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JAC • Class 7 • Social Science • Ch 24
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Markets Around Us

इस अध्याय में हम हमारे आस-पास लगने वाले विभिन्न प्रकार के बाजारों—साप्ताहिक बाजार (हाट), मोहल्ले की पक्की दुकानें, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स व मॉल, ई-कॉमर्स तथा थोक व्यापारी से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक जुड़ने वाली "बाजारों की श्रृंखला" (Chain of Markets) और बाजार व्यवस्था में व्याप्त आर्थिक असमानता का व्यावहारिक व समाजशास्त्रीय अध्ययन करेंगे।

क्या आपने कभी सोचा है कि जो टमाटर आप ₹20 किलो खरीदते हैं, खेत से आपकी रसोई तक पहुँचते-पहुँचते उसकी कीमत और मुनाफा किसके हाथों में बदलता है?

साप्ताहिक बाजार में जमीन पर तिरपाल बिछाकर कपड़े बेचने वाला समीर दिनभर में मुश्किल से ₹200-300 कमा पाता है, जबकि वातानुकूलित मॉल में ब्रांडेड कपड़े बेचने वाला व्यापारी करोड़ों का मुनाफा बनाता है। खेत में पसीना बहाने वाले किसान से लेकर दिल्ली की आजादपुर मंडी के थोक व्यापारी आफताब और अंतिम उपभोक्ता तक बाजार की यह अदृश्य श्रृंखला कैसे काम करती है? आइए समझें।

Why This Chapter Matters

यह अध्याय विद्यार्थियों को आर्थिक लेन-देन, मूल्य निर्धारण, बिचौलियों की भूमिका, थोक बनाम खुदरा व्यापार तथा आधुनिक ऑनलाइन शॉपिंग के स्वरूप से परिचित कराता है। साथ ही यह समझने में मदद करता है कि बाजार व्यवस्था किस प्रकार आर्थिक विषमता को बढ़ाती है और निष्पक्ष व्यापार क्यों आवश्यक है।

Before You Begin (Prerequisites)

  • उत्पादन, उपभोग और मुद्रा (पैसे) के लेन-देन की बुनियादी समझ।
  • शहरी और ग्रामीण जीवन में खरीदारी के दैनिक अनुभवों की जानकारी।
  • समानता और आर्थिक अवसरों की प्राथमिक अवधारणा।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • साप्ताहिक बाजार, मोहल्ले की दुकानों तथा शॉपिंग मॉल की कार्यप्रणाली, लागत संरचना और लाभ का तुलनात्मक विश्लेषण करना।
  • साप्ताहिक बाजारों में सामान के सस्ते होने के आर्थिक कारणों (कम किराया, कोई वेतन नहीं, तीव्र प्रतिस्पर्धा) को स्पष्ट करना।
  • मोहल्ले की दुकानों में व्यक्तिगत संबंधों और उधार (Credit) व्यवस्था के सामाजिक-आर्थिक महत्व को समझना।
  • आजादपुर मंडी के थोक व्यापारी आफताब के माध्यम से उत्पादक से उपभोक्ता तक 'बाजारों की श्रृंखला' (Chain of Markets) को रेखांकित करना।
  • इंटरनेट (ई-कॉमर्स) युग में 'हर जगह बाजार' की अवधारणा तथा बाजार में छोटे व्यापारी बनाम बड़े मॉल मालिक के मध्य आर्थिक विषमता का मूल्यांकन करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. साप्ताहिक बाजार बनाम मोहल्ले की...
2 2. शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मॉल एवं ब्रा...
3 3. बाजारों की श्रृंखला : आफताब और आ...
4 4. हर जगह बाजार, ई-कॉमर्स एवं आर्थि...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. साप्ताहिक बाजार बनाम मोहल्ले की दुकानें (Weekly Markets vs Neighbourhood Shops)

हम अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जिन बाजारों में जाते हैं, उनके स्वरूप और कार्यप्रणाली में भारी विविधता पाई जाती है।

1. साप्ताहिक बाजार (Weekly Markets / हाट)
  • अस्थायी स्वरूप : यह सप्ताह के किसी एक निश्चित दिन लगता है। व्यापारी सुबह दुकान लगाते हैं और शाम को समेट लेते हैं।
  • सस्ता सामान क्यों? : पक्की दुकानों का किराया, बिजली बिल, सरकारी टैक्स और कर्मचारियों का वेतन नहीं देना पड़ता। परिवार के सदस्य ही हाथ बंटाते हैं।
  • मोलभाव (Bargaining) : एक ही सामान (जैसे बर्तन, सब्जियां, कपड़े) की कई दुकानें होने से कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है, जिससे ग्राहक मोलभाव कर कीमत कम करा सकते हैं।
  • सुविधा : सभी दैनिक जरूरतें एक ही जगह मिल जाती हैं।
2. मोहल्ले की दुकानें (Neighbourhood Shops)
  • स्थायी व निकटतम : घरों के पास स्थित पक्की दुकानें (डेयरी, किराना, स्टेशनरी, मेडिकल स्टोर) जो सप्ताह के सातों दिन खुलती हैं।
  • उधार (Credit) सुविधा : दुकानदार और ग्राहक एक-दूसरे से भलीभांति परिचित होते हैं। ग्राहक बिना तुरंत पैसे दिए सामान ले सकते हैं और महीने के अंत में हिसाब चुकता कर सकते हैं।
  • सुजाता और कविता की कहानी : वे मोहल्ले की दुकान पर जाकर नोटबुक में राशन लिखवाकर उधार ले आती हैं।

2. शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मॉल एवं ब्रांडेड बाजार (Shopping Complexes & Malls)

शहरी क्षेत्रों में बहुमंजिला वातानुकूलित (Air-conditioned) इमारतें पाई जाती हैं जिन्हें मॉल (Malls) और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स कहा जाता है।

मॉल की विशिष्ट कार्यप्रणाली एवं उच्च लागत

  • ब्रांडेड उत्पाद : इन दुकानों में बड़ी कंपनियों के ब्रांडेड कपड़े, जूते और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बेचे जाते हैं। कंपनियाँ विज्ञापनों और आकर्षक पैकेजिंग पर भारी खर्च करती हैं, जिससे ब्रांडेड सामान अत्यधिक महंगा होता है।
  • उच्च रखरखाव व्यय : मॉल में सेंट्रल एसी, एस्केलेटर, सुरक्षा गार्ड, सफाईकर्मी और भव्य सजावट का भारी खर्च वस्तुओं की कीमतों में जोड़ दिया जाता है।
  • अमीर वर्ग का केंद्र : केवल संपन्न और उच्च-मध्यम वर्ग के लोग ही यहाँ से खरीदारी कर पाते हैं। गरीब और सामान्य आय वर्ग के लोग केवल खिड़की से झांककर (Window Shopping) लौट आते हैं।
  • निश्चित मूल्य : यहाँ साप्ताहिक बाजारों की तरह मोलभाव की कोई गुंजाइश नहीं होती (Fixed Price)।

3. बाजारों की श्रृंखला : आफताब और आजादपुर मंडी (Chain of Markets & Wholesale Trading)

वस्तुएं कारखानों और खेतों में बनती हैं, परंतु हम सीधे किसान या कारखाने के मालिक से एक किलो प्याज या एक कमीज नहीं खरीद सकते। उत्पादक से हमारे घरों तक सामान पहुँचाने के लिए व्यापारियों की एक लंबी कड़ी काम करती है जिसे 'बाजारों की श्रृंखला' (Chain of Markets) कहते हैं।

आफताब की कहानी : आजादपुर सब्जी मंडी (दिल्ली) का थोक व्यापारी

आफताब उन बड़े थोक व्यापारियों (Wholesale Traders) में से एक है जो बड़ी मात्रा में सामान खरीदते और बेचते हैं:

  • उसका दिन तड़के सुबह 2:00 बजे शुरू होता है जब देश भर के खेतों से सब्जियों से लदे बड़े ट्रक मंडी में पहुँचते हैं।
  • वह नीलामी (Auction) में भाग लेकर एक साथ कई क्विंटल (जैसे 50 क्विंटल प्याज, 20 क्विंटल टमाटर) खरीदता है।
  • सुबह 6:00 बजे से छोटे खुदरा दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले फेरीवाले आफताब से सब्जियां खरीदने आते हैं, जो बाद में हमारे मोहल्लों में घर-घर घूमकर या साप्ताहिक बाजार में सब्जियां बेचते हैं।
बाजारों की कड़ी (The Supply Chain Flow)
1. प्राथमिक उत्पादक (किसान/कारखाना) ➔ 2. बड़ा थोक व्यापारी (मंडी) ➔ 3. छोटा थोक/मध्यम व्यापारी ➔ 4. खुदरा व्यापारी (Retailer) ➔ 5. अंतिम उपभोक्ता (हम सब)

4. हर जगह बाजार, ई-कॉमर्स एवं आर्थिक असमानता (Markets Everywhere & Inequality)

आज के डिजिटल युग में खरीदारी करने के लिए किसी भौतिक बाजार में जाना अनिवार्य नहीं रह गया है। इंटरनेट, मोबाइल ऐप और ई-कॉमर्स (E-Commerce) ने घर बैठे सामान मंगाना संभव बना दिया है।

अदृश्य बाजार (B2B Markets)

बहुत से बाजार ऐसे होते हैं जिन्हें हम कभी नहीं देख पाते। उदाहरण के लिए, एक किसान द्वारा खाद, कीटनाशक और बीज खरीदना; या एक ऑटोमोबाइल कंपनी द्वारा इंजन, टायर और ग्लास अन्य कारखानों से खरीदना। यह उद्योग-से-उद्योग (Business-to-Business) लेन-देन कहलाता है।

बाजार और आर्थिक असमानता

साप्ताहिक बाजार का छोटा व्यापारी (समीर) बहुत कम पूंजी लगाता है और दिनभर में नाममात्र का लाभ कमाता है। इसके विपरीत, मॉल और बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के मालिक अरबों की पूंजी लगाकर भारी मुनाफा कमाते हैं। बाजार सबको अवसर तो देता है, परंतु लाभ का बंटवारा घोर असमान रहता है।

Key Historical Terms, Chronology & Administrative Principles

साप्ताहिक बाजार लागत न्यूनीकरण समीकरण
शून्य दुकान किराया + शून्य बिजली बिल + शून्य कर्मचारी वेतन (पारिवारिक श्रम) = न्यूनतम विक्रय मूल्य
इसी कारण साप्ताहिक हाट में वस्तुएं पक्की दुकानों और मॉल की तुलना में अत्यधिक सस्ती होती हैं।
आपूर्ति श्रृंखला मूल्य संवर्धन सूत्र (Supply Chain Price Escalation)
किसान लागत मूल्य (खेत) + थोक परिवहन + मंडी नीलामी कमीशन + खुदरा लाभ = अंतिम उपभोक्ता मूल्य
श्रृंखला में जितने अधिक बिचौलिए होंगे, उपभोक्ता के लिए वस्तु उतनी ही महंगी होगी।
उधार (Credit) सुविधा एवं सामाजिक पूंजी
भौगोलिक निकटता + व्यक्तिगत परिचय = बिना नकद भुगतान के तात्कालिक राशन आपूर्ति (खाता बही)
मोहल्ले की दुकानों की यह विशिष्टता उन्हें आधुनिक ऑनलाइन स्टोरों से अलग बनाती है।
थोक बनाम खुदरा व्यापार अनुपात
थोक व्यापारी = भारी मात्रा (क्विंटल/थोक) + अल्प इकाई लाभ | खुदरा व्यापारी = छोटी मात्रा + अधिक इकाई लाभ
आफताब क्विंटल में खरीदकर छोटे दुकानदारों को बेचता है जो हमें प्रति किलो में बेचते हैं।
ई-कॉमर्स डिजिटल बाजार समीकरण
मोबाइल ऐप + इंटरनेट बैंकिंग/UPI + डोरस्टेप डिलीवरी = भौतिक सीमा-रहित वैश्विक बाजार
अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म जिन्होंने परंपरागत दुकानों की परिभाषा बदल दी है।

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
साप्ताहिक बाजारों में सामान पक्की दुकानों और मॉल की तुलना में सस्ता क्यों मिलता है? इसके चार प्रमुख कारण बताइए।
Step-by-Step Solution:

साप्ताहिक बाजारों में सामान सस्ता मिलने के चार प्रमुख आर्थिक कारण हैं:

  • दुकान का कोई किराया नहीं : ये दुकानें सड़कों या खुले मैदानों में अस्थायी रूप से लगती हैं, अतः व्यापारियों को पक्की दुकान का भारी किराया नहीं देना पड़ता।
  • बिजली व टैक्स का अभाव : इन्हें बिजली बिल, पानी बिल और नगरपालिका के भारी वाणिज्यिक टैक्स नहीं चुकाने पड़ते।
  • पारिवारिक श्रम का उपयोग : छोटे व्यापारी अलग से वेतनभोगी कर्मचारी नहीं रखते बल्कि घर के सदस्य ही सामान लादने और बेचने में मदद करते हैं।
  • कड़ी प्रतिस्पर्धा एवं मोलभाव : एक ही सामान की कई दुकानें पास-पास होती हैं। यदि एक दुकानदार अधिक कीमत मांगता है तो ग्राहक तुरंत बगल वाली दुकान पर जाकर मोलभाव कर लेता है।
Example 2
मोहल्ले की दुकानों की ऐसी कौन सी विशेषताएं हैं जो उन्हें साप्ताहिक बाजारों और बड़े मॉल से अलग बनाती हैं?
Step-by-Step Solution:

मोहल्ले की दुकानों की विशिष्ट विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • दैनिक उपलब्धता : ये सप्ताह के सातों दिन और देर रात तक खुली रहती हैं, जबकि साप्ताहिक बाजार केवल एक निश्चित दिन लगता है।
  • निकटता : घर के बिल्कुल पास होने के कारण आपातकाल में या अचानक किसी छोटी चीज (जैसे दूध, दवा, नमक) की जरूरत पड़ने पर तुरंत जाया जा सकता है।
  • उधार (Credit) की सुविधा : दुकानदार और मोहल्ले के निवासियों के बीच व्यक्तिगत परिचय और भरोसा होता है। पैसे न होने पर भी ग्राहक खाता बही में दर्ज कराकर उधार राशन ला सकते हैं और महीने की पहली तारीख या वेतन मिलने पर भुगतान कर सकते हैं। यह सुविधा मॉल या ऑनलाइन ऐप पर नहीं मिलती।
Example 3
'बाजारों की श्रृंखला' (Chain of Markets) क्या है? आफताब (थोक व्यापारी) के उदाहरण से समझाइए कि यह उपभोक्ताओं तक कैसे पहुँचती है।
Step-by-Step Solution:

1. अर्थ : कारखानों और खेतों से उत्पादित वस्तुओं को अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचाने वाले मध्यवर्ती व्यापारियों (थोक, मध्यम व खुदरा) की परस्पर जुड़ी कड़ी को बाजारों की श्रृंखला कहते हैं।

2. आफताब का उदाहरण :

  • दूर-दराज के किसान जब ट्रक भरकर सब्जियां दिल्ली लाते हैं, तो आजादपुर मंडी का थोक व्यापारी आफताब तड़के 2:00 बजे नीलामी में बोली लगाकर कई क्विंटल सब्जियां एक साथ खरीद लेता है।
  • सुबह 6:00 बजे मोहल्ले के छोटे दुकानदार और सब्जी वाले आफताब से अपनी क्षमतानुसार 10-20 किलो सब्जियां खरीदते हैं।
  • अंत में ये खुदरा दुकानदार और ठेले वाले हमारे घरों के पास आकर हमें 1 किलो या आधा किलो सब्जी बेचते हैं। इस प्रकार आफताब उत्पादक किसान और हमारे बीच की एक अनिवार्य कड़ी है।
Example 4
'हर जगह बाजार' (Markets Everywhere) की अवधारणा क्या है? क्या खरीदारी केवल दुकानों पर जाकर ही संभव है?
Step-by-Step Solution:

1. अवधारणा : आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल क्रांति ने बाजार को किसी निश्चित भौतिक स्थान (दुकान या बाजार क्षेत्र) की सीमा से मुक्त कर दिया है। अब व्यापार किसी भी समय और किसी भी स्थान से हो सकता है।

2. नई व्यवस्था :

  • इंटरनेट और ई-कॉमर्स वेबसाइटों (जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट, जोमैटो) के माध्यम से लोग घर या ऑफिस में बैठे-बैठे मोबाइल से ऑर्डर देते हैं और सामान उनके दरवाजे पर पहुँच जाता है।
  • क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और यूपीआई (UPI) के माध्यम से नकदी के बिना डिजिटल भुगतान हो जाता है।
  • इसके अलावा, कारखानों के बीच कल-पुर्जों और रसायनों की भारी खरीद-फरोख्त भी फोन और इंटरनेट के जरिए अदृश्य रूप से संचालित होती है। अतः आज बाजार 'हर जगह' मौजूद है।
Example 5
बाजार व्यवस्था में छोटे व्यापारी (जैसे साप्ताहिक बाजार के समीर) और बड़े मॉल के मालिक के बीच क्या आर्थिक असमानताएं पाई जाती हैं?
Step-by-Step Solution:

बाजार सभी को अवसर प्रदान करने का दावा करता है, परंतु इसमें गंभीर आर्थिक विषमताएं हैं:

  • पूंजी निवेश : समीर जैसे छोटे व्यापारी के पास लगाने के लिए बहुत कम पूंजी (कुछ हजार रुपये) होती है, जबकि मॉल के व्यापारी करोड़ों रुपये का निवेश करते हैं।
  • मुनाफे में भारी अंतर : समीर पूरे दिन धूप और धूल में मेहनत करने के बाद मुश्किल से ₹200 से ₹300 प्रतिदिन कमा पाता है, जबकि मॉल का मालिक और ब्रांडेड शोरूम एक ही दिन में लाखों का शुद्ध मुनाफा कमाते हैं।
  • जोखिम वहन करने की क्षमता : यदि माल न बिके तो छोटा व्यापारी कर्ज में डूब जाता है, जबकि बड़े कॉर्पोरेट व्यापारिक घराने घाटे को आसानी से सहन कर लेते हैं।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

थोक व्यापारी (Wholesale Trader) और खुदरा व्यापारी (Retailer) को एक ही समझ लेना।

Scientific Reality & Correction

थोक व्यापारी बहुत बड़ी मात्रा में (क्विंटलों या थोक लॉट में) माल खरीदकर अन्य व्यापारियों को बेचता है; जबकि खुदरा व्यापारी उपभोक्ताओं को छोटी इकाइयों (किलो या पीस में) सामान बेचता है।

Common Misconception

यह सोचना कि मॉल में मिलने वाला सामान बेहतर गुणवत्ता का होने के कारण ही महंगा होता है।

Scientific Reality & Correction

सामान की गुणवत्ता के अलावा मॉल के भारी किराए, सेंट्रल एसी, विज्ञापनों और ब्रांडिंग के करोड़ों रुपये के प्रचार खर्च को सामान की कीमत में जोड़ दिया जाता है, जिससे वह महंगा होता है।

Common Misconception

बाजार को केवल उपभोक्ता और दुकानदार के बीच का लेन-देन मानना।

Scientific Reality & Correction

बाजार का एक विशाल हिस्सा अदृश्य B2B (उद्योग-से-उद्योग) होता है, जहाँ कारखानों द्वारा कच्चा माल, इंजन, चिप्स और कल-पुर्जे खरीदे जाते हैं, जिन्हें आम जनता कभी नहीं देखती।

Visual Learning & Conceptual Map

हमारे आस-पास के बाजार : बाजारों की श्रृंखला एवं मूल्य प्रवाह साप्ताहिक बाजार • अस्थायी हाट (समीर) • शून्य दुकान किराया • पारिवारिक श्रम • सस्ता सामान + मोलभाव अल्प पूंजी व मुनाफा मोहल्ले की दुकान • स्थायी पक्की दुकानें • सप्ताह के सातों दिन • व्यक्तिगत संबंध • उधार (Credit) सुविधा सामाजिक पूंजी का लाभ शॉपिंग मॉल • वातानुकूलित बहुमंजिला • ब्रांडेड महंगे उत्पाद • भारी विज्ञापन लागत • निश्चित मूल्य (No Bargain) अमीर वर्ग का संकेंद्रण ई-कॉमर्स / ऑनलाइन • मोबाइल ऐप ऑर्डर • यूपीआई व कार्ड पेमेंट • डोरस्टेप डिलीवरी • अदृश्य B2B व्यापार हर जगह बाजार क्रांति बाजारों की श्रृंखला : किसान (खेत) ➔ थोक मंडी (आफताब) ➔ खुदरा दुकानदार ➔ अंतिम उपभोक्ता "बाजार केवल सामान का लेन-देन नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के आर्थिक संबंधों का दर्पण है।"

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
साप्ताहिक बाजार (हाट) सप्ताह के निश्चित दिन लगते हैं जहाँ पक्की दुकानों का किराया व टैक्स न होने से सामान सस्ता मिलता है।
Takeaway 2
साप्ताहिक बाजार में एक ही वस्तु की कई दुकानें होने से प्रतिस्पर्धा रहती है और ग्राहक मोलभाव कर सकते हैं।
Takeaway 3
मोहल्ले की दुकानें घरों के पास स्थित स्थायी दुकानें हैं जहाँ व्यक्तिगत परिचय के आधार पर उधार (Credit) पर राशन मिलता है।
Takeaway 4
शॉपिंग मॉल बहुमंजिला वातानुकूलित इमारतें हैं जहाँ ब्रांडेड, महंगे और गैर-मोलभाव वाले उत्पाद बेचे जाते हैं।
Takeaway 5
ब्रांडेड उत्पाद विज्ञापनों, आकर्षक पैकेजिंग और शोरूम के भारी रख-रखाव खर्च के कारण अत्यंत महंगे होते हैं।
Takeaway 6
कारखानों और खेतों से उपभोक्ता तक सामान पहुँचाने वाले व्यापारियों की कड़ी को "बाजारों की श्रृंखला" (Chain of Markets) कहते हैं।
Takeaway 7
थोक व्यापारी (जैसे आजादपुर मंडी का आफताब) बड़ी मात्रा (क्विंटलों) में सामान खरीदकर छोटे खुदरा दुकानदारों को बेचते हैं।
Takeaway 8
खुदरा व्यापारी (Retailer) वह अंतिम दुकानदार या रेहड़ी-पटरी वाला होता है जो उपभोक्ता को सीधे वस्तुएं बेचता है।
Takeaway 9
इंटरनेट और ई-कॉमर्स (ऑनलाइन शॉपिंग) के कारण आज घर बैठे मोबाइल से खरीदारी संभव है, जिसे "हर जगह बाजार" कहते हैं।
Takeaway 10
बाजार व्यवस्था में छोटे व्यापारी बहुत कम मुनाफा कमाते हैं जबकि बड़े मॉल मालिक और ई-कॉमर्स कंपनियां भारी आर्थिक मुनाफा बनाती हैं।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
साप्ताहिक बाजारों में वस्तुओं के दाम पक्की दुकानों की तुलना में सस्ते क्यों होते हैं?
Reveal Answer & Explanation
Answer: क्योंकि दुकान का किराया, बिजली बिल, टैक्स और कर्मचारियों का वेतन नहीं देना पड़ता तथा प्रतिस्पर्धा अधिक होती है।
अस्थायी दुकानें होने के कारण रख-रखाव का कोई बड़ा खर्च नहीं होता और पारिवारिक श्रम से काम चल जाता है।
2
मोहल्ले की पक्की दुकानों की वह कौन सी मुख्य सुविधा है जो बड़े मॉल या ऑनलाइन शॉपिंग में सामान्यतः नहीं मिलती?
Reveal Answer & Explanation
Answer: उधार (Credit) पर सामान खरीदने की सुविधा।
दुकानदार और ग्राहक के बीच व्यक्तिगत विश्वास होने से ग्राहक तुरंत पैसे दिए बिना राशन ले सकते हैं और बाद में भुगतान कर सकते हैं।
3
दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी में आफताब किस प्रकार का व्यापारी है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: बड़ा थोक व्यापारी (Wholesale Trader)।
आफताब सुबह 2 बजे ट्रकों से सीधे कई क्विंटल सब्जियां नीलामी में खरीदता है और फिर खुदरा दुकानदारों को थोक में बेचता है।
4
वह व्यापारी जो अंततः सीधे उपभोक्ता (Consumer) को छोटी मात्रा में वस्तुएं बेचता है, क्या कहलाता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: खुदरा व्यापारी (Retailer)।
बाजारों की श्रृंखला में खुदरा व्यापारी अंतिम कड़ी होता है जो आम ग्राहकों को सामान बेचता है।
5
मॉल में बिकने वाले ब्रांडेड सामान के अत्यधिक महंगे होने का मुख्य कारण क्या होता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: कंपनियों द्वारा विज्ञापनों पर भारी खर्च, आकर्षक पैकेजिंग और मॉल का भारी संचालन व्यय।
ब्रांडेड वस्तुओं की कीमत में प्रचार, विज्ञापन और फाइव-स्टार जैसी सुख-सुविधाओं का खर्च शामिल होता है।
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