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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा XII • Biology • अध्याय 11
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

जीव और समष्टियां (Organisms and Populations)

पारिस्थितिकी (Ecology) जीवविज्ञान की वह व्यापक शाखा है जो सजीव जीवों के परस्पर अंतर्संबंधों तथा उनके भौतिक एवं जैविक पर्यावरण के मध्य होने वाली जटिल अंतःक्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन करती है। पारिस्थितिकीय संगठन के चार प्रमुख स्तर होते हैं: जीव (Organism) $\rightarrow$ समष्टि (Population) $\rightarrow$ समुदाय (Community) $\rightarrow$ बायोम (Biome)। प्रस्तुत अध्याय व्यष्टि जीव के अजैविक पर्यावरण के प्रति अनुकूलनों तथा समष्टि स्तर की गतिशीलता व अंतःक्रियाओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है: 1. जीव और उसका पर्यावरण: प्रमुख अजैविक कारक (तापमान, जल, प्रकाश एवं मृदा), तथा अजैविक कारकों के प्रति जीवों की 4 अनुक्रियाएं—नियमन (Regulate / समस्थापन), संरूपण (Conform), प्रवास (Migrate—केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, भरतपुर), तथा निलंबन (Suspend—शीतनिष्क्रियता, ग्रीष्मनिष्क्रियता एवं उपरति / Diapause)। 2. अनुकूलन (Adaptations): मरुस्थलीय जंतुओं में जल संरक्षण (उत्तरी अमेरिका का कंगारू चूहा), एलन का नियम (Allen's Rule - ठंडी जलवायु के स्तनधारियों के छोटे कान व पाद), सील में ब्लबर (वसा की मोटी परत), उच्च तुंगता बीमारी (Altitude Sickness - $3500$ मी. पर अनुकूलन), तथा मरुद्भिद पादपों में CAM प्रकाश-संश्लेषण चक्र एवं नागफनी (Opuntia) में कांटों में रूपांतरण। 3. समष्टि गुण एवं समष्टि वृद्धि (Population Growth): जन्म दर, मृत्यु दर, लिंग अनुपात, आयु पिरामिड (विस्तारित, स्थिर, घटती समष्टि), तथा वृद्धि के दो गणितीय मॉडल—चरघातांकी वृद्धि (Exponential Growth: $dN/dt = rN$) एवं लॉजिस्टिक्स वृद्धि (Logistic Growth: $dN/dt = rN[(K-N)/K]$ / वर्हुल्स्ट-पर्ल लॉजिस्टिक वक्र एवं वहन क्षमता $K$)। 4. समष्टि अंतःक्रियाएं (Population Interactions): सहोपकारिता ($+/+$: लाइकेन, माइकोराइजा, अंजीर व बर्र, आर्किड Ophrys का लैंगिक कपट), स्पर्धा ($-/-$: गॉस का स्पर्धी अपवर्जन नियम एवं मैकआर्थर का संसाधन विभाजन), परभक्षण ($+/-$: शिकार नियंत्रण एवं मोनार्क तितली का रासायनिक विष), परजीविता ($+/-$: बाह्य व अंतःपरजीवी तथा कोयल का अंड परजीविता / Brood Parasitism), सहभोजिता ($+/0$: आम की शाखा पर आर्किड, बगुला व मवेशी, समुद्री एनीमोन व क्लाउन मछली), तथा असहभोजिता ($-/0$: Penicillium व जीवाणु)।

बिना एक बूंद पानी पिए पूरी जिंदगी बिताने वाला चूहा और फूलों का वो चालाक छलावा जिसने नर मधुमक्खी को बना दिया मूर्ख!

क्या आप सोच सकते हैं कि कोई स्तनधारी जीव अपने पूरे जीवनकाल में कभी पानी की एक बूंद भी पिए बिना जिंदा रह सकता है? उत्तरी अमेरिका के तपते रेगिस्तान में रहने वाला कंगारू चूहा अपनी आंतरिक वसा के ऑक्सीकरण से शरीर में ही पानी बना लेता है और अपने मूत्र को इतना गाढ़ा कर लेता है कि जल का एक भी कतरा व्यर्थ न बहे! और भूमध्यसागरीय आर्किड फूल Ophrys की चालाकी तो देखिए—उसकी पंखुड़ी का आकार, रंग और गंध मादा मधुमक्खी के हूबहू समान होती है! नर मधुमक्खी उसे सचमुच की मादा समझकर उसके साथ 'छद्म-मैथुन' (Pseudocopulation) करता है, और इस धोखे में फूल के परागकण चिपकाकर दूसरे फूल का परागण कर देता है!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

JAC बोर्ड, CBSE तथा NEET-UG में पारिस्थितिकी इकाई (12 से 14 अंक) का यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण अध्याय है: 1. 5-अंकीय सचित्र दीर्घ उत्तरीय प्रश्न: समष्टि वृद्धि के दोनों मॉडल (चरघातांकी बनाम लॉजिस्टिक्स वृद्धि वक्र) के गणितीय समीकरण व आरेख, अथवा समष्टि अंतःक्रियाओं के विभिन्न प्रकार (सहोपकारिता, परजीविता, स्पर्धा) का विस्तृत विवरण। 2. 3-अंकीय अवधारणात्मक प्रश्न: एलन का नियम, उच्च तुंगता बीमारी के अनुकूलन, अथवा गॉस का स्पर्धी अपवर्जन नियम। 3. NEET-UG के अनिवार्य प्रश्न: लॉजिस्टिक्स समीकरण का अवकलन रूप, वहन क्षमता ($K$), ब्रूड परजीविता, तथा सहोपकारिता में अंजीर व बर्र का संबंध एवं Ophrys आर्किड का लैंगिक कपट।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पारिस्थितिक तंत्र, खाद्य शृंखला एवं खाद्य जाल की बुनियादी अवधारणा।
  • प्राकृतिक वरण द्वारा अनुकूलन के सिद्धांत।
  • साधारण अवकल समीकरण एवं प्रतिशत अनुपात की समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • अजैविक कारकों (ताप, जल, प्रकाश) के प्रति नियमन, संरूपण, प्रवास व निलंबन की कार्यप्रणाली को स्पष्ट करना।
  • कंगारू चूहे, सील तथा मरुद्भिदों में जल एवं ताप अनुकूलनों के शारीरिक व आकारिकीय आधारों का विश्लेषण करना।
  • चरघातांकी ($dN/dt = rN$) एवं लॉजिस्टिक्स वृद्धि ($dN/dt = rN[(K-N)/K]$) के वक्रों की तुलना करना।
  • सहोपकारिता, सहभोजिता, परजीविता, परभक्षण एवं स्पर्धा के अंतःक्रियात्मक चिह्नों ($+, -, 0$) सहित उदाहरण प्रस्तुत करना।
  • गॉस के स्पर्धी अपवर्जन नियम तथा मैकआर्थर के संसाधन विभाजन (Resource Partitioning) में विभेद करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. अजैविक कारक एवं उनके प्रति जीवों...
2 2. पादपों एवं जंतुओं में अनुकूलन (A...
3 3. समष्टि गुण एवं वृद्धि मॉडल (Expo...
4 4. समष्टि अंतःक्रियाएं (Population...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. अजैविक कारक एवं उनके प्रति जीवों की अनुक्रियाएं

पारिस्थितिकी के अध्ययन में पर्यावरण के अजैविक (भौतिक-रासायनिक) कारक जीवों के वितरण और जीवन को निर्धारित करते हैं:

प्रमुख अजैविक कारक:

  • 1. तापमान (Temperature): सर्वाधिक पारिस्थितिकीय रूप से प्रासंगिक कारक। ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर तथा मैदानों से पर्वतों की ओर तापमान बदलता है।
    • पृथुतापापी (Eurythermal): वे जीव जो तापमान के व्यापक परास (Wide range) को सहन कर सकते हैं (उदा. अधिकांश स्तनधारी व पक्षी)।
    • तनुतापापी (Stenothermal): वे जीव जो तापमान के केवल संकीर्ण परास (Narrow range) तक ही सीमित रहते हैं (उदा. ध्रुवीय भालू, प्रवाल, मेंढक)।
  • 2. जल (Water): जीवन जल में ही प्रारंभ हुआ। जलीय जीवों हेतु जल की रासायनिक संरचना और लवणता (Salinity - भागों प्रति हजार ppt में) महत्वपूर्ण है: अंतःस्थलीय जल ($< 5$ ppt), समुद्र ($30-35$ ppt), अतिलवणीय लैगून ($> 100$ ppt)।
    • पृथुलवणी (Euryhaline) लवणता के व्यापक परास को तथा तनुलवणी (Stenohaline) संकीर्ण परास को सहन कर सकते हैं।
  • 3. प्रकाश (Light): प्रकाश-संश्लेषण, दीप्तिकालिता (पुष्पन हेतु) तथा जंतुओं की दैनिक व मौसमी गतिविधियों (चारा खोजने, प्रवास, प्रजनन) का नियमन करता है।
  • 4. मृदा (Soil): मृदा की प्रकृति, कणों का माप, जल धारण क्षमता (Water holding capacity) तथा खनिज संघटन वहां उगने वाली वनस्पति को निर्धारित करते हैं।

अजैविक कारकों के प्रति जीवों की 4 अनुक्रियाएं:

  1. नियमन करना (Regulate): कुछ जीव कायिकीय एवं व्यावहारिक साधनों द्वारा शरीर का आंतरिक पर्यावरण स्थिर (स्थिर ताप $37^\circ\text{C}$ व परासरणी सांद्रता) बनाए रखते हैं जिसे समस्थापन (Homeostasis) कहते हैं। सभी पक्षी, स्तनधारी तथा कुछ निम्न अकशेरुकी समतापी (Endotherms) होते हैं। मनुष्य गर्मियों में पसीना बहाकर तथा सर्दियों में कंपकंपी (कांपने) द्वारा $37^\circ\text{C}$ ताप बनाए रखता है।
  2. संरूपण रखना (Conform): लगभग 99% जंतु तथा लगभग सभी पौधे अपने आंतरिक पर्यावरण को स्थिर नहीं रख सकते। इनका शारीरिक तापमान परिवेशी ताप के अनुसार बदलता रहता है (असमतापी / Ectotherms)। उष्मा हानि या उष्मा लाभ पृष्ठीय क्षेत्रफल का कार्य है; छोटे जंतुओं (जैसे छछूंदर, गुंजन पक्षी) का पृष्ठीय क्षेत्रफल आयतन की तुलना में बहुत अधिक होता है, अतः ध्रुवीय क्षेत्रों में छोटे जंतु बहुत कम पाए जाते हैं।
  3. प्रवास करना (Migrate): जीव तनावपूर्ण प्रतिकूल आवास से अस्थायी रूप से अनुकूल क्षेत्र में चले जाते हैं और प्रतिकूल काल बीतने पर वापस लौट आते हैं। उदाहरण: प्रत्येक शीतकाल में राजस्थान का प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर) साइबेरिया तथा अत्यधिक ठंडे उत्तरी क्षेत्रों से आने वाले हजारों प्रवासी पक्षियों की मेजबानी करता है।
  4. निलंबित करना (Suspend): प्रतिकूल परिस्थितियों में जीव अपनी उपापचयी क्रियाओं को न्यूनतम कर विकास रोक देते हैं:
    • जीवाणु, कवक व निम्न पादप मोटी भित्ति वाले बीजाणु बनाते हैं।
    • उच्च पादपों के बीज सुप्तावस्था (Dormancy) में चले जाते हैं।
    • शीतनिष्क्रियता (Hibernation): सर्दियों में भालू का शीत निद्रा में चले जाना।
    • ग्रीष्मनिष्क्रियता (Aestivation): गर्मी और जल की कमी से बचने हेतु घोंघे (Snails) और मछलियों का ग्रीष्म निद्रा में जाना।
    • उपरति (Diapause): झीलों व तालाबों में प्राणिप्लवक (Zooplankton) जातियों का प्रतिकूल परिस्थितियों में अपने परिवर्धन को अस्थायी रूप से निलंबित कर देना।

2. पादपों एवं जंतुओं में अनुकूलन (Adaptations)

अनुकूलन जीव का कोई भी आकारिकीय, कायिकीय अथवा व्यावहारिक गुण है जो उसे अपने आवास में जीवित रहने और जनन करने के योग्य बनाता है:

A. जंतुओं में अनुकूलन:

  • कंगारू चूहा (Kangaroo Rat): उत्तरी अमेरिका के मरुस्थल में यह कभी जल नहीं पीता। यह अपनी जल की $90\%$ मांग की पूर्ति आंतरिक वसा के ऑक्सीकरण (जिसमें जल सह-उत्पाद होता है) से करता है। यह अपने मूत्र को अत्यधिक सांद्रित (Concentrated) करने की क्षमता रखता है, जिससे जल का न्यूनतम उत्सर्जन होता है।
  • एलन का नियम (Allen's Rule): ठंडी जलवायु में रहने वाले स्तनधारियों के कान और पाद (Ears and Limbs) आमतौर पर छोटे होते हैं, ताकि शरीर की उष्मा की हानि को न्यूनतम किया जा सके।
  • सील (Seal) एवं ध्रुवीय भालू: ध्रुवीय समुद्रों में जलीय स्तनधारियों जैसे सील की त्वचा के ठीक नीचे वसा की एक मोटी परत होती है जिसे ब्लबर (Blubber) कहते हैं, जो ऊष्मारोधी (Insulator) का कार्य करती है।
  • उच्च तुंगता बीमारी (Altitude Sickness): जब कोई व्यक्ति $3500$ मीटर से अधिक ऊंचाई (उदा. रोहतांग दर्रा, लेह) पर जाता है, तो निम्न वायुमंडलीय दाब के कारण शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इससे मितली, थकान और हृदय की धड़कन बढ़ना जैसे लक्षण होते हैं।
    शरीर का कायिकीय अनुकूलन:
    1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) का उत्पादन बढ़ा देना।
    2. हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन से जुड़ने की बंधुता को घटा देना।
    3. श्वसन दर (Breathing rate) को तेज कर देना।
  • रेगिस्तानी छिपकली (व्यावहारिक अनुकूलन): जब तापमान कम होता है तो धूप सेककर (Basking) उष्मा अवशोषित करती है, और जब तापमान अधिक होता है तो छाया में या बिलों में चली जाती है।

B. मरुद्भिद पादपों में अनुकूलन (Desert Plant Adaptations):

  • पत्तियों की सतह पर मोटी उपत्वचा (Thick cuticle) तथा रंध्र गहरे गर्तों में धंसे (Sunken stomata) होते हैं ताकि वाष्पोत्सर्जन न्यूनतम हो।
  • विशेष प्रकाश-संश्लेषी मार्ग CAM (क्रैस्यूलेसियन एसिड मेटाबॉलिज्म) पाया जाता है, जिसके कारण इनके रंध्र दिन में बंद रहते हैं और केवल रात में खुलते हैं।
  • नागफनी (Opuntia) जैसे मरुस्थलीय पौधों में पत्तियां कांटों (Spines) में रूपांतरित हो जाती हैं और चपटा, हरा तना प्रकाश-संश्लेषण का कार्य करता है (पर्णकाय स्तंभ / Phylloclade)।

3. समष्टि गुण एवं वृद्धि मॉडल (Exponential vs Logistic Growth)

समष्टि (Population): किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में एक ही समय में रहने वाले, समान संसाधनों का उपयोग करने वाले तथा अंतःप्रजनन करने वाले जीवों का समूह समष्टि कहलाता है।

समष्टि के प्रमुख लक्षण:

  • जन्म दर (Natality): प्रति इकाई समय में समष्टि में जन्म लेने वाले जीवों की संख्या।
  • मृत्यु दर (Mortality): प्रति इकाई समय में मरने वाले जीवों की संख्या। (व्यष्टि का जन्म या मृत्यु होती है, किंतु समष्टि की जन्म दर या मृत्यु दर होती है)।
  • लिंग अनुपात (Sex Ratio): समष्टि में प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं का अनुपात।
  • आयु पिरामिड (Age Pyramids): पूर्व-प्रजनन, प्रजननक्षम तथा पश्च-प्रजनन आयु वर्गों का आरेखीय निरूपण। विस्तारित समष्टि (त्रिकोणीय), स्थिर समष्टि (घंटीनुमा), तथा घटती समष्टि (कलशनुमा)।

समष्टि घनत्व को प्रभावित करने वाले 4 कारक:

समय $t+1$ पर समष्टि घनत्व: $$N_{t+1} = N_t + [(B + I) - (D + E)]$$

  • $B$ = जन्म संख्या (Natality) [+]
  • $I$ = आप्रवासन (Immigration) [+]
  • $D$ = मृत्यु संख्या (Mortality) [-]
  • $E$ = उत्प्रवासन (Emigration) [-]

समष्टि वृद्धि के दो गणितीय मॉडल:

1. चरघातांकी वृद्धि (Exponential / Geometric Growth):

जब आवास में संसाधन (भोजन और स्थान) असीमित (Unlimited) होते हैं, तो प्रत्येक जाति अपनी अंतर्निहित प्रजनन क्षमता का पूर्ण उपयोग करती है। समष्टि की वृद्धि चरघातांकी रूप से होती है।
अवकल समीकरण: $$\frac{dN}{dt} = rN$$
समाकलित रूप: $$N_t = N_0 e^{rt}$$ (जहाँ $N$ = समष्टि घनत्व, $r$ = प्राकृतिक वृद्धि की अंतर्निहित दर / Intrinsic rate of natural increase, $t$ = समय)। वक्र का आकार: J-आकार का वक्र (J-shaped curve) प्राप्त होता है। प्रकृति में असीमित संसाधन संभव नहीं हैं, अतः यह दीर्घकाल तक नहीं चल सकता।

2. लॉजिस्टिक्स वृद्धि (Logistic Growth / Verhulst-Pearl Logistic Growth):

प्रकृति में संसाधन सदैव सीमित (Limited) होते हैं। किसी आवास में अधिकतम संभव संख्या के जीवों के भरण-पोषण हेतु ही संसाधन होते हैं, जिसे उस आवास की वहन क्षमता (Carrying Capacity - $K$) कहते हैं। वहन क्षमता से अधिक जीवों का जीवन संभव नहीं है।
अवकल समीकरण: $$\frac{dN}{dt} = rN \left( \frac{K - N}{K} \right)$$ जहाँ $\frac{K-N}{K}$ पर्यावरण प्रतिरोध (Environmental resistance) को दर्शाता है।
वक्र का आकार: सिग्मॉइड या S-आकार का वक्र (Sigmoid curve) प्राप्त होता है। इसके चरण हैं: लैग फेज (मन्द वृद्धि काल) $\rightarrow$ त्वरण एवं मन्दन $\rightarrow$ अनंतस्पर्शी (Asymptote, जब $N = K$ हो जाता है)। चूंकि संसाधन कभी असीमित नहीं होते, अतः लॉजिस्टिक्स वृद्धि मॉडल प्रकृति में चरघातांकी मॉडल की तुलना में कहीं अधिक यथार्थवादी (Realistic) माना जाता है।

4. समष्टि अंतःक्रियाएं (Population Interactions)

प्राकृतिक समुदाय में कोई भी जाति पूर्णतः अलग-थलग नहीं रह सकती। विभिन्न जातियों के बीच पारस्परिक अंतःक्रियाएं निम्नलिखित 6 प्रकार की होती हैं:

अंतःक्रिया का नामजाति Aजाति Bसंक्षिप्त विवरण एवं उत्कृष्ट उदाहरण
1. सहोपकारिता (Mutualism)$+$ (लाभ)$+$ (लाभ)दोनों जातियों को परस्पर अनिवार्य लाभ होता है।
• लाइकेन: शैवाल (भोजन) व कवक (जल/खनिज/सुरक्षा)।
• कवकमूल (Mycorrhiza): कवक (फॉस्फोरस) व पादप जड़ (शर्करा)।
• अंजीर व बर्र (Fig & Wasp): अंजीर का पुष्पक्रम केवल विशिष्ट बर्र द्वारा ही परागित होता है, बदले में बर्र पुष्पक्रम में अंडे देती है और लार्वा अंजीर के बीजों को खाते हैं।
• लैंगिक कपट (Sexual Deceit): भूमध्यसागरीय आर्किड Ophrys की पंखुड़ी मादा मधुमक्खी जैसी दिखती है और गंध देती है; नर मधुमक्खी छद्म-मैथुन (Pseudocopulation) कर परागण संपन्न करता है।
2. स्पर्धा (Competition)$-$ (हानि)$-$ (हानि)सीमित संसाधनों हेतु होने वाला संघर्ष।
• गॉस का स्पर्धी अपवर्जन नियम: एक ही सीमित संसाधन हेतु प्रतिस्पर्धा करने वाली दो निकट संबंधी जातियां अनंत काल तक साथ नहीं रह सकतीं; दुर्बल जाति अंततः विलुप्त हो जाती है। (उदा. गैलापागोस द्वीप पर बकरियां लाने से भोजन की स्पर्धा में एबिंगडन कछुआ 10 वर्ष में विलुप्त हो गया)।
• मैकआर्थर का संसाधन विभाजन (Resource Partitioning): यदि दो जातियां एक ही संसाधन हेतु प्रतिस्पर्धा करती हैं, तो वे भोजन तलाशने के समय अथवा आवास के भिन्न क्षेत्रों को बांटकर शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व (Co-existence) कर सकती हैं (उदा. एक ही वृक्ष पर 5 जातियों की फुदकी / Warbler चिड़ियों का सह-अस्तित्व)।
3. परभक्षण (Predation)$+$ (लाभ)$-$ (हानि)एक जीव (परभक्षी) दूसरे जीव (शिकार) को मारकर खाता है।
• कार्य: यह ऊर्जा स्थानांतरण का माध्यम है तथा शिकार समष्टि को नियंत्रित रखता है।
• रक्षा तंत्र: मोनार्क तितली अपने शरीर में एक अत्यंत अप्रिय स्वाद वाला विषैला रसायन (हृदय ग्लाइकोसाइड) संचित रखती है (जो कैटरपिलर अवस्था में विषैली खरपतवार खाकर अर्जित करती है), अतः पक्षी इसे नहीं खाते।
• पौधों में कांटे (Acacia, कैक्टस) तथा रासायनिक विष (कैलोट्रोपिस में कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स, निकोटीन, कैफीन, अफीम) शाकाहारियों से सुरक्षा हेतु होते हैं।
4. परजीविता (Parasitism)$+$ (लाभ)$-$ (हानि)परजीवी अपने पोषी से भोजन व आश्रय प्राप्त करता है तथा उसे कमजोर करता है।
• बाह्यपरजीवी: जूं, खटमल, कुत्तों पर चिंचड़ी (Ticks), अमरबेल (Cuscuta)।
• अंतःपरजीवी: यकृत कृमि (Liver fluke - 2 मध्यस्थ पोषी: घोंघा व मछली), प्लाज्मोडियम।
• अंड परजीविता (Brood Parasitism): कोयल (Cuckoo) अपने अंडे कौवे के घोंसले में देती है। कोयल के अंडे आकार और रंग में कौवे के अंडों से इतने मिलते हैं कि कौवा उन्हें पहचान नहीं पाता और सेता है।
5. सहभोजिता (Commensalism)$+$ (लाभ)$0$ (उदासीन)एक जाति को लाभ होता है, जबकि दूसरी को न लाभ न हानि।
• आम की शाखा पर अधिपादप (Epiphyte) के रूप में उगने वाला आर्किड।
• व्हेल की पीठ पर चिपके बार्नेकल।
• चरने वाले मवेशियों के साथ घूमने वाले बगुले (Cattle Egret) — घास हिलने से निकले कीड़ों को खाते हैं।
• दंशक स्पर्शकों वाले समुद्री एनीमोन के बीच रहने वाली क्लाउन मछली।
6. असहभोजिता (Amensalism)$-$ (हानि)$0$ (उदासीन)एक जाति को हानि होती है, जबकि दूसरी पूर्णतः अप्रभावित रहती है।
• Penicillium कवक पेनिसिलिन स्रावित कर जीवाणुओं को नष्ट करता है किंतु कवक को कोई लाभ-हानि नहीं होती।

महत्वपूर्ण जैविक संकल्पनाएँ, प्रक्रियाएँ एवं आरेख

समष्टि घनत्व परिवर्तन सूत्र
N(t+1) = Nt + [(B + I) - (D + E)]
B = जन्म संख्या, I = आप्रवासन, D = मृत्यु संख्या, E = उत्प्रवासन
चरघातांकी वृद्धि समीकरण (Exponential Growth)
dN/dt = rN | समाकलित रूप: Nt = N₀ · eʳᵗ
वक्र: J-आकार | असीमित संसाधनों में | r = अंतर्निहित वृद्धि दर
लॉजिस्टिक्स वृद्धि समीकरण (Verhulst-Pearl Logistic)
dN/dt = rN · [(K - N) / K]
वक्र: S-आकार (सिग्मॉइड) | सीमित संसाधनों में | K = वहन क्षमता
समष्टि अंतःक्रिया सांकेतिक निरूपण
सहोपकारिता (+/+), स्पर्धा (-/-), परभक्षण (+/-), परजीविता (+/-), सहभोजिता (+/0), असहभोजिता (-/0)
गॉस का नियम (-/- स्पर्धा), अंड परजीविता (कोयल-कौवा)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
लॉजिस्टिक्स समष्टि वृद्धि (Logistic Growth) क्या है? इसके अवकल समीकरण की व्युत्पत्ति कीजिए तथा समझाइए कि प्रकृति में यह चरघातांकी वृद्धि मॉडल की तुलना में अधिक यथार्थवादी क्यों है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. लॉजिस्टिक्स वृद्धि की अवधारणा: प्रकृति में किसी भी समष्टि के लिए संसाधन (भोजन और स्थान) असीमित नहीं होते। प्रत्येक आवास में सीमित संसाधन होते हैं जो केवल एक अधिकतम सीमा तक ही जीवों का भरण-पोषण कर सकते हैं। इस अधिकतम सीमा को उस आवास की वहन क्षमता (Carrying capacity - $K$) कहते हैं।
  2. गणितीय समीकरण:
    वर्हुल्स्ट-पर्ल लॉजिस्टिक वृद्धि का अवकल समीकरण:
    $$\frac{dN}{dt} = rN \left( \frac{K - N}{K} \right)$$
    जहाँ:
    • $N$ = समय $t$ पर समष्टि घनत्व
    • $r$ = प्राकृतिक वृद्धि की अंतर्निहित दर
    • $K$ = पर्यावरण की वहन क्षमता
    • $\left( \frac{K - N}{K} \right)$ = पर्यावरण प्रतिरोध (Environmental resistance) का माप है।
  3. वक्र का स्वरूप: यह वक्र सिग्मॉइड (S-आकार) होता है। इसमें प्रारंभ में धीमी वृद्धि (Lag phase), फिर तीव्र त्वरण, और अंत में जब समष्टि वहन क्षमता के समीप पहुंचती है तो मन्दन होकर समष्टि स्थिर (Asymptote) हो जाती है।
  4. चरघातांकी मॉडल से श्रेष्ठता का कारण: चरघातांकी मॉडल ($dN/dt = rN$) यह मानकर चलता है कि संसाधन हमेशा असीमित रहेंगे, जो वास्तविक प्रकृति में असंभव है। प्रकृति में सीमित संसाधनों के कारण जीवों में स्पर्धा होती है और वृद्धि वहन क्षमता ($K$) पर जाकर स्वतः रुक जाती है। अतः लॉजिस्टिक्स मॉडल ही प्रकृति का वास्तविक और यथार्थवादी मॉडल है।
अंक योजना (Marking Scheme): वहन क्षमता (K) व लॉजिस्टिक वृद्धि की परिभाषा (1.5 अंक) + अवकल समीकरण व प्रतीकों का अर्थ (1.5 अंक) + सिग्मॉइड वक्र व यथार्थवादी होने का कारण (1.5 अंक) = कुल 4.5 अंक।
उदाहरण 2
एलन का नियम (Allen's rule) क्या है? ध्रुवीय क्षेत्रों में रहने वाले जलीय स्तनधारियों (जैसे सील) तथा उच्च तुंगता (Altitude) पर रहने वाले मनुष्यों में पाए जाने वाले अनुकूलनों की व्याख्या कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. एलन का नियम (Allen's Rule): इस नियम के अनुसार, ठंडी जलवायु में रहने वाले स्तनधारियों के कान और पाद (Ears and Limbs) आमतौर पर छोटे होते हैं, ताकि शरीर के पृष्ठीय क्षेत्रफल को घटाकर उष्मा की हानि (Heat loss) को न्यूनतम किया जा सके।
  2. सील (Seal) में अनुकूलन: ध्रुवीय बर्फीले समुद्रों में रहने वाली सील की त्वचा के ठीक नीचे वसा (Fat) की एक अत्यंत मोटी परत पाई जाती है जिसे ब्लबर (Blubber) कहते हैं। यह ब्लबर एक उत्कृष्ट ऊष्मारोधी (Insulator) का कार्य करती है और शरीर की आंतरिक उष्मा को बर्फीले पानी में निकलने से रोकती है।
  3. उच्च तुंगता पर मनुष्यों में अनुकूलन: 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर निम्न वायुमंडलीय दाब के कारण 'उच्च तुंगता बीमारी' (Altitude Sickness) होती है। हमारा शरीर निम्नलिखित 3 कायिकीय अनुकूलनों द्वारा इसका समाधान करता है:
    • RBCs का उत्पादन बढ़ाना: वृक्क (Kidney) द्वारा एरिथ्रोपोइटिन हार्मोन का स्राव बढ़ाकर अस्थि मज्जा में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ा दी जाती है।
    • हीमोग्लोबिन की बंधुता घटाना: जिससे ऑक्सीजन ऊतकों को आसानी से मुक्त हो सके।
    • श्वसन दर बढ़ाना: तेजी से सांस लेकर अधिक ऑक्सीजन फेफड़ों तक पहुंचाना।
अंक योजना (Marking Scheme): एलन के नियम का स्पष्ट कथन (1.5 अंक) + सील में ब्लबर का कार्य (1 अंक) + उच्च तुंगता पर 3 कायिकीय अनुकूलन (1.5 अंक) = कुल 4 अंक।
उदाहरण 3
गॉस का स्पर्धी अपवर्जन नियम (Gause's Competitive Exclusion Principle) क्या है? प्रकृति में स्पर्धा करने वाली जातियों ने सह-अस्तित्व हेतु कौन सी युक्ति विकसित की है? उदाहरण सहित समझाइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. गॉस का स्पर्धी अपवर्जन नियम: रूसी पारिस्थितिकीविद् जी. एफ. गॉस के अनुसार: 'समान सीमित संसाधनों के लिए स्पर्धा करने वाली दो निकट संबंधी जातियां अनंत काल तक एक साथ सह-अस्तित्व में नहीं रह सकतीं; अंततः स्पर्धी रूप से दुर्बल (हीन) जाति को बाहर निकाल (अपवर्जित कर) दिया जाता है।'
    • प्रमाण: गैलापागोस द्वीप समूह पर जब बकरियों को लाया गया, तो बकरियों की तीव्र चरने की क्षमता के कारण भोजन की कमी से वहां का मूल निवासी एबिंगडन कछुआ (Abingdon tortoise) एक दशक के भीतर विलुप्त हो गया।
  2. सह-अस्तित्व की युक्ति—संसाधन विभाजन (Resource Partitioning): गॉस के नियम के विपरीत, यदि प्रतिस्पर्धी जातियां भोजन खोजने के समय (विभिन्न समय पर चरना) अथवा चारा खोजने की आदतों में भिन्नता लाएं, तो वे एक ही आवास में साथ रह सकती हैं।
    • मैकआर्थर का अध्ययन (1958): वैज्ञानिक रॉबर्ट मैकआर्थर ने दिखाया कि एक ही पेड़ पर रहने वाली फुदकी चिड़ियों (Warblers) की 5 निकट संबंधी प्रजातियां पेड़ के अलग-अलग हिस्सों (शाखाओं, पत्तों, तने) पर कीड़े खोजकर स्पर्धा से बचती हैं और शांतिपूर्वक एक साथ सह-अस्तित्व बनाए रखती हैं।
अंक योजना (Marking Scheme): गॉस का नियम व कछुए का उदाहरण (2 अंक) + संसाधन विभाजन व मैकआर्थर का फुदकी चिड़ियों का प्रयोग (2 अंक) = कुल 4 अंक।
उदाहरण 4
सहोपकारिता (Mutualism) तथा सहभोजिता (Commensalism) में अंतर स्पष्ट कीजिए। आर्किड 'ऑफ्रीस' (Ophrys) में परागण हेतु पाई जाने वाली 'लैंगिक कपट' की परिघटना की विवेचना कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. सहोपकारिता बनाम सहभोजिता:
    लक्षणसहोपकारिता (Mutualism)सहभोजिता (Commensalism)
    प्रभावदोनों जातियों को परस्पर लाभ होता है ($+/+$)।एक जाति को लाभ होता है, दूसरी अप्रभावित ($+/0$) रहती है।
    अनिवार्यताप्रायः दोनों का सह-जीवन अनिवार्य होता है।अनिवार्य सह-जीवन नहीं होता।
    उदाहरणलाइकेन, माइकोराइजा, अंजीर व बर्र।आम पर आर्किड, व्हेल पर बार्नेकल, मवेशी व बगुला।
  2. ऑफ्रीस (Ophrys) आर्किड में लैंगिक कपट (Sexual Deceit): भूमध्यसागरीय आर्किड Ophrys में परागण एक विशिष्ट मधुमक्खी (Colpa aurea) द्वारा होता है। फूल की एक पंखुड़ी का आकार, रंग और उस पर बने निशान मादा मधुमक्खी के बिल्कुल समान होते हैं। नर मधुमक्खी इसे वास्तविक मादा समझकर आकर्षित होता है और फूल के साथ छद्म-मैथुन (Pseudocopulation) करता है। इस प्रक्रिया के दौरान फूल के परागकण नर मधुमक्खी के शरीर पर चिपक जाते हैं। जब वही नर मधुमक्खी किसी दूसरे फूल पर जाकर पुनः छद्म-मैथुन करता है, तो परागकण उस फूल के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरित हो जाते हैं। इस प्रकार पादप बिना मकरंद दिए अत्यंत चतुरता से अपना परागण सुनिश्चित करता है।
अंक योजना (Marking Scheme): सहोपकारिता व सहभोजिता में अंतर (1.5 अंक) + ऑफ्रीस आर्किड में लैंगिक कपट व छद्म-मैथुन की विस्तृत व्याख्या (2.5 अंक) = कुल 4 अंक।
उदाहरण 5
अंड परजीविता (Brood Parasitism) क्या है? कोयल और कौवे के संदर्भ में इस परिघटना तथा इसके विकासीय अनुकूलनों की व्याख्या कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. अंड परजीविता की परिभाषा: परजीविता का वह विशिष्ट स्वरूप जिसमें परजीवी पक्षी अपने अंडे स्वयं सेने के स्थान पर पोषी पक्षी के घोंसले में देता है और पोषी पक्षी अनजाने में उन अंडों को सेता है और बच्चों का पालन-पोषण करता है।
  2. कोयल और कौवे का उदाहरण: भारतीय कोयल (Koel) कभी अपना घोंसला नहीं बनाती। प्रजनन काल में कोयल चुपके से कौवे (Crow) के घोंसले में जाकर अपने अंडे रख आती है। कौवा कोयल के अंडों को अपने अंडे समझकर सेता है। कोयल के चूजे पहले अंडे से बाहर आ जाते हैं और प्रायः कौवे के मूल अंडों या छोटे बच्चों को घोंसले से नीचे गिरा देते हैं, जिससे कोयल के बच्चों को पोषी माता-पिता से प्रचुर भोजन मिलता है।
  3. विकासीय अनुकूलन (Co-evolution): विकास के लंबे दौर में परजीवी कोयल के अंडों का आकार, रंग और पैटर्न कौवे के अंडों के बिल्कुल समान (सदृश) विकसित हो गया है, ताकि पोषी कौवा विजातीय अंडों को पहचानकर घोंसले से बाहर न फेंक सके। यह सह-विकास (Co-evolution) का उत्कृष्ट उदाहरण है।
अंक योजना (Marking Scheme): अंड परजीविता की परिभाषा (1.5 अंक) + कोयल-कौवे का जीवन चक्र (1.5 अंक) + अंडों के रंग/आकार के सह-विकासीय अनुकूलन पर (1 अंक) = कुल 4 अंक।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

चरघातांकी वृद्धि और लॉजिस्टिक्स वृद्धि के समीकरणों को आपस में मिला देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

चरघातांकी वृद्धि: dN/dt = rN (J-आकार); लॉजिस्टिक्स वृद्धि: dN/dt = rN[(K-N)/K] (S-आकार, वहन क्षमता K सहित)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सहभोजिता (+/0) और असहभोजिता (-/0) के चिह्नों में भ्रम होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सहभोजिता = +/0 (एक को लाभ, दूसरा अप्रभावित); असहभोजिता = -/0 (एक को हानि, दूसरा अप्रभावित)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

उच्च तुंगता बीमारी में RBCs की संख्या घटने की बात लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी की भरपाई हेतु शरीर RBCs का उत्पादन बढ़ाता है (RBC count बढ़ता है, घटता नहीं)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

एलन के नियम को शरीर के आकार से जोड़ देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

एलन का नियम कान और पादों (Ears and Limbs) के छोटे होने से संबंधित है; जबकि बर्गमैन का नियम शरीर के बड़े आकार से संबंधित है।

जीव, पर्यावरण एवं समष्टि गतिशीलता का वैज्ञानिक मानचित्र (Organisms & Populations Dynamics)

जीव और समष्टियां (Organisms and Populations)अजैविक अनुक्रियाएं • मरुस्थलीय व तुंगता अनुकूलन • वृद्धि मॉडल • समष्टि अंतःक्रियाएं1. अजैविक अनुक्रियाएं4 प्रमुख अनुक्रियाएं:• नियमन (Regulate): समस्थापन (37°C स्थिर, पक्षी/स्तनधारी)• संरूपण (Conform): 99% जंतु• प्रवास (Migrate): भरतपुरनिलंबन (Suspend):• शीतनिष्क्रियता: भालू• ग्रीष्मनिष्क्रियता: घोंघे• उपरति (Diapause): प्राणिप्लवकपृथुतापापी (Eurythermal) वतनुतापापी (Stenothermal)2. प्रमुख अनुकूलनजंतु अनुकूलन:• कंगारू चूहा: वसा ऑक्सीकरण• एलन का नियम: छोटे कान/पाद• सील: ब्लबर (मोटी वसा परत)उच्च तुंगता बीमारी (>3500m):• RBC उत्पादन में वृद्धि• Hb बंधुता में कमी• श्वसन दर में तेजीपादप अनुकूलन (मरुद्भिद):• CAM पथ: रात में रंध्र खुलना• Opuntia: पत्तियां = कांटे3. समष्टि वृद्धि मॉडलचरघातांकी वृद्धि (J-वक्र):• dN/dt = rN | Nt = N₀·eʳᵗ• असीमित संसाधनों में• अवास्तविक दीर्घकाललॉजिस्टिक्स वृद्धि (S-वक्र):• dN/dt = rN[(K-N)/K]• सीमित संसाधन (यथार्थवादी)• K = वहन क्षमता• सिग्मॉइड वक्र (Sigmoid)N(t+1) = Nt + [(B+I) - (D+E)]आयु पिरामिड: विस्तारित, स्थिर, ह्रासमान4. समष्टि अंतःक्रियाएंसहोपकारिता (+/+):• लाइकेन, अंजीर व बर्र• Ophrys: लैंगिक कपटस्पर्धा (-/-):• गॉस का अपवर्जन (कछुआ)• मैकआर्थर संसाधन विभाजनपरजीविता व परभक्षण (+/-):• ब्रूड परजीविता: कोयल-कौवा• मोनार्क तितली (कार्डियक विष)सहभोजिता (+/0):• आम पर आर्किड, बगुलाअसहभोजिता (-/0): Penicillium

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
पारिस्थितिकी के चार स्तर हैं: जीव → समष्टि → समुदाय → बायोम; अजैविक कारकों में तापमान सबसे महत्वपूर्ण है।
मुख्य बिंदु 2
अजैविक कारकों के प्रति 4 अनुक्रियाएं हैं: नियमन (समस्थापन), संरूपण (99% जंतु), प्रवास (भरतपुर पक्षी), तथा निलंबन (शीत/ग्रीष्म निष्क्रियता व उपरति)।
मुख्य बिंदु 3
कंगारू चूहा जल की पूर्ति वसा ऑक्सीकरण से करता है; एलन के नियम के अनुसार ठंडी जलवायु के स्तनधारियों के कान व पाद छोटे होते हैं।
मुख्य बिंदु 4
सील में वसा की मोटी परत (ब्लबर) ऊष्मारोधी है; उच्च तुंगता (>3500m) पर शरीर RBCs उत्पादन व श्वसन दर बढ़ाता है।
मुख्य बिंदु 5
मरुद्भिदों में धंसे रंध्र, मोटी उपत्वचा तथा CAM प्रकाश-संश्लेषण चक्र पाया जाता है; नागफनी में पत्तियां कांटों में बदल जाती हैं।
मुख्य बिंदु 6
चरघातांकी वृद्धि (dN/dt = rN) J-आकार वक्र बनाती है (असीमित संसाधन); लॉजिस्टिक्स वृद्धि (dN/dt = rN[(K-N)/K]) S-आकार वक्र बनाती है।
मुख्य बिंदु 7
वहन क्षमता (K) किसी आवास में अधिकतम संभव जीवों की संख्या है; लॉजिस्टिक मॉडल प्रकृति में अधिक यथार्थवादी है।
मुख्य बिंदु 8
सहोपकारिता (+/+) में दोनों को लाभ होता है (लाइकेन, अंजीर-बर्र, ऑफ्रीस आर्किड का लैंगिक कपट)।
मुख्य बिंदु 9
गॉस का स्पर्धी अपवर्जन नियम (-/-) बताता है कि सीमित संसाधन में दुर्बल जाति नष्ट होती है; मैकआर्थर ने संसाधन विभाजन सिद्ध किया।
मुख्य बिंदु 10
परजीविता (+/-) में कोयल का अंड परजीविता (Brood Parasitism) प्रमुख है; सहभोजिता (+/0) में आम पर आर्किड तथा मवेशी बगुला आते हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
प्रकृति में सीमित संसाधनों वाले वास्तविक आवास में समष्टि वृद्धि का कौन सा समीकरण लागू होता है?
(A) dN/dt = rN
(B) dN/dt = rN · [(K - N) / K]
(C) Nt = N₀ · eʳᵗ
(D) dN/dt = K · N
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
सीमित संसाधनों में लॉजिस्टिक्स वृद्धि (Verhulst-Pearl Logistic) समीकरण dN/dt = rN[(K-N)/K] लागू होता है जो सिग्मॉइड वक्र बनाता है।
2
ठंडी जलवायु में रहने वाले स्तनधारियों के कान और पाद शरीर से उष्मा हानि को कम करने हेतु छोटे होते हैं। यह नियम क्या कहलाता है?
(A) बर्गमैन का नियम
(B) एलन का नियम (Allen's Rule)
(C) गॉस का नियम
(D) डार्विन का नियम
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
एलन के नियम के अनुसार ठंडी जलवायु के स्तनधारियों के कान और अंग छोटे होते हैं ताकि उष्मा की हानि न्यूनतम हो सके।
3
भूमध्यसागरीय आर्किड 'ऑफ्रीस' (Ophrys) में नर मधुमक्खी द्वारा परागण किस विशिष्ट परिघटना द्वारा संपन्न होता है?
(A) सहभोजिता
(B) लैंगिक कपट एवं छद्म-मैथुन (Pseudocopulation)
(C) अंड परजीविता
(D) असहभोजिता
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
ऑफ्रीस की पंखुड़ी मादा मधुमक्खी की नकल करती है, जिससे नर मधुमक्खी छद्म-मैथुन कर परागण कर देता है।
4
एक ही पेड़ पर रहने वाली फुदकी चिड़ियों (Warblers) की 5 प्रजातियों का शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व किस सिद्धांत का प्रमाण है?
(A) गॉस का स्पर्धी अपवर्जन
(B) संसाधन विभाजन (Resource Partitioning - मैकआर्थर)
(C) अंड परजीविता
(D) चरघातांकी वृद्धि
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
मैकआर्थर ने सिद्ध किया कि विभिन्न चारा खोजने की आदतों द्वारा 5 प्रजातियां संसाधन विभाजन कर सह-अस्तित्व में रहती हैं।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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कक्षा 12 Biology के सभी अध्याय

अध्याय 1: पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन (Sexual Reproduction in Flowering Plants) अध्याय 2: मानव जनन (Human Reproduction) (Human Reproduction) अध्याय 3: जनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) (Reproductive Health) अध्याय 4: वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत (Principles of Inheritance and Variation) अध्याय 5: वंशागति के आणविक आधार (Molecular Basis of Inheritance) अध्याय 6: विकास (Evolution) (Evolution) अध्याय 7: मानव स्वास्थ्य और रोग (Human Health and Disease) अध्याय 8: मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव (Microbes in Human Welfare) अध्याय 9: जैव प्रौद्योगिकी - सिद्धांत व प्रक्रम (Biotechnology: Principles and Processes) अध्याय 10: जैव प्रौद्योगिकी एवं इसके अनुप्रयोग (Biotechnology and its Applications) अध्याय 11: जीव और समष्टियां (Organisms and Populations) अध्याय 12: पारितंत्र (Ecosystem) (Ecosystem) अध्याय 13: जैव विविधता एवं संरक्षण (Biodiversity and Conservation)

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