डीएनए (Deoxyribonucleic Acid) डीऑक्सीराइबोन्यूक्लियोटाइड्स का एक लंबा बहुलक (Polymer) है। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड तीन घटकों से मिलकर बना होता है: 1. नाइट्रोजनी क्षारक: प्यूरीन (एडेनिन 'A' तथा ग्वानिन 'G') एवं पिरीमिडीन (साइटोसिन 'C' तथा थायमीन 'T'—आरएनए में थायमीन के स्थान पर यूरेसिल 'U' होता है); 2. पेंटोज शर्करा: 2-डीऑक्सीराइबोज शर्करा; तथा 3. फॉस्फेट समूह: जो फॉस्फोडाइएस्टर बंध द्वारा शर्करा के 5'-कार्बन से जुड़ता है।
वॉटसन एवं क्रिक का द्विकुंडलिनी मॉडल (1953):
रोजालिंड फ्रैंकलिन एवं मौरिस विल्किंस के X-रे विवर्तन (X-ray diffraction) आंकड़ों के आधार पर जेम्स वॉटसन और फ्रांसिस क्रिक ने डीएनए का बी-फॉर्म डबल हेलिक्स मॉडल दिया:
- डीएनए दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड शृंखलाओं का बना होता है, जिनका आधार शर्करा-फॉस्फेट का होता है तथा क्षारक अंदर की ओर प्रक्षेपित होते हैं।
- दोनों शृंखलाएं प्रति-समांतर (Anti-parallel) ध्रुवता रखती हैं; यदि एक शृंखला $5' \rightarrow 3'$ दिशा में है, तो दूसरी $3' \rightarrow 5'$ दिशा में होती है।
- दोनों शृंखलाओं के क्षारक आपस में हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़े होते हैं: एडेनिन, थायमीन से दो हाइड्रोजन बंधों ($A = T$) द्वारा, तथा ग्वानिन, साइटोसिन से तीन हाइड्रोजन बंधों ($G \equiv C$) द्वारा जुड़ता है।
- कुंडल की पिच (Pitch) 3.4 nm (34 Å) होती है तथा प्रत्येक मोड़ में 10 क्षारक युग्म (bp) होते हैं। अतः दो क्रमागत क्षारक युग्मों के बीच की दूरी 0.34 nm ($3.4 \times 10^{-10}\text{ m}$) होती है। डीएनए का व्यास 2 nm (20 Å) होता है।
चारगाफ का समतुल्यता नियम (Erwin Chargaff's Rules):
द्विरज्जुक डीएनए (dsDNA) में प्यूरीन की कुल मात्रा पिरीमिडीन की कुल मात्रा के सदैव बराबर होती है:
$$\frac{A + G}{T + C} = 1 \quad \implies \quad A = T \quad \text{तथा} \quad G = C$$किंतु क्षार अनुपात $\frac{A+T}{G+C}$ एक प्रजाति के लिए विशिष्ट व स्थिर होता है, किंतु भिन्न प्रजातियों में भिन्न होता है।
डीएनए कुंडली का संवेष्टन—न्यूक्लियोसोम मॉडल (Nucleosome Model):
मानव की एक द्विगुणित कोशिका में डीएनए की कुल लंबाई लगभग 2.2 मीटर होती है ($6.6 \times 10^9\text{ bp} \times 0.34 \times 10^{-9}\text{ m} \approx 2.24\text{ m}$), जो केवल $10^{-6}\text{ m}$ व्यास वाले केंद्रक में अत्यधिक सघन रूप से पैक होती है:
- हिस्टोन प्रोटीन: धनावेशित एवं क्षारीय प्रोटीन होते हैं, जिनमें क्षारीय अमीनो अम्ल लाइसिन (Lysine) एवं आर्जिनिन (Arginine) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
- हिस्टोन अष्टक (Histone Octamer): हिस्टोन के 4 प्रकारों—$H_2A, H_2B, H_3, H_4$ के दो-दो अणु मिलकर एक 8-प्रोटीन कोर बनाते हैं।
- न्यूक्लियोसोम: ऋणावेशित डीएनए धनावेशित हिस्टोन अष्टक के चारों ओर लगभग $1\frac{3}{4}$ फेरे लपेटता है। एक प्रारूपिक न्यूक्लियोसोम में लगभग 200 क्षारक युग्म (bp) डीएनए होता है।
- लिंकर डीएनए एवं $H_1$ हिस्टोन: दो क्रमागत न्यूक्लियोसोम के बीच के डीएनए को लिंकर डीएनए कहते हैं, जिस पर $H_1$ हिस्टोन प्रोटीन जुड़ती है।
- इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में क्रोमैटिन 'धागे पर मनके' (Beads-on-a-string) के समान दिखाई देती है।
- यूक्रोमैटिन बनाम हेटरोक्रोमैटिन: यूक्रोमैटिन ढीले बंधे, हल्के रंग के तथा आनुवंशिक रूप से अत्यधिक सक्रिय (Transcriptionally active) होते हैं; जबकि हेटरोक्रोमैटिन घने संवेष्टित, गहरे रंग के तथा अनुलेखन रूप से निष्क्रिय (Inactive) होते हैं।