जैव विविधता (Biodiversity): एडवर्ड विल्सन के अनुसार जैविक संगठन के सभी स्तरों पर उपस्थित विभिन्नता को जैव विविधता कहते हैं। इसके तीन प्रमुख स्तर हैं:
- 1. आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): एक ही प्रजाति के भीतर जीनों एवं एलीलों की विविधता।
• उदाहरण 1: हिमालय की विभिन्न श्रेणियों में उगने वाले औषधीय पादप Rauwolfia vomitoria (सर्पगंधा) में इसके सक्रिय रसायन रेसरपिन (Reserpine) की क्षमता एवं सांद्रता में आनुवंशिक भिन्नता पाई जाती है।
• उदाहरण 2: भारत में धान (चावल) की 50,000 से अधिक आनुवंशिक किस्में तथा आम की 1,000 से अधिक किस्में पाई जाती हैं। - 2. प्रजातीय विविधता (Species Diversity): किसी विशेष क्षेत्र में प्रजातियों की संख्या एवं समृद्धि।
• उदाहरण: पश्चिमी घाट (Western Ghats) में उभयचर जातियों (Amphibians) की विविधता पूर्वी घाट से कहीं अधिक है। - 3. पारिस्थितिकीय विविधता (Ecological Diversity): पारितंत्र के स्तर पर विविधता।
• उदाहरण: भारत में मरुस्थल, वर्षावन, मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियां (Coral reefs), आर्द्रभूमियां तथा अल्पाइन चरागाह पाए जाते हैं, अतः भारत की पारिस्थितिकीय विविधता स्कैंडिनेवियाई देश नॉर्वे (Norway) की तुलना में कहीं अधिक समृद्ध है।
पृथ्वी पर कुल कितनी जातियां हैं? (वैश्विक एवं भारतीय स्थिति):
- IUCN (2004) के अनुसार अब तक लगभग 1.5 मिलियन (15 लाख) जातियों का वैज्ञानिक वर्णन किया जा चुका है।
- वैज्ञानिक रॉबर्ट मे (Robert May) के वैश्विक आकलनों के अनुसार पृथ्वी पर कुल जातियों की संख्या लगभग 70 लाख (7 Million) है, जिसका अर्थ है कि अभी भी 78% से अधिक जातियों की खोज व नामकरण शेष है!
- जीवों का अनुपात: अब तक खोजी गई जातियों में 70% से अधिक जंतु हैं, जबकि पादपों (शैवाल, कवक, ब्रायोफाइट्स, जिम्नोस्पर्म, एंजियोस्पर्म) का हिस्सा केवल 22% है। जंतुओं में 70% से अधिक केवल कीट (Insects) हैं (अर्थात् पृथ्वी पर प्रत्येक 10 जंतुओं में से 7 कीट हैं!)। पृथ्वी पर कवकों (Fungi) की कुल जातियों की संख्या मछलियों, उभयचरों, सरीसृपों तथा स्तनधारियों के संयुक्त योग से भी अधिक है।
- भारत की स्थिति: भारत का भूभाग विश्व के कुल क्षेत्रफल का केवल 2.4% है, किंतु इसकी वैश्विक प्रजातीय विविधता में 8.1% की प्रभावशाली हिस्सेदारी है। इसी कारण भारत को विश्व के 12 महा-विविधता (Mega-diversity) वाले देशों में गिना जाता है। भारत में लगभग 45,000 पादप जातियां तथा इससे दोगुनी (लगभग 90,000) जंतु जातियां अभिलिखित की जा चुकी हैं।