न्यायपालिका देश में कानून का राज बनाए रखने के लिए मुख्य रूप से तीन प्रकार के कार्य करती है:
- 1. विवादों का निपटारा (Dispute Resolution): यह नागरिकों के बीच, नागरिक और सरकार के बीच, दो या दो से अधिक राज्य सरकारों के बीच, तथा केंद्र और राज्य सरकार के बीच उत्पन्न विवादों को सुलझाती है।
- 2. न्यायिक समीक्षा (Judicial Review): न्यायपालिका संविधान की अंतिम व्याख्याकार है। यदि उसे लगता है कि संसद द्वारा पारित कोई कानून संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करता है, तो वह उसे असंवैधानिक घोषित कर निरस्त कर सकती है।
- 3. मौलिक अधिकारों का संरक्षण (Enforcing Fundamental Rights): यदि किसी नागरिक को लगता है कि उसके मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है, तो वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय या अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय जा सकता है (जैसे हाकिम शेख केस में स्वास्थ्य के अधिकार को जीवन का अधिकार माना गया)।