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JAC • Class XII • Biology • Ch 9
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Biotechnology: Principles and Processes

जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) आधुनिक विज्ञान की वह क्रांतिकारी एवं अंतःविषयक (Interdisciplinary) शाखा है, जिसके अंतर्गत सजीवों (विशेषकर सूक्ष्मजीवों, पादपों एवं जंतु कोशिकाओं) अथवा उनके एंजाइमों का उपयोग करके मानव कल्याण हेतु उपयोगी उत्पादों एवं प्रक्रमों का औद्योगिक स्तर पर निर्माण किया जाता है। यूरोपीय जैव प्रौद्योगिकी संघ (EFB - European Federation of Biotechnology) के अनुसार: 'नए उत्पादों एवं सेवाओं के लिए प्राकृतिक विज्ञान तथा जीवों, कोशिकाओं, उनके अंगों व आणविक अनुरूपों का समायोजन ही जैव प्रौद्योगिकी है।' 1972 में स्टेनली कोहेन (Stanley Cohen) तथा हर्बर्ट बोयर (Herbert Boyer) ने Salmonella typhimurium के प्लाज्मिड से प्रतिजैविक-प्रतिरोधी जीन को काटकर प्रथम पुनर्योगज डीएनए (Recombinant DNA - rDNA) का सफल निर्माण कर आनुवंशिक इंजीनियरिंग के एक नए युग का सूत्रपात किया। प्रस्तुत अध्याय पुनर्योगज डीएनए प्रौद्योगिकी के संपूर्ण वैज्ञानिक सिद्धांतों, आणविक औजारों तथा तकनीकी चरणों का गहन विवरण प्रस्तुत करता है: 1. जैव प्रौद्योगिकी के मूलभूत सिद्धांत: आनुवंशिक इंजीनियरिंग (Genetic Engineering / Recombinant DNA Technology) तथा रासायनिक इंजीनियरिंग प्रक्रम (Bioprocess Engineering - विसंक्रमित वातावरण में संवर्धन)। 2. पुनर्योगज डीएनए प्रौद्योगिकी के साधन (Tools of rDNA Technology): आणविक कैंचियां अर्थात् प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज (Restriction Endonucleases - EcoRI, Hind II), पैलिंड्रोमिक डीएनए अनुक्रम ($5'-GAATTC-3'$), चिपचिपे सिरे (Sticky ends), तथा डीएनए लाइगेज (आणविक गोंद)। 3. क्लोनिंग संवाहक (Cloning Vectors): प्लाज्मिड pBR322 के लक्षण—प्रतिकृतियन का उद्गम (Ori), वरणयोग्य चिह्नक ($amp^R, tet^R$), निवेसी निष्क्रियता (Insertional Inactivation) एवं नीले-सफेद कालोनियों का चयन ($\beta$-गैलेक्टोसिडेस / X-gal); पादपों में Agrobacterium tumefaciens का Ti-प्लाज्मिड तथा जंतुओं में डिसआर्म्ड रेट्रोवायरस। 4. सक्षम पोषी एवं प्रत्यक्ष जीन स्थानांतरण: सक्षम कोशिका निर्माण ($CaCl_2$ उपचार एवं हीट शॉक $42^\circ\text{C}$), माइक्रो-इंजेक्सन (सूक्ष्म अंतःक्षेपण) तथा जीन गन / बायोलिस्टिक्स (स्वर्ण/टंगस्टन कण)। 5. पुनर्योगज डीएनए प्रौद्योगिकी के प्रक्रम (Processes of rDNA Technology): डीएनए का विलगन एवं शीतित एथेनॉल द्वारा अवक्षेपण (Spooling), एगरोज जेल वैद्युतकणसंचलन (Ethidium Bromide, UV प्रकाश व क्षालन / Elution), पॉलीमरेज शृंखला अभिक्रिया (PCR - Denaturation, Annealing, Extension एवं थर्मोस्टेबल Taq डीएनए पॉलीमरेज), बायोरिएक्टर (लोडित व वातित विलोड़ित हौज बायोरिएक्टर), तथा अनुप्रवाह संसाधन (Downstream Processing)।

आणविक कैंचियों से डीएनए को काटना और 1 बूंद रक्त से 1 अरब जीन की प्रतियां बनाना: आधुनिक युग की सबसे बड़ी जैविक क्रांति!

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि किसी पौधे में जुगनू की चमकने वाली जीन डालकर उसे रात में चमकने वाला प्राकृतिक स्ट्रीट लैंप बनाया जा सकता है? या मनुष्य के इंसुलिन की जीन को एक साधारण बैक्टीरिया में डालकर लाखों डायबिटिक मरीजों के लिए दवा बनाई जा सकती है? यह कोई विज्ञान कथा नहीं, बल्कि 'पुनर्योगज डीएनए तकनीक' का वास्तविक चमत्कार है! वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया के भीतर से ऐसी सूक्ष्म रासायनिक कैंचियां खोजी हैं जो डीएनए के 3 अरब अक्षरों में से अपने मनपसंद 6 अक्षरों के क्रम को ढूंढकर उसी जगह से नैनोमीटर की सटीकता से काट देती हैं! और 1985 में कैरी मुलिस ने पीसीआर (PCR) तकनीक खोजकर वह कारनामा कर दिखाया जिससे अपराध स्थल पर मिली डीएनए की एक अदृश्य नन्ही बूंद को सिर्फ कुछ ही घंटों में 1,00,00,00,000 (एक अरब) गुना बढ़ाकर अदालत में पक्के सबूत के रूप में पेश किया जा सकता है!

Why This Chapter Matters

JAC बोर्ड, CBSE तथा NEET-UG में यह अध्याय जैव-प्रौद्योगिकी इकाई का सबसे तकनीकी एवं अवधारणात्मक अध्याय (6 से 8 अंक) है: 1. 5-अंकीय सचित्र दीर्घ उत्तरीय प्रश्न: प्लाज्मिड pBR322 का नामांकित चित्र एवं इसके घटकों (Ori, ampR, tetR) का कार्य, अथवा पॉलीमरेज शृंखला अभिक्रिया (PCR) के तीनों चरणों का सचित्र विवरण, अथवा बायोरिएक्टर की संरचना व अनुप्रवाह संसाधन। 2. 3-अंकीय क्रियाविधि आधारित प्रश्न: प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज (EcoRI) द्वारा डीएनए काटने की क्रिया व चिपचिपे सिरे, अथवा एगरोज जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस एवं क्षालन (Elution)। 3. NEET-UG के सर्वाधिक पसंदीदा प्रश्न: पैलिंड्रोमिक अनुक्रम, टैक पॉलीमरेज (Thermus aquaticus), निवेसी निष्क्रियता, पादपों का प्राकृतिक जेनेटिक इंजीनियर (Agrobacterium का Ti-प्लाज्मिड), तथा डीएनए स्पूलिंग पर हर साल 3–4 प्रश्न पूछे जाते हैं।

Before You Begin (Prerequisites)

  • डीएनए की द्विकुंडलिनी संरचना, नाइट्रोजनी क्षारक युग्मन ($A=T, G\equiv C$) तथा फॉस्फोडाइएस्टर बंध।
  • जीवाणु कोशिका की संरचना, प्लाज्मिड (अतिरिक्त गुणसूत्रीय वलयाकार डीएनए) की अवधारणा।
  • एंजाइमों की क्रियाविधि एवं तापमान संवेदनशीलता।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • पुनर्योगज डीएनए (rDNA) निर्माण के मूलभूत चरणों और स्टेनली कोहेन व हर्बर्ट बोयर के ऐतिहासिक प्रयोग की व्याख्या करना।
  • प्रतिबंधन एंजाइमों के नामकरण के नियम, पैलिंड्रोम पहचान एवं चिपचिपे सिरों के निर्माण का सचित्र निरूपण करना।
  • प्लाज्मिड pBR322 के वरणयोग्य चिन्हकों ($amp^R, tet^R$) तथा निवेसी निष्क्रियता (नीले-सफेद चयन) के सिद्धांत को स्पष्ट करना।
  • एगरोज जेल वैद्युतकणसंचलन तथा एथीडियम ब्रोमाइड/यूवी प्रकाश द्वारा डीएनए पट्टियों के दर्शन व क्षालन का वर्णन करना।
  • पीसीआर (PCR) के तीन चरणों—विकृतीकरण, तापानुशीलन व विस्तार—तथा बायोरिएक्टर व अनुप्रवाह संसाधन के महत्व का विश्लेषण करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. जैव प्रौद्योगिकी के सिद्धांत एवं...
2 2. पुनर्योगज डीएनए प्रौद्योगिकी के...
3 3. सक्षम पोषी एवं प्रत्यक्ष जीन स्थ...
4 4. पुनर्योगज डीएनए प्रौद्योगिकी के...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. जैव प्रौद्योगिकी के सिद्धांत एवं पुनर्योगज डीएनए (rDNA) का निर्माण

आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के दो प्रमुख मूल सिद्धांत हैं:

  1. आनुवंशिक इंजीनियरिंग (Genetic Engineering): ऐसी तकनीकें जिनके द्वारा आनुवंशिक पदार्थ (DNA एवं RNA) के रसायन में परिवर्तन करके इसे पोषी जीवों में प्रविष्ट कराया जाता है और इसके फलस्वरूप पोषी के लक्षणप्ररूप (Phenotype) में वांछित परिवर्तन लाया जाता है। पुनर्योगज डीएनए (rDNA) का निर्माण, जीन क्लोनिंग तथा जीन स्थानांतरण इसके तीन मूलभूत चरण हैं।
  2. जैव प्रक्रम इंजीनियरिंग (Bioprocess Engineering): संदूषण-रहित (रोगाणु-मुक्त / विसंक्रमित) वातावरण बनाए रखकर केवल वांछित सूक्ष्मजीवों या यूकेरियोटिक कोशिकाओं की भारी मात्रा में वृद्धि कराना, जिससे प्रतिजैविकों, टीकों, एंजाइमों आदि का औद्योगिक पैमाने पर उत्पादन संभव हो सके।

प्रथम पुनर्योगज डीएनए का निर्माण (1972):

स्टेनली कोहेन (Stanley Cohen) तथा हर्बर्ट बोयर (Herbert Boyer) ने 1972 में प्रथम पुनर्योगज डीएनए बनाया:

  • उन्होंने जीवाणु Salmonella typhimurium के प्राकृतिक प्लाज्मिड से 'प्रतिजैविक-प्रतिरोधी जीन' (Antibiotic resistance gene) को प्रतिबंधन एंजाइम (आणविक कैंची) द्वारा काटकर अलग किया।
  • इस पृथक किए गए जीन को एक संवाहक प्लाज्मिड (Vector DNA) के साथ एंजाइम डीएनए लाइगेज (DNA Ligase) की सहायता से जोड़ दिया। इससे एक नया संकर डीएनए बना जिसे पुनर्योगज डीएनए (Recombinant DNA) कहते हैं।
  • जब इस पुनर्योगज डीएनए को Escherichia coli (E. coli) जीवाणु में स्थानांतरित किया गया, तो डीएनए पॉलीमरेज की सहायता से इसकी अनेक समान प्रतियां बन गईं। इसे जीन क्लोनिंग (Gene Cloning) कहते हैं।

2. पुनर्योगज डीएनए प्रौद्योगिकी के साधन (आणविक कैंचियां व संवाहक)

पुनर्योगज डीएनए तकनीक हेतु चार प्रमुख आणविक साधनों की आवश्यकता होती है:

1. प्रतिबंधन एंजाइम (Restriction Enzymes - आणविक कैंचियां):

ये न्यूक्लिएज एंजाइम समूह के सदस्य हैं। 1963 में E. coli में जीवाणुभोजी की वृद्धि को रोकने वाले दो एंजाइम खोजे गए—एक जो डीएनए में मिथाइल समूह जोड़ता था, तथा दूसरा जो डीएनए को काटता था। डीएनए को काटने वाले एंजाइम को 'प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज' कहा गया।

  • प्रथम प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज: Hind II था (स्मिथ, नाथन्स एवं आर्बर द्वारा पृथक)। यह डीएनए को 6 क्षारक युग्मों के एक विशिष्ट अनुक्रम पर काटता है। आज 900 से अधिक प्रतिबंधन एंजाइम 230 से अधिक जीवाणु प्रभेदों से पृथक किए जा चुके हैं।
  • नामकरण का नियम:
    • प्रथम अक्षर जीवाणु के वंश (Genus) से लिया जाता है (राजधानी अक्षर, जैसे Escherichia से 'E')।
    • अगले दो अक्षर जीवाणु की जाति (Species) से लिए जाते हैं (जैसे coli से 'co')।
    • चौथा अक्षर प्रभेद (Strain) को दर्शाता है (जैसे RY 13 प्रभेद से 'R')।
    • अंत में रोमन अंक उस जीवाणु से उस एंजाइम के पृथक्करण के क्रम को दर्शाता है (उदा. EcoRI)।
  • पैलिंड्रोमिक डीएनए अनुक्रम (Palindromic Sequences): प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज डीएनए में विशिष्ट पैलिंड्रोम को पहचानते हैं। पैलिंड्रोम अक्षरों का वह समूह है जो दोनों दिशाओं (आगे और पीछे) से पढ़ने पर एक समान पढ़ा जाता है (जैसे 'MALAYALAM')। डीएनए में पैलिंड्रोम क्षारक युग्मों का वह क्रम है जो दोनों रज्जुकों पर समान ध्रुवता ($5' \rightarrow 3'$ अथवा $3' \rightarrow 5'$) में पढ़ने पर एक जैसा होता है।
    EcoRI का पैलिंड्रोम अनुक्रम:
    $$5' - \text{G } \downarrow \text{ A A T T C} - 3'$$
    $$3' - \text{C T T A A } \uparrow \text{ G} - 5'$$
  • चिपचिपे सिरे (Sticky Ends): EcoRI पैलिंड्रोमिक स्थल के केंद्र से थोड़ी दूर, किंतु दोनों रज्जुकों में समान दो क्षारकों (G और A) के बीच कट लगाता है। इसके परिणामस्वरूप सिरों पर एकल रज्जुक का छोटा फैला हुआ भाग रह जाता है जिसे चिपचिपे सिरे (Sticky ends) कहते हैं। ये सिरे अपने पूरक क्षारकों के साथ आसानी से हाइड्रोजन बंध बना लेते हैं, जिससे डीएनए लाइगेज द्वारा इनका जुड़ना अत्यधिक सुगम हो जाता है।

2. क्लोनिंग संवाहक (Cloning Vectors):

संवाहक (Vectors) वे डीएनए अणु होते हैं जो विजातीय डीएनए (विदेशी जीन) को पोषी कोशिका में ले जाकर उसकी क्लोनिंग कराते हैं। प्लाज्मिड एवं जीवाणुभोजी सर्वोत्तम संवाहक हैं।

एक प्रारूपिक क्लोनिंग संवाहक (pBR322) की प्रमुख विशेषताएं:

  • 1. प्रतिकृतियन की उत्पत्ति (Ori - Origin of Replication): यह वह विशिष्ट डीएनए अनुक्रम है जहाँ से प्रतिकृतियन प्रारंभ होता है। कोई भी विजातीय डीएनए जब इससे जुड़ता है तो पोषी कोशिका के भीतर प्रतिकृति कर सकता है। Ori संवाहक से जुड़े डीएनए की प्रतियों की संख्या (Copy number) का भी नियंत्रण करता है।
  • 2. वरणयोग्य चिह्नक (Selectable Marker): यह अपुनर्योगजों (Non-transformants) की पहचान कर उन्हें नष्ट करता है और केवल पुनर्योगज (Transformants) कोशिकाओं की वृद्धि की अनुमति देता है। उदा. E. coli में एम्पीसिलीन प्रतिरोधी जीन ($amp^R$) तथा टेट्रासाइक्लिन प्रतिरोधी जीन ($tet^R$) अत्यंत उपयोगी वरणयोग्य चिह्नक हैं।
  • 3. क्लोनिंग स्थल (Cloning Sites): संवाहक में किसी प्रतिबंधन एंजाइम का केवल एकल (Unique) पहचान स्थल होना चाहिए। एक से अधिक स्थल होने पर संवाहक के कई टुकड़े हो जाएंगे। pBR322 में $amp^R$ भाग में Pst I, Pvu I स्थल हैं तथा $tet^R$ भाग में BamH I, Sal I स्थल हैं।
  • 4. निवेसी निष्क्रियता (Insertional Inactivation): जब विजातीय डीएनए को किसी प्रतिरोधी जीन (जैसे $tet^R$ के BamH I स्थल) में जोड़ा जाता है, तो टेट्रासाइक्लिन प्रतिरोधकता समाप्त (निष्क्रिय) हो जाती है। अतः पुनर्योगज एम्पीसिलीन माध्यम में तो उगते हैं किंतु टेट्रासाइक्लिन माध्यम में मर जाते हैं।
    नीले-सफेद कालोनियों का चयन (Blue-White Screening): प्रतिजैविक प्लेटिंग की जटिलता से बचने हेतु विजातीय जीन को $\beta$-गैलेक्टोसिडेस एंजाइम के जीन में प्रविष्ट कराया जाता है। अपुनर्योगज जीवाणु क्रियाधार (X-gal) पर नीले रंग की कालोनियां बनाते हैं; जबकि पुनर्योगज जीवाणुओं में जीन के निष्क्रिय होने से रंगहीन/सफेद कालोनियां बनती हैं जिन्हें आसानी से पहचान लिया जाता है।
  • पादपों एवं जंतुओं में जीन क्लोनिंग संवाहक:
    • पादपों में: Agrobacterium tumefaciens (मृदा जीवाणु) को 'पादपों का प्राकृतिक आनुवंशिक इंजीनियर' कहा जाता है। इसका ट्यूमर-प्रेरक Ti-प्लाज्मिड (Tumor-inducing plasmid) अहानिकर (Disarmed) बनाकर द्विबीजपत्री पौधों में मनचाहे जीन स्थानांतरित करने हेतु प्रयुक्त होता है।
    • जंतुओं में: हानिकारक पश्चविषाणुओं (Retroviruses) को रोगजनकता-रहित (Disarmed) बनाकर जंतु कोशिकाओं में उपयोगी जीन पहुंचाने हेतु संवाहक के रूप में प्रयोग किया जाता है।

3. सक्षम पोषी एवं प्रत्यक्ष जीन स्थानांतरण विधियां

डीएनए एक जल-स्नेही (Hydrophilic) अणु है, अतः यह कोशिका झिल्ली (फॉस्फोलिपिड लिपिड-द्विपरत) के आर-पार स्वतः नहीं जा सकता। पोषी जीवाणु को डीएनए ग्रहण करने हेतु सक्षम (Competent) बनाना अनिवार्य है:

1. रासायनिक विधि (सक्षम कोशिका निर्माण):

जीवाणु कोशिकाओं को एक विशिष्ट सांद्रता वाले द्विसंयोजी धनायन जैसे कैल्शियम ($Ca^{2+}$) से उपचारित किया जाता है। कैल्शियम आयन जीवाणु भित्ति के छिद्रों से डीएनए के प्रवेश की दक्षता बढ़ाते हैं। इसके बाद कोशिकाओं को पहले बर्फ पर (Ice), फिर क्षणिक रूप से $42^\circ\text{C}$ पर (ऊष्मा आघात / Heat Shock), और पुनः बर्फ पर रखा जाता है। इस तापीय आघात से पुनर्योगज डीएनए जीवाणु के भीतर प्रविष्ट हो जाता है।

2. प्रत्यक्ष / संवाहक-मुक्त जीन स्थानांतरण (Direct Gene Transfer Methods):

  • सूक्ष्म अंतःक्षेपण (Micro-injection): इसमें एक अत्यंत सूक्ष्म कांच की सुई (माइक्रोपिपेट) द्वारा पुनर्योगज डीएनए को सीधे जंतु कोशिका के केंद्रक के भीतर अंतःक्षेपित कर दिया जाता है।
  • जीन गन अथवा बायोलिस्टिक्स (Biolistics / Gene Gun): यह पादप कोशिकाओं हेतु विशेष रूप से उपयुक्त विधि है। इसमें स्वर्ण (Gold) अथवा टंगस्टन (Tungsten) की सूक्ष्म गोलियों (Micro-particles, व्यास 1-2 $\mu m$) पर डीएनए का लेप करके उन्हें उच्च वेग से पादप कोशिकाओं पर बमबारी (दागा) की जाती है।

4. पुनर्योगज डीएनए प्रौद्योगिकी के तकनीकी चरण (Isolation, Electrophoresis, PCR, Bioreactors)

rDNA तकनीक कई सुनियोजित चरणों का एक जटिल प्रक्रम है:

चरण 1: आनुवंशिक पदार्थ (डीएनए) का विलगन (Isolation of DNA):

कोशिका भित्ति को तोड़ने हेतु विशिष्ट एंजाइम प्रयुक्त होते हैं: जीवाणु हेतु लाइसोजाइम, पादप कोशिका हेतु सेल्युलेज, तथा कवक हेतु काइटिनेज। आरएनए को राइबोन्यूक्लिएज द्वारा तथा प्रोटीन को प्रोटीऐज द्वारा पचाया जाता है। अंत में अत्यधिक शीतित एथेनॉल (Chilled Ethanol) मिलाने पर शुद्ध डीएनए महीन धागों के रूप में अवक्षेपित हो जाता है। इन धागों को चम्मच या छड़ द्वारा बाहर निकालना स्पूलिंग (Spooling) कहलाता है।

चरण 2: एगरोज जेल वैद्युतकणसंचलन (Agarose Gel Electrophoresis):

प्रतिबंधन एंजाइम द्वारा काटे गए डीएनए खंडों को उनके आकार अनुसार पृथक करने की सर्वमान्य विधि:

  • डीएनए अणु ऋणावेशित (Negatively charged - फॉस्फेट समूह के कारण) होते हैं, अतः विद्युत क्षेत्र में वे एनोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड) की ओर गति करते हैं।
  • समुद्री घास (Seaweed) से प्राप्त प्राकृतिक बहुलक एगरोज जेल छन्नी (Sieving effect) का कार्य करता है। डीएनए का खंड जितना छोटा होगा, वह जेल के छिद्रों से उतनी ही अधिक दूर तक गति करेगा।
  • डीएनए खंड रंगहीन होते हैं। इन्हें देखने हेतु जेल को एथीडियम ब्रोमाइड (Ethidium Bromide - EtBr) से अभिरंजित किया जाता है तथा पराबैंगनी (UV) प्रकाश के संपर्क में लाया जाता है। इससे डीएनए चमकीले नारंगी रंग की पट्टियों (Bright orange bands) के रूप में दिखाई देते हैं।
  • क्षालन (Elution): एगरोज जेल से वांछित डीएनए बैंड को काटकर निकालना तथा जेल के टुकड़े से डीएनए को निष्कर्षित करना क्षालन कहलाता है।

चरण 3: पॉलीमरेज शृंखला अभिक्रिया (Polymerase Chain Reaction - PCR):

1985 में कैरी मुलिस (Kary Mullis) द्वारा विकसित। यह इन विट्रो (In vitro - परखनली में) विधि है जिसके द्वारा डीएनए के किसी विशिष्ट खंड की अरबों प्रतियों का कुछ ही घंटों में प्रवर्धन (Amplification) किया जाता है। इसके तीन मुख्य चरण हैं:

  1. विकृतीकरण (Denaturation): उच्च तापमान (लगभग $94^\circ\text{C}$ से $96^\circ\text{C}$) पर डीएनए को गर्म किया जाता है, जिससे दोनों रज्जुकों के बीच के हाइड्रोजन बंध टूट जाते हैं और दोनों रज्जुक अलग-अलग हो जाते हैं।
  2. तापानुशीलन (Annealing): तापमान को घटाकर लगभग $50^\circ\text{C}$ से $60^\circ\text{C}$ किया जाता है। दो सेट छोटे रासायनिक संश्लेषित ऑलिगोन्यूक्लियोटाइड प्राइमर्स (Primers) दोनों अलग हुए सांचा रज्जुकों के 3'-सिरों पर जुड़ते हैं।
  3. प्रसार / विस्तार (Extension): तापमान $72^\circ\text{C}$ किया जाता है। यहाँ एक विशेष थर्मोस्टेबल (उष्णता-सहनशील) एंजाइम Taq डीएनए पॉलीमरेज (जो गर्म जल के तापीय जीवाणु Thermus aquaticus से निकाला जाता है) माध्यम में उपस्थित डीऑक्सीन्यूक्लियोटाइड्स (dNTPs) का उपयोग कर प्राइमर को आगे बढ़ाकर नए पूरक रज्जुक का संश्लेषण करता है।

यदि यह चक्र 30 बार दोहराया जाए, तो डीएनए खंड का 1 अरब गुना ($10^9$ गुना) प्रवर्धन हो जाता है!

चरण 4: बायोरिएक्टर एवं अनुप्रवाह संसाधन (Bioreactors & Downstream Processing):

  • बायोरिएक्टर (Bioreactors): 100 से 1000 लीटर क्षमता वाले विशाल बर्तन जिनमें सूक्ष्मजीवों, पादप या जंतु कोशिकाओं को वांछित उत्पाद प्राप्त करने हेतु इष्टतम परिस्थितियों (तापमान, pH, क्रियाधार, लवण, विटामिन, ऑक्सीजन) में संवर्धित किया जाता है। प्रायः विलोड़ित हौज बायोरिएक्टर (Stirred-tank bioreactor) प्रयुक्त होता है जिसमें एक विलोड़क (Agitator) लगा होता है जो पूरे बर्तन में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों का समान मिश्रण सुनिश्चित करता है।
  • अनुप्रवाह संसाधन (Downstream Processing): जैव-संश्लेषण के बाद उत्पाद को बाजार में भेजने से पूर्व किए जाने वाले पृथक्करण (Separation) एवं शोधन (Purification) के प्रक्रमों को सामूहिक रूप से अनुप्रवाह संसाधन कहते हैं। इसमें परिरक्षकों को जोड़ना, गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षण (QC) तथा औषधियों के मामले में कड़े नैदानिक परीक्षण (Clinical trials) शामिल होते हैं।

Key Biological Concepts, Pathways & Definitions

EcoRI पैलिंड्रोमिक पहचान अनुक्रम
5' - G A A T T C - 3' | 3' - C T T A A G - 5'
G और A के बीच कट लगाकर चिपचिपे सिरे (Sticky ends) बनाता है
पीसीआर प्रवर्धन गणना सूत्र (PCR Amplification)
डीएनए प्रतियों की संख्या = 2ⁿ (जहाँ n चक्रों की संख्या है)
30 चक्रों (n=30) के बाद 2³⁰ ≈ 1.07 × 10⁹ (लगभग 1 अरब प्रतियां)
पीसीआर के तीन तापीय चरण
  1. विकृतीकरण (~94°C) → 2. तापानुशीलन (~50-60°C) → 3. प्रसार (72°C, Taq Pol)
Taq डीएनए पॉलीमरेज का स्रोत: Thermus aquaticus (थर्मोस्टेबल)
कोशिका भित्ति पाचक एंजाइम
जीवाणु = लाइसोजाइम | पादप = सेल्युलेज | कवक = काइटिनेज
डीएनए अवक्षेपण हेतु: चिल्ड एथेनॉल (Chilled ethanol, Spooling)

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
पॉलीमरेज शृंखला अभिक्रिया (PCR) के तीनों चरणों का उनके तापमान तथा एंजाइम सहित सचित्र अथवा चरणबद्ध विस्तृत वर्णन कीजिए। इसमें 'Taq पॉलीमरेज' का क्या विशिष्ट महत्व है?
Step-by-Step Solution:

उत्तर:

  1. पीसीआर (PCR) के तीन चरण:
    • चरण 1: विकृतीकरण (Denaturation - $94^\circ\text{C}$ से $96^\circ\text{C}$): द्विरज्जुक डीएनए को उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है, जिससे दोनों रज्जुकों के बीच के हाइड्रोजन बंध टूट जाते हैं और वे दो एकल रज्जुकों (Templates) में अलग हो जाते हैं।
    • चरण 2: तापानुशीलन (Annealing - $50^\circ\text{C}$ से $60^\circ\text{C}$): तापमान को कम किया जाता है जिससे दो प्राइमर्स (छोटे रासायनिक संश्लेषित ऑलिगोन्यूक्लियोटाइड्स) दोनों सांचा रज्जुकों के 3'-सिरों पर पूरक क्षारकों से जुड़ जाते हैं।
    • चरण 3: विस्तार / प्रसार (Extension - $72^\circ\text{C}$): एंजाइम Taq डीएनए पॉलीमरेज माध्यम में उपस्थित dNTPs का उपयोग कर प्राइमर्स के 3'-OH सिरे पर नए न्यूक्लियोटाइड्स जोड़कर नए पूरक रज्जुक का $5' \rightarrow 3'$ दिशा में संश्लेषण करता है।
  2. Taq पॉलीमरेज का विशिष्ट महत्व: सामान्य डीएनए पॉलीमरेज विकृतीकरण के उच्च तापमान ($94^\circ\text{C}$) पर विकृत (नष्ट) हो जाते हैं। Taq पॉलीमरेज एक थर्मोफिलिक (गर्म जल के तापीय झरनों में रहने वाले) जीवाणु Thermus aquaticus से पृथक किया जाता है, जो अत्यधिक उच्च तापमान ($95^\circ\text{C}$ तक) पर भी सक्रिय और स्थिर बना रहता है। अतः प्रत्येक चक्र में नया एंजाइम डालने की आवश्यकता नहीं होती और पीसीआर एक स्वचालित मशीन (थर्मोसाइक्लर) में निर्बाध रूप से संपन्न होता है।
अंक योजना (Marking Scheme): तीनों चरणों (विकृतीकरण, तापानुशीलन, प्रसार) के तापमान व कार्य (3 अंक) + Taq पॉलीमरेज व Thermus aquaticus का महत्व (1.5 अंक) = कुल 4.5 अंक।
Example 2
प्लाज्मिड pBR322 का नामांकित चित्र बनाइए तथा इसके 'प्रतिकृतियन के उद्गम' (Ori) एवं 'वरणयोग्य चिह्नक' ($amp^R, tet^R$) के कार्यों की व्याख्या कीजिए।
Step-by-Step Solution:

उत्तर:

  1. pBR322 की संरचनात्मक विशेषताएं:
    यह E. coli का एक कृत्रिम क्लोनिंग संवाहक है। इसमें Ori, Rop, दो प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन ($amp^R$ तथा $tet^R$), एवं विशिष्ट प्रतिबंधन स्थल (EcoRI, ClaI, HindIII, BamHI, SalI, PvuI, PstI, PvuII) होते हैं।
  2. प्रतिकृतियन का उद्गम (Ori - Origin of Replication):
    यह डीएनए का वह विशिष्ट क्रम है जहाँ से प्रतिकृतियन शुरू होता है। जब कोई विजातीय डीएनए इससे जुड़ता है, तो वह पोषी कोशिका के भीतर अपनी प्रतियां बना सकता है। यह संवाहक से जुड़े बाहरी डीएनए की प्रतियों की संख्या (Copy number) को भी नियंत्रित करता है।
  3. वरणयोग्य चिह्नक (Selectable Markers):
    pBR322 में उपस्थित एम्पीसिलीन प्रतिरोधी जीन ($amp^R$) तथा टेट्रासाइक्लिन प्रतिरोधी जीन ($tet^R$) वरणयोग्य चिह्नक का कार्य करते हैं। ये रूपांतरित (पुनर्योगज) कोशिकाओं को अरूपांतरित कोशिकाओं से अलग पहचानने में मदद करते हैं। उदाहरण के लिए, जब विजातीय डीएनए को $tet^R$ के BamHI स्थल पर जोड़ा जाता है, तो टेट्रासाइक्लिन प्रतिरोधकता नष्ट हो जाती है (निवेशी निष्क्रियता), जिससे पुनर्योगज कोशिकाएं एम्पीसिलीन माध्यम में तो जीवित रहती हैं किंतु टेट्रासाइक्लिन माध्यम में मर जाती हैं।
अंक योजना (Marking Scheme): pBR322 के घटकों का वर्णन (1.5 अंक) + Ori का कार्य (1.5 अंक) + वरणयोग्य चिह्नक व निवेसी निष्क्रियता (1.5 अंक) = कुल 4.5 अंक।
Example 3
एगरोज जेल वैद्युतकणसंचलन (Agarose Gel Electrophoresis) का सिद्धांत समझाइए। डीएनए पट्टियों को देखने हेतु किस अभिरंजक एवं प्रकाश का प्रयोग किया जाता है? 'क्षालन' (Elution) क्या है?
Step-by-Step Solution:

उत्तर:

  1. सिद्धांत: डीएनए खंड ऋणावेशित अणु होते हैं क्योंकि उनके शर्करा-फॉस्फेट आधार में फॉस्फेट समूह ($PO_4^{3-}$) ऋणावेशित होते हैं। जब इन्हें एगरोज जेल के खांचों में डालकर विद्युत क्षेत्र लगाया जाता है, तो ये एनोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड) की ओर गति करते हैं। एगरोज जेल छन्नी (Sieve) की तरह कार्य करता है; अतः छोटा डीएनए खंड कम अवरोध के कारण अधिक तेज व अधिक दूर जाता है, जबकि बड़ा खंड कुओं के पास ही रह जाता है। इस प्रकार डीएनए खंड आकार के आधार पर पृथक हो जाते हैं।
  2. डीएनए पट्टियों को देखना: पृथक हुए डीएनए खंड सामान्य प्रकाश में अदृश्य होते हैं। इन्हें देखने हेतु जेल को एथीडियम ब्रोमाइड (Ethidium Bromide - EtBr) से अभिरंजित किया जाता है तथा पराबैंगनी (UV) प्रकाश के संपर्क में लाया जाता है। यूवी प्रकाश में डीएनए खंड चमकीले नारंगी रंग के बैंड (Bright orange bands) के रूप में दिखाई देते हैं।
  3. क्षालन (Elution): एगरोज जेल पर पृथक हुए वांछित डीएनए बैंड को ब्लेड से काटकर अलग करना तथा जेल के टुकड़े से डीएनए को रासायनिक रूप से निष्कर्षित (Extract) करना क्षालन कहलाता है।
अंक योजना (Marking Scheme): इलेक्ट्रोफोरेसिस का सिद्धांत व ऋणावेशित डीएनए (1.5 अंक) + EtBr व UV प्रकाश में नारंगी रंग (1.5 अंक) + क्षालन (Elution) की परिभाषा (1 अंक) = कुल 4 अंक।
Example 4
प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज (Restriction Endonucleases) डीएनए को कैसे काटते हैं? 'पैलिंड्रोम' तथा 'चिपचिपे सिरे' (Sticky ends) की अवधारणा को EcoRI के उदाहरण द्वारा समझाइए।
Step-by-Step Solution:

उत्तर:

  1. कार्यविधि: प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज संपूर्ण डीएनए की लंबाई का निरीक्षण करते हैं और जब उन्हें अपना विशिष्ट पहचान स्थल मिलता है, तो वे डीएनए के दोनों रज्जुकों को शर्करा-फॉस्फेट रीढ़ में विशिष्ट बिंदुओं पर काटते हैं।
  2. पैलिंड्रोम (Palindromic Sequence): यह क्षारक युग्मों का वह क्रम है जो दोनों रज्जुकों पर समान दिशा (5'→3' या 3'→5') में पढ़ने पर बिल्कुल समान होता है।
    EcoRI का पैलिंड्रोमिक क्रम:
    $$5' - \text{G A A T T C} - 3'$$
    $$3' - \text{C T T A A G} - 5'$$
  3. चिपचिपे सिरे (Sticky ends): EcoRI पैलिंड्रोम के ठीक मध्य में नहीं काटता, बल्कि केंद्र से थोड़ी दूरी पर G और A के बीच काटता है। इससे दोनों सिरों पर 4 न्यूक्लियोटाइड (AATT) लंबा एकल रज्जुक लटकता हुआ रह जाता है। चूंकि ये एकल रज्जुक अपने पूरक क्षारक क्रम (TTAA) से तुरंत हाइड्रोजन बंध बनाने की स्वाभाविक प्रवृत्ति रखते हैं, इसलिए इन्हें चिपचिपे सिरे कहते हैं। यह चिपचिपापन एंजाइम डीएनए लाइगेज द्वारा विजातीय डीएनए को संवाहक डीएनए से जोड़ने में अत्यधिक सुगमता प्रदान करता है।
अंक योजना (Marking Scheme): प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज की कार्यविधि (1 अंक) + पैलिंड्रोम की परिभाषा व EcoRI अनुक्रम (1.5 अंक) + चिपचिपे सिरों का निर्माण व लाइगेज में महत्व (1.5 अंक) = कुल 4 अंक।
Example 5
बायोरिएक्टर क्या हैं? विलोड़ित हौज बायोरिएक्टर (Stirred-tank bioreactor) के प्रमुख घटकों एवं 'अनुप्रवाह संसाधन' (Downstream Processing) का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
Step-by-Step Solution:

उत्तर:

  1. बायोरिएक्टर: यह बड़े आकार (100 से 1000 लीटर) का एक बर्तन होता है जिसमें सूक्ष्मजीवों, पादप अथवा जंतु कोशिकाओं के संवर्धन द्वारा कच्चे माल को विशिष्ट जैव-रासायनिक उत्पादों (प्रोटीन, एंजाइम) में परिवर्तित किया जाता है। यह इष्टतम ताप, pH, ऑक्सीजन, पोषक तत्व एवं लवण प्रदान करता है।
  2. विलोड़ित हौज बायोरिएक्टर के घटक:
    • विलोड़क तंत्र (Agitator system): इसमें घूर्णन करने वाले ब्लेड लगे होते हैं जो माध्यम को लगातार हिलाते हैं ताकि पोषक तत्व और कोशिकाएं समान रूप से वितरित रहें।
    • ऑक्सीजन प्रदाय तंत्र: विलोड़ित हौज के पेंदे से हवा के बुलबुले छोड़े जाते हैं जिससे ऑक्सीजन स्थानांतरण हेतु अधिक पृष्ठीय क्षेत्रफल मिलता है।
    • झाग नियंत्रण तंत्र (Foam control system): तीव्र विलोडन से बनने वाले फेन को तोड़ता है।
    • तापमान एवं pH नियंत्रण तंत्र: इष्टतम शारीरिक परिस्थितियों को बनाए रखता है।
    • प्रतिचयन कपाट (Sampling port): जहाँ से समय-समय पर संवर्धन का थोड़ा सा नमूना जांच हेतु निकाला जा सकता है।
  3. अनुप्रवाह संसाधन (Downstream Processing): बायोरिएक्टर में उत्पाद के निर्माण के बाद उसे बाजार में विपणन हेतु भेजने से पहले शुद्ध करने की प्रक्रिया को अनुप्रवाह संसाधन कहते हैं। इसके दो प्रमुख चरण हैं: पृथक्करण (Separation) तथा शोधन (Purification)। इसके बाद उपयुक्त परिरक्षक (Preservatives) मिलाए जाते हैं तथा दवाओं के मामले में कड़े नैदानिक परीक्षण किए जाते हैं।
अंक योजना (Marking Scheme): बायोरिएक्टर की परिभाषा (1 अंक) + विलोड़ित हौज के 4 प्रमुख घटक (2 अंक) + अनुप्रवाह संसाधन के चरण व महत्व (1 अंक) = कुल 4 अंक।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

यह समझना कि एगरोज जेल पर बड़े डीएनए खंड तेजी से गति करते हैं।

Scientific Reality & Correction

डीएनए खंड जितना छोटा (हल्का) होगा, वह जेल के छिद्रों से उतनी ही तेजी से और अधिक दूरी तक गति करेगा।

Common Misconception

पीसीआर के चरणों के क्रम को उलट-पुलट कर देना।

Scientific Reality & Correction

पीसीआर का सही क्रम है: 1. विकृतीकरण (Denaturation, ~94°C) → 2. तापानुशीलन (Annealing, ~50-60°C) → 3. विस्तार/प्रसार (Extension, 72°C)।

Common Misconception

Taq पॉलीमरेज को सामान्य तापमान पर कार्य करने वाला एंजाइम मान लेना।

Scientific Reality & Correction

Taq पॉलीमरेज Thermus aquaticus जीवाणु से मिलता है जो 72°C पर सर्वोत्तम कार्य करता है और 94°C के उच्च तापमान पर भी नष्ट नहीं होता।

Common Misconception

इलेक्ट्रोफोरेसिस में डीएनए को कैथोड की ओर गति करते हुए लिख देना।

Scientific Reality & Correction

डीएनए फॉस्फेट समूह के कारण ऋणावेशित होता है, अतः यह सदैव एनोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड) की ओर गति करता है।

पुनर्योगज डीएनए प्रौद्योगिकी एवं पीसीआर की संपूर्ण वैज्ञानिक कार्यप्रणाली (rDNA Technology & PCR Architecture)

जैव प्रौद्योगिकी: सिद्धांत व प्रक्रम (Biotechnology Principles & Processes)प्रतिबंधन एंजाइम • pBR322 संवाहक • एगरोज जेल • पीसीआर (PCR) • बायोरिएक्टर1. आणविक कैंचियांप्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज:• Hind II: प्रथम खोजा गया• 900+ एंजाइम, 230+ प्रभेद• पैलिंड्रोम अनुक्रम की पहचानEcoRI पैलिंड्रोम:5'-GAATTC-3'3'-CTTAAG-5'G व A के बीच कट लगाता हैचिपचिपे सिरे (Sticky ends):• DNA लाइगेज द्वारा जोड़ना सुगम• फॉस्फोडाइएस्टर बंध निर्माण2. क्लोनिंग संवाहकप्लाज्मिड pBR322:• Ori: प्रतिकृतियन उद्गम (प्रतियों की संख्या नियंत्रण)• ampR व tetR: वरणयोग्य चिह्नकनिवेशी निष्क्रियता:• बाहरी जीन जुड़ने पर tetR नष्ट• नीले-सफेद चयन (X-gal) सफेद = पुनर्योगज, नीला = अपुनर्योगजपादप व जंतु संवाहक:• Agrobacterium: Ti-प्लाज्मिड• डिसआर्म्ड रेट्रोवायरस (जंतु)3. जेल व पीसीआरएगरोज जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस:• DNA ऋणावेशित → एनोड गति• छोटा खंड = अधिक दूरी• EtBr + UV = नारंगी बैंड• क्षालन (Elution): बैंड काटनापीसीआर (PCR - Kary Mullis):1. विकृतीकरण (~94°C)2. तापानुशीलन (~50-60°C प्राइमर)3. विस्तार (72°C, Taq Pol)Taq Pol: Thermus aquaticus30 चक्र = 1 अरब गुना प्रवर्धन4. बायोरिएक्टर व प्रक्रमसक्षम पोषी विधियां:• CaCl₂ + हीट शॉक (42°C)• माइक्रो-इंजेक्शन (जंतु केंद्रक)• जीन गन (स्वर्ण/टंगस्टन, पादप)बायोरिएक्टर (100-1000L):• विलोड़ित हौज: समान ऑक्सीजन• इष्टतम ताप, pH, लवण, पोषकअनुप्रवाह संसाधन:• पृथक्करण व शोधन• परिरक्षक योग व QC परीक्षण• चिकित्सकीय कड़े परीक्षण

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
जैव प्रौद्योगिकी में आनुवंशिक इंजीनियरिंग (rDNA तकनीक) तथा रासायनिक इंजीनियरिंग (विसंक्रमित संवर्धन) प्रमुख सिद्धांत हैं।
Takeaway 2
कोहेन एवं बोयर (1972) ने Salmonella typhimurium से प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन निकालकर प्रथम पुनर्योगज डीएनए बनाया।
Takeaway 3
प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज (आणविक कैंची) विशिष्ट पैलिंड्रोमिक अनुक्रमों को पहचानकर काटते हैं और चिपचिपे सिरे (Sticky ends) बनाते हैं।
Takeaway 4
EcoRI का पैलिंड्रोम क्रम 5'-GAATTC-3' है जो G और A के बीच कट लगाता है; डीएनए लाइगेज चिपचिपे सिरों को जोड़ता है।
Takeaway 5
pBR322 संवाहक में Ori (प्रतिकृतियन उद्गम) तथा ampR व tetR वरणयोग्य चिह्नक होते हैं; निवेसी निष्क्रियता से नीले-सफेद चयन होता है।
Takeaway 6
पादपों में Agrobacterium tumefaciens का Ti-प्लाज्मिड तथा जंतुओं में अहानिकर रेट्रोवायरस प्राकृतिक क्लोनिंग संवाहक का कार्य करते हैं।
Takeaway 7
एगरोज जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस में ऋणावेशित डीएनए खंड आकार अनुसार एनोड की ओर गति करते हैं; EtBr + UV में चमकीले नारंगी बैंड दिखते हैं।
Takeaway 8
जेल से डीएनए बैंड काटकर निकालना क्षालन (Elution) कहलाता है; शीतित एथेनॉल से डीएनए धागे निकालना स्पूलिंग कहलाता है।
Takeaway 9
पीसीआर (PCR, कैरी मुलिस) के तीन चरण हैं: विकृतीकरण (94°C), तापानुशीलन (50-60°C, प्राइमर), तथा विस्तार (72°C, Taq पॉलीमरेज)।
Takeaway 10
बायोरिएक्टर बड़े पैमाने पर संवर्धन हेतु इष्टतम परिस्थितियां देते हैं; उत्पाद को शुद्ध करने की प्रक्रिया अनुप्रवाह संसाधन कहलाती है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज 'EcoRI' का विशिष्ट पैलिंड्रोमिक पहचान अनुक्रम क्या है?
(A) 5'-GAATTC-3'
(B) 5'-GGATCC-3'
(C) 5'-AAGCTT-3'
(D) 5'-CTCGAG-3'
Reveal Answer & Explanation
Answer: A
EcoRI 5'-GAATTC-3' पैलिंड्रोम अनुक्रम को पहचानता है और G व A के बीच कट लगाता है।
2
पॉलीमरेज शृंखला अभिक्रिया (PCR) में प्रयुक्त थर्मोस्टेबल एंजाइम 'Taq डीएनए पॉलीमरेज' किस सूक्ष्मजीव से पृथक किया जाता है?
(A) Escherichia coli
(B) Thermus aquaticus (जीवाणु)
(C) Bacillus thuringiensis
(D) Salmonella typhimurium
Reveal Answer & Explanation
Answer: B
Taq पॉलीमरेज गर्म जल के तापीय जीवाणु Thermus aquaticus से निकाला जाता है जो उच्च तापमान पर भी सक्रिय रहता है।
3
एगरोज जेल वैद्युतकणसंचलन में डीएनए पट्टियों को देखने हेतु किस अभिरंजक एवं प्रकाश का उपयोग किया जाता है?
(A) मेथिलीन ब्लू एवं दृश्य प्रकाश
(B) एथीडियम ब्रोमाइड (EtBr) एवं पराबैंगनी (UV) प्रकाश
(C) सैफ्रैनिन एवं अवरक्त प्रकाश
(D) क्रिस्टल वॉयलेट एवं एक्स-रे
Reveal Answer & Explanation
Answer: B
EtBr से अभिरंजित करने के बाद पराबैंगनी (UV) प्रकाश के नीचे डीएनए पट्टियां चमकीली नारंगी दिखाई देती हैं।
4
द्विबीजपत्री पादपों में विजातीय जीन स्थानांतरित करने हेतु कौन सा मृदा जीवाणु 'प्राकृतिक आनुवंशिक इंजीनियर' कहलाता है?
(A) Rhizobium leguminosarum
(B) Agrobacterium tumefaciens (Ti-प्लाज्मिड)
(C) Azotobacter
(D) Bacillus subtilis
Reveal Answer & Explanation
Answer: B
Agrobacterium tumefaciens का अहानिकर Ti-प्लाज्मिड पादपों में प्राकृतिक जीन स्थानांतरण हेतु सर्वोत्तम संवाहक है।
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