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JAC • Class X • Social Science • Ch 13
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Development

विकास अथवा प्रगति की धारणा मानव जीवन के आरंभ से ही उसके साथ जुड़ी रही है। हम कैसे जीना चाहते हैं? हमारे जीवन के क्या लक्ष्य हैं? और एक देश को कैसा होना चाहिए? ये सभी प्रश्न विकास के केंद्र में हैं। विकास की सबसे पहली और मूलभूत सच्चाई यह है कि 'अलग-अलग व्यक्तियों के विकास के लक्ष्य अलग-अलग हो सकते हैं', और यहाँ तक कि 'जो एक के लिए विकास है, वह दूसरे के लिए विनाशकारी भी हो सकता है' (जैसे नर्मदा नदी पर बड़े बांध उद्योगपतियों के लिए बिजली का विकास हैं, परंतु स्थानीय आदिवासियों के लिए विस्थापन और तबाही)। लोग जीवन में केवल अधिक आय (पैसे) ही नहीं चाहते, बल्कि स्वतंत्रता, सुरक्षा, बराबरी का व्यवहार और आत्मसम्मान जैसे अभौतिक लक्ष्यों (Non-material goals) को भी समान प्राथमिकता देते हैं। विभिन्न देशों अथवा राज्यों के विकास की तुलना करने के लिए विश्व बैंक केवल 'प्रति व्यक्ति आय' (औसत आय) का उपयोग करता है, परंतु औसत आय असमानताओं को छुपा लेती है। इसके विपरीत, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) अपनी ऐतिहासिक 'मानव विकास रिपोर्ट' (HDR) में आय के साथ-साथ स्वास्थ्य (जन्म के समय जीवन प्रत्याशा) और शिक्षा (साक्षरता दर व निवल उपस्थिति अनुपात) को शामिल करके 'मानव विकास सूचकांक' (HDI) तैयार करता है। केरल और हरियाणा की तुलना स्पष्ट करती है कि जेब में रखा पैसा प्रदूषण-मुक्त वातावरण, मिलावट-रहित दवाएं और अच्छी शिक्षा नहीं खरीद सकता; इसके लिए मजबूत सार्वजनिक सुविधाएं (PDS और सरकारी स्वास्थ्य केंद्र) अनिवार्य हैं। इस अध्याय में हम शरीर द्रव्यमान सूचकांक (BMI) के मापन, भूजल के अति-दोहन, कच्चे तेल के गिरते भंडारों और 'विकास की धारणीयता' (Sustainability of Development) का गहन, तार्किक और बोर्ड-उन्मुख आर्थिक विश्लेषण करेंगे।

क्या जेब में भरा पैसा आपको प्रदूषण-मुक्त हवा और मिलावट-रहित दवाएं खरीद कर दे सकता है?

हरियाणा में एक औसत व्यक्ति की कमाई केरल के व्यक्ति से कहीं ज्यादा है, लेकिन जब आप बच्चों की मौत के आंकड़े देखते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं! हरियाणा में पैदा होने वाले हर 1,000 बच्चों में से 30 बच्चे अपना पहला जन्मदिन मनाने से पहले मर जाते हैं, जबकि कम आय वाले केरल में यह संख्या मात्र 7 है! ऐसा क्यों? क्योंकि पैसा सब कुछ नहीं खरीद सकता! अच्छी सरकार, ईमानदार राशन प्रणाली (PDS), अच्छे सरकारी अस्पताल और साफ हवा पैसे से नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक इच्छाशक्ति से मिलती है। आइए समझें कि 'सच्चा विकास' केवल रुपयों की गिनती नहीं, बल्कि इंसान के सुखी और स्वस्थ जीवन की मुस्कान है!

Why This Chapter Matters

JAC और CBSE कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में 'विकास' अर्थशास्त्र खंड का सबसे महत्वपूर्ण और अवधारणात्मक अध्याय है। विकास के विरोधाभासी लक्ष्यों (नर्मदा बांध उदाहरण), प्रति व्यक्ति आय की गणना और उसकी सीमाएं (असमानताओं को छुपाना), विश्व बैंक और UNDP के विकास मापदंडों की तुलना (World Bank vs UNDP), शिशु मृत्यु दर (IMR), साक्षरता दर, सार्वजनिक सुविधाओं का महत्व (केरल मॉडल), शरीर द्रव्यमान सूचकांक (BMI का सूत्र), तथा विकास की धारणीयता (भूजल संकट) पर 3 से 5 अंकों के विश्लेषणात्मक प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

Before You Begin (Prerequisites)

  • राष्ट्रीय आय (National Income) और जनसंख्या की प्राथमिक संकल्पना।
  • साक्षरता और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की सामान्य जानकारी।
  • पर्यावरण ह्रास और प्राकृतिक संसाधनों के सीमित होने का बुनियादी ज्ञान।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • विकास के विविध और विरोधाभासी लक्ष्यों (Conflicting Goals) तथा आय के अतिरिक्त अन्य लक्ष्यों (स्वतंत्रता, समानता, सुरक्षा) का विश्लेषण करना।
  • प्रति व्यक्ति आय (औसत आय) की गणना करना तथा विश्व बैंक द्वारा देशों के वर्गीकरण और औसत आय की सीमाओं की व्याख्या करना।
  • हरियाणा, केरल और बिहार के तुलनात्मक आंकड़ों (IMR, साक्षरता, प्रति व्यक्ति आय) के आधार पर सार्वजनिक सुविधाओं के महत्व को समझना।
  • विश्व बैंक (केवल आय) और UNDP (आय, स्वास्थ्य, शिक्षा) के मानव विकास मापदंडों की विस्तृत तुलना करना।
  • शरीर द्रव्यमान सूचकांक (BMI) की गणना करना तथा भावी पीढ़ियों के संदर्भ में 'विकास की धारणीयता' (टिकाऊ विकास) का मूल्यांकन करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. विकास के विविध लक्ष्य एवं आय के...
2 2. देशों और राज्यों की तुलना: प्रति...
3 3. आय और अन्य मापदंड: हरियाणा बनाम...
4 4. मानव विकास रिपोर्ट (UNDP) एवं शर...
5 5. विकास की धारणीयता (Sustainabilit...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. विकास के विविध लक्ष्य एवं आय के अतिरिक्त अन्य आकांक्षाएं

1.1 विभिन्न व्यक्तियों के विभिन्न एवं परस्पर विरोधी विकास लक्ष्य

समाज में प्रत्येक व्यक्ति की जीवन परिस्थितियाँ भिन्न होती हैं, इसलिए उनकी आकांक्षाएं और विकास के लक्ष्य भी भिन्न होते हैं:

  • भूमिहीन ग्रामीण मजदूर: अधिक दिनों का काम और बेहतर मजदूरी, बच्चों के लिए स्थानीय स्कूल में उत्तम शिक्षा, और कोई सामाजिक भेदभाव न होना।
  • पंजाब का समृद्ध किसान: अपनी उपज के लिए उच्च समर्थन मूल्य, सस्ते मजदूर, और बच्चों को विदेश में बसाने की सुविधा।
  • शहरी बेरोजगार युवक: एक सुरक्षित, पक्की और सम्मानजनक नौकरी।
  • शहरी अमीर परिवार की लड़की: उसे अपने भाई जैसी पूरी स्वतंत्रता मिले, वह अपने फैसले खुद ले सके और विदेश में पढ़ाई कर सके।
विरोधाभासी विकास लक्ष्य (Conflicting Goals):
कई बार दो व्यक्तियों या समूहों के विकास लक्ष्य परस्पर विरोधी हो सकते हैं। यानी 'जो एक के लिए विकास है, वह दूसरे के लिए विकास न हो; यहाँ तक कि वह दूसरे के लिए विनाशकारी भी हो सकता है!'
उदाहरण: उद्योगपति अधिक बिजली पैदा करने के लिए नदियों पर बड़े बांध बनाना चाहते हैं जो उनके लिए विकास का प्रतीक है। परंतु बांध बनने से उस क्षेत्र के हजारों गरीब आदिवासी और किसान जलमग्न होकर बेघर हो जाते हैं और उनकी आजीविका पूरी तरह नष्ट हो जाती है। उनके लिए एक छोटा चेकडैम या तालाब ही अधिक उपयोगी विकास है।

1.2 आय और अन्य लक्ष्य (मिश्रित लक्ष्य - Mix of Goals)

यद्यपि अधिक आय पाना प्रत्येक व्यक्ति का मुख्य लक्ष्य होता है, परंतु लोग केवल भौतिक वस्तुओं (पैसे) से ही संतुष्ट नहीं होते:

भौतिक वस्तुएं (द्रव्य / आय)अभौतिक घटक (Non-material factors)
• भोजन, वस्त्र, मकान, कार, मोबाइल फोन खरीदना।
• पैसे से खरीदी जा सकने वाली सुख-सुविधाएं।
• बराबरी का व्यवहार (Equality) और छुआछूत का अभाव।
• स्वतंत्रता (Freedom) और अपने विचार व्यक्त करने की आजादी।
• सुरक्षा (Security) और भयमुक्त वातावरण।
• दूसरों से आदर (Respect) और आत्मसम्मान।

नौकरी का उदाहरण: यदि आपको दूर-दराज के इलाके में बहुत अधिक वेतन वाली नौकरी मिले, लेकिन वहाँ कार्यस्थल पर कोई सुरक्षा न हो, परिवार के लिए समय न हो और स्वतंत्रता न हो, तो आप उसे स्वीकार नहीं करेंगे। अतः लोग विकास के लिए 'लक्ष्यों के मिश्रण' (Mix of Goals) को देखते हैं। इसी प्रकार, जब समाज में महिलाओं के लिए सुरक्षित और गरिमापूर्ण वातावरण होता है, तो अधिक महिलाएं विभिन्न प्रकार की नौकरियां और व्यापार करने के लिए आगे आती हैं।

2. देशों और राज्यों की तुलना: प्रति व्यक्ति आय एवं उसकी सीमाएं

2.1 प्रति व्यक्ति आय / औसत आय (Per Capita Income)

जब हम विभिन्न देशों के विकास की तुलना करते हैं, तो उनकी कुल राष्ट्रीय आय (National Income) को तुलना का आधार नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि विभिन्न देशों की जनसंख्या भिन्न-भिन्न होती है। कुल आय से यह पता नहीं चलता कि औसत व्यक्ति कितना कमा रहा है।

सूत्र:
प्रति व्यक्ति आय (औसत आय) = देश की कुल राष्ट्रीय आय / देश की कुल जनसंख्या

विश्व बैंक की विश्व विकास रिपोर्ट (World Development Report):
विश्व बैंक देशों के वर्गीकरण के लिए केवल 'प्रति व्यक्ति आय' मापदंड का प्रयोग करता है (अमेरिकी डॉलर में):

  • समृद्ध / उच्च आय वाले देश: 2019 में जिनकी प्रति व्यक्ति आय US$ 49,300 प्रति वर्ष या उससे अधिक थी (जैसे अमेरिका, पश्चिमी यूरोपीय देश)।
  • निम्न आय वाले देश: जिनकी प्रति व्यक्ति आय US$ 2,500 प्रति वर्ष या उससे कम थी।
  • भारत की स्थिति: भारत 'निम्न-मध्यम आय वर्ग' (Low-middle-income) में आता है क्योंकि 2019 में इसकी प्रति व्यक्ति आय मात्र US$ 6,700 प्रति वर्ष (क्रय शक्ति समता - PPP डॉलर में) थी।

2.2 औसत आय की गंभीर सीमाएं (यह असमानताओं को छुपाती है)

यद्यपि औसत आय तुलना के लिए उपयोगी है, परंतु यह यह नहीं बताती कि यह आय देश के नागरिकों के बीच किस प्रकार वितरित है:

देशनागरिक 1नागरिक 2नागरिक 3नागरिक 4नागरिक 5कुल आयऔसत (प्रति व्यक्ति) आय
देश 'क' (समान वितरण)9,500 रु.10,500 रु.9,800 रु.10,000 रु.10,200 रु.50,000 रु.10,000 रु.
देश 'ख' (घोर असमानता)500 रु.500 रु.500 रु.500 रु.48,000 रु.50,000 रु.10,000 रु.
विश्लेषण: दोनों देशों की औसत आय बिल्कुल समान (10,000 रु.) है। परंतु देश 'क' में न कोई बहुत अमीर है और न कोई गरीब; जबकि देश 'ख' में 4 नागरिक घोर कंगाल हैं और केवल 1 नागरिक महा-धनी है! यदि आपको चयन का मौका मिले तो आप देश 'क' में रहना पसंद करेंगे। अतः स्पष्ट है कि औसत आय विकास का सही पैमाना नहीं हो सकती क्योंकि यह वितरण की असमानताओं को पूरी तरह छुपा लेती है।

3. आय और अन्य मापदंड: हरियाणा बनाम केरल एवं सार्वजनिक सुविधाएं

3.1 हरियाणा, केरल और बिहार के तुलनात्मक आंकड़े

जब हम भारत के विभिन्न राज्यों के विकास को देखते हैं, तो केवल प्रति व्यक्ति आय से सही तस्वीर नहीं मिलती:

राज्यप्रति व्यक्ति आय (रु. में, 2018-19)शिशु मृत्यु दर (प्रति 1,000, 2018)साक्षरता दर (% में, 2017-18)निवल उपस्थिति अनुपात (कक्षा 9-10)
हरियाणा2,36,147 रु. (सर्वाधिक)3082%61
केरल2,04,105 रु.7 (न्यूनतम / सर्वश्रेष्ठ)94% (सर्वश्रेष्ठ)83 (सर्वश्रेष्ठ)
बिहार40,784 रु. (न्यूनतम)3262%43

शब्दावली:

  • शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate - IMR): किसी वर्ष में पैदा हुए 1,000 जीवित बच्चों में से 1 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले मरने वाले बच्चों का अनुपात। यह स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे सटीक सूचक है।
  • साक्षरता दर (Literacy Rate): 7 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में साक्षर (पढ़ने-लिखने में सक्षम) जनसंख्या का प्रतिशत।
  • निवल उपस्थिति अनुपात (Net Attendance Ratio): 14 तथा 15 वर्ष की आयु के स्कूल जाने वाले बच्चों का उस आयु वर्ग के कुल बच्चों के साथ प्रतिशत।

3.2 सार्वजनिक सुविधाएं (Public Facilities) क्यों अनिवार्य हैं?

हरियाणा में प्रति व्यक्ति आय अधिक होने के बावजूद केरल में शिशु मृत्यु दर बहुत कम (7) और साक्षरता बहुत अधिक (94%) क्यों है?

'पैसा जेब में रखकर सब कुछ नहीं खरीदा जा सकता':
1. आपकी जेब में रखा पैसा आपके लिए प्रदूषण-मुक्त वातावरण नहीं खरीद सकता।
2. धन आपको संक्रामक बीमारियों (जैसे कोरोना, डेंगू) से तब तक नहीं बचा सकता जब तक पूरा समाज मिलकर रोकथाम के कदम न उठाए।
3. पैसा आपको बिना मिलावट वाली शुद्ध दवाएं और भोजन उपलब्ध कराने की गारंटी नहीं दे सकता。

केरल की सफलता का रहस्य:
केरल में शिशु मृत्यु दर सबसे कम इसलिए है क्योंकि वहाँ मौलिक स्वास्थ्य और शिक्षा की उत्कृष्ट सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही केरल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS / राशन की दुकानें) अत्यधिक सुचारू रूप से कार्य करती है, जिससे वहाँ के लोगों का स्वास्थ्य और पोषण स्तर बहुत बेहतर है।

4. मानव विकास रिपोर्ट (UNDP) एवं शरीर द्रव्यमान सूचकांक (BMI)

4.1 UNDP की मानव विकास रिपोर्ट (Human Development Report - HDR)

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रकाशित 'मानव विकास रिपोर्ट' विकास को मापने का विश्व का सबसे संतुलित और व्यापक पैमाना है। यह केवल आय को नहीं देखती, बल्कि नागरिकों की जीवन गुणवत्ता को मापती है:

तुलना का बिंदुविश्व बैंक का मापदंडUNDP (मानव विकास रिपोर्ट) का मापदंड
मुख्य आधारकेवल प्रति व्यक्ति आय (औसत आय)।आय + स्वास्थ्य + शिक्षा (समग्र दृष्टिकोण)।
विशिष्ट सूचकअमेरिकी डॉलर में प्रति व्यक्ति आय।1. स्वास्थ्य: जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy at Birth)।
2. शिक्षा: साक्षरता दर व 25 वर्ष+ लोगों के स्कूलिंग के औसत वर्ष।
3. जीवन स्तर: प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (PPP US$ में)।
दृष्टिकोणसंकीर्ण और केवल आर्थिक दृष्टिकोण।व्यापक और मानवीय दृष्टिकोण (मानव जीवन की गरिमा)।

भारत और पड़ोसी देश: हमारे छोटे से पड़ोसी देश श्रीलंका का मानव विकास सूचकांक (HDI रैंक लगभग 73) भारत (रैंक लगभग 130-132) से हर दृष्टि (प्रति व्यक्ति आय, जीवन प्रत्याशा और साक्षरता) में कहीं बेहतर है!

4.2 शरीर द्रव्यमान सूचकांक (Body Mass Index - BMI)

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वयस्कों के पोषण स्तर (Nutritional Status) की जांच के लिए पोषण वैज्ञानिक BMI का उपयोग करते हैं:

BMI की गणना का सूत्र:
BMI = भार (किलोग्राम में) / [ऊंचाई (मीटर में)]²

मानक श्रेणियां:
• BMI < 18.5: व्यक्ति अल्पपोषित (Underweight / कुपोषित) है।
• 18.5 ≤ BMI ≤ 24.9: व्यक्ति का पोषण स्तर सामान्य व स्वस्थ (Normal) है।
• BMI ≥ 25: व्यक्ति अति-भार (Overweight / मोटापे का शिकार) है।
(नोट: यह मापदंड बढ़ते बच्चों पर लागू नहीं होता, केवल वयस्क नागरिकों पर लागू होता है)।

5. विकास की धारणीयता (Sustainability of Development)

5.1 धारणीयता की संकल्पना एवं ऐतिहासिक चेतावनी

विकास की धारणीयता (सतत पोषणीय विकास): विकास का ऐसा स्वरूप जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के लिए संसाधनों की गुणवत्ता और उपलब्धता को सुरक्षित रखे।

'हमने यह धरती अपने पूर्वजों से उत्तराधिकार में नहीं पाई है, बल्कि हमने इसे अपने बच्चों से उधार लिया है!'
— यह प्रसिद्ध उक्ति हमें सचेत करती है कि हम धरती के संसाधनों के स्वामी नहीं, बल्कि उसके रखवाले (Trustees) हैं।

5.2 संकट के दो ज्वलंत उदाहरण

1. भारत में भूमिगत जल का अति-दोहन

• हाल के प्रमाणों से पता चलता है कि देश के अनेक भागों में भूमिगत जल के गंभीर संकट की स्थिति बन चुकी है。
• देश के लगभग 300 जिलों में पिछले 20 वर्षों में जल स्तर 4 मीटर से अधिक नीचे गिर चुका है।
• देश का एक-तिहाई भाग अपने जल भंडारों का अत्यधिक दोहन कर रहा है। पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के कठोर पठारी क्षेत्रों में ट्यूबवेलों से अनियंत्रित पानी खींचने से कृषि और पेयजल का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।

2. कच्चे तेल (Crude Oil) के भंडारों का क्षय

• कच्चा तेल एक अनवीकरण योग्य प्राकृतिक संसाधन है।
• विश्व में कच्चे तेल के ज्ञात भंडार मात्र अगले 50 वर्षों के लिए ही शेष बचे हैं (मध्य पूर्व में 70 वर्ष और अमेरिका में मात्र 10 वर्ष)।
• भारत अपनी कुल तेल खपत का 80% से अधिक विदेशों से आयात करता है। तेल की कीमतें बढ़ने पर देश की संपूर्ण अर्थव्यवस्था पर महंगाई का बोझ पड़ता है। यदि वैकल्पिक ऊर्जा नहीं खोजी गई, तो विकास की गाड़ी हमेशा के लिए रुक जाएगी।

Key Historical Terms, Chronology & Administrative Principles

प्रति व्यक्ति आय (औसत आय)
देश की कुल राष्ट्रीय आय / देश की कुल जनसंख्या।
विश्व बैंक रिपोर्ट
देशों के वर्गीकरण का एकमात्र मापदंड: प्रति व्यक्ति आय (US डॉलर में)।
शिशु मृत्यु दर (IMR)
प्रति 1,000 जीवित जन्मों में 1 वर्ष की आयु से पूर्व मरने वाले शिशुओं की संख्या।
साक्षरता दर
7 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में साक्षर जनसंख्या का प्रतिशत।
निवल उपस्थिति अनुपात
14-15 वर्ष के स्कूल जाने वाले बच्चों का उस आयु वर्ग के कुल बच्चों से प्रतिशत।
UNDP मानव विकास सूचकांक
3 घटक: प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय + जीवन प्रत्याशा + स्कूली शिक्षा के वर्ष।
BMI सूत्र
भार (किग्रा में) / [ऊंचाई (मीटर में)]²; सामान्य स्तर: 18.5 से 24.9।
BMI < 18.5
अल्पपोषित (कुपोषण का शिकार); BMI > 25 = अति-भार (मोटापा)।
केरल बनाम हरियाणा
हरियाणा की आय अधिक, परंतु केरल का IMR कम (7) व साक्षरता अधिक (94%)।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)
सरकारी राशन व्यवस्था; पोषण और स्वास्थ्य सुधार का प्रमुख आधार।
कच्चा तेल भंडार
विश्व में वर्तमान उपभोग दर पर मात्र अगले 50-53 वर्षों के लिए तेल भंडार शेष।
धारणीयता सिद्धांत
'हमने यह धरती पूर्वजों से नहीं पाई, बल्कि अपने बच्चों से उधार ली है।'

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
'अलग-अलग लोगों के विकास के लक्ष्य अलग-अलग और कभी-कभी परस्पर विरोधी हो सकते हैं।' उपयुक्त उदाहरणों द्वारा इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Step-by-Step Solution:
विकास की अवधारणा व्यक्तिपरक होती है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की जीवन शैली, आर्थिक स्थिति और प्राथमिकताएं अलग होती हैं:

1. विभिन्न व्यक्तियों के भिन्न लक्ष्य:
• एक भूमिहीन मजदूर के लिए विकास का अर्थ है: साल भर नियमित मजदूरी, बेहतर पारिश्रमिक और अपने बच्चों को स्थानीय सरकारी स्कूल में अच्छी शिक्षा दिलाना।
• इसके विपरीत, पंजाब के एक धनी किसान के लिए विकास का अर्थ है: अपनी फसलों का अधिक से अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य पाना, सस्ते मजदूर मिलना और अपने बच्चों को उच्च शिक्षा हेतु विदेश भेजना।

2. परस्पर विरोधी लक्ष्य (Conflicting Goals):
कई बार एक समूह का विकास दूसरे समूह के विनाश का कारण बन जाता है:
• बड़े बांधों का उदाहरण: देश के बड़े उद्योगपति और शहरी निवासी अपने कारखानों व घरों के लिए अधिक बिजली चाहते हैं, इसलिए वे नदियों पर विशाल बहुउद्देशीय बांधों के निर्माण को 'विकास' मानते हैं।
• परंतु इसी बांध के बनने से उस नदी घाटी में पीढ़ियों से रह रहे हजारों आदिवासी और गरीब किसान अपनी जमीन, जंगलों और घरों से विस्थापित होकर दाने-दाने को मोहताज हो जाते हैं। उनके लिए यह बांध विकास नहीं बल्कि महा-विनाश साबित होता है।
Example 2
प्रति व्यक्ति आय (औसत आय) क्या है? विश्व बैंक देशों का वर्गीकरण करने के लिए इसका प्रयोग कैसे करता है, और इसकी मुख्य कमियां (सीमाएं) क्या हैं?
Step-by-Step Solution:
प्रति व्यक्ति आय का अर्थ:
किसी देश की कुल राष्ट्रीय आय को उसकी कुल जनसंख्या से भाग देने पर जो औसत आय प्राप्त होती है, उसे 'प्रति व्यक्ति आय' (Per Capita Income) या औसत आय कहते हैं।
सूत्र: प्रति व्यक्ति आय = कुल राष्ट्रीय आय / कुल जनसंख्या

विश्व बैंक का मापदंड:
विश्व बैंक अपनी वार्षिक 'विश्व विकास रिपोर्ट' में विभिन्न देशों का वर्गीकरण केवल प्रति व्यक्ति आय (US डॉलर में) के आधार पर करता है:
1. समृद्ध देश: जिनकी प्रति व्यक्ति आय 2019 में US$ 49,300 प्रति वर्ष या अधिक थी।
2. निम्न आय वाले देश: जिनकी प्रति व्यक्ति आय US$ 2,500 प्रति वर्ष या कम थी।
3. भारत US$ 6,700 प्रति वर्ष के साथ निम्न-मध्यम आय वर्ग में आता है。

औसत आय की मुख्य कमियां (सीमाएं):
1. आय के वितरण को छुपाना: औसत आय यह नहीं बताती कि यह धन समाज के विभिन्न वर्गों में कैसे बंटा है।
2. काल्पनिक उदाहरण: यदि किसी देश में 5 नागरिक हैं जिनमें से 4 नागरिक 500-500 रुपये कमाते हैं और 1 अकेला व्यक्ति 48,000 रुपये कमाता है, तो देश की औसत आय 10,000 रुपये आएगी। देखने में देश अमीर लगेगा, परंतु वास्तव में 80% जनता घोर गरीबी में जी रही है। अतः औसत आय विकास का भ्रामक चित्र प्रस्तुत करती है।
Example 3
हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय केरल से अधिक है, फिर भी केरल को हरियाणा से अधिक विकसित राज्य क्यों माना जाता है? स्पष्ट कीजिए।
Step-by-Step Solution:
यद्यपि 2018-19 के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय (2,36,147 रु.) केरल (2,04,105 रु.) से अधिक है, फिर भी सामाजिक और मानवीय विकास के पैमाने पर केरल हरियाणा से कहीं आगे है। इसके मुख्य कारण निम्न हैं:

1. शिशु मृत्यु दर (IMR): केरल में शिशु मृत्यु दर प्रति 1,000 जन्म पर मात्र 7 है, जबकि अधिक अमीर हरियाणा में यह 30 है! इसका अर्थ है कि हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं का घोर अभाव है और हर 1,000 में से 30 नवजात शिशु अपना पहला जन्मदिन भी नहीं देख पाते।
2. साक्षरता दर: केरल की साक्षरता दर 94% है जो देश में सर्वोच्च है, जबकि हरियाणा में यह 82% है।
3. स्कूल उपस्थिति: केरल में 14-15 वर्ष के 83% बच्चे माध्यमिक स्कूल जाते हैं, जबकि हरियाणा में यह अनुपात मात्र 61% है।
4. सार्वजनिक सुविधाओं की सुलभता: केरल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs) और सरकारी स्कूल अत्यधिक गुणवत्तापूर्ण हैं। साथ ही वहाँ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS / राशन व्यवस्था) पारदर्शी और प्रभावी है, जिससे गरीब से गरीब व्यक्ति को भी पौष्टिक आहार मिलता है।
अतः यह सिद्ध होता है कि केवल जेब का पैसा विकास नहीं है; मानव जीवन की सुरक्षा और गरिमा में केरल हरियाणा से कहीं अधिक विकसित है।
Example 4
विकास को मापने के लिए 'विश्व बैंक' के मापदंड और 'UNDP' (मानव विकास रिपोर्ट) के मापदंड में क्या मूलभूत अंतर है?
Step-by-Step Solution:
विश्व बैंक और UNDP के विकास मापदंडों में बुनियादी और वैचारिक अंतर निम्नलिखित है:

तुलना का आधारविश्व बैंक का मापदंडUNDP का मापदंड (मानव विकास रिपोर्ट)
दृष्टिकोण की प्रकृतिसंकीर्ण और विशुद्ध आर्थिक दृष्टिकोण।व्यापक, समावेशी और कल्याणकारी मानवीय दृष्टिकोण।
उपयोग किए जाने वाले घटककेवल प्रति व्यक्ति आय (औसत आय)।तीन प्रमुख घटक: आय + स्वास्थ्य + शिक्षा।
स्वास्थ्य का पैमानास्वास्थ्य की पूरी तरह अनदेखी करता है।जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) को मापता है कि एक व्यक्ति औसतन कितने वर्ष जीवित रहने की उम्मीद रखता है।
शिक्षा का पैमानाशिक्षा के स्तर पर कोई विचार नहीं करता।साक्षरता दर और 25 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के स्कूलिंग के औसत वर्ष।
अंतिम निष्कर्षयह केवल धन को साध्य मानता है।यह मानता है कि धन केवल एक साधन है; वास्तविक विकास मानव के स्वास्थ्य, ज्ञान और जीवन की गरिमा में वृद्धि है।
Example 5
शरीर द्रव्यमान सूचकांक (BMI) क्या है? इसकी गणना का सूत्र लिखिए। 'विकास की धारणीयता' (Sustainability) से आप क्या समझते हैं और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
Step-by-Step Solution:
शरीर द्रव्यमान सूचकांक (Body Mass Index - BMI):
यह किसी वयस्क व्यक्ति के भार और ऊंचाई का वैज्ञानिक अनुपात है जिसके आधार पर यह पता लगाया जाता है कि वह व्यक्ति उचित रूप से पोषित है, कुपोषित है अथवा मोटापे का शिकार है।
BMI का सूत्र:
BMI = व्यक्ति का भार (किलोग्राम में) / [व्यक्ति की ऊंचाई (मीटर में)]²
• यदि BMI का मान 18.5 से कम आता है, तो व्यक्ति कुपोषित (Underweight) माना जाता है।
• यदि BMI का मान 25 से अधिक आता है, तो व्यक्ति अति-भार (Overweight) माना जाता है。

विकास की धारणीयता (Sustainability of Development):
विकास की धारणीयता का अर्थ है ऐसा निरंतर चलने वाला विकास जो वर्तमान पीढ़ी की जरूरतों को बिना किसी समझौते के पूरा करे, परंतु प्राकृतिक संसाधनों का इस तरह संरक्षण करे कि आने वाली भावी पीढ़ियों के जीवन और विकास के अवसर समाप्त न हों。

यह क्यों महत्वपूर्ण है?
1. भूजल संकट: आज भारत के एक-तिहाई जिलों में भूजल का अंधाधुंध दोहन हो रहा है जिससे जल स्तर खतरनाक रूप से गिर गया है। यदि यह जारी रहा तो अगली पीढ़ी को पीने का पानी भी नहीं मिलेगा।
2. जीवाश्म ईंधनों का खात्मा: कच्चे तेल के वैश्विक भंडार मात्र 50 वर्षों में खत्म हो जाएंगे। यदि हमने अभी से सौर और पवन ऊर्जा जैसे अक्षय विकल्पों को नहीं अपनाया, तो आधुनिक सभ्यता ठहर जाएगी।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

विश्व बैंक और UNDP दोनों के मापदंड को एक जैसा समझ लेना।

Scientific Reality & Correction

विश्व बैंक केवल 'प्रति व्यक्ति आय' को मापता है; जबकि UNDP अपनी मानव विकास रिपोर्ट में 'आय, स्वास्थ्य (जीवन प्रत्याशा) और शिक्षा' तीनों को मिलाकर मानव विकास सूचकांक (HDI) बनाता है।

Common Misconception

BMI के सूत्र में ऊंचाई को सेंटीमीटर में रखना।

Scientific Reality & Correction

BMI की गणना में ऊंचाई हमेशा 'मीटर' में रखी जाती है और उसका वर्ग (मीटर²) किया जाता है। सूत्र: भार (kg) / [ऊंचाई (m)]²।

Common Misconception

हरियाणा को केरल से अधिक मानव विकसित राज्य मान लेना क्योंकि हरियाणा की आय अधिक है।

Scientific Reality & Correction

हरियाणा की आय अधिक है, परंतु स्वास्थ्य (शिशु मृत्यु दर 30) और शिक्षा (82%) में वह केरल (IMR 7, साक्षरता 94%) से बहुत पीछे है; अतः मानव विकास में केरल श्रेष्ठ है।

Common Misconception

प्रति व्यक्ति आय से समाज में अमीरी-गरीबी के अंतर का पता चलने का दावा करना।

Scientific Reality & Correction

प्रति व्यक्ति आय केवल एक 'औसत' है; यह कभी नहीं बताती कि धन कुछ ही अमीरों के पास है या सबका समान वितरण है (यह असमानता को छुपाती है)।

Common Misconception

BMI को बढ़ते बच्चों पर भी लागू समझना।

Scientific Reality & Correction

BMI का मानक पैमाना (<18.5 कुपोषित, >25 अतिभार) केवल 'वयस्क नागरिकों' (Adults) के लिए है, विकासशील बच्चों के लिए नहीं।

विकास के आयाम: विरोधाभासी लक्ष्य, विश्व बैंक बनाम UNDP एवं धारणीयता

विकास: विरोधाभासी लक्ष्य, विश्व बैंक बनाम UNDP एवं धारणीयता1. लक्ष्य व विश्व बैंक मापदंडआय व विरोधाभासी लक्ष्य• अलग व्यक्तियों के अलग लक्ष्य• विरोधाभासी लक्ष्य (बांध):उद्योगपति को बिजली (विकास),आदिवासी बेघर (विनाश)• अभौतिक: स्वतंत्रता, सुरक्षा, आदर• विश्व बैंक: प्रति व्यक्ति आय• औसत आय की सीमाएं:असमानताओं को छुपाती है2. UNDP मानव विकास (HDI)आय, स्वास्थ्य व शिक्षा• 3 घटक: स्वास्थ्य + शिक्षा + आय• जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy)• हरियाणा बनाम केरल:हरियाणा अमीर, पर केरल में IMRकम (7) व साक्षरता 94% (सर्वश्रेष्ठ)• सार्वजनिक सुविधाएं: PDS राशन• BMI = भार (kg) / [ऊंचाई (m)]²<18.5 अल्पपोषित; >25 अतिभार3. विकास की धारणीयताभावी पीढ़ियों के लिए रक्षा• सतत विकास की उक्ति:'धरती पूर्वजों से नहीं पाई,बच्चों से उधार ली है।'• भूजल का अति-दोहन:300 जिलों में 4m+ जल स्तर गिरा(पंजाब, हरियाणा, प. यूपी)• कच्चा तेल संकट:विश्व में मात्र 50 वर्षों का तेल शेषअक्षय ऊर्जा अपनाना अनिवार्यबोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Economics Development Capsule)विश्व बैंक बनाम UNDP:विश्व बैंक केवल प्रति व्यक्ति आय देखता है; UNDP आय + जीवन प्रत्याशा + शिक्षा मापता है।शिशु मृत्यु दर (केरल मॉडल):केरल में IMR 7 (उत्तम स्वास्थ्य व PDS); हरियाणा में आय अधिक पर IMR 30 (खराब स्वास्थ्य)।BMI पैमाना:भार (kg) / [ऊंचाई (m)]²; 18.5 से कम अल्पपोषित; 25 से अधिक अतिभार (मोटापा)।

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
विकास की धारणा व्यक्तिपरक है; अलग-अलग लोगों के विकास लक्ष्य भिन्न और कभी-कभी परस्पर विरोधी होते हैं (जैसे बांध उद्योगपतियों हेतु विकास, आदिवासियों हेतु विनाश)।
Takeaway 2
लोग केवल अधिक आय ही नहीं चाहते बल्कि स्वतंत्रता, सुरक्षा, बराबरी का व्यवहार और सम्मान जैसे अभौतिक लक्ष्यों को भी प्राथमिकता देते हैं।
Takeaway 3
प्रति व्यक्ति आय (औसत आय) = देश की कुल राष्ट्रीय आय / कुल जनसंख्या; विश्व बैंक केवल इसी मापदंड से देशों का वर्गीकरण करता है।
Takeaway 4
औसत आय की गंभीर सीमा यह है कि यह समाज में आय के वितरण और घोर असमानताओं को पूरी तरह छुपा लेती है।
Takeaway 5
हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय केरल से अधिक है, परंतु केरल में शिशु मृत्यु दर न्यूनतम (7) और साक्षरता दर उच्चतम (94%) है।
Takeaway 6
जेब में रखा धन प्रदूषण-मुक्त वातावरण, मिलावट-रहित दवाएं और सुरक्षा नहीं खरीद सकता; इसके लिए सार्वजनिक सुविधाएं (स्वास्थ्य, शिक्षा, PDS) अनिवार्य हैं।
Takeaway 7
UNDP अपनी 'मानव विकास रिपोर्ट' में विकास मापने के लिए आय के साथ-साथ स्वास्थ्य (जीवन प्रत्याशा) और शिक्षा (साक्षरता) को शामिल करता है।
Takeaway 8
श्रीलंका का मानव विकास सूचकांक (HDI) भारत से कहीं बेहतर है।
Takeaway 9
शरीर द्रव्यमान सूचकांक [BMI = भार (kg) / ऊंचाई (m)²] वयस्कों के पोषण स्तर को मापता है (18.5 से कम अल्पपोषित, 25 से अधिक अतिभार)।
Takeaway 10
विकास की धारणीयता वर्तमान और भावी पीढ़ियों के संतुलन पर बल देती है; भारत में भूजल का अति-दोहन और तेल भंडारों का क्षय गंभीर चेतावनी हैं।

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1
'जो एक के लिए विकास है, वह दूसरे के लिए विनाशकारी भी हो सकता है।' इस कथन को एक उपयुक्त उदाहरण देकर समझाइए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: नर्मदा नदी पर बड़े बांध का निर्माण उद्योगपतियों और शहरी निवासियों के लिए अधिक बिजली व पानी उपलब्ध कराकर 'विकास' लाता है; परंतु उसी बांध के जलाशय में डूबने से हजारों गरीब आदिवासियों और किसानों के घर और खेत छिन जाते हैं, जिससे उनके लिए यह 'विनाश' बन जाता है।
2
प्रति व्यक्ति आय की गणना कैसे की जाती है और इसकी सबसे बड़ी कमी (सीमा) क्या है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: प्रति व्यक्ति आय देश की कुल राष्ट्रीय आय को कुल जनसंख्या से भाग देकर निकाली जाती है। इसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि यह केवल एक औसत है और यह नहीं दर्शाती कि यह धन अमीर और गरीब के बीच कैसे वितरित है (यह असमानताओं को छुपा लेती है)।
3
केरल में शिशु मृत्यु दर हरियाणा से काफी कम क्यों है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: क्योंकि केरल में प्राथमिक स्वास्थ्य और मौलिक शिक्षा की बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, और वहाँ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS / राशन व्यवस्था) सुचारू रूप से कार्य करती है, जिससे सभी को पौष्टिक भोजन और स्वास्थ्य सुरक्षा मिलती है।
4
शरीर द्रव्यमान सूचकांक (BMI) की गणना का सूत्र क्या है और एक सामान्य व्यक्ति का BMI मान कितना होना चाहिए?
Reveal Answer & Explanation
Answer: सूत्र: BMI = भार (किलोग्राम में) / [ऊंचाई (मीटर में)]²। एक सामान्य और स्वस्थ वयस्क व्यक्ति का BMI मान 18.5 से 24.9 के बीच होना चाहिए।
5
विकास को मापने के लिए UNDP का मापदंड विश्व बैंक के मापदंड से किस प्रकार श्रेष्ठ है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: विश्व बैंक केवल 'प्रति व्यक्ति आय' को मापता है जो एकांगी है; जबकि UNDP आय के साथ-साथ 'स्वास्थ्य' (जीवन प्रत्याशा) और 'शिक्षा' (साक्षरता व स्कूलिंग वर्ष) को मिलाकर समग्र मानव विकास सूचकांक (HDI) बनाता है जो जीवन की वास्तविक गुणवत्ता को दर्शाता है।
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