‘परिमेय’ (Rational) शब्द की उत्पत्ति ‘अनुपात’ (Ratio) से हुई है।
विशेष तथ्य:
- शून्य (0) एक परिमेय संख्या है: क्योंकि इसे $\frac{0}{1}, \frac{0}{5}, \frac{0}{-3}$ आदि के रूप में लिखा जा सकता है।
- प्रत्येक पूर्णांक एक परिमेय संख्या है: किसी भी पूर्णांक $n$ को $\frac{n}{1}$ लिखा जा सकता है (जैसे $-7 = \frac{-7}{1}$)।
- भिन्न बनाम परिमेय संख्या: भिन्न में अंश और हर केवल पूर्ण संख्याएँ (धनात्मक) होती हैं, जबकि परिमेय संख्या में $p$ और $q$ ऋणात्मक पूर्णांक भी हो सकते हैं। अतः सभी भिन्न परिमेय संख्याएँ हैं, किंतु सभी परिमेय संख्याएँ भिन्न नहीं हैं।
| प्रकार | शर्त | उदाहरण | संख्या रेखा पर स्थिति |
|---|---|---|---|
| धनात्मक परिमेय संख्या | अंश और हर दोनों के चिह्न समान हों (दोनों $+$ या दोनों $-$) | $\frac{3}{4}, \frac{-5}{-7} = \frac{5}{7}$ | शून्य (0) के दाईं ओर |
| ऋणात्मक परिमेय संख्या | अंश या हर में से कोई एक ऋणात्मक हो | $\frac{-2}{5}, \frac{7}{-9} = \frac{-7}{9}$ | शून्य (0) के बाईं ओर |