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WBB • कक्षा XI • Computer Science • अध्याय 5
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

कंप्यूटर नेटवर्क

कंप्यूटर नेटवर्क आधुनिक डिजिटल सभ्यता का केंद्रीय संचार स्तंभ है, जो दुनिया भर में अरबों स्वायत्त कंप्यूटिंग उपकरणों को आपस में जोड़कर डेटा के तीव्र आदान-प्रदान और मूल्यवान संसाधनों की साझेदारी को संभव बनाता है। सरल शब्दों में, दो या दो से अधिक स्वायत्त कंप्यूटरों का ऐसा समूह जो संचरण माध्यमों और मानकीकृत प्रोटोकॉल के नियमों का पालन करते हुए परस्पर संचार स्थापित करता है, कंप्यूटर नेटवर्क कहलाता है। पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद (WBCHSE) कक्षा 11 कंप्यूटर साइंस के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार यह अध्याय नेटवर्क के भौगोलिक वर्गीकरण (PAN, LAN, MAN, WAN), गाइडेड मीडिया (ट्विस्टेड पेयर, समाक्षीय/कोएक्सियल, ऑप्टिकल फाइबर पूर्ण आंतरिक परावर्तन सहित) तथा अनगाइडेड वायरलेस मीडिया (रेडियो, माइक्रोवेव, इन्फ्रारेड), नेटवर्क टोपोलॉजी (बस, स्टार, रिंग, मेश, ट्री), नेटवर्क कनेक्टिंग डिवाइस (हब, स्विच, राउटर, ब्रिज, गेटवे), मानक आर्किटेक्चर (ISO-OSI 7-लेयर मॉडल और TCP/IP 4-लेयर सूट), IPv4 एड्रेसिंग व सबनेटिंग गणित तथा इंटरनेट के प्रमुख एप्लीकेशन प्रोटोकॉल (HTTP, HTTPS, FTP, DNS, SMTP, DHCP) का अत्यंत व्यापक और स्पष्ट विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

आज के तकनीकी युग में एकल या स्टैंडअलोन कंप्यूटर की उपयोगिता लगभग नगण्य है। क्लाउड कंप्यूटिंग, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-कॉमर्स, सोशल मीडिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और साइबर सुरक्षा—इन सभी की नींव सुदृढ़ कंप्यूटर नेटवर्किंग पर टिकी है। यह समझना कि डेटा पैकेट कैसे बनते हैं, वे समुद्र के भीतर बिछी ऑप्टिकल फाइबर केबलों के माध्यम से प्रकाश की गति से कैसे यात्रा करते हैं, और राउटर कैसे सबसे तीव्र मार्ग चुनता है, प्रत्येक कंप्यूटर विज्ञान के छात्र के लिए अनिवार्य है। बोर्ड परीक्षा में टोपोलॉजी, OSI लेयर्स की कार्यप्रणाली और IP एड्रेस की गणना से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं, जो उच्च शिक्षा में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और नेटवर्क सुरक्षा के लिए मजबूत वैचारिक आधार तैयार करते हैं।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 कंप्यूटर नेटवर्क की मूल अवधारणा, आर...
2 ट्रांसमिशन मीडिया: गाइडेड (तारयुक्त...
3 नेटवर्क टोपोलॉजी: संरचना, आवश्यक लि...
4 नेटवर्क कनेक्टिंग डिवाइसेज: हब, स्व...
5 रेफरेंस मॉडल: ISO-OSI 7-लेयर एवं TC...
6 IPv4 एड्रेसिंग, सबनेटिंग, स्विचिंग...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

कंप्यूटर नेटवर्क की मूल अवधारणा, आर्किटेक्चर एवं भौगोलिक वर्गीकरण

1.1 कंप्यूटर नेटवर्क की परिभाषा एवं प्रमुख उद्देश्य

कंप्यूटर नेटवर्क दो या दो से अधिक स्वायत्त (autonomous) कंप्यूटरों एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का ऐसा सुव्यवस्थित संयोजन है, जो गाइडेड (तारयुक्त) अथवा अनगाइडेड (ताररहित) संचार माध्यमों की सहायता से पूर्व-निर्धारित नियमों (प्रोटोकॉल) के अंतर्गत डेटा आदान-प्रदान और संसाधनों की साझेदारी करते हैं।

कंप्यूटर नेटवर्क स्थापित करने के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • संसाधन साझेदारी (Resource Sharing): महंगे प्रिंटर, स्कैनर, बैकअप स्टोरेज ड्राइव तथा शक्तिशाली सर्वर को नेटवर्क के सभी उपयोगकर्ता संयुक्त रूप से उपयोग कर सकते हैं।
  • उच्च विश्वसनीयता एवं अतिरेकता (High Reliability): महत्वपूर्ण फाइलों व डेटाबेस की कई प्रतियों को नेटवर्क के विभिन्न कंप्यूटरों में सुरक्षित रखा जा सकता है। एक सिस्टम के विफल होने पर भी दूसरा सिस्टम काम जारी रखता है।
  • लागत में कमी (Cost Reduction): प्रत्येक उपयोगकर्ता के लिए अलग-अलग महंगे हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर लाइसेंस खरीदने की आवश्यकता नहीं होती।
  • त्वरित व सुगम संचार (Rapid Communication): ईमेल, चैट, ऑडियो/वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा भौगोलिक दूरियों की परवाह किए बिना तत्काल सूचनाएं प्रेषित की जा सकती हैं।
  • भार संतुलन (Load Balancing & Distributed Computing): विशाल और जटिल गणनाओं को नेटवर्क के अनेक कंप्यूटरों में वितरित करके कार्य को अल्प समय में पूरा किया जा सकता है।
1.2 नेटवर्क आर्किटेक्चर: क्लाइंट-सर्वर बनाम पीयर-टू-पीयर

नेटवर्क में कंप्यूटरों की भूमिका और नियंत्रण के आधार पर दो प्रमुख आर्किटेक्चर प्रचलित हैं:

विशेषताक्लाइंट-सर्वर (Client-Server)पीयर-टू-पीयर (Peer-to-Peer / P2P)
नियंत्रण प्रणालीकेंद्रीकृत (Centralized); एक समर्पित शक्तिशाली सर्वर सभी संसाधनों व सुरक्षा को नियंत्रित करता है।विकेंद्रीकृत (Decentralized); कोई केंद्रीय सर्वर नहीं होता।
भूमिकाक्लाइंट अनुरोध (Request) भेजता है और सर्वर सेवा (Response) प्रदान करता है।प्रत्येक कंप्यूटर समान अधिकार रखता है और एक साथ क्लाइंट व सर्वर दोनों का कार्य करता है।
डेटा बैकअप व सुरक्षाअत्यधिक सुरक्षित; सर्वर पर ही संपूर्ण डेटा का केंद्रीय बैकअप लिया जाता है।कम सुरक्षित; प्रत्येक उपयोगकर्ता को अपने डेटा की सुरक्षा स्वयं करनी पड़ती है।
लागत एवं जटिलतासमर्पित सर्वर व कुशल नेटवर्क व्यवस्थापक की आवश्यकता के कारण अधिक खर्चीला।सस्ता, सरल तथा छोटे स्तर पर स्थापित करना अत्यंत सुगम।
विस्तार क्षमता (Scalability)सरलता से नए क्लाइंट्स जोड़कर विशाल नेटवर्क बनाया जा सकता है।10-12 से अधिक सिस्टम होने पर नेटवर्क धीमा और अव्यवस्थित हो जाता है।
व्यावहारिक उदाहरणवेबसाइट ब्राउज़िंग (HTTP/Web Server), बैंकिंग सॉफ्टवेयर, ईमेल।BitTorrent फाइल शेयरिंग, छोटे कार्यालय या घरेलू लैन।
1.3 भौगोलिक विस्तार के आधार पर नेटवर्क का वर्गीकरण

भौगोलिक परिधि और दूरी के अनुसार कंप्यूटर नेटवर्क को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में बांटा गया है:

  • PAN (Personal Area Network): किसी व्यक्ति के आसपास लगभग 1 से 10 मीटर के दायरे में फैला अत्यंत छोटा नेटवर्क। यह मुख्यतः ब्लूटूथ, Zigbee अथवा USB केबल द्वारा स्मार्टफोन, लैपटॉप, वायरलेस हेडफोन व स्मार्टवॉच को जोड़ता है। इसकी गति प्रायः 1-3 Mbps होती है।
  • LAN (Local Area Network): किसी एक कमरे, कार्यालय भवन, विद्यालय अथवा कॉलेज परिसर तक सीमित (10 मीटर से 1 किलोमीटर)। इसमें ट्विस्टेड पेयर केबल (Cat6) या वाई-फाई का उपयोग होता है। इसकी गति 100 Mbps से लेकर 10 Gbps तक होती है। इसका स्वामित्व एकल संस्था के पास होता है और त्रुटि दर अत्यंत कम होती है।
  • MAN (Metropolitan Area Network): एक संपूर्ण शहर या कस्बे में फैला नेटवर्क (दायरा 5 से 50 किलोमीटर)। जैसे—नगर का केबल टीवी नेटवर्क या किसी विश्वविद्यालय के विभिन्न परिसरों का जुड़ाव। इसमें ऑप्टिकल फाइबर और माइक्रोवेव ट्रांसमिशन का प्रयोग होता है।
  • WAN (Wide Area Network): संपूर्ण देश, महाद्वीप या पूरे विश्व में फैला विशाल नेटवर्क (100 किमी से हजारों किलोमीटर)। इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण इंटरनेट (Internet) है। इसमें सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर केबल, उपग्रह (सैटेलाइट) और वैश्विक दूरसंचार लिंक्स प्रयुक्त होते हैं। इसका कोई एकल स्वामी नहीं होता।

ट्रांसमिशन मीडिया: गाइडेड (तारयुक्त) एवं अनगाइडेड (ताररहित) माध्यम

2.1 गाइडेड ट्रांसमिशन मीडिया (Guided Media)

गाइडेड मीडिया में सिग्नल्स एक भौतिक तार या ठोस माध्यम के भीतर से होकर निश्चित दिशा में प्रवाहित होते हैं। इसके तीन प्रमुख प्रकार हैं:

  • ट्विस्टेड पेयर केबल (Twisted Pair Cable):
    • संरचना: दो पृथक-पृथक इंसुलेटेड तांबे के तारों को आपस में सर्पिलाकार रूप में लपेटा जाता है। तारों को लपेटने का मुख्य उद्देश्य बाहरी विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप (EMI) और पास के तारों के क्रॉसटॉक (Crosstalk) को निरस्त करना है।
    • प्रकार: 1. UTP (Unshielded Twisted Pair)—बिना अतिरिक्त धातु आवरण वाली सामान्य केबल (जैसे Cat5e, Cat6), जो सामान्य ऑफिस लैन में सर्वाधिक उपयोग होती है। 2. STP (Shielded Twisted Pair)—तारों के चारों ओर फॉयल शील्ड होती है, जो अत्यधिक नॉयस वाले औद्योगिक वातावरण में प्रयोग होती है।
    • कनेक्टर व सीमा: इसमें 8-पिन वाला RJ-45 (Registered Jack-45) कनेक्टर लगता है। बिना रिपीटर के इसकी अधिकतम प्रभावी दूरी 100 मीटर है।
  • समाक्षीय / कोएक्सियल केबल (Coaxial Cable):
    • संरचना: इसके केंद्र में एक ठोस तांबे का चालक (Center Conductor) होता है, जिसके ऊपर प्लास्टिक का इंसुलेटर लगा होता है। उसके ऊपर बुनी हुई तांबे की जाली (Metallic Mesh) होती है जो ग्राउंडिंग व शील्ड का कार्य करती है, और सबसे बाहर पीवीसी जैकेट होती है।
    • विशेषताएं: ट्विस्टेड पेयर की तुलना में अधिक बैंडविड्थ और नॉयस प्रतिरोधक क्षमता। केबल टीवी नेटवर्क और पुराने ईथरनेट में प्रयुक्त। इसमें BNC और T-कनेक्टर का प्रयोग होता है।
  • ऑप्टिकल फाइबर केबल (Optical Fiber Cable - OFC):
    • संरचना: यह अति शुद्ध कांच (सिलिका) या प्लास्टिक का अत्यंत बारीक रेशा होता है। इसके केंद्रीय भाग को कोर (Core) और बाहरी आवरण को क्लैडिंग (Cladding) कहते हैं। कोर का अपवर्तनांक (Refractive Index, $n_1$) सदैव क्लैडिंग के अपवर्तनांक ($n_2$) से अधिक रखा जाता है ($n_1 > n_2$)।
    • कार्य सिद्धांत: पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection - TIR)। जब प्रकाश किरण कोर से क्लैडिंग की सीमा पर क्रांतिक कोण ($ heta_c = \sin^{-1}(n_2 / n_1)$) से अधिक कोण पर आपतित होती है, तो वह बाहर नहीं निकलती बल्कि कोर में ही लगातार परावर्तित होकर प्रकाश की गति से संचरित होती है।
    • लाभ: यह विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप (EMI) से शत-प्रतिशत मुक्त है क्योंकि इसमें कोई विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती। अत्यधिक उच्च बैंडविड्थ (Gbps से Tbps) और न्यूनतम सिग्नल क्षय (Attenuation) इसे आधुनिक इंटरनेट की रीढ़ बनाते हैं।
2.2 अनगाइडेड ट्रांसमिशन मीडिया (Unguided Wireless Media)

अनगाइडेड मीडिया में विद्युत चुम्बकीय तरंगें खुले वायुमंडल या अंतरिक्ष में बिना किसी भौतिक तार के प्रसारित होती हैं:

  • रेडियो तरंगें (Radio Waves, 3 KHz - 1 GHz): यह सर्वदिशात्मक (Omni-directional) होती हैं, अर्थात सभी दिशाओं में फैलती हैं। ये ठोस दीवारों को पार करने में सक्षम हैं। AM/FM रेडियो, टीवी प्रसारण तथा सेलुलर नेटवर्क में उपयोगी।
  • माइक्रोवेव (Microwave, 1 GHz - 300 GHz): यह एकदिशीय (Uni-directional) होती हैं और दृष्टि-रेखा (Line-of-Sight) के अनुसार सीधी रेखा में चलती हैं। ये बाधाओं को पार नहीं कर सकतीं, इसलिए 30-50 किमी की दूरी पर रिले टावर लगाने पड़ते हैं। उपग्रह संचार (Satellite) और दूरस्थ टेलीकॉम लिंक्स में प्रयुक्त।
  • इन्फ्रारेड (Infrared, 300 GHz - 400 THz): अत्यंत कम दूरी का दृष्टि-रेखा संचार। यह ठोस दीवारों को पार नहीं कर सकता, जो सुरक्षा की दृष्टि से लाभदायक है। टीवी रिमोट कंट्रोल, वायरलेस कीबोर्ड/माउस में प्रयुक्त।

नेटवर्क टोपोलॉजी: संरचना, आवश्यक लिंक्स एवं तुलनात्मक विश्लेषण

3.1 टोपोलॉजी की परिभाषा एवं प्रमुख प्रकार

नेटवर्क टोपोलॉजी का अर्थ है किसी कंप्यूटर नेटवर्क में नोड्स (कंप्यूटर/उपकरण) और उन्हें जोड़ने वाले संचार लिंक्स की ज्यामितीय या भौतिक व्यवस्था। इसके प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:

  • बस टोपोलॉजी (Bus Topology):
    • संरचना: सभी नोड्स एक ही मुख्य केंद्रीय केबल (Trunk বা Backbone) से ड्रॉप लाइनों द्वारा जुड़े होते हैं। केबल के दोनों सिरों पर सिग्नल के परावर्तन को रोकने के लिए 50-ओम टर्मिनेटर (Terminator) लगाए जाते हैं।
    • गुण-दोष: केबल की बहुत कम आवश्यकता और स्थापना अत्यंत सस्ती। परंतु यदि मुख्य बैकबोन केबल कहीं से टूट जाए, तो संपूर्ण नेटवर्क ठप हो जाता है। खराबी खोजना (Troubleshooting) अत्यंत कठिन है।
  • स्टार टोपोलॉजी (Star Topology):
    • संरचना: प्रत्येक कंप्यूटर एक केंद्रीय उपकरण (स्विच या हब) से सीधे पॉइंट-टू-पॉइंट केबल द्वारा जुड़ा होता है। वर्तमान में लैन (LAN) के लिए यह सर्वाधिक लोकप्रिय और मानक टोपोलॉजी है।
    • गुण-दोष: यदि किसी एक कंप्यूटर की केबल खराब हो जाए, तो शेष नेटवर्क अप्रभावित रहता है। नए कंप्यूटर जोड़ना या हटाना बहुत आसान है। खराबी की पहचान तुरंत हो जाती है। लेकिन यदि केंद्रीय स्विच खराब हो जाए, तो पूरा नेटवर्क बंद हो जाता है (Single Point of Failure)।
    • केबल आवश्यकता: $N$ नोड्स के लिए ठीक $N$ केबल्स की आवश्यकता होती है।
  • रिंग टोपोलॉजी (Ring Topology):
    • संरचना: प्रत्येक नोड अपने ठीक अगल-बगल के दो नोड्स से जुड़कर एक बंद वृत्ताकार लूप बनाता है। डेटा सदैव एक ही दिशा (Unidirectional) में घूमता है। डेटा टकराव से बचने के लिए 'टोकन' (Token) फ्रेम का उपयोग किया जाता है।
    • गुण-दोष: किसी केंद्रीय स्विच की आवश्यकता नहीं होती और सभी नोड्स को डेटा भेजने का समान अवसर मिलता है। परंतु लूप का एक भी नोड या केबल खराब होने पर पूरा चक्र टूट जाता है।
  • मेश टोपोलॉजी (Mesh Topology):
    • संरचना: एक पूर्ण मेश (Full Mesh) नेटवर्क में प्रत्येक कंप्यूटर नेटवर्क के अन्य प्रत्येक कंप्यूटर से सीधे समर्पित (dedicated) पॉइंट-टू-पॉइंट लिंक द्वारा जुड़ा होता है।
    • लिंक गणना सूत्र: $N$ नोड्स के लिए आवश्यक कुल भौतिक लिंक्स की संख्या = $L = \frac{N(N - 1)}{2}$ और प्रत्येक नोड पर आवश्यक पोर्ट = $N - 1$।
    • गुण-दोष: सर्वोच्च विश्वसनीयता व अतिरेकता (Redundancy)। कोई लिंक टूटने पर भी वैकल्पिक रास्तों से डेटा प्रवाहित होता रहता है। पूर्ण गोपनीयता। परंतु अत्यधिक केबल्स व पोर्ट्स की आवश्यकता के कारण यह सबसे महंगी और जटिल टोपोलॉजी है। परमाणु संयंत्रों व सैन्य नेटवर्क में प्रयुक्त।
  • ट्री टोपोलॉजी (Tree Topology):
    • संरचना: यह कई स्टार टोपोलॉजीज का एक पदानुक्रमित (Hierarchical) या वृक्ष जैसा संयोजन है। शीर्ष पर एक रूट स्विच होता है जिससे शाखाओं की तरह द्वितीयक स्विच जुड़े होते हैं।
    • गुण-दोष: बड़े विद्यालयों, बहुमंजिला भवनों और विभागीय लैन के लिए आदर्श। आसानी से विस्तार योग्य। परंतु रूट स्विच खराब होने पर पूरी शाखा कट जाती है।

नेटवर्क कनेक्टिंग डिवाइसेज: हब, स्विच, राउटर, ब्रिज एवं गेटवे

4.1 नेटवर्किंग उपकरणों की कार्यप्रणाली एवं लेयर स्थिति

विभिन्न कंप्यूटरों और उप-नेटवर्कों को आपस में जोड़ने के लिए कई हार्डवेयर उपकरणों का प्रयोग किया जाता है:

  • रिपीटर (Repeater - Layer 1 Physical):
    • यह 2-पोर्ट वाला फिजिकल लेयर उपकरण है जो केबल की अधिक लंबाई के कारण कमजोर पड़े सिग्नल्स (Attenuation) को पुनः मजबूत करता है। यह कमजोर सिग्नल ग्रहण कर, नॉयस हटाकर उसे मूल शक्ति में पुनर्जीवित (Regenerate) करके आगे भेज देता है। यह कोई एड्रेस नहीं पढ़ता।
  • हब (Hub - Layer 1 Physical):
    • हब एक मल्टीपोर्ट रिपीटर है। यह एक अत्यंत सामान्य और 'बुद्धू' (Dumb Device) उपकरण है। जब किसी एक पोर्ट पर कोई सिग्नल या बिट्स आते हैं, तो हब बिना कोई एड्रेस देखे उन्हें बाकी सभी पोर्ट्स पर अंधाधुंध ब्रॉडकास्ट (Broadcast) कर देता है।
    • कमियां: हब से जुड़े सभी उपकरण एकल कोलिजन डोमेन (Single Collision Domain) साझा करते हैं। एक साथ दो उपकरणों द्वारा डेटा भेजने पर सिग्नल टकरा जाते हैं (कोलिजन), जिससे नेटवर्क धीमा हो जाता है। आधुनिक लैन में हब का उपयोग समाप्त हो चुका है।
  • ब्रिज (Bridge - Layer 2 Data Link):
    • ब्रिज 2-पोर्ट वाला समझदार उपकरण है जो एक बड़े लैन को दो भौतिक खंडों में बांटता है। यह फ्रेम के MAC एड्रेस को पढ़कर ट्रैफिक को फिल्टर करता है, जिससे एक भाग का अनावश्यक डेटा दूसरे भाग में नहीं जाता।
  • स्विच (Switch - Layer 2 Data Link):
    • स्विच आधुनिक मल्टीपोर्ट ब्रिज है। स्विच अपने भीतर एक MAC एड्रेस टेबल (CAM Table) बनाकर रखता है। जब कोई नोड फ्रेम भेजता है, तो स्विच प्रेषक का MAC एड्रेस सीखता है और गंतव्य MAC एड्रेस देखकर फ्रेम को केवल संबंधित गंतव्य पोर्ट पर ही यूनिकॉस्ट (Unicast) करता है।
    • प्रमुख लाभ: स्विच का प्रत्येक पोर्ट अपना स्वतंत्र कोलिजन डोमेन (Isolated Collision Domain) बनाता है। इससे नेटवर्क में कोलिजन पूरी तरह समाप्त हो जाता है और फुल-डुप्लेक्स गति प्राप्त होती है। हालांकि, स्विच एक ही ब्रॉडकास्ट डोमेन बनाए रखता है।
  • राउटर (Router - Layer 3 Network Layer):
    • राउटर एक अत्यंत बुद्धिमान उपकरण है जो दो भिन्न सबनेट्स या भिन्न नेटवर्क आर्किटेक्चर (जैसे आपका होम लैन और वैश्विक इंटरनेट) को जोड़ता है।
    • कार्यप्रणाली: राउटर लॉजिकल IP एड्रेस और राउटिंग टेबल की सहायता से पैकेट को उसके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए सर्वोत्तम व तीव्र मार्ग चुनता है।
    • ब्रॉडकास्ट नियंत्रण: राउटर ब्रॉडकास्ट डोमेन को विभाजित करता है (Router isolates broadcast domains)। यह लेयर 2 के ब्रॉडकास्ट पैकेट को अन्य नेटवर्क में जाने से रोकता है, जिससे इंटरनेट पर ब्रॉडकास्ट तूफान नहीं आता।
  • गेटवे (Gateway - All OSI Layers 1-7):
    • गेटवे एक प्रोटोकॉल कनवर्टर (Protocol Converter) है। यह दो पूर्णतः भिन्न आर्किटेक्चर और भिन्न प्रोटोकॉल सूट वाले नेटवर्कों के मध्य अनुवादक का कार्य करते हुए संचार संभव बनाता है।

रेफरेंस मॉडल: ISO-OSI 7-लेयर एवं TCP/IP 4-लेयर आर्किटेक्चर

5.1 ISO-OSI 7-लेयर संदर्भ मॉडल

1984 में इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर स्टैंडर्डाइजेशन (ISO) ने ओपन सिस्टम्स इंटरकनेक्शन (OSI) मॉडल प्रतिपादित किया। यह एक सैद्धांतिक ढांचा है जो संचार प्रक्रिया को 7 क्रमिक स्तरों (नीचे से ऊपर 1 से 7) में विभाजित करता है:

  • 1. फिजिकल लेयर (Physical Layer): कच्चे बिट्स (0 और 1) को विद्युत सिग्नलों, प्रकाश स्पंदनों या रेडियो तरंगों में बदलकर ट्रांसमिशन माध्यम पर भेजता है। केबल, वोल्टेज, कनेक्टर और डेटा दर को परिभाषित करता है। PDU: Bits.
  • 2. डेटा लिंक लेयर (Data Link Layer): फिजिकल लेयर पर त्रुटिहीन संचार सुनिश्चित करता है। बिट्स को समूहीकृत कर फ्रेम (Frame) बनाता है। भौतिक MAC एड्रेस जोड़ता है तथा फ्लो कंट्रोल व एरर चेकिंग (CRC) करता है। दो सब-लेयर्स: LLC और MAC। PDU: Frame.
  • 3. नेटवर्क लेयर (Network Layer): स्रोत कंप्यूटर से गंतव्य कंप्यूटर तक पैकेट (Packet) पहुंचाने का कार्य करता है। तार्किक IPv4/IPv6 एड्रेसिंग और सर्वश्रेष्ठ मार्ग चयन (Routing) करता है। प्रमुख प्रोटोकॉल: IP, ICMP, ARP। PDU: Packet.
  • 4. ट्रांसपोर्ट लेयर (Transport Layer): एंड-टू-एंड (End-to-End) या प्रोसेस-टू-प्रोसेस विश्वसनीय डेटा डिलीवरी सुनिश्चित करता है। पोर्ट नंबर (Port Number) द्वारा विशिष्ट एप्लीकेशन को पहचानता है। डेटा को सेगमेंट (Segment) में बांटता है। प्रमुख प्रोटोकॉल: TCP (विश्वसनीय, कनेक्शन-उन्मुख) तथा UDP (तीव्र, कनेक्शन-रहित)। PDU: Segment / Datagram.
  • 5. सेशन लेयर (Session Layer): दो उपकरणों के मध्य संचार सत्र (Session) स्थापित करता है, प्रबंधित करता है और समाप्त करता है। संवाद में चेकपॉइंट्स व सिंक्रोनाइज़ेशन जोड़ता है ताकि कनेक्शन टूटने पर शुरू से डेटा न भेजना पड़े।
  • 6. प्रेजेंटेशन लेयर (Presentation Layer): डेटा के प्रारूप व प्रस्तुतीकरण के लिए उत्तरदायी है। इसके मुख्य तीन कार्य हैं: अनुवाद (Translation/Encoding), एन्क्रिप्शन व डिक्रिप्शन (Encryption/Decryption - सुरक्षा) तथा डेटा संपीड़न (Data Compression)।
  • 7. एप्लीकेशन लेयर (Application Layer): उपयोगकर्ता व एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को नेटवर्क सेवाएं प्रदान करने वाला प्रत्यक्ष इंटरफेस है। प्रमुख प्रोटोकॉल: HTTP, HTTPS, FTP, SMTP, DNS। PDU: Data / Message.
5.2 TCP/IP मॉडल बनाम OSI मॉडल

OSI एक सैद्धांतिक मॉडल है, जबकि वास्तविक इंटरनेट 4-स्तरीय TCP/IP आर्किटेक्चर पर कार्य करता है:

स्तर संख्याOSI मॉडल (7 स्तर)TCP/IP मॉडल (4 स्तर)प्रमुख प्रोटोकॉल्स
4एप्लीकेशन, प्रेजेंटेशन, सेशन लेयरएप्लीकेशन लेयर (Application)HTTP, HTTPS, FTP, SMTP, DNS, DHCP, Telnet
3
2
3ट्रांसपोर्ट लेयर (Transport)ट्रांसपोर्ट लेयर (Host-to-Host)TCP (Transmission Control Protocol), UDP (User Datagram Protocol)
2नेटवर्क लेयर (Network)इंटरनेट लेयर (Internet)IP (IPv4, IPv6), ICMP, ARP
1डेटा लिंक एवं फिजिकल लेयरनेटवर्क एक्सेस लेयर (Network Access)Ethernet (IEEE 802.3), Wi-Fi (IEEE 802.11), MAC
0

IPv4 एड्रेसिंग, सबनेटिंग, स्विचिंग तकनीक एवं एप्लीकेशन प्रोटोकॉल्स

6.1 IPv4 एड्रेसिंग एवं क्लास संरचना

IPv4 एड्रेस एक 32-बिट तार्किक बाइनरी पता है जो इंटरनेट पर प्रत्येक उपकरण को विशिष्ट रूप से पहचानता है। सुविधा के लिए इसे 8-बिट के 4 भागों (ऑक्टेट) में बांटकर डॉटेड डेसिमल नोटेशन में लिखा जाता है (जैसे: 192.168.1.1)।

पारंपरिक क्लासफुल एड्रेसिंग में 32 बिट्स को नेटवर्क ID (NetID) व होस्ट ID (HostID) में विभाजित कर 5 वर्गों में बांटा गया है:

क्लासप्रथम ऑक्टेट सीमाडिफ़ॉल्ट सबनेट मास्कनेटवर्क / होस्ट बिट्सउपयोगिता
Class A1.0.0.0 से 126.255.255.255255.0.0.0 (/8)NetID: 8, HostID: 24विशाल वैश्विक संस्थाएं (प्रति नेटवर्क $2^{24}-2 = 16,777,214$ होस्ट)।
Class B128.0.0.0 से 191.255.255.255255.255.0.0 (/16)NetID: 16, HostID: 16मध्यम आकार के विश्वविद्यालय व कंपनियां ($2^{16}-2 = 65,534$ होस्ट)।
Class C192.0.0.0 से 223.255.255.255255.255.255.0 (/24)NetID: 24, HostID: 8छोटे स्थानीय लैन व कार्यालय ($2^8-2 = 254$ होस्ट)।
Class D224.0.0.0 से 239.255.255.255लागू नहींग्रुप एड्रेसमल्टीकास्टिंग (Multicasting - वीडियो स्ट्रीमिंग)।
Class E240.0.0.0 से 255.255.255.255लागू नहींआरक्षितभविष्य के वैज्ञानिक अनुसंधान व प्रयोगों हेतु आरक्षित।

विशेष नोट: 127.0.0.1 एड्रेस नेटवर्क में आवंटित नहीं होता; यह लूपबैक एड्रेस (Loopback Address) के रूप में स्थानीय कंप्यूटर के नेटवर्क सॉफ्टवेयर स्टैक परीक्षण हेतु प्रयुक्त होता है।

6.2 उपयोग योग्य होस्ट एवं प्राइवेट IP ब्लॉक्स

किसी सबनेट में $H$ होस्ट बिट्स होने पर दो पते सदैव आरक्षित रहते हैं:

  • होस्ट भाग के सभी बिट्स 0 होने पर वह संपूर्ण नेटवर्क की पहचान (Network ID) होती है।
  • होस्ट भाग के सभी बिट्स 1 होने पर वह उस नेटवर्क के लिए Directed Broadcast Address होता है।
  • अतः किसी भी नेटवर्क में वास्तविक उपयोग योग्य होस्ट संख्या = $2^H - 2$।

प्राइवेट IP श्रेणियां (RFC 1918 Private IP): IPv4 पतों की कमी से निपटने के लिए आंतरिक लैन उपयोग हेतु मुफ्त आरक्षित श्रेणियां:

  • Class A: 10.0.0.0 से 10.255.255.255 (/8)
  • Class B: 172.16.0.0 से 172.31.255.255 (/12)
  • Class C: 192.168.0.0 से 192.168.255.255 (/16 - हमारे घरेलू वाई-फाई राउटर में प्रयुक्त)
6.3 स्विचिंग तकनीक: सर्किट स्विचिंग बनाम पैकेट स्विचिंग

नेटवर्क में स्रोत से गंतव्य तक डेटा संप्रेषण की दो प्रमुख प्रणालियां हैं:

  • सर्किट स्विचिंग (Circuit Switching): डेटा भेजने से पूर्व प्रेषक व प्राप्तकर्ता के बीच एक समर्पित, स्थिर भौतिक संचार मार्ग (Dedicated Circuit) स्थापित किया जाता है। संपूर्ण बातचीत के दौरान वह मार्ग उनके लिए आरक्षित रहता है। उदाहरण: पारंपरिक लैंडलाइन टेलीफोन (PSTN)। इसमें निश्चित बैंडविड्थ मिलती है परंतु लाइन खाली रहने पर संसाधन व्यर्थ होते हैं।
  • पैकेट स्विचिंग (Packet Switching): आधुनिक इंटरनेट का आधार। इसमें संदेश को छोटे-छोटे पैकेट्स में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक पैकेट में स्रोत व गंतव्य का पता होता है। पैकेट स्वतंत्र रूप से अलग-अलग रास्तों से स्टोर-एंड-फॉरवर्ड नीति द्वारा यात्रा करते हैं। गंतव्य पर इन्हें पुनः संयोजित किया जाता है। यह चैनल का अधिकतम व दक्ष उपयोग सुनिश्चित करता है।
6.4 प्रमुख एप्लीकेशन लेयर प्रोटोकॉल्स
  • HTTP (Port 80): ब्राउज़र व वेब सर्वर के मध्य अनएन्क्रिप्टेड वेबपेज स्थानांतरण का प्रोटोकॉल।
  • HTTPS (Port 443): SSL/TLS एन्क्रिप्शन द्वारा सुरक्षित वेब संचार (ऑनलाइन भुगतान व लॉगिन में अनिवार्य)।
  • FTP (Ports 20 & 21): फाइलों के अपलोड व डाउनलोड का मानक प्रोटोकॉल (पोर्ट 21 कमांड हेतु, पोर्ट 20 डेटा हेतु)।
  • SMTP (Port 25): ईमेल भेजने (Push) हेतु प्रयुक्त मानक इंटरनेट प्रोटोकॉल।
  • DNS (Port 53 UDP/TCP): डोमेन नाम को संख्यात्मक 32-बिट IP एड्रेस में अनुवादित करता है।
  • DHCP (Ports 67 & 68 UDP): नए उपकरणों को नेटवर्क से जुड़ते ही स्वतः IP एड्रेस व सबनेट मास्क आवंटित करता है।

प्रोग्रामिंग सिंटेक्स, स्टेटमेंट्स एवं भाषा अनुवादक नियम

मेश टोपोलॉजी में आवश्यक भौतिक लिंक्स का सूत्र
$$L = \frac{N(N - 1)}{2}$$
उपयोग योग्य होस्ट संख्या का सूत्र
$$\text{Usable Hosts} = 2^H - 2$$
निर्मित सबनेट्स की संख्या का सूत्र
$$\text{Subnets} = 2^S$$
ऑप्टिकल फाइबर का क्रांतिक कोण सूत्र (स्नेल का नियम)
$$\theta_c = \sin^{-1}\left(\frac{n_2}{n_1}\right)$$
प्रसारण विलंब (Propagation Delay) सूत्र
$$\text{Propagation Delay} (T_p) = \frac{\text{Distance}}{\text{Propagation Speed}}$$
बैंडविड्थ-विलंब गुणनफल (Bandwidth-Delay Product - BDP)
$$\text{BDP} = \text{Bandwidth (bps)} \times \text{Round Trip Time (RTT seconds)}$$

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
एक कार्यालय में 8 कंप्यूटरों को पूर्ण मेश (Full Mesh) टोपोलॉजी में परस्पर जोड़ना है। कुल कितने भौतिक केबल्स (लिंक्स) की आवश्यकता होगी और प्रत्येक कंप्यूटर में कितने नेटवर्क पोर्ट होने चाहिए?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: सूत्र का चयन
मेश टोपोलॉजी में $N$ नोड्स के लिए आवश्यक कुल भौतिक लिंक्स का सूत्र है:
$$L = \frac{N(N - 1)}{2}$$
तथा प्रत्येक नोड पर आवश्यक पोर्ट्स की संख्या $= N - 1$।
चरण 2: मान रखकर गणना
यहां कंप्यूटरों की संख्या $N = 8$ है।
अतः आवश्यक लिंक्स की कुल संख्या:
$$L = \frac{8 \times (8 - 1)}{2} = \frac{8 \times 7}{2} = \frac{56}{2} = 28$$ केबल्स।
प्रत्येक कंप्यूटर के लिए आवश्यक पोर्ट्स $= 8 - 1 = 7$ पोर्ट्स।
उत्तर:
कुल 28 केबल्स की आवश्यकता होगी तथा प्रत्येक कंप्यूटर में 7 डेडिकेटेड पोर्ट होने चाहिए।
उदाहरण 2
किसी कंप्यूटर का IP एड्रेस 192.168.10.45 तथा सबनेट मास्क 255.255.255.0 है। यह किस क्लास का है? इस नेटवर्क की Network ID, Directed Broadcast Address तथा उपयोग योग्य कुल होस्ट संख्या ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: क्लास का निर्धारण
IP एड्रेस का प्रथम ऑक्टेट 192 है।
चूंकि 192 से 223 तक की श्रेणी Class C के अंतर्गत आती है, अतः यह एक Class C नेटवर्क है।
चरण 2: Network ID ज्ञात करना
सबनेट मास्क 255.255.255.0 के अनुसार प्रथम 3 ऑक्टेट (24 बिट्स) नेटवर्क भाग हैं और अंतिम 1 ऑक्टेट (8 बिट्स) होस्ट भाग है ($H = 8$)।
होस्ट भाग को 0 करने पर प्राप्त Network ID: 192.168.10.0।
चरण 3: ब्रॉडकास्ट पता व होस्ट संख्या की गणना
होस्ट भाग के सभी बिट्स 1 (दशमलव में 255) करने पर:
Directed Broadcast Address: 192.168.10.255।
उपयोग योग्य होस्ट संख्या $= 2^H - 2 = 2^8 - 2 = 256 - 2 = 254$ कंप्यूटर।
वैध होस्ट IP रेंज: 192.168.10.1 से 192.168.10.254।
उदाहरण 3
एक ऑप्टिकल फाइबर केबल के कोर का अपवर्तनांक (n1) 1.50 तथा क्लैडिंग का अपवर्तनांक (n2) 1.40 है। इस फाइबर का क्रांतिक कोण (Critical Angle) ज्ञात कीजिए तथा पूर्ण आंतरिक परावर्तन की शर्तें बताइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: स्नेल का क्रांतिक कोण सूत्र
$$\theta_c = \sin^{-1}\left(\frac{n_2}{n_1}\right)$$
यहां $n_1 = 1.50$ (कोर) तथा $n_2 = 1.40$ (क्लैडिंग)।
चरण 2: गणितीय हल
$$\frac{n_2}{n_1} = \frac{1.40}{1.50} = \frac{14}{15} \approx 0.9333$$
$$\theta_c = \sin^{-1}(0.9333) \approx 68.96^\circ$$ (लगभग $69^\circ$)।
चरण 3: पूर्ण आंतरिक परावर्तन की शर्तें
1. प्रकाश किरण को सघन माध्यम (कोर, $n_1 = 1.50$) से विरल माध्यम (क्लैडिंग, $n_2 = 1.40$) में जाने का प्रयास करना चाहिए।
2. कोर-क्लैडिंग पृष्ठ पर आपतन कोण क्रांतिक कोण ($68.96^\circ$) से बड़ा होना चाहिए।
उदाहरण 4
एक संस्था अपने Class C नेटवर्क 192.168.5.0 को 4 समान सबनेट्स में विभाजित करना चाहती है। नया सबनेट मास्क क्या होगा और प्रत्येक सबनेट में कितने उपयोग योग्य कंप्यूटर जोड़े जा सकेंगे?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: उधार लिए जाने वाले सबनेट बिट्स
हमें कम से कम 4 सबनेट्स चाहिए, अतः $2^S \ge 4$।
चूंकि $2^2 = 4$, हमें होस्ट भाग से ठीक $S = 2$ बिट्स नेटवर्क हेतु उधार लेने होंगे।
चरण 2: नया सबनेट मास्क बनाना
Class C में डिफ़ॉल्ट रूप से 24 नेटवर्क बिट्स होते हैं। नए नेटवर्क बिट्स $= 24 + 2 = 26$ (/26)।
चौथे ऑक्टेट के प्रथम 2 बिट्स 1 होंगे: $11000000_2 = 128 + 64 = 192$।
अतः नया सबनेट मास्क होगा: 255.255.255.192।
चरण 3: उपयोग योग्य होस्ट संख्या
कुल 8 होस्ट बिट्स में से 2 बिट्स लेने के बाद शेष होस्ट बिट्स $H = 8 - 2 = 6$।
प्रत्येक सबनेट में उपयोग योग्य होस्ट $= 2^H - 2 = 2^6 - 2 = 64 - 2 = 62$ कंप्यूटर।
उदाहरण 5
एक 100 Mbps ईथरनेट लिंक का राउंड ट्रिप टाइम (RTT) 20 मिलीसेकंड है। इस लिंक का बैंडविड्थ-विलंब गुणनफल (Bandwidth-Delay Product) बाइट्स में ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: इकाइयों का रूपांतरण
बैंडविड्थ $B = 100\text{ Mbps} = 100 \times 10^6\text{ bits/second} = 10^8\text{ bps}$।
विलंब $RTT = 20\text{ ms} = 20 \times 10^{-3}\text{ seconds} = 0.02\text{ seconds}$।
चरण 2: BDP सूत्र प्रयोग
$$BDP = \text{Bandwidth} \times RTT = (10^8\text{ bps}) \times (0.02\text{ s}) = 2,000,000\text{ bits}$$
बाइट्स में बदलने हेतु 8 से भाग करने पर:
$$\text{BDP in Bytes} = \frac{2,000,000}{8} = 250,000\text{ Bytes} = 250\text{ KB}$$।
निष्कर्ष:
किसी एक क्षण में इस संचार पाइपलाइन में अधिकतम 250 किलोबाइट डेटा संचरित हो सकता है।
उदाहरण 6
मान लीजिए एक डेटा पैकेट प्रेषक कंप्यूटर A से गंतव्य B तक 3 मध्यवर्ती राउटर्स से होकर गुजरता है। इस पथ का हॉप काउंट (Hop Count) क्या है और प्रत्येक हॉप पर पैकेट किस OSI लेयर पर प्रोसेस होता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: पथ विश्लेषण
पथ: $\text{Host A} \to \text{Router 1} \to \text{Router 2} \to \text{Router 3} \to \text{Host B}$।
यहां 3 मध्यवर्ती राउटर्स मौजूद हैं।
चरण 2: हॉप काउंट निर्धारण
हॉप काउंट गंतव्य तक पहुंचने में पार किए गए मध्यवर्ती राउटर्स की संख्या होती है।
अतः कुल हॉप काउंट = 3 है।
चरण 3: लेयर प्रोसेसिंग
प्रत्येक राउटर पर पैकेट फिजिकल लेयर पर प्राप्त होता है, डेटा लिंक लेयर पर फ्रेम अनपैक होता है, और Layer 3 (Network Layer) पर गंतव्य IP तथा TTL (Time to Live) की जांच होती है। TTL का मान 1 घटाकर नया फ्रेम बनाकर अगले लिंक पर भेजा जाता है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

हब और स्विच को एक ही उपकरण समझना और उनके कार्यों में भ्रमित होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

हब लेयर 1 का 'अंधा' उपकरण है जो सभी पोर्ट्स पर अंधाधुंध ब्रॉडकास्ट करता है और कोलिजन पैदा करता है। स्विच लेयर 2 का समझदार उपकरण है जो MAC टेबल देखकर केवल गंतव्य पोर्ट पर डेटा भेजता है और कोलिजन समाप्त करता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

होस्ट संख्या निकालते समय $2^H$ लिखकर 2 घटाना भूल जाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सूत्र सदैव $2^H - 2$ होता है क्योंकि होस्ट भाग के सभी 0 नेटवर्क ID और सभी 1 ब्रॉडकास्ट एड्रेस होते हैं; इन्हें कंप्यूटर को नहीं दिया जा सकता।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

OSI मॉडल के स्तरों का क्रम उल्टा लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

मानक क्रम में लेयर 1 सदैव Physical Layer और लेयर 7 Application Layer होती है (याद रखने का सूत्र: Please Do Not Throw Sausage Pizza Away - P-D-N-T-S-P-A)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

MAC एड्रेस और IP एड्रेस में भेद न कर पाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

MAC एड्रेस 48-बिट का स्थायी हार्डवेयर फिजिकल एड्रेस है (NIC में दर्ज)। IP एड्रेस 32-बिट का तार्किक एड्रेस है जो नेटवर्क बदलने पर बदल जाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

बस टोपोलॉजी में टर्मिनेटर के कार्य को न समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

टर्मिनेटर केबल के सिरों पर सिग्नल को अवशोषित करता है ताकि सिग्नल वापस परावर्तित होकर अन्य डेटा से न टकराए।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
कंप्यूटर नेटवर्क स्वायत्त कंप्यूटिंग उपकरणों को आपस में जोड़कर डेटा आदान-प्रदान और संसाधन साझा करने की व्यवस्था है। भौगोलिक विस्तार के अनुसार नेटवर्क PAN, LAN, MAN और WAN में विभाजित हैं। डेटा संचरण में ट्विस्टेड पेयर, समाक्षीय और ऑप्टिकल फाइबर (पूर्ण आंतरिक परावर्तन सिद्धांत) अथवा अनगाइडेड तरंगें प्रयुक्त होती हैं। ज्यामितीय टोपोलॉजीज में स्टार लैन का आधुनिक मानक है और मेश टोपोलॉजी N(N-1)/2 लिंक्स से सर्वोच्च विश्वसनीयता देती है। कनेक्टिंग उपकरणों में हब लेयर 1, स्विच लेयर 2 (कोलिजन डोमेन अलग करता है) और राउटर लेयर 3 (ब्रॉडकास्ट डोमेन अलग करता है) पर काम करता है। सैद्धांतिक मार्गदर्शन हेतु OSI 7-लेयर और इंटरनेट के वास्तविक संचालन हेतु TCP/IP 4-लेयर मॉडल प्रयुक्त होता है। 32-बिट IPv4 एड्रेसिंग में उपयोग योग्य होस्ट संख्या 2^H - 2 होती है तथा इंटरनेट पैकेट स्विचिंग पर HTTP, HTTPS, FTP, DNS व SMTP से संचालित होता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
एक कंप्यूटर लैब में 10 कंप्यूटरों को एक केंद्रीय स्विच से जोड़ा गया है। यह कौन-सी टोपोलॉजी है? इसमें कुल कितनी केबल्स लगेंगी और यदि केंद्रीय स्विच खराब हो जाए तो क्या होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: यह स्टार टोपोलॉजी (Star Topology) है। इसमें 10 कंप्यूटरों के लिए ठीक 10 केबल्स की आवश्यकता होगी। चूंकि स्विच केंद्रीय उपकरण है, अतः स्विच खराब होने पर पूरा नेटवर्क बंद हो जाएगा (Single Point of Failure)।
2
ऑप्टिकल फाइबर केबल में सिग्नल कैसे संचरित होता है? तांबे के तारों की तुलना में इसके दो प्रमुख लाभ लिखिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ऑप्टिकल फाइबर में विद्युत सिग्नल के बजाय शुद्ध कांच के कोर में पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR) द्वारा प्रकाश स्पंदनों के रूप में डेटा संचरित होता है। दो लाभ: 1. यह विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप (EMI) से शत-प्रतिशत मुक्त है। 2. इसकी बैंडविड्थ व गति सामान्य तारों से कई गुना अधिक है।
3
MAC एड्रेस और IP एड्रेस में तीन प्रमुख अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
  1. MAC एड्रेस 48-बिट का स्थायी भौतिक पता है जो निर्माता द्वारा NIC में बर्न किया जाता है; जबकि IP एड्रेस 32-बिट का तार्किक पता है जो नेटवर्क में जुड़ने पर मिलता है। 2. MAC लेयर 2 पर काम करता है, IP लेयर 3 पर काम करता है। 3. स्थान बदलने पर MAC नहीं बदलता, परंतु IP एड्रेस बदल जाता है।

4
नेटवर्क में राउटर के दो मुख्य कार्य बताइए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
  1. राउटर विभिन्न संभावित मार्गों में से डेटा पैकेट भेजने के लिए सर्वश्रेष्ठ व तीव्र मार्ग (Routing) का चयन करता है। 2. राउटर ब्रॉडकास्ट डोमेन को विभाजित करता है, जिससे अनावश्यक ब्रॉडकास्ट ट्रैफिक रुकता है और नेटवर्क सुरक्षित रहता है।

5
एक Class B नेटवर्क में 16 होस्ट बिट्स हैं। इस नेटवर्क में अधिकतम कितने कंप्यूटर जोड़े जा सकते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: Class B नेटवर्क में होस्ट बिट्स H = 16। अतः अधिकतम उपयोग योग्य होस्ट संख्या = 2^16 - 2 = 65,536 - 2 = 65,534 कंप्यूटर।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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