पृथ्वी की सतह के निर्माण की व्याख्या प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत (Theory of Plate Tectonics) द्वारा की जाती है। इस सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी की ऊपरी पर्पटी 7 बड़ी तथा कुछ छोटी प्लेटों से बनी है।
प्लेटों की गतियों के तीन प्रकार:
- 1. अभिसारी सीमा (Convergent Boundary): जब दो प्लेटें एक-दूसरे के करीब आती हैं, तो वे या तो टकराकर मुड़ जाती हैं (वलन - Folding) या एक प्लेट दूसरी के नीचे धंस जाती है। हिमालय पर्वत का निर्माण इसी प्रक्रिया का परिणाम है।
- 2. अपसारी सीमा (Divergent Boundary): जब दो प्लेटें एक-दूसरे से दूर जाती हैं, तो भ्रंश (Faulting) और दरारें बनती हैं तथा ज्वालामुखी लावा बाहर निकलता है।
- 3. रूपांतर सीमा (Transform Boundary): जब दो प्लेटें एक-दूसरे के समानांतर क्षैतिज रूप से फिसलती हैं, जिससे भूकंप आते हैं।
गोंडवानालैंड और हिमालय की उत्पत्ति:
प्राचीन काल में पृथ्वी पर एक ही विशाल भूखंड था जिसे पैंजिया कहा जाता था। इसका दक्षिणी भाग गोंडवानालैंड (Gondwanaland) कहलाया जिसमें आज का भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और अंटार्कटिका शामिल थे; जबकि उत्तरी भाग अंगारालैंड कहलाया।
संवहनीय धाराओं ने गोंडवानालैंड को कई टुकड़ों में तोड़ दिया। भारतीय प्लेट उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित हुई और बहुत बड़ी यूरेशियन प्लेट से टकराई। इस टकराव के कारण दोनों प्लेटों के बीच स्थित टेथिस सागर (Tethys Geosyncline) की तलछटी चट्टानें वलित होकर ऊपर उठ गईं और हिमालय की पर्वत शृंखला का निर्माण हुआ।