1.1 पुंकेसर की संरचना (Structure of Stamen)
पुमंग पुष्प का नर जनन चक्र है, जिसकी प्रत्येक इकाई को पुंकेसर (Stamen) कहते हैं। पुंकेसर के दो मुख्य भाग होते हैं:
- तंतु (Filament): यह एक लंबा एवं पतला डंठलनुमा भाग है जिसका समीपस्थ छोर पुष्प के पुष्पासन (Thalamus) या दलपत्र (Petal) से जुड़ा होता है।
- परागकोश (Anther): तंतु के शीर्ष पर स्थित फूला हुआ भाग। प्ररूपी आवृतबीजी परागकोश द्विपालिक (Bilobed) तथा द्विकोष्ठकी (Ditothecous) होता है, जिसमें कुल 4 लघुबीजाणुधानियां (Tetrasporangiate) पाई जाती हैं।
1.2 लघुबीजाणुधानी की भित्ति परतें (Microsporangial Wall Layers)
एक परिपक्व लघुबीजाणुधानी बाहर से अंदर की ओर चार संकेंद्री परतों द्वारा घिरी होती है:
- बाह्यत्वचा (Epidermis): सबसे बाहरी, एकल सुरक्षात्मक परत।
- अंतस्थीसियम (Endothecium): अल्फा-सेलुलोस के रेशेदार पट्टियों वाली परत, जो आर्द्रताग्राही होती है तथा परागकोश के प्रस्फुटन (Dehiscence) में सहायता करती है।
- मध्य परतें (Middle Layers): 1 से 3 कोशिकीय परतें, जो अल्पकालिक होती हैं तथा परिपक्वता पर नष्ट हो जाती हैं।
- टेपीटम (Tapetum - सर्वाधिक महत्वपूर्ण): यह सबसे आंतरिक पोषक परत है। इसकी कोशिकाएं सघन कोशिकाद्रव्य युक्त तथा बहुकेंद्रकीय (Multinucleate / Polyploid) होती हैं। टेपीटम विकासशील परागकणों को पोषण प्रदान करती है, स्पोरोपोलिनिन पूर्वगामी (Ubisch Bodies) का स्राव करती है, तथा पराग किट (Pollen Kitt) का निर्माण करती है।
1.3 लघुबीजाणुजनन (Microsporogenesis)
लघुबीजाणुधानी के केंद्र में स्थित बीजाणुजन ऊतक (Sporogenous Tissue) की प्रत्येक कोशिका एक पराग मातृ कोशिका (Pollen Mother Cell - PMC / MMC, $2n$) की भांति कार्य करने में सक्षम होती है।
प्रत्येक PMC में अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) द्वारा 4 अगुणित ($n$) लघुबीजाणुओं का समूह बनता है, जिसे लघुबीजाणु चतुष्क (Microspore Tetrad) कहते हैं। परागकोश के शुष्क होने पर ये चतुष्क अलग होकर परागकणों (Pollen Grains) में रूपांतरित हो जाते हैं।
1.4 परागकण: नर युग्मकोद्भिद (Pollen Grain: Male Gametophyte)
परागकण नर युग्मकोद्भिद की प्रथम कोशिका का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी भित्ति द्वि-स्तरीय होती है:
- बाह्यचोल (Exine): यह बाहरी कठोर परत है जो स्पोरोपोलेनिन (Sporopollenin) की बनी होती है। स्पोरोपोलेनिन पृथ्वी पर ज्ञात सर्वाधिक प्रतिरोधी कार्बनिक पदार्थों में से एक है; यह उच्च तापमान, प्रबल अम्लों तथा क्षारों को सहन कर सकता है और कोई भी ज्ञात एंजाइम इसे अपघटित नहीं कर सकता। इसी कारण परागकण करोड़ों वर्षों तक जीवाश्म (Fossils) के रूप में सुरक्षित रहते हैं। बाह्यचोल पर जहाँ स्पोरोपोलेनिन अनुपस्थित होता है, वहाँ छोटे छिद्र पाए जाते हैं जिन्हें जनन छिद्र (Germ Pores) कहते हैं (जहाँ से पराग नलिका बाहर निकलती है)।
- अंतश्चोल (Intine): यह भीतरी पतली, सतत परत है जो सेलुलोस एवं पेक्टिन की बनी होती है।
- परागकण की कोशिकीय अवस्था: लगभग 60% आवृतबीजीयों में परागकण 2-कोशिकीय अवस्था में झड़ते हैं—एक बड़ी कायिक कोशिका (Vegetative Cell) जिसमें प्रचुर खाद्य भंडार होता है, तथा एक छोटी धुरीनुमा जनन कोशिका (Generative Cell)। शेष 40% पौधों में जनन कोशिका समसूत्री विभाजन द्वारा दो नर युग्मक बनाकर 3-कोशिकीय अवस्था में मुक्त होती है।