कृषि में उत्पादन बढ़ाने हेतु हरित क्रांति ने रासायनिक खादों व कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग किया, जिसके गंभीर पर्यावरणीय दुष्परिणाम हुए। इसके विकल्प के रूप में आनुवंशिकतः रूपांतरित (GM) फसलें विकसित की गईं, जिनके पौधे, कवक या जीवाणु के जीनों को आनुवंशिक इंजीनियरिंग द्वारा बदल दिया गया है।
GM पादपों के प्रमुख लाभ:
- अजैविक प्रतिबलों (ठंड, सूखा, लवणता, अत्यधिक ताप) के प्रति अधिक सहनशीलता।
- रासायनिक पीड़कनाशकों पर निर्भरता में भारी कमी (कीट-प्रतिरोधी फसलें)।
- फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान (Post-harvest losses) में कमी।
- पौधों द्वारा मृदा से खनिज उपयोग की क्षमता में वृद्धि (मृदा की उर्वरा शक्ति का ह्रास रुकता है)।
- पोषण स्तर में वृद्धि: उदाहरण—स्वर्णिम धान (Golden Rice), जो विटामिन 'ए' ($\beta$-कैरोटीन) से प्रचुर आनुवंशिकतः रूपांतरित चावल है।
बीटी-कपास (Bt-Cotton) एवं बीटी-विष की क्रियाविधि:
मृदा जीवाणु Bacillus thuringiensis (Bt) एक विशेष विषैला प्रोटीन बनाता है जो विशिष्ट कीटों—जैसे लेपिडॉप्टेरा (तम्बाकू की कली का कीड़ा, सैनिक कीड़ा), कोलियोप्टेरा (भृंग), तथा डिप्टेरा (मक्खी, मच्छर) को मार देता है।
- निष्क्रिय प्रोविषक (Inactive Protoxin): बीटी जीवाणु स्वयं इस विष से नहीं मरता क्योंकि जीवाणु के भीतर यह विष प्रोटीन रवे (Crystals) के रूप में निष्क्रिय प्राकविष (Inactive Protoxin) अवस्था में रहता है।
- सक्रियण की क्रियाविधि: जब कोई कीट इस पादप ऊतक को खाता है, तो कीट की मध्य आंत (Midgut) के क्षारीय pH (Alkaline pH) के कारण यह अघुलनशील रवा घुल जाता है और सक्रिय विष में बदल जाता है।
- सक्रिय विष मध्य आंत की उपकला कोशिकाओं (Epithelial cells) की सतह से जुड़कर उनमें छिद्र (Pores) बना देता है। कोशिकाओं में जल भरने से वे फूलकर फट जाती हैं और कीट की आंत में लयन होने से कीट की मृत्यु हो जाती है।
- क्राई जीन (Cry Genes): यह विष cry नामक जीन द्वारा कूटबद्ध होता है:
• $cryIAc$ तथा $cryIIAb$: कपास के मुकुल कृमि (Cotton Bollworms) को नियंत्रित करते हैं।
• $cryIAb$: मक्का छेदक (Corn Borer) को नियंत्रित करता है।
पीड़क-प्रतिरोधी पौधे एवं आरएनए अंतरक्षेप (RNA Interference - RNAi):
सूत्रकृमि (नेमाटोड) Meloidogyne incognita तम्बाकू के पौधों की जड़ों को संक्रमित करके पौधों में 'गांठें' (Root-knots) बना देता है, जिससे पैदावार में भारी कमी आती है। इसकी रोकथाम हेतु आरएनए अंतरक्षेप (RNAi) तकनीक का उपयोग किया गया:
- सिद्धांत: RNAi सभी यूकेरियोटिक जीवों में कोशिकीय सुरक्षा (Cellular Defense) की एक प्राकृतिक विधि है। इसमें एक विशिष्ट mRNA के साथ पूरक द्विरज्जुक आरएनए (dsRNA) के जुड़ जाने से उस mRNA का अनुवाद संदमित (साइलेंस / मौन) हो जाता है, जिससे प्रोटीन नहीं बन पाता।
- तकनीक: Agrobacterium संवाहकों का उपयोग करके सूत्रकृमि-विशिष्ट जीनों को तम्बाकू के पौधे में इस प्रकार प्रविष्ट कराया गया कि वे पोषी पौधे के भीतर अर्थ (Sense) तथा प्रति-अर्थ (Anti-sense) दोनों प्रकार के आरएनए बनाते हैं।
- ये दोनों आरएनए परस्पर पूरक होने के कारण जुड़कर द्विरज्जुक आरएनए (dsRNA) बना लेते हैं, जो RNAi प्रक्रिया प्रारंभ करता है।
- जब सूत्रकृमि पौधे की जड़ों को खाता है, तो यह dsRNA सूत्रकृमि के शरीर में पहुंचकर उसके महत्वपूर्ण mRNA को मौन (Silence) कर देता है। परिणामस्वरूप सूत्रकृमि अपनी आवश्यक प्रोटीन नहीं बना पाता और ट्रांसजेनिक पौधे में जीवित नहीं रह पाता। इस प्रकार पौधा सुरक्षित रहता है।