1.1 राष्ट्रीय स्तर पर जनन स्वास्थ्य कार्यक्रम
भारत ने 1951 में 'परिवार नियोजन' की शुरुआत की। वर्तमान में यह कार्यक्रम जनन एवं बाल स्वास्थ्य सेवा (RCH - Reproductive and Child Health Care) के नाम से संचालित है, जिसके प्रमुख उद्देश्य हैं:
- लोगों को जनन संबंधी पहलुओं, सुरक्षित प्रसव, स्तनपान तथा यौन संचारित रोगों के प्रति जागरूक करना।
- मातृ मृत्यु दर (MMR - Maternal Mortality Rate) तथा शिशु मृत्यु दर (IMR - Infant Mortality Rate) में भारी कमी लाना।
- विद्यालयों में यौन शिक्षा (Sex Education) को बढ़ावा देना ताकि युवाओं को भ्रांतियों से बचाया जा सके।
1.2 उल्बवेधन (Amniocentesis): उपयोगिता एवं दुरुपयोग
प्रक्रिया: गर्भावस्था के 14वें से 16वें सप्ताह में गर्भवती महिला के गर्भाशय से सिरिंज द्वारा कुछ मात्रा में उल्ब द्रव (Amniotic Fluid) निकाला जाता है। इस द्रव में भ्रूण की त्वचा की कोशिकाएं तैरती रहती हैं। इन कोशिकाओं का संवर्धन कर उनके गुणसूत्रों (Karyotyping) का विश्लेषण किया जाता है।
- सकारात्मक चिकित्सकीय उपयोग: अजन्मे शिशु में गंभीर आनुवंशिक एवं गुणसूत्रीय विकारों—जैसे डाउन सिंड्रोम (Down's Syndrome, ट्राइसोमी 21), हीमोफिलिया, सिकल सेल एनीमिया आदि की प्रारंभिक पहचान करना।
- दुरुपयोग एवं वैधानिक प्रतिबंध: गुणसूत्रों ($XX$ अथवा $XY$) द्वारा गर्भस्थ शिशु के लिंग का पता लगाकर कन्या भ्रूण हत्या (Female Foeticide) की जाने लगी। समाज में बालिकाओं के लिंगानुपात को बचाने के लिए भारत सरकार ने लिंग परीक्षण हेतु उल्बवेधन पर पूर्ण वैधानिक प्रतिबंध (Statutory Ban) लगा दिया है!