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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा XII • Biology • अध्याय 8
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव (Microbes in Human Welfare)

सूक्ष्मजीव (Microorganisms / Microbes) पृथ्वी के प्रत्येक आवास में—वायु, जल, मृदा तथा यहाँ तक कि गहरे समुद्र के तापीय झरनों (Thermal vents, $> 100^\circ\text{C}$), बर्फ की परतों के नीचे तथा अत्यधिक अम्लीय पर्यावरण में भी—सर्वव्यापी (Ubiquitous) रूप से पाए जाते हैं। यद्यपि कुछ सूक्ष्मजीव रोगजनक होते हैं, किंतु अधिकांश सूक्ष्मजीव मानव जाति के अस्तित्व, स्वास्थ्य, पोषण, उद्योग, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत विकास हेतु अत्यंत कल्याणकारी एवं अपरिहार्य हैं। प्रस्तुत अध्याय सूक्ष्मजीवों के विविध लाभकारी एवं औद्योगिक अनुप्रयोगों का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है: 1. घरेलू उत्पादों में सूक्ष्मजीव: लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया (LAB - Lactobacillus) द्वारा दूध से दही का निर्माण एवं विटामिन $B_{12}$ की वृद्धि, बेकर्स यीस्ट (Saccharomyces cerevisiae) द्वारा ब्रेड व डोसा-इडली के आटे का किण्वन ($CO_2$ उत्पादन), पारंपरिक पेय टॉडी, तथा Propionibacterium sharmanii द्वारा बड़े छिद्रों वाली 'स्विस पनीर' एवं Penicillium roqueforti द्वारा 'रॉकफोर्ट पनीर' का निर्माण। 2. औद्योगिक उत्पादों में सूक्ष्मजीव: ब्रूअर्स यीस्ट द्वारा किण्वित पेय (आसवित—व्हिस्की, रम, ब्रांडी बनाम गैर-आसवित—वाइन, बियर), प्रतिजैविकों (Antibiotics) की खोज (अलेक्जेंडर फ्लेमिंग द्वारा Penicillium notatum एवं फ्लोरे-चेन द्वारा विकास), कार्बनिक अम्ल (सिट्रिक अम्ल—Aspergillus niger, एसिटिक अम्ल—Acetobacter aceti, ब्यूटिरिक अम्ल—Clostridium butylicum), एंजाइम (डिटर्जेंट में लाइपेस, फलों के रस की सफाई में पेक्टिनेज/प्रोटिएज, थक्का-रोधी 'क्लॉट बस्टर' स्ट्रेप्टोकाइनेज), तथा जैव-सक्रिय अणु—साइक्लोस्पोरिन-ए (अंग प्रत्यारोपण में इम्यूनोसप्रेसेंट—Trichoderma polysporum) एवं स्टेटिन (रक्त कोलेस्ट्रॉल कम करने वाला कारक—Monascus purpureus)। 3. वाहितमल उपचार (Sewage Treatment - STP): प्राथमिक भौतिक उपचार (निस्पंदन व अवसादन) तथा द्वितीयक जैविक उपचार (वायवीय टैंक, ऊर्णक / Flocs, बीओडी / BOD में भारी गिरावट, सक्रियित आपंक एवं अवायवीय आपंक संपाचित्र में बायोगैस का निर्माण)। 4. बायोगैस उत्पादन में सूक्ष्मजीव: मिथेनोजेन्स (Methanobacterium), गोबर गैस संयंत्र की संरचना एवं कार्य (IARI व KVIC का योगदान)। 5. जैव-नियंत्रण कारक (Biocontrol Agents): एकीकृत पीड़क प्रबंधन (IPM), लेडीबर्ड भृंग (एफिड्स), व्याध पतंग (मच्छर), Bacillus thuringiensis (Bt), कवक Trichoderma, तथा बैक्यूलोवायरस (Baculoviruses - Nucleopolyhedrovirus)। 6. जैव-उर्वरक (Biofertilizers): नाइट्रोजन स्थिरीकरण (राइजोबियम, एजोटोबैक्टर, एजोस्पिरिलम), कवकमूल (Mycorrhiza - Glomus वंश द्वारा फॉस्फोरस अवशोषण), तथा सायनोबैक्टीरिया (एनाबीना, नॉस्टॉक)।

गंदे नाले के बदबूदार पानी को स्वच्छ नदी में बदलने और लाखों दिल के मरीजों की जान बचाने वाले अदृश्य जादूगर!

क्या आप सोच सकते हैं कि किसी बड़े शहर के अरबों लीटर जहरीले, मल-युक्त गंदे नाले के पानी को कौन साफ करता है? कोई विशालकाय रासायनिक फिल्टर नहीं, बल्कि अरबों-खरबों नन्हें बैक्टीरिया और कवक के जाल (Flocs) उस संपूर्ण गंदगी और कार्बनिक कचरे को खाकर डकार जाते हैं और बदले में हमें खाना पकाने के लिए ज्वलनशील बायोगैस देते हैं! इतना ही नहीं, हार्ट अटैक के मरीज की धमनियों में जमे जानलेवा खून के थक्के को चुटकियों में पिघलाने वाला 'क्लॉट बस्टर' स्ट्रेप्टोकाइनेज, और अंग प्रत्यारोपण के बाद मरीज की जान बचाने वाला साइक्लोस्पोरिन-ए—ये सब हमारे इन अदृश्य सूक्ष्म मित्रों की ही देन हैं!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

JAC बोर्ड, CBSE तथा NEET-UG में यह अध्याय 5 से 6 अंकों का अत्यधिक स्कोरिंग अध्याय है: 1. 5-अंकीय दीर्घ उत्तरीय प्रश्न: वाहितमल उपचार संयंत्र (STP) के द्वितीयक जैविक उपचार एवं BOD का सचित्र चरणबद्ध वर्णन, अथवा बायोगैस संयंत्र की संरचना व क्रियाविधि। 2. 3-अंकीय सीधे प्रश्न: जैव उर्वरक के रूप में कवकमूल (Mycorrhiza) के 3 लाभ, अथवा जैव-सक्रिय अणुओं (साइक्लोस्पोरिन-ए व स्टेटिन) के स्रोत सूक्ष्मजीव व कार्य। 3. NEET-UG के डायरेक्ट मैचिंग प्रश्न: सिट्रिक अम्ल, ब्यूटिरिक अम्ल, लैक्टिक अम्ल और एसिटिक अम्ल के स्रोत सूक्ष्मजीव, स्विस पनीर में $CO_2$ पैदा करने वाला जीवाणु (Propionibacterium), तथा बैक्यूलोवायरस का संकीर्ण स्पेक्ट्रम (Narrow-spectrum) प्रभाव।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • सूक्ष्मजीवों के प्रमुख वर्ग: जीवाणु (Bacteria), कवक (Fungi), यीस्ट, विषाणु, प्रोटोजोआ।
  • किण्वन (Fermentation) की अवायवीय श्वसन क्रिया ($C_6H_{12}O_6 \rightarrow 2C_2H_5OH + 2CO_2$)।
  • पारिस्थितिक तंत्र में अपघटकों (Decomposers) की भूमिका।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • दही, ब्रेड, पनीर तथा किण्वित पेयों में प्रयुक्त विशिष्ट सूक्ष्मजीवों एवं उनकी रासायनिक अभिक्रियाओं का विवरण देना।
  • वाहितमल उपचार संयंत्र (STP) में BOD के वैज्ञानिक महत्व एवं सक्रियित आपंक (Activated Sludge) की कार्यप्रणाली को स्पष्ट करना।
  • औद्योगिक महत्व के प्रमुख जैव-सक्रिय अणुओं (स्ट्रेप्टोकाइनेज, साइक्लोस्पोरिन-ए, स्टेटिन) के स्रोत जीवों व अनुप्रयोगों को सूचीबद्ध करना।
  • बायोगैस संयंत्र की संरचना का सचित्र आरेख बनाकर मिथेनोजेन जीवाणुओं की भूमिका समझाना।
  • रासायनिक कीटनाशकों एवं उर्वरकों के स्थान पर जैव-नियंत्रक कारकों (Bt, Baculovirus) तथा जैव-उर्वरकों (Mycorrhiza, Cyanobacteria) के उपयोग के पर्यावरणीय लाभों का मूल्यांकन करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. घरेलू एवं औद्योगिक उत्पादों में...
2 2. वाहितमल उपचार संयंत्र (Sewage Tr...
3 3. बायोगैस उत्पादन एवं जैव-नियंत्रण...
4 4. जैव-उर्वरक के रूप में सूक्ष्मजीव...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. घरेलू एवं औद्योगिक उत्पादों में सूक्ष्मजीव

सूक्ष्मजीव प्रतिदिन हमारे भोजन तथा औद्योगिक उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:

A. घरेलू उत्पादों में सूक्ष्मजीव:

  • 1. दूध से दही का निर्माण: लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया (LAB) जैसे Lactobacillus दूध में उचित ताप पर वृद्धि करते हैं। ये लैक्टोज शर्करा को लैक्टिक अम्ल में बदलकर दूध की कैसिइन प्रोटीन को जमा (Coagulate) देते हैं और आंशिक रूप से पचा देते हैं। लाभ: दही पोषण की दृष्टि से दूध से अधिक लाभदायक है क्योंकि यह विटामिन $B_{12}$ की मात्रा को अत्यधिक बढ़ा देता है। साथ ही हमारे आमाशय में हानिकारक रोगजनक जीवाणुओं की वृद्धि को रोकता है।
  • 2. आटे का किण्वन (Dough Fermentation):
    • डोसा एवं इडली के आटे का किण्वन जीवाणुओं द्वारा होता है; इसमें उभरी हुई फूली हुई संरचना $CO_2$ गैस के उत्पादन के कारण होती है।
    • ब्रेड बनाने में बेकर्स यीस्ट (Saccharomyces cerevisiae) का उपयोग किया जाता है।
  • 3. पारंपरिक खाद्य एवं पेय: दक्षिणी भारत का पारंपरिक पेय 'टॉडी' (Toddy) ताड़ के वृक्षों के रस को किण्वित करके बनाया जाता है। सोयाबीन, बांस के प्ररोहों तथा मछलियों को किण्वित करके स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए जाते हैं।
  • 4. पनीर (Cheese):
    • स्विस पनीर (Swiss Cheese): इसमें बड़े-बड़े छिद्र होते हैं, जो Propionibacterium sharmanii जीवाणु द्वारा भारी मात्रा में $CO_2$ उत्पन्न करने के कारण बनते हैं।
    • रॉकफोर्ट पनीर (Roquefort Cheese): यह एक विशेष कवक Penicillium roqueforti के संवर्धन द्वारा विशिष्ट स्वाद एवं सुगंध से परिपक्व (Ripened) की जाती है।

B. औद्योगिक उत्पादों में सूक्ष्मजीव:

उद्योगों में सूक्ष्मजीवों को बड़े बर्तनों में उगाया जाता है जिन्हें किण्वक (Fermentors / Bioreactors) कहते हैं।

  • किण्वित पेय (Fermented Beverages): ब्रूअर्स यीस्ट (Saccharomyces cerevisiae) धान्य अनाजों एवं फलों के रसों का किण्वन कर एथेनॉल बनाती है।
    • बिना आसवन वाले पेय (Without Distillation): वाइन (Wine) एवं बियर (Beer) — इनमें एल्कोहल प्रतिशत कम ($3-12\%$) होता है।
    • आसवन द्वारा निर्मित पेय (With Distillation): व्हिस्की, ब्रांडी तथा रम — किण्वित रस के आसवन से बनते हैं, अतः एल्कोहल प्रतिशत अधिक ($40-50\%$) होता है।
  • प्रतिजैविक (Antibiotics): 20वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण खोज।
    • 1928 में सर अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने देखा कि Staphylococcus संवर्धन प्लेट पर कवक Penicillium notatum उगने से जीवाणु नष्ट हो गए। उन्होंने इससे पेनिसिलिन (Penicillin) की खोज की।
    • अर्न्स्ट चेन एवं हॉवर्ड फ्लोरे ने द्वितीय विश्व युद्ध में घायल अमेरिकी सैनिकों के इलाज हेतु पेनिसिलिन की संपूर्ण क्षमता को प्रतिजैविक के रूप में स्थापित किया। (1945 में तीनों को नोबेल पुरस्कार मिला)।
  • रसायन, एंजाइम एवं जैव-सक्रिय अणु:
उत्पादप्रकारस्रोत सूक्ष्मजीवऔद्योगिक / चिकित्सीय अनुप्रयोग
सिट्रिक अम्लकार्बनिक अम्लकवक Aspergillus nigerखाद्य परिरक्षक एवं पेय पदार्थों में।
एसिटिक अम्ल (सिरका)कार्बनिक अम्लजीवाणु Acetobacter acetiसिरका निर्माण एवं खाद्य उद्योग।
ब्यूटिरिक अम्लकार्बनिक अम्लजीवाणु Clostridium butylicumरासायनिक संश्लेषण में।
लाइपेस (Lipase)एंजाइमविभिन्न कवक एवं जीवाणुडिटर्जेंट पाउडर में तेल व चिकनाई के धब्बे हटाने हेतु।
पेक्टिनेज व प्रोटिएजएंजाइमकवकडिब्बाबंद फलों के रसों को बिल्कुल स्वच्छ व पारदर्शी बनाने हेतु।
स्ट्रेप्टोकाइनेज (Streptokinase)एंजाइमजीवाणु Streptococcus (आनुवंशिक रूप से रूपांतरित)'क्लॉट बस्टर' (Clot Buster) — मायोकार्डियल इन्फार्कशन (हार्ट अटैक) के मरीजों की रक्त वाहिकाओं के थक्कों को घोलने हेतु।
साइक्लोस्पोरिन-ए (Cyclosporin A)जैव-सक्रिय अणुकवक Trichoderma polysporumप्रतिरक्षा-संदमक कारक (Immunosuppressive Agent) — अंग प्रत्यारोपण (Kidney transplant) के मरीजों में ग्राफ्ट अस्वीकृति रोकने हेतु।
स्टेटिन (Statins)जैव-सक्रिय अणुयीस्ट Monascus purpureusरक्त कोलेस्ट्रॉल कम करने वाला कारक — कोलेस्ट्रॉल संश्लेषण के एंजाइम का प्रतिस्पर्धी संदमन करता है।

2. वाहितमल उपचार संयंत्र (Sewage Treatment Plant - STP)

नगरों एवं कस्बों से निकलने वाला व्यर्थ अपशिष्ट जल वाहितमल (Sewage) कहलाता है, जिसका प्रमुख घटक मानव मल-मूत्र और कार्बनिक अपशिष्ट होता है। इसमें भारी संख्या में रोगजनक जीवाणु होते हैं, अतः इसे सीधे नदियों या नालों में नहीं बहाया जा सकता। वाहितमल का उपचार नगर निगमों द्वारा STP में दो मुख्य चरणों में किया जाता है:

1. प्राथमिक उपचार (Primary Treatment - भौतिक प्रक्रिया):

इसमें वाहितमल में से तैरते हुए एवं भारी ठोस कणों को भौतिक रूप से अलग किया जाता है:

  • क्रमिक निस्पंदन (Sequential Filtration): तैरते हुए कूड़े-कर्कट (पॉलीथिन, पत्ते, कागज) को जालीदार छन्नों द्वारा छाना जाता है।
  • अवसादन (Sedimentation): ग्रिट चैंबर में बालू, कंकड़-पत्थर और मिट्टी के कण पेंदे में बैठ जाते हैं। प्राथमिक अवसादन टैंक में नीचे बैठा ठोस पदार्थ प्राथमिक आपंक (Primary Sludge) कहलाता है, तथा ऊपर तैरने वाला मैला जल प्राथमिक बहिःस्राव (Primary Effluent) कहलाता है जिसे द्वितीयक उपचार हेतु भेजा जाता है।

2. द्वितीयक उपचार / जैविक उपचार (Secondary / Biological Treatment):

यह पूर्णतः सूक्ष्मजीवों द्वारा संचालित जैविक प्रक्रिया है:

  1. वायवीय टैंक (Aeration Tank): प्राथमिक बहिःस्राव को बड़े वायवीय टैंकों में लगातार यांत्रिक रूप से हिलाया जाता है और संपीडित वायु फूंकी जाती है। इससे अत्यधिक उपयोगी वायवीय सूक्ष्मजीवों की तीव्र वृद्धि होती है और वे ऊर्णक (Flocs) बना लेते हैं।
    • ऊर्णक (Flocs): जीवाणुओं के ऐसे झुंड हैं जो कवक के तंतुओं के साथ जुड़कर जाल जैसी संरचना बना लेते हैं।
  2. बीओडी (BOD - Biochemical Oxygen Demand) में कमी: ये वायवीय सूक्ष्मजीव वृद्धि करते समय बहिःस्राव में मौजूद घुलित कार्बनिक पदार्थों के एक बड़े हिस्से का उपभोग कर लेते हैं। इसके फलस्वरूप बहिःस्राव की बीओडी अत्यधिक घट जाती है।
    • BOD की परिभाषा: जल के 1 लीटर में उपस्थित संपूर्ण कार्बनिक पदार्थों को जीवाणुओं द्वारा ऑक्सीकृत करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा को BOD कहते हैं। BOD जल के प्रदूषण का सीधा माप है; जल में जितना अधिक कार्बनिक प्रदूषण होगा, उसकी BOD उतनी ही अधिक होगी।
  3. अवसादन टैंक एवं सक्रियित आपंक (Activated Sludge): जब BOD पर्याप्त कम हो जाती है, तो बहिःस्राव को निसादन टैंक (Settling tank) में भेजा जाता है जहाँ ऊर्णकों को नीचे बैठने दिया जाता है। यह बैठा हुआ अवसाद सक्रियित आपंक (Activated Sludge) कहलाता है।
  4. पुनर्चक्रण एवं अवायवीय आपंक संपाचित्र (Anaerobic Sludge Digester):
    • सक्रियित आपंक का एक छोटा सा भाग प्रारंभिक निवेसद्रव्य (Inoculum / जामन) के रूप में वापस वायवीय टैंक में पंप कर दिया जाता है।
    • आपंक का अधिकांश बड़ा भाग बड़े अवायवीय आपंक संपाचित्रों में भेजा जाता है। यहाँ अवायवीय जीवाणु (मिथेनोजेन्स) ऊर्णक के जीवाणुओं और कवकों का अवायवीय पाचन करते हैं।
  5. बायोगैस उत्पादन: अवायवीय पाचन के दौरान गैसों का मिश्रण उत्पन्न होता है जिसमें मुख्यतः मेथेन ($CH_4$), हाइड्रोजन सल्फाइड ($H_2S$), तथा कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) होती हैं। इस गैस को बायोगैस (Biogas) कहते हैं जो ज्वलनशील होती है और ऊर्जा का उत्कृष्ट स्रोत है।

अब उपचारित बहिःस्राव को सुरक्षित रूप से प्राकृतिक जलस्रोतों (गंगा, यमुना आदि नदियों) में छोड़ दिया जाता है। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने भारत की प्रमुख नदियों को प्रदूषण से बचाने हेतु गंगा एक्शन प्लान (GAP) तथा यमुना एक्शन प्लान (YAP) प्रारंभ किए हैं।

3. बायोगैस उत्पादन एवं जैव-नियंत्रण कारक (Biocontrol Agents)

बायोगैस उत्पादन में सूक्ष्मजीव (Microbes in Biogas Production):

बायोगैस गैसों का एक मिश्रण (मुख्यतः मेथेन) है जो सूक्ष्मजीवों की सक्रियता से उत्पन्न होता है। सेल्यूलोज पर अवायवीय रूप से वृद्धि करने वाले जीवाणु मिथेनोजेन्स (Methanogens) कहलाते हैं, जिनका प्रमुख उदाहरण Methanobacterium है। ये जीवाणु वाहितमल के अवायवीय संपाचित्रों में तथा मवेशियों (गायों, भैंसों) के रूमेन (प्रथम आमाशय) में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। गोबर में सेल्यूलोज प्रचुर मात्रा में होता है, अतः गोबर से बायोगैस (गोबर गैस) का प्रचुर उत्पादन किया जाता है। भारत में बायोगैस तकनीक के विकास में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) तथा खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने अग्रणी भूमिका निभाई।

बायोगैस संयंत्र की संरचना:

  • ईंटों व सीमेंट से बना 10 से 15 फीट गहरा एक कंक्रीट टैंक (पाचक टैंक) होता है।
  • एक प्रवेश कक्ष (Inlet) होता है जहाँ गोबर और जल को मिलाकर घोल (Slurry) बनाया जाता है और टैंक में डाला जाता है।
  • पाचक के ऊपर एक तैरता हुआ लोहे का गैस धारक (Floating gas holder) ढक्कन होता है, जो गैस बनने के साथ-साथ ऊपर उठता जाता है।
  • गैस धारक में एक आउटलेट पाइप होता है जिससे बायोगैस को घरों में रसोई गैस व प्रकाश हेतु भेजा जाता है।
  • उपयोग के बाद बची हुई गाद (Spent Slurry) दूसरे आउटलेट से बाहर निकलती है जिसका उपयोग उत्कृष्ट जैविक खाद के रूप में खेतों में किया जाता है।

जैव-नियंत्रण कारक के रूप में सूक्ष्मजीव (Microbes as Biocontrol Agents):

कीटनाशकों एवं खरपतवारनाशकों के विषैले रासायनिक दुष्प्रभावों से बचने हेतु जैविक विधियों द्वारा पादप रोगों एवं पीड़कों का नियंत्रण जैव-नियंत्रण कहलाता है। यह एकीकृत पीड़क प्रबंधन (IPM) का मुख्य अंग है:

  1. लेडीबर्ड भृंग (Ladybird Beetle): लाल और काले रंग की यह भृंग एफिड्स (माहू / चूसक कीड़ों) से छुटकारा दिलाती है।
  2. व्याध पतंग (Dragonflies): यह मच्छरों के लार्वा का भक्षण कर मच्छरों की आबादी को नियंत्रित करती है।
  3. बैसिलस थुरिंजिएंसिस (Bacillus thuringiensis - Bt):
    यह जीवाणु तितलियों के कैटरपिलर (इल्ली) को नष्ट करने हेतु प्रयुक्त होता है। इसके शुष्क बीजाणु (Spores) पानी में घोलकर सरसों, फलों के वृक्षों पर छिड़के जाते हैं। जब कीट का लार्वा इन्हें खाता है, तो आंत के क्षारीय माध्यम में यह विष सक्रिय होकर आंत की भित्ति में छिद्र कर देता है और लार्वा मर जाता है (अन्य कीटों को कोई हानि नहीं पहुंचती)। आजकल आनुवंशिक इंजीनियरिंग द्वारा इसके 'cry' जीन को सीधे पादपों में डालकर Bt-कपास (Bt-Cotton) जैसी कीट-प्रतिरोधी फसलें विकसित की गई हैं।
  4. ट्राइकोडर्मा (Trichoderma): मृदा में स्वतंत्र रूप से रहने वाला कवक जो पादपों की जड़ों के पारिस्थितिक तंत्र में रहता है और अनेक मृदा-जनित पादप रोगजनकों का जैविक नियंत्रण करता है।
  5. बैक्यूलोवायरस (Baculoviruses - वंश Nucleopolyhedrovirus):
    ये विषाणु कीटों तथा अन्य संधिशोथों (Arthropods) पर हमला करते हैं। विशेषता: ये संकीर्ण स्पेक्ट्रम (Narrow-spectrum) वाले, प्रजाति-विशिष्ट (Species-specific) जैव-कीटनाशक हैं। इनका पौधों, स्तनधारियों, पक्षियों, मछलियों अथवा लाभकारी गैर-लक्ष्य कीटों (जैसे मधुमक्खी) पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। अतः यह संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में IPM हेतु सर्वोत्तम हैं।

4. जैव-उर्वरक के रूप में सूक्ष्मजीव (Microbes as Biofertilizers)

रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा प्रदूषण, भूजल संदूषण तथा भूमि की उर्वरा शक्ति में भारी गिरावट आई है। अतः आज जैविक खेती (Organic Farming) में जैव-उर्वरकों का प्रयोग अनिवार्य हो गया है। जैव-उर्वरक वे सजीव जीव हैं जो अपनी जैविक क्रियाओं द्वारा मृदा में पोषक तत्वों (विशेषकर नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस) की मात्रा और उपलब्धता को बढ़ाते हैं। जैव-उर्वरकों के तीन मुख्य स्रोत हैं:

1. जीवाणु (Bacteria):

  • राइजोबियम (Rhizobium): लेग्युमिनस (दलहनी) पादपों की जड़ों में ग्रंथिकाएं (Root nodules) बनाकर सहजीवी रूप में रहता है। यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करके कार्बनिक रूपों में बदलता है जिसे पादप पोषक के रूप में उपयोग करते हैं।
  • स्वतंत्र-जीवी नाइट्रोजन स्थिरीकारक जीवाणु: मृदा में स्वतंत्र रूप से रहने वाले जीवाणु जैसे Azotobacter (वायवीय) तथा Azospirillum वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर मृदा की उर्वरता बढ़ाते हैं।

2. कवक—कवकमूल (Mycorrhiza):

कवकों का उच्च पादपों (जैसे पाइनस, आर्किड्स) की जड़ों के साथ सहजीवी संबंध कवकमूल कहलाता है। इस सहजीविता में अधिकांश कवक Glomus वंश के सदस्य होते हैं।

पादप को कवकमूल से होने वाले 4 प्रमुख लाभ:

  1. फॉस्फोरस का अवशोषण: कवक जाल मृदा से अविलेय फॉस्फोरस को अवशोषित करके पादप को उपलब्ध कराता है।
  2. मूल रोगजनकों से सुरक्षा: कवक आवरण जड़ को मृदा-जनित रोगजनक कवकों व जीवाणुओं के संक्रमण से बचाता है।
  3. लवणता एवं सूखे के प्रति सहनशीलता: यह पादप की सूखा तथा अत्यधिक लवणता सहने की क्षमता को बढ़ाता है।
  4. समग्र पादप वृद्धि: बीजों के अंकुरण तथा पादप की समग्र वृद्धि व विकास में उल्लेखनीय सुधार करता है। (बदले में पादप कवक को शर्करा व आश्रय प्रदान करता है)।

3. सायनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria / नील-हरित शैवाल):

ये स्वपोषी सूक्ष्मजीव हैं जो जलीय तथा स्थलीय पर्यावरण में विस्तृत रूप से पाए जाते हैं। इनमें से अनेक वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं जैसे Anabaena, Nostoc, Oscillatoria आदि। धान (चावल) के खेतों में सायनोबैक्टीरिया सबसे महत्वपूर्ण जैव-उर्वरक का कार्य करते हैं। ये मृदा में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ाते हैं जिससे भूमि की उर्वरता निरंतर बनी रहती है।

महत्वपूर्ण जैविक संकल्पनाएँ, प्रक्रियाएँ एवं आरेख

बीओडी (Biochemical Oxygen Demand) सिद्धांत
जल प्रदूषण स्तर ∝ कार्बनिक अपशिष्ट की मात्रा ∝ सूक्ष्मजीवों की ऑक्सीजन खपत (BOD)
BOD कम होना जल के शुद्ध होने का सीधा सूचक है
प्रमुख जैव-सक्रिय अणु एवं स्रोत
साइक्लोस्पोरिन-ए = Trichoderma polysporum | स्टेटिन = Monascus purpureus | स्ट्रेप्टोकाइनेज = Streptococcus
NEET-UG में 100% बार-बार पूछे जाने वाले 3 जैव-सक्रिय अणु
बायोगैस का प्रमुख रासायनिक संघटन
मेथेन (CH₄, ~50-70%) + कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂, ~30-40%) + लेश मात्रा H₂, N₂, H₂S
मिथेनोजेन जीवाणु: Methanobacterium (सेल्युलोसिक किण्वन)
प्रमुख कार्बनिक अम्ल एवं सूक्ष्मजीव स्रोत
सिट्रिक अम्ल = Aspergillus niger | एसिटिक अम्ल = Acetobacter aceti | ब्यूटिरिक अम्ल = Clostridium butylicum
लैक्टिक अम्ल = Lactobacillus (दूध से दही, विटामिन B₁₂)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
वाहितमल के द्वितीयक उपचार (जैविक उपचार) की क्रियाविधि समझाइए। इसमें 'ऊर्णक' (Flocs) तथा 'बीओडी' (BOD) का क्या महत्व है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. वायवीय टैंक की क्रिया: प्राथमिक उपचार से प्राप्त बहिःस्राव को बड़े वायवीय टैंक में लगातार हिलाया जाता है और वायु प्रवाहित की जाती है। इससे वायवीय सूक्ष्मजीव तेजी से वृद्धि करके ऊर्णक (Flocs) बना लेते हैं।
    • ऊर्णक (Flocs): कवक तंतुओं के जाल से जुड़े जीवाणुओं के सघन झुंड होते हैं।
  2. BOD में कमी: ये सूक्ष्मजीव बहिःस्राव में मौजूद अधिकांश घुलित कार्बनिक अपशिष्ट का भोजन के रूप में उपभोग कर लेते हैं, जिससे जल की BOD (Biochemical Oxygen Demand) अत्यधिक घट जाती है।
  3. महत्व: BOD उस ऑक्सीजन की मात्रा है जो 1 लीटर जल के संपूर्ण कार्बनिक पदार्थों को ऑक्सीकृत करने हेतु आवश्यक होती है। BOD का घटना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जल से कार्बनिक प्रदूषण समाप्त हो चुका है।
  4. सक्रियित आपंक एवं बायोगैस: जब BOD काफी कम हो जाती है, तो द्रव को निसादन टैंक में भेजा जाता है जहाँ ऊर्णक पेंदे में बैठ जाते हैं (सक्रियित आपंक)। इस आपंक को अवायवीय संपाचित्र में भेजा जाता है जहाँ अवायवीय जीवाणु इसका पाचन करके बायोगैस ($CH_4, CO_2, H_2S$) बनाते हैं।
अंक योजना (Marking Scheme): वायवीय टैंक व ऊर्णक (Flocs) की व्याख्या (1.5 अंक) + BOD की परिभाषा व प्रदूषण से संबंध (1.5 अंक) + सक्रियित आपंक व बायोगैस निर्माण (1 अंक) = कुल 4 अंक।
उदाहरण 2
चिकित्सा विज्ञान में उपयोगी निम्नलिखित जैव-सक्रिय अणुओं (Bioactive molecules) के स्रोत सूक्ष्मजीव तथा उनके विशिष्ट चिकित्सीय उपयोग लिखिए: (a) साइक्लोस्पोरिन-ए, (b) स्टेटिन, (c) स्ट्रेप्टोकाइनेज।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. (a) साइक्लोस्पोरिन-ए (Cyclosporin A):
    • स्रोत सूक्ष्मजीव: कवक Trichoderma polysporum।
    • उपयोग: यह एक शक्तिशाली प्रतिरक्षा-संदमक कारक (Immunosuppressive agent) है, जिसका उपयोग अंग प्रत्यारोपण (जैसे किडनी या हृदय ट्रांसप्लांट) के रोगियों में ग्राफ्ट अस्वीकृति को रोकने हेतु किया जाता है।
  2. (b) स्टेटिन (Statins):
    • स्रोत सूक्ष्मजीव: यीस्ट Monascus purpureus।
    • उपयोग: यह रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने वाला कारक है। यह उस एंजाइम का प्रतिस्पर्धी संदमन (Competitive inhibition) करता है जो यकृत में कोलेस्ट्रॉल का संश्लेषण करता है।
  3. (c) स्ट्रेप्टोकाइनेज (Streptokinase):
    • स्रोत सूक्ष्मजीव: आनुवंशिक रूप से रूपांतरित जीवाणु Streptococcus।
    • उपयोग: यह 'क्लॉट बस्टर' (Clot buster) के रूप में कार्य करता है और मायोकार्डियल इन्फार्कशन (हार्ट अटैक) के मरीजों की रक्त वाहिकाओं में बने रक्त के थक्कों को पिघलाने हेतु प्रयुक्त होता है।
अंक योजना (Marking Scheme): प्रत्येक जैव-सक्रिय अणु के सही स्रोत सूक्ष्मजीव (0.5 × 3 = 1.5 अंक) तथा सही चिकित्सीय उपयोग (0.5 × 3 = 1.5 अंक) = कुल 3 अंक।
उदाहरण 3
कवकमूल (Mycorrhiza) क्या है? यह किस वंश के कवक द्वारा निर्मित होता है? पादपों को इससे होने वाले किन्हीं तीन प्रमुख लाभों का उल्लेख कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. परिभाषा: कवकों तथा उच्च पादपों की जड़ों के बीच के पारस्परिक लाभकारी सहजीवी संबंध (Symbiotic association) को कवकमूल (Mycorrhiza) कहते हैं।
  2. वंश: इस सहजीविता में सम्मिलित अधिकांश कवक Glomus वंश के सदस्य होते हैं।
  3. पादप को होने वाले तीन प्रमुख लाभ:
    • 1. फॉस्फोरस का अवशोषण: कवक जाल मृदा से उस फॉस्फोरस को अवशोषित करके पादप को देता है जिसे जड़ें सीधे अवशोषित नहीं कर सकतीं।
    • 2. मूल रोगजनकों से सुरक्षा: कवक की परत जड़ पर एक सुरक्षात्मक आवरण बनाती है जिससे मृदा-जनित रोगजनक कवक व जीवाणु जड़ पर हमला नहीं कर पाते।
    • 3. लवणता एवं सूखे के प्रति सहनशीलता: यह पादप की जल अवशोषण क्षमता बढ़ाकर प्रतिकूल परिस्थितियों जैसे सूखा एवं अत्यधिक लवणता में भी पौधे को जीवित रखती है।
अंक योजना (Marking Scheme): परिभाषा व Glomus वंश (1.5 अंक) + तीन स्पष्ट लाभ (1.5 अंक) = कुल 3 अंक।
उदाहरण 4
जैव-नियंत्रण कारक के रूप में 'बैक्यूलोवायरस' (Baculoviruses) को रासायनिक कीटनाशकों की तुलना में उत्कृष्ट क्यों माना जाता है? इसके वंश एवं अनुप्रयोग की व्याख्या कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. वंश: जैव-नियंत्रण में प्रयुक्त अधिकांश बैक्यूलोवायरस Nucleopolyhedrovirus वंश के अंतर्गत आते हैं।
  2. रासायनिक कीटनाशकों की तुलना में श्रेष्ठता के कारण:
    • प्रजाति-विशिष्टता (Species-specific): ये केवल लक्षित हानिकारक कीटों एवं आर्थ्रोपोड्स पर ही आक्रमण करते हैं।
    • संकीर्ण स्पेक्ट्रम (Narrow-spectrum biocidal applications): इनका पादपों, स्तनधारियों, पक्षियों, मछलियों अथवा अन्य गैर-लक्षित जीवों पर कोई विषैला या हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता।
    • मित्र कीटों की सुरक्षा: ये फसलों के परागण में सहायता करने वाले मित्र कीटों (जैसे मधुमक्खियां, तितलियां) को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते।
    • पारिस्थितिक संतुलन: जब किसी संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र में उपचार किया जा रहा हो या एकीकृत पीड़क प्रबंधन (IPM) कार्यक्रम चलाया जा रहा हो, तो बैक्यूलोवायरस सर्वोत्तम विकल्प सिद्ध होते हैं।
अंक योजना (Marking Scheme): वंश का नाम (1 अंक) + संकीर्ण स्पेक्ट्रम व गैर-लक्षित जीवों की सुरक्षा पर 3 बिंदु (2 अंक) = कुल 3 अंक।
उदाहरण 5
एक नामांकित आरेख की सहायता से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रयुक्त होने वाले बायोगैस संयंत्र की संरचना एवं कार्यप्रणाली की विवेचना कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: बायोगैस संयंत्र की संरचना एवं कार्यप्रणाली:

  1. प्रवेश कक्ष (Mixing Tank / Inlet): यहाँ पशुओं के ताजे गोबर को जल के साथ $1:1$ के अनुपात में मिलाकर घोल (Slurry) बनाया जाता है।
  2. पाचक टैंक (Digester): यह 10-15 फीट गहरा ईंटों व सीमेंट का वायुरोधी कंक्रीट टैंक होता है। इसमें अवायवीय जीवाणु (Methanobacterium) गोबर में उपस्थित सेल्यूलोज का अवायवीय अपघटन करते हैं।
  3. गैस धारक (Gas Holder): पाचक के ऊपर धातु (लोहे) का तैरता हुआ ड्रम होता है। जैसे-जैसे जीवाणु बायोगैस ($CH_4 + CO_2$) बनाते हैं, ड्रम ऊपर उठता जाता है। इसमें लगे गैस निकास वाल्व द्वारा गैस को पाइपों से घरों में भेजा जाता है।
  4. निकास कक्ष (Outlet / Sludge pit): किण्वन के पश्चात् बची हुई गाद (Spent slurry) बाहर निकलती है, जिसमें नाइट्रोजन और फॉस्फोरस प्रचुर मात्रा में होते हैं और यह उत्कृष्ट जैविक खाद का कार्य करती है।
अंक योजना (Marking Scheme): संयंत्र के सभी 4 घटकों का विवरण (2 अंक) + मिथेनोजेन जीवाणु व बायोगैस संघटन (1.5 अंक) + जैविक खाद का लाभ (0.5 अंक) = कुल 4 अंक।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

BOD अधिक होने का अर्थ जल का शुद्ध होना समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

BOD जितनी अधिक होगी, जल उतना ही अधिक प्रदूषित होगा; BOD कम होना इस बात का प्रमाण है कि जल शुद्ध हो चुका है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

साइक्लोस्पोरिन-ए और स्टेटिन के स्रोतों को आपस में बदल देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

साइक्लोस्पोरिन-ए कवक Trichoderma polysporum से मिलता है; जबकि स्टेटिन यीस्ट Monascus purpureus से प्राप्त होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

आसवित (Distilled) और गैर-आसवित (Undistilled) पेयों में भ्रम होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

वाइन और बियर बिना आसवन के (कम एल्कोहल) बनती हैं; व्हिस्की, ब्रांडी और रम आसवन द्वारा (अधिक एल्कोहल) बनती हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

स्विस पनीर के बड़े छिद्रों का कारण कवक लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

स्विस पनीर के बड़े छिद्र जीवाणु Propionibacterium sharmanii द्वारा अत्यधिक CO₂ उत्पादन से बनते हैं; जबकि रॉकफोर्ट पनीर कवक (Penicillium roqueforti) से परिपक्व होती है।

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीवों के विविध अनुप्रयोग (Microbes in Human Welfare Architecture)

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव (Microbes in Human Welfare)घरेलू व औद्योगिक उत्पाद • वाहितमल उपचार (STP) • बायोगैस • जैव-नियंत्रक व जैव-उर्वरक1. घरेलू उत्पाददही (LAB / Lactobacillus):• दूध प्रोटीन का जमाव व पाचन• विटामिन B₁₂ की भारी वृद्धि• आमाशय में रोगजनकों की रोकबेकर्स यीस्ट (S. cerevisiae):• ब्रेड व डोसा-इडली किण्वन• CO₂ उत्पादन से फूला आटाविशिष्ट पनीर (Cheese):• स्विस: P. sharmanii (बड़े छेद)• रॉकफोर्ट: Penicillium कवक• टॉडी: ताड़ रस किण्वन पेय2. औद्योगिक उत्पादजैव-सक्रिय अणु:• साइक्लोस्पोरिन-ए (Trichoderma) (अंग प्रत्यारोपण में इम्यूनोसप्रेसेंट)• स्टेटिन (Monascus purpureus) (रक्त कोलेस्ट्रॉल कम करने वाला)औद्योगिक एंजाइम:• स्ट्रेप्टोकाइनेज (Clot buster)• पेक्टिनेज/प्रोटिएज (रस सफाई)• लाइपेस (डिटर्जेंट तेल धब्बे)सिट्रिक अम्ल: Aspergillusपेनिसिलिन: प्रथम एंटीबायोटिक3. वाहितमल उपचार (STP)प्राथमिक उपचार (भौतिक):• क्रमिक निस्पंदन व अवसादन• प्राथमिक आपंक व बहिःस्रावद्वितीयक उपचार (जैविक):• वायवीय टैंक में ऊर्णक (Flocs)• BOD में भारी गिरावट• सक्रियित आपंक (Activated Sludge)अवायवीय आपंक संपाचित्र:• मिथेनोजेन द्वारा बायोगैस• CH₄ + CO₂ + H₂S उत्पादन• गंगा/यमुना एक्शन प्लान (GAP)4. जैव-नियंत्रण व उर्वरकजैव-नियंत्रण (IPM):• लेडीबर्ड: एफिड्स का नियंत्रण• ड्रैगनफ्लाई: मच्छर लार्वा भक्षण• Bt (Bacillus): कैटरपिलर• बैक्यूलोवायरस: संकीर्ण स्पेक्ट्रमजैव-उर्वरक (Biofertilizers):• राइजोबियम: सहजीवी N₂ स्थिरीकरण• एजोटोबैक्टर: स्वतंत्र जीवी• कवकमूल (Glomus): फॉस्फोरस• सायनोबैक्टीरिया: धान के खेत (Anabaena, Nostoc)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया (LAB) दूध को दही में बदलकर पोषण मूल्य बढ़ाते हैं तथा विटामिन B₁₂ की प्रचुर वृद्धि करते हैं।
मुख्य बिंदु 2
बेकर्स यीस्ट (Saccharomyces cerevisiae) ब्रेड किण्वन में तथा ब्रूअर्स यीस्ट एल्कोहलिक पेय बनाने में प्रयुक्त होती है।
मुख्य बिंदु 3
स्विस पनीर में बड़े छिद्र Propionibacterium sharmanii द्वारा CO₂ उत्पादन से बनते हैं; रॉकफोर्ट पनीर कवक द्वारा परिपक्व होती है।
मुख्य बिंदु 4
स्ट्रेप्टोकाइनेज (Streptococcus) क्लॉट बस्टर है; साइक्लोस्पोरिन-ए (Trichoderma) अंग प्रत्यारोपण में इम्यूनोसप्रेसेंट है; स्टेटिन (Monascus) कोलेस्ट्रॉल घटाता है।
मुख्य बिंदु 5
वाहितमल के प्राथमिक उपचार में भौतिक छानना व अवसादन होता है; द्वितीयक जैविक उपचार में वायवीय टैंक में ऊर्णक (Flocs) BOD को अत्यधिक घटाते हैं।
मुख्य बिंदु 6
BOD (Biochemical Oxygen Demand) जल प्रदूषण का सीधा माप है; कम BOD शुद्ध जल को दर्शाती है।
मुख्य बिंदु 7
अवायवीय आपंक संपाचित्र में मिथेनोजेन जीवाणु (Methanobacterium) बायोगैस (CH₄ + CO₂ + H₂S) बनाते हैं।
मुख्य बिंदु 8
Bt जीवाणु कैटरपिलर को मारता है; बैक्यूलोवायरस (Nucleopolyhedrovirus) संकीर्ण स्पेक्ट्रम, प्रजाति-विशिष्ट जैव कीटनाशक हैं।
मुख्य बिंदु 9
कवकमूल (Mycorrhiza - Glomus वंश) पादपों को फॉस्फोरस अवशोषण, रोग प्रतिरोधकता तथा सूखा सहनशीलता प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु 10
सायनोबैक्टीरिया (Anabaena, Nostoc) धान के खेतों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर अत्यंत महत्वपूर्ण जैव-उर्वरक का कार्य करते हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
अंग प्रत्यारोपण (Organ transplantation) के रोगियों में ग्राफ्ट अस्वीकृति को रोकने हेतु प्रयुक्त जैव-सक्रिय अणु 'साइक्लोस्पोरिन-ए' किस सूक्ष्मजीव से प्राप्त होता है?
(A) Trichoderma polysporum (कवक)
(B) Monascus purpureus (यीस्ट)
(C) Streptococcus (जीवाणु)
(D) Aspergillus niger
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: A
साइक्लोस्पोरिन-ए कवक Trichoderma polysporum से प्राप्त एक शक्तिशाली प्रतिरक्षा-संदमक (Immunosuppressive) कारक है।
2
वाहितमल के द्वितीयक उपचार के दौरान वायवीय टैंक में बनने वाले 'ऊर्णक' (Flocs) की सही संरचना क्या है?
(A) केवल प्रोटोजोआ का समूह
(B) कवक के तंतुओं के जाल से जुड़े जीवाणुओं के झुंड
(C) केवल शैवालों की कॉलोनी
(D) अवायवीय जीवाणुओं का समूह
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
ऊर्णक (Flocs) जीवाणुओं के ऐसे झुंड हैं जो कवक के तंतुओं से जुड़कर जालीदार संरचना बनाते हैं और BOD को घटाते हैं।
3
स्विस पनीर (Swiss cheese) में पाए जाने वाले बड़े-बड़े छिद्र किस जीवाणु द्वारा अत्यधिक CO₂ उत्पादन के कारण बनते हैं?
(A) Lactobacillus acidophilus
(B) Propionibacterium sharmanii
(C) Penicillium roqueforti
(D) Streptococcus thermophilus
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
स्विस पनीर में बड़े छिद्र Propionibacterium sharmanii जीवाणु द्वारा भारी मात्रा में CO₂ गैस उत्पन्न करने से बनते हैं।
4
कवकमूल (Mycorrhiza) सहजीविता में 'Glomus' वंश का कवक पादप को मुख्य रूप से किस पोषक तत्व का अवशोषण कराता है?
(A) नाइट्रोजन
(B) फॉस्फोरस (Phosphorus)
(C) पोटैशियम
(D) कैल्शियम
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
कवकमूल कवक (Glomus) मृदा से फॉस्फोरस को अवशोषित करके पादप को उपलब्ध कराता है।
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अध्याय 1: पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन (Sexual Reproduction in Flowering Plants) अध्याय 2: मानव जनन (Human Reproduction) (Human Reproduction) अध्याय 3: जनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) (Reproductive Health) अध्याय 4: वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत (Principles of Inheritance and Variation) अध्याय 5: वंशागति के आणविक आधार (Molecular Basis of Inheritance) अध्याय 6: विकास (Evolution) (Evolution) अध्याय 7: मानव स्वास्थ्य और रोग (Human Health and Disease) अध्याय 8: मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव (Microbes in Human Welfare) अध्याय 9: जैव प्रौद्योगिकी - सिद्धांत व प्रक्रम (Biotechnology: Principles and Processes) अध्याय 10: जैव प्रौद्योगिकी एवं इसके अनुप्रयोग (Biotechnology and its Applications) अध्याय 11: जीव और समष्टियां (Organisms and Populations) अध्याय 12: पारितंत्र (Ecosystem) (Ecosystem) अध्याय 13: जैव विविधता एवं संरक्षण (Biodiversity and Conservation)

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