।

(ख) अग्रिम सूर्योदय एवं विलंबित सूर्यास्त (Advanced Sunrise & Delayed Sunset)

  • वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य वास्तव में क्षितिज (Horizon) के ऊपर आने से लगभग 2 मिनट पहले ही हमें दिखाई देने लगता है (अग्रिम सूर्योदय)।
  • इसी प्रकार, सूर्यास्त के समय वास्तविक रूप से क्षितिज के नीचे चले जाने के बाद भी सूर्य लगभग 2 मिनट बाद तक दिखाई देता रहता है (विलंबित सूर्यास्त)।
  • अतः वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण दिन की वास्तविक अवधि में लगभग $2 + 2 = \mathbf{4\text{ मिनट}}$ की वृद्धि हो जाती है।
  • सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य का चक्रिका रूप चपटा (अंडाकार) दिखाई देना भी इसी ऊर्ध्वाधर असमान अपवर्तन का परिणाम है।

5. प्रकाश का प्रकीर्णन एवं टिंडल प्रभाव (Scattering of Light & Tyndall Effect)

जब प्रकाश की किरणें किसी ऐसे माध्यम से गुजरती हैं जिसमें सूक्ष्म निलंबित कण (जैसे धूल, धुआँ, जल की सूक्ष्म बूंदें) उपस्थित हों, तो ये कण प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करके चारों दिशाओं में फैला (विकीर्ण कर) देते हैं। इस परिघटना को प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light) कहते हैं।

(क) टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect)

कोलाइडल कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण प्रकाश के मार्ग का दृश्यमान हो जाना टिंडल प्रभाव कहलाता है:

  • धुएँ से भरे किसी अंधेरे कमरे में किसी छोटे छेद से जब धूप की किरण आती है, तो हवा में तैरते धूल कण चमकते हुए दिखाई देते हैं और प्रकाश का मार्ग साफ दिखता है।
  • घने जंगलों के वितान (Canopy) से जब सूर्य की किरणें छनकर आती हैं, तो कुहासे में जल की नन्हीं बूंदें प्रकाश को प्रकीर्णित कर उसका पथ दिखाती हैं।

(ख) रैले का प्रकीर्णन नियम (Rayleigh's Law of Scattering)

यदि प्रकीर्णन करने वाले कणों का आकार प्रकाश के तरंगदैर्घ्य से बहुत छोटा हो ($a \ll \lambda$), तो प्रकीर्णित प्रकाश की तीव्रता ($I$) उसके तरंगदैर्घ्य के चतुर्थ घात के व्युत्क्रमानुपाती होती है:

$$I \propto \frac{1}{\lambda^4}$$

अर्थात, जिस रंग का तरंगदैर्घ्य जितना कम होगा, उसका प्रकीर्णन उतना ही अत्यधिक तीव्र होगा! बैंगनी और नीले रंग का तरंगदैर्घ्य लाल रंग की तुलना में लगभग आधा होता है, अतः नीले रंग का प्रकीर्णन लाल रंग की तुलना में लगभग 16 गुना अधिक होता है।

(ग) प्रकीर्णन पर आधारित प्राकृतिक परिघटनाएं:

परिघटना भौतिक कारण एवं क्रियाविधि निष्कर्ष / महत्व
1. स्वच्छ आकाश का रंग नीला क्यों होता है? वायुमंडल में गैसों के अणु ($N_2, O_2$) दृश्य प्रकाश के तरंगदैर्घ्य की तुलना में छोटे होते हैं। जब सूर्य का श्वेत प्रकाश वायुमंडल से गुजरता है, तो ये अणु कम तरंगदैर्घ्य वाले नीले और बैंगनी प्रकाश का प्रकीर्णन सर्वाधिक करते हैं। यह प्रकीर्णित नीला प्रकाश चारों ओर फैलकर हमारी आँखों में पहुँचता है। यदि पृथ्वी पर वायुमंडल न होता (जैसे चंद्रमा पर), तो प्रकीर्णन न होने के कारण आकाश बिल्कुल काला (Dark/Black) दिखाई देता।
2. सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सूर्य रक्ताभ (लाल) क्यों दिखता है? क्षितिज के समीप सूर्य की किरणों को वायुमंडल की अत्यधिक मोटी परतों से होकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। मार्ग में नीले और कम तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश का अधिकांश प्रकीर्णन होकर वह रास्ते में ही बिखर जाता है। केवल अधिक तरंगदैर्घ्य वाला लाल प्रकाश ही बिना अधिक प्रकीर्णित हुए सीधे हमारी आँखों तक पहुँच पाता है। दोपहर में सूर्य ठीक सिर के ऊपर होता है, दूरी कम होने से प्रकीर्णन न्यूनतम होता है और सूर्य श्वेत दिखाई देता है।
3. खतरे के संकेत का प्रकाश लाल क्यों होता है? लाल रंग का तरंगदैर्घ्य दृश्य स्पेक्ट्रम में सबसे अधिक ($\approx 700\text{ nm}$) होता है। रैले के नियम ($I \propto 1/\lambda^4$) के अनुसार, लाल रंग का प्रकीर्णन कोहरे या धुएँ में सबसे कम होता है। अतः लाल रंग दूर से भी बिना बिखरे स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

नेत्र की समंजन सीमा
निकट बिंदु = 25 cm | दूर बिंदु = अनंत ()
मायोपिया संशोधन लेंस फोकस दूरी
f = -d (d = दोषयुक्त नेत्र का दूर बिंदु)
मायोपिया संशोधक लेंस की क्षमता
P = {1}{f (m)} = -{100}{d (cm)} [अवतल लेंस, ऋणात्मक D]
हाइपरमेट्रोपिया संशोधन सूत्र
{1}{f} = {1}{v} - {1}{u} = {1}{-d'} - {1}{-25} [d' = दोषयुक्त निकट बिंदु]
प्रिज्म अपवर्तन संबंध
i + e = A + [i = आपतन, e = निर्गत, A = प्रिज्म कोण, = विचलन]
रैले का प्रकीर्णन नियम
I {1}{^4} [I = प्रकीर्णित प्रकाश तीव्रता, = तरंगदैर्घ्य]
तरंगदैर्घ्य संबंध (दृश्य स्पेक्ट्रम)
$$\lambda_{\text{Red}} (\approx 700\text{ nm}) > \lambda_{\text{Violet}} (\approx 400\text{ nm})$$
विचलन कोण संबंध
_{Violet} > _{Blue} > … > _{Red} (लाल का विचलन न्यूनतम)
दिन की अवधि में वृद्धि
अग्रिम सूर्योदय (2 min) + विलंबित सूर्यास्त (2 min) = 4 min कुल वृद्धि
द्विफोकसी लेंस संयोजन
ऊपरी भाग: अवतल (दूर दृष्टि) | निचला भाग: उत्तल (निकट दृष्टि)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (JAC 2023 - 5 अंक): एक निकट दृष्टि दोष (Myopia) से पीड़ित व्यक्ति का दूर बिंदु नेत्र के सामने 80 सेमी दूरी पर है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की प्रकृति तथा क्षमता ज्ञात कीजिए। किरण आरेख भी खींचिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

हल: 1. दिए गए मान: • निकट दृष्टि दोष में आँख अनंत पर स्थित वस्तु को नहीं देख पा रही है, अतः: बिंब दूरी, $u = -\infty$ (अनंत) • संशोधक लेंस अनंत की वस्तु का आभासी प्रतिबिंब व्यक्ति के दूर बिंदु ($80\text{ cm}$) पर बनाएगा, अतः: प्रतिबिंब दूरी, $v = -80\text{ cm}$ • लेंस की फोकस दूरी, $f = ?$

2. लेंस सूत्र का प्रयोग:

$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}$$

$$\frac{1}{f} = \frac{1}{-80} - \frac{1}{-\infty} = -\frac{1}{80} - 0 = -\frac{1}{80}$$

$$f = -80\text{ cm} = -0.80\text{ m}$$

3. लेंस की क्षमता ($P$):

$$P = \frac{1}{f\text{ (m)}} = \frac{1}{-0.80\text{ m}} = -\frac{100}{80} = -1.25\text{ D}$$

4. निष्कर्ष: • ऋण चिह्न दर्शाता है कि आवश्यक लेंस अवतल लेंस (Concave Lens / अपसारी लेंस) है। • लेंस की आवश्यक क्षमता -1.25 डायोप्टर (-1.25 D) है।

उदाहरण 2
प्रश्न 2 (JAC 2022 - 5 अंक): किसी दीर्घ दृष्टि दोष (Hypermetropia) से पीड़ित व्यक्ति का निकट बिंदु 1 मीटर (100 सेमी) है। इस दोष को संशोधित करने के लिए प्रयुक्त लेंस की क्षमता क्या होगी? (सामान्य नेत्र का निकट बिंदु 25 सेमी मानिए)।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

हल: 1. दिए गए मान: • सामान्य निकट बिंदु पर रखी वस्तु को देखना है, अतः: बिंब दूरी, $u = -25\text{ cm}$ • संशोधक लेंस इस वस्तु का आभासी प्रतिबिंब व्यक्ति के दोषयुक्त निकट बिंदु ($100\text{ cm}$) पर बनाएगा, अतः: प्रतिबिंब दूरी, $v = -100\text{ cm} = -1.0\text{ m}$ • फोकस दूरी, $f = ?$

2. लेंस सूत्र से:

$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}$$

$$\frac{1}{f} = \frac{1}{-100} - \left(\frac{1}{-25}\right) = -\frac{1}{100} + \frac{1}{25}$$

ल.स. = 100:

$$\frac{1}{f} = \frac{-1 + 4}{100} = \frac{+3}{100}$$

$$f = +\frac{100}{3}\text{ cm} = +\frac{1}{3}\text{ m} \approx +0.33\text{ m}$$

3. लेंस की क्षमता ($P$):

$$P = \frac{1}{f\text{ (m)}} = \frac{1}{+(1/3)} = +3.0\text{ D}$$

उत्तर: इस दोष को संशोधित करने के लिए +3.0 डायोप्टर (+3.0 D) क्षमता का उत्तल लेंस (Convex Lens) आवश्यक होगा।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (JAC 2021 - 3 अंक): काँच के प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश के विक्षेपण की परिघटना को समझाइए। लाल रंग का प्रकाश सबसे कम और बैंगनी रंग का प्रकाश सबसे अधिक क्यों मुड़ता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. वर्ण-विक्षेपण की परिघटना: जब सूर्य का श्वेत प्रकाश किसी काँच के त्रिकोणीय प्रिज्म से गुजरता है, तो प्रिज्म के दोनों अपवर्तक पृष्ठों पर अपवर्तन के पश्चात वह अपने सात घटक रंगों (VIBGYOR - बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल) के एक स्पेक्ट्रम में बँट जाता है। इस परिघटना को प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण कहते हैं।

2. लाल रंग का न्यूनतम तथा बैंगनी रंग का अधिकतम झुकाव होने का कारण: • काँच में प्रकाश के विभिन्न रंगों की चाल भिन्न-भिन्न होती है। • कॉशी के सूत्र एवं तरंग सिद्धांत के अनुसार, किसी माध्यम का अपवर्तनांक ($n$) प्रकाश के तरंगदैर्घ्य ($\lambda$) के व्युत्क्रमानुपाती होता है:

$$n \propto \frac{1}{\lambda}$$

• लाल रंग की तरंगदैर्घ्य ($\lambda_R \approx 700\text{ nm}$) सर्वाधिक होती है, जिसके कारण काँच में लाल रंग के लिए अपवर्तनांक सबसे कम होता है। कम अपवर्तनांक के कारण लाल रंग सबसे कम गति खोता है और इसका झुकाव (विचलन कोण $\delta$) सबसे कम होता है। • बैंगनी रंग की तरंगदैर्घ्य ($\lambda_V \approx 400\text{ nm}$) सबसे कम होती है, जिससे काँच में इसका अपवर्तनांक अधिकतम होता है और इसका झुकाव (विचलन कोण $\delta$) सर्वाधिक होता है।

उदाहरण 4
प्रश्न 4 (JAC 2020 - 3 अंक): तारे क्यों टिमटिमाते हैं जबकि ग्रह नहीं टिमटिमाते? वैज्ञानिक कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. तारे क्यों टिमटिमाते हैं? (क) तारे पृथ्वी से अत्यधिक दूरी पर स्थित हैं, जिसके कारण वे प्रकाश के बिंदु-स्रोत (Point sources) प्रतीत होते हैं। (ख) जब तारों का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो वायुमंडल की परतों का तापमान और घनत्व लगातार बदलता रहता है। (ग) वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण तारे से आने वाली प्रकाश किरणों का मार्ग निरंतर विचलित होता है, जिससे आँख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की चमक घटती-बढ़ती रहती है और तारे टिमटिमाते दिखाई देते हैं।

2. ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते? (क) ग्रह तारों की तुलना में पृथ्वी के अत्यधिक निकट हैं, अतः वे बिंदु स्रोत न होकर प्रकाश के विस्तृत स्रोत (Extended sources) की भाँति कार्य करते हैं। (ख) एक ग्रह को प्रकाश के असंख्य बिंदु-स्रोतों का एक बड़ा संग्रह माना जा सकता है। (ग) सभी व्यक्तिगत बिंदु-स्रोतों से आँख में आने वाले प्रकाश की मात्रा में होने वाले उतार-चढ़ाव का औसत मान शून्य हो जाता है। अतः ग्रह से आने वाले कुल प्रकाश की तीव्रता स्थिर रहती है और ग्रह नहीं टिमटिमाते।

उदाहरण 5
प्रश्न 5 (JAC 2019 - 3 अंक): स्वच्छ आकाश का रंग नीला क्यों दिखाई देता है? किसी अंतरिक्ष यात्री को आकाश नीले के स्थान पर काला क्यों दिखाई देता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. स्वच्छ आकाश का रंग नीला होने का कारण: (क) सूर्य का प्रकाश जब वायुमंडल से गुजरता है, तो वायु के सूक्ष्म अणु ($N_2, O_2$) प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं। (ख) रैले के प्रकीर्णन नियम ($I \propto 1/\lambda^4$) के अनुसार, कम तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश का प्रकीर्णन अधिक तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश की तुलना में अत्यधिक तीव्र होता है। (ग) नीले रंग का तरंगदैर्घ्य लाल रंग के तरंगदैर्घ्य का लगभग आधा होता है, अतः नीले रंग का प्रकीर्णन लाल रंग की तुलना में लगभग 16 गुना अधिक होता है। यह प्रकीर्णित नीला प्रकाश पूरे आकाश में फैल जाता है, जिससे हमें आकाश नीला दिखाई देता है।

2. अंतरिक्ष यात्री को आकाश काला क्यों दिखाई देता है? अंतरिक्ष में कोई वायुमंडल उपस्थित नहीं है (वहाँ निर्वात है)। चूँकि प्रकाश को प्रकीर्णित करने के लिए कोई गैस अणु या धूल कण उपस्थित नहीं होते, अतः प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं होता। परिणामस्वरूप अंतरिक्ष यात्री की आँखों में कोई प्रकीर्णित प्रकाश नहीं पहुँचता और उसे आकाश बिल्कुल काला (Dark/Black) दिखाई देता है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मायोपिया में उत्तल लेंस और हाइपरमेट्रोपिया में अवतल लेंस लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

कंठस्थ सूत्र: निकट दृष्टि दोष (Myopia) = अवतल लेंस (Concave Lens); दूर/दीर्घ दृष्टि दोष (Hypermetropia) = उत्तल लेंस (Convex Lens)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सामान्य नेत्र की न्यूनतम स्पष्ट दूरी को 25 मीटर या 2.5 सेमी लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सामान्य नेत्र का निकट बिंदु ठीक 25 सेमी (25 cm = 0.25 m) होता है; दूर बिंदु अनंत (Infinity) होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि तारे अपनी आंतरिक चमक में उतार-चढ़ाव के कारण टिमटिमाते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

तारों की वास्तविक चमक बिल्कुल स्थिर होती है; उनका टिमटिमाना पूर्णतः पृथ्वी के अशांत वायुमंडल द्वारा होने वाले अपवर्तन (Atmospheric Refraction) का परिणाम है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

स्पेक्ट्रम में रंगों के क्रम में लाल को नीचे और बैंगनी को ऊपर लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

याद रखें VIBGYOR में बैंगनी (V) का झुकाव सबसे ज्यादा होकर वह आधार (नीचे) पर होता है, और लाल (R) का झुकाव सबसे कम होकर वह शीर्ष (ऊपर) पर होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य का लाल रंग वायुमंडलीय अपवर्तन बताना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सूर्य का रक्ताभ (लाल) दिखाई देना प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering) के कारण है, अपवर्तन के कारण नहीं! अपवर्तन के कारण केवल 2 मिनट पहले दिखाई देता है।

मानव नेत्र के दोष, संशोधन किरण आरेख एवं प्रिज्म स्पेक्ट्रम विक्षेपण

मानव नेत्र: दृष्टि दोष, संशोधन आरेख एवं प्रिज्म वर्ण-विक्षेपण (VIBGYOR) दृष्टि दोष एवं निवारण (Eye Defects & Lenses) 1. निकट दृष्टि दोष (Myopia / Short-sightedness) • लक्षण: दूर की वस्तु धुंधली | दूर बिंदु अनंत से पास आया • कारण: लेंस अधिक मोटा (वक्रता अधिक) या नेत्र गोलक लंबा • प्रतिबिंब: रेटिना के आगे (पहले) ही बन जाता है संशोधन: उचित क्षमता का अवतल लेंस (Concave Lens) f = -d | क्षमता = ऋणात्मक (- D) (अपसारी लेंस) 2. दीर्घ दृष्टि दोष (Hypermetropia / Long-sightedness) • लक्षण: पास की वस्तु धुंधली | निकट बिंदु 25 cm से दूर हटा • कारण: लेंस बहुत पतला (f अत्यधिक) या गोलक छोटा • प्रतिबिंब: रेटिना के पीछे (पार) बनता है संशोधन: उचित क्षमता का उत्तल लेंस (Convex Lens) 1/f = 1/v - 1/u | क्षमता = धनात्मक (+ D) (अभिसारी लेंस) प्रिज्म विक्षेपण एवं वायुमंडलीय परिघटनाएं प्रिज्म द्वारा वर्ण-विक्षेपण (Dispersion): श्वेत प्रकाश \to 7 घटक रंग (काँच में चाल भिन्न-भिन्न होने से) V (बैंगनी) झुकाव अधिकतम R (लाल) झुकाव न्यूनतम वायुमंडलीय अपवर्तन (Atmospheric Refraction): 1. तारों का टिमटिमाना: बिंदु स्रोत + अशांत वायुमंडल (ग्रह विस्तृत स्रोत हैं, अतः टिमटिमाते नहीं हैं) 2. अग्रिम सूर्योदय (2 min) + विलंबित सूर्यास्त (2 min) \to दिन की कुल अवधि 4 मिनट बढ़ जाती है प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering - I ∝ 1/λ⁴): • आकाश का नीला रंग: नीले रंग का प्रकीर्णन सर्वाधिक • रक्ताभ सूर्य (सूर्योदय/सूर्यास्त): लंबी दूरी, लाल ही बचता है • खतरे का संकेत लाल: न्यूनतम प्रकीर्णन, दूर तक दिखता है

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
मानव नेत्र एक प्राकृतिक कैमरा है; कॉर्निया 80% अपवर्तन करता है, परितारिका पुतली का आकार नियंत्रित करती है।
मुख्य बिंदु 2
रेटिना पर वास्तविक एवं उल्टा प्रतिबिंब बनता है; इसमें प्रकाश-संवेदी रॉड्स (तीव्रता) व कोन्स (रंग) होते हैं।
मुख्य बिंदु 3
समंजन क्षमता: सिलियरी पेशियों द्वारा नेत्र लेंस की फोकस दूरी बदलने की क्षमता। निकट बिंदु = 25 सेमी, दूर बिंदु = अनंत।
मुख्य बिंदु 4
निकट दृष्टि दोष (मायोपिया): दूर की वस्तु धुंधली दिखती है; रेटिना के आगे प्रतिबिंब बनता है; अवतल लेंस से संशोधन (f = -d)।
मुख्य बिंदु 5
दीर्घ दृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया): पास की वस्तु धुंधली दिखती है; रेटिना के पीछे प्रतिबिंब बनता है; उत्तल लेंस से संशोधन।
मुख्य बिंदु 6
जरा-दूरदृष्टिता (प्रेसबायोपिया): वृद्धावस्था में सिलियरी पेशियों की शिथिलता से दोष; द्विफोकसी लेंस (ऊपर अवतल, नीचे उत्तल) से संशोधन।
मुख्य बिंदु 7
प्रिज्म द्वारा वर्ण-विक्षेपण: श्वेत प्रकाश का VIBGYOR में विभाजन; लाल रंग का विचलन न्यूनतम और बैंगनी का अधिकतम होता है।
मुख्य बिंदु 8
इंद्रधनुष जल की बूंदों द्वारा विक्षेपण, पूर्ण आंतरिक परावर्तन एवं अपवर्तन से सूर्य के विपरीत दिशा में बनता है।
मुख्य बिंदु 9
वायुमंडलीय अपवर्तन: तारों का टिमटिमाना (तारे बिंदु-स्रोत हैं, ग्रह विस्तृत स्रोत होने से नहीं टिमटिमाते); दिन 4 मिनट लंबा हो जाता है।
मुख्य बिंदु 10
रैले प्रकीर्णन (I ∝ 1/λ⁴): नीले रंग का प्रकीर्णन सर्वाधिक होने से आकाश नीला दिखता है; सूर्योदय/सूर्यास्त पर केवल लाल रंग पहुँच पाता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
1. स्वच्छ आकाश का रंग नीला दिखाई देने के लिए प्रकाश की कौन-सी परिघटना उत्तरदायी है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light); वायु के अणुओं द्वारा कम तरंगदैर्घ्य वाले नीले रंग का प्रकीर्णन सर्वाधिक होता है।
2
2. एक व्यक्ति को 1.5 मीटर से अधिक दूरी पर स्थित वस्तुओं को देखने के लिए चश्मे की आवश्यकता होती है। वह किस दृष्टि दोष से पीड़ित है और संशोधक लेंस की क्षमता क्या होगी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: वह निकट दृष्टि दोष (Myopia) से पीड़ित है; f = -1.5 m; क्षमता P = 1 / (-1.5) = -0.67 D (अवतल लेंस)।
3
3. वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य वास्तविक सूर्योदय से कितने समय पहले दिखाई देने लगता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: लगभग 2 मिनट पहले (और सूर्यास्त के बाद 2 मिनट तक दिखाई देता रहता है, जिससे दिन 4 मिनट लंबा हो जाता है)।
4
4. खतरे का सिग्नल लाल रंग का ही क्यों बनाया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि लाल रंग की तरंगदैर्घ्य दृश्य प्रकाश में सबसे अधिक होती है, जिससे रैले के नियम (I ∝ 1/λ⁴) के अनुसार कोहरे और धुएँ में इसका प्रकीर्णन सबसे कम होता है और यह दूर से भी स्पष्ट दिखता है।
5
5. द्विफोकसी (Bifocal) चश्मे में ऊपरी और निचले लेंस क्रमशः किस प्रकार के होते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ऊपरी भाग अवतल लेंस (दूर की वस्तुओं को देखने हेतु) तथा निचला भाग उत्तल लेंस (निकट की वस्तुओं व पढ़ने हेतु) होता है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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