जब हम किसी बीजीय व्यंजक का गुणनखंडन करते हैं, तो हम उसे गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में लिखते हैं। ये गुणनखंड संख्याएँ, बीजीय चर अथवा बीजीय व्यंजक हो सकते हैं। ऐसा गुणनखंड जिसका पुनः आगे गुणनखंड न किया जा सके, अविभाज्य गुणनखंड (Irreducible Factor) कहलाता है।
सार्व गुणनखंड विधि (Method of Common Factors):
इस विधि में व्यंजक के प्रत्येक पद के अविभाज्य गुणनखंड लिखे जाते हैं और जो गुणनखंड सभी पदों में उभयनिष्ठ (Common) होते हैं, उन्हें कोष्ठक के बाहर निकाल लिया जाता है (वितरण नियम का व्युत्क्रम: $ab + ac = a(b + c)$)।
उदाहरण:
व्यंजक $12a^2b + 15ab^2$ का गुणनखंडन:
- $12a^2b = 2 \times 2 \times 3 \times a \times a \times b$
- $15ab^2 = 3 \times 5 \times a \times b \times b$
- उभयनिष्ठ सार्व गुणनखंड = $3 \times a \times b = 3ab$
- बाहर निकालने पर: $12a^2b + 15ab^2 = 3ab(4a + 5b)$।