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JAC • Class 8 • Social Science • Ch 18
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Understanding Marginalisation

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 नागरिक शास्त्र का पाँचवाँ अध्याय "हाशियाकरण की समझ" (Understanding Marginalisation) सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बहिष्करण (Exclusion) की गहरी मानवीय व संवैधानिक पड़ताल करता है। "हाशियाकरण" (Marginalisation) का अर्थ समाज के मुख्य केंद्र से बेदखल होकर किनारे या हाशिए पर धकेल दिया जाना है, जहाँ किसी समुदाय को संसाधनों, अधिकारों और विकास के अवसरों से वंचित कर दिया जाता है। इस अध्याय में भारत के दो प्रमुख हाशिए पर स्थित समूहों—(1) आदिवासी (Adivasis: मूल निवासी) और (2) अल्पसंख्यक (विशेषकर मुस्लिम समुदाय)—की वास्तविक स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। भारत की कुल आबादी में 8% आदिवासी हैं, जिनकी भाषा, संस्कृति, और प्रकृति-आधारित धर्म (सरना) मुख्यधारा से भिन्न हैं। अध्याय में यह उजागर किया गया है कि कैसे औपनिवेशिक काल से लेकर आज तक खदानों, बाँधों, अभयारण्यों और औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर आदिवासियों को उनकी पुश्तैनी जमीन से बेदखल किया गया (विस्थापितों में 50% से अधिक आदिवासी हैं), और कैसे उन्हें फिल्मों/मीडिया में केवल "रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर नाचने वाले" रूढ़िवादी (Stereotype) रूप में सीमित कर दिया गया। इसके साथ ही न्यायमूर्ति राजेंद्र सच्चर समिति (Sachar Committee - 2005) की रिपोर्ट के आधार पर मुस्लिम समुदाय की सामाजिक-आर्थिक व शैक्षणिक पिछड़ेपन की स्थिति तथा घेटोआइजेशन (Ghettoisation) की सामाजिक परिघटना का झारखण्ड के जनजातीय परिवेश के विशेष संदर्भ में प्रामाणिक विश्लेषण संकलित है।

⚡ जिस झारखण्ड की धरती भारत का 40% कोयला, ताँबा और लोहा उगलती है, उसी धरती के मूल निवासी आदिवासी सदियों से गरीबी, कुपोषण और विस्थापन के हाशिए पर क्यों धकेल दिए गए?

सोचिए, यदि किसी दिन कोई बड़ी कंपनी आकर आपसे कहे कि जिस घर, खेत और जंगल में आपकी दस पीढ़ियाँ पली-बढ़ी हैं, उसे 24 घंटे में खाली कर दीजिए क्योंकि उसके नीचे कोयले की खदान है! आपकी भाषा को लोग पिछड़ा कहें, आपकी संस्कृति का टीवी पर मजाक उड़ाया जाए, और आपको शहर में एक अदद कमरे के लिए भटकना पड़े—तो आपको कैसा महसूस होगा? यही कड़वा यथार्थ है "हाशियाकरण" का। हमारे समाज में कुछ समुदायों को शक्तिहीन, बेजुबान और किनारे क्यों कर दिया जाता है? क्या हमारा संविधान इस अन्याय को रोकने में सक्षम है? आइए, हाशिए के इन अनकहे दर्दों और सच्चाइयों को समझें!

Why This Chapter Matters

हाशियाकरण को समझना सामाजिक न्याय और समानता की पहली शर्त है। झारखण्ड एक आदिवासी बहुल राज्य है (लगभग 26% जनजातीय आबादी), जहाँ संथाली, मुंडा, हो, उरांव और खड़िया समुदायों के जल, जंगल, जमीन के अधिकार और सांस्कृतिक अस्मिता का संरक्षण राज्य की शीर्ष प्राथमिकता है।

Before You Begin (Prerequisites)

  • समानता और भेदभाव के संवैधानिक सिद्धांत (अनुच्छेद 14 और 15)।
  • भारत की बहु-सांस्कृतिक, बहु-धार्मिक और बहु-भाषाई विविधता।
  • झारखण्ड के प्रमुख जनजातीय समूह (संथाल, मुंडा, हो, उरांव)।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • हाशियाकरण (Marginalisation) की संकल्पना और इसके सामाजिक-आर्थिक कारणों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • आदिवासियों की पारंपरिक जीवनशैली, प्रकृति-पूजा (सरना धर्म) और वनों पर उनकी ऐतिहासिक निर्भरता को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • खनन, बांध और औद्योगिकीकरण द्वारा आदिवासियों के विस्थापन और आजीविका संकट के कारणों की समीक्षा कर सकेंगे।
  • रूढ़िवादिता (Stereotyping) का अर्थ समझ सकेंगे और आदिवासियों के प्रति भ्रामक धारणाओं का खंडन कर सकेंगे।
  • सच्चर समिति (2005) के आंकड़ों के आधार पर मुस्लिम समुदाय के हाशियाकरण और घेटोआइजेशन का मूल्यांकन कर सकेंगे।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. हाशियाकरण क्या है? (What Does it...
2 2. आदिवासी और हाशियाकरण (Adivasis a...
3 3. रूढ़िवादिता और आदिवासियों की भ्र...
4 4. अल्पसंख्यक और हाशियाकरण: सच्चर स...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. हाशियाकरण क्या है? (What Does it Mean to be Marginalised?)

जैसे किसी कॉपी के पन्ने पर किनारे एक खाली जगह (हाशिया/Margin) छोड़ दी जाती है, जहाँ मुख्य बातें नहीं लिखी जातीं, ठीक वैसे ही समाज में हाशियाकरण का अर्थ है:

  • परिभाषा: जब किसी समूह या समुदाय को उसकी भाषा, रीति-रिवाज, धर्म, निम्न आर्थिक स्थिति या कम संख्या (अल्पसंख्यक होने) के कारण समाज की मुख्यधारा से अलग-थलग कर दिया जाता है और वह शक्तिहीनता का अनुभव करता है।
  • हाशियाकरण के कारक: गरीबी और संसाधनों का अभाव, सामाजिक भेदभाव, राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी, तथा बहुसंख्यक संस्कृति का आधिपत्य।
  • परिणाम: ऐसे समुदायों को अच्छे स्कूलों, अस्पतालों, रोजगार और न्याय के अवसरों तक पहुँच नहीं मिल पाती, जिससे वे विकास की दौड़ में पिछड़ जाते हैं।

2. आदिवासी और हाशियाकरण (Adivasis and Marginalisation)

शब्द "आदिवासी" का अर्थ है मूल निवासी। यह वे समुदाय हैं जो सदियों से जंगलों के साथ जीते आए हैं और कई क्षेत्रों में आज भी उसी तरह रहते हैं:

पहलूआदिवासी वास्तविकताहाशियाकरण का प्रभाव
जनसांख्यिकी व संस्कृतिभारत की कुल जनसंख्या का लगभग 8%; 500 से अधिक जनजातीय समूह। अपनी विशिष्ट भाषाएं (जैसे संथाली, मुंडारी) और प्रकृति-पूजक धर्म (सरना)।मुख्यधारा के समाज में उनकी भाषाओं और समृद्ध दर्शन को मान्यता नहीं मिलती।
विस्थापन व भूमि बेदखली19वीं सदी से खदानों, बड़े बांधों (जैसे सरदार सरोवर) और आरक्षित वनों के लिए आदिवासियों को उनकी जमीनों से बेदखल किया गया।देश में विस्थापित होने वाले कुल लोगों में 50% से अधिक केवल आदिवासी हैं; झारखण्ड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सर्वाधिक प्रभावित।
आजीविका व कुपोषणजंगल छूटने से आजीविका, जड़ी-बूटियाँ और सांस्कृतिक पहचान छिन गई। शहरों में निर्माण मजदूर या घरेलू नौकर बनने को मजबूर।आदिवासी बच्चों में कुपोषण की दर 45% से अधिक; साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे।

3. रूढ़िवादिता और आदिवासियों की भ्रामक छवि (Stereotyping of Adivasis)

भारतीय समाज और मीडिया में आदिवासियों के प्रति गहरी रूढ़िवादिता व्याप्त है:

  • रूढ़िवादी छवि (Stereotype): स्कूली कार्यक्रमों, फिल्मों या राष्ट्रीय पर्वों की झांकियों में आदिवासियों को हमेशा रंग-बिरंगे पंख, सिर पर मुकुट और पारंपरिक वस्त्र पहनकर केवल नाचते-गाते दिखाया जाता है।
  • गलत धारणा: लोगों को लगता है कि आदिवासी विदेशी हैं, आदिम हैं, पिछड़े हैं और वे नए विचारों या आधुनिक विकास को अपनाना नहीं चाहते।
  • दुष्परिणाम: इस भ्रामक सोच के कारण जब आदिवासियों की जमीनें छीनी जाती हैं या उन पर अत्याचार होता है, तो समाज इसे गंभीरता से नहीं लेता और मानता है कि उन्हें "सभ्य" बनाने के लिए ऐसा करना जरूरी है।

4. अल्पसंख्यक और हाशियाकरण: सच्चर समिति रिपोर्ट (Minorities & Sachar Committee)

संविधान में अल्पसंख्यकों (धार्मिक व भाषाई) को बहुसंख्यकों के सांस्कृतिक वर्चस्व से बचाने के लिए विशेष सुरक्षात्मक प्रावधान किए गए हैं:

  • सच्चर समिति (2005): भारत सरकार ने न्यायमूर्ति राजेंद्र सच्चर की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई ताकि मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति की जांच की जा सके।
  • मुख्य निष्कर्ष: रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि कई पैमानों (जैसे पक्के मकान, बिजली, नल का पानी, बैंक ऋण, और सरकारी नौकरियों में भागीदारी) पर मुस्लिम समुदाय की स्थिति अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) जैसी ही चिंताजनक है। केवल 3% मुस्लिम बच्चे ही मदरसों में पढ़ते हैं, जबकि 66% सामान्य सरकारी स्कूलों में जाते हैं।
  • घेटोआइजेशन (Ghettoisation): भेदभाव, सामाजिक पूर्वाग्रह और असुरक्षा की भावना के कारण जब किसी विशेष समुदाय के लोग पूरे शहर में बिखरने के बजाय एक ही सुरक्षित मोहल्ले में सिमट कर रहने को मजबूर होते हैं, तो इस प्रक्रिया को घेटोआइजेशन कहा जाता है।

Key Historical Terms, Chronology & Administrative Principles

आदिवासी जनसंख्या अनुपात
भारत: ~8% | झारखण्ड राज्य: ~26.2% (जनगणना 2011)
झारखण्ड में 32 मान्यता प्राप्त जनजातीय समुदाय निवास करते हैं जिनमें संथाल सबसे बड़ा समूह है।
विस्थापन में आदिवासियों की हिस्सेदारी
खनन व बांध परियोजनाओं से विस्थापित कुल आबादी का 50% से अधिक
जमीन छिनने से आदिवासियों की आर्थिक आजीविका के साथ-साथ सामाजिक व सांस्कृतिक ताना-बाना नष्ट होता है।
सच्चर समिति का गठन व रिपोर्ट
अध्यक्ष: जस्टिस राजेंद्र सच्चर | गठन: 2005 | रिपोर्ट प्रस्तुत: 2006
भारत में मुस्लिम समुदाय के सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक पिछड़ेपन का पहला व्यापक सरकारी दस्तावेज।
घेटोआइजेशन (Ghettoisation)
सामाजिक भय व भेदभाव के कारण किसी समुदाय का एक विशिष्ट बस्ती में संकेंद्रण
यह प्रक्रिया समाज में अलगाव, पूर्वाग्रह और अविश्वास की खाई को और गहरा करती है।
संविधान का अनुच्छेद 29 एवं 30
सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक अधिकार (अल्पसंख्यकों के संरक्षण हेतु)
अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण व शिक्षण संस्थान खोलने की गारंटी।

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
प्रश्न 1: "हाशियाकरण" (Marginalisation) से आप क्या समझते हैं? इसके दो प्रमुख सामाजिक कारण बताइए।
Step-by-Step Solution:

उत्तर: हाशियाकरण का अर्थ: जब समाज के किसी विशेष समूह या समुदाय को मुख्यधारा के केंद्र से बेदखल कर किनारे (हाशिए) पर धकेल दिया जाता है, जिससे वे आर्थिक संसाधनों, सामाजिक प्रतिष्ठा और राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया से वंचित हो जाते हैं। दो प्रमुख कारण:

  1. भिन्न भाषा और संस्कृति: जब किसी समुदाय की भाषा, रीति-रिवाज या जीवनशैली बहुसंख्यक वर्ग से अलग होती है, तो समाज उन्हें हीन दृष्टि से देखने लगता है।
  2. गरीबी और संसाधनों का अभाव: आर्थिक विपन्नता के कारण ऐसे समुदायों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और अच्छे रोजगार नहीं मिल पाते, जिससे वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी पिछड़े रह जाते हैं।
Example 2
प्रश्न 2: औद्योगिकीकरण और खनन के कारण आदिवासियों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है? समझाइए।
Step-by-Step Solution:

उत्तर: औद्योगिकीकरण और खनन ने आदिवासियों के जीवन को तहस-नहस कर दिया है:

  1. जमीनों से बेदखली: भारत के अधिकांश खनिज और वन क्षेत्र (जैसे झारखण्ड, ओडिशा, छत्तीसगढ़) आदिवासियों के इलाकों में हैं। खदानों, कारखानों और बांधों के निर्माण के लिए उनकी पुश्तैनी जमीनें जबरन अधिग्रहित कर ली गईं।
  2. आजीविका का विनाश: जंगलों से मिलने वाले फल, कंदमूल, जलावन और जड़ी-बूटियाँ छिन जाने से वे अपनी पारंपरिक आजीविका खो बैठे।
  3. विस्थापन और पलायन: अपनी जमीन खोकर वे शहरों में बेहद कम मजदूरी पर निर्माण मजदूर, रिक्शा चालक या घरेलू नौकर के रूप में काम करने को विवश हो गए, जहाँ वे मलिन बस्तियों (Slums) में नारकीय जीवन जीते हैं।
Example 3
प्रश्न 3: आदिवासियों के प्रति समाज में प्रचलित "रूढ़िवादी छवि" (Stereotype) क्या है और यह नुकसानदेह क्यों है?
Step-by-Step Solution:

उत्तर: आदिवासियों की रूढ़िवादी छवि: समाज में यह भ्रामक धारणा बना दी गई है कि आदिवासी हमेशा सिर पर मोरपंख लगाकर, रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर केवल नाचते-गाते रहते हैं। लोग मानते हैं कि वे आदिम हैं, जंगली हैं और आधुनिक विज्ञान या शिक्षा को अपनाना नहीं चाहते। नुकसानदेह क्यों:

  1. यह छवि उनके समृद्ध ज्ञान, उन्नत वन प्रबंधन और बौद्धिक क्षमताओं को पूरी तरह अनदेखा कर देती है।
  2. इसके कारण कार्यस्थलों, स्कूलों और शहरों में आदिवासी बच्चों और युवाओं के साथ भेदभाव होता है।
  3. जब उनके जंगलों को काटा जाता है, तो बाहरी समाज आदिवासियों के विस्थापन को विकास के नाम पर जायज ठहराने लगता है।
Example 4
प्रश्न 4: न्यायमूर्ति राजेंद्र सच्चर समिति (2005) की रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष क्या थे?
Step-by-Step Solution:

उत्तर: सच्चर समिति ने भारत के मुस्लिम समुदाय की वास्तविक स्थिति का अध्ययन कर निम्नलिखित मुख्य निष्कर्ष दिए:

  1. विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सूचकांकों पर मुस्लिम समुदाय की स्थिति अनुसूचित जातियों (SC) और जनजातियों (ST) के समान अत्यंत दयनीय पाई गई।
  2. सरकारी नौकरियों (IAS, IPS, रेलवे, बैंकिंग) में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व उनकी कुल आबादी (लगभग 14%) की तुलना में नगण्य (मात्र 3% से 5%) था।
  3. प्राथमिक व उच्च शिक्षा में ड्रॉप-आउट दर बहुत अधिक थी और बैंक ऋण मिलने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
Example 5
प्रश्न 5: "घेटोआइजेशन" (Ghettoisation) क्या है और यह क्यों होता है?
Step-by-Step Solution:

उत्तर: घेटोआइजेशन की संकल्पना: घेटोआइजेशन वह सामाजिक प्रक्रिया है जिसमें किसी विशेष समुदाय के लोग सामाजिक पूर्वाग्रह, भेदभाव या दंगों के भय के कारण पूरे शहर में रहने के बजाय एक ही सुरक्षित इलाके या बस्ती (Ghetto) में सिमट कर रहने को विवश हो जाते हैं। कारण:

  1. अन्य इलाकों में मकान किराये पर या खरीदने में भेदभाव का सामना करना।
  2. सांप्रदायिक तनाव या असुरक्षा के माहौल में अपने समुदाय के बीच सुरक्षा महसूस करना। दुष्परिणाम: इससे समुदायों के बीच संवाद बंद हो जाता है और समाज में पूर्वाग्रह व दूरी और अधिक बढ़ जाती है।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

छात्र अक्सर सोचते हैं कि आदिवासी केवल जंगलों में रहने वाले अनपढ़ लोग हैं।

Scientific Reality & Correction

आदिवासियों के पास वनों, पर्यावरण, जड़ी-बूटियों और जल संरक्षण का अद्भुत पारंपरिक ज्ञान है। आज वे शिक्षा प्राप्त कर प्रशासनिक सेवाओं, खेल और राजनीति में देश का नेतृत्व कर रहे हैं।

Common Misconception

यह भ्रम होना कि सभी मुस्लिम बच्चे मदरसों में ही शिक्षा प्राप्त करते हैं।

Scientific Reality & Correction

सच्चर समिति की रिपोर्ट के अनुसार केवल 3% से 4% मुस्लिम बच्चे ही मदरसों में पढ़ते हैं; बाकी 66% सामान्य सरकारी स्कूलों में और शेष निजी स्कूलों में अध्ययन करते हैं।

Common Misconception

यह मान लेना कि हाशियाकरण केवल आर्थिक गरीबी से जुड़ा मुद्दा है।

Scientific Reality & Correction

हाशियाकरण केवल गरीबी नहीं है; यह सामाजिक सम्मान, भाषा की उपेक्षा, राजनीतिक शक्तिहीनता और सांस्कृतिक पहचान के संकट का बहुआयामी रूप है।

Visual Learning & Conceptual Map

हाशियाकरण के आयाम एवं सामाजिक यथार्थ (Dimensions of Marginalisation) संसाधनों, आजीविका और सांस्कृतिक अस्मिता से बेदखली का विश्लेषण आदिवासी समुदाय (मूल निवासी - ~8% आबादी) • जल, जंगल, जमीन से ऐतिहासिक जुड़ाव: प्रकृति-पूजक सरना धर्म • विशिष्ट समृद्ध भाषाएं • विस्थापन का भीषण संकट: खनन, बांध व उद्योगों से विस्थापितों में 50%+ आदिवासी झारखण्ड, ओडिशा व छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक आघात • रूढ़िवादिता (Stereotyping): केवल नाचने-गाने वाले या पिछड़े रूप में भ्रामक चित्रण आधुनिक ज्ञान व वन प्रबंधन क्षमताओं की उपेक्षा धार्मिक अल्पसंख्यक एवं सच्चर समिति (2005) • सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन: मुस्लिम समुदाय की स्थिति कई मामलों में SC/ST समान सरकारी नौकरियों व उच्च शिक्षा में अत्यंत कम हिस्सेदारी • घेटोआइजेशन (Ghettoisation): भेदभाव व सुरक्षा की चिंता से एक ही मोहल्ले में सिमटना विविधता व आपसी मेलजोल का बाधित होना • संवैधानिक सुरक्षा उपाय: अनुच्छेद 29-30: भाषाई व धार्मिक संस्कृति संरक्षण हाशियाकरण का दुष्चक्र (Vicious Cycle of Marginalisation) 1. संसाधनों से बेदखली भूमि व जंगल का छिनना → 2. आर्थिक विपन्नता कम मजदूरी व आजीविका संकट → 3. सामाजिक पूर्वाग्रह रूढ़िवादिता व हीन भावना → 4. विकास से पूर्ण अलगाव संवैधानिक न्याय की मांग

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
  1. हाशियाकरण का आशय किसी समूह या समुदाय को समाज के केंद्र से हटाकर किनारे या शक्तिहीन स्थिति में धकेल देना है।
Takeaway 2
  1. भारत में कुल जनसंख्या का लगभग 8% आदिवासी (मूल निवासी) हैं, जिनके 500 से अधिक विशिष्ट जनजातीय समूह हैं।
Takeaway 3
  1. आदिवासी प्रकृति-पूजक होते हैं और उनके रीति-रिवाज, भाषाएँ तथा जीवन दर्शन मुख्यधारा के धर्मों से भिन्न व विशिष्ट हैं।
Takeaway 4
  1. औपनिवेशिक काल से लेकर आज तक खदानों, बड़े बांधों और राष्ट्रीय उद्यानों के निर्माण में विस्थापितों में 50% से अधिक केवल आदिवासी रहे हैं।
Takeaway 5
  1. झारखण्ड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी खनिज संपदा होने के बावजूद स्थानीय आदिवासी समुदाय अत्यधिक गरीबी और कुपोषण झेल रहे हैं।
Takeaway 6
  1. समाज में आदिवासियों के प्रति यह रूढ़िवादिता बनी हुई है कि वे केवल रंग-बिरंगे कपड़ों में नाचने वाले, पिछड़े और असभ्य लोग हैं।
Takeaway 7
  1. भारतीय संविधान अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा हेतु अनुच्छेद 29 व 30 के तहत सांस्कृतिक व शैक्षणिक स्वतंत्रता प्रदान करता है।
Takeaway 8
  1. 2005 में गठित न्यायमूर्ति सच्चर समिति ने खुलासा किया कि कई क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय की स्थिति SC और ST के समान ही पिछड़ी है।
Takeaway 9
  1. घेटोआइजेशन उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें भय, अविश्वास या भेदभाव के कारण कोई समुदाय एक विशेष मोहल्ले में सिमट कर रहने लगता है।
Takeaway 10
  1. हाशिए के समुदायों को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष संवैधानिक सुरक्षा उपायों और समान अवसरों की अनिवार्य आवश्यकता है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
शब्द "आदिवासी" का शाब्दिक अर्थ निम्नलिखित में से क्या है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: मूल निवासी (Original Inhabitants)
आदिवासी का अर्थ है मूल निवासी, जो प्राचीन काल से वनों और प्रकृति के साथ घनिष्ठ संबंध बनाकर रहते आए हैं।
2
भारत में बांधों और खनन परियोजनाओं के कारण विस्थापित होने वाले कुल लोगों में आदिवासियों का अनुपात कितना रहा है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: 50% से अधिक
विभिन्न सरकारी व सामाजिक अध्ययनों के अनुसार विस्थापितों में आधे से अधिक (50%+) केवल जनजातीय समुदाय के लोग रहे हैं।
3
मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन करने के लिए 2005 में किस समिति का गठन किया गया था?
Reveal Answer & Explanation
Answer: न्यायमूर्ति राजेंद्र सच्चर समिति
जस्टिस सच्चर समिति ने 2006 में अपनी ऐतिहासिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें मुस्लिम पिछड़ेपन के आधिकारिक आंकड़े उजागर हुए।
4
जब कोई समुदाय सामाजिक भय या भेदभाव के कारण एक विशिष्ट सुरक्षित इलाके में सिमट कर रहने को मजबूर होता है, तो इसे क्या कहते हैं?
Reveal Answer & Explanation
Answer: घेटोआइजेशन (Ghettoisation)
इस प्रक्रिया को घेटोआइजेशन कहा जाता है, जिससे समाज में अलगाव और पूर्वाग्रह बढ़ते हैं।
5
2011 की जनगणना के अनुसार झारखण्ड राज्य में जनजातीय (आदिवासी) जनसंख्या का प्रतिशत लगभग कितना है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: लगभग 26.2%
झारखण्ड की कुल जनसंख्या में लगभग 26.2% जनजातीय आबादी है जो राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है।
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