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JAC • Class XII • Biology • Ch 5
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Molecular Basis of Inheritance

आणविक जीवविज्ञान (Molecular Biology) आधुनिक जीव विज्ञान की वह क्रांतिकारी शाखा है जो सजीवों में आनुवंशिक सूचनाओं के रासायनिक स्वरूप, उनके द्विगुणन, संचरण तथा अभिव्यक्ति के आणविक तंत्रों का सूक्ष्म अध्ययन करती है। अधिकांश जीवों (सभी कोशिकीय जीवों) में आनुवंशिक पदार्थ डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल (DNA) होता है, जबकि कुछ विषाणुओं (जैसे TMV, HIV, इन्फ्लूएंजा, कोरोना वायरस) में राइबोन्यूक्लिक अम्ल (RNA) आनुवंशिक पदार्थ का कार्य करता है। 1953 में जेम्स वॉटसन (James Watson) तथा फ्रांसिस क्रिक (Francis Crick) द्वारा प्रतिपादित डीएनए की द्विकुंडलिनी संरचना (Double Helix Model) ने जीवन के रहस्यों को समझने में एक युगांतरकारी क्रांति ला दी। प्रस्तुत अध्याय वंशागति के आणविक सिद्धांतों का व्यापक एवं परीक्षा-उन्मुख विश्लेषण प्रस्तुत करता है: 1. डीएनए की रासायनिक संरचना एवं पैकेजिंग: न्यूक्लियोटाइड की संरचना (नाइट्रोजनी क्षारक, डीऑक्सीराइबोज शर्करा एवं फॉस्फेट समूह), चारगाफ का समतुल्यता नियम, न्यूक्लियोसोम मॉडल (हिस्टोन अष्टक, $H_1$ लिंकर एवं 200 bp डीएनए), तथा क्रोमैटिन (यूक्रोमैटिन एवं हेटरोक्रोमैटिन)। 2. डीएनए ही आनुवंशिक पदार्थ है—प्रायोगिक प्रमाण: ग्रिफिथ का रूपांतरण प्रयोग (1928, Streptococcus pneumoniae), एवरी, मैकलियोड तथा मैकार्थी का जैव-रासायनिक प्रमाण (1944), एवं हर्षे तथा चेस का अंतिम निर्विवाद प्रमाण (1952, टी-2 बैक्टीरियोफेज एवं रेडियोधर्मी $^{32}P$ व $^{35}S$)। 3. केंद्रीय सिद्धांत (Central Dogma) एवं डीएनए द्विगुणन: मेसल्सन एवं स्टाल (1958) का अर्ध-संरक्षी प्रतिकृतियन प्रयोग ($^{15}N$ एवं CsCl घनत्व प्रवणता), प्रतिकृतियन द्विशाख (Replication Fork), डीएनए पॉलीमरेज, ओकाजाकी खंड एवं डीएनए लाइगेज। 4. अनुलेखन (Transcription) एवं संपादन: अनुलेखन इकाई (उन्नायक, संरचनात्मक जीन, समापक), यूकेरियोट्स में आरएनए पॉलीमरेज I, II, III के कार्य, तथा पश्च-अनुलेखन संपादन (Capping, Polyadenylation Tailing, एवं Intron Splicing)। 5. आनुवंशिक कूट (Genetic Code) एवं प्रोटीन संश्लेषण (Translation): जॉर्ज गैमो, नीरेनबर्ग व खुराना का योगदान, त्रिक कूट (Triplet Code) की 6 प्रमुख विशेषताएं, ट्रांसफर आरएनए (tRNA / क्लोवर लीफ मॉडल) का अनुकूलक अणु के रूप में कार्य, तथा राइबोसोम पर प्रोटीन निर्माण के तीन चरण (प्रारंभन, दीर्घीकरण एवं समापन)। 6. जीन अभिव्यक्ति का नियमन—लैक ओपेरॉन (Lac Operon Model): जैकब एवं मोनोड (1961) द्वारा प्रतिपादित ओपेरॉन मॉडल, दमनकारी प्रोटीन, प्रेरक (लैक्टोज / एलोलैक्टोज), तथा संरचनात्मक जीन ($z, y, a$) द्वारा एंजाइमों का संश्लेषण। 7. मानव जीनोम परियोजना (HGP) एवं डीएनए फिंगरप्रिंटिंग: एचजीपी की मुख्य विशेषताएं एवं अनुप्रयोग, तथा सर एलेक जेफ्रीज (Alec Jeffreys) द्वारा विकसित डीएनए फिंगरप्रिंटिंग (VNTR, सदर्न ब्लॉटिंग, प्रोब संकरण एवं न्यायालयी अनुप्रयोग)।

2.2 मीटर लंबा डीएनए हमारी 10 माइक्रोमीटर की सूक्ष्म कोशिका में कैसे समाया? और 0.1% डीएनए से हत्यारे कैसे पकड़े जाते हैं?

क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर की केवल एक एकल कोशिका के केंद्रक में लगभग 2.2 मीटर लंबा डीएनए धागा कुंडली मारकर बैठा है? यदि आपके शरीर की सभी 37 ट्रिलियन कोशिकाओं के डीएनए को एक सीध में जोड़ दिया जाए, तो वह पृथ्वी से सूर्य तक जाकर 300 बार वापस आ सकता है! प्रकृति ने इस विशालकाय सूचना पुस्तकालय को हिस्टोन प्रोटीनों के चारों ओर 'न्यूक्लियोसोम' गेंदों की तरह लपेटकर एक सूक्ष्म कोशिका में सुरक्षित कर दिया है। इतना ही नहीं, पृथ्वी पर उपस्थित 8 अरब मनुष्यों का 99.9% डीएनए बिल्कुल एक समान है! केवल 0.1% डीएनए में मौजूद दोहरावदार अनुक्रम (VNTRs) प्रत्येक इंसान को एक अद्वितीय जैविक बारकोड (DNA Fingerprint) प्रदान करते हैं, जिससे अपराध स्थल पर गिरे खून की एक बूंद या बाल से भी अपराधी बच नहीं सकता!

Why This Chapter Matters

JAC बोर्ड, CBSE तथा NEET-UG में यह अध्याय पूरी 12वीं जीवविज्ञान का निर्विवाद रूप से सबसे महत्वपूर्ण अध्याय (10 से 12 अंक) है: 1. 5-अंकीय सचित्र दीर्घ उत्तरीय प्रश्न: डीएनए प्रतिकृतियन की अर्ध-संरक्षी विधि एवं मेसल्सन-स्टाल प्रयोग, अथवा अनुलेखन इकाई एवं यूकेरियोट्स में आरएनए संपादन (Splicing), अथवा लैक ओपेरॉन का सचित्र कार्य तंत्र। 2. 3-अंकीय वैज्ञानिक प्रयोग: ग्रिफिथ का रूपांतरण सिद्धांत, अथवा हर्षे-चेस का रेडियोधर्मी फास्फोरस ($^{32}P$) व सल्फर ($^{35}S$) प्रयोग। 3. NEET-UG में सर्वाधिक प्रश्न (5 से 7 प्रश्न प्रतिवर्ष): चारगाफ का नियम ($A+G = T+C$), आनुवंशिक कूट के लक्षण (अपभ्रष्टता, असंदिग्धता, सर्वव्यापकता), लैक ओपेरॉन के जीन $z, y, a$ के उत्पाद, तथा डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के चरणों का सही क्रम।

Before You Begin (Prerequisites)

  • न्यूक्लिक अम्लों के घटक: राइबोज/डीऑक्सीराइबोज शर्करा, फॉस्फोडाइएस्टर बंध, हाइड्रोजन बंध।
  • कोशिका चक्र की S-अवस्था (जहाँ डीएनए का प्रतिकृतियन होता है)।
  • अमीनो अम्ल एवं पेप्टाइड बंध द्वारा प्रोटीन निर्माण की बुनियादी समझ।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • वॉटसन-क्रिक डीएनए मॉडल के द्विकुंडलिनी मापदंडों (पिच, व्यास, क्षारक युग्म दूरी) को स्पष्ट करना।
  • हर्षे-चेस तथा मेसल्सन-स्टाल के प्रयोगों के वैज्ञानिक तर्क, कार्यप्रणाली एवं निष्कर्षों का विश्लेषण करना।
  • डीएनए प्रतिकृतियन, अनुलेखन तथा अनुवादन की संपूर्ण आणविक एंजाइम मशीनरी का सचित्र वर्णन करना।
  • लैक ओपेरॉन में प्रेरक की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति में जीन अभिव्यक्ति के ऑन/ऑफ तंत्र को समझाना।
  • डीएनए फिंगरप्रिंटिंग की तकनीक (VNTR, रेस्ट्रिक्शन पाचन, वैद्युतकणसंचलन, सदर्न ब्लॉटिंग) का चरणबद्ध निरूपण करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. डीएनए की संरचना, चारगाफ का नियम...
2 2. डीएनए ही आनुवंशिक पदार्थ है—ऐतिह...
3 3. डीएनए प्रतिकृतियन एवं मेसल्सन-स्...
4 4. अनुलेखन, आनुवंशिक कूट एवं प्रोटी...
5 5. लैक ओपेरॉन मॉडल, मानव जीनोम परिय...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. डीएनए की संरचना, चारगाफ का नियम एवं न्यूक्लियोसोम मॉडल

डीएनए (Deoxyribonucleic Acid) डीऑक्सीराइबोन्यूक्लियोटाइड्स का एक लंबा बहुलक (Polymer) है। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड तीन घटकों से मिलकर बना होता है: 1. नाइट्रोजनी क्षारक: प्यूरीन (एडेनिन 'A' तथा ग्वानिन 'G') एवं पिरीमिडीन (साइटोसिन 'C' तथा थायमीन 'T'—आरएनए में थायमीन के स्थान पर यूरेसिल 'U' होता है); 2. पेंटोज शर्करा: 2-डीऑक्सीराइबोज शर्करा; तथा 3. फॉस्फेट समूह: जो फॉस्फोडाइएस्टर बंध द्वारा शर्करा के 5'-कार्बन से जुड़ता है।

वॉटसन एवं क्रिक का द्विकुंडलिनी मॉडल (1953):

रोजालिंड फ्रैंकलिन एवं मौरिस विल्किंस के X-रे विवर्तन (X-ray diffraction) आंकड़ों के आधार पर जेम्स वॉटसन और फ्रांसिस क्रिक ने डीएनए का बी-फॉर्म डबल हेलिक्स मॉडल दिया:

  • डीएनए दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड शृंखलाओं का बना होता है, जिनका आधार शर्करा-फॉस्फेट का होता है तथा क्षारक अंदर की ओर प्रक्षेपित होते हैं।
  • दोनों शृंखलाएं प्रति-समांतर (Anti-parallel) ध्रुवता रखती हैं; यदि एक शृंखला $5' \rightarrow 3'$ दिशा में है, तो दूसरी $3' \rightarrow 5'$ दिशा में होती है।
  • दोनों शृंखलाओं के क्षारक आपस में हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़े होते हैं: एडेनिन, थायमीन से दो हाइड्रोजन बंधों ($A = T$) द्वारा, तथा ग्वानिन, साइटोसिन से तीन हाइड्रोजन बंधों ($G \equiv C$) द्वारा जुड़ता है।
  • कुंडल की पिच (Pitch) 3.4 nm (34 Å) होती है तथा प्रत्येक मोड़ में 10 क्षारक युग्म (bp) होते हैं। अतः दो क्रमागत क्षारक युग्मों के बीच की दूरी 0.34 nm ($3.4 \times 10^{-10}\text{ m}$) होती है। डीएनए का व्यास 2 nm (20 Å) होता है।

चारगाफ का समतुल्यता नियम (Erwin Chargaff's Rules):

द्विरज्जुक डीएनए (dsDNA) में प्यूरीन की कुल मात्रा पिरीमिडीन की कुल मात्रा के सदैव बराबर होती है:

$$\frac{A + G}{T + C} = 1 \quad \implies \quad A = T \quad \text{तथा} \quad G = C$$

किंतु क्षार अनुपात $\frac{A+T}{G+C}$ एक प्रजाति के लिए विशिष्ट व स्थिर होता है, किंतु भिन्न प्रजातियों में भिन्न होता है।

डीएनए कुंडली का संवेष्टन—न्यूक्लियोसोम मॉडल (Nucleosome Model):

मानव की एक द्विगुणित कोशिका में डीएनए की कुल लंबाई लगभग 2.2 मीटर होती है ($6.6 \times 10^9\text{ bp} \times 0.34 \times 10^{-9}\text{ m} \approx 2.24\text{ m}$), जो केवल $10^{-6}\text{ m}$ व्यास वाले केंद्रक में अत्यधिक सघन रूप से पैक होती है:

  • हिस्टोन प्रोटीन: धनावेशित एवं क्षारीय प्रोटीन होते हैं, जिनमें क्षारीय अमीनो अम्ल लाइसिन (Lysine) एवं आर्जिनिन (Arginine) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
  • हिस्टोन अष्टक (Histone Octamer): हिस्टोन के 4 प्रकारों—$H_2A, H_2B, H_3, H_4$ के दो-दो अणु मिलकर एक 8-प्रोटीन कोर बनाते हैं।
  • न्यूक्लियोसोम: ऋणावेशित डीएनए धनावेशित हिस्टोन अष्टक के चारों ओर लगभग $1\frac{3}{4}$ फेरे लपेटता है। एक प्रारूपिक न्यूक्लियोसोम में लगभग 200 क्षारक युग्म (bp) डीएनए होता है।
  • लिंकर डीएनए एवं $H_1$ हिस्टोन: दो क्रमागत न्यूक्लियोसोम के बीच के डीएनए को लिंकर डीएनए कहते हैं, जिस पर $H_1$ हिस्टोन प्रोटीन जुड़ती है।
  • इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में क्रोमैटिन 'धागे पर मनके' (Beads-on-a-string) के समान दिखाई देती है।
  • यूक्रोमैटिन बनाम हेटरोक्रोमैटिन: यूक्रोमैटिन ढीले बंधे, हल्के रंग के तथा आनुवंशिक रूप से अत्यधिक सक्रिय (Transcriptionally active) होते हैं; जबकि हेटरोक्रोमैटिन घने संवेष्टित, गहरे रंग के तथा अनुलेखन रूप से निष्क्रिय (Inactive) होते हैं।

2. डीएनए ही आनुवंशिक पदार्थ है—ऐतिहासिक प्रयोग

आनुवंशिक पदार्थ की रासायनिक प्रकृति को सिद्ध करने के लिए तीन ऐतिहासिक मील के पत्थर प्रयोग किए गए:

1. फ्रेडरिक ग्रिफिथ का रूपांतरण प्रयोग (Griffith's Transformation Experiment, 1928):

ग्रिफिथ ने निमोनिया फैलाने वाले जीवाणु Streptococcus pneumoniae के दो प्रभेदों (Strains) का चूहों पर प्रयोग किया:

  • S-प्रभेद (Smooth / चिकना): म्यूकोपॉलीसेकेराइड संपुट (Capsule) युक्त, उग्र / रोगजनक (Virulent)। चूहों में निमोनिया से मृत्यु हो जाती है।
  • R-प्रभेद (Rough / खुरदरा): संपुट-विहीन, अनुग्र / अहानिकर (Non-virulent)। चूहे जीवित रहते हैं।

प्रायोगिक चरण:

  1. जीवित S-प्रभेद $\rightarrow$ चूहे में अंतःक्षेपित $\rightarrow$ चूहा मर गया।
  2. जीवित R-प्रभेद $\rightarrow$ चूहे में अंतःक्षेपित $\rightarrow$ चूहा जीवित रहा।
  3. ताप-मृत S-प्रभेद (Heat-killed S) $\rightarrow$ चूहे में अंतःक्षेपित $\rightarrow$ चूहा जीवित रहा।
  4. ताप-मृत S-प्रभेद + जीवित R-प्रभेद का मिश्रण $\rightarrow$ चूहे में अंतःक्षेपित $\rightarrow$ चूहा मर गया! तथा मृत चूहे के रक्त से जीवित S-प्रभेद जीवाणु प्राप्त हुए!

निष्कर्ष: ताप-मृत S जीवाणुओं से कोई पदार्थ जीवित R जीवाणुओं में स्थानांतरित हुआ जिसने R जीवाणुओं को संपुटयुक्त उग्र S जीवाणुओं में 'रूपांतरित' (Transform) कर दिया। इसे ग्रिफिथ ने 'रूपांतरणकारी सिद्धांत' (Transforming Principle) कहा।

2. एवरी, मैकलियोड तथा मैकार्थी का जैव-रासायनिक प्रमाण (1944):

ओसवाल्ड एवरी, कॉलिन मैकलियोड तथा मैकलिन मैकार्थी ने ताप-मृत S कोशिकाओं से शुद्ध किए गए प्रोटीनों, आरएनए तथा डीएनए का अलग-अलग एंजाइमों द्वारा पाचन किया:

  • प्रोटीऐज (Protease) मिलाने पर भी रूपांतरण नहीं रुका।
  • आरएनएऐज (RNase) मिलाने पर भी रूपांतरण नहीं रुका।
  • किंतु जब डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिएज (DNase) मिलाया गया, तो रूपांतरण पूर्णतः रुक गया!

इससे निर्विवाद सिद्ध हुआ कि रूपांतरणकारी सिद्धांत डीएनए ही है, प्रोटीन या आरएनए नहीं।

3. अल्फ्रेड हर्षे एवं मार्था चेस का प्रयोग (Hershey-Chase Experiment, 1952):

यह डीएनए के आनुवंशिक पदार्थ होने का 'अंतिम सर्वमान्य प्रमाण' (Unequivocal Proof) माना जाता है। उन्होंने जीवाणुभोजी टी-2 (Bacteriophage $T_2$) तथा E. coli जीवाणु का उपयोग किया:

  • रेडियोधर्मी सल्फर ($^{35}S$): सल्फर प्रोटीन (मेथियोनीन व सिस्टीन) में पाया जाता है, डीएनए में नहीं। इससे विषाणु का प्रोटीन आवरण (Capsid) रेडियोधर्मी हो गया।
  • रेडियोधर्मी फॉस्फोरस ($^{32}P$): फॉस्फोरस डीएनए में पाया जाता है, प्रोटीन में नहीं। इससे विषाणु का डीएनए रेडियोधर्मी हो गया।

प्रयोग के तीन चरण:

  1. संक्रमण (Infection): रेडियोधर्मी फेजों को E. coli जीवाणुओं को संक्रमित करने दिया गया।
  2. मंथन / विलोडन (Blending): ब्लेंडर में हिलाकर विषाणु आवरणों को जीवाणु कोशिका की सतह से अलग किया गया।
  3. अपकेंद्रण (Centrifugation): अपकेंद्रित्र में घुमाकर भारी जीवाणु कोशिकाओं को तलछट (Pellet) में तथा हल्के विषाणु आवरणों को अधिपलावी (Supernatant) में पृथक किया गया।

परिणाम: $^{32}P$ युक्त समूह में रेडियोधर्मिता तलछट (जीवाणु कोशिकाओं के भीतर) पाई गई, जबकि $^{35}S$ युक्त समूह में रेडियोधर्मिता अधिपलावी (विषाणु खोल) में रही। अंतिम निष्कर्ष: जीवाणु में प्रवेश करने वाला तथा संतानों में जाने वाला पदार्थ डीएनए ही है, अतः डीएनए ही आनुवंशिक पदार्थ है।

3. डीएनए प्रतिकृतियन एवं मेसल्सन-स्टाल का अर्ध-संरक्षी प्रयोग

वॉटसन तथा क्रिक ने डीएनए मॉडल प्रस्तुत करते ही कहा था: 'हमारे द्वारा कल्पित विशिष्ट युग्मन के आधार पर आनुवंशिक पदार्थ के प्रतिलिपिकरण (Replication) की क्रियाविधि का स्वतः सुझाव मिलता है।' इसे अर्ध-संरक्षी प्रतिकृतियन (Semi-conservative Replication) कहते हैं, जिसमें मातृ डीएनए के दोनों रज्जुक अलग होकर नए पूरक रज्जुकों के निर्माण हेतु सांचे (Template) का कार्य करते हैं। प्रत्येक नई संतति डीएनए में एक पुराना रज्जुक और एक नवनिर्मित रज्जुक होता है।

मेसल्सन एवं स्टाल का प्रायोगिक प्रमाण (Meselson & Stahl Experiment, 1958):

  1. उन्होंने E. coli जीवाणु को कई पीढ़ियों तक भारी नाइट्रोजन युक्त माध्यम ($^{15}NH_4Cl$) में उगाया, जिससे संपूर्ण डीएनए भारी ($^{15}N-^{15}N$) हो गया। भारी डीएनए को सीजियम क्लोराइड (CsCl) के घनत्व प्रवणता अपकेंद्रण (Density Gradient Centrifugation) द्वारा पृथक किया गया।
  2. फिर इन जीवाणुओं को सामान्य हल्के नाइट्रोजन माध्यम ($^{14}NH_4Cl$) में स्थानांतरित किया गया।
  3. 20 मिनट बाद (प्रथम पीढ़ी): निकाले गए डीएनए का घनत्व भारी और हल्के के ठीक बीच का संकर (Hybrid: $^{15}N-^{14}N$) प्राप्त हुआ।
  4. 40 मिनट बाद (द्वितीय पीढ़ी): डीएनए में 50% संकर ($^{15}N-^{14}N$) तथा 50% हल्का ($^{14}N-^{14}N$) डीएनए प्राप्त हुआ।

इस प्रयोग ने अकाट्य रूप से सिद्ध कर दिया कि डीएनए का प्रतिकृतियन अर्ध-संरक्षी होता है। (टेलर एवं सहयोगियों ने 1958 में Vicia faba की मूल कोशिकाओं में ट्राइटिएटेड थाइमिडीन का उपयोग कर गुणसूत्रों में अर्ध-संरक्षी द्विगुणन सिद्ध किया)।

डीएनए प्रतिकृतियन की आणविक मशीनरी (Replication Fork Machinery):

  • प्रतिकृतियन की उत्पत्ति (Origin of Replication - Ori): डीएनए में वह विशिष्ट बिंदु जहाँ से द्विगुणन प्रारंभ होता है।
  • हेलिकेस (Helicase): दोनों रज्जुकों के बीच के हाइड्रोजन बंधों को तोड़कर डीएनए द्विकुंडलिनी को खोलता है, जिससे Y-आकार का प्रतिकृतियन द्विशाख (Replication Fork) बनता है।
  • टोपोआइसोमरेज / डीएनए गाइरेस: डीएनए के खुलने से उत्पन्न अतिरिक्त तनाव (Supercoiling tension) को दूर करता है।
  • आरएनए प्राइमेज: डीएनए पॉलीमरेज स्वयं नया रज्जुक प्रारंभ नहीं कर सकता, अतः प्राइमेज 5-10 न्यूक्लियोटाइड लंबा छोटा आरएनए प्राइमर बनाता है।
  • डीएनए-निर्भर डीएनए पॉलीमरेज III: यह मुख्य एंजाइम है जो $5' \rightarrow 3'$ दिशा में अत्यधिक उच्च गति (लगभग 2000 bp प्रति सेकंड) एवं अत्यधिक उच्च परिशुद्धता के साथ नए रज्जुक का बहुलकीकरण करता है।
  • अग्रणी रज्जुक (Leading Strand): $3' \rightarrow 5'$ सांचे पर बनने वाला रज्जुक सतत (Continuous) रूप से $5' \rightarrow 3'$ दिशा में बनता है।
  • पश्चगामी रज्जुक (Lagging Strand): $5' \rightarrow 3'$ सांचे पर नया रज्जुक छोटे-छोटे टुकड़ों में असतत (Discontinuous) रूप से बनता है। इन छोटे टुकड़ों को ओकाजाकी खंड (Okazaki Fragments) कहते हैं।
  • डीएनए लाइगेज (DNA Ligase): यह आणविक गोंद (Molecular Glue) की तरह ओकाजाकी खंडों को फॉस्फोडाइएस्टर बंध द्वारा आपस में जोड़ देता है।

4. अनुलेखन, आनुवंशिक कूट एवं प्रोटीन संश्लेषण (Transcription & Translation)

केंद्रीय सिद्धांत (Central Dogma of Molecular Biology): 1958 में फ्रांसिस क्रिक ने प्रतिपादित किया कि आनुवंशिक सूचनाओं का प्रवाह एकदिशीय होता है:

$$\text{DNA} \xrightarrow{\text{Replication}} \text{DNA} \xrightarrow{\text{Transcription}} \text{mRNA} \xrightarrow{\text{Translation}} \text{Protein}$$

(रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन / टेमिनिज्म: रेट्रोवायरस जैसे HIV में आरएनए से डीएनए बनता है: $\text{RNA} \xrightarrow{\text{Reverse Transcriptase}} \text{cDNA}$)।

अनुलेखन इकाई (Transcription Unit):

डीएनए के रज्जुक से आनुवंशिक सूचनाओं का आरएनए में प्रतिलिपिकरण अनुलेखन कहलाता है। इसके तीन मुख्य भाग होते हैं:

  1. उन्नायक (Promoter): संरचनात्मक जीन के 5'-सिरे (अपस्ट्रीम) पर स्थित डीएनए अनुक्रम, जहाँ आरएनए पॉलीमरेज एंजाइम जुड़ता है।
  2. संरचनात्मक जीन (Structural Gene): दो रज्जुकों में से $3' \rightarrow 5'$ ध्रुवता वाला रज्जुक सांचा रज्जुक (Template strand) कहलाता है, जिसका अनुलेखन होता है। दूसरा रज्जुक ($5' \rightarrow 3'$) कूटलेखन रज्जुक (Coding strand) कहलाता है (जिसका क्रम आरएनए के समान होता है, बस T के स्थान पर U होता है)।
  3. समापक (Terminator): 3'-सिरे (डाउनस्ट्रीम) पर स्थित अनुक्रम जहाँ अनुलेखन प्रक्रिया समाप्त होती है।

यूकेरियोट्स में पश्च-अनुलेखन संपादन (Post-Transcriptional Processing):

यूकेरियोट्स में प्राथमिक अनुलेख (hnRNA - Heterogeneous nuclear RNA) में कार्यात्मक और अकार्यात्मक दोनों भाग होते हैं। इसके परिपक्वन हेतु तीन प्रक्रियाएं होती हैं:

  • स्प्लिसिंग (Splicing - समबंधन): अकार्यात्मक अनुक्रमों यानी इंट्रॉन्स (Introns) को काटकर अलग किया जाता है तथा कार्यात्मक अनुक्रमों यानी एक्सॉन्स (Exons) को एक निश्चित क्रम में लाइगेज द्वारा जोड़ा जाता है।
  • कैपिंग (Capping - आच्छादन): hnRNA के 5'-सिरे पर एक असामान्य न्यूक्लियोटाइड—मिथाइल ग्वानोसिन ट्राइफॉस्फेट ($m^7G_{ppp}$) जोड़ा जाता है।
  • पॉलीएडिनाइलेशन टेलिंग (Tailing - पुच्छन): 3'-सिरे पर लगभग 200–300 एडेनाइलेट अवशेष (Poly-A tail) जोड़े जाते हैं। अब यह पूर्ण परिपक्व mRNA कहलाता है जो केंद्रक से कोशिकाद्रव्य में आता है।

आनुवंशिक कूट की प्रमुख विशेषताएं (Salient Features of Genetic Code):

  • त्रिक कूट (Triplet Code): कुल $4^3 = 64$ कोडॉन होते हैं। इनमें से 61 कोडॉन 20 अमीनो अम्लों को कोड करते हैं, जबकि 3 कोडॉन समापक कोडॉन हैं।
  • प्रारंभक कोडॉन (Initiator Codon): AUG दोहरा कार्य करता है—यह प्रोटीन निर्माण प्रारंभ करता है तथा मेथियोनीन (Methionine) अमीनो अम्ल को कोड करता है।
  • समापक कोडॉन (Stop / Nonsense Codons): UAA (ओकर), UAG (अम्बर), UGA (ओपल) किसी भी अमीनो अम्ल को कोड नहीं करते और अनुवाद को समाप्त करते हैं।
  • असंदिग्ध एवं विशिष्ट (Unambiguous & Specific): एक विशेष कोडॉन सदैव केवल एक ही विशिष्ट अमीनो अम्ल को कोड करता है।
  • अपभ्रष्ट (Degenerate): कुछ अमीनो अम्ल एक से अधिक कोडॉनों द्वारा कोड किए जाते हैं (जैसे ल्यूसीन, सिरीन, आर्जीनिन को 6-6 कोडॉन कोड करते हैं)।
  • विरामहीन (Comma-less): mRNA पर कोडॉन बिना किसी विराम (Punctuation) के निरंतर पढ़े जाते हैं।
  • सार्वभौमिक (Universal): जीवाणु से लेकर मानव तक UUU सदैव फेनिलएलनिन को ही कोड करता है (कुछ माइटोकॉन्ड्रियल कोडॉनों को छोड़कर)।

5. लैक ओपेरॉन मॉडल, मानव जीनोम परियोजना एवं डीएनए फिंगरप्रिंटिंग

लैक ओपेरॉन (Lac Operon Model): 1961 में फ्रांकोइस जैकब (आनुवंशिकीविद्) तथा जैक्स मोनोड (जैव-रसायनज्ञ) ने E. coli में लैक्टोज के उपापचय के नियमन हेतु ओपेरॉन मॉडल प्रस्तुत किया। यह जीन अभिव्यक्ति के ऋणात्मक एवं प्रेरणीय नियमन (Negative & Inducible Regulation) का आदर्श उदाहरण है।

लैक ओपेरॉन के घटक:

  • नियामक जीन ($i$ जीन - Inhibitor): यह निरंतर (Constitutive) रूप से लैक दमनकारी (Repressor) प्रोटीन का निर्माण करता है।
  • प्रमोटर जीन ($p$): जहाँ आरएनए पॉलीमरेज जुड़ता है।
  • ऑपरेटर जीन ($o$ - प्रचालक): जिस पर दमनकारी प्रोटीन जुड़कर आरएनए पॉलीमरेज के मार्ग को अवरुद्ध कर देती है।
  • संरचनात्मक जीन (Structural Genes): पॉलीसिस्ट्रोनिक क्रम में तीन जीन होते हैं:
    1. $z$ जीन: $\\beta$-गैलेक्टोसिडेस ($\\beta$-galactosidase) बनाता है, जो लैक्टोज को ग्लूकोज एवं गैलेक्टोज में तोड़ता है।
    2. $y$ जीन: पर्मिएज (Permease) बनाता है, जो जीवाणु कोशिका में लैक्टोज की पारगम्यता बढ़ाता है।
    3. $a$ जीन: ट्रांसएसिटाइलेज (Transacetylase) बनाता है, जो एसिटाइल समूह का स्थानांतरण करता है।

कार्यप्रणाली:
• प्रेरक (Lactose) की अनुपस्थिति में (Switch OFF): दमनकारी प्रोटीन ऑपरेटर ($o$) से जुड़ जाती है, जिससे आरएनए पॉलीमरेज संरचनात्मक जीनों का अनुलेखन नहीं कर पाता।
• प्रेरक (Lactose / Allolactose) की उपस्थिति में (Switch ON): लैक्टोज दमनकारी प्रोटीन से जुड़कर उसे निष्क्रिय कर देता है। अब दमनकारी ऑपरेटर से नहीं जुड़ पाती, आरएनए पॉलीमरेज ऑपरेटर से होकर आगे बढ़ जाता है और $z, y, a$ जीनों का अनुलेखन करके तीनों एंजाइम बना देता है।

मानव जीनोम परियोजना (Human Genome Project - HGP):

1990 से 2003 तक चला 13-वर्षीय 'मेगा प्रोजेक्ट' जिसमें मानव जीनोम के संपूर्ण $3.1647 \times 10^9$ bp का अनुक्रमण किया गया।

  • मानव जीनोम में लगभग 30,000 जीन उपस्थित हैं (पहले अनुमानित 80,000–1,00,000 से बहुत कम)।
  • औसत जीन में 3000 क्षारक होते हैं; सबसे बड़ा ज्ञात मानव जीन डिस्ट्रॉफिन (Dystrophin - 2.4 मिलियन क्षारक) है।
  • जीनोम का 2% से भी कम भाग प्रोटीनों का कूटलेखन करता है; अधिकांश भाग पुनरावृत्त अनुक्रमों (Repetitive sequences) से बना है।
  • गुणसूत्र 1 पर सर्वाधिक जीन (2968) तथा Y गुणसूत्र पर सबसे कम जीन (231) हैं।
  • लगभग 1.4 मिलियन स्थानों पर एकल क्षारक बहुरूपता (SNPs - Single Nucleotide Polymorphisms) पाई जाती है।

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग (DNA Fingerprinting):

1985 में सर एलेक जेफ्रीज (Alec Jeffreys) द्वारा विकसित तकनीक (भारत में डॉ. लालजी सिंह को इसका जनक माना जाता है)। यह तकनीक जीनोम के उस हिस्से पर आधारित है जिसे सेटेलाइट डीएनए (अनुषंगी डीएनए) कहते हैं, जिसमें उच्च स्तर की बहुरूपता (DNA Polymorphism) तथा VNTR (Variable Number of Tandem Repeats - अनुषंगी लघु पुनरावृत्तियां) पाई जाती हैं।

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के मुख्य चरण:

  1. कोशिका से डीएनए का निष्कर्षण एवं विलगन।
  2. प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज (Restriction Endonuclease) एंजाइम द्वारा डीएनए का पाचन (विशिष्ट खंडों में काटना)।
  3. एगरोज जेल वैद्युतकणसंचलन (Agarose Gel Electrophoresis) द्वारा डीएनए खंडों का आकार अनुसार पृथक्करण।
  4. सदर्न ब्लॉटिंग (Southern Blotting): जेल से डीएनए खंडों को संश्लेषित झिल्ली (नायलॉन अथवा नाइट्रोसेल्युलोज) पर स्थानांतरित करना।
  5. रेडियोधर्मी चिह्नित VNTR प्रोब (Probe) द्वारा संकरण (Hybridization)।
  6. ऑटोरेलोग्राफी (Autoradiography) द्वारा एक्स-रे फिल्म पर संकरित डीएनए पट्टियों (Bands) का प्रलेखीकरण। यह बैंडिंग पैटर्न प्रत्येक व्यक्ति के लिए विशिष्ट होता है।

Key Biological Concepts, Pathways & Definitions

चारगाफ का नियम (Chargaff's Rule)
A = T, G = C | (A + G) / (T + C) = 1 (प्यूरीन = पिरीमिडीन)
केवल द्विरज्जुक डीएनए (dsDNA) पर लागू होता है
डीएनए लंबाई गणना सूत्र
लंबाई = क्षारक युग्मों की कुल संख्या (bp) × 0.34 nm (3.4 × 10⁻¹⁰ m)
मानव द्विगुणित डीएनए: 6.6 × 10⁹ bp × 0.34 × 10⁻⁹ m ≈ 2.24 मीटर
न्यूक्लियोसोम डीएनए संघटन
1 प्रारूपिक न्यूक्लियोसोम = हिस्टोन अष्टक (H2A, H2B, H3, H4)₂ + ~200 bp डीएनए + H1
कोर डीएनए = 146 bp, लिंकर डीएनए = ~54 bp
आनुवंशिक कूट सांख्यिकी (Genetic Code)
कुल कोडॉन = 4³ = 64 | सार्थक कोडॉन = 61 | समापक कोडॉन = 3 (UAA, UAG, UGA)
प्रारंभक कोडॉन: AUG (मेथियोनीन); ट्रिप्लेट कूट
मेसल्सन-स्टाल पीढ़ी डीएनए अनुपात सूत्र
n पीढ़ियों बाद कुल डीएनए अणु = 2ⁿ | संकर अणु = सदैव 2 | हल्के अणु = 2ⁿ - 2
3 पीढ़ियों (60 मिनट) बाद: कुल 8 अणु = 2 संकर (25%) + 6 हल्के (75%)

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
एक द्विरज्जुक डीएनए (dsDNA) अणु में 20% साइटोसिन (Cytosine) है। इस डीएनए में एडेनिन (Adenine) का प्रतिशत कितना होगा? चारगाफ के नियम की सहायता से गणना कीजिए।
Step-by-Step Solution:

गणना:

  1. चारगाफ के नियम के अनुसार, द्विरज्जुक डीएनए में साइटोसिन ($C$) की मात्रा ग्वानिन ($G$) के बराबर होती है:
    $$\% G = \% C = 20\%$$
  2. अतः ग्वानिन तथा साइटोसिन का कुल योग:
    $$\%(G + C) = 20\% + 20\% = 40\%$$
  3. डीएनए में कुल क्षारकों का योग $100\%$ होता है, अतः शेष प्रतिशत एडेनिन ($A$) तथा थायमीन ($T$) का होगा:
    $$\%(A + T) = 100\% - \%(G + C) = 100\% - 40\% = 60\%$$
  4. चारगाफ के नियम के अनुसार एडेनिन ($A$) तथा थायमीन ($T$) की मात्रा परस्पर समान होती है ($A = T$):
    $$\% A = \frac{60\%}{2} = 30\%$$

उत्तर: इस डीएनए अणु में एडेनिन का प्रतिशत 30% होगा। (थायमीन = 30%, ग्वानिन = 20%, साइटोसिन = 20%)।

अंक योजना (Marking Scheme): चारगाफ नियम का उल्लेख एवं G = 20% लिखने पर (1 अंक) + A+T = 60% निकालने पर (1 अंक) + अंतिम उत्तर A = 30% पर (1 अंक) = कुल 3 अंक।
Example 2
हर्षे एवं चेस ने अपने प्रयोग में जीवाणुभोजी के प्रोटीन आवरण तथा डीएनए को किन रेडियोधर्मी समस्थानिकों से चिह्नित किया था? उन्होंने यह कैसे सिद्ध किया कि डीएनए ही आनुवंशिक पदार्थ है?
Step-by-Step Solution:

उत्तर:

  1. रेडियोधर्मी समस्थानिक:
    • प्रोटीन आवरण को चिह्नित करने हेतु रेडियोधर्मी सल्फर ($^{35}S$) का उपयोग किया गया, क्योंकि सल्फर प्रोटीन में उपस्थित होता है किंतु डीएनए में नहीं।
    • डीएनए को चिह्नित करने हेतु रेडियोधर्मी फॉस्फोरस ($^{32}P$) का उपयोग किया गया, क्योंकि फॉस्फोरस डीएनए के फॉस्फेट समूह में होता है किंतु प्रोटीन में नहीं।
  2. प्रायोगिक प्रक्रिया एवं परिणाम:
    • जीवाणुभोजी द्वारा E. coli को संक्रमित कराने, ब्लेंडर में हिलाने तथा अपकेंद्रण के पश्चात्:
    • $^{32}P$ से चिह्नित प्रयोग में रेडियोधर्मिता जीवाणु कोशिकाओं (तलछट / Pellet) के भीतर पाई गई, जिससे सिद्ध हुआ कि विषाणु का डीएनए जीवाणु कोशिका में प्रविष्ट हुआ।
    • $^{35}S$ से चिह्नित प्रयोग में रेडियोधर्मिता केवल अधिपलावी (Supernatant - विषाणु खोल) में रही, जीवाणु कोशिकाओं में कोई रेडियोधर्मिता नहीं पाई गई।
  3. निष्कर्ष: चूंकि संतति विषाणुओं के निर्माण हेतु केवल डीएनए ही जीवाणु में प्रवेश करता है, अतः डीएनए ही वास्तविक आनुवंशिक पदार्थ है, प्रोटीन नहीं।
अंक योजना (Marking Scheme): रेडियोधर्मी समस्थानिकों (³⁵S व ³²P) का सही कारण सहित उल्लेख (1.5 अंक) + अपकेंद्रण के बाद तलछट व अधिपलावी के परिणाम व निष्कर्ष (1.5 अंक) = कुल 3 अंक।
Example 3
यूकेरियोट्स में प्राथमिक अनुलेख (hnRNA) से परिपक्व mRNA बनने के दौरान होने वाले पश्च-अनुलेखन संपादनों (Post-transcriptional modifications) का सचित्र अथवा चरणबद्ध वर्णन कीजिए।
Step-by-Step Solution:

उत्तर: यूकेरियोट्स में आरएनए पॉलीमरेज II द्वारा संश्लेषित प्राथमिक अनुलेख (hnRNA) में तीन मुख्य संपादन होते हैं:

  1. स्प्लिसिंग (Splicing / समबंधन):
    hnRNA में कोडिंग खंड (Exons) तथा नॉन-कोडिंग खंड (Introns) एकांतर क्रम में होते हैं। स्प्लाइसियोसोम संकुल द्वारा सभी इंट्रॉन्स को विशिष्ट स्थलों से काटकर हटा दिया जाता है और सभी एक्सॉन्स को आरएनए लाइगेज द्वारा परस्पर जोड़ दिया जाता है।
  2. कैपिंग (Capping / आच्छादन):
    hnRNA के 5'-सिरे पर एंजाइम ग्वानिलिल ट्रांसफरेज द्वारा एक असामान्य न्यूक्लियोटाइड—मिथाइल ग्वानोसिन ट्राइफॉस्फेट ($m^7G_{ppp}$) जोड़ा जाता है। यह कैप mRNA को राइबोसोम से जुड़ने में सहायता करती है तथा 5'-एक्सोन्यूक्लिएज एंजाइम से बचाती है।
  3. टेलिंग (Tailing / पुच्छन):
    hnRNA के 3'-सिरे पर पॉली-ए पॉलीमरेज एंजाइम द्वारा बिना किसी सांचे के लगभग 200 से 300 एडेनाइलिक अम्ल अवशेष जोड़े जाते हैं जिसे पॉली-ए पुच्छ (Poly-A Tail) कहते हैं। यह mRNA को स्थिरता प्रदान करती है।

इन तीनों प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के पश्चात् निर्मित परिपक्व mRNA केंद्रक छिद्रों से होकर कोशिकाद्रव्य में अनुवाद हेतु स्थानांतरित होता है।

अंक योजना (Marking Scheme): स्प्लिसिंग की स्पष्ट व्याख्या (1.5 अंक) + कैपिंग (m7Gppp) की व्याख्या (1 अंक) + टेलिंग (Poly-A tail) की व्याख्या (1 अंक) = कुल 3.5 अंक।
Example 4
लैक ओपेरॉन क्या है? लैक्टोज (प्रेरक) की उपस्थिति तथा अनुपस्थिति में इसके कार्य तंत्र को रेखाचित्र सहित समझाइए।
Step-by-Step Solution:

उत्तर: लैक ओपेरॉन E. coli में लैक्टोज के विखंडन हेतु उत्तरदायी जीनों का एक समन्वित समूह है।

1. प्रेरक (लैक्टोज) की अनुपस्थिति में (Switch OFF स्थिति):

  • नियामक जीन ($i$) निरंतर लैक दमनकारी (Lac Repressor) प्रोटीन बनाता है।
  • यह सक्रिय दमनकारी प्रोटीन ऑपरेटर जीन ($o$) से कसकर जुड़ जाती है।
  • इसके परिणामस्वरूप प्रमोटर ($p$) पर स्थित आरएनए पॉलीमरेज आगे नहीं बढ़ पाता और संरचनात्मक जीन $z, y, a$ का अनुलेखन रुक जाता है। कोई एंजाइम नहीं बनता।

2. प्रेरक (लैक्टोज / एलोलैक्टोज) की उपस्थिति में (Switch ON स्थिति):

  • माध्यम में उपस्थित लैक्टोज पर्मिएज द्वारा कोशिका में प्रवेश करता है।
  • लैक्टोज (एलोलैक्टोज) दमनकारी प्रोटीन से जुड़ जाता है, जिससे दमनकारी के त्रिविम विन्यास में परिवर्तन आ जाता है और वह निष्क्रिय हो जाती है।
  • निष्क्रिय दमनकारी ऑपरेटर ($o$) से नहीं जुड़ पाती। ऑपरेटर मुक्त हो जाता है।
  • आरएनए पॉलीमरेज ऑपरेटर से होकर संरचनात्मक जीनों का अनुलेखन करता है और पॉलीसिस्ट्रोनिक लैक mRNA बनाता है।
  • लैक mRNA से तीनों एंजाइम बनते हैं: $\beta$-गैलेक्टोसिडेस ($z$), पर्मिएज ($y$), तथा ट्रांसएसिटाइलेज ($a$)।
अंक योजना (Marking Scheme): लैक ओपेरॉन की परिभाषा व घटकों का परिचय (1 अंक) + लैक्टोज की अनुपस्थिति में ऑफ अवस्था की व्याख्या (2 अंक) + लैक्टोज की उपस्थिति में ऑन अवस्था व 3 एंजाइमों का कार्य (2 अंक) = कुल 5 अंक।
Example 5
डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के सिद्धांतों की व्याख्या कीजिए। न्यायालयी विज्ञान (Forensic Science) तथा पितृत्व विवादों में इसकी क्या उपयोगिता है?
Step-by-Step Solution:

उत्तर:

  1. सिद्धांत: मानव जीनोम का लगभग 99.9% भाग सभी व्यक्तियों में समान होता है। केवल 0.1% डीएनए में अत्यधिक बहुरूपता (Polymorphism) पाई जाती है। यह बहुरूपता अ-कूटलेखन (Non-coding) उपग्रह डीएनए में दोहरावदार अनुक्रमों के रूप में होती है जिसे VNTR (Variable Number of Tandem Repeats) या मिनीसेटेलाइट कहते हैं। किसी व्यक्ति में प्रत्येक समजात गुणसूत्र पर VNTRs की प्रतियों की संख्या माता-पिता से वंशागत होती है और प्रत्येक व्यक्ति के लिए अंगुलिछाप (Fingerprint) के समान अद्वितीय होती है (समरूप जुड़वा बच्चों को छोड़कर)।
  2. न्यायालयी विज्ञान (Forensic Science) में उपयोगिता: अपराध स्थल पर मिले रक्त की बूंद, वीर्य के धब्बे, बाल की जड़ या त्वचा कोशिकाओं से डीएनए निकालकर संदिग्ध व्यक्तियों के डीएनए बैंडिंग पैटर्न से मिलान किया जाता है। यदि दोनों का पैटर्न शत-प्रतिशत मेल खा जाए, तो अपराधी की अचूक पहचान हो जाती है।
  3. पितृत्व विवादों (Paternity Disputes) का समाधान: बच्चे के डीएनए फिंगरप्रिंट के 50% बैंड माता से तथा 50% बैंड जैविक पिता से मेल खाते हैं। यदि किसी बच्चे के बैंड संदिग्ध पिता के डीएनए से मेल नहीं खाते, तो पितृत्व को पूर्ण वैज्ञानिक सटीकता के साथ खारिज या सिद्ध किया जा सकता है।
अंक योजना (Marking Scheme): डीएनए बहुरूपता व VNTR के सिद्धांत पर (2 अंक) + न्यायालयी विज्ञान व पितृत्व विवाद में अनुप्रयोग पर (2 अंक) = कुल 4 अंक।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

यह मान लेना कि चारगाफ का नियम एकल रज्जुक आरएनए (ssRNA) या एकल रज्जुक डीएनए (ssDNA) पर भी लागू होता है।

Scientific Reality & Correction

चारगाफ का नियम (A = T, G = C) केवल द्विरज्जुक डीएनए (dsDNA) पर लागू होता है; एकल रज्जुक न्यूक्लिक अम्लों में क्षारकों का अनुपात समान होना आवश्यक नहीं है।

Common Misconception

अनुलेखन में कूटलेखन रज्जुक (Coding Strand) को वह रज्जुक समझना जिसका अनुलेखन होता है।

Scientific Reality & Correction

अनुलेखन सदैव 'सांचा रज्जुक' (Template Strand, 3'→5') का होता है। 'कूटलेखन रज्जुक' (5'→3') केवल नाम का कोडिंग है; इसका क्रम बनने वाले mRNA के समान होता है (T के स्थान पर U)।

Common Misconception

लैक ओपेरॉन में लैक्टोज को सह-दमनकारी (Co-repressor) समझ लेना।

Scientific Reality & Correction

लैक्टोज एक 'प्रेरक' (Inducer) है जो दमनकारी को निष्क्रिय करके ओपेरॉन को 'चालू' (ON) करता है।

Common Misconception

ओकाजाकी खंडों के निर्माण की दिशा को 3'→5' लिख देना।

Scientific Reality & Correction

डीएनए पॉलीमरेज केवल 5'→3' दिशा में ही संश्लेषण कर सकता है, अतः ओकाजाकी खंड भी 5'→3' दिशा में ही बनते हैं, यद्यपि संपूर्ण पश्चगामी रज्जुक का समग्र विकास विपरीत दिशा में दिखता है।

वंशागति के आणविक आधार का समग्र वैज्ञानिक आरेख (Central Dogma & Molecular Machinery)

वंशागति का आणविक आधार (Molecular Basis of Inheritance)सेंट्रल डोग्मा • डीएनए प्रतिकृतियन • अनुलेखन • अनुवादन • लैक ओपेरॉनDNA (द्विकुंडलिनी)अनुलेखन (Transcription)mRNA (hnRNA)अनुवादन (Translation)प्रोटीन (पॉलीपेप्टाइड)फेनोटाइपिक प्रकटीकरणलक्षण1. डीएनए प्रतिकृतियनअर्ध-संरक्षी विधि (Meselson):• 20 मिनट बाद: 100% संकर• 40 मिनट बाद: 50% संकर, 50% हल्काएंजाइम मशीनरी:• हेलिकेस: द्विकुंडली खोलना• DNA Pol III: 5'→3' संश्लेषण• अग्रणी रज्जुक (Continuous)• ओकाजाकी खंड (Lagging)• DNA लाइगेज: खंड जोड़नागति: ~2000 bp प्रति सेकंड2. अनुलेखन व संपादनअनुलेखन इकाई घटक:• प्रमोटर (5'-सिरा, RNA Pol)• सांचा रज्जुक (3'→5' Template)• समापक (3'-सिरा Terminator)hnRNA पश्च-संपादन:• स्प्लिसिंग: इंट्रॉन्स को काटना• कैपिंग: 5' पर m7Gppp जोड़ना• टेलिंग: 3' पर Poly-A tail• आरएनए पोल I: 28S, 18S, 5.8Sआरएनए पोल II: hnRNA/mRNA3. आनुवंशिक कूट व अनुवादजेनेटिक कोड (64 कोडॉन):• त्रिक कूट (Triplet Code)• AUG: प्रारंभक + मेथियोनीन• UAA, UAG, UGA: स्टॉप कोडॉनअनुवादन (Translation):• tRNA: क्लोवर लीफ अनुकूलक अणु• अमीनोएसिलेशन (tRNA चार्जिंग)• राइबोसोम पर पेप्टाइड बंध निर्माण• एंजाइम: पेप्टिडिल ट्रांसफरेजअसंदिग्ध, अपभ्रष्ट, सार्वभौमिक कूट4. लैक ओपेरॉन व फिंगरप्रिंटिंगलैक ओपेरॉन (Jacob & Monod):• z: $\beta$-गैलेक्टोसिडेस• y: पर्मिएज (लैक्टोज प्रवेश)• a: ट्रांसएसिटाइलेज• लैक्टोज = प्रेरक (Inducer)डीएनए फिंगरप्रिंटिंग:• सर एलेक जेफ्रीज (VNTRs)• रेस्ट्रिक्शन पाचन + सदर्न ब्लॉटिंग• रेडियोधर्मी प्रोब संकरणन्यायालयी विज्ञान व पितृत्व परीक्षण

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
डीएनए सभी कोशिकीय जीवों का आनुवंशिक पदार्थ है; वॉटसन एवं क्रिक (1953) ने इसका द्विकुंडलिनी मॉडल प्रस्तुत किया।
Takeaway 2
चारगाफ के नियम के अनुसार द्विरज्जुक डीएनए में प्यूरीन (A+G) = पिरीमिडीन (T+C) होता है तथा A=T और G≡C होता है।
Takeaway 3
न्यूक्लियोसोम मॉडल में 200 bp डीएनए धनावेशित हिस्टोन अष्टक (H2A, H2B, H3, H4)₂ के चारों ओर लिपटा होता है।
Takeaway 4
ग्रिफिथ ने रूपांतरणकारी सिद्धांत खोजा; एवरी, मैकलियोड व मैकार्थी ने इसका जैव-रासायनिक प्रमाण दिया; हर्षे व चेस ने ³²P और ³⁵S से डीएनए को निर्विवाद आनुवंशिक पदार्थ सिद्ध किया।
Takeaway 5
मेसल्सन एवं स्टाल ने ¹⁵N व ¹⁴N समस्थानिकों द्वारा सिद्ध किया कि डीएनए का प्रतिकृतियन अर्ध-संरक्षी (Semi-conservative) होता है।
Takeaway 6
डीएनए पॉलीमरेज केवल 5'→3' दिशा में संश्लेषण करता है, जिससे अग्रणी रज्जुक सतत तथा पश्चगामी रज्जुक असतत (ओकाजाकी खंड) बनता है जिन्हें डीएनए लाइगेज जोड़ता है।
Takeaway 7
सेंट्रल डोग्मा के अनुसार आनुवंशिक सूचना DNA → RNA (अनुलेखन) → प्रोटीन (अनुवादन) के रूप में प्रवाहित होती है।
Takeaway 8
यूकेरियोट्स में प्राथमिक अनुलेख hnRNA से परिपक्व mRNA बनाने हेतु स्प्लिसिंग (इंट्रॉन निष्कासन), कैपिंग (m7Gppp), और टेलिंग (Poly-A) होती है।
Takeaway 9
आनुवंशिक कूट त्रिक (Triplet), असंदिग्ध, सार्वभौमिक, अपभ्रष्ट एवं विरामहीन होता है; AUG प्रारंभक तथा UAA, UAG, UGA समापक कोडॉन हैं।
Takeaway 10
लैक ओपेरॉन जीन नियमन का आदर्श मॉडल है जहाँ लैक्टोज (प्रेरक) दमनकारी को निष्क्रिय कर z, y, a जीनों का अनुलेखन शुरू करवाता है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
हर्षे एवं चेस के प्रयोग में विषाणु के डीएनए को किस रेडियोधर्मी समस्थानिक द्वारा चिह्नित किया गया था?
(A) ³⁵S
(B) ³²P
(C) ¹⁵N
(D) ¹⁴C
Reveal Answer & Explanation
Answer: B
डीएनए में फॉस्फोरस पाया जाता है, अतः इसे रेडियोधर्मी फास्फोरस (³²P) से तथा प्रोटीन आवरण को ³⁵S से चिह्नित किया गया था।
2
मेसल्सन एवं स्टाल के प्रयोग में E. coli को ¹⁴N माध्यम में 40 मिनट (दो पीढ़ियों) तक उगाने पर संकर (¹⁵N-¹⁴N) और हल्के (¹⁴N-¹⁴N) डीएनए का अनुपात क्या था?
(A) 1 : 1 (50% संकर, 50% हल्का)
(B) 1 : 3
(C) 3 : 1
(D) 100% संकर
Reveal Answer & Explanation
Answer: A
प्रथम पीढ़ी (20 मिनट) में 100% संकर तथा द्वितीय पीढ़ी (40 मिनट) में 50% संकर और 50% हल्का डीएनए प्राप्त हुआ था।
3
लैक ओपेरॉन में 'z' संरचनात्मक जीन द्वारा कौन सा एंजाइम संश्लेषित होता है?
(A) पर्मिएज (Permease)
(B) ट्रांसएसिटाइलेज
(C) β-गैलेक्टोसिडेस (β-galactosidase)
(D) आरएनए पॉलीमरेज
Reveal Answer & Explanation
Answer: C
जीन z, β-गैलेक्टोसिडेस बनाता है जो लैक्टोज को ग्लूकोज और गैलेक्टोज में तोड़ता है।
4
प्रोटीन संश्लेषण के दौरान प्रारंभिक कोडॉन AUG किस अमीनो अम्ल को कोड करता है?
(A) फेनिलएलनिन
(B) मेथियोनीन (Methionine)
(C) वैलीन
(D) ग्लाइसीन
Reveal Answer & Explanation
Answer: B
AUG आरंभक कोडॉन है जो सदैव मेथियोनीन (यूकेरियोट्स में) अथवा N-फॉर्माइलमेथियोनीन (प्रोकैरियोट्स में) को कोड करता है।
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