एक प्याज की तरह पृथ्वी भी एक के ऊपर एक संकेंद्रीय परतों (Concentric Layers) से बनी है:
(A) पर्पटी (Crust):
पृथ्वी की सतह की सबसे ऊपरी परत को पर्पटी कहते हैं। यह तीनों परतों में सबसे पतली है:
- महाद्वीपीय संहति (Continental Crust): यह महाद्वीपों पर लगभग 35 किलोमीटर तक मोटी है। यह मुख्य रूप से सिलिका (Silica) एवं एल्युमिना (Alumina) जैसे खनिजों से बनी है, इसलिए इसे संक्षेप में "सियाल" (SIAL: Si-सिलिका + Al-एल्युमिना) कहा जाता है।
- महासागरीय पर्पटी (Oceanic Crust): महासागर की तलहटी में यह केवल 5 किलोमीटर मोटी है। यह मुख्यतः सिलिका और मैग्नीशियम की बनी है, इसलिए इसे "सिमा" (SIMA: Si-सिलिका + Ma-मैग्नीशियम) कहा जाता है।
(B) मेंटल (Mantle):
पर्पटी के ठीक नीचे मेंटल होता है जो 2,900 किलोमीटर की गहराई तक फैला हुआ है। यह पृथ्वी का सबसे बड़ा आयतन भाग (84%) है जहां मैग्मा का भंडार होता है।
(C) क्रोड (Core):
पृथ्वी की सबसे आंतरिक परत को क्रोड कहते हैं जिसकी त्रिज्या (Radius) लगभग 3,500 किलोमीटर है:
- यह मुख्य रूप से निकल (Nickel) तथा लोहे (Iron/Ferrous) की बनी है, इसलिए इसे "निफे" (NIFE: Ni-निकल + Fe-फेरस) कहा जाता है।
- केंद्रीय क्रोड का तापमान और दाब अत्यधिक उच्च होता है जिसके कारण यह विशाल चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।