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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा XII • Biology • अध्याय 7
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

मानव स्वास्थ्य और रोग (Human Health and Disease)

स्वास्थ्य केवल 'रोगों की अनुपस्थिति' अथवा 'शारीरिक तंदुरुस्ती' मात्र नहीं है, बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार यह पूर्ण शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक कल्याण की एक समग्र अवस्था (State of complete physical, mental and social well-being) है। जब शरीर के एक या अधिक अंगों अथवा तंत्रों के सामान्य कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और विशिष्ट लक्षण प्रकट होते हैं, तो उसे 'रोग' कहा जाता है। प्रस्तुत अध्याय मानव शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता (प्रतिरक्षा तंत्र), संक्रामक व असंक्रामक व्याधियों के रोगजनक चक्रों, कैंसर व एड्स की आणविक क्रियाविधियों, तथा नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों का संपूर्ण वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है: 1. मानव में सामान्य संक्रामक रोग: जीवाणुजनित (टाइफाइड—Salmonella typhi व विडाल परीक्षण, न्यूमोनिया—Streptococcus pneumoniae), विषाणुजनित (सामान्य जुकाम—राइनोवायरस), प्रोटोजोआजनित (मलेरिया—Plasmodium का द्विपोषी जीवन चक्र, अमीबता—Entamoeba histolytica), कृमिजनित (एस्केरिसता, फाइलेरिया/हाथीपांव—Wuchereria) तथा कवकजनित (दाद/रिंगवॉर्म)। 2. प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity): सहज प्रतिरक्षा (Innate Immunity) के चार अवरोध (शारीरिक, कायिकीय, कोशिकीय एवं साइटोकाइन), तथा उपार्जित प्रतिरक्षा (Acquired Immunity)—तरल प्रतिरक्षा (B-लसिकाणु एवं एंटीबॉडी अणु $H_2L_2$ की संरचना) तथा कोशिका-माध्यमित प्रतिरक्षा (T-लसिकाणु एवं अंग प्रत्यारोपण में अस्वीकृति)। सक्रिय व निष्क्रिय प्रतिरक्षा (कोलोस्ट्रम में $IgA$), टीकाकरण, एलर्जी ($IgE$ व मास्ट कोशिकाएं), तथा स्वप्रतिरक्षा (रूमेटॉइड आर्थराइटिस)। 3. लसिकाभ अंग (Lymphoid Organs): प्राथमिक लसिकाभ अंग (अस्थि मज्जा एवं थाइमस) तथा द्वितीयक लसिकाभ अंग (प्लीहा, लसिका गांठें, टांसिल एवं MALT)। 4. एड्स (AIDS - उपार्जित प्रतिरक्षा न्यूनता सिंड्रोम): पश्चविषाणु (HIV) की संरचना, रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेस, मैक्रोफेज (एचआईवी कारखाना) तथा सहायक T-लिम्फोसाइट्स ($T_H$ कोशिकाओं) का विनाश, एलिसा (ELISA) परीक्षण एवं रोकथाम। 5. कैंसर (Cancer): संस्पर्श संदमन (Contact inhibition) का ह्रास, सुदम बनाम दुर्दम अर्बुद (Metastasis - सबसे भयावह गुण), कार्सिनोजन, ऑन्कोजीन, संसूचन विधियां (बायोप्सी, एमआरआई) एवं उपचार (शल्यक्रिया, विकिरण, कीमोथेरेपी व $\alpha$-इंटरफेरॉन)। 6. ड्रग्स तथा अल्कोहल कुप्रयोग: ओपिऑइड्स (मॉर्फिन, हेरोइन / स्मैक), कैनाबिनॉइड्स (भांग, चरस, गांजा), कोका एल्कलॉइड (कोकीन / क्रैक), विभ्रमक (धतूरा, एलएसडी), लत एवं निर्भरता तथा किशोरावस्था में रोकथाम।

मलेरिया के मच्छर से लेकर एड्स के चालाक वायरस तक: हमारे शरीर की 24 घंटे जागने वाली 10 खरब सैनिकों की सेना!

क्या आप जानते हैं कि जब आप यह वाक्य पढ़ रहे हैं, ठीक इसी क्षण आपके रक्त में 10 खरब (1 Trillion) श्वेत रक्त कोशिकाएं करोड़ों वायरस और बैक्टीरिया के खिलाफ एक अदृश्य महायुद्ध लड़ रही हैं? जब कोई अंग प्रत्यारोपण (जैसे किडनी ट्रांसप्लांट) किया जाता है, तो हमारी कोशिका-माध्यमित प्रतिरक्षा प्रणाली (T-कोशिकाएं) उस नई किडनी को 'पराया' पहचानकर तुरंत नष्ट करने दौड़ पड़ती हैं, जिसके लिए मरीज को जीवन भर इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं लेनी पड़ती हैं! और मलेरिया फैलाने वाला प्लाज्मोडियम परजीवी इतना चालाक है कि वह मच्छर की लार ग्रंथि से निकलकर सीधे हमारे यकृत और लाल रक्त कोशिकाओं में छिप जाता है, और आरबीसी को फोड़कर 'हीमोज़ोइन' नामक विषैला रसायन छोड़ता है जिससे हमें हड्डियों को कंपाने वाली ठंड और तेज बुखार चढ़ता है!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

JAC बोर्ड, CBSE तथा NEET-UG में यह अध्याय जीवविज्ञान एवं मानव कल्याण इकाई का प्रमुख आधार (7 से 8 अंक) है: 1. 5-अंकीय दीर्घ उत्तरीय प्रश्न: प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी) का मानव एवं मादा एनाफलीज मच्छर में जीवन चक्र, अथवा एंटीबॉडी अणु ($H_2L_2$) की सचित्र संरचना, अथवा एचआईवी (AIDS) की प्रतिकृति एवं सहायक T-कोशिकाओं पर प्रभाव। 2. 3-अंकीय तुलनात्मक प्रश्न: सहज बनाम उपार्जित प्रतिरक्षा, सक्रिय बनाम निष्क्रिय प्रतिरक्षा, अथवा सुदम (Benign) बनाम दुर्दम (Malignant) अर्बुद। 3. NEET-UG में अनिवार्य प्रश्न: विडाल टेस्ट (टाइफाइड), हीमोज़ोइन विष, प्राथमिक लसिकाभ अंग, MALT का प्रतिशत (50%), मेटास्टेसिस की परिभाषा, तथा हेरोइन (डायएसिटिलमॉर्फिन) के स्रोत पौधे (Papaver somniferum) पर प्रतिवर्ष 3–4 प्रश्न पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • परिसंचरण तंत्र: रक्त के घटक (RBC, WBC, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा)।
  • कोशिका विभाजन एवं कोशिका चक्र की मूलभूत समझ।
  • विषाणु (Virus) की संरचना: प्रोटीन आवरण (कैप्सिड) एवं आनुवंशिक पदार्थ (RNA/DNA)।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • टाइफाइड, न्यूमोनिया, मलेरिया, अमीबता एवं फाइलेरिया के रोगजनकों, लक्षणों तथा संचरण माध्यमों का तुलनात्मक विश्लेषण करना।
  • प्लाज्मोडियम के जीवन चक्र के विभिन्न चरणों (स्पोरोज़ोआइट, यकृत कोशिका विभाजन, हीमोज़ोइन स्राव, युग्मकजनक एवं मच्छर आमाशय में निषेचन) का सचित्र आरेख बनाना।
  • प्रतिरक्षी अणु (एंटीबॉडी $H_2L_2$) की आणविक संरचना तथा $IgG, IgA, IgM, IgE$ के विशिष्ट कार्यों को स्पष्ट करना।
  • एचआईवी संक्रमण के दौरान रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेस की भूमिका तथा $T_H$ कोशिकाओं के क्षय के तंत्र को समझाना।
  • कैंसर के कारणों, संस्पर्श संदमन के नुकसान, मेटास्टेसिस तथा विभिन्न उपचार पद्धतियों का वर्णन करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. मानव में सामान्य संक्रामक रोग एव...
2 2. प्रतिरक्षा प्रणाली—सहज एवं उपार्...
3 3. लसिकाभ अंग, एड्स (AIDS) एवं कैंस...
4 4. ड्रग्स एवं अल्कोहल का कुप्रयोग (...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. मानव में सामान्य संक्रामक रोग एवं उनके रोगजनक चक्र

संक्रामक रोग वे रोग हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में वायु, जल, भोजन या शारीरिक संपर्क द्वारा आसानी से संचरित होते हैं।

A. जीवाणुजनित रोग (Bacterial Diseases):

  • 1. टाइफाइड (Typhoid / मियादी बुखार):
    • रोगजनक: Salmonella typhi (साल्मोनेला टाइफी)।
    • संचरण: संदूषित भोजन एवं जल द्वारा यह छोटी आंत में प्रवेश करता है तथा रुधिर द्वारा अन्य अंगों में पहुंचता है।
    • लक्षण: लगातार तेज बुखार ($39^\circ\text{C}$ से $40^\circ\text{C}$), कमजोरी, पेट दर्द, कब्ज, सिरदर्द, भूख न लगना; गंभीर स्थिति में आंतों में छेद (Intestinal perforation) तथा मृत्यु।
    • पुष्टि परीक्षण: विडाल टेस्ट (Widal Test)।
    • ऐतिहासिक तथ्य: 'टाइफाइड मैरी' (Mary Mallon) पेशे से रसोइया थी जो स्वयं स्वस्थ वाहक थी और कई वर्षों तक भोजन द्वारा टाइफाइड फैलाती रही।
  • 2. न्यूमोनिया (Pneumonia):
    • रोगजनक: Streptococcus pneumoniae तथा Haemophilus influenzae।
    • संचरण: संक्रमित व्यक्ति की छींक/खांसी की बूंदों (Droplets) अथवा बर्तनों के साझा प्रयोग से।
    • लक्षण: यह फेफड़ों की वायु कूपिकाओं (Alveoli) को संक्रमित करता है, जिससे कूपिकाओं में तरल भर जाता है और श्वसन में गंभीर कठिनाई होती है। बुखार, ठंड लगना, खांसी, सिरदर्द; गंभीर मामलों में होंठ और उंगलियों के नाखून धूसर से नीले (Gray to bluish) पड़ जाते हैं।

B. विषाणुजनित रोग (Viral Diseases):

  • सामान्य जुकाम (Common Cold):
    • रोगजनक: राइनोवायरस (Rhino viruses) समूह।
    • लक्षण: यह नासा तथा श्वसन मार्ग को संक्रमित करता है, किंतु फेफड़ों को कभी प्रभावित नहीं करता। नाक में जमाव, बहती नाक, गले में खराश, स्वरभंग (कर्कश आवाज), खांसी, सिरदर्द; 3 से 7 दिन में स्वतः ठीक हो जाता है।

C. प्रोटोजोआजनित रोग (Protozoan Diseases):

  • 1. मलेरिया (Malaria):
    • रोगजनक: Plasmodium की विभिन्न जातियां (P. vivax, P. malariae, P. falciparum)। P. falciparum द्वारा उत्पन्न दुर्दम (Malignant) मलेरिया सबसे घातक एवं जानलेवा होता है।
    • वाहक: मादा एनाफलीज मच्छर (Female Anopheles mosquito)।
    • प्लाज्मोडियम का द्विपोषी जीवन चक्र:
    1. मच्छर जब मानव को काटता है, तो लार के साथ संक्रामक अवस्था स्पोरोज़ोआइट (Sporozoites / बीजाणुज) मानव रक्त में प्रविष्ट होती है।
    2. स्पोरोज़ोआइट रक्त से यकृत कोशिकाओं (Liver cells) में पहुंचते हैं और अलैंगिक रूप से बहुविभाजन कर यकृत कोशिकाओं को फोड़ते हैं।
    3. यकृत से मुक्त होकर परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) पर हमला करते हैं। RBCs में अलैंगिक जनन कर उन्हें फोड़ते हैं। RBCs के फटने पर हीमोग्लोबिन के विखंडन से एक विषाक्त पदार्थ हीमोज़ोइन (Haemozoin) निकलता है। यह हीमोज़ोइन ही प्रत्येक 3 से 4 दिन में होने वाली कंपकंपी (ठंड) तथा तेज बुखार के लिए उत्तरदायी है।
    4. RBCs में कुछ परजीवी लैंगिक अवस्थाओं—युग्मकजनकों (Gametocytes: नर व मादा) में विकसित होते हैं।
    5. जब कोई अन्य मादा एनाफलीज मच्छर संक्रमित मनुष्य को काटती है, तो ये युग्मकजनक मच्छर के शरीर में पहुंच जाते हैं।
    6. मच्छर के आमाशय (Stomach) में निषेचन तथा परिवर्धन होता है, जिससे गतिशील युग्मनज (ऊकाइनीट) बनता है।
    7. ऊकाइनीट से ऊसिस्ट बनता है और बहुत सारे स्पोरोज़ोआइट बनकर आमाशय भित्ति को फोड़कर मच्छर की लार ग्रंथियों (Salivary glands) में चले जाते हैं। अब यह मच्छर पुनः नए मानव को संक्रमित करने हेतु तैयार है।
  • 2. अमीबता / अमीबी पेचिश (Amoebiasis / Amoebic Dysentery):
    • रोगजनक: Entamoeba histolytica (एंटअमीबा हिस्टोलिटिका)।
    • लक्षण: बड़ी आंत को संक्रमित करता है। कब्ज, मरोड़, पेट दर्द, श्लेष्मा (Mucus) और रक्त के थक्कों से युक्त मल।
    • यांत्रिक वाहक: घरेलू मक्खियां (Houseflies)।

D. कृमिजनित एवं कवकजनित रोग:

  • एस्केरिसता (Ascariasis): आंत्र परजीवी गोलकृमि Ascaris lumbricoides द्वारा। संदूषित जल, सब्जियों, फलों द्वारा संचरण। आंतरिक रक्तस्राव, पेशीय दर्द, आंत्र में अवरोध।
  • फाइलेरिया / हाथीपांव (Filariasis / Elephantiasis): फाइलेरिया कृमि Wuchereria bancrofti एवं W. malayi द्वारा। वाहक: मादा क्यूलेक्स मच्छर (Culex mosquito)। निचले पादों (पैरों) की लसिका वाहिकाओं में धीरे-धीरे दीर्घकालिक शोथ (Chronic inflammation) हो जाता है, जिससे पैर हाथी के पैर समान अत्यधिक सूज जाते हैं तथा जननांग विकृत हो जाते हैं।
  • दाद (Ringworm): Microsporum, Trichophyton, Epidermophyton कवकों द्वारा। त्वचा, नाखूनों और सिर पर सूखी, शल्की विक्षतियां (Dry, scaly lesions) तथा तीव्र खुजली। ऊष्मा और नमी कवकों की वृद्धि में सहायक होती है।

2. प्रतिरक्षा प्रणाली—सहज एवं उपार्जित प्रतिरक्षा तथा एंटीबॉडी अणु

शरीर की रोगजनकों से लड़ने तथा रोगों से सुरक्षा करने की कुल क्षमता प्रतिरक्षा (Immunity) कहलाती है। यह दो प्रकार की होती है:

1. सहज / जन्मजात प्रतिरक्षा (Innate Immunity):

यह जन्म के समय से ही उपस्थित होती है, गैर-विशिष्ट (Non-specific) होती है और रोगाणुओं को शरीर में प्रवेश करने से रोकती है। इसके 4 प्रमुख अवरोध (Barriers) हैं:

  • शारीरिक अवरोध (Physical Barriers): त्वचा (सर्वप्रथम मुख्य अवरोध) तथा श्वसन, पाचन व जनन मार्ग के उपकला अस्तर पर उपस्थित श्लेष्मा झिल्ली (Mucus coating)।
  • कायिकीय अवरोध (Physiological Barriers): आमाशय का हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$), मुख की लार (Saliva), तथा आंखों के आंसू—जिनमें रोगाणुनाशक एंजाइम लाइसोजाइम (Lysozyme) होता है।
  • कोशिकीय अवरोध (Cellular Barriers): रक्त की भक्षक कोशिकाएं जैसे बहुरूपकेंद्रक श्वेताणु (PMNL-Neutrophils), मोनोसाइट्स, प्राकृतिक मारक कोशिकाएं (Natural Killer Cells), तथा ऊतकों में मैक्रोफेज।
  • साइटोकाइन अवरोध (Cytokine Barriers): विषाणु संक्रमित कोशिकाएं इंटरफेरॉन (Interferons) नामक प्रोटीनों का स्राव करती हैं, जो गैर-संक्रमित कोशिकाओं को आगे होने वाले विषाणु संक्रमण से बचाते हैं।

2. उपार्जित प्रतिरक्षा (Acquired Immunity):

यह रोगजनक-विशिष्ट (Pathogen-specific) होती है और इसकी मुख्य विशेषता स्मृति (Memory) है। प्रथम संक्रमण पर धीमा 'प्राथमिक अनुक्रिया' (Primary response) तथा उसी रोगजनक के दोबारा संक्रमण पर अत्यधिक तीव्र व प्रबल 'द्वितीयक / ऐनामनेस्टिक अनुक्रिया' (Secondary / Anamnestic response) होती है।

B-लसिकाणु एवं T-लसिकाणु:

  • तरल प्रतिरक्षा (Humoral Immune Response - AMI): B-लिम्फोसाइट्स रुधिर में प्रोटीनों की सेना उत्पन्न करते हैं जिन्हें प्रतिरक्षी (Antibodies) कहते हैं। चूंकि ये एंटीबॉडी रक्त प्लाज्मा (तरल) में पाए जाते हैं, इसलिए इसे तरल प्रतिरक्षा कहते हैं।
  • कोशिका-माध्यमित प्रतिरक्षा (Cell-Mediated Immunity - CMI): T-लिम्फोसाइट्स स्वयं एंटीबॉडी नहीं बनाते, बल्कि B-कोशिकाओं की सहायता करते हैं तथा स्वयं संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करते हैं। मानव में हृदय, वृक्क (किडनी), यकृत आदि के अंग प्रत्यारोपण (Grafting) के समय ग्राफ्ट को अस्वीकार (Graft rejection) करने के लिए कोशिका-माध्यमित प्रतिरक्षा (CMI) ही पूर्णतः उत्तरदायी होती है। प्रत्यारोपण से पूर्व ऊतक मिलान (Tissue matching) तथा रुधिर वर्ग मिलान आवश्यक होता है।

प्रतिरक्षी अणु (Antibody Molecule) की संरचना:

प्रत्येक एंटीबॉडी अणु में 4 पॉलीपेप्टाइड शृंखलाएं होती हैं: दो लंबी भारी शृंखलाएं (Heavy chains - H) तथा दो छोटी हल्की शृंखलाएं (Light chains - L)। अतः इसे $H_2L_2$ के रूप में दर्शाया जाता है। शृंखलाएं आपस में डाइसल्फाइड बंधों ($-S-S-$) द्वारा जुड़ी होती हैं। प्रत्येक शृंखला में एक स्थिर भाग (Constant region) तथा एंटीजन से जुड़ने वाला एक परिवर्ती भाग (Variable region / Antigen-binding site) होता है। मानव में 5 प्रकार की एंटीबॉडीज पाई जाती हैं: $IgA, IgM, IgE, IgG, IgD$।

सक्रिय एवं निष्क्रिय प्रतिरक्षा:

  • सक्रिय प्रतिरक्षा (Active Immunity): जब व्यक्ति का अपना शरीर एंटीजन के संपर्क में आने पर स्वयं एंटीबॉडीज का निर्माण करता है। यह धीमी होती है किंतु दीर्घकालिक सुरक्षा देती है (उदा. प्राकृतिक संक्रमण या टीका लगाना)।
  • निष्क्रिय प्रतिरक्षा (Passive Immunity): जब शरीर की रक्षा हेतु बाहर से सीधे तैयार (Pre-formed) एंटीबॉडीज दी जाती हैं। यह तुरंत राहत देती है।
    • उदाहरण 1: प्रसव के प्रारंभिक दिनों में माता के स्तनों से स्रावित पीला गाढ़ा दूध—कोलोस्ट्रम (Colostrum / खीस), जिसमें $IgA$ एंटीबॉडी प्रचुर मात्रा में होती है और नवजात शिशु को घातक संक्रमणों से बचाती है।
    • उदाहरण 2: टिटनेस के इंजेक्शन अथवा सर्पदंश (Snake bite) में दिया जाने वाला एंटीवेनम (एंटी-टॉक्सिन)।

एलर्जी एवं स्वप्रतिरक्षा:

  • एलर्जी (Allergy): पर्यावरण में मौजूद कुछ एंटीजनों (परागकण, धूल, पशु बाल) के प्रति प्रतिरक्षा तंत्र की अतिरंजित अनुक्रिया (Exaggerated response)। एलर्जी में उत्पन्न एंटीबॉडी: $IgE$। मास्ट कोशिकाओं से हिस्टामिन (Histamine) एवं सिरोटोनिन का स्राव होता है। उपचार: एंटीहिस्टामिन, एड्रिनेलिन एवं स्टेरॉयड्स।
  • स्वप्रतिरक्षा (Autoimmunity): आनुवंशिक या अज्ञात कारणों से जब शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र 'स्व' (Self) और 'पर' (Non-self) में भेद करने की क्षमता खो देता है और अपनी ही कोशिकाओं पर हमला कर उन्हें नष्ट करने लगता है। उदाहरण: रूमेटॉइड आर्थराइटिस (आमवाती संधिशोथ)।

3. लसिकाभ अंग, एड्स (AIDS) एवं कैंसर (Cancer) की आणविक क्रियाविधि

लसिकाभ अंग (Lymphoid Organs):

वे अंग जहाँ लसिकाणुओं (Lymphocytes) की उत्पत्ति, परिपक्वन एवं प्रचुरोद्भवन होता है:

  • प्राथमिक लसिकाभ अंग (Primary Lymphoid Organs): अस्थि मज्जा (Bone marrow) तथा थाइमस (Thymus)। यहाँ अपरिपक्व लसिकाणु एंटीजन-संवेदी लसिकाणुओं में विभेदित होते हैं। सभी रक्त कोशिकाएं (B व T कोशिकाएं) अस्थि मज्जा में बनती हैं। B-कोशिकाएं मज्जा में ही परिपक्व होती हैं, जबकि T-कोशिकाएं थाइमस में परिपक्व होती हैं। (थाइमस हृदय के पास स्थित होता है जो जन्म के समय बड़ा होता है किंतु आयु बढ़ने के साथ घटता जाता है)।
  • द्वितीयक लसिकाभ अंग (Secondary Lymphoid Organs): प्लीहा (Spleen), लसिका गांठें (Lymph nodes), टांसिल, पेयर के धब्बे (Peyer's patches), तथा परिशेषिका (Appendix)। ये एंटीजन और लसिकाणुओं के बीच परस्पर क्रिया के स्थल प्रदान करते हैं।
    • प्लीहा (Spleen): रुधिर-जनित सूक्ष्मजीवों को छानकर अलग करता है तथा RBCs का विशाल भंडार (Erythrocyte reservoir / RBC का कब्रिस्तान) है।
    • MALT (Mucosa-Associated Lymphoid Tissue): श्वसन, पाचन तथा मूत्रजननांग मार्गों के अस्तर में स्थित लसिकाभ ऊतक; यह मानव शरीर के कुल लसिकाभ ऊतक का लगभग 50% भाग बनाता है।

एड्स (AIDS - Acquired Immuno Deficiency Syndrome):

1981 में अमेरिका में पहली बार पहचाना गया। भारत में NACO (राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन) इसके नियंत्रण हेतु कार्यरत है। रोगजनक: मानव प्रतिरक्षा न्यूनता विषाणु (HIV), जो पश्चविषाणु (Retrovirus) समूह का सदस्य है। इसमें आरएनए आनुवंशिक पदार्थ होता है जो प्रोटीन आवरण से घिरा होता है।

HIV संक्रमण की कार्यप्रणाली (Replication Cycle):

  1. मानव शरीर में प्रवेश के बाद वायरस सर्वप्रथम मैक्रोफेज (Macrophages) में प्रवेश करता है।
  2. वायरस का एकल रज्जुक आरएनए एंजाइम रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेस (Reverse Transcriptase) द्वारा वायरल डीएनए बनाता है।
  3. यह वायरल डीएनए मानव कोशिका के केंद्रक में जाकर पोषी डीएनए से जुड़ जाता है और नई वायरल आरएनए प्रतियों का निर्माण करता है। मैक्रोफेज लगातार नए वायरस कण बनाते रहते हैं, इसलिए मैक्रोफेज को 'एचआईवी कारखाना' (HIV Factory) कहते हैं।
  4. इसके साथ ही एचआईवी सहायक T-लसिकाणुओं ($T_H$ Lymphocytes / CD4+ cells) पर हमला करता है, अपनी प्रतियां बनाता है और उन्हें नष्ट करता है।
  5. संक्रमित व्यक्ति के रक्त में $T_H$ कोशिकाओं की संख्या में उत्तरोत्तर भारी गिरावट ($200\text{ cells/mm}^3$ से कम) आ जाती है।
  6. परिणामस्वरूप रोगी की प्रतिरक्षा इतनी दुर्बल हो जाती है कि वह Mycobacterium, विषाणुओं, कवकों तथा Toxoplasma जैसे सामान्य परजीवियों के अवसरवादी संक्रमणों (Opportunistic infections) से भी अपना बचाव नहीं कर पाता।

निदान: एलिसा टेस्ट (ELISA - Enzyme Linked Immunosorbent Assay) द्वारा एंटीबॉडीज की पहचान की जाती है; संपुष्टि हेतु वेस्टर्न ब्लॉट किया जाता है। उपचार: एंटीरेट्रोवायरल औषधियां (जैसे AZT) केवल रोगी की आयु को कुछ समय बढ़ा सकती हैं, रोग को पूर्णतः ठीक नहीं कर सकतीं।

कैंसर (Cancer):

सामान्य कोशिकाओं में एक अत्यंत नियंत्रित गुण पाया जाता है जिसे संस्पर्श संदमन (Contact Inhibition) कहते हैं—अर्थात् जब कोशिकाएं दूसरी कोशिकाओं के संपर्क में आती हैं तो उनकी अनियंत्रित वृद्धि रुक जाती है। कैंसर कोशिकाओं में यह संस्पर्श संदमन का गुण समाप्त हो जाता है, जिसके कारण वे अनियंत्रित रूप से विभाजित होकर कोशिकाओं का एक बड़ा पिंड बना लेती हैं जिसे अर्बुद (Tumor) कहते हैं।

  • 1. सुदम अर्बुद (Benign Tumor): अपने मूल स्थान तक ही सीमित रहते हैं, दूसरे अंगों में नहीं फैलते और अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचाते हैं।
  • 2. दुर्दम अर्बुद (Malignant Tumor): ये नवद्रव्यी (Neoplastic) कोशिकाओं के समूह होते हैं जो तेजी से बढ़ते हैं, आसपास के सामान्य ऊतकों पर आक्रमण कर उन्हें नष्ट करते हैं। इनकी कोशिकाएं रक्त या लसिका द्वारा शरीर के दूरस्थ अंगों में पहुंचकर नए अर्बुद बना लेती हैं। कैंसर का यह गुण मेटास्टेसिस (Metastasis / संस्तरण) कहलाता है, जो दुर्दम अर्बुद का सबसे भयावह और घातक लक्षण है।

कैंसर के कारक (Carcinogens):
• भौतिक कारक: आयनकारी विकिरण (X-किरणें, गामा किरणें) तथा गैर-आयनकारी विकिरण (UV किरणें)।
• रासायनिक कारक: तंबाकू के धुएं में मौजूद रासायनिक कार्सिनोजन (फेफड़ों के कैंसर का मुख्य कारण)।
• जैविक कारक: ऑन्कोजेनिक वायरस (अर्बुदी विषाणु) जिनमें वायरल ऑन्कोजीन होते हैं। सामान्य कोशिकाओं में कोशिकीय ऑन्कोजीन (c-onc / Proto-oncogenes) पाए जाते हैं जो उद्दीपित होने पर कैंसरकारी बन जाते हैं।

कैंसर का उपचार: शल्यक्रिया (ट्यूमर काटना), विकिरण चिकित्सा (रेडियोथेरेपी), कीमोथेरेपी (रसायन चिकित्सा—दुष्प्रभाव: बाल झड़ना, एनीमिया), तथा इम्यूनोथेरेपी—कैंसर कोशिकाएं प्रतिरक्षा तंत्र से बच जाती हैं, अतः रोगियों को $\alpha$-इंटरफेरॉन दिया जाता है जो जैविक अनुक्रिया रूपांतरक (Biological response modifier) के रूप में प्रतिरक्षा तंत्र को सक्रिय कर अर्बुद को नष्ट करता है।

4. ड्रग्स एवं अल्कोहल का कुप्रयोग (Drugs and Alcohol Abuse)

किशोरावस्था में जिज्ञासा, रोमांच, मित्रों के दबाव तथा तनाव से बचने हेतु मादक द्रव्यों का सेवन अक्सर प्रारंभ होता है जो धीरे-धीरे व्यसन (Addiction) और निर्भरता (Dependence) में बदल जाता है। निर्भरता वह स्थिति है जिसमें अचानक ड्रग बंद करने पर कष्टकारी प्रत्याहार लक्षण (Withdrawal Syndrome) जैसे कंपकंपी, पसीना, चिंता, जी मिचलाना प्रकट होते हैं।

प्रमुख नशीली औषधियों का वर्गीकरण:

औषधि वर्गप्राकृतिक स्रोतग्राही स्थल एवं क्रियाविधिशारीरिक एवं मानसिक प्रभाव
1. ओपिऑइड्स (Opioids)
उदा. मॉर्फिन, हेरोइन (स्मैक)
अफीम पोस्त (Papaver somniferum) के लेटेक्स से। मॉर्फिन के एसिटिलीकरण द्वारा डायएसिटिलमॉर्फिन (हेरोइन) बनती है जो सफेद, गंधहीन, कड़वा रवेदार यौगिक है।केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) तथा जठरांत्र मार्ग में स्थित ओपिऑइड ग्राहियों से जुड़ते हैं।यह एक अवसादक (Depressant) है जो शरीर के तंत्रिका कार्यों को धीमा कर देता है। मॉर्फिन एक अत्यधिक प्रभावी दर्द निवारक (Analgesic) है।
2. कैनाबिनॉइड्स (Cannabinoids)
उदा. भांग, गांजा, चरस, मैरिजुआना
भांग के पौधे Cannabis sativa के पुष्पक्रम, पत्तियों तथा रेजिन से प्राप्त।मस्तिष्क में स्थित कैनाबिनॉइड ग्राहियों से जुड़ते हैं।शरीर के हृदय-वाहिका तंत्र (Cardiovascular System) को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। खिलाड़ी अक्सर डोपिंग में इसका दुरुपयोग करते हैं।
3. कोका एल्कलॉइड / कोकीन (Cocaine / Crack)दक्षिण अमेरिकी पौधे Erythroxylum coca की पत्तियों से प्राप्त।तंत्रिका संचारी (Neurotransmitter) डोपामाइन (Dopamine) के परिवहन में हस्तक्षेप करता है।केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का तीव्र उद्दीपक (Stimulant); अत्यधिक ऊर्जा व सुखद अहसास (Euphoria) देता है। अधिक मात्रा में तीव्र विभ्रम (Hallucinations) उत्पन्न करता है।
4. विभ्रमक (Hallucinogens)
उदा. LSD, धतूरा, बेलाडोना
Atropa belladonna तथा Datura के बीजों से; LSD कवक Claviceps purpurea से।मस्तिष्क के संवेदी केंद्रों को भ्रमित करते हैं।काल्पनिक दृश्य, आवाजें और तीव्र मानसिक विकार (Hallucination) उत्पन्न करते हैं।

ड्रग एवं अल्कोहल के घातक परिणाम:

  • अंतःशिरा (Intravenous) सुईयों और सीरिंजों के साझा प्रयोग से एड्स (AIDS) तथा हेपेटाइटिस-बी का जानलेवा संचरण।
  • अल्कोलह के दीर्घकालिक उपयोग से यकृत का सिरोसिस (Cirrhosis of Liver) तथा तंत्रिका तंत्र का क्षय।
  • गर्भावस्था में अल्कोहल सेवन से भ्रूण में असामान्य विकास (Fetal Alcohol Syndrome)।

महत्वपूर्ण जैविक संकल्पनाएँ, प्रक्रियाएँ एवं आरेख

एंटीबॉडी अणु संरचना सूत्र
H₂L₂ (2 भारी शृंखलाएं + 2 हल्की शृंखलाएं)
डाइसल्फाइड बंधों (-S-S-) द्वारा जुड़ी, परिवर्तनीय एंटीजन बाइंडिंग स्थल
प्रतिरक्षी प्रकार एवं मुख्य कार्य
IgA (कोलोस्ट्रम/स्रावी) | IgE (एलर्जी) | IgG (अपरा पार करने वाली) | IgM (पेंटामेरिक/प्राथमिक)
IgG रक्त में सर्वाधिक (लगभग 75-80%) पाई जाती है
एड्स निदान एवं पुष्टिकरण परीक्षण
प्राथमिक जांच: ELISA (एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट एसे) | पुष्टिकरण: Western Blot
HIV रेट्रोवायरस, CD4+ T-हेल्पर कोशिकाओं का ह्रास (< 200 cells/mm³)
हेरोइन का रासायनिक नाम
डायएसिटिलमॉर्फिन (Diacetylmorphine)
मॉर्फिन के एसिटिलीकरण द्वारा निर्मित, स्रोत: Papaver somniferum

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्लाज्मोडियम के जीवन चक्र का प्रवाह चित्र (Flowchart) बनाइए तथा मानव में हीमोज़ोइन के स्राव और उसके प्रभाव की व्याख्या कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. संक्रमण का प्रवाह:
    संक्रमित मादा एनाफलीज मच्छर का काटना $\rightarrow$ रक्त में स्पोरोज़ोआइट प्रविष्ट $\rightarrow$ यकृत कोशिकाओं में अलैंगिक बहुविभाजन $\rightarrow$ यकृत कोशिकाएं फटना $\rightarrow$ लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) पर आक्रमण $\rightarrow$ RBCs में बहुविभाजन $\rightarrow$ RBCs का फटना।
  2. हीमोज़ोइन (Haemozoin) का स्राव एवं प्रभाव:
    जब प्लाज्मोडियम RBCs के भीतर हीमोग्लोबिन का भक्षण करता है, तो हीमोग्लोबिन का हीम (लोहा) घटक एक अविलेय विषाक्त कणिकाओं में परिवर्तित हो जाता है जिसे हीमोज़ोइन कहते हैं।
    RBCs के फटने पर यह हीमोज़ोइन रक्त प्लाज्मा में मुक्त होता है। यह विषाक्त पदार्थ शरीर के ताप नियंत्रण केंद्र (हाइपोथैलेमस) को प्रभावित करता है, जिसके फलस्वरूप प्रत्येक 3 से 4 दिन में तीव्र कंपकंपी (ठंड लगना) तथा तेज आवर्ती बुखार (Chills and high recurring fever) उत्पन्न होता है।
  3. लैंगिक चक्र: RBCs में युग्मकजनक बनते हैं $\rightarrow$ मच्छर रक्त चूसता है $\rightarrow$ मच्छर के आमाशय में निषेचन $\rightarrow$ लार ग्रंथि में स्पोरोज़ोआइट का संचय।
अंक योजना (Marking Scheme): जीवन चक्र के दोनों पोषियों का क्रमबद्ध विवरण (2 अंक) + हीमोज़ोइन के निर्माण व आवर्ती कंपकंपी-बुखार पर व्याख्या (2 अंक) = कुल 4 अंक।
उदाहरण 2
सहज (जन्मजात) प्रतिरक्षा के विभिन्न अवरोधों का उदाहरण सहित विस्तृत वर्णन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: सहज प्रतिरक्षा के 4 मुख्य अवरोध हैं:

  1. शारीरिक अवरोध (Physical Barriers): शरीर की त्वचा सूक्ष्मजीवों के प्रवेश को रोकने वाला सबसे मुख्य अवरोध है। इसके अतिरिक्त श्वसन, जठरांत्र तथा जननमूत्र पथ के अस्तर पर स्थित श्लेष्मा उपकला (Mucus membrane) रोगाणुओं को फंसाकर बाहर निकालती है।
  2. कायिकीय अवरोध (Physiological Barriers): आमाशय का अम्लीय रस ($HCl$, pH ~ 1.5-2.0) भोजन के साथ आए जीवाणुओं को मारता है; मुख की लार तथा आंखों के आंसुओं में उपस्थित लाइसोजाइम एंजाइम जीवाणु की भित्ति को नष्ट करता है।
  3. कोशिकीय अवरोध (Cellular Barriers): रक्त में उपस्थित बहुरूपकेंद्रक श्वेताणु (PMNL - न्यूट्रोफिल्स), मोनोसाइट्स तथा प्राकृतिक मारक कोशिकाएं (NK cells) रोगाणुओं का भक्षण (Phagocytosis) कर उन्हें पचा डालती हैं।
  4. साइटोकाइन अवरोध (Cytokine Barriers): विषाणु से संक्रमित कोशिकाएं ग्लाइकोप्रोटीन इंटरफेरॉन (Interferon) का स्राव करती हैं, जो आसपास की असंक्रमित कोशिकाओं पर आवरण बनाकर उन्हें आगे होने वाले विषाणु संक्रमण से सुरक्षित रखती हैं।
अंक योजना (Marking Scheme): प्रत्येक अवरोध (शारीरिक, कायिकीय, कोशिकीय, साइटोकाइन) का सही वर्णन व उदाहरण देने पर (1 × 4 = 4 अंक)।
उदाहरण 3
एक प्रतिरक्षी (Antibody) अणु की नामांकित संरचना बनाइए तथा B-कोशिकाओं व T-कोशिकाओं की भूमिका में अंतर स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. एंटीबॉडी अणु की संरचना:
    प्रत्येक एंटीबॉडी अणु 'Y' आकार का होता है जिसमें 4 पॉलीपेप्टाइड शृंखलाएं होती हैं:
    • दो बड़ी, भारी शृंखलाएं (Heavy chains - H)
    • दो छोटी, हल्की शृंखलाएं (Light chains - L)
    अतः इसे $H_2L_2$ सूत्र द्वारा निरूपित करते हैं। शृंखलाएं आपस में डाइसल्फाइड बंधों ($-S-S-$) द्वारा जुड़ी होती हैं। Y की दोनों भुजाओं के शीर्ष पर 'एंटीजन बंधन स्थल' (Antigen-binding site / Paratope) होता है जो विशिष्ट एंटीजन से ताला-चाबी की तरह जुड़ता है।
  2. B-कोशिकाएं बनाम T-कोशिकाएं:
    लक्षणB-लसिकाणुT-लसिकाणु
    परिपक्वनअस्थि मज्जा (Bone marrow) में।थाइमस (Thymus) ग्रंथि में।
    कार्यप्रणालीएंटीबॉडीज की सेना बनाती हैं (तरल प्रतिरक्षा / AMI)।एंटीबॉडी नहीं बनातीं, B-कोशिकाओं की मदद करती हैं तथा संक्रमित कोशिकाओं को सीधे मारती हैं (CMI)।
    अंग प्रत्यारोपणसीधी भूमिका नहीं।अंग अस्वीकृति (Graft rejection) हेतु पूर्णतः उत्तरदायी।
अंक योजना (Marking Scheme): एंटीबॉडी संरचना (H₂L₂ व डाइसल्फाइड बंध) का विवरण (2 अंक) + B व T कोशिकाओं में 3 स्पष्ट अंतर (2 अंक) = कुल 4 अंक।
उदाहरण 4
कैंसर क्या है? सुदम (Benign) एवं दुर्दम (Malignant) अर्बुद में विभेद कीजिए। 'मेटास्टेसिस' को कैंसर का सबसे घातक गुण क्यों कहा जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. कैंसर की परिभाषा: कोशिकाओं के संस्पर्श संदमन (Contact inhibition) के गुण के नष्ट हो जाने से होने वाले अत्यधिक, अनियंत्रित तथा असामान्य समसूत्री विभाजन से बनने वाले कोशिकाओं के पिंड को कैंसर कहते हैं।
  2. सुदम बनाम दुर्दम अर्बुद:
    लक्षणसुदम अर्बुद (Benign Tumor)दुर्दम अर्बुद (Malignant Tumor)
    सीमाअपने मूल अंग तक ही सीमित रहता है।आसपास के सामान्य ऊतकों में घुसपैठ कर उन्हें नष्ट करता है।
    वृद्धि दरधीमी गति से बढ़ता है।अत्यधिक तीव्र गति से अनियंत्रित बढ़ता है।
    मेटास्टेसिसअनुपस्थित होता है।उपस्थित होता है।
    घातकताकम नुकसानदेह (अहानिकर)।अत्यंत घातक एवं जानलेवा (वास्तविक कैंसर)।
  3. मेटास्टेसिस (Metastasis): जब दुर्दम अर्बुद से कैंसर कोशिकाएं टूटकर रक्त या लसिका प्रवाह में प्रवेश करती हैं और शरीर के दूरस्थ अंगों (यकृत, फेफड़े, मस्तिष्क आदि) में जाकर नए ट्यूमर स्थापित करती हैं, तो इस प्रसार को मेटास्टेसिस कहते हैं। यह कैंसर के पूरे शरीर में फैलने और लाइलाज होने का मुख्य कारण है, इसलिए इसे सबसे घातक गुण माना जाता है।
अंक योजना (Marking Scheme): कैंसर व संस्पर्श संदमन की परिभाषा (1 अंक) + सुदम व दुर्दम में तुलना (1.5 अंक) + मेटास्टेसिस की स्पष्ट व्याख्या (1.5 अंक) = कुल 4 अंक।
उदाहरण 5
ओपिऑइड्स, कैनाबिनॉइड्स तथा कोका एल्कलॉइड्स के स्रोत पौधे, क्रियाविधि तथा शारीरिक प्रभावों की तुलना कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

औषधि वर्गपादप स्रोतक्रियाविधि (ग्राही)शारीरिक/मानसिक प्रभाव
ओपिऑइड्स (हेरोइन / मॉर्फिन)Papaver somniferum (अफीम पोस्त) के लेटेक्स से।CNS एवं आंत्र मार्ग के ओपिऑइड ग्राहियों से जुड़ते हैं।अवसादक (Depressant), शारीरिक कार्यों को धीमा करना, दर्द निवारक।
कैनाबिनॉइड्स (भांग / चरस)Cannabis sativa (भांग का पौधा) के पुष्पक्रम से।मस्तिष्क के कैनाबिनॉइड ग्राहियों से जुड़ते हैं।हृदय-वाहिका तंत्र (Cardiovascular) पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव।
कोका एल्कलॉइड (कोकीन)Erythroxylum coca की पत्तियों से।डोपामाइन के पुनर्गहण को रोकता है।तीव्र CNS उद्दीपक, मतिभ्रम (Hallucination), उत्तेजना व सुखद अहसास।
अंक योजना (Marking Scheme): प्रत्येक वर्ग के पादप स्रोत, ग्राही स्थल तथा शारीरिक प्रभाव की सही तुलना पर (1 × 3 = 3 अंक)।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि सामान्य जुकाम फेफड़ों को संक्रमित करता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सामान्य जुकाम (राइनोवायरस) केवल नाक और ऊपरी श्वसन मार्ग को प्रभावित करता है, फेफड़ों को नहीं; जबकि न्यूमोनिया फेफड़ों की कूपिकाओं को संक्रमित करता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मलेरिया परजीवी के आमाशय चक्र और मानव चक्र में भ्रम होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अलैंगिक जनन (यकृत व RBCs में) मानव में होता है; जबकि लैंगिक जनन एवं निषेचन मादा एनाफलीज मच्छर के आमाशय में संपन्न होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

अंग प्रत्यारोपण अस्वीकृति में B-कोशिकाओं को जिम्मेदार मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अंग प्रत्यारोपण (Graft rejection) के लिए T-कोशिकाओं द्वारा संचालित 'कोशिका-माध्यमित प्रतिरक्षा' (CMI) जिम्मेदार होती है, B-कोशिकाएं नहीं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

कोलोस्ट्रम में पाए जाने वाले एंटीबॉडी को IgG लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

कोलोस्ट्रम (मां के पहले दूध) में मुख्य रूप से स्रावी IgA एंटीबॉडी पाई जाती है, जबकि केवल IgG ही अपरा (Placenta) को पार कर सकती है।

मानव स्वास्थ्य, प्रतिरक्षा एवं रोग चक्र का वैज्ञानिक मानचित्र (Immunology & Disease Architecture)

मानव स्वास्थ्य तथा रोग (Human Health and Disease)प्रतिरक्षा प्रणाली • मलेरिया जीवन चक्र • एड्स (HIV) • कैंसर एवं मेटास्टेसिस1. प्रतिरक्षा प्रणालीसहज प्रतिरक्षा (4 अवरोध):• शारीरिक: त्वचा, श्लेष्मा• कायिकीय: HCl, लाइसोजाइम• कोशिकीय: PMNL, मैक्रोफेज• साइटोकाइन: इंटरफेरॉनउपार्जित प्रतिरक्षा:• तरल (B-कोशिकाएं, H₂L₂)• CMI (T-कोशिकाएं, ग्राफ्ट अस्वीकृति)• कोलोस्ट्रम: IgA (निष्क्रिय)MALT = 50% लसिकाभ ऊतकएलर्जी: IgE + हिस्टामिन2. मलेरिया जीवन चक्रमानव में अलैंगिक चक्र:• स्पोरोज़ोआइट प्रवेश (लार से)• यकृत कोशिकाओं में बहुविभाजन• RBCs पर आक्रमण व विखंडन• हीमोज़ोइन स्राव (कंपकंपी बुखार)मच्छर में लैंगिक चक्र:• RBCs में युग्मकजनक निर्माण• आमाशय में निषेचन व परिवर्धन• स्पोरोज़ोआइट लार ग्रंथि मेंP. falciparum: सबसे घातकवाहक: मादा एनाफलीज3. एड्स (HIV चक्र)पश्चविषाणु (Retrovirus):• एकल रज्जुक आरएनए जीनोम• रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेस एंजाइमसंक्रमण क्रियाविधि:• मैक्रोफेज = HIV कारखाना• सहायक T-कोशिकाओं (TH) का ह्रास• CD4+ काउंट < 200/mm³• अवसरवादी संक्रमण (Toxoplasma)जांच व परीक्षण:• ELISA टेस्ट (प्राथमिक)• वेस्टर्न ब्लॉट (पुष्टिकरण)4. कैंसर व नशीले द्रव्यकैंसर की विशेषताएं:• संस्पर्श संदमन का नुकसान• दुर्दम अर्बुद (Malignant)• मेटास्टेसिस (घातक प्रसार)• उपचार: α-इंटरफेरॉनमादक द्रव्य (Drugs):• हेरोइन: डायएसिटिलमॉर्फिन (Papaver somniferum)• कैनाबिनॉइड्स: हृदय प्रणाली• कोकीन: डोपामाइन हस्तक्षेप• सिरोसिस: यकृत का क्षय

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
स्वास्थ्य शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की पूर्ण अवस्था है; टाइफाइड (S. typhi) की पुष्टि विडाल टेस्ट द्वारा होती है।
मुख्य बिंदु 2
न्यूमोनिया में कूपिकाओं में तरल भर जाता है, जबकि सामान्य जुकाम केवल नासा पथ को प्रभावित करता है, फेफड़ों को नहीं।
मुख्य बिंदु 3
मलेरिया परजीवी (Plasmodium) का अलैंगिक जनन मानव (यकृत व RBCs) में तथा लैंगिक जनन मादा एनाफलीज मच्छर में होता है; हीमोज़ोइन आवर्ती ठंड-बुखार लाता है।
मुख्य बिंदु 4
सहज प्रतिरक्षा में 4 अवरोध होते हैं: शारीरिक (त्वचा), कायिकीय (HCl, लाइसोजाइम), कोशिकीय (PMNL) तथा साइटोकाइन (इंटरफेरॉन)।
मुख्य बिंदु 5
उपार्जित प्रतिरक्षा में B-कोशिकाएं एंटीबॉडीज (H₂L₂) बनाती हैं तथा T-कोशिकाएं कोशिका-माध्यमित प्रतिरक्षा (अंग प्रत्यारोपण अस्वीकृति) देती हैं।
मुख्य बिंदु 6
कोलोस्ट्रम में IgA एंटीबॉडी होती है (प्राकृतिक निष्क्रिय प्रतिरक्षा); एलर्जी में IgE एंटीबॉडी तथा मास्ट कोशिकाओं से हिस्टामिन निकलता है।
मुख्य बिंदु 7
प्राथमिक लसिकाभ अंग अस्थि मज्जा और थाइमस हैं; MALT कुल लसिकाभ ऊतक का 50% भाग बनाता है।
मुख्य बिंदु 8
एड्स (HIV) एक रेट्रोवायरस है जो मैक्रोफेज को कारखाना बनाकर सहायक T-कोशिकाओं (TH) को नष्ट करता है; परीक्षण ELISA है।
मुख्य बिंदु 9
कैंसर कोशिकाओं में संस्पर्श संदमन समाप्त हो जाता है; दुर्दम अर्बुद का शरीर में फैलना मेटास्टेसिस कहलाता है।
मुख्य बिंदु 10
हेरोइन (स्मैक) डायएसिटिलमॉर्फिन है जो अवसादक है; कैनाबिनॉइड्स हृदय-वाहिका तंत्र को प्रभावित करते हैं; कोकीन डोपामाइन को बाधित करता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
मलेरिया रोग में प्रत्येक 3 से 4 दिन में होने वाली तीव्र कंपकंपी और तेज बुखार के लिए कौन सा विषाक्त पदार्थ उत्तरदायी है?
(A) इंटरफेरॉन
(B) हीमोज़ोइन (Haemozoin)
(C) हिस्टामिन
(D) सिरोटोनिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
RBCs के फटने पर हीमोग्लोबिन के विखंडन से निकलने वाला विषाक्त पदार्थ 'हीमोज़ोइन' कंपकंपी और आवर्ती बुखार उत्पन्न करता है।
2
मानव शरीर में अंग प्रत्यारोपण (Graft rejection) को अस्वीकार करने के लिए कौन सी प्रतिरक्षा मुख्य रूप से उत्तरदायी है?
(A) तरल प्रतिरक्षा (Humoral immunity)
(B) कोशिका-माध्यमित प्रतिरक्षा (Cell-mediated immunity)
(C) सहज प्रतिरक्षा
(D) शारीरिक अवरोध
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
T-लसिकाणुओं द्वारा संचालित कोशिका-माध्यमित प्रतिरक्षा (CMI) 'स्व' और 'पर' में भेद करके प्रत्यारोपित ग्राफ्ट को अस्वीकार करती है।
3
प्रसव के प्रारंभिक दिनों में माता के स्तनों से स्रावित पीले गाढ़े दूध (कोलोस्ट्रम) में कौन सा प्रतिरक्षी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है?
(A) IgG
(B) IgA
(C) IgM
(D) IgE
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
कोलोस्ट्रम में स्रावी IgA एंटीबॉडी प्रचुर मात्रा में होती है जो नवजात शिशु को निष्क्रिय प्रतिरक्षा प्रदान करती है।
4
कैंसर का सबसे भयावह एवं घातक गुण कौन सा है जिससे दुर्दम अर्बुद शरीर के विभिन्न अंगों में फैल जाता है?
(A) संस्पर्श संदमन (Contact inhibition)
(B) मेटास्टेसिस (Metastasis)
(C) बायोप्सी
(D) असंक्रामकता
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
कैंसर कोशिकाओं का रक्त प्रवाह द्वारा दूसरे अंगों में पहुंचकर नए ट्यूमर बनाना मेटास्टेसिस कहलाता है।
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