1.1 संघवाद की परिभाषा एवं एकात्मक व्यवस्था से अंतर
संघवाद (Federalism): शासन की वह व्यवस्था है जिसमें सत्ता का विभाजन एक केंद्रीय सत्ता और उसकी विभिन्न घटक इकाइयों (राज्यों या प्रांतों) के बीच होता है।
| तुलना का आधार | संघीय शासन व्यवस्था (Federal System) | एकात्मक शासन व्यवस्था (Unitary System) |
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| सरकारों के स्तर | शासन के दो या दो से अधिक स्तर होते हैं (जैसे केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकार)। | शासन का केवल एक ही स्तर होता है; बाकी उप-इकाइयाँ उसके पूरी तरह अधीन होकर काम करती हैं। |
| संवैधानिक शक्तियां | राज्य सरकारों की अपनी शक्तियां होती हैं जो उन्हें सीधे संविधान द्वारा दी जाती हैं; केंद्र सरकार उन्हें मनमाने ढंग से छीन नहीं सकती। | केंद्रीय सरकार प्रांतीय या स्थानीय सरकारों को कोई भी आदेश दे सकती है या जब चाहे उन्हें भंग कर सकती है। |
| जवाबदेही | राज्य सरकारें अपने अधिकार क्षेत्र के कार्यों के लिए केंद्रीय सरकार के प्रति नहीं, बल्कि सीधे जनता के प्रति जवाबदेह होती हैं। | स्थानीय या प्रांतीय सरकारें पूरी तरह केंद्रीय सरकार के प्रति जवाबदेह होती हैं। |
| प्रमुख उदाहरण | भारत, बेल्जियम, अमेरिका, स्विट्जरलैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया। | ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, श्रीलंका, जापान। |
1.2 संघवाद की सात प्रमुख विशेषताएं (Key Features of Federalism)
- सरकारों के दो या अधिक स्तर: यहाँ सरकार के दो या उससे अधिक स्तर (टियर) होते हैं।
- अलग-अलग अधिकार-क्षेत्र (Jurisdiction): अलग-अलग स्तर की सरकारें एक ही नागरिक समूह पर शासन करती हैं, परंतु कानून बनाने, कर वसूलने और प्रशासन का उनका अपना विशिष्ट अधिकार-क्षेत्र होता है।
- संवैधानिक गारंटी: विभिन्न स्तरों की सरकारों के अधिकार-क्षेत्र संविधान में स्पष्ट रूप से दर्ज होते हैं; अतः उनके अस्तित्व और प्राधिकार की संवैधानिक गारंटी होती है।
- संविधान में एकतरफा बदलाव असंभव: संविधान के मौलिक प्रावधानों को किसी एक स्तर की सरकार अकेले नहीं बदल सकती। ऐसे बदलावों के लिए केंद्र और राज्यों दोनों की सहमति आवश्यक होती है।
- अदालतों की सर्वोच्चता (स्वतंत्र न्यायपालिका): अदालतों को संविधान और विभिन्न स्तर की सरकारों के अधिकारों की व्याख्या करने का अधिकार है। यदि विभिन्न स्तरों के बीच अधिकारों का टकराव हो, तो सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) एक निष्पक्ष अंपायर (Deciding Umpire) की भूमिका निभाता है।
- वित्तीय स्वायत्तता: वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों की सरकारों के लिए राजस्व के अलग-अलग स्रोत संविधान में स्पष्ट रूप से निर्धारित होते हैं।
- संघीय व्यवस्था के दोहरे उद्देश्य: (क) देश की एकता की रक्षा करना और उसे सुदृढ़ करना, तथा (ख) क्षेत्रीय और सांस्कृतिक विविधताओं का पूरा सम्मान और समायोजन करना।