(A) सिख: मिसल, दल खालसा एवं राखी व्यवस्था
गुरु गोबिंद सिंह के बाद बंदा सिंह बहादुर के नेतृत्व में सिखों ने मुगलों के खिलाफ खुला विद्रोह किया। 18वीं सदी में सिख योद्धाओं ने स्वयं को 12 अलग-अलग जत्थों या "मिसलों" (Misls) में संगठित किया:
- इन सभी मिसलों की संयुक्त सेना को "दल खालसा" कहा जाता था। वे वर्ष में दो बार (बैसाखी और दीवाली पर) अमृतसर में एकत्रित होते थे और सर्वसम्मति से सामूहिक निर्णय लेते थे जिसे "गुरमत्ता" (गुरु का मत) कहा जाता था।
- राखी (Rakhi) व्यवस्था: सिखों ने किसानों को बाहरी हमलों से सुरक्षा देने के बदले उनकी उपज का 20 प्रतिशत कर के रूप में लेने की व्यवस्था चलाई जिसे "राखी" कहा गया।
- 1799 में महाराजा रणजीत सिंह ने सभी मिसलों को एकजुट कर लाहौर को अपनी राजधानी बनाया और एक शक्तिशाली सिख साम्राज्य की स्थापना की।
(B) मराठा: पेशवाओं का उत्थान एवं चौथ-सरदेशमुखी
छत्रपति शिवाजी महाराज (1627-1680) द्वारा स्थापित मराठा राज्य को 18वीं सदी में पेशवाओं (प्रधानमंत्रियों) ने एक अजेय अखिल भारतीय साम्राज्य में बदल दिया। पेशवा बालाजी विश्वनाथ और उनके पुत्र बाजीराव प्रथम ने मराठा शक्ति को दिल्ली, गुजरात, मालवा और राजस्थान तक फैला दिया:
- चौथ (Chauth): मराठों द्वारा पड़ोसी राज्यों और मुगलों के इलाकों से वसूला जाने वाला वह कर जो कुल भू-राजस्व का 25% (एक-चौथाई) होता था। इसके बदले मराठे उस क्षेत्र पर आक्रमण न करने की गारंटी देते थे।
- सरदेशमुखी (Sardeshmukhi): दक्कन में पुश्तैनी मुख्य राजस्व अधिकारी होने के नाते मराठों द्वारा वसूला जाने वाला 9 से 10 प्रतिशत का अतिरिक्त उपकर।
- पानीपत का तृतीय युद्ध (1761 ई.): मराठों और अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली के बीच हुआ, जिसमें मराठों की पराजय हुई और उनका दिल्ली पर प्रत्यक्ष शासन का सपना टूट गया।
(C) जाट राज्य और राजा सूरजमल:
चूड़ामन के नेतृत्व में जाटों ने दिल्ली के पश्चिम में नियंत्रण किया। राजा सूरजमल (1756-1763) के समय भरतपुर एक अत्यंत शक्तिशाली जाट राज्य बना। सूरजमल को उनकी असाधारण राजनीतिक बुद्धि और रणनीति के कारण "जाटों का प्लेटो" (Plato of the Jats) कहा जाता है। उन्होंने डीग में भव्य महल और अभेद्य लोहागढ़ किला बनवाया जिसे अंग्रेज भी नहीं जीत सके।