1.1 रेशम मार्ग (Silk Routes) से जुड़ती दुनिया
आधुनिक युग से पूर्व विश्व के विभिन्न भागों को परस्पर जोड़ने वाले व्यापारिक व सांस्कृतिक संपर्कों का सबसे जीवंत उदाहरण रेशम मार्ग (Silk Route) है:
- नामकरण: इस मार्ग से पश्चिमी एशिया और यूरोप को भेजे जाने वाले चीनी रेशम (Silk) के भारी व्यापार के कारण इसे 'रेशम मार्ग' कहा गया।
- भौगोलिक विस्तार: यह थल और जल दोनों मार्गों से विस्तृत था। इसने एशिया के विशाल भूभागों को परस्पर जोड़ने के साथ-साथ एशिया को यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से जोड़ा। यह ईसा पूर्व के समय से 15वीं सदी तक फलता-फूलता रहा।
- सांस्कृतिक व व्यापारिक आदान-प्रदान: चीनी पॉटरी, भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के मसाले व कपड़े इसी रास्ते पश्चिम जाते थे। वापसी में सोना-चांदी जैसी कीमती धातुएं यूरोप से एशिया आती थीं। इसी मार्ग से ईसाई मिशनरी, मुस्लिम उपदेशक और बौद्ध धर्म के प्रचारक विभिन्न देशों में पहुंचे।
1.2 भोजन की यात्रा: स्पैगेटी और आलू
व्यापारी और यात्री जब नए देशों में जाते थे, तो जाने-अनजाने नई फसलों के बीज भी वहाँ पहुंचा देते थे:
- नूडल्स और स्पैगेटी: माना जाता है कि नूडल्स चीन से पश्चिम पहुंचे और वहाँ उनसे स्पैगेटी (Spaghetti) का जन्म हुआ। पास्ता 5वीं सदी में अरब यात्रियों के साथ इटली के सिसिली द्वीप पहुंचा।
- अमेरिका से नए खाद्य पदार्थ: आलू, सोया, मूंगफली, मक्का, टमाटर, मिर्च और शकरकंद जैसे आम खाद्य पदार्थ कोलंबस द्वारा 16वीं सदी में अमेरिका की खोज के बाद शेष विश्व में पहुंचे।
- आयरिश आलू अकाल (1845–1849): आलू के आने से यूरोप के गरीबों का जीवन पूरी तरह बदल गया। आयरलैंड के गरीब काश्तकार आलू पर इतने निर्भर हो गए कि जब 1840 के दशक के मध्य में फंगस से आलू की फसल नष्ट हुई, तो 10 लाख से अधिक लोग भुखमरी से मर गए और लाखों लोग आजीविका की तलाश में विदेश भाग गए।
1.3 विजय, बीमारी और व्यापार: अमेरिका में कीटाणुओं का हथियार
16वीं सदी में पुर्तगाली और स्पेनिश सेनाओं द्वारा अमेरिका की विजय केवल सैन्य शक्ति पर आधारित नहीं थी:
18वीं सदी तक चीन और भारत विश्व के सबसे धनी देश थे और एशियाई व्यापार में उनका दबदबा था। परंतु 15वीं सदी के बाद चीन ने अपने विदेशी संबंध सीमित कर लिए, जिससे विश्व व्यापार का केंद्र धीरे-धीरे पश्चिम की ओर यानी यूरोप में स्थानांतरित हो गया।