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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 8 • Social Science • अध्याय 20
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

जनसुविधाएं (Public Facilities) (Public Facilities)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 नागरिक शास्त्र का सातवाँ अध्याय "जनसुविधाएँ" (Public Facilities) किसी भी आधुनिक कल्याणकारी राज्य के मूलभूत दायित्वों और नागरिकों के जीवन के अधिकार की पड़ताल करता है। "जनसुविधाएँ" वे बुनियादी सार्वजनिक सेवाएं हैं जो किसी समाज में मानवीय जीवन को स्वस्थ, सुरक्षित और गरिमापूर्ण बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं—जैसे स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता (सैनिटेशन), स्वास्थ्य सेवाएं, बिजली, सार्वजनिक परिवहन और विद्यालय। इस अध्याय में यह गहराई से विश्लेषित किया गया है कि जनसुविधाओं की मुख्य विशेषता क्या है—एक बार निर्माण होने पर इसका लाभ समाज के अनगिनत लोग एक साथ साझा करते हैं। अध्याय में चेन्नई शहर के चार अलग-अलग इलाकों (अन्ना नगर, सैदापेट, मैलापुर और मडिपक्कम) के सजीव दृष्टांत द्वारा जल संकट के वर्गीय भेदभाव को उजागर किया गया है; जहाँ अमीर लोग पैसे से टैंकर और आरओ खरीद लेते हैं, वहीं झुग्गी-झोपड़ियों के गरीब लोग पानी की एक बाल्टी के लिए घंटों कतार में खड़े रहते हैं। इसमें संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार - Right to Life) के तहत सुरक्षित पेयजल के अधिकार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णयों (जैसे 1991 का सुभाष कुमार केस), ब्राजील के पोर्टो एलेग्रे शहर में सार्वजनिक जल प्रबंधन की वैश्विक सफलता, तथा झारखण्ड के ग्रामीण व शहरी इलाकों में पाइप पेयजल व स्वच्छता की चुनौतियों का प्रामाणिक व परीक्षा-उपयोगी विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

⚡ क्या पीने का साफ पानी, सांस लेने लायक हवा और सरकारी अस्पताल में इलाज केवल अमीरों का विशेषाधिकार है या भारत के प्रत्येक नागरिक का जन्मसिद्ध मौलिक अधिकार?

सोचिए, यदि कल से सरकार कह दे कि सड़कें, सरकारी स्कूल और पानी की सप्लाई केवल उन्हीं को मिलेगी जो हर महीने लाखों रुपये चुकाएंगे, तो देश के 80 करोड़ गरीबों का क्या होगा? चेन्नई की चिलचिलाती धूप में जहाँ एक बंगले में लॉन सींचने के लिए हजारों लीटर पानी बहाया जा रहा है, वहीं दो किलोमीटर दूर एक झुग्गी बस्ती में 30 परिवारों के लिए दिन में केवल 20 मिनट एक नल खुलता है! निजी कंपनियाँ हमेशा मुनाफे के लिए काम करती हैं, तो गरीबों तक स्कूल और पानी कौन पहुँचाएगा? बाबा साहेब के संविधान ने जीवन के अधिकार में स्वच्छ पानी को क्यों शामिल किया? आइए, जनसुविधाओं के इस जीवन-मरण के सवाल को गहराई से समझें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

जनसुविधाएँ किसी भी देश के मानव विकास सूचकांक (HDI) का पैमाना हैं। झारखण्ड में जहाँ फ्लोराइड व आर्सेनिक युक्त भूजल और सुदूर आदिवासी गाँवों तक बिजली व पक्की सड़कों का अभाव है, वहाँ "जल जीवन मिशन" और सरकारी जनसुविधाओं की सुलभता सीधे जीवन रक्षा से जुड़ी है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • संविधान का अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार)।
  • कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की बुनियादी अवधारणा।
  • निजी कंपनियों (लाभ-उन्मुख) और सरकार (सेवा-उन्मुख) के लक्ष्यों में अंतर।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • जनसुविधाओं (Public Facilities) की परिभाषा और उनकी मूलभूत विशेषताओं को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के अभिन्न अंग के रूप में सुरक्षित पेयजल के अधिकार की व्याख्या कर सकेंगे।
  • जनसुविधाएँ उपलब्ध कराने में सरकार की प्राथमिक भूमिका और बजट/टैक्स के उपयोग को समझ सकेंगे।
  • चेन्नई जल संकट के केस स्टडी से जल वितरण में अमीर-गरीब के बीच मौजूद असमानता का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • निजीकरण के खतरों और ब्राजील के पोर्टो एलेग्रे मॉडल की सफलता की तुलना कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. जनसुविधाएँ क्या हैं और उनकी विशे...
2 2. जीवन के अधिकार के रूप में जल (Wa...
3 3. जनसुविधाएँ उपलब्ध कराना किसकी जि...
4 4. चेन्नई का जल संकट और ब्राजील का...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. जनसुविधाएँ क्या हैं और उनकी विशेषताएँ (What are Public Facilities?)

जनसुविधाएँ वे आवश्यक बुनियादी सेवाएं हैं जो हर नागरिक के जीवित रहने और समाज के विकास के लिए जरूरी हैं:

  • प्रमुख उदाहरण: सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता एवं सीवरेज, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व अस्पताल, बिजली आपूर्ति, सड़कें एवं सार्वजनिक परिवहन (बसें, ट्रेनें), तथा प्राथमिक विद्यालय।
  • मुख्य विशेषता (Shared Benefit): किसी जनसुविधा की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि एक बार निर्माण हो जाने पर इसका लाभ कई लोग एक साथ उठाते हैं। जैसे—गाँव में एक बिजली सबस्टेशन बनने से किसान पंप चला सकते हैं, बच्चे रात में पढ़ सकते हैं और छोटी कार्यशालाएं खुल सकती हैं।
  • पानी और भारत में स्वास्थ्य का संकट: भारत में प्रतिदिन 1600 से अधिक लोग (जिनमें अधिकांश 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे होते हैं) जल-जनित बीमारियों (दस्त, पेचिश, हैजा) के कारण दम तोड़ देते हैं। सुरक्षित पेयजल इस मृत्यु दर को रोक सकता है।

2. जीवन के अधिकार के रूप में जल (Water as Part of the Fundamental Right to Life)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में सुरक्षित पेयजल का अधिकार भी शामिल है:

न्यायिक निर्णय / केसअदालती फैसलासंवैधानिक निहितार्थ
सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य (1991)सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि अनुच्छेद 21 में प्रदूषण-मुक्त जल और स्वच्छ हवा पाने का अधिकार शामिल है।यदि कोई फैक्ट्री नदी या भूजल को दूषित करती है, तो नागरिक सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय (2007)महबूबनगर में चर्मशोधन कारखाने द्वारा भूजल दूषित करने पर अदालत ने प्रति व्यक्ति 25 लीटर स्वच्छ पानी रोजाना देने का आदेश सरकार को दिया।पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की वैधानिक व नैतिक जिम्मेदारी है।
सार्वभौमिक पहुँच (Universal Access)संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को उसकी क्षमता के अनुसार वहन करने योग्य (Affordable) पानी मिलना चाहिए।पानी की कमी के कारण किसी गरीब की जान नहीं जानी चाहिए।

3. जनसुविधाएँ उपलब्ध कराना किसकी जिम्मेदारी है? (The Role of Government)

जनसुविधाएँ उपलब्ध कराने की प्राथमिक जिम्मेदारी सरकार की क्यों होनी चाहिए, निजी कंपनियों की क्यों नहीं?

  • निजी कंपनियों का मुनाफा मॉडल: निजी कंपनियाँ लाभ (Profit) कमाने के लिए काम करती हैं। वे केवल उन्हीं सुविधाओं में निवेश करती हैं जहाँ भारी मुनाफा हो (जैसे महंगे निजी अस्पताल, बोतलबंद पानी, या टोल हाईवे)। वे दूरदराज के गाँवों या गरीबों के लिए नाले, प्राथमिक स्कूल या सस्ते नल नहीं लगा सकतीं क्योंकि उसमें कोई लाभ नहीं है।
  • सरकारी वित्त पोषण (बजट और टैक्स): सरकार जनता से विभिन्न प्रकार के कर (टैक्स) वसूलती है और संसद में बजट पास कराकर उस पैसे का उपयोग जनसुविधाओं पर सब्सिडी देने में करती है, ताकि गरीबों को भी कम कीमत या मुफ्त में पानी, इलाज और राशन मिल सके।

4. चेन्नई का जल संकट और ब्राजील का सफल मॉडल (Water Crises & Porto Alegre Model)

जल वितरण की असमानता और वैश्विक समाधान का एक तुलनात्मक अध्ययन:

  • चेन्नई में जल संकट की असमानता: (1) अन्ना नगर (अमीर इलाका): भरपूर पानी, कमी होने पर निजी टैंकर। (2) सैदापेट (झुग्गी बस्ती): 30 परिवारों के लिए एक साझा नल, दिन में 20 मिनट पानी, 3 बाल्टी प्रति परिवार। अमीर लोग पानी को एक वस्तु (Commodity) की तरह खरीद लेते हैं, जबकि गरीब वंचित रह जाते हैं।
  • निजीकरण की असफलता (बोलीविया का दृष्टांत): जब पानी की आपूर्ति बहुराष्ट्रीय कंपनियों को सौंपी गई, तो पानी के बिल चौगुने बढ़ गए। इसके विरोध में बोलीविया में हिंसक जन-विद्रोह हुआ और सरकार को निजीकरण रद्द करना पड़ा।
  • ब्राजील के पोर्टो एलेग्रे का सरकारी मॉडल: ब्राजील के पोर्टो एलेग्रे शहर में जल आपूर्ति पूरी तरह सरकारी जल विभाग के पास है। जनता पारदर्शी तरीके से तय करती है कि बजट कहाँ खर्च होगा। परिणाम यह हुआ कि शहर के 100% नागरिकों को साफ पानी मिला और शिशु मृत्यु दर दुनिया में सबसे कम हो गई।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

जीवन का अधिकार (Right to Life)
अनुच्छेद 21 (भारतीय संविधान)
सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार स्वच्छ पेयजल व प्रदूषण-मुक्त वातावरण जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
संयुक्त राष्ट्र पेयजल मानक
न्यूनतम 50 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन (पीने, पकाने, स्वच्छता हेतु)
पानी का स्रोत घर से 1 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए।
भारत में जल-जनित बीमारियों से मृत्यु
प्रतिदिन 1,600 से अधिक मौतें (अधिकांशतः 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे)
स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से डायरिया और हैजा जैसी बीमारियों को 90% तक रोका जा सकता है।
सार्वजनिक जल आपूर्ति की वैश्विक मिसाल
पोर्टो एलेग्रे (Porto Alegre - ब्राजील)
जनता की भागीदारी वाले सरकारी मॉडल द्वारा 100% नागरिकों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराया गया।
जनसुविधाओं का वित्तीय स्रोत
जनता द्वारा चुकाया गया टैक्स (कर) + सरकारी बजटीय आवंटन
सरकार बिना लाभ कमाए लोक-कल्याण हेतु न्यूनतम दर पर जनसुविधाएँ उपलब्ध कराती है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1: "जनसुविधाएँ" (Public Facilities) क्या हैं? किन्हीं चार जनसुविधाओं के नाम लिखिए और उनकी मुख्य विशेषता समझाइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: जनसुविधाएँ: वे बुनियादी सार्वजनिक सेवाएँ जो समाज के सभी नागरिकों के स्वस्थ, सभ्य और सुरक्षित जीवन जीने के लिए अनिवार्य होती हैं, जनसुविधाएँ कहलाती हैं। चार मुख्य जनसुविधाएँ:

  1. स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति
  2. स्वच्छता और सीवरेज तंत्र
  3. सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र व अस्पताल
  4. सरकारी स्कूल और बिजली आपूर्ति मुख्य विशेषता: जनसुविधा की सबसे बड़ी विशेषता इसका "साझा लाभ" (Shared Benefit) है। एक बार जब कोई सुविधा (जैसे स्कूल या बिजली लाइन) बन जाती है, तो उसका उपयोग किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं, बल्कि पूरे समुदाय द्वारा एक साथ कई वर्षों तक किया जाता है।
उदाहरण 2
प्रश्न 2: क्या भारत में सभी नागरिकों को सुरक्षित पेयजल की समान उपलब्धता प्राप्त है? चेन्नई के उदाहरण से स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: भारत में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता में भारी असमानता व्याप्त है: चेन्नई के उदाहरण से स्पष्टता:

  1. अमीर इलाके (जैसे अन्ना नगर): यहाँ सरकारी नलों से नियमित पानी मिलता है; कमी होने पर लोग निजी टैंकर खरीद लेते हैं और घरों में महंगे आरओ सिस्टम लगाते हैं।
  2. मध्यमवर्गीय इलाके (जैसे मैलापुर): यहाँ 2-3 दिन में एक बार पानी आता है; लोग अपनी आय का बड़ा हिस्सा बोतलबंद पानी खरीदने पर खर्च करते हैं।
  3. गरीब और मलिन बस्तियाँ (जैसे सैदापेट): यहाँ 30-40 परिवारों के लिए एक साझा नल होता है जिसमें दिन में मात्र 20 मिनट गंदा पानी आता है। महिलाएँ और बच्चे घंटों लाइन में लगकर केवल 2-3 बाल्टी पानी जुटा पाते हैं। निष्कर्ष: पानी जैसी बुनियादी जीवन रक्षक सुविधा भी अमीरों के लिए सुलभ और गरीबों के लिए भारी संकट बनी हुई है।
उदाहरण 3
प्रश्न 3: जनसुविधाएँ उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निजी कंपनियों के बजाय सरकार की ही क्यों होनी चाहिए?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: यह जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए क्योंकि:

  1. लाभ का उद्देश्य: निजी कंपनियाँ केवल मुनाफा कमाने के लिए काम करती हैं। वे केवल उन्हीं सेवाओं में रुचि लेती हैं जहाँ से अधिक पैसा वसूला जा सके (जैसे निजी अस्पताल या मॉल)।
  2. गरीबों की उपेक्षा: यदि पानी, नाली, और प्राथमिक शिक्षा निजी कंपनियों को सौंप दी जाए, तो वे भारी कीमतें वसूलेंगी जिसे देश के करोड़ों गरीब नागरिक नहीं चुका पाएंगे और वे इन बुनियादी अधिकारों से वंचित हो जाएँगे।
  3. संवैधानिक दायित्व: संविधान के तहत लोक-कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की स्थापना करना सरकार का दायित्व है। सरकार टैक्स के पैसे से सब्सिडी देकर गरीबों को मुफ्त या सस्ती दर पर जनसुविधाएँ मुहैया कराती है।
उदाहरण 4
प्रश्न 4: सर्वोच्च न्यायालय ने स्वच्छ जल के अधिकार को किस मौलिक अधिकार का अंग माना है? प्रसिद्ध मामले का उल्लेख कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय ने सुरक्षित पेयजल के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 में उल्लिखित "जीवन के अधिकार" (Right to Life) का अभिन्न अंग माना है। प्रसिद्ध मामला:

  1. सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य (1991): इस ऐतिहासिक मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जीने के अधिकार में गरिमापूर्ण जीवन और प्रदूषण-मुक्त जल व वायु का उपभोग करने का अधिकार शामिल है।
  2. यदि कोई औद्योगिक इकाई या कारखाना किसी नदी या भूजल को जहरीले रसायनों से प्रदूषित करता है, तो सरकार और न्यायपालिका को उस कारखाने पर रोक लगाने और नागरिकों को स्वच्छ पानी दिलाने का पूरा अधिकार है।
उदाहरण 5
प्रश्न 5: ब्राजील के पोर्टो एलेग्रे शहर का जल प्रबंधन मॉडल पूरी दुनिया में क्यों सराहा गया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: पोर्टो एलेग्रे मॉडल की सफलता:

  1. पूर्ण सरकारी नियंत्रण: दुनिया भर में पानी के निजीकरण की होड़ के विपरीत, पोर्टो एलेग्रे ने जल आपूर्ति की बागडोर पूरी तरह सरकारी विभाग के हाथ में रखी।
  2. जन-भागीदारी (Participatory Budgeting): जल विभाग की बैठकों में आम जनता और मोहल्ला समितियों की सीधी भागीदारी होती थी, जहाँ नागरिक तय करते थे कि पाइपलाइन पहले कहाँ बिछाई जाएगी।
  3. सस्ती दरें: गरीबों से नाममात्र का शुल्क लिया गया जबकि संपन्न लोगों से अधिक।
  4. परिणाम: शहर के लगभग 100% नागरिकों को नल का स्वच्छ पानी मिला और दूषित पानी से होने वाली शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक गिरावट आई।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

छात्र अक्सर सोचते हैं कि जनसुविधाओं का निजीकरण कर देने से वे हमेशा बेहतर हो जाती हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

निजीकरण से सेवा की कीमतें अत्यधिक बढ़ जाती हैं (जैसे बोलीविया का जल युद्ध), जिससे समाज का गरीब तबका बुनियादी सुविधाओं से पूरी तरह बेदखल हो जाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि सरकार जनसुविधाओं पर जो खर्च करती है वह उसका अपना निजी खजाना है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सरकार जो भी पैसा स्कूलों, सड़कों या नलों पर खर्च करती है, वह देश के आम नागरिकों द्वारा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों (Taxes) के रूप में दी गई मेहनत की कमाई होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह मान लेना कि पानी का अधिकार केवल अमीर और पक्के मकान वाले लोगों तक सीमित है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

संविधान का अनुच्छेद 21 बिना किसी आर्थिक या सामाजिक भेदभाव के भारत के प्रत्येक व्यक्ति को चाहे वह झुग्गी में रहता हो, सुरक्षित पेयजल की गारंटी देता है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

जनसुविधाएँ: राज्य का दायित्व एवं जीवन का अधिकार अनुच्छेद 21 (Right to Life) के तहत सुरक्षित जल व बुनियादी सेवाओं की अनिवार्यता जनसुविधाओं की मुख्य प्रकृति (Public Facilities) • साझा उपयोग (Shared Benefit): एक बार बनने पर अनगिनत नागरिकों को एक साथ लाभ सड़कें, बिजली ग्रिड, स्कूल, अस्पताल, पार्क • जल का संकट व स्वास्थ्य: भारत में जल-जनित रोगों से प्रतिदिन 1600+ मौतें स्वच्छ पेयजल शिशु मृत्यु दर रोकने का सबसे बड़ा अस्त्र संवैधानिक संरक्षण: अनुच्छेद 21 (सुभाष कुमार केस) सरकार बनाम निजी क्षेत्र (Govt vs Private Role) • निजी कंपनियों की सीमाएँ: केवल मुनाफे हेतु काम • गरीबों तक पहुँच नहीं बोलीविया जल युद्ध: निजीकरण के विनाशकारी परिणाम • सरकार की जवाबदेही: जनता के टैक्स के पैसे से सब्सिडी व मुफ्त सेवा कल्याणकारी राज्य: लाभ नहीं, सेवा ही परम लक्ष्य ब्राजील (पोर्टो एलेग्रे): सफल 100% सरकारी जल आपूर्ति चेन्नई केस स्टडी: जल वितरण में वर्गीय असमानता (Inequality in Water Access) अन्ना नगर (धनी वर्ग - Affluent) • नियमित नल का पानी, लॉन सींचने की छूट। • कमी होने पर निजी टैंकर और आरओ फिल्टर से भरपूर उपलब्धता। सैदापेट (झुग्गी बस्ती - Slum Area) • 30 परिवारों के लिए 1 साझा नल, दिन में मात्र 20 मिनट पानी। • प्रति परिवार 2-3 बाल्टी का कोटा, घंटों कतार में संघर्ष।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. जनसुविधाएँ वे आवश्यक बुनियादी सेवाएँ हैं जो किसी समाज में मानवीय जीवन की रक्षा और विकास के लिए अनिवार्य हैं।
मुख्य बिंदु 2
  1. स्वच्छ पानी, बिजली, प्राथमिक स्वास्थ्य, विद्यालय और सार्वजनिक परिवहन जनसुविधाओं के प्रमुख उदाहरण हैं।
मुख्य बिंदु 3
  1. किसी जनसुविधा की मुख्य विशेषता यह होती है कि इसके निर्माण का लाभ समाज के बहुत से लोग एक साथ साझा करते हैं।
मुख्य बिंदु 4
  1. भारत में प्रतिदिन 1600 से अधिक लोग (मुख्यतः छोटे बच्चे) दूषित पानी से होने वाले जल-जनित रोगों के कारण मर जाते हैं।
मुख्य बिंदु 5
  1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के तहत सुरक्षित पेयजल पाना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है।
मुख्य बिंदु 6
  1. सर्वोच्च न्यायालय ने 1991 के सुभाष कुमार मामले में प्रदूषण-मुक्त जल और स्वच्छ हवा को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना।
मुख्य बिंदु 7
  1. निजी कंपनियाँ लाभ के लिए काम करती हैं, अतः वे गरीबों को सस्ती जनसुविधाएँ उपलब्ध नहीं करा सकतीं।
मुख्य बिंदु 8
  1. जनसुविधाएँ मुहैया कराना सरकार का प्राथमिक संवैधानिक दायित्व है, जिसे वह जनता के टैक्स के पैसे से वित्तपोषित करती है।
मुख्य बिंदु 9
  1. चेन्नई में जल संकट का अध्ययन दिखाता है कि अमीर लोग पैसे से पानी खरीद लेते हैं जबकि गरीब झुग्गीवासी भयंकर किल्लत झेलते हैं।
मुख्य बिंदु 10
  1. ब्राजील के पोर्टो एलेग्रे शहर ने सिद्ध किया कि सरकारी विभाग जनता की भागीदारी से 100% नागरिकों को स्वच्छ जल दे सकता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत स्वच्छ पेयजल के अधिकार को जीवन का मौलिक अधिकार माना गया है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: अनुच्छेद 21
अनुच्छेद 21 में जीवन के अधिकार को विस्तृत करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सुरक्षित जल को इसका अभिन्न अंग माना।
2
किसी "जनसुविधा" (Public Facility) की सबसे प्रमुख विशेषता क्या होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: इसका लाभ बहुत सारे लोग एक साथ साझा करते हैं
जनसुविधा किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं होती, बल्कि पूरे समाज के सामूहिक लाभ (Shared Benefit) के लिए होती है।
3
सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य (1991) के मुकदमे में सर्वोच्च न्यायालय ने क्या ऐतिहासिक फैसला दिया?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: प्रदूषण-मुक्त जल व वायु पाना अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ पर्यावरण और पानी के बिना गरिमापूर्ण जीवन संभव नहीं है।
4
ब्राजील का कौन सा शहर अपनी 100% सरकारी व जन-भागीदारी वाली सफल जल आपूर्ति के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पोर्टो एलेग्रे (Porto Alegre)
पोर्टो एलेग्रे ने बिना निजीकरण के सभी नागरिकों को स्वच्छ जल मुहैया कराकर विश्वव्यापी मिसाल कायम की।
5
सरकार जनसुविधाओं पर होने वाले भारी खर्च की भरपाई मुख्य रूप से किस माध्यम से करती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: जनता से वसूले जाने वाले करों (Taxes) से
सरकार नागरिकों से टैक्स वसूलकर बजट बनाती है और उसी से लोक-कल्याणकारी जनसुविधाएँ प्रदान करती है।
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अध्याय 1: कैसे, कब और कहाँ (How, When and Where) अध्याय 2: व्यापार से साम्राज्य तक (From Trade to Territory) अध्याय 3: ग्रामीण क्षेत्र पर शासन चलाना (Ruling the Countryside) अध्याय 4: आदिवासी, दीकु और एक स्वर्ण युग की कल्पना (Tribals, Dikus and the Vision of a Golden Age) अध्याय 5: जब जनता बगावत करती है (1857 और उसके बाद) (When People Rebel) अध्याय 6: देशी जनता को सभ्य बनाना, राष्ट्र को शिक्षित करना (Civilising the Native, Educating the Nation) अध्याय 7: महिलाएं, जाति एवं सुधार (Women, Caste and Reform) अध्याय 8: राष्ट्रीय आंदोलन का संघटन: 1870 के दशक से 1947 तक (The Making of the National Movement: 1870s-1947) अध्याय 9: संसाधन (Resources) (Resources) अध्याय 10: भूमि, मृदा, जल, प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन संसाधन (Land, Soil, Water, Natural Vegetation and Wildlife Resources) अध्याय 11: कृषि (Agriculture) अध्याय 12: उद्योग (Industries) (Industries) अध्याय 13: मानव संसाधन (Human Resources) (Human Resources) अध्याय 14: भारतीय संविधान (The Indian Constitution) (The Indian Constitution) अध्याय 15: धर्मनिरपेक्षता की समझ (Understanding Secularism) अध्याय 16: संसद तथा कानूनों का निर्माण (Parliament and the Making of Laws) अध्याय 17: न्यायपालिका (Judiciary) (Judiciary) अध्याय 18: हाशियाकरण की समझ (Understanding Marginalisation) अध्याय 19: हाशियाकरण से निपटना (Confronting Marginalisation) अध्याय 20: जनसुविधाएं (Public Facilities) (Public Facilities) अध्याय 21: कानून और सामाजिक न्याय (Law and Social Justice)

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