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WBB • कक्षा XI • Computer Science • अध्याय 1
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

कंप्यूटर सिस्टम एवं संगठन

पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद (WBCHSE) कक्षा 11 कंप्यूटर साइंस पाठ्यक्रम का प्रथम एवं सर्वाधिक महत्वपूर्ण अध्याय 'कंप्यूटर सिस्टम एवं संगठन' है। यह अध्याय आधुनिक डिजिटल कंप्यूटरों की आंतरिक संरचना, इलेक्ट्रॉनिक घटकों तथा बाइनरी डेटा प्रसंस्करण के मूलभूत वैज्ञानिक आधार को स्पष्ट करता है। वैक्यूम ट्यूब से लेकर आधुनिक माइक्रोप्रोसेसर एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पांचवीं पीढ़ी के विकासक्रम तथा जॉन वॉन न्यूमैन की युगप्रवर्तक 'संगृहीत प्रोग्राम संकल्पना' (Stored-Program Concept) से अध्याय का आरंभ होता है। विद्यार्थी सीपीयू के आंतरिक अंगों—जैसे अंकगणितीय तार्किक इकाई (ALU), नियंत्रण इकाई (CU), आंतरिक तीव्र गति रजिस्टर्स (PC, MAR, MDR, IR, ACC) तथा त्रिस्तरीय सिस्टम बस (डेटा, एड्रेस एवं कंट्रोल बस) की कार्यप्रणाली का गहन अध्ययन करते हैं। इसके अतिरिक्त संदर्भ की स्थानीयता के सिद्धांत पर आधारित मेमोरी पदानुक्रम, कैश मेमोरी, फ्लिप-फ्लॉप आधारित स्टेटिक रैम (SRAM), कैपेसिटर रिफ्रेश आधारित डायनामिक रैम (DRAM), तथा द्वितीयक स्टोरेज (SSD एवं HDD) की कार्यप्रणाली का विश्लेषण किया गया है। अध्याय में विभिन्न संख्या प्रणालियों (बाइनरी, ऑक्टल, दशमलव, हेक्साडेसिमल) के मध्य रूपांतरण, ऋणात्मक संख्याओं का 1's एवं 2's पूरक निरूपण, वर्ण एन्कोडिंग (ASCII, ISCII, Unicode) तथा जॉर्ज बूल के बूलियन बीजगणित को सुगम रूप में प्रस्तुत किया गया है। अंत में सार्वभौमिक NAND एवं NOR गेट्स की सहायता से डिजिटल परिपथ निर्माण, डी मॉर्गन के प्रमेय तथा ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रमुख कार्यों—जैसे प्रोसेसर शेड्यूलिंग, आभासी मेमोरी पेजिंग, फाइल प्रबंधन एवं स्पूलिंग (SPOOLing) का विस्तृत विवरण दिया गया है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

प्रत्येक आधुनिक डिजिटल नवाचार—चाहे वह स्मार्टफोन हो, गेमिंग ग्राफिक्स कार्ड हो, अथवा क्लाउड डेटा सेंटर—इन्हीं आधारभूत संरचनात्मक एवं तार्किक सिद्धांतों पर कार्य करता है। सीपीयू रजिस्टर्स एवं कैश मेमोरी के समन्वय, 2's पूरक पद्धति द्वारा बिना किसी पृथक घटाव परिपथ के केवल योग परिपथ से घटाव संपन्न करने की तकनीक, तथा बूलियन बीजगणित द्वारा ट्रांजिस्टरों की संख्या घटाकर ऊर्जा एवं लागत बचाने की कला को समझना एक कंप्यूटर विज्ञानी के लिए अपरिहार्य है। पश्चिम बंगाल बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से 10 से 12 अंक के प्रश्न सुनिश्चित रूप से पूछे जाते हैं और यह बी.टेक, बीसीए तथा राष्ट्रीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं (WBJEE, JEE) के लिए ठोस आधार तैयार करता है।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 मॉड्यूल 1: कंप्यूटर का विकास एवं वॉ...
2 मॉड्यूल 2: मेमोरी पदानुक्रम, कैश मे...
3 मॉड्यूल 3: डेटा निरूपण एवं संख्या प...
4 मॉड्यूल 4: चिह्नित संख्याएं, 2 का प...
5 मॉड्यूल 5: बूलियन बीजगणित, लॉजिक गे...
6 मॉड्यूल 6: सॉफ्टवेयर वर्गीकरण, भाषा...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

मॉड्यूल 1: कंप्यूटर का विकास एवं वॉन न्यूमैन आर्किटेक्चर

1.1 कंप्यूटर का ऐतिहासिक विकासक्रम एवं पीढ़ियां

इलेक्ट्रॉनिक स्विचिंग तकनीक, मेमोरी तथा प्रोग्रामिंग भाषाओं के आधार पर कंप्यूटर के विकास को पांच प्रमुख पीढ़ियों में वर्गीकृत किया गया है:

पीढ़ीप्रमुख हार्डवेयर तकनीकमेमोरी / स्टोरेजप्रयुक्त भाषाएंविशिष्ट उदाहरण
प्रथम पीढ़ी (1940-1956)वैक्यूम ट्यूब (थर्मायोनिक वाल्व)चुंबकीय ड्रम, एकॉस्टिक डिले लाइन्समशीन भाषा (शुद्ध बाइनरी 0/1)ENIAC, EDVAC, UNIVAC-I
द्वितीय पीढ़ी (1956-1963)ट्रांजिस्टर (द्विध्रुवी जंक्शन ट्रांजिस्टर)चुंबकीय कोर मेमोरी, चुंबकीय टेपअसेंबली भाषा, प्रारंभिक HLL (FORTRAN, COBOL)IBM 1401, CDC 1604
तृतीय पीढ़ी (1964-1971)एकीकृत परिपथ (IC - SSI एवं MSI)चुंबकीय कोर, प्रारंभिक अर्धचालक रैमउच्चस्तरीय भाषाएं (BASIC, Pascal, C)IBM System/360, PDP-8
चतुर्थ पीढ़ी (1971-वर्तमान)माइक्रोप्रोसेसर (VLSI एवं ULSI चिप्स)अर्धचालक DRAM, SRAM, Flash SSD, HDDआधुनिक भाषाएं (C++, Java, Python), GUI OSIntel x86, पर्सनल कंप्यूटर, Mac
पंचम पीढ़ी (वर्तमान एवं भविष्य)अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेशन (ULSI), एआईहाई-बैंडविड्थ 3D स्टैक्ड रैम (HBM), क्लाउडआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, समानांतर कंप्यूटिंगसुपरकंप्यूटर, टीपीयू/जीपीयू क्लस्टर, क्वांटम
1.2 जॉन वॉन न्यूमैन की संगृहीत प्रोग्राम संकल्पना (Stored-Program Concept)

सन् 1945 में प्रख्यात गणितज्ञ जॉन वॉन न्यूमैन ने यह ऐतिहासिक विचार प्रस्तुत किया कि प्रोग्राम के निर्देश एवं डेटा दोनों एक ही साझा, पते-योग्य भौतिक मेमोरी स्पेस में संग्रहीत रहेंगे। इससे पूर्व गणना बदलने हेतु तारों को भौतिक रूप से पुनर्संयोजित करना पड़ता था।

वॉन न्यूमैन मॉडल के तीन मुख्य अंग हैं:

  • सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU): जो निर्देशों का निष्पादन करती है एवं पूरे सिस्टम का नियंत्रण करती है।
  • मुख्य मेमोरी यूनिट (Main Memory): जहां क्रमिक पतों पर निर्देश एवं डेटा सुरक्षित रहते हैं।
  • इनपुट/आउटपुट (I/O) उपप्रणाली: जो उपयोगकर्ता एवं बाह्य उपकरणों से संपर्क स्थापित करती है।
1.3 सीपीयू के आंतरिक घटक एवं रजिस्टर्स

सीपीयू में दो प्रमुख कार्यकारी इकाइयां तथा तीव्र गति के आंतरिक रजिस्टर्स होते हैं:

  • अंकगणितीय तार्किक इकाई (ALU): समस्त गणितीय गणनाएं (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) तथा तार्किक निर्णय (AND, OR, NOT, XOR, तुलनाएं) करती है। ALU के साथ एक फ्लैग्स/स्थिति रजिस्टर जुड़ा होता है, जिसमें ज़ीरो फ्लैग (Z), कैरी फ्लैग (C), साइन फ्लैग (S) एवं ओवरफ्लो फ्लैग (V) होते हैं।
  • नियंत्रण इकाई (Control Unit - CU): कंप्यूटर के निर्देशक (कंडक्टर) की भांति कार्य करती है। यह मेमोरी से निर्देश लाती है, उसे डिकोड करती है तथा आवश्यक नियंत्रण व टाइमिंग सिग्नल्स उत्पन्न करती है।
  • सीपीयू आंतरिक रजिस्टर्स: प्रोसेसर के अत्यंत तीव्र आंतरिक मेमोरी कक्ष:
    • प्रोग्राम काउंटर (PC): निष्पादित किए जाने वाले अगले निर्देश का मेमोरी पता सुरक्षित रखता है। प्रत्येक फेच के बाद इसका मान स्वतः बढ़ जाता है।
    • मेमोरी एड्रेस रजिस्टर (MAR): मेमोरी के उस विशिष्ट पते को रखता है जहां से डेटा पढ़ना (Read) या लिखना (Write) है।
    • मेमोरी डेटा रजिस्टर (MDR) / बफर (MBR): मेमोरी से पढ़े गए अथवा मेमोरी में लिखे जाने वाले डेटा को अस्थायी रूप से रखता है।
    • निर्देश रजिस्टर (IR): वर्तमान में डिकोड एवं निष्पादित किए जा रहे निर्देश को धारण करता है।
    • एक्यूमुलेटर (ACC): ALU द्वारा किए गए गणितीय व तार्किक कार्यों के अंतरिम परिणामों को संग्रहीत करने वाला मुख्य रजिस्टर।
1.4 निर्देश निष्पादन चक्र (Fetch-Decode-Execute Cycle)

सीपीयू का कार्य निरंतर चार चरणों के चक्र में चलता है:

  1. फेच (Fetch): PC का पता MAR में भेजा जाता है। CU मेमोरी रीड सिग्नल देता है। डेटा बस के माध्यम से निर्देश MDR में और वहां से IR में आता है। साथ ही PC का मान बढ़ जाता है ($PC \leftarrow PC + 1$)।
  2. डिकोड (Decode): IR में उपस्थित निर्देश के ऑपकोड (Opcode) का विश्लेषण CU द्वारा किया जाता है।
  3. निष्पादन (Execute): आवश्यक ऑपरेंड्स प्राप्त कर ALU द्वारा संबंधित गणितीय या तार्किक कार्य संपन्न किया जाता है।
  4. संचयन (Store / Write-back): प्राप्त परिणाम को एक्यूमुलेटर अथवा निर्दिष्ट मेमोरी पते पर सुरक्षित कर दिया जाता है।
1.5 सिस्टम बस: डेटा, एड्रेस एवं कंट्रोल बस

सीपीयू, मेमोरी एवं बाह्य उपकरणों के मध्य विद्युत संकेतों के आवागमन हेतु तारों के समूह को सिस्टम बस कहते हैं:

  • डेटा बस (Data Bus): यह एक द्वि-दिशीय (Bidirectional) बस है, जिसके माध्यम से वास्तविक डेटा व निर्देश सीपीयू और मेमोरी के बीच प्रवाहित होते हैं। इसकी चौड़ाई (जैसे 32-बिट, 64-बिट) प्रोसेसर की शब्द-लंबाई (Word Length) निर्धारित करती है।
  • एड्रेस बस (Address Bus): यह एक एक-दिशीय (Unidirectional) बस है। सीपीयू मेमोरी लोकेशन को इंगित करने हेतु इस पर पता भेजता है। यदि एड्रेस बस में $k$ तारें हों, तो अधिकतम $2^k$ मेमोरी लोकेशन्स (बाइट्स) को संबोधित किया जा सकता है (जैसे 32-बिट बस = $2^{32} = 4\text{ GB}$ रैम)।
  • कंट्रोल बस (Control Bus): विभिन्न नियंत्रण एवं टाइमिंग सिग्नल्स (जैसे Memory Read, Memory Write, I/O Read, I/O Write, Interrupt, Reset) ले जाती है।

मॉड्यूल 2: मेमोरी पदानुक्रम, कैश मेमोरी एवं स्टोरेज तकनीक

2.1 संदर्भ की स्थानीयता का सिद्धांत (Principle of Locality of Reference)

मेमोरी प्रबंधन पूर्णतः संदर्भ की स्थानीयता के सिद्धांत पर निर्भर करता है:

  • कालिक स्थानीयता (Temporal Locality): यदि किसी मेमोरी पते का एक बार उपयोग हुआ है, तो निकट भविष्य में उसी पते के पुनः उपयोग की संभावना अत्यंत प्रबल होती है (जैसे लूप के चर या काउंटर)।
  • स्थानिक स्थानीयता (Spatial Locality): यदि किसी मेमोरी पते का उपयोग हुआ है, तो उसके आस-पास के संलग्न पतों के शीघ्र उपयोग की संभावना होती है (जैसे सरणियों/Arrays के तत्व अथवा क्रमिक निर्देश)।
2.2 मेमोरी पदानुक्रम पिरामिड (Memory Hierarchy)

गति, भंडारण क्षमता एवं प्रति बिट लागत में संतुलन स्थापित करने हेतु मेमोरी को स्तरों में विभाजित किया जाता है:

मेमोरी का स्तरप्रयुक्त तकनीकअभिगमन समय (Latency)विशिष्ट क्षमतासापेक्ष लागत
सीपीयू रजिस्टर्सडी फ्लिप-फ्लॉप परिपथ< 1 नैनोसेकंड (1 क्लॉक साइकिल)1 - 2 KBसर्वाधिक
L1 कैशस्टेटिक रैम (SRAM)1 - 2 नैनोसेकंड32 - 64 KB प्रति कोरअत्यधिक
L2 कैशस्टेटिक रैम (SRAM)3 - 8 नैनोसेकंड512 KB - 2 MB प्रति कोरउच्च
L3 कैशस्टेटिक रैम (SRAM, साझा)10 - 20 नैनोसेकंड16 - 96 MB साझामध्यम
मुख्य मेमोरी (RAM)डायनामिक रैम (DRAM)50 - 70 नैनोसेकंड8 - 128 GBमितव्ययी
द्वितीयक SSDनैंड फ्लैश (NVMe / SATA)20 - 100 माइक्रोसेकंड512 GB - 4 TBकम
द्वितीयक HDDचुंबकीय डिस्क प्लेटर्स5 - 12 मिलीसेकंड1 - 20 TBन्यूनतम
2.3 प्राथमिक मेमोरी: SRAM बनाम DRAM एवं ROM का वर्गीकरण

सीपीयू सीधे प्राथमिक मेमोरी से संपर्क करता है:

  • रैम (Random Access Memory): वाष्पशील (Volatile) मेमोरी, विद्युत आपूर्ति बंद होते ही इसका डेटा नष्ट हो जाता है। प्रकार:
    • SRAM (Static RAM): प्रत्येक सेल 4 से 6 ट्रांजिस्टरों से बने फ्लिप-फ्लॉप पर आधारित होती है। इसे रिफ्रेश करने की आवश्यकता नहीं होती। अत्यधिक तीव्र गति के कारण इसका उपयोग प्रोसेसर कैश बनाने में होता है।
    • DRAM (Dynamic RAM): प्रत्येक सेल 1 ट्रांजिस्टर एवं 1 कैपेसिटर (1T-1C) से बनी होती है। कैपेसिटर का आवेश धीरे-धीरे क्षीण होता है, अतः इसे प्रति सेकंड सैकड़ों बार विद्युत रूप से रिफ्रेश करना अनिवार्य है। सस्ती एवं उच्च क्षमता के कारण यह मुख्य रैम के रूप में प्रयुक्त होती है।
  • रोम (Read-Only Memory): अवाष्पशील (Non-volatile) मेमोरी। कंप्यूटर बूट करने हेतु आवश्यक BIOS/UEFI एवं POST रूटीन इसमें स्थायी रहते हैं। प्रकार:
    • MROM (Mask ROM): निर्माण के समय कारखाने में स्थायी रूप से डेटा लिखा जाता है।
    • PROM (Programmable ROM): उपयोगकर्ता द्वारा विशेष उपकरण की सहायता से केवल एक बार प्रोग्राम किया जा सकता है।
    • EPROM (Erasable PROM): पराबैंगनी (UV) किरणों की सहायता से इसका डेटा मिटाकर पुनः प्रोग्राम किया जा सकता है।
    • EEPROM (Electrically Erasable PROM): विद्युत संकेतों द्वारा इसका डेटा मिटाकर पुनः लिखा जा सकता है। पेन ड्राइव एवं एसएसडी इसी पर आधारित हैं।
2.4 कैश मेमोरी प्रदर्शन: हिट रेशियो एवं AMAT

सीपीयू द्वारा मांगी गई जानकारी कैश में मिलने पर उसे कैश हिट (Cache Hit) कहते हैं, अन्यथा उसे कैश मिस (Cache Miss) कहा जाता है:

  • हिट रेशियो ($H$): $H = \frac{\text{कैश हिट्स की संख्या}}{\text{कुल मेमोरी अनुरोध संख्या}}$।
  • औसत मेमोरी अभिगमन समय (AMAT): $T_{\text{avg}} = T_c + (1 - H) \times T_m$।
2.5 द्वितीयक स्टोरेज: हार्ड डिस्क (HDD) बनाम सॉलिड स्टेट ड्राइव (SSD)
  • हार्ड डिस्क ड्राइव (HDD): चुंबकीय डिस्क प्लेटर्स पर आधारित यांत्रिक उपकरण। इसमें सीक टाइम (Seek Time) एवं घूर्णन विलंबता (Rotational Latency) के कारण गति धीमी (~150 MB/s) होती है।
  • सॉलिड स्टेट ड्राइव (SSD): पूर्णतः अर्धचालक नैंड फ्लैश चिप्स पर आधारित। कोई गतिशील पुर्जा न होने के कारण यह आघात-रोधी है और NVMe इंटरफ़ेस पर 7000 MB/s तक की गति प्रदान करती है।

मॉड्यूल 3: डेटा निरूपण एवं संख्या प्रणालियां

3.1 स्थितीय संख्या प्रणालियां एवं मूलांक (Radix) की संकल्पना

स्थितीय संख्या प्रणाली में किसी संख्या का मान प्रत्येक अंक के मान तथा उसके आधार ($r$) की स्थितीय घात के गुणनफल के योग से निर्धारित होता है:

$$\text{मान} = \sum_{i=-m}^{n-1} d_i \cdot r^i = d_{n-1} r^{n-1} + \dots + d_0 r^0 + d_{-1} r^{-1} + \dots + d_{-m} r^{-m}$$

कंप्यूटर विज्ञान में प्रयुक्त चार प्रमुख संख्या प्रणालियां:

  • दशमलव (Decimal - Base 10): 10 प्रतीक ($0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9$)।
  • बाइनरी (Binary - Base 2): 2 प्रतीक ($0, 1$)। डिजिटल परिपथों की मूल भाषा।
  • ऑक्टल (Octal - Base 8): 8 प्रतीक ($0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7$)। प्रत्येक ऑक्टल अंक 3 बाइनरी बिट्स के समतुल्य होता है ($2^3 = 8$)।
  • हेक्साडेसिमल (Hexadecimal - Base 16): 16 प्रतीक ($0-9$ एवं $A=10, B=11, C=12, D=13, E=14, F=15$)। प्रत्येक हेक्स अंक 4 बाइनरी बिट्स के समतुल्य होता है ($2^4 = 16$)।
3.2 किसी भी आधार से दशमलव में रूपांतरण

किसी भी आधार की संख्या को दशमलव में बदलने हेतु प्रत्येक अंक को उसके स्थितीय भार ($r^i$) से गुणा करके जोड़ दिया जाता है:

उदाहरण 1 (बाइनरी से दशमलव): $(110101.101)_2$ को दशमलव में बदलें।
पूर्णांक: $1\cdot 2^5 + 1\cdot 2^4 + 0\cdot 2^3 + 1\cdot 2^2 + 0\cdot 2^1 + 1\cdot 2^0 = 32 + 16 + 0 + 4 + 0 + 1 = 53$
भिन्न: $1\cdot 2^{-1} + 0\cdot 2^{-2} + 1\cdot 2^{-3} = 0.5 + 0 + 0.125 = 0.625$
उत्तर: $(110101.101)_2 = (53.625)_{10}$
3.3 दशमलव से अन्य आधारों में रूपांतरण
  • पूर्णांक भाग: क्रमिक विभाजन विधि (Successive Division)। दशमलव पूर्णांक को अभीष्ट आधार $r$ से निरंतर भाग दें और शेषफलों को नीचे से ऊपर की ओर लिखें। अंतिम शेषफल सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंक (MSD) होता है।
  • भिन्नात्मक भाग: क्रमिक गुणन विधि (Successive Multiplication)। दशमलव भिन्न को अभीष्ट आधार $r$ से निरंतर गुणा करें और प्राप्त पूर्णांकों को ऊपर से नीचे की ओर लिखें।
3.4 बाइनरी, ऑक्टल एवं हेक्साडेसिमल का सीधा रूपांतरण (बिट समूहन विधि)

इनके पारस्परिक रूपांतरण में किसी गुणा या भाग की आवश्यकता नहीं होती:

  • बाइनरी से ऑक्टल: रेडिक्स बिंदु से बाईं ओर पूर्णांक हेतु और दाईं ओर भिन्न हेतु 3-बिट के समूह बनाएं और समतुल्य ऑक्टल अंक लिखें।
  • बाइनरी से हेक्साडेसिमल: इसी प्रकार 4-बिट के समूह बनाएं और समतुल्य हेक्साडेसिमल प्रतीक लिखें।
  • ऑक्टल से हेक्साडेसिमल: पहले ऑक्टल को 3-बिट बाइनरी में बदलें, फिर प्राप्त बाइनरी श्रृंखला को 4-बिट समूहों में पुनर्व्यवस्थित करके हेक्स में बदलें।

मॉड्यूल 4: चिह्नित संख्याएं, 2 का पूरक एवं वर्ण एन्कोडिंग

4.1 चिह्नित बाइनरी संख्याओं का निरूपण

कंप्यूटर में धनात्मक एवं ऋणात्मक संख्याओं को संग्रहीत करने की तीन प्रमुख विधियां हैं:

  • चिह्न-परिमाण रूप (Sign-Magnitude): सबसे बायां बिट (MSB) चिह्न बिट होता है ($0 = \text{धनात्मक}$, $1 = \text{ऋणात्मक}$) तथा शेष $n-1$ बिट्स मान दर्शाते हैं। दोष: शून्य के दो रूप बनते हैं ($+0$ एवं $-0$), जो परिपथ को जटिल बनाते हैं।
  • 1 का पूरक (1's Complement): धनात्मक संख्याएं सामान्य बाइनरी जैसी रहती हैं। ऋणात्मक संख्या हेतु उसके धनात्मक रूप के सभी बिट्स को उलट दिया जाता है (0 को 1 और 1 को 0)। दोष: इसमें भी शून्य के दो रूप होते हैं और जोड़ में एंड-अराउंड कैरी जोड़ना पड़ता है।
  • 2 का पूरक (2's Complement): आधुनिक कंप्यूटरों का वैश्विक मानक। किसी संख्या के 1 के पूरक में 1 जोड़ने पर उसका 2 का पूरक प्राप्त होता है: $\text{2's पूरक} = \text{1's पूरक} + 1$।
4.2 2 के पूरक के विशिष्ट लाभ
  1. अद्वितीय शून्य (Unique Zero): इसमें शून्य का केवल एक ही निरूपण होता है ($00000000_2$)।
  2. घटाव हेतु सामान्य योजक (Adder) का प्रयोग: घटाव $A - B$ को $A + (\text{B का 2's पूरक})$ के रूप में किया जाता है। अतः सीपीयू में पृथक घटाव परिपथ की आवश्यकता नहीं होती।

$n$-बिट 2 के पूरक की संख्यात्मक सीमा:

$$\text{सीमा} = [-2^{n-1}, +2^{n-1} - 1]$$

8-बिट बाइट हेतु: $[-128 \text{ से } +127]$। 16-बिट हेतु: $[-32768 \text{ से } +32767]$।

4.3 अंकगणितीय ओवरफ्लो (Arithmetic Overflow)

जब गणना का परिणाम रजिस्टर की क्षमता से बाहर हो जाता है, तो ओवरफ्लो होता है:

  • दो विपरीत चिह्न वाली संख्याओं के योग में कभी ओवरफ्लो नहीं हो सकता।
  • दो धनात्मक संख्याओं का योग ऋणात्मक दिखे अथवा दो ऋणात्मक संख्याओं का योग धनात्मक दिखे, तो ओवरफ्लो निश्चित है।
  • हार्डवेयर नियम: चिह्न बिट में आने वाली कैरी ($C_{\text{in}}$) तथा चिह्न बिट से बाहर जाने वाली कैरी ($C_{\text{out}}$) असमान होने पर ओवरफ्लो होता है: $V = C_{\text{in}} \oplus C_{\text{out}} = 1$।
4.4 वर्ण एन्कोडिंग मानक: ASCII, ISCII एवं Unicode
  • ASCII (American Standard Code for Information Interchange): मूल ASCII एक 7-बिट कोड है, जिसमें $2^7 = 128$ वर्ण परिभाषित हैं ('A' = 65, 'a' = 97, '0' = 48)। एक्सटेंडेड ASCII 8-बिट (256 वर्ण) का होता है।
  • ISCII (Indian Script Code for Information Interchange): भारतीय भाषाओं हेतु बीआईएस (BIS) द्वारा निर्मित 8-बिट कोड। इसमें भारतीय लिपियों (देवनागरी, बांग्ला आदि) के वर्ण ध्वन्यात्मक रूप से मैप किए गए हैं।
  • यूनिकोड (Unicode): विश्व की समस्त लिपियों, गणितीय प्रतीकों एवं इमोजी को समाहित करने वाला वैश्विक मानक। इसका कोड स्पेस 11 लाख से अधिक है। इसके मुख्य प्रारूप हैं: UTF-8 (1 से 4 बाइट, इंटरनेट पर सर्वाधिक प्रयुक्त), UTF-16 (2 या 4 बाइट), एवं UTF-32 (निश्चित 4 बाइट)।

मॉड्यूल 5: बूलियन बीजगणित, लॉजिक गेट्स एवं सार्वभौमिक संश्लेषण

5.1 बूलियन बीजगणित के स्वयंसिद्ध नियम एवं सूत्र

1854 में जॉर्ज बूल द्वारा प्रतिपादित बूलियन बीजगणित बाइनरी चरों ($0, 1$) पर कार्य करता है। प्रमुख नियम निम्नलिखित हैं:

नियम का नामOR रूप (तार्किक योग)AND रूप (तार्किक गुणन)
तत्समक नियम (Identity Law)$A + 0 = A$$A \cdot 1 = A$
शून्य नियम (Null Law)$A + 1 = 1$$A \cdot 0 = 0$
वर्गसम नियम (Idempotent Law)$A + A = A$$A \cdot A = A$
पूरक नियम (Complement Law)$A + \overline{A} = 1$$A \cdot \overline{A} = 0$
क्रमविनिमेय नियम (Commutative Law)$A + B = B + A$$A \cdot B = B \cdot A$
साहचर्य नियम (Associative Law)$A + (B + C) = (A + B) + C$$A \cdot (B \cdot C) = (A \cdot B) \cdot C$
वितरण नियम (Distributive Law)$A + (B \cdot C) = (A + B) \cdot (A + C)$$A \cdot (B + C) = (A \cdot B) + (A \cdot C)$
अवशोषण नियम (Absorption Law)$A + (A \cdot B) = A$$A \cdot (A + B) = A$
द्वि-निषेध नियम (Involution)$\overline{\overline{A}} = A$
5.2 द्वैतता का सिद्धांत (Principle of Duality)

किसी भी सत्य बूलियन समीकरण में AND को OR से, OR को AND से, तथा 0 और 1 को परस्पर बदलकर प्राप्त किया गया नवीन समीकरण भी सदैव सत्य रहता है।

5.3 डी मॉर्गन के प्रमेय (De Morgan's Theorems)
  • प्रथम प्रमेय: तार्किक योग का पूरक व्यक्तिगत पूरकों के तार्किक गुणनफल के बराबर होता है:$$\overline{A + B} = \overline{A} \cdot \overline{B}$$
  • द्वितीय प्रमेय: तार्किक गुणनफल का पूरक व्यक्तिगत पूरकों के तार्किक योग के बराबर होता है:$$\overline{A \cdot B} = \overline{A} + \overline{B}$$
5.4 लॉजिक गेट्स एवं सार्वभौमिक गेट्स (Universal Gates)
  • मूल गेट्स: NOT (इनवर्टर, $Y = \overline{A}$), AND ($Y = A \cdot B$), OR ($Y = A + B$)।
  • सार्वभौमिक गेट्स (NAND एवं NOR): ऐसे गेट्स जिनकी सहायता से बिना किसी अन्य गेट के किसी भी बूलियन परिपथ अथवा सभी मूल गेट्स का निर्माण किया जा सके।
    • NAND गेट: AND के आगे NOT: $Y = \overline{A \cdot B}$। सभी इनपुट 1 होने पर ही आउटपुट 0 होता है।
    • NOR गेट: OR के आगे NOT: $Y = \overline{A + B}$। सभी इनपुट 0 होने पर ही आउटपुट 1 होता है।
  • विशिष्ट गेट्स: XOR (एक्सक्लूसिव-OR, $Y = A \oplus B = \overline{A}B + A\overline{B}$, असमान इनपुट पर आउटपुट 1) एवं XNOR ($Y = \overline{A \oplus B} = AB + \overline{A}\,\overline{B}$)।
5.5 विहित रूप: मिनटरम (SOP) एवं मैक्सटरम (POS)
  • मिनटरम एवं SOP (Sum of Products): प्रत्येक पद में सभी चर मूल अथवा पूरक रूप में उपस्थित रहते हैं और उनका आउटपुट 1 होता है: $F = \sum m(1, 3, 5, 7)$।
  • मैक्सटरम एवं POS (Product of Sums): प्रत्येक पद में सभी चरों का योग होता है और उनका आउटपुट 0 होता है: $F = \prod M(0, 2, 4, 6)$।

मॉड्यूल 6: सॉफ्टवेयर वर्गीकरण, भाषा अनुवादक एवं ऑपरेटिंग सिस्टम

6.1 सॉफ्टवेयर का वर्गीकरण
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर: जो हार्डवेयर संसाधनों का प्रत्यक्ष प्रबंधन करता है और एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर हेतु आधार तैयार करता है (जैसे OS, अनुवादक, डिवाइस ड्राइवर, यूटिलिटीज)।
  • अनुप्रयोग सॉफ्टवेयर (Application Software): उपयोगकर्ता के विशिष्ट कार्यों को पूर्ण करने वाला सॉफ्टवेयर (जैसे वर्ड प्रोसेसर, वेब ब्राउज़र, स्कूल मैनेजमेंट सिस्टम)।
6.2 भाषा अनुवादक: असेंबलर, कंपाइलर एवं इंटरप्रेटर
विशेषताअसेंबलरकंपाइलरइंटरप्रेटर
इनपुट भाषाअसेंबली भाषा (नेमोनिक्स)उच्चस्तरीय भाषा (C, C++, Rust)उच्चस्तरीय भाषा (Python, JS)
अनुवाद की इकाईपंक्ति-दर-पंक्ति नेमोनिक रूपांतरणसंपूर्ण प्रोग्राम को एक बार में अनुवादित करता हैपंक्ति-दर-पंक्ति पढ़कर तुरंत निष्पादित करता है
ऑब्जेक्ट कोडऑब्जेक्ट फाइल बनाता हैस्वतंत्र निष्पादन योग्य फाइल (.exe) बनाता हैकोई ऑब्जेक्ट फाइल नहीं बनती
निष्पादन गतिअत्यंत तीव्रएक बार कंपाइल होने पर तीव्रतमरन-टाइम अनुवाद के कारण अपेक्षाकृत धीमी
त्रुटि प्रदर्शनलाइन नंबर सहित त्रुटिसभी सिंटैक्स त्रुटियों की एक साथ सूची देता हैप्रथम त्रुटि मिलते ही प्रोग्राम रोक देता है
6.3 लिंकर एवं लोडर
  • लिंकर: संकलित ऑब्जेक्ट फाइलों एवं सिस्टम लाइब्रेरीज़ को जोड़कर एक एकल निष्पादन योग्य फाइल (.exe) तैयार करता है।
  • लोडर: उस निष्पादन योग्य फाइल को डिस्क से मुख्य मेमोरी (RAM) में लोड करता है और सीपीयू को नियंत्रण सौंपता है।
6.4 ऑपरेटिंग सिस्टम के मुख्य कार्य
  1. प्रोसेसर प्रबंधन: प्रोसेस नियंत्रण एवं सीपीयू शेड्यूलिंग (FCFS, SJF, राउंड रॉबिन, प्राथमिकता शेड्यूलिंग)।
  2. मेमोरी प्रबंधन: रैम का आवंटन तथा आभासी मेमोरी (Virtual Memory) द्वारा मांग पर पेजिंग (Demand Paging)।
  3. फाइल सिस्टम प्रबंधन: फाइल डायरेक्टरी संरचना, अनुमतियां एवं डिस्क मैपिंग (NTFS, ext4)।
  4. उपकरण प्रबंधन: डिवाइस ड्राइवर तथा स्पूलिंग (SPOOLing - Simultaneous Peripheral Operations On-Line), जिसमें प्रिंटर जैसे धीमे उपकरणों का डेटा डिस्क पर संचित कर सीपीयू को मुक्त रखा जाता है।
  5. सुरक्षा एवं संरक्षण: प्रमाणीकरण एवं अनाधिकृत मेमोरी अभिगमन से बचाव।
6.5 ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार

सिंगल-यूज़र (MS-DOS), मल्टीटास्किंग (Windows, macOS), मल्टी-यूज़र टाइम-शेयरिंग (Linux, UNIX), तथा रियल-टाइम ओएस (RTOS - हार्ड RTOS जैसे मिसाइल या पेसमेकर में, सॉफ्ट RTOS जैसे मल्टीमीडिया)।

प्रोग्रामिंग सिंटेक्स, स्टेटमेंट्स एवं भाषा अनुवादक नियम

स्थितीय संख्या प्रणाली का विस्तार
$$N_r = sum_{i=-m}^{n-1} d_i * r^i$$
n-बिट 2's पूरक की संख्यात्मक सीमा
$$Range = [-2^{n-1}, +2^{n-1} - 1]$$
डी मॉर्गन का प्रथम प्रमेय
overline{A + B} = overline{A} * overline{B}
डी मॉर्गन का द्वितीय प्रमेय
overline{A * B} = overline{A} + overline{B}
अधिकतम मेमोरी संबोधन क्षमता
$$M = 2^k * w bytes$$
औसत मेमोरी अभिगमन समय (AMAT)
$$AMAT = T_cache + (1 - H) * T_main$$

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: पूर्णांक भाग का रूपांतरण (109_10):
109 को 2 से निरंतर विभाजित कर शेषफल लिखें:
109 / 2 = 54, शेष 1 (LSB)
54 / 2 = 27, शेष 0
27 / 2 = 13, शेष 1
13 / 2 = 6, शेष 1
6 / 2 = 3, शेष 0
3 / 2 = 1, शेष 1
1 / 2 = 0, शेष 1 (MSB)
नीचे से ऊपर पढ़ने पर: (109)_10 = (1101101)_2।

चरण 2: भिन्नात्मक भाग का रूपांतरण (0.625_10):
0.625 को 2 से निरंतर गुणा करें:
0.625 * 2 = 1.250 -> पूर्णांक 1
0.250 * 2 = 0.500 -> पूर्णांक 0
0.500 * 2 = 1.000 -> पूर्णांक 1 (भिन्न समाप्त)
ऊपर से नीचे पढ़ने पर: (0.625)_10 = (0.101)_2।
अतः: (109.625)_10 = (1101101.101)_2।

चरण 3: ऑक्टल में रूपांतरण (3-बिट समूहन):
रेडिक्स बिंदु से 3-बिट समूह बनाएं:
पूर्णांक: (001)(101)(101) -> 1, 5, 5
भिन्न: (101) -> 5
अतः: (109.625)_10 = (155.5)_8।

चरण 4: हेक्साडेसिमल में रूपांतरण (4-बिट समूहन):
रेडिक्स बिंदु से 4-बिट समूह बनाएं:
पूर्णांक: (0110)(1101) -> 6, D (क्योंकि 13 = D)
भिन्न: (1010) -> A (क्योंकि 10 = A)
अतः: (109.625)_10 = (6D.A)_16।
उदाहरण 2
विस्तृत समाधान / उत्तर:
भाग क: (+43)_10 - (+27)_10 का समाधान:
1. +43 का 8-बिट बाइनरी: 00101011_2।
2. +27 का 8-बिट बाइनरी: 00011011_2।
3. -27 का 2's पूरक रूप:
1's पूरक = 11100100_2।
2's पूरक = 11100100 + 1 = 11100101_2।
4. दोनों को जोड़ें (+43) एवं (-27):
  00101011 (+43)
+ 11100101 (-27)
------------
(1)00010000
5. 9वां बिट (कैरी-आउट) 2's पूरक में छोड़ दिया जाता है।
शेष 8 बिट्स हैं 00010000_2 = 16_10। परिणाम पूर्णतः सत्य है (43 - 27 = +16)।

भाग ख: (-75)_10 + (-80)_10 एवं ओवरफ्लो विश्लेषण:
1. -75 का 2's पूरक = 10110101_2।
2. -80 का 2's पूरक = 10110000_2।
3. दोनों ऋणात्मक संख्याओं का योग करें:
  10110101 (-75)
+ 10110000 (-80)
------------
(1)01100101
4. दो ऋणात्मक संख्याओं (MSB=1) का योग करने पर धनात्मक संख्या (MSB=0) प्राप्त हुई!
5. ओवरफ्लो जांच: कैरी-इन $C_{\text{in}} = 0$, कैरी-आउट $C_{\text{out}} = 1$।
$V = C_{\text{in}} \oplus C_{\text{out}} = 0 \oplus 1 = 1$ (ओवरफ्लो घटित हुआ)।
कारण: वास्तविक योग -155 है, जो 8-बिट की न्यूनतम सीमा -128 से बाहर है।
उदाहरण 3
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: दोहरा निषेध (Involution) लागू करें:
F = overline{overline{A * overline{B} + overline{A} * C}}

चरण 2: डी मॉर्गन का प्रथम प्रमेय लागू करें:
F = overline{(overline{A * overline{B}}) * (overline{overline{A} * C})}
यह व्यंजक सीधे NAND संक्रिया के प्रारूप में आ चुका है!

चरण 3: परिपथ निर्माण के चरण:
1. B को एक NAND गेट के दोनों इनपुट्स में देकर overline{B} प्राप्त करें [गेट 1]।
2. A एवं overline{B} को NAND गेट में देकर overline{A * overline{B}} प्राप्त करें [गेट 2]।
3. A को एक NAND गेट के दोनों इनपुट्स में देकर overline{A} प्राप्त करें [गेट 3]।
4. overline{A} एवं C को NAND गेट में देकर overline{overline{A} * C} प्राप्त करें [गेट 4]।
5. गेट 2 एवं गेट 4 के आउटपुट्स को अंतिम NAND गेट में जोड़कर F प्राप्त करें [गेट 5]।

निष्कर्ष: इस परिपथ को बनाने हेतु कुल 5 NAND गेट्स आवश्यक हैं।
उदाहरण 4
विस्तृत समाधान / उत्तर:
भाग क: बीजगणितीय सरलीकरण:
1. प्रथम दो पदों से overline{A}*overline{C} कॉमन लें:
overline{A}*overline{C} * (overline{B} + B) = overline{A}*overline{C} * 1 = overline{A}*overline{C}।
2. तीसरे एवं चौथे पद से A*overline{C} कॉमन लें:
A*overline{C} * (overline{B} + B) = A*overline{C} * 1 = A*overline{C}।
3. नया समीकरण: F = overline{A}*overline{C} + A*overline{C} + A*B*C।
4. प्रथम दो पदों से overline{C} कॉमन लें:
overline{C} * (overline{A} + A) + A*B*C = overline{C} * 1 + A*B*C = overline{C} + A*B*C।
5. वितरण नियम लागू करें [X + YZ = (X + Y)(X + Z)]:
overline{C} + (AB)*C = (overline{C} + AB) * (overline{C} + C) = (overline{C} + AB) * 1 = overline{C} + AB।
सरलीकृत रूप: F = overline{C} + A*B।

भाग ख: विहित मिनटरम निरूपण:
मूल पदों के बाइनरी मान:
overline{A}*overline{B}*overline{C} = 000_2 = m_0
overline{A}*B*overline{C} = 010_2 = m_2
A*overline{B}*overline{C} = 100_2 = m_4
A*B*overline{C} = 110_2 = m_6
A*B*C = 111_2 = m_7
अतः विहित रूप: F(A, B, C) = sigma m(0, 2, 4, 6, 7)।
उदाहरण 5
विस्तृत समाधान / उत्तर:
भाग क: अधिकतम मेमोरी क्षमता:
1. एड्रेस बस रेखाएं k = 24।
2. कुल संबोधित लोकेशन्स = 2^k = 2^24 लोकेशन्स।
3. बाइट-एड्रेसेबल प्रणाली में प्रत्येक लोकेशन 1 बाइट की होती है।
4. कुल क्षमता = 2^24 बाइट्स = 2^4 * 2^20 बाइट्स = 16 * 1 MB = 16 MB।

भाग ख: आवश्यक रैम चिप्स की संख्या:
1. कुल आवश्यक क्षमता = 16 MB = 16 * 1024 KB * 8 बिट्स।
2. एक चिप की क्षमता = 512 KB * 8 बिट्स।
3. कुल चिप्स की संख्या = (कुल मेमोरी) / (एक चिप की क्षमता)
चिप्स = (16 * 1024 KB * 8) / (512 KB * 8) = 16 / 0.5 = 32 चिप्स।
उदाहरण 6
विस्तृत समाधान / उत्तर:
भाग क: औसत CPI की गणना:
CPI_avg = (0.40 * 1) + (0.30 * 4) + (0.30 * 2)
CPI_avg = 0.40 + 1.20 + 0.60 = 2.20 चक्र/निर्देश।

भाग ख: कुल सीपीयू निष्पादन समय:
1. क्लॉक साइकिल समय (T_clock) = 1 / (2.5 * 10^9 Hz) = 0.4 * 10^-9 सेकंड।
2. कुल क्लॉक चक्र = निर्देश संख्या * CPI = (1.5 * 10^8) * 2.20 = 3.3 * 10^8 चक्र।
3. निष्पादन समय = कुल चक्र * T_clock = (3.3 * 10^8) * (0.4 * 10^-9) = 0.132 सेकंड (132 मिलीसेकंड)।

भाग ग: MIPS रेटिंग की गणना:
MIPS = (क्लॉक आवृत्ति MHz में) / CPI
आवृत्ति = 2.5 GHz = 2500 MHz।
MIPS = 2500 / 2.20 = 1136.36 MIPS।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भिन्न रूपांतरण में प्राप्त पूर्णांकों को नीचे से ऊपर लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

भिन्न के क्रमिक गुणन में प्राप्त पूर्णांकों को सदैव ऊपर से नीचे (TOP to BOTTOM) लिखा जाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

एड्रेस बस को द्वि-दिशीय समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

एड्रेस बस सदैव एक-दिशीय (Unidirectional) होती है—सीपीयू केवल मेमोरी को पता भेजता है। केवल डेटा बस द्वि-दिशीय होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

धनात्मक संख्या का 2's पूरक निकालना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

धनात्मक संख्याएं बाइनरी, 1's पूरक एवं 2's पूरक में समान (MSB = 0) रहती हैं। पूरक केवल ऋणात्मक संख्याओं का निकाला जाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

डी मॉर्गन नियम में ऑपरेटर बदलना भूल जाना (जैसे overline{A+B} = overline{A}+overline{B} लिखना)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

संकेत बदलना अनिवार्य है: overline{A+B} सदैव overline{A} * overline{B} बनता है (OR बदलकर AND होता है)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

कंपाइलर एवं इंटरप्रेटर के कार्यप्रणाली में भ्रम।

सही वैज्ञानिक तथ्य

कंपाइलर पूरे प्रोग्राम को एक साथ पढ़कर .exe फाइल बनाता है; इंटरप्रेटर पंक्ति-दर-पंक्ति अनुवाद कर तुरंत चलाता है।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
अध्याय 1 कंप्यूटर सिस्टम एवं संगठन के समस्त मूलभूत सिद्धांतों का व्यापक परिचय प्रदान करता है। हमने समझा कि वॉन न्यूमैन आर्किटेक्चर कैसे सीपीयू (ALU, CU, एवं रजिस्टर्स जैसे PC, MAR, MDR, IR, ACC) को मेमोरी से द्वि-दिशीय डेटा बस, एक-दिशीय एड्रेस बस एवं नियंत्रण बस द्वारा जोड़ता है। हमने संदर्भ की स्थानीयता के सिद्धांत पर आधारित मेमोरी पदानुक्रम—SRAM कैश एवं DRAM मुख्य मेमोरी के संतुलन का अध्ययन किया। हमने बाइनरी, ऑक्टल, दशमलव एवं हेक्साडेसिमल रूपांतरण, 2's पूरक घटाव और वर्ण एन्कोडिंग (ASCII, ISCII, Unicode) में महारत प्राप्त की। हमने बूलियन बीजगणित, डी मॉर्गन के प्रमेय तथा सार्वभौमिक NAND/NOR गेट्स से परिपथ संश्लेषण का विश्लेषण किया। अंत में सॉफ्टवेयर वर्गीकरण, कंपाइलर बनाम इंटरप्रेटर और ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रमुख कार्यों—प्रोसेसर प्रबंधन, आभासी मेमोरी एवं स्पूलिंग की समीक्षा की गई।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
एक माइक्रोप्रोसेसर में 20-बिट एड्रेस बस है। यह सीधे कितने मेगाबाइट मेमोरी संबोधित कर सकता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 2^20 बाइट्स = 1,048,576 बाइट्स = ठीक 1 मेगाबाइट (1 MB)।
2
8-बिट 2's पूरक में दशमलव संख्या -1 का बाइनरी मान क्या होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: +1 = 00000001_2। 1's पूरक = 11111110_2। 2's पूरक = 11111110 + 1 = 11111111_2 (हेक्स में 0xFF)।
3
2-इनपुट OR गेट बनाने हेतु कितने 2-इनपुट NAND गेट्स आवश्यक हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 3 NAND गेट्स। डी मॉर्गन नियम: A + B = overline{overline{A} * overline{B}}। A हेतु 1, B हेतु 1, तथा अंतिम NAND हेतु 1।
4
सीपीयू का कौन सा रजिस्टर अगले निर्देश का पता रखता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: प्रोग्राम काउंटर (PC)।
5
डायनामिक रैम (DRAM) को बार-बार विद्युत रिफ्रेश क्यों करना पड़ता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि DRAM की सेल सूक्ष्म कैपेसिटर में आवेश के रूप में डेटा रखती है, जो समय के साथ रिसकर क्षीण हो जाता है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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