1.1 फ्रेडरिक सॉरयू का स्वप्न (1848)
1848 में एक फ्रांसीसी कलाकार फ्रेडरिक सॉरयू (Frédéric Sorrieu) ने चार चित्रों की एक श्रृंखला बनाई। इनमें उसने अपने सपनों का एक संसार रचा जो उसके शब्दों में 'जनतांत्रिक और सामाजिक गणतंत्रों' (Democratic and Social Republics) से मिलकर बना था:
- स्वतंत्रता की प्रतिमा (Statue of Liberty): जुलूस में लोग एक महिला रूपक के सामने से गुजरते हैं जिसके एक हाथ में 'ज्ञानोदय की मशाल' (Torch of Enlightenment) और दूसरे हाथ में 'मनुष्य के अधिकारों का घोषणापत्र' (Charter of the Rights of Man) है।
- निरंकुश संस्थानों के अवशेष: प्रतिमा के सामने जमीन पर निरंकुश (Absolutist) राजशाही के प्रतीकों, मुकुटों और जंजीरों के टुकड़े बिखरे पड़े हैं।
- यूटोपिया (कल्पनादर्श): सॉरयू की दृष्टि में दुनिया के लोग विभिन्न राष्ट्रों के समूहों में बंटे हैं, जिनकी पहचान उनके कपड़ों, राष्ट्रीय झंडे और वेशभूषा से होती है। जुलूस का नेतृत्व संयुक्त राज्य अमेरिका और स्विट्जरलैंड कर रहे हैं जो उस समय तक राष्ट्र-राज्य बन चुके थे। उनके पीछे फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, पोलैंड, इंग्लैंड आदि हैं।
1.2 1789 की फ्रांसीसी क्रांति और सामूहिक पहचान का निर्माण
राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति 1789 में फ्रांसीसी क्रांति के साथ हुई। क्रांति ने संप्रभुता को राजतंत्र से निकालकर फ्रांसीसी नागरिकों की संस्था को हस्तांतरित कर दिया। क्रांतिकारियों ने फ्रांसीसी लोगों में एक सामूहिक पहचान (Collective Identity) की भावना पैदा करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए:
| सुधार / कदम | उद्देश्य एवं प्रभाव |
|---|---|
| पितृभूमि (La Patrie) और नागरिक (Le Citoyen) | संयुक्त समुदाय के विचार पर बल दिया जिसने संविधान के अंतर्गत समान अधिकार प्राप्त किए। |
| नया तिरंगा झंडा (Tricolour) | पुराने शाही ध्वज (Royal Standard) को हटाकर नए तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में चुना गया। |
| स्टेट्स जनरल का पुनर्गठन | सक्रिय नागरिकों द्वारा चुनी गई संस्था बनी और इसका नाम बदलकर नेशनल असेंबली (National Assembly) रखा गया। |
| नई स्तुतियाँ व शपथें | राष्ट्र के नाम पर नई राष्ट्रभक्ति पूर्ण स्तुतियाँ रची गईं, शपथें ली गईं और शहीदों का गुणगान हुआ। |
| केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था | सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनाए गए; आंतरिक आयात-निर्यात शुल्क समाप्त किए गए और नाप-तौल की एकसमान व्यवस्था लागू की गई। |
| पेरिस की फ्रेंच भाषा को प्रोत्साहन | क्षेत्रीय बोलियों को हतोत्साहित किया गया और फ्रेंच राष्ट्र की साझा भाषा बन गई। |
1.3 नेपोलियन की नागरिक संहिता (1804) - सिविल कोड
नेपोलियन बोनापार्ट ने यद्यपि फ्रांस में लोकतंत्र को नष्ट कर दिया, किंतु प्रशासनिक क्षेत्र में उसने क्रांतिकारी सिद्धांतों का समावेश किया ताकि संपूर्ण व्यवस्था अधिक तर्कसंगत और कुशल बन सके। 1804 की नागरिक संहिता (जिसे नेपोलियन कोड कहा जाता है) की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं:
- जन्म पर आधारित विशेषाधिकारों की समाप्ति: कानून के समक्ष सबकी समानता स्थापित की गई और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित बनाया गया।
- सामंती व्यवस्था का खात्मा: किसानों को भू-दासत्व (Serfdom) और जागीरदारी शुल्कों से मुक्ति दिलाई गई।
- शहरी गिल्ड प्रतिबंधों की समाप्ति: शहरों में कारीगरों की श्रेणियों (Guilds) के कठोर नियंत्रणों को हटा दिया गया।
- यातायात व संचार में सुधार: मानकीकृत नाप-तौल, राष्ट्रीय मुद्रा और व्यापारिक सुगमता प्रदान की गई।