1.1 प्रथम विश्व युद्ध के सामाजिक व आर्थिक प्रभाव (1914–1918)
प्रथम विश्व युद्ध ने भारत में एक नई आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पैदा कर दी:
- रक्षा व्यय में भारी वृद्धि: युद्ध के खर्चों की पूर्ति के लिए ब्रिटिश सरकार ने भारी कर्जे लिए और करों में वृद्धि की। सीमा शुल्क बढ़ा दिया गया और पहली बार आयकर (Income Tax) शुरू किया गया।
- असहनीय महंगाई: 1913 से 1918 के बीच कीमतें दोगुनी हो गईं, जिससे आम जनता की मुश्किलें अत्यधिक बढ़ गईं।
- जबरन भर्ती (Forced Recruitment): ग्रामीण इलाकों में ब्रिटिश सेना के लिए युवाओं को जबरन भर्ती किया गया, जिससे देहातों में गहरा आक्रोश फैला।
- फसलें नष्ट और महामारी (1918-1921): भारत के कई हिस्सों में फसलें खराब हुईं, जिससे भोजन का गंभीर अभाव पैदा हो गया। उसी समय इन्फ्लुएंजा महामारी (Influenza Epidemic) फैल गई। 1921 की जनगणना के अनुसार अकाल और महामारी के कारण 120 से 130 लाख (12-13 मिलियन) लोग काल के गाल में समा गए।
1.2 सत्याग्रह का विचार (The Idea of Satyagraha)
जनवरी 1915 में महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे, जहाँ उन्होंने एक नस्लभेदी शासन के विरुद्ध सत्याग्रह के अभिनव तरीके से सफलतापूर्वक जन-आंदोलन चलाया था।
भारत आगमन के बाद गांधीजी द्वारा संचालित तीन प्रारंभिक सफल सत्याग्रह:
| वर्ष | स्थान / आंदोलन | कारण | परिणाम |
|---|---|---|---|
| 1917 | चंपारण (बिहार) | तिनकठिया प्रणाली के तहत यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों को नील की अनिवार्य खेती हेतु बाध्य करना। | गांधीजी का भारत में पहला सफल सत्याग्रह; जांच आयोग गठित, किसानों को राहत मिली। |
| 1917 | खेड़ा (गुजरात) | फसल खराब होने और प्लेग महामारी के कारण किसान लगान चुकाने में असमर्थ थे और लगान माफी चाहते थे। | सरकार ने किसानों से गोपनीय समझौता किया और समर्थ किसानों से ही लगान लेने का आदेश दिया। |
| 1918 | अहमदाबाद (गुजरात) | सूती कपड़ा मिल मजदूरों और मालिकों के बीच प्लेग बोनस की समाप्ति और 35% वेतन वृद्धि का विवाद। | गांधीजी की पहली भूख हड़ताल; मिल मालिक मजदूरों को 35% मजदूरी वृद्धि देने पर सहमत हुए। |
1.3 रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919)
1919 में इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल ने भारतीय सदस्यों के भारी विरोध के बावजूद रॉलेट एक्ट (Rowlatt Act) को जल्दबाजी में पारित कर दिया:
- प्रावधान: इस कानून ने औपनिवेशिक सरकार को राजनीतिक गतिविधियों को कुचलने और राजनीतिक कैदियों को बिना मुकदमा चलाए 2 वर्ष तक जेल में बंद रखने का निरंकुश अधिकार दिया। इसे 'बिना वकील, बिना दलील, बिना अपील' का काला कानून कहा गया।
- रॉलेट सत्याग्रह: 6 अप्रैल 1919 को गांधीजी ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। दुकानों को बंद किया गया, रैलियाँ निकाली गईं।
- जलियांवाला बाग नरसंहार (13 अप्रैल 1919):
- अमृतसर में स्थानीय नेता डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल की गिरफ्तारी के विरोध में तथा वार्षिक बैसाखी मेले में भाग लेने के लिए जलियांवाला बाग मैदान में एक विशाल शांतिपूर्ण जनसमूह इकट्ठा हुआ था।
- शहर में मार्शल लॉ लागू था जिसकी जानकारी बाहर से आए ग्रामीणों को नहीं थी।
- जनरल डायर (General Dyer) हथियारबंद सैनिकों के साथ बाग में दाखिल हुआ, एकमात्र संकरे निकास द्वार को बंद किया और निहत्थी भीड़ पर बिना चेतावनी गोलियां चलवा दीं। सैकड़ों मासूम मारे गए और हजारों घायल हुए।
- डायर का घोषित उद्देश्य भारतीयों के मन में 'दहशत और विस्मय' (Terror and Awe) का भाव पैदा करना था।
- रवींद्रनाथ टैगोर ने इस अमानवीय कृत्य के विरोध में अपनी ब्रिटिश पदवी 'नाइटहुड' (Knighthood) त्याग दी। गांधीजी ने हिंसा फैलते देख रॉलेट सत्याग्रह वापस ले लिया।