ब्रह्मांड की उत्पत्ति लगभग 20 अरब (20 Billion) वर्ष पूर्व एक महाविस्फोट यानी बिग बैंग (Big Bang) के फलस्वरूप हुई। सौरमंडल में हमारी पृथ्वी की उत्पत्ति लगभग 4.5 अरब वर्ष पूर्व हुई। प्रारंभिक पृथ्वी पर कोई वायुमंडल नहीं था। ज्वालामुखियों से निकली जलवाष्प, मेथेन ($CH_4$), अमोनिया ($NH_3$) तथा कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) ने पृथ्वी को ढक लिया। उस समय का वायुमंडल अपचायक (Reducing) था क्योंकि इसमें स्वतंत्र ऑक्सीजन ($O_2$) अनुपस्थित थी। सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणों ने जल को तोड़कर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभक्त किया। हल्की हाइड्रोजन अंतरिक्ष में पलायन कर गई। धीरे-धीरे पृथ्वी ठंडी हुई और जलवाष्प के संघनन से मूसलाधार वर्षा हुई जिसने विशाल गड्ढों को भरकर महासागरों का निर्माण किया। पृथ्वी पर जीवन का प्रथम प्रकटीकरण लगभग 4 अरब वर्ष पूर्व (यानी उत्पत्ति के 50 करोड़ वर्ष बाद) हुआ।
ओपेरिन-हाल्डेन का रासायनिक विकास सिद्धांत (Chemical Evolution):
रूस के ए. आई. ओपेरिन तथा इंग्लैंड के जे. बी. एस. हाल्डेन ने स्वतंत्र रूप से प्रतिपादित किया कि जीवन की उत्पत्ति निर्जीव कार्बनिक अणुओं (अजैविक रसायनों) से हुई है (Chemical Evolution followed by Biological Evolution)। आदिम समुद्र में अकार्बनिक तत्वों से सरल कार्बनिक अणु (शर्करा, अमीनो अम्ल, ग्लिसरॉल) बने, जिन्होंने मिलकर जटिल बहुलक (प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल) बनाए। हाल्डेन ने इस कार्बनिक अणुओं से समृद्ध गरम समुद्र को 'तप्त तनु सूप' (Hot Dilute Soup) कहा।
स्टेनली मिलर एवं हेरोल्ड उरे का प्रयोग (Miller-Urey Experiment, 1953):
शिकागो विश्वविद्यालय के स्टेनली मिलर ने अपने गुरु हेरोल्ड उरे के मार्गदर्शन में प्रयोगशाला में आदिम पृथ्वी जैसी परिस्थितियां निर्मित कीं:
- स्पार्क डिस्चार्ज उपकरण: एक बड़े कांच के फ्लास्क में टंगस्टन के दो इलेक्ट्रोड लगाकर तड़ित-झंझावात (Lightning) के समान उच्च वोल्टेज (लगभग 75,000 वोल्ट) का विद्युत विसर्जन उत्पन्न किया गया।
- गैसों का मिश्रण: फ्लास्क में मेथेन ($CH_4$), अमोनिया ($NH_3$), तथा हाइड्रोजन ($H_2$) को $2 : 1 : 2$ के अनुपात में लिया गया तथा लगातार जलवाष्प ($H_2O$) प्रवाहित की गई।
- तापमान: उपकरण का तापमान लगभग $800^\circ\text{C}$ बनाए रखा गया।
- संघनित्र (Condenser): गैसों के गैसीय मिश्रण को ठंडा कर द्रव में बदलने हेतु जल संघनित्र लगाया गया।
प्रायोगिक परिणाम: एक सप्ताह तक उपकरण को निरंतर चलाने के बाद जब लाल रंग के तरल का रासायनिक विश्लेषण (क्रोमैटोग्राफी) किया गया, तो उसमें कई प्रकार के अमीनो अम्ल—ग्लाइसीन (Glycine), ऐलैनिन (Alanine), तथा एस्पार्टिक एसिड (Aspartic acid) प्रचुर मात्रा में पाए गए! अन्य वैज्ञानिकों ने ऐसे ही प्रयोगों में शर्करा, नाइट्रोजनी क्षारक, वसा अम्ल तथा वर्णक प्राप्त किए। इस प्रयोग ने ओपेरिन-हाल्डेन के रासायनिक विकास सिद्धांत को प्रायोगिक आधार पर अकाट्य सिद्ध कर दिया।