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JAC • Class XII • Mathematics • Ch 1
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Relations and Functions

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT कक्षा 12 गणित का प्रथम अध्याय "संबंध एवं फलन" (Relations and Functions) संपूर्ण उच्च गणित (Higher Mathematics), अमूर्त बीजगणित (Abstract Algebra) तथा कलन (Calculus) की आधारशिला है। 17वीं और 18वीं शताब्दी में रेने देकार्त (René Descartes), गॉटफ्रीड विल्हेम लाइबनिज (Gottfried Wilhelm Leibniz), लियोनार्ड ऑयलर (Leonhard Euler) तथा 19वीं शताब्दी में पीटर गुस्ताव डिरीशले (Peter Gustav Dirichlet) के ऐतिहासिक अनुसंधानों से विकसित यह अध्याय गणितीय चिंतन को अंकगणितीय संक्रियाओं से उठाकर अमूर्त संरचनाओं (Abstract Mathematical Structures) के स्तर पर स्थापित करता है। इस अध्याय में समुच्चयों के कार्तीय गुणन ($A \times B$) से संबंधों की उत्पत्ति, संबंधों के तीन मूल स्तंभ—स्वतुल्य (Reflexive), सममित (Symmetric) तथा संक्रामक (Transitive) संबंध, और इनके समागम से निर्मित तुल्यता संबंध (Equivalence Relation) व तुल्यता वर्ग (Equivalence Classes) का अत्यंत विस्तृत, प्रामाणिक एवं परीक्षा-उन्मुख विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। इसके पश्चात संबंधों के एक विशिष्ट रूप फलन (Function / Mapping) की आधुनिक संकल्पना, एकैकी (Injective / One-One), बहुएक (Many-One), आच्छादक (Surjective / Onto), अंतःक्षेपी (Into) तथा एकैकी-आच्छादी (Bijective) फलनों के बीजगणितीय व आलेखीय (Horizontal Line Test) परीक्षणों का प्रतिपादन किया गया है। अध्याय के उन्नत चरण में फलनों का संयोजन ($g \circ f$ एवं $f \circ g$), व्युत्क्रमणीय फलन (Invertible Functions) तथा प्रतिलोम ($f^{-1}$) ज्ञात करने की प्रामाणिक विधियों, और अंत में द्विआधारी संक्रियाओं (Binary Operations) के क्रमविनिमेय, साहचर्य, तत्समक एवं व्युत्क्रमणीय अवयवों की संपूर्ण सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक व्याख्या दी गई है। यह अध्याय JAC बोर्ड परीक्षा में 10+ अंक सुनिश्चित करने के साथ-साथ JEE Main, JEE Advanced तथा CUET (UG) के लिए अपरिहार्य आधार प्रदान करता है।

🚀 क्या आपने कभी सोचा है: Google का सर्च एल्गोरिदम, आधुनिक बैंक क्रिप्टोग्राफी और AI न्यूरल नेटवर्क केवल दो समुच्चयों के 'संबंध' और 'प्रतिचित्रण' के नियम पर कैसे टिके हैं?

🌐 जब आप Google पर कोई शब्द खोजते हैं, Amazon पर उत्पाद देखते हैं, या WhatsApp पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड संदेश भेजते हैं, तो पर्दे के पीछे कौन-सी गणितीय शक्ति काम कर रही होती है?

कंप्यूटर विज्ञान के सबसे बड़े आविष्कार—रिलेशनल डेटाबेस (RDBMS)—का नाम ही गणितीय 'संबंध' (Relation) से आया है। अरबों उपयोगकर्ताओं के डेटा को एक टेबल से दूसरी टेबल में जोड़ने वाली 'फॉरेन की' (Foreign Key) वस्तुतः दो समुच्चयों के बीच एक गणितीय संबंध $R \subseteq A \times B$ ही होती है!

वहीं दूसरी ओर, ऑनलाइन बैंकिंग में आपकी सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली RSA क्रिप्टोग्राफी एक विशेष एकैकी-आच्छादी फलन (Bijective Function) का उपयोग करती है, जिसे एक दिशा में हल करना सरल होता है परंतु बिना 'गुप्त कुंजी' (Private Key) के उसका प्रतिलोम फलन ($f^{-1}$) ज्ञात करना विश्व के सबसे तेज सुपरकंप्यूटर के लिए भी अरबों वर्षों का काम है!

प्रकृति में हर कारण और प्रभाव, भौतिकी के नियम ($F = ma$, $E = mc^2$), और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग का प्रत्येक फंक्शन इसी अध्याय की संताने हैं। आइए, गणित के इस सबसे शक्तिशाली और सौंदर्यपूर्ण अध्याय में प्रवेश करते हैं।

Why This Chapter Matters

झारखण्ड अधिविद्य परिषद् (JAC) कक्षा 12वीं गणित बोर्ड परीक्षा में 'संबंध एवं फलन' इकाई-1 का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है। इससे 1-अंक के वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), 2-अंक के अति-लघु उत्तरीय प्रश्न, 3-अंक के लघु उत्तरीय प्रश्न तथा 5-अंक का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (जैसे तुल्यता संबंध सिद्ध करना, तुल्यता वर्ग ज्ञात करना, अथवा परिमेय फलन की एकैकी-आच्छादकता सिद्ध कर प्रतिलोम फलन निकालना) अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। इसके अतिरिक्त, यह अध्याय संपूर्ण कलन (Calculus - 44 अंक: सांतत्य, अवकलनीयता, समाकलन एवं अवकल समीकरण) का प्रवेश द्वार है; बिना फलन के प्रांत (Domain), सह-प्रांत (Co-domain), परिसर (Range) और आच्छादकता की स्पष्ट समझ के कलन को समझना असंभव है। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे JEE Main, NDA और CUET (UG) में संबंधों की संख्या, फलनों के प्रकार एवं द्विआधारी संक्रियाओं पर प्रतिवर्ष उच्च-स्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं।

Before You Begin (Prerequisites)

  • कक्षा 11 समुच्चय सिद्धांत (Set Theory): समुच्चयों के प्रकार (रिक्त, परिमित, अपरिमित), उपसमुच्चय ($\subseteq$), घात समुच्चय ($P(A)$) तथा समुच्चयों पर संक्रियाएँ (संघ $\cup$, सर्वनिष्ठ $\cap$, अंतर)।
  • समुच्चयों का कार्तीय गुणन (Cartesian Product): क्रमित युग्म $(a, b)$ की परिभाषा तथा $A \times B = \{(a, b) : a \in A, b \in B\}$ का अर्थ।
  • वास्तविक संख्या निकाय (Real Number System): प्राकृतिक संख्याएं ($\mathbb{N}$), पूर्णांक ($\mathbb{Z}$), परिमेय संख्याएं ($\mathbb{Q}$) तथा वास्तविक संख्याएं ($\mathbb{R}$) और उनके अंतराल संकेत ($[a, b], (a, b)$)।
  • बीजगणितीय समीकरणों का समाधान तथा असमिकाओं (Inequalities) के मूल नियम।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • समुच्चयों के कार्तीय गुणन तथा संबंध की सटीक औपचारिक परिभाषा देकर रिक्त, सार्वत्रिक, तत्समक, स्वतुल्य, सममित एवं संक्रामक संबंधों की पहचान व सत्यापन कर सकेंगे।
  • किसी दिए गए संबंध को तुल्यता संबंध (Equivalence Relation) सिद्ध करने की त्रि-चरणीय प्रामाणिक कलन-विधि (Reflexive + Symmetric + Transitive) में पारंगत हो सकेंगे।
  • तुल्यता वर्ग (Equivalence Class $[a]$) की संकल्पना को समझकर समुच्चय के असंयुक्त विभाजनों (Partitions) की गणना व निर्माण कर सकेंगे।
  • फलन की आधुनिक अवधारणा को स्पष्ट करते हुए एकैकी (Injective), बहुएक (Many-One), आच्छादक (Surjective), अंतःक्षेपी (Into) तथा एकैकी-आच्छादी (Bijective) फलनों का बीजगणितीय व आलेखीय विश्लेषण कर सकेंगे।
  • फलनों के संयोजन ($g \circ f$ एवं $f \circ g$) की अस्तित्व शर्तों ($\text{Range}(f) \subseteq \text{Domain}(g)$) का परीक्षण कर संयुक्त फलनों के मान व गुणधर्म ज्ञात कर सकेंगे।
  • व्युत्क्रमणीय फलन (Invertible Function) की मूलभूत प्रमेय (व्युत्क्रमणीय $\iff$ एकैकी-आच्छादी) का अनुप्रयोग कर प्रतिलोम फलन ($f^{-1}$) की चरणबद्ध गणना कर सकेंगे।
  • द्विआधारी संक्रियाओं (Binary Operations) की संवृतता, क्रमविनिमेयता, साहचर्यता, तत्समक अवयव ($e$) तथा व्युत्क्रमणीय अवयवों ($a^{-1}$) का निर्धारण व केली सारणी (Cayley Table) का निर्माण कर सकेंगे।
  • परिमित समुच्चयों के मध्य कुल संबंधों ($2^{mn}$), स्वतुल्य संबंधों ($2^{n(n-1)}$), सममित संबंधों ($2^{\frac{n(n+1)}{2}}$), एकैकी फलनों ($^n P_m$) तथा आच्छादक फलनों की संख्या की गणना के उन्नत सूत्रों का सटीक उपयोग कर सकेंगे।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. कार्तीय गुणन, संबंधों की वैज्ञान...
2 2. संबंधों के तीन आधारभूत स्तंभ: स्...
3 3. तुल्यता संबंध, तुल्यता वर्ग एवं...
4 4. फलन की आधुनिक संकल्पना एवं फलनों...
5 5. फलनों का संयोजन (Composition of...
6 6. व्युत्क्रमणीय फलन एवं प्रतिलोम फ...
7 7. द्विआधारी संक्रियाएँ: संकल्पना,...
8 8. उन्नत गणना सूत्र, कार्डिनैलिटी प...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. कार्तीय गुणन, संबंधों की वैज्ञानिक अवधारणा एवं प्राथमिक प्रकार (Cartesian Product & Basic Relations)

1.1 समुच्चयों का कार्तीय गुणन (Cartesian Product of Sets):
गणित में किसी भी संबंध की उत्पत्ति दो समुच्चयों के कार्तीय गुणन से होती है। यदि $A$ और $B$ दो अरिक्त (Non-empty) समुच्चय हैं, तो $A$ के प्रत्येक अवयव को $B$ के प्रत्येक अवयव के साथ क्रमित रूप से मिलाने पर प्राप्त होने वाले सभी क्रमित युग्मों (Ordered Pairs) का समुच्चय, $A$ और $B$ का कार्तीय गुणन (Cartesian Product) कहलाता है। इसे प्रतीकात्मक रूप से $A \times B$ द्वारा निरूपित किया जाता है:

$$A \times B = \{(a, b) : a \in A \text{ तथा } b \in B\}$$

क्रमित युग्मों की समानता (Equality of Ordered Pairs): दो क्रमित युग्म $(a_1, b_1)$ और $(a_2, b_2)$ केवल और केवल तभी समान होते हैं जब उनके संगत प्रथम और द्वितीय घटक परस्पर बराबर हों:
$$(a_1, b_1) = (a_2, b_2) \iff a_1 = a_2 \quad \text{तथा} \quad b_1 = b_2$$

गुणधर्म / सूत्रगणितीय व्यंजकमहत्वपूर्ण निष्कर्ष एवं उदाहरण
कार्तीय गुणन की कार्डिनैलिटीयदि $n(A) = p$ तथा $n(B) = q$, तो
$$n(A \times B) = n(A) \times n(B) = p \cdot q$$
यदि $A = \{1, 2\}$ ($p=2$) और $B = \{a, b, c\}$ ($q=3$), तो $n(A \times B) = 6$।
अक्रमविनिमेयता$$A \times B \neq B \times A \quad (A \neq B)$$$(1, a) \in A \times B$ परंतु $(1, a) \notin B \times A$; क्योंकि $(a, 1) \in B \times A$।
रिक्त समुच्चय से गुणन$$A \times \emptyset = \emptyset \times A = \emptyset$$यदि किसी एक समुच्चय में कोई अवयव नहीं है, तो कोई क्रमित युग्म नहीं बन सकता।
स्वयं से गुणन ($A \times A$)$$n(A \times A) = [n(A)]^2 = n^2$$$A$ पर किसी भी द्विआधारी संबंध की आधारभूत पृष्ठभूमि।

1.2 संबंध की औपचारिक एवं वैज्ञानिक परिभाषा (Formal Definition of Relation)

समुच्चय $A$ से समुच्चय $B$ में कोई संबंध (Relation) $R$, कार्तीय गुणन $A \times B$ का कोई भी उपसमुच्चय (Subset) होता है:

$$R \subseteq A \times B$$

यदि $(a, b) \in R$, तो हम कहते हैं कि "अवयव $a$, संबंध $R$ द्वारा अवयव $b$ से संबंधित है", और इसे संकेतन में $\mathbf{aRb}$ लिखा जाता है। यदि $(a, b) \notin R$, तो हम कहते हैं कि $a$ का संबंध $b$ से नहीं है, और इसे $\mathbf{a \not\!R b}$ लिखते हैं।

समुच्चय $A$ पर संबंध (Relation on a Set $A$): यदि संबंध के दोनों समुच्चय समान हों ($A = B$), तो $A \times A$ के किसी भी उपसमुच्चय $R$ को "समुच्चय $A$ पर एक संबंध" (Relation on set $A$) कहा जाता है।

💡 कुल संभव संबंधों की संख्या (Total Number of Relations - JAC 1 Mark Guaranteed MCQ):
यदि समुच्चय $A$ में $p$ अवयव हों ($n(A) = p$) तथा समुच्चय $B$ में $q$ अवयव हों ($n(B) = q$), तो कार्तीय गुणन $A \times B$ में कुल $p \times q$ अवयव होंगे।
चूंकि किसी समुच्चय $X$ के कुल उपसमुच्चयों की संख्या $2^{n(X)}$ होती है, अतः $A \times B$ के कुल उपसमुच्चयों की संख्या $2^{pq}$ होगी।
अतः $A$ से $B$ में कुल संभव संबंधों की संख्या $= \mathbf{2^{p \cdot q}} = \mathbf{2^{n(A) \cdot n(B)}}$ होती है।
विशेष स्थिति: समुच्चय $A$ (जहाँ $n(A) = n$) पर कुल संबंधों की संख्या $= \mathbf{2^{n^2}}$ होती है। उदाहरणार्थ, यदि $n(A) = 3$, तो कुल संबंध $= 2^{3^2} = 2^9 = 512$ होंगे!

1.3 संबंध का प्रांत, सह-प्रांत एवं परिसर (Domain, Co-domain and Range)

  • प्रांत (Domain): संबंध $R$ के सभी क्रमित युग्मों के प्रथम घटकों (First Coordinates) का समुच्चय, $R$ का प्रांत कहलाता है:
    $$\text{Domain}(R) = \{a \in A : \exists b \in B \text{ सच दैट } (a, b) \in R\} \subseteq A$$
  • परिसर (Range): संबंध $R$ के सभी क्रमित युग्मों के द्वितीय घटकों (Second Coordinates) का समुच्चय, $R$ का परिसर कहलाता है:
    $$\text{Range}(R) = \{b \in B : \exists a \in A \text{ सच दैट } (a, b) \in R\} \subseteq B$$
  • सह-प्रांत (Co-domain): संपूर्ण समुच्चय $B$ को संबंध $R$ का सह-प्रांत कहा जाता है।
    अत्यंत महत्वपूर्ण निष्कर्ष: $\mathbf{\text{Range}(R) \subseteq \text{Co-domain}(R)}$। परिसर सदैव सह-प्रांत का उपसमुच्चय होता है, यह आवश्यक नहीं कि वह सह-प्रांत के बराबर ही हो।

1.4 संबंधों के तीन प्राथमिक/विशेष प्रकार (Trivial & Identity Relations)

1. रिक्त संबंध (Empty Relation)

समुच्चय $A$ पर कोई संबंध $R$ रिक्त संबंध कहलाता है यदि $A$ का कोई भी अवयव $A$ के किसी भी अवयव से संबंधित न हो, अर्थात्:
$$R = \emptyset \subseteq A \times A$$ उदाहरण: बालकों के विद्यालय में $R = \{(a, b) : a, b \text{ की बहन है}\} = \emptyset$।

2. सार्वत्रिक संबंध (Universal Relation)

समुच्चय $A$ पर कोई संबंध $R$ सार्वत्रिक संबंध कहलाता है यदि $A$ का प्रत्येक अवयव $A$ के सभी अवयवों से संबंधित हो, अर्थात्:
$$R = A \times A$$ उदाहरण: मनुष्यों के समुच्चय में $R = \{(a, b) : |\text{ऊँचाई}(a) - \text{ऊँचाई}(b)| < 5\text{ मीटर}\} = A \times A$।

3. तत्समक संबंध (Identity Relation)

समुच्चय $A$ पर संबंध $I_A$ तत्समक संबंध कहलाता है यदि $A$ का प्रत्येक अवयव केवल और केवल स्वयं से संबंधित हो:
$$I_A = \{(a, a) : \forall a \in A\}$$ यदि $A = \{1, 2\}$, तो $I_A = \{(1, 1), (2, 2)\}$। इसमें कोई अन्य युग्म नहीं आ सकता।

नोट: रिक्त संबंध $(\emptyset)$ तथा सार्वत्रिक संबंध $(A \times A)$ को सामूहिक रूप से तुच्छ संबंध (Trivial Relations) कहा जाता है।

2. संबंधों के तीन आधारभूत स्तंभ: स्वतुल्य, सममित एवं संक्रामक संबंध (Reflexive, Symmetric & Transitive Relations)

कक्षा 12वीं गणित की संपूर्ण संबंध संकल्पना तीन मूल कसौटियों पर टिकी है। झारखण्ड अधिविद्य परिषद् (JAC) की बोर्ड परीक्षा में 90% प्रश्न इन्हीं तीनों प्रकारों के परीक्षण और सत्यापन पर आधारित होते हैं। आइए प्रत्येक को उसकी गणितीय सूक्ष्मताओं, अपवादों और व्यावहारिक उदाहरणों सहित समझें:

(क) स्वतुल्य संबंध (Reflexive Relation)

औपचारिक गणितीय परिभाषा:

समुच्चय $A$ पर परिभाषित कोई संबंध $R$ स्वतुल्य (Reflexive) कहलाता है यदि $A$ का प्रत्येक अवयव स्वयं से संबंधित हो:
$$\mathbf{\forall a \in A, \quad (a, a) \in R} \quad \iff \quad \mathbf{a R a \quad (\forall a \in A)}$$

⚠️ अत्यंत महत्वपूर्ण अंतर: तत्समक संबंध बनाम स्वतुल्य संबंध (Identity vs Reflexive):
• तत्समक संबंध ($I_A$): प्रत्येक अवयव केवल और केवल स्वयं से संबंधित होना चाहिए। कोई अन्य युग्म जैसे $(a, b)$ जहां $a \neq b$ हो, कभी नहीं हो सकता।
• स्वतुल्य संबंध ($R$): प्रत्येक अवयव का स्वयं से युग्म $(a, a)$ होना अनिवार्य है, परंतु इसके अतिरिक्त अन्य युग्म $(a, b)$ भी उपस्थित हो सकते हैं!
निष्कर्ष: प्रत्येक तत्समक संबंध स्वतः ही स्वतुल्य होता है, परंतु प्रत्येक स्वतुल्य संबंध का तत्समक होना आवश्यक नहीं है ($I_A \subseteq R_{\text{refl}}$)।

स्वतुल्यता के व्यावहारिक उदाहरण:

  • समानता ($=$): वास्तविक संख्याओं के समुच्चय $\mathbb{R}$ पर संबंध $x = y$ स्वतुल्य है, क्योंकि प्रत्येक वास्तविक संख्या स्वयं के बराबर होती है: $x = x, \forall x \in \mathbb{R}$।
  • समांतरता ($\parallel$): समतल में स्थित सभी सरल रेखाओं के समुच्चय $L$ पर संबंध $L_1 \parallel L_2$ स्वतुल्य है, क्योंकि प्रत्येक रेखा स्वयं के समांतर मानी जाती है: $L_1 \parallel L_1$।
  • उपसमुच्चय ($\subseteq$): किसी समुच्चय के घात समुच्चय $P(X)$ पर $A \subseteq B$ स्वतुल्य है, क्योंकि प्रत्येक समुच्चय स्वयं का उपसमुच्चय होता है: $A \subseteq A$।
  • असफल उदाहरण (लंबवत रेखाएं $\perp$): संबंध $L_1 \perp L_2$ स्वतुल्य नहीं है, क्योंकि कोई भी सीधी रेखा स्वयं पर लंबवत नहीं हो सकती ($L_1 \not\perp L_1$)।

(ख) सममित संबंध (Symmetric Relation)

औपचारिक गणितीय परिभाषा:

समुच्चय $A$ पर परिभाषित कोई संबंध $R$ सममित (Symmetric) कहलाता है यदि जब कभी क्रमित युग्म $(a, b) \in R$ हो, तो उसका व्युत्क्रम युग्म $(b, a)$ भी $R$ में अनिवार्य रूप से उपस्थित हो:
$$\mathbf{(a, b) \in R \implies (b, a) \in R \quad \forall a, b \in A}$$ प्रतीकात्मक रूप से: $\mathbf{aRb \implies bRa}$। दूसरे शब्दों में, संबंध $R$ सममित होता है यदि और केवल यदि उसका प्रतिलोम संबंध स्वयं $R$ के बराबर हो: $\mathbf{R = R^{-1}}$।

सममितता के व्यावहारिक उदाहरण:

  • लंबवत रेखाएं ($\perp$): समतल में रेखाओं पर $L_1 \perp L_2 \implies L_2 \perp L_1$। अतः यह संबंध सममित है! (ध्यान दें: यह स्वतुल्य नहीं था, परंतु सममित है)।
  • रक्त संबंध (भाई/बहन): " $x, y$ का भाई है " पुरुषों के समुच्चय में सममित है ($x$ भाई है $y$ का $\implies y$ भाई है $x$ का), परंतु यदि समुच्चय में स्त्रियां भी शामिल हों, तो यह सममित नहीं रहेगा क्योंकि $y$ बहन हो सकती है!
  • असफल उदाहरण (छोटा होना $<$): वास्तविक संख्याओं पर $x < y \implies y < x$ संभव नहीं है (जैसे $2 < 5$, परंतु $5 \not< 2$)। अतः '$<$' सममित नहीं है।
  • असफल उदाहरण (विभाज्यता $\mid$): $\mathbb{N}$ पर $a \mid b$ (अर्थात् $a, b$ को विभाजित करता है): $2 \mid 4$, परंतु $4 \nmid 2$। अतः विभाज्यता सममित नहीं है।

(ग) संक्रामक संबंध (Transitive Relation)

औपचारिक गणितीय परिभाषा:

समुच्चय $A$ पर परिभाषित कोई संबंध $R$ संक्रामक (Transitive) कहलाता है यदि जब कभी $(a, b) \in R$ तथा $(b, c) \in R$ दोनों उपस्थित हों, तब $(a, c)$ भी $R$ में अनिवार्य रूप से उपस्थित होना चाहिए:
$$\mathbf{(a, b) \in R \text{ तथा } (b, c) \in R \implies (a, c) \in R \quad \forall a, b, c \in A}$$

🚨 सबसे बड़ा छात्र भ्रम (The Vacuous Truth Trap):
यदि किसी संबंध में $(a, b) \in R$ तो है, परंतु समुच्चय में ऐसा कोई क्रमित युग्म $(b, c) \in R$ है ही नहीं जो $b$ से प्रारंभ होता हो! तो क्या संबंध संक्रामक होगा?
उत्तर: हाँ, वह संक्रामक होगा! गणितीय तर्कशास्त्र (Mathematical Logic) के अनुसार सशर्त कथन $P \implies Q$ केवल तब असत्य (False) होता है जब $P$ सत्य हो और $Q$ असत्य हो। यदि पूर्ववर्ती शर्त $(a, b) \in R$ व $(b, c) \in R$ घटित ही नहीं हुई, तो नियम का उल्लंघन नहीं हो सकता।
उदाहरण: समुच्चय $A = \{1, 2, 3\}$ पर $R = \{(1, 2)\}$। यहाँ $(1, 2) \in R$ है, परंतु 2 से शुरू होने वाला कोई अन्य युग्म नहीं है। अतः यह संबंध संक्रामक है! (यह JAC बोर्ड का सर्वाधिक पूछा जाने वाला ट्रिकी MCQ है)।

(घ) सामान्य गणितीय संबंधों का महा-तुलनात्मक चार्ट (Master Comparison Chart)

संबंध ($R$)समुच्चयस्वतुल्य?सममित?संक्रामक?कारण एवं स्पष्टीकरण
समानता ($x = y$)$\mathbb{R}$✅ हाँ✅ हाँ✅ हाँ$x = x$; $x=y \implies y=x$; $x=y, y=z \implies x=z$। (तुल्यता संबंध)
समांतर रेखाएं ($L_1 \parallel L_2$)समतल की रेखाएं✅ हाँ✅ हाँ✅ हाँरेखा स्वयं के समांतर; $L_1 \parallel L_2 \implies L_2 \parallel L_1$; $L_1 \parallel L_2 \parallel L_3 \implies L_1 \parallel L_3$।
लंबवत रेखाएं ($L_1 \perp L_2$)समतल की रेखाएं❌ नहीं✅ हाँ❌ नहींरेखा स्वयं पर लंब नहीं हो सकती; $L_1 \perp L_2 \implies L_2 \perp L_1$; परंतु $L_1 \perp L_2$ और $L_2 \perp L_3 \implies L_1 \parallel L_3$!
छोटा होना ($x < y$)$\mathbb{R}$❌ नहीं❌ नहीं✅ हाँ$x < x$ असत्य; $x < y \implies y \not< x$; परंतु $x < y < z \implies x < z$।
छोटा या बराबर ($x \le y$)$\mathbb{R}$✅ हाँ❌ नहीं✅ हाँ$x \le x$ सत्य ($=$ के कारण); $2 \le 3$ परंतु $3 \not\le 2$; संक्रामक सत्य है।
विभाज्यता ($a \mid b$)$\mathbb{N}$✅ हाँ❌ नहीं✅ हाँ$a \mid a$; $2 \mid 4$ परंतु $4 \nmid 2$; $a \mid b$ व $b \mid c \implies a \mid c$।
उपसमुच्चय ($A \subseteq B$)घात समुच्चय $P(X)$✅ हाँ❌ नहीं✅ हाँ$A \subseteq A$; $A \subseteq B \not\implies B \subseteq A$; $A \subseteq B \subseteq C \implies A \subseteq C$।
त्रिभुजों की सर्वांगसमता ($\cong$)समतल के त्रिभुज✅ हाँ✅ हाँ✅ हाँप्रत्येक त्रिभुज स्वयं के सर्वांगसम; सममित व संक्रामक दोनों सत्य। (तुल्यता संबंध)
त्रिभुजों की समरूपता ($\sim$)समतल के त्रिभुज✅ हाँ✅ हाँ✅ हाँस्वतुल्य, सममित एवं संक्रामक तीनों संतुष्ट होते हैं। (तुल्यता संबंध)

3. तुल्यता संबंध, तुल्यता वर्ग एवं समुच्चय का विभाजन (Equivalence Relations, Equivalence Classes & Partitioning)

3.1 तुल्यता संबंध (Equivalence Relation) की संकल्पना:
गणित में वह संबंध जो समानता (Equality) के सभी आदर्श लक्षणों का निर्वहन करता है, तुल्यता संबंध कहलाता है। औपचारिक रूप से:

परिभाषा: किसी अरिक्त समुच्चय $A$ पर परिभाषित कोई संबंध $R$ एक तुल्यता संबंध (Equivalence Relation) कहलाता है यदि और केवल यदि वह निम्नलिखित तीनों शर्तों को एक साथ पूर्ण करता हो:
1. स्वतुल्य हो (Reflexive): $\forall a \in A, \quad (a, a) \in R$
2. सममित हो (Symmetric): $\forall a, b \in A, \quad (a, b) \in R \implies (b, a) \in R$
3. संक्रामक हो (Transitive): $\forall a, b, c \in A, \quad (a, b) \in R \text{ तथा } (b, c) \in R \implies (a, c) \in R$

3.2 मानक उदाहरण: पूर्णांकों पर समशेष मापांक $n$ (Congruence Modulo $n$ on $\mathbb{Z}$)

मान लीजिए $n \in \mathbb{N}$ एक निश्चित धनात्मक पूर्णांक है। पूर्णांकों के समुच्चय $\mathbb{Z}$ पर संबंध $R$ निम्न प्रकार परिभाषित है:
$$a R b \iff a \equiv b \pmod n \iff (a - b) \text{ संख्या } n \text{ से पूर्णतः विभाजित है}$$ अर्थात् $a - b = k \cdot n$, जहाँ $k \in \mathbb{Z}$।

पूर्ण औपचारिक उपपत्ति (JAC 5 Marks Standard Proof):

  1. स्वतुल्यता (Reflexivity):
    किसी भी $a \in \mathbb{Z}$ के लिए, $a - a = 0 = 0 \cdot n$।
    चूंकि 0 प्रत्येक पूर्णांक $n$ से विभाज्य है, अतः $(a, a) \in R, \forall a \in \mathbb{Z}$।
    $\implies R$ स्वतुल्य है।
  2. सममितता (Symmetry):
    मान लीजिए $a, b \in \mathbb{Z}$ तथा $(a, b) \in R$।
    $\implies a - b = k \cdot n$ (जहाँ $k \in \mathbb{Z}$)
    दोनों पक्षों में $-1$ से गुणा करने पर: $-(a - b) = -k \cdot n \implies b - a = (-k) \cdot n$।
    चूंकि $k$ एक पूर्णांक है, अतः $-k$ भी एक पूर्णांक है (मान लीजिए $-k = m \in \mathbb{Z}$)।
    $\implies b - a = m \cdot n \implies (b - a)$ संख्या $n$ से विभाज्य है।
    $\implies (b, a) \in R$। अतः $R$ सममित है।
  3. संक्रामकता (Transitivity):
    मान लीजिए $a, b, c \in \mathbb{Z}$ तथा $(a, b) \in R$ एवं $(b, c) \in R$।
    $\implies a - b = k_1 \cdot n$ तथा $b - c = k_2 \cdot n$ (जहाँ $k_1, k_2 \in \mathbb{Z}$)।
    दोनों समीकरणों को जोड़ने पर:
    $$(a - b) + (b - c) = k_1 \cdot n + k_2 \cdot n \implies a - c = (k_1 + k_2) \cdot n$$ चूंकि दो पूर्णांकों का योग सदैव एक पूर्णांक होता है ($k_1 + k_2 = k_3 \in \mathbb{Z}$),
    अतः $a - c = k_3 \cdot n \implies (a - c)$ संख्या $n$ से विभाज्य है।
    $\implies (a, c) \in R$। अतः $R$ संक्रामक है।
निष्कर्ष: चूंकि संबंध $R$ स्वतुल्य, सममित तथा संक्रामक तीनों है, अतः यह पूर्णांकों के समुच्चय $\mathbb{Z}$ पर एक तुल्यता संबंध (Equivalence Relation) है। Q.E.D.

3.3 तुल्यता वर्ग (Equivalence Class) की गहन संकल्पना

मान लीजिए $R$, समुच्चय $A$ पर एक तुल्यता संबंध है तथा $a \in A$ कोई अवयव है। $A$ के उन सभी अवयवों का उपसमुच्चय जो संबंध $R$ के अंतर्गत $a$ से संबंधित हैं, $a$ का तुल्यता वर्ग (Equivalence Class of $a$) कहलाता है। इसे प्रतीकात्मक रूप से $\mathbf{[a]}$ अथवा $\mathbf{\text{cl}(a)}$ द्वारा व्यक्त किया जाता है:

$$[a] = \{x \in A : (x, a) \in R\}$$

तुल्यता वर्गों के तीन मूलभूत प्रमेय (Three Fundamental Theorems):

प्रमेय 1: अन-रिक्तता

प्रत्येक अवयव स्वयं के तुल्यता वर्ग में अवश्य होता है:
$$\mathbf{a \in [a] \quad (\forall a \in A)}$$ (क्योंकि $R$ स्वतुल्य है, अतः $(a, a) \in R$। अतः कोई भी तुल्यता वर्ग कभी रिक्त नहीं हो सकता)।

प्रमेय 2: असंयुक्तता या पूर्ण समानता

किन्हीं दो अवयवों $a, b \in A$ के लिए, उनके तुल्यता वर्ग या तो सर्वथा समान होते हैं या परस्पर असंयुक्त (Disjoint) होते हैं:
$$[a] = [b] \iff (a, b) \in R$$ $$[a] \cap [b] = \emptyset \iff (a, b) \notin R$$ (दो तुल्यता वर्ग कभी आंशिक रूप से नहीं काट सकते!)

प्रमेय 3: समुच्चय का संपूर्ण विभाजन

सभी परस्पर असंयुक्त तुल्यता वर्गों का संघ (Union) मूल समुच्चय $A$ के पूर्णतः बराबर होता है:
$$\mathbf{\bigcup_{a \in A} [a] = A}$$ तुल्यता संबंध समुच्चय को परस्पर असंयुक्त खंडों (Partitions) में बांट देता है।

🔢 संख्यात्मक उदाहरण: समशेष मापांक 3 द्वारा $\mathbb{Z}$ का विभाजन:

यदि $a R b \iff 3 \mid (a - b)$ हो, तो शेषफल केवल 0, 1 अथवा 2 हो सकते हैं:
• $[0] = \{x \in \mathbb{Z} : x \equiv 0 \pmod 3\} = \{\dots, -6, -3, 0, 3, 6, 9, \dots\}$ (3 के गुणज)
• $[1] = \{x \in \mathbb{Z} : x \equiv 1 \pmod 3\} = \{\dots, -5, -2, 1, 4, 7, 10, \dots\}$ (3 से भाग देने पर शेषफल 1)
• $[2] = \{x \in \mathbb{Z} : x \equiv 2 \pmod 3\} = \{\dots, -4, -1, 2, 5, 8, 11, \dots\}$ (3 से भाग देने पर शेषफल 2)
यहाँ स्पष्ट है कि $[0] \cap [1] = \emptyset$, $[1] \cap [2] = \emptyset$, $[0] \cap [2] = \emptyset$, तथा $[0] \cup [1] \cup [2] = \mathbb{Z}$।
इस प्रकार तुल्यता संबंध ने अनंत पूर्णांकों के समुच्चय $\mathbb{Z}$ को 3 असंयुक्त कक्षों (Cells/Partitions) में विभाजित कर दिया!

4. फलन की आधुनिक संकल्पना एवं फलनों का वर्गीकरण (Functions: Injective, Surjective & Bijective)

4.1 फलन (Function / Mapping) की आधुनिक परिभाषा:
गणित में फलन एक विशेष प्रकार का संबंध होता है जो इनपुट और आउटपुट के मध्य एक अद्वितीय (Unique) संगति स्थापित करता है। यदि $X$ और $Y$ दो अरिक्त समुच्चय हैं, तो $X$ से $Y$ में कोई संबंध $f$ एक फलन (Function) कहलाता है यदि और केवल यदि वह निम्नलिखित दो सार्वभौमिक नियमों का पालन करे:

1. प्रांत का कोई अवयव अछूता न रहे: समुच्चय $X$ के प्रत्येक अवयव $x \in X$ का समुच्चय $Y$ में कम-से-कम एक प्रतिबिंब (Image) होना चाहिए। (अर्थात् $\text{Domain}(f) = X$)।
2. प्रतिबिंब की अद्वितीयता (Uniqueness of Image): समुच्चय $X$ के किसी भी अवयव के समुच्चय $Y$ में एक से अधिक प्रतिबिंब नहीं हो सकते।
$$\forall x \in X, \quad (x, y_1) \in f \text{ तथा } (x, y_2) \in f \implies y_1 = y_2$$

आलेखीय परीक्षण: ऊर्ध्वाधर रेखा परीक्षण (Vertical Line Test):
कार्तीय तल में कोई वक्र $y = f(x)$ फलन का प्रतिनिधित्व केवल तब करता है जब $x$-अक्ष के लंबवत (ऊर्ध्वाधर) खींची गई कोई भी सीधी रेखा वक्र को अधिकतम एक ही बिंदु पर काटे। यदि कोई ऊर्ध्वाधर रेखा वक्र को दो या अधिक बिंदुओं पर काटती है (जैसे वृत्त $x^2 + y^2 = r^2$), तो वह फलन नहीं है!

4.2 फलनों के चार मौलिक प्रकार (Four Fundamental Types of Functions)

1. एकैकी फलन (Injective / One-One Function)

कोई फलन $f: X \to Y$ एकैकी (One-One) कहलाता है यदि $X$ के भिन्न-भिन्न अवयवों के प्रतिबिंब $Y$ में भी सर्वथा भिन्न हों:
$$\mathbf{x_1 \neq x_2 \implies f(x_1) \neq f(x_2)}$$ प्रतिधनात्मक बीजगणितीय कसौटी (Standard Test):
$$\mathbf{f(x_1) = f(x_2) \implies x_1 = x_2 \quad \forall x_1, x_2 \in X}$$

• क्षैतिज रेखा परीक्षण (Horizontal Line Test): यदि $x$-अक्ष के समांतर कोई भी रेखा ग्राफ को अधिकतम एक बिंदु पर काटे।
• अवकलन परीक्षण: यदि $f'(x) > 0$ सदैव (वर्धमान) या $f'(x) < 0$ सदैव (ह्रासमान) हो, तो फलन एकैकी होता है।

2. बहुएक फलन (Many-One Function)

कोई फलन जो एकैकी नहीं होता, बहुएक (Many-One) कहलाता है। अर्थात् प्रांत में कम-से-कम दो ऐसे भिन्न अवयव $x_1, x_2$ विद्यमान हों जिनका सह-प्रांत में एक ही प्रतिबिंब हो:
$$\mathbf{\exists x_1, x_2 \in X \quad (x_1 \neq x_2) \text{ सच दैट } f(x_1) = f(x_2)}$$

• उदाहरण: $f: \mathbb{R} \to \mathbb{R}, f(x) = x^2$ बहुएक है क्योंकि $f(-2) = f(2) = 4$।
• उदाहरण: त्रिकोणमितीय फलन $f(x) = \sin x$ ($\mathbb{R} \to \mathbb{R}$) बहुएक है क्योंकि $\sin 0 = \sin \pi = 0$।

3. आच्छादक फलन (Surjective / Onto Function)

कोई फलन $f: X \to Y$ आच्छादक (Onto) कहलाता है यदि सह-प्रांत $Y$ का प्रत्येक अवयव, प्रांत $X$ के किसी-न-किसी अवयव का प्रतिबिंब अवश्य हो:
$$\mathbf{\forall y \in Y, \quad \exists x \in X \text{ सच दैट } f(x) = y}$$ स्वर्णिम कसौटी (Golden Criteria):
$$\mathbf{\text{Range}(f) = \text{Co-domain}(Y)}$$ (सह-प्रांत में कोई भी अवयव खाली/अयुग्मित नहीं छूटना चाहिए)।

4. अंतःक्षेपी फलन (Into Function)

यदि सह-प्रांत $Y$ में कम-से-कम एक ऐसा अवयव $y \in Y$ बच जाता है जो प्रांत के किसी भी अवयव का प्रतिबिंब नहीं है, तो फलन अंतःक्षेपी (Into) कहलाता है:
$$\mathbf{\text{Range}(f) \subset Y \quad (\text{Range} \neq \text{Co-domain})}$$ • उदाहरण: $f: \mathbb{R} \to \mathbb{R}, f(x) = x^2$ अंतःक्षेपी है क्योंकि ऋणात्मक संख्याएं (जैसे $-5$) किसी भी वास्तविक संख्या के वर्ग नहीं हो सकतीं ($\text{Range} = [0, \infty) \subset \mathbb{R}$)।

4.3 एकैकी-आच्छादी फलन (Bijective Function - One-One & Onto)

✨ परिभाषा: कोई फलन $f: X \to Y$ एकैकी-आच्छादी (Bijective) कहलाता है यदि वह एकैकी (Injective) तथा आच्छादक (Surjective) दोनों हो!

कार्डिनैलिटी का सार्वभौमिक नियम:
यदि $X$ और $Y$ दो परिमित समुच्चय हैं, तो उनके बीच एकैकी-आच्छादी फलन केवल और केवल तभी बन सकता है जब दोनों समुच्चयों में अवयवों की संख्या बिल्कुल समान हो: $\mathbf{n(X) = n(Y)}$।
• यदि $n(X) > n(Y)$ हो, तो फलन कभी एकैकी नहीं हो सकता (पिजनहोल सिद्धांत)।
• यदि $n(X) < n(Y)$ हो, तो फलन कभी आच्छादक नहीं हो सकता।
सर्वोच्च महत्व: किसी भी फलन का प्रतिलोम फलन ($f^{-1}$) केवल तभी संभव है जब वह फलन एकैकी-आच्छादी (Bijective) हो!

5. फलनों का संयोजन (Composition of Functions: $g \circ f$ एवं $f \circ g$)

5.1 संयोजन की औपचारिक अवधारणा:
मान लीजिए कि $f: A \to B$ तथा $g: B \to C$ दो फलन हैं। तब $f$ तथा $g$ का संयोजन (Composition), जिसे प्रतीकात्मक रूप से $\mathbf{g \circ f}$ लिखा जाता है (पढ़ा जाता है: 'g सर्किल f' अथवा 'g of f'), समुच्चय $A$ से समुच्चय $C$ में एक ऐसा नया फलन है जो निम्न प्रकार परिभाषित होता है:

$$(g \circ f)(x) = g(f(x)) \quad \forall x \in A$$

संयोजन के अस्तित्व की अनिवार्य शर्त (Existence Condition):
फलन $g \circ f$ केवल और केवल तभी परिभाषित होता है जब प्रथम फलन $f$ का परिसर (Range), द्वितीय फलन $g$ के प्रांत (Domain) का उपसमुच्चय हो:
$$\mathbf{\text{Range}(f) \subseteq \text{Domain}(g)}$$ इसी प्रकार, फलन $f \circ g$ केवल तभी परिभाषित होगा जब $\mathbf{\text{Range}(g) \subseteq \text{Domain}(f)}$।

5.2 फलनों के संयोजन के महत्वपूर्ण गुणधर्म एवं प्रमेय

गुणधर्म / प्रमेयगणितीय कथनव्याख्या एवं टिप्पणी
1. अक्रमविनिमेयता (Non-Commutative) $$g \circ f \neq f \circ g$$ सामान्यतः फलनों का संयोजन क्रमविनिमेय नहीं होता। दोनों फलनों का मान और कभी-कभी प्रांत भी भिन्न होता है।
2. साहचर्यता (Associativity) $$h \circ (g \circ f) = (h \circ g) \circ f$$ तीन फलनों $f: A \to B$, $g: B \to C$, $h: C \to D$ का संयोजन सदैव साहचर्य नियम का पालन करता है।
3. तत्समक फलन से संयोजन $$f \circ I_A = f \quad \text{तथा} \quad I_B \circ f = f$$ जहाँ $I_A$ तथा $I_B$ क्रमशः समुच्चयों $A$ तथा $B$ पर तत्समक फलन ($I(x) = x$) हैं।
4. एकैकी का संरक्षणयदि $f$ तथा $g$ दोनों एकैकी हैं, तो
$$g \circ f \text{ भी एकैकी होगा।}$$
भिन्न इनपुट पर भिन्न आउटपुट की निरंतरता बनी रहती है।
5. आच्छादक का संरक्षणयदि $f$ तथा $g$ दोनों आच्छादक हैं, तो
$$g \circ f \text{ भी आच्छादक होगा।}$$
सह-प्रांत के सभी अवयवों का पूर्व-प्रतिबिंब प्राप्त होता है।
📌 JAC परीक्षा हेतु दो अत्यधिक महत्वपूर्ण निगमन (Important Deductions):
1. यदि $g \circ f$ एकैकी है, तो प्रथम फलन $f$ का एकैकी होना अनिवार्य है (भले ही $g$ एकैकी न हो!)।
2. यदि $g \circ f$ आच्छादक है, तो द्वितीय फलन $g$ का आच्छादक होना अनिवार्य है (भले ही $f$ आच्छादक न हो!)।
3. यदि $g \circ f$ एकैकी-आच्छादी (Bijective) है, तो $f$ एकैकी होगा तथा $g$ आच्छादक होगा।

6. व्युत्क्रमणीय फलन एवं प्रतिलोम फलन की गणना (Invertible Functions & Inverse Function)

6.1 व्युत्क्रमणीय फलन (Invertible Function) की आधुनिक परिभाषा:
मान लीजिए कि $f: X \to Y$ एक फलन है। फलन $f$ को व्युत्क्रमणीय (Invertible) कहा जाता है यदि एक ऐसे फलन $g: Y \to X$ का अस्तित्व हो जिसके लिए:

$$g \circ f = I_X \quad \text{तथा} \quad f \circ g = I_Y$$

जहाँ $I_X$ समुच्चय $X$ पर तत्समक फलन है ($I_X(x) = x, \forall x \in X$) तथा $I_Y$ समुच्चय $Y$ पर तत्समक फलन है ($I_Y(y) = y, \forall y \in Y$)।
ऐसी स्थिति में, फलन $g$ को फलन $f$ का प्रतिलोम (Inverse) कहा जाता है और इसे $\mathbf{f^{-1}}$ द्वारा निरूपित किया जाता है:
$$\mathbf{g = f^{-1}: Y \to X} \quad \iff \quad \mathbf{f(x) = y \iff f^{-1}(y) = x}$$

6.2 व्युत्क्रमणीयता की मूलभूत प्रमेय (The Fundamental Invertibility Theorem)

🏆 प्रमेय: कोई फलन $f: X \to Y$ व्युत्क्रमणीय होता है यदि और केवल यदि $f$ एकैकी-आच्छादी (Bijective) हो!

उपपत्ति का सारांश (Why Bijectivity is Essential):
1. एकैकी क्यों आवश्यक है? यदि $f$ बहुएक (Many-One) हो, जैसे $f(x_1) = f(x_2) = y$, तो उल्टी दिशा में $g(y)$ के दो मान ($x_1$ और $x_2$) हो जाएंगे। फलन की परिभाषा के अनुसार एक अवयव के दो प्रतिबिंब नहीं हो सकते, अतः $g$ फलन ही नहीं रहेगा!
2. आच्छादक क्यों आवश्यक है? यदि $f$ अंतःक्षेपी (Into) हो, तो $Y$ में कुछ ऐसे अवयव होंगे जिनका $X$ में कोई पूर्व-प्रतिबिंब नहीं है। उल्टी दिशा में उन अवयवों के लिए $g$ कोई आउटपुट नहीं दे पाएगा, जिससे $g$ का प्रांत संपूर्ण $Y$ नहीं बन सकेगा!
अतः प्रतिलोम $f^{-1}$ के अस्तित्व के लिए $f$ का एकैकी और आच्छादक दोनों होना गणितीय अनिवार्यता है।

6.3 प्रतिलोम फलन ज्ञात करने की चरणबद्ध कलन-विधि (Step-by-Step Algorithm - JAC 5 Marks)

  1. चरण 1 (एकैकी सिद्ध करें): $f(x_1) = f(x_2)$ मानकर बीजगणितीय हल द्वारा $x_1 = x_2$ प्राप्त करें।
  2. चरण 2 (आच्छादक सिद्ध करें): $y = f(x)$ मानकर समीकरण को हल करें और $x$ को $y$ के पदों में व्यक्त करें: $\mathbf{x = g(y)}$। फिर दिखाएं कि प्रत्येक $y \in Y$ के लिए $x \in X$ है तथा $f(g(y)) = y$।
  3. चरण 3 (प्रतिलोम का निर्धारण): चूंकि $x = f^{-1}(y)$, अतः $f^{-1}(y) = g(y)$।
  4. चरण 4 (मानक चर में रूपांतरण): चर $y$ के स्थान पर स्वतंत्र चर $x$ प्रतिस्थापित कर अभीष्ट प्रतिलोम फलन $\mathbf{f^{-1}(x)}$ प्राप्त करें।
🔄 प्रतिलोम संयोजन का उत्क्रमण नियम (Reversal Law of Inverses - Shoe & Sock Rule):
यदि $f: A \to B$ तथा $g: B \to C$ दो व्युत्क्रमणीय फलन हों, तो उनका संयोजन $g \circ f: A \to C$ भी व्युत्क्रमणीय होता है और उसका प्रतिलोम निम्न प्रकार खुलता है:
$$\mathbf{(g \circ f)^{-1} = f^{-1} \circ g^{-1}}$$ व्यावहारिक उपमा: जैसे हम पहले मोजा (Sock) पहनते हैं और फिर जूता (Shoe) पहनते हैं, परंतु उतारते समय पहले जूता उतारना पड़ता है और बाद में मोजा! ठीक उसी प्रकार संक्रिया में $g$ बाद में लागू हुआ था, परंतु प्रतिलोम में $g^{-1}$ पहले लागू होगा।

7. द्विआधारी संक्रियाएँ: संकल्पना, गुणधर्म एवं सारणी (Binary Operations & Cayley Tables)

7.1 द्विआधारी संक्रिया (Binary Operation) की वैज्ञानिक परिभाषा:
अंकगणित में जोड़ ($+$), घटाव ($-$), गुणा ($\times$) तथा भाग ($\div$) वे मौलिक क्रियाएं हैं जो दो संख्याओं पर लागू होकर एक नई संख्या प्रदान करती हैं। अमूर्त बीजगणित में इसे व्यापक रूप देकर द्विआधारी संक्रिया कहा जाता है।

$$\mathbf{* : A \times A \to A}$$

औपचारिक रूप से, किसी अरिक्त समुच्चय $A$ पर कोई द्विआधारी संक्रिया (Binary Operation) $*$ एक ऐसा फलन है जो $A \times A$ के प्रत्येक क्रमित युग्म $(a, b)$ को $A$ के ही एक अद्वितीय अवयव $\mathbf{a * b}$ से संबद्ध करता है।

संवृत गुणधर्म (Closure Property): यदि संक्रिया का परिणाम समुच्चय $A$ से बाहर चला जाए, तो वह संक्रिया उस समुच्चय पर द्विआधारी संक्रिया नहीं हो सकती! उदाहरणार्थ:
• प्राकृत संख्याओं $\mathbb{N}$ पर व्यवकलन (घटाव $-$) द्विआधारी संक्रिया नहीं है, क्योंकि $3 - 7 = -4 \notin \mathbb{N}$।
• परंतु पूर्णांकों $\mathbb{Z}$ पर व्यवकलन द्विआधारी संक्रिया है, क्योंकि $a - b \in \mathbb{Z}, \forall a, b \in \mathbb{Z}$।
• वास्तविक संख्याओं $\mathbb{R}$ पर भाग ($\div$) द्विआधारी संक्रिया नहीं है क्योंकि शून्य से भाग ($a \div 0$) अपरिभाषित है। परंतु $\mathbb{R} - \{0\}$ पर भाग द्विआधारी संक्रिया है।

7.2 द्विआधारी संक्रियाओं के चार आधारभूत बीजगणितीय नियम

बीजगणितीय नियमगणितीय शर्तउदाहरण एवं महत्वपूर्ण टिप्पणी
1. क्रमविनिमेयता (Commutativity)$$a * b = b * a \quad \forall a, b \in A$$$\mathbb{R}$ पर योग और गुणन क्रमविनिमेय हैं ($a+b=b+a$), परंतु व्यवकलन व भाग क्रमविनिमेय नहीं हैं ($a-b \neq b-a$)।
2. साहचर्यता (Associativity)$$(a * b) * c = a * (b * c) \quad \forall a, b, c \in A$$कोष्ठक बदलने पर परिणाम अपरिवर्तित रहना चाहिए। तीन या अधिक अवयवों की संक्रिया में साहचर्यता अनिवार्य है।
3. तत्समक अवयव (Identity Element $e$)$$a * e = e * a = a \quad \forall a \in A$$• योग हेतु तत्समक अवयव: $e = 0$ ($a+0 = a$)
• गुणन हेतु तत्समक अवयव: $e = 1$ ($a \times 1 = a$)
प्रमेय: तत्समक अवयव यदि विद्यमान हो, तो वह अद्वितीय (Unique) होता है।
4. व्युत्क्रमणीय अवयव (Invertible Element $a^{-1}$)$$a * b = b * a = e \implies b = a^{-1}$$• योग में $a$ का व्युत्क्रम: $-a$ ($a + (-a) = 0$)
• गुणन में $a$ का व्युत्क्रम: $\frac{1}{a}$ ($a \times \frac{1}{a} = 1, a \neq 0$)
शर्त: व्युत्क्रम केवल तब निकल सकता है जब तत्समक अवयव $e$ विद्यमान हो!

7.3 केली संक्रिया सारणी (Cayley Operation Table for Finite Sets)

परिमित समुच्चयों पर द्विआधारी संक्रिया को एक सारणी के रूप में दर्शाया जाता है जिसे केली सारणी कहते हैं। उदाहरणार्थ, समुच्चय $A = \{1, -1\}$ पर सामान्य गुणन ($\times$) की संक्रिया सारणी:

$\times$$1$$-1$
$1$$1$$-1$
$-1$$-1$$1$

सारणी से प्रत्यक्ष निष्कर्ष: सभी प्रविष्टियाँ समुच्चय में हैं (संवृत); मुख्य विकर्ण (Main Diagonal) के परितः सारणी सममित है (क्रमविनिमेय); प्रथम पंक्ति व प्रथम स्तंभ समान हैं, अतः $e = 1$ तत्समक अवयव है; $1 \times 1 = 1 \implies 1^{-1} = 1$, तथा $(-1) \times (-1) = 1 \implies (-1)^{-1} = -1$।

8. उन्नत गणना सूत्र, कार्डिनैलिटी प्रमेय एवं प्रतियोगी परीक्षा तकनीकें (Counting Theorems & Advanced Matrix)

JAC बोर्ड के वस्तुनिष्ठ बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) तथा JEE Main व CUET की प्रतियोगी परीक्षाओं में संबंधों और फलनों की विभिन्न श्रेणियों की संख्या पर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। निम्नलिखित महा-सूत्र तालिका छात्रों के लिए एक संपूर्ण रेडी-रेकनर है:

प्रमेय / गणना का प्रकारगणना सूत्र (Mathematical Formula)उदाहरण ($n=3$ अथवा $m=3, n=2$)
1. कुल संभव संबंध ($A$ से $B$)$$2^{n(A) \cdot n(B)} = 2^{m \cdot n}$$$2^{3 \times 2} = 2^6 = 64$
2. समुच्चय $A$ पर कुल संबंध$$2^{n^2}$$$n=3 \implies 2^{3^2} = 2^9 = 512$
3. स्वतुल्य संबंधों की संख्या (Reflexive)$$2^{n^2 - n} = 2^{n(n-1)}$$$n=3 \implies 2^{3(2)} = 2^6 = 64$
4. सममित संबंधों की संख्या (Symmetric)$$2^{\frac{n(n+1)}{2}}$$$n=3 \implies 2^{\frac{3(4)}{2}} = 2^6 = 64$
5. स्वतुल्य एवं सममित दोनों संबंधों की संख्या$$2^{\frac{n(n-1)}{2}}$$$n=3 \implies 2^{\frac{3(2)}{2}} = 2^3 = 8$
6. तुल्यता संबंधों की संख्या (Bell Numbers $B_n$)$$B_1=1, B_2=2, B_3=5, B_4=15, B_5=52$$$n=3 \implies B_3 = 5$ संबंध
7. कुल फलनों की संख्या ($A \to B$)$$[n(B)]^{n(A)} = n^m$$$2^3 = 8$ फलन
8. एकैकी फलनों की संख्या (One-One)$$\begin{cases} ^n P_m = \frac{n!}{(n-m)!} & (m \le n) \\ 0 & (m > n) \end{cases}$$यदि $m=3, n=2$, तो $m > n \implies 0$ (कोई एकैकी फलन नहीं बन सकता!)
9. एकैकी-आच्छादी फलनों की संख्या (Bijective)$$\begin{cases} n! & (m = n) \\ 0 & (m \neq n) \end{cases}$$$n=3 \implies 3! = 6$ बाइजेक्टिव फलन
10. आच्छादक फलनों की संख्या (Onto Functions)$$\sum_{r=0}^{n} (-1)^{n-r} \binom{n}{r} r^m$$यदि $m=3, n=2$:
$2^3 - \binom{2}{1} 1^3 = 8 - 2 = 6$ आच्छादक फलन
11. द्विआधारी संक्रियाओं की संख्या$$n^{n^2}$$$n=2 \implies 2^{2^2} = 2^4 = 16$
12. क्रमविनिमेय द्विआधारी संक्रियाओं की संख्या$$n^{\frac{n(n+1)}{2}}$$$n=2 \implies 2^{\frac{2(3)}{2}} = 2^3 = 8$

Key Formulas, Identities & Theorems

कार्तीय गुणन एवं कुल संबंध
$$n(A \times B) = m \cdot n \implies \text{Total Relations} = 2^{m \cdot n}$$
यदि n(A)=m तथा n(B)=n हो। समुच्चय A पर कुल संबंध = 2^(n²)।
स्वतुल्य संबंध की शर्त
$$\forall a \in A, \quad (a, a) \in R \iff aRa$$
समुच्चय A के प्रत्येक अवयव का स्वयं से युग्मित होना अनिवार्य है।
सममित संबंध की शर्त
$$(a, b) \in R \implies (b, a) \in R \quad \forall a, b \in A$$
संबंध का प्रतिलोम स्वयं उसके बराबर होता है: R = R⁻¹।
संक्रामक संबंध की शर्त
(a, b) R तथा (b, c) R ⇒ (a, c) R
यदि (a,b)∈R है परंतु b से शुरू होने वाला कोई युग्म नहीं है, तो संबंध संक्रामक होता है।
तुल्यता संबंध (Equivalence Relation)
$$R \text{ is Reflexive} + \text{Symmetric} + \text{Transitive}$$
समानता (=), सर्वांगसमता (≅), समशेष मापांक n इसके आदर्श उदाहरण हैं।
तुल्यता वर्ग (Equivalence Class)
$$[a] = \{x \in A : (x, a) \in R\}$$
तुल्यता वर्ग परस्पर असंयुक्त होते हैं: [a] ∩ [b] = ∅ अथवा [a] = [b]।
एकैकी फलन (Injective / One-One)
$$f(x_1) = f(x_2) \implies x_1 = x_2 \quad (\forall x_1, x_2 \in X)$$
क्षैतिज रेखा परीक्षण: ग्राफ को क्षैतिज रेखा अधिकतम 1 बिंदु पर काटती है।
आच्छादक फलन (Surjective / Onto)
$$\text{Range}(f) = \text{Co-domain}(Y) \iff \forall y \in Y, \exists x \in X: f(x)=y$$
सह-प्रांत का कोई भी अवयव बिना पूर्व-प्रतिबिंब के नहीं रहना चाहिए।
एकैकी-आच्छादी फलन (Bijective)
$$f \text{ is Injective (One-One)} + \text{Surjective (Onto)}$$
व्युत्क्रमणीयता (Invertibility) की एकमात्र अनिवार्य एवं पर्याप्त शर्त।
फलनों का संयोजन (Composition)
$$(g \circ f)(x) = g(f(x)) \quad [\text{Range}(f) \subseteq \text{Domain}(g)]$$
साहचर्य होता है h ∘ (g ∘ f) = (h ∘ g) ∘ f; सामान्यतः g ∘ f ≠ f ∘ g।
व्युत्क्रमणीय फलन एवं प्रतिलोम
g f = I_X तथा f g = I_Y ⇒ g = f^{-1}
उत्क्रमण नियम (Shoe-Sock Rule): (g ∘ f)⁻¹ = f⁻¹ ∘ g⁻¹।
द्विआधारी संक्रिया: तत्समक एवं व्युत्क्रम
a * e = e * a = a तथा a * b = b * a = e ⇒ b = a^{-1}
तत्समक अवयव (e) सदैव अद्वितीय होता है; व्युत्क्रम केवल e के अस्तित्व पर संभव है।
स्वतुल्य संबंधों की कुल संख्या
$$N_{\text{refl}} = 2^{n(n-1)} = 2^{n^2 - n}$$
मुख्य विकर्ण के n अवयव निश्चित रूप से शामिल होते हैं।
सममित संबंधों की कुल संख्या
$$N_{\text{sym}} = 2^{\frac{n(n+1)}{2}}$$
विकर्ण एवं विकर्ण के ऊपर के कुल n(n+1)/2 युग्मों के स्वतंत्र चयन से।

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
Q1 (दीर्घ उत्तरीय - JAC 5 Marks): सिद्ध कीजिए कि पूर्णांकों के समुच्चय $\mathbb{Z}$ पर परिभाषित संबंध $R = \{(a, b) : 2 \text{, } (a - b) \text{ को विभाजित करता है}\}$ एक तुल्यता संबंध (Equivalence Relation) है। साथ ही तुल्यता वर्ग $[0]$ का मान ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
हल:
दिया गया समुच्चय $\mathbb{Z}$ (पूर्णांकों का समुच्चय) है तथा संबंध:
$$R = \{(a, b) \in \mathbb{Z} \times \mathbb{Z} : (a - b) \text{ संख्या 2 से विभाज्य है}\}$$ (i) स्वतुल्यता (Reflexivity):
किसी भी $a \in \mathbb{Z}$ के लिए:
$$a - a = 0 = 2 \times 0$$ चूंकि 0 सम संख्या है और 2 से विभाज्य है, अतः $(a, a) \in R, \forall a \in \mathbb{Z}$।
अतः $R$ स्वतुल्य है।

(ii) सममितता (Symmetry):
मान लीजिए कि $(a, b) \in R$।
$\implies (a - b)$ संख्या 2 से विभाज्य है।
$\implies a - b = 2k$, जहाँ $k \in \mathbb{Z}$।
दोनों पक्षों में $-1$ से गुणा करने पर:
$$-(a - b) = -2k \implies b - a = 2(-k)$$ चूंकि $k \in \mathbb{Z} \implies -k = m \in \mathbb{Z}$।
$\implies b - a = 2m \implies (b - a)$ भी संख्या 2 से विभाज्य है।
$\implies (b, a) \in R$।
अतः $R$ सममित है।

(iii) संक्रामकता (Transitivity):
मान लीजिए कि $(a, b) \in R$ तथा $(b, c) \in R$।
$\implies a - b = 2k_1$ तथा $b - c = 2k_2$, जहाँ $k_1, k_2 \in \mathbb{Z}$।
दोनों समीकरणों को जोड़ने पर:
$$(a - b) + (b - c) = 2k_1 + 2k_2$$ $$a - c = 2(k_1 + k_2)$$ चूंकि दो पूर्णांकों का योग $k_1 + k_2 = k_3 \in \mathbb{Z}$ एक पूर्णांक है।
$\implies a - c = 2k_3 \implies (a - c)$ संख्या 2 से विभाज्य है।
$\implies (a, c) \in R$।
अतः $R$ संक्रामक है।

निष्कर्ष: चूंकि संबंध $R$ स्वतुल्य, सममित तथा संक्रामक तीनों है, अतः $R$ एक तुल्यता संबंध (Equivalence Relation) है।

तुल्यता वर्ग $[0]$ का मान:
$$[0] = \{x \in \mathbb{Z} : (x, 0) \in R\} = \{x \in \mathbb{Z} : (x - 0) \text{ संख्या 2 से विभाज्य है}\}$$ $$[0] = \{x \in \mathbb{Z} : x = 2k, k \in \mathbb{Z}\} = \{\dots, -6, -4, -2, 0, 2, 4, 6, \dots\}$$ यह सभी सम पूर्णांकों (Even Integers) का समुच्चय है।
Example 2
Q2 (दीर्घ उत्तरीय - JAC 5 Marks): सिद्ध कीजिए कि समुच्चय $A = \{x \in \mathbb{Z} : 0 \le x \le 12\}$ में दिया गया संबंध $R = \{(a, b) : |a - b| \text{, 4 का एक गुणज है}\}$ एक तुल्यता संबंध है। 1 से संबंधित सभी अवयवों का समुच्चय (तुल्यता वर्ग $[1]$) भी ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
हल:
दिया गया समुच्चय: $A = \{0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12\}$।
संबंध: $R = \{(a, b) : |a - b| = 4k, k \in \mathbb{W}\}$।

1. स्वतुल्यता: प्रत्येक $a \in A$ के लिए, $|a - a| = |0| = 0 = 4 \times 0$, जो कि 4 का गुणज है। अतः $(a, a) \in R$। $R$ स्वतुल्य है।
2. सममितता: यदि $(a, b) \in R$, तो $|a - b| = 4k$। चूंकि $|b - a| = |-(a - b)| = |a - b| = 4k$। अतः $(b, a) \in R$। $R$ सममित है।
3. संक्रामकता: यदि $(a, b) \in R$ तथा $(b, c) \in R$, तो $a - b = \pm 4k_1$ तथा $b - c = \pm 4k_2$।
जोड़ने पर: $(a - b) + (b - c) = a - c = 4(\pm k_1 \pm k_2) = 4k_3$।
अतः $|a - c| = 4|k_3|$, जो 4 का गुणज है। अतः $(a, c) \in R$। $R$ संक्रामक है।
अतः $R$ एक तुल्यता संबंध है।

अवयव 1 से संबंधित समुच्चय (तुल्यता वर्ग $[1]$):
$$[1] = \{x \in A : (x, 1) \in R\} = \{x \in A : |x - 1| \text{ 4 का गुणज है}\}$$ • यदि $x = 1 \implies |1 - 1| = 0$ (4 का गुणज)
• यदि $x = 5 \implies |5 - 1| = 4$ (4 का गुणज)
• यदि $x = 9 \implies |9 - 1| = 8$ (4 का गुणज)
(अन्य अवयव जैसे 2, 3, 4, 6, 7, 8, 10, 11, 12 के लिए अंतर 4 का गुणज नहीं है)।
$$\mathbf{[1] = \{1, 5, 9\}}$$
Example 3
Q3 (दीर्घ उत्तरीय - JAC 5 Marks): मान लीजिए कि $A = \mathbb{R} - \{3\}$ तथा $B = \mathbb{R} - \{1\}$ हैं। फलन $f: A \to B$, $f(x) = \frac{x - 2}{x - 3}$ द्वारा परिभाषित है। सिद्ध कीजिए कि $f$ एकैकी तथा आच्छादक (Bijective) है। अतः $f^{-1}(x)$ ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
हल:
दिया गया फलन: $f: A \to B$ जहाँ $f(x) = \frac{x - 2}{x - 3}$।

भाग (क): एकैकी (One-One / Injective) की जाँच:
मान लीजिए कि $x_1, x_2 \in A$ इस प्रकार हैं कि $f(x_1) = f(x_2)$:
$$\frac{x_1 - 2}{x_1 - 3} = \frac{x_2 - 2}{x_2 - 3}$$ वज्र-गुणन (Cross Multiplication) करने पर:
$$(x_1 - 2)(x_2 - 3) = (x_2 - 2)(x_1 - 3)$$ $$x_1 x_2 - 3x_1 - 2x_2 + 6 = x_1 x_2 - 3x_2 - 2x_1 + 6$$ दोनों पक्षों से $x_1 x_2 + 6$ घटाने पर:
$$-3x_1 - 2x_2 = -3x_2 - 2x_1$$ $$-3x_1 + 2x_1 = -3x_2 + 2x_2 \implies -x_1 = -x_2 \implies \mathbf{x_1 = x_2}$$ चूंकि $f(x_1) = f(x_2) \implies x_1 = x_2$, अतः फलन $f$ एकैकी (One-One) है।

भाग (ख): आच्छादक (Onto / Surjective) की जाँच:
मान लीजिए कि $y \in B = \mathbb{R} - \{1\}$ सह-प्रांत का कोई स्वेच्छ अवयव है।
हम सिद्ध करेंगे कि $A = \mathbb{R} - \{3\}$ में एक ऐसा $x$ विद्यमान है कि $f(x) = y$।
$$y = \frac{x - 2}{x - 3}$$ $$y(x - 3) = x - 2 \implies xy - 3y = x - 2$$ $$xy - x = 3y - 2 \implies x(y - 1) = 3y - 2$$ $$\mathbf{x = \frac{3y - 2}{y - 1}}$$ चूंकि $y \in B \implies y \neq 1$, अतः हर $(y - 1) \neq 0$ है और $x$ सदैव एक वास्तविक संख्या है।
अब जाँचते हैं कि क्या $x = 3$ हो सकता है?
यदि $\frac{3y - 2}{y - 1} = 3 \implies 3y - 2 = 3y - 3 \implies -2 = -3$, जो कि असंभव है!
अतः $x \neq 3$, अर्थात् $\mathbf{x \in A = \mathbb{R} - \{3\}}$।
अब $f(x)$ का मान रखने पर:
$$f(x) = f\left(\frac{3y - 2}{y - 1}\right) = \frac{\frac{3y - 2}{y - 1} - 2}{\frac{3y - 2}{y - 1} - 3} = \frac{(3y - 2) - 2(y - 1)}{(3y - 2) - 3(y - 1)} = \frac{3y - 2 - 2y + 2}{3y - 2 - 3y + 3} = \frac{y}{1} = y$$ अतः प्रत्येक $y \in B$ के लिए $x \in A$ विद्यमान है सच दैट $f(x) = y$। अतः $f$ आच्छादक (Onto) है।

भाग (ग): प्रतिलोम फलन ($f^{-1}$) की गणना:
चूंकि $f$ एकैकी तथा आच्छादक दोनों है, अतः फलन $f$ व्युत्क्रमणीय है।
$$f^{-1}(y) = x = \frac{3y - 2}{y - 1}$$ चर $y$ को $x$ से बदलने पर:
$$\mathbf{f^{-1}(x) = \frac{3x - 2}{x - 1}} \quad (x \neq 1)$$
Example 4
Q4 (दीर्घ उत्तरीय - JAC 5 Marks): सिद्ध कीजिए कि $f: \mathbb{R}_+ \to [-5, \infty)$, जहाँ $f(x) = 9x^2 + 6x - 5$ तथा $\mathbb{R}_+$ सभी ऋणोत्तर वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है, व्युत्क्रमणीय है। फलन का प्रतिलोम $f^{-1}$ भी ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
हल:
दिया गया फलन: $f(x) = 9x^2 + 6x - 5$ जहाँ प्रांत $X = [0, \infty)$ तथा सह-प्रांत $Y = [-5, \infty)$।

पूर्ण वर्ग बनाने पर:
$$f(x) = (3x)^2 + 2 \cdot (3x) \cdot 1 + 1^2 - 1 - 5 = (3x + 1)^2 - 6$$
1. एकैकी की जाँच:
मान लीजिए $x_1, x_2 \in [0, \infty)$ तथा $f(x_1) = f(x_2)$:
$$(3x_1 + 1)^2 - 6 = (3x_2 + 1)^2 - 6 \implies (3x_1 + 1)^2 = (3x_2 + 1)^2$$ दोनों ओर वर्गमूल लेने पर (चूंकि $x \ge 0 \implies 3x + 1 > 0$):
$$3x_1 + 1 = 3x_2 + 1 \implies 3x_1 = 3x_2 \implies \mathbf{x_1 = x_2}$$ अतः $f$ एकैकी (One-One) है।

2. आच्छादक की जाँच:
मान लीजिए $y \in [-5, \infty)$ सह-प्रांत का कोई अवयव है।
$$y = (3x + 1)^2 - 6 \implies (3x + 1)^2 = y + 6$$ चूंकि $y \ge -5 \implies y + 6 \ge 1 > 0$। वर्गमूल लेने पर:
$$3x + 1 = \sqrt{y + 6} \implies 3x = \sqrt{y + 6} - 1$$ $$\mathbf{x = \frac{\sqrt{y + 6} - 1}{3}}$$ चूंकि $y \ge -5 \implies y + 6 \ge 1 \implies \sqrt{y + 6} \ge 1 \implies \sqrt{y + 6} - 1 \ge 0$।
अतः $x \ge 0$, अर्थात् $\mathbf{x \in [0, \infty) = \text{Domain}(f)}$।
अतः सह-प्रांत का प्रत्येक अवयव प्रांत के किसी अवयव का प्रतिबिंब है। अतः $f$ आच्छादक (Onto) है।

निष्कर्ष एवं प्रतिलोम:
चूंकि $f$ एकैकी-आच्छादी (Bijective) है, अतः यह व्युत्क्रमणीय है तथा इसका प्रतिलोम:
$$\mathbf{f^{-1}(y) = \frac{\sqrt{y + 6} - 1}{3}} \implies \mathbf{f^{-1}(x) = \frac{\sqrt{x + 6} - 1}{3}}$$
Example 5
Q5 (लघु उत्तरीय - JAC 3 Marks): यदि $f(x) = \frac{4x + 3}{6x - 4}$, जहाँ $x \neq \frac{2}{3}$, तो सिद्ध कीजिए कि सभी $x \neq \frac{2}{3}$ के लिए $(f \circ f)(x) = x$। $f$ का प्रतिलोम फलन क्या है?
Step-by-Step Solution:
हल:
दिया है: $f(x) = \frac{4x + 3}{6x - 4}$ जहाँ $x \neq \frac{2}{3}$।

$(f \circ f)(x)$ की गणना:
$$(f \circ f)(x) = f(f(x)) = f\left(\frac{4x + 3}{6x - 4}\right)$$ $$= \frac{4\left(\frac{4x + 3}{6x - 4}\right) + 3}{6\left(\frac{4x + 3}{6x - 4}\right) - 4}$$ अंश और हर में ल.स.प. $(6x - 4)$ लेकर हल करने पर:
$$= \frac{4(4x + 3) + 3(6x - 4)}{6(4x + 3) - 4(6x - 4)} = \frac{16x + 12 + 18x - 12}{24x + 18 - 24x + 16} = \frac{34x}{34} = \mathbf{x}$$ अतः $(f \circ f)(x) = x = I(x)$ सिद्ध हुआ।

$f$ का प्रतिलोम:
चूंकि $(f \circ f) = I$ (तत्समक फलन), इसका अर्थ है कि $f$ का संयोजन स्वयं के साथ करने पर तत्समक प्राप्त होता है।
अतः फलन $f$ स्वयं अपना प्रतिलोम है:
$$\mathbf{f^{-1} = f \implies f^{-1}(x) = \frac{4x + 3}{6x - 4}}$$
Example 6
Q6 (लघु उत्तरीय - JAC 3 Marks): परिमेय संख्याओं के समुच्चय $\mathbb{Q} - \{-1\}$ पर एक द्विआधारी संक्रिया $*$ निम्न प्रकार परिभाषित है: $a * b = a + b + ab$। सिद्ध कीजिए कि $*$ क्रमविनिमेय तथा साहचर्य है। इसका तत्समक अवयव तथा किसी अवयव $a$ का व्युत्क्रम ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
हल:
(i) क्रमविनिमेयता: $a * b = a + b + ab = b + a + ba = b * a$। अतः $*$ क्रमविनिमेय है।
(ii) साहचर्यता:
$(a * b) * c = (a + b + ab) * c = (a + b + ab) + c + (a + b + ab)c$
$= a + b + c + ab + ac + bc + abc$।
इसी प्रकार: $a * (b * c) = a * (b + c + bc) = a + (b + c + bc) + a(b + c + bc)$
$= a + b + c + bc + ab + ac + abc$।
चूंकि $(a * b) * c = a * (b * c)$, अतः $*$ साहचर्य है।

(iii) तत्समक अवयव ($e$):
मान लीजिए $e$ तत्समक अवयव है। तब $a * e = a$:
$$a + e + ae = a \implies e(1 + a) = 0$$ चूंकि $a \in \mathbb{Q} - \{-1\} \implies a \neq -1 \implies 1 + a \neq 0$।
अतः $\mathbf{e = 0} \in \mathbb{Q} - \{-1\}$ अभीष्ट तत्समक अवयव है।

(iv) व्युत्क्रम अवयव ($a^{-1}$):
मान लीजिए $b$, अवयव $a$ का व्युत्क्रम है। तब $a * b = e = 0$:
$$a + b + ab = 0 \implies b(1 + a) = -a \implies \mathbf{b = \frac{-a}{1 + a}}$$ अतः $\mathbf{a^{-1} = \frac{-a}{1 + a}}$ (जहाँ $a \neq -1$)।
Example 7
Q7 (अति-लघु उत्तरीय - JAC 2 Marks): दिखाइए कि $f: \mathbb{N} \to \mathbb{N}$, जहाँ $f(1) = f(2) = 1$ तथा प्रत्येक $x > 2$ के लिए $f(x) = x - 1$, आच्छादक है परंतु एकैकी नहीं है।
Step-by-Step Solution:

हल:

  1. एकैकी नहीं है: $f(1) = 1$ तथा $f(2) = 1$। यहाँ दो भिन्न अवयवों $1 \neq 2$ का एक ही प्रतिबिंब $1$ है ($f(1) = f(2)$)। अतः फलन $f$ एकैकी नहीं (बहुएक) है।
  2. आच्छादक है: सह-प्रांत $\mathbb{N}$ के अवयव $1$ के लिए पूर्व-प्रतिबिंब $1$ व $2$ उपलब्ध हैं ($f(1)=f(2)=1$)।
    किसी भी $y \in \mathbb{N}$ (जहाँ $y > 1$) के लिए, यदि हम $x = y + 1$ लें, तो $x > 2$ होगा और $f(x) = (y + 1) - 1 = y$।
    अतः सह-प्रांत $\mathbb{N}$ के प्रत्येक अवयव का पूर्व-प्रतिबिंब प्रांत $\mathbb{N}$ में विद्यमान है। अतः $f$ आच्छादक (Onto) है।
Example 8
Q8 (वस्तुनिष्ठ अवधारणात्मक - JAC 1 Mark): मान लीजिए $A = \{1, 2, 3\}$ तथा संबंध $R = \{(1, 2)\}$ है। बताइए कि क्या $R$ स्वतुल्य, सममित अथवा संक्रामक है?
Step-by-Step Solution:

हल:

  1. स्वतुल्य नहीं है: $(1, 1) \notin R$ (न ही $(2, 2)$ व $(3, 3)$ हैं)।
  2. सममित नहीं है: $(1, 2) \in R$ है, परंतु $(2, 1) \notin R$।
  3. संक्रामक है: संक्रामकता की शर्त $(a, b) \in R$ तथा $(b, c) \in R \implies (a, c) \in R$ होती है। यहाँ $(1, 2) \in R$ है, परंतु 2 से शुरू होने वाला कोई अन्य युग्म विद्यमान ही नहीं है। अतः शर्त का कोई उल्लंघन नहीं होता (Vacuously True)। अतः $R$ संक्रामक है!

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

भ्रम: छात्र अक्सर यह मान लेते हैं कि यदि संबंध में (1, 1), (2, 2) उपस्थित हैं, तो वह स्वतः ही स्वतुल्य हो जाएगा, भले ही समुच्चय के अन्य अवयव छूट रहे हों।

Scientific Reality & Correction

वास्तविकता: स्वतुल्यता की शर्त '∀a ∈ A, (a, a) ∈ R' है। यदि समुच्चय A = {1, 2, 3} है और R = {(1, 1), (2, 2)}, तो यह स्वतुल्य नहीं है क्योंकि (3, 3) ∉ R। समुच्चय के प्रत्येक अवयव का स्वयं से युग्म होना अनिवार्य है।

Common Misconception

भ्रम: छात्र यह समझ बैठते हैं कि यदि संबंध में (1, 2) है और कोई अन्य युग्म नहीं है, तो वह संक्रामक नहीं होगा।

Scientific Reality & Correction

वास्तविकता: गणितीय तर्कशास्त्र में संक्रामकता की शर्त 'यदि (a, b) ∈ R तथा (b, c) ∈ R हो, तब (a, c) ∈ R होना चाहिए' है। यदि b से शुरू होने वाला कोई दूसरा युग्म है ही नहीं, तो नियम टूटा नहीं माना जाता (Vacuous Truth)। अतः R = {(1, 2)} पूर्णतः संक्रामक है।

Common Misconception

भ्रम: फलन को आच्छादक (Onto) सिद्ध करते समय केवल x = g(y) निकाल लेना ही पर्याप्त मान लेना।

Scientific Reality & Correction

वास्तविकता: केवल x = g(y) निकाल लेना पर्याप्त नहीं है! आपको यह अनिवार्य रूप से सिद्ध करना होगा कि सह-प्रांत के प्रत्येक y के लिए निकला हुआ x वास्तव में फलन के प्रांत (Domain) में स्थित है या नहीं।

Common Misconception

भ्रम: यह मान लेना कि फलनों का संयोजन क्रमविनिमेय होता है (अर्थात् g ∘ f = f ∘ g)।

Scientific Reality & Correction

वास्तविकता: सामान्यतः g ∘ f ≠ f ∘ g। दोनों का आउटपुट, परिभाषा और कभी-कभी तो अस्तित्व भी भिन्न होता है।

Common Misconception

भ्रम: बिना एकैकी और आच्छादक सिद्ध किए सीधे y = f(x) को हल करके प्रतिलोम फलन घोषित कर देना।

Scientific Reality & Correction

वास्तविकता: JAC 5-अंक की परीक्षा में यदि आपने पहले फलन की एकैकी-आच्छादकता (Bijectivity) सिद्ध नहीं की, तो 2 अंक काट लिए जाते हैं। प्रतिलोम केवल और केवल एकैकी-आच्छादी फलन का ही संभव होता है।

Common Misconception

भ्रम: द्विआधारी संक्रिया में तत्समक अवयव (e) की स्थिति में क्रम को नजरअंदाज करना।

Scientific Reality & Correction

वास्तविकता: तत्समक अवयव वही हो सकता है जो बाएँ और दाएँ दोनों ओर से संतुष्ट करे: a * e = e * a = a। यदि a * e = a है परंतु e * a ≠ a, तो e तत्समक नहीं होगा।

संबंध, फलन एवं तुल्यता वर्ग की वास्तुकला (Relations, Equivalence & Function Architecture)

कार्तीय गुणन से तुल्यता वर्ग एवं एकैकी-आच्छादी प्रतिचित्रण का पदानुक्रम

$A \times B \implies$ संबंध (Relation) $\implies$ तुल्यता संबंध $\implies$ फलन (Mapping) $\implies$ व्युत्क्रमणीयता ($f^{-1}$)
R
तुल्यता संबंध के तीन स्तंभ
• स्वतुल्य (Reflexive): $\forall a, (a, a) \in R$
• सममित (Symmetric): $(a, b) \in R \implies (b, a) \in R$
• संक्रामक (Transitive): $(a, b), (b, c) \in R \implies (a, c) \in R$
तीन शर्तें एक साथ $\implies$ तुल्यता संबंध!
P
समुच्चय का विभाजन एवं तुल्यता वर्ग
• तुल्यता वर्ग: $[a] = \{x \in A : (x, a) \in R\}$
• असंयुक्तता: $[a] \cap [b] = \emptyset$ अथवा $[a] = [b]$
• संपूर्ण संघ: $\bigcup [a] = A$
तुल्यता संबंध समुच्चय को स्वतंत्र कक्षों में बांटता है
फलनों का प्रतिचित्रण स्पेक्ट्रम (Mapping Spectrum)
व्युत्क्रमणीयता = एकैकी + आच्छादक
एकैकी (One-One)
भिन्न इनपुट $\to$ भिन्न आउटपुट ($f(x_1)=f(x_2) \implies x_1=x_2$)
बहुएक (Many-One)
दो या अधिक इनपुट $\to$ समान आउटपुट ($f(-2)=f(2)=4$)
आच्छादक (Onto)
परिसर = सह-प्रांत ($\text{Range} = Y$, कोई खाली नहीं)
अंतःक्षेपी (Into)
परिसर $\subset$ सह-प्रांत (सह-प्रांत में अयुग्मित अवयव शेष)
🎯 एकैकी-आच्छादी (Bijective) फलन $\iff$ व्युत्क्रमणीय (Invertible) फलन $\iff$ अद्वितीय प्रतिलोम $f^{-1}$ विद्यमान!

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
कार्तीय गुणन एवं संबंध: समुच्चय A से B में संबंध R, कार्तीय गुणन A × B का कोई भी उपसमुच्चय होता है (R ⊆ A × B)। कुल संभव संबंधों की संख्या 2^(m·n) होती है।
Takeaway 2
स्वतुल्य संबंध: समुच्चय A पर संबंध R स्वतुल्य कहलाता है यदि प्रत्येक a ∈ A के लिए (a, a) ∈ R हो।
Takeaway 3
सममित संबंध: संबंध R सममित कहलाता है यदि जब कभी (a, b) ∈ R हो, तो (b, a) ∈ R भी अनिवार्य रूप से हो (अर्थात् R = R⁻¹)।
Takeaway 4
संक्रामक संबंध: संबंध R संक्रामक कहलाता है यदि (a, b) ∈ R तथा (b, c) ∈ R होने पर (a, c) ∈ R हो। यदि b से शुरू होने वाला कोई युग्म न हो, तब भी संबंध संक्रामक होता है।
Takeaway 5
तुल्यता संबंध एवं तुल्यता वर्ग: जो संबंध एक साथ स्वतुल्य, सममित एवं संक्रामक हो, वह तुल्यता संबंध कहलाता है। तुल्यता वर्ग [a] = {x ∈ A : (x, a) ∈ R} समुच्चय को परस्पर असंयुक्त विभाजनों में बांटते हैं।
Takeaway 6
एकैकी फलन (Injective): भिन्न अवयवों के भिन्न प्रतिबिंब हों, अर्थात् f(x₁) = f(x₂) ⟹ x₁ = x₂। क्षैतिज रेखा ग्राफ को अधिकतम एक बिंदु पर काटती है।
Takeaway 7
आच्छादक फलन (Surjective): जब फलन का परिसर उसके सह-प्रांत के पूर्णतः बराबर हो (Range = Co-domain), अर्थात् सह-प्रांत का प्रत्येक अवयव किसी-न-किसी अवयव का प्रतिबिंब हो।
Takeaway 8
एकैकी-आच्छादी एवं व्युत्क्रमणीयता: जो फलन एकैकी और आच्छादक दोनों हो, वह बाइजेक्टिव होता है। कोई फलन केवल और केवल तभी व्युत्क्रमणीय होता है जब वह एकैकी-आच्छादी हो।
Takeaway 9
फलनों का संयोजन: (g ∘ f)(x) = g(f(x)) केवल तभी परिभाषित होता है जब Range(f) ⊆ Domain(g) हो। संयोजन साहचर्य होता है, परंतु सामान्यतः क्रमविनिमेय नहीं होता।
Takeaway 10
द्विआधारी संक्रियाएँ: समुच्चय A पर द्विआधारी संक्रिया * : A × A → A एक फलन है। तत्समक अवयव a * e = e * a = a अद्वितीय होता है, और व्युत्क्रम अवयव a * b = b * a = e द्वारा निकलता है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
यदि समुच्चय A में 3 अवयव हों, तो समुच्चय A पर कुल कितने भिन्न संबंध परिभाषित किए जा सकते हैं, और उनमें से कितने संबंध स्वतुल्य होंगे?
Reveal Answer & Explanation
Answer: कुल संबंधों की संख्या 2^(n²) = 2^(3²) = 2^9 = 512 होगी। इनमें से स्वतुल्य संबंधों की संख्या 2^(n² - n) = 2^(9 - 3) = 2^6 = 64 होगी।
स्वतुल्य संबंध में मुख्य विकर्ण के 3 अवयव (1,1), (2,2), (3,3) का होना निश्चित है, शेष 6 अवयवों के पास 2-2 विकल्प होते हैं।
2
क्या संबंध R = {(1, 2)} समुच्चय A = {1, 2, 3} पर संक्रामक (Transitive) है? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: हाँ, यह संक्रामक है। संक्रामकता का नियम तभी टूटता है जब (a, b) ∈ R और (b, c) ∈ R दोनों मौजूद हों परंतु (a, c) ∉ R हो। यहाँ 2 से शुरू होने वाला कोई दूसरा क्रमित युग्म विद्यमान ही नहीं है, अतः नियम का कोई उल्लंघन नहीं होता (Vacuously True)।
शर्त P ⟹ Q केवल तब गलत होती है जब शर्त P सत्य हो परंतु निष्कर्ष Q असत्य हो।
3
फलन f: ℝ → ℝ, जहाँ f(x) = x³ + 5 है, एकैकी (One-One) क्यों है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: मान लीजिए f(x₁) = f(x₂) ⟹ x₁³ + 5 = x₂³ + 5 ⟹ x₁³ = x₂³। दोनों पक्षों का घनमूल लेने पर वास्तविक संख्याओं में x₁ = x₂ प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त f'(x) = 3x² ≥ 0 सदैव धनात्मक/अऋणात्मक है (निरंतर वर्धमान फलन)। अतः f एकैकी है।
विषम घात (Odd power) वास्तविक संख्याओं पर सदैव एकैकी परिणाम देती है क्योंकि ऋणात्मक का घन ऋणात्मक और धनात्मक का घन धनात्मक होता है।
4
यदि f: A → B तथा g: B → C दो फलन हैं और g ∘ f एकैकी है, तो क्या f और g दोनों का एकैकी होना अनिवार्य है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: नहीं! यदि g ∘ f एकैकी है, तो केवल प्रथम फलन f का एकैकी होना अनिवार्य है। द्वितीय फलन g का एकैकी होना अनिवार्य नहीं है।
यदि f(x₁) = f(x₂) हो तो g(f(x₁)) = g(f(x₂)) हो जाएगा जो g ∘ f की एकैकी प्रकृति का उल्लंघन कर देगा।
5
प्रतिलोम फलन के संयोजन का उत्क्रमण नियम (Reversal Law) क्या है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: (g ∘ f)⁻¹ = f⁻¹ ∘ g⁻¹। प्रतिलोम संक्रिया में फलनों का क्रम उलट जाता है (जैसे मोजा और जूता उतारने का नियम)।
जूता-मोजा नियम (Shoe-Sock Rule) याद करें।
6
प्राकृत संख्याओं के समुच्चय ℕ पर व्यवकलन (घटाव −) द्विआधारी संक्रिया क्यों नहीं है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: क्योंकि यह संवृत गुणधर्म (Closure Property) का पालन नहीं करता। उदाहरणार्थ 3, 7 ∈ ℕ के लिए 3 − 7 = −4 ∉ ℕ। परिणाम समुच्चय ℕ से बाहर चला जाता है।
द्विआधारी संक्रिया का परिणाम उसी समुच्चय में होना अनिवार्य है।
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