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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 8 • Science • अध्याय 3
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

कोयला और पेट्रोलियम (Coal and Petroleum)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT कक्षा 8 विज्ञान का तृतीय अध्याय "कोयला और पेट्रोलियम" (Coal and Petroleum) जीवाश्म ईंधनों की उत्पत्ति, परिष्करण तथा ऊर्जा प्रबंधन का सांगोपांग वैज्ञानिक अध्ययन है। झारखण्ड भारत की कोयला राजधानी (झरिया, धनबाद, बोकारो) है। इस अध्याय में प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण (अक्षय एवं समाप्त होने वाले), लाखों वर्षों में मृत वनस्पति व समुद्री जीवों से कोयला व पेट्रोलियम का निर्माण (कार्बनीकरण), प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation) द्वारा पेट्रोलियम के विभिन्न प्रभाजों की प्राप्ति, सीएनजी (CNG) की महत्ता तथा ऊर्जा संरक्षण के अनिवार्य वैज्ञानिक उपायों का विस्तार से निरूपण किया गया है।

⚡ 30 करोड़ वर्ष पुराना काला सोना: झारखण्ड की धरती का अदृश्य खजाना!

क्या आप जानते हैं कि जिस कोयले और पेट्रोल से आज हमारी रेलगाड़ियाँ, बिजली घर और गाड़ियाँ दौड़ती हैं, वे वास्तव में 300 मिलियन वर्ष पूर्व पृथ्वी के विशाल घने जंगलों और प्रागैतिहासिक समुद्री जीवों के दबे हुए अवशेष हैं? प्रकृति को इस ईंधन को बनाने में लाखों वर्ष लगे, लेकिन मानव इसे कुछ ही शताब्दियों में समाप्त करने की कगार पर है! कोयले और कच्चे तेल से एलपीजी, डीजल और प्लास्टिक कैसे बनते हैं? आइए, इस काले सोने के वैज्ञानिक रहस्य को उजागर करें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

झारखण्ड राज्य भारत के कुल कोयला भंडार का 26% से अधिक धारण करता है। कोयला और पेट्रोलियम वर्तमान में वैश्विक ऊर्जा, परिवहन और पेट्रोरसायन उद्योग की जीवन-रेखा हैं। परंतु इनके अनियंत्रित दहन से वायु प्रदूषण, अम्ल वर्षा और ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं। इस अध्याय का अध्ययन विद्यार्थियों को जीवाश्म ईंधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, ऊर्जा संरक्षण (PCRA दिशा-निर्देश) और हरित वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के प्रति संवेदनशील बनाता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • ऊर्जा के बिना कोई भी यांत्रिक कार्य, वाहन परिचालन या विद्युत उत्पादन संभव नहीं है।
  • पदार्थ ठोस, द्रव और गैस तीनों अवस्थाओं में ईंधन के रूप में जल सकते हैं।
  • पृथ्वी के भीतर गहराई में जाने पर तापमान और दाब में अत्यधिक वृद्धि होती है।
  • दहन के फलस्वरूप ऊष्मा, प्रकाश और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें उत्सर्जित होती हैं।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • अक्षय (Inexhaustible) और समाप्त होने वाले (Exhaustible) प्राकृतिक संसाधनों में स्पष्ट वैज्ञानिक अंतर बता सकेंगे।
  • कार्बनीकरण (Carbonisation) की प्रक्रिया द्वारा कोयले के निर्माण का भू-वैज्ञानिक इतिहास समझा सकेंगे।
  • कोयला प्रक्रमण के उत्पादों—कोक (Coke), कोलतार (Coal Tar) और कोयला गैस (Coal Gas) के गुण व उपयोग का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • पेट्रोलियम के प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation) के विभिन्न घटकों (LPG, पेट्रोल, डीजल, पैराफिन) के अनुप्रयोगों को निरूपित कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण ए...
2 2. कोयले की कहानी, कार्बनीकरण एवं प...
3 3. पेट्रोलियम का निर्माण एवं प्रभाज...
4 4. प्राकृतिक गैस, पर्यावरण प्रभाव ए...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण एवं जीवाश्म ईंधन

प्रकृति से प्राप्त वे सभी पदार्थ जिनका उपयोग मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करता है, प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources) कहलाते हैं। उपलब्धता के आधार पर इन्हें दो वर्गों में विभाजित किया गया है:

वर्गीकरण का आधार अक्षय प्राकृतिक संसाधन (Inexhaustible) समाप्त होने वाले प्राकृतिक संसाधन (Exhaustible)
प्रकृति में मात्रा प्रकृति में असीमित मात्रा में उपस्थित हैं। प्रकृति में अत्यंत सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं।
मानवीय उपभोग का प्रभाव मानवीय क्रियाकलापों से कभी समाप्त नहीं हो सकते। अत्यधिक या अनियंत्रित उपभोग से शीघ्र समाप्त हो सकते हैं।
प्रमुख उदाहरण सूर्य का प्रकाश, वायु, जल। कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, वन, वन्यजीव, खनिज।

जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels):

कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस का निर्माण लाखों वर्ष पूर्व सजीव प्राणियों (वनस्पति व जन्तुओं) के मृत अवशेषों के पृथ्वी की परतों के नीचे दबने से हुआ है। अतः इन्हें जीवाश्म ईंधन कहा जाता है। इनके निर्माण में करोड़ों वर्ष लगते हैं, इसलिए ये अनवीकरणीय (Non-renewable) संसाधन हैं।

2. कोयले की कहानी, कार्बनीकरण एवं प्रक्रमित उत्पाद

लगभग 300 मिलियन (30 करोड़) वर्ष पूर्व पृथ्वी के निचले जलीय क्षेत्रों में सघन दलदली वन थे। प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, भूकंप) के कारण ये वन मृदा के नीचे दब गए। उनके ऊपर और अधिक रेत व मिट्टी जमने से वे संपीड़ित हो गए। जैसे-जैसे वे गहरे होते गए, उनका तापमान और दाब भी बढ़ता गया।

उच्च दाब और उच्च ताप पर, वायु की अनुपस्थिति में मृत वनस्पति धीरे-धीरे कोयले में परिवर्तित हो गई। मृत वनस्पति के धीमे प्रक्रम द्वारा कोयले में परिवर्तन को कार्बनीकरण (Carbonisation) कहते हैं।

कोयले के प्रक्रमण से प्राप्त उत्पाद:

उद्योगों में कोयले के भंजक आसवन (वायु की अनुपस्थिति में गर्म करने) से तीन महत्वपूर्ण उत्पाद प्राप्त होते हैं:

  • 1. कोक (Coke): यह एक कठोर, सरंध्र और काला पदार्थ है। यह कार्बन का लगभग शुद्ध रूप (लगभग 98% कार्बन) है। इसका उपयोग इस्पात के औद्योगिक निर्माण और कई धातुओं के निष्कर्षण में अपचायक के रूप में होता है।
  • 2. कोलतार (Coal Tar): यह एक अप्रिय गंध वाला गाढ़ा काला द्रव है। यह लगभग 200 विभिन्न कार्बनिक पदार्थों का मिश्रण है। इससे संश्लेषित रंग, औषधियाँ, विस्फोटक, सुगंध (इत्र), प्लास्टिक, पेंट, फोटोग्राफिक सामग्री और कीड़ों को भगाने वाली नेफ्थलीन की गोलियाँ बनाई जाती हैं। (सड़क निर्माण में आज कोलतार के स्थान पर पेट्रोलियम उत्पाद बिटुमेन का उपयोग होता है)।
  • 3. कोयला गैस (Coal Gas): कोयले से कोक बनाते समय यह गैस निकलती है। यह एक उत्कृष्ट ईंधन है जिसका उपयोग कारखानों में ऊष्मा ऊर्जा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

3. पेट्रोलियम का निर्माण एवं प्रभाजी आसवन (Refining)

पेट्रोलियम शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के पेट्रा (Petra = चट्टान) और ओलियम (Oleum = तेल) से हुई है, क्योंकि यह पृथ्वी की चट्टानों के बीच से निकाला जाता है:

  • पेट्रोलियम का निर्माण: पेट्रोलियम का निर्माण समुद्र में रहने वाले सूक्ष्म जीवों से हुआ। जब ये जीव मृत हुए, इनके शरीर समुद्र के पेंदे में बैठ गए और रेत तथा मिट्टी की तहों से ढक गए। करोड़ों वर्षों में वायु की अनुपस्थिति, उच्च ताप और उच्च दाब ने इन मृत जीवों को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस में परिवर्तित कर दिया। तेल और गैस जल से हल्के होने के कारण जल की परत के ऊपर तैरते रहते हैं।
  • पेट्रोलियम का परिष्करण (Petroleum Refining): जमीन से निकला कच्चा पेट्रोलियम एक गाढ़ा, चिपचिपा, गहरे रंग का गंधयुक्त तैलीय द्रव होता है। यह विभिन्न घटकों का जटिल मिश्रण है। पेट्रोलियम के विभिन्न संघटकों/प्रभाजों को अलग करने के प्रक्रम को परिष्करण कहते हैं, जो पेट्रोलियम रिफाइनरी में प्रभाजी आसवन स्तंभ द्वारा सम्पन्न होता है।
पेट्रोलियम का संघटक क्वथनांक परिसर दैनिक जीवन व उद्योगों में प्रमुख उपयोग
द्रवित पेट्रोलियम गैस (LPG) < 40°C घरों और उद्योगों में ईंधन के रूप में (सिलेंडरों में)।
पेट्रोल (Petrol) 40°C – 170°C मोटर कारों, दोपहिया वाहनों, विमानन ईंधन और शुष्क धुलाई (Dry cleaning) में विलायक।
मिट्टी का तेल (Kerosene) 170°C – 250°C स्टोव, लैम्प और जेट वायुयानों के लिए विशेष ईंधन।
डीजल (Diesel) 250°C – 350°C भारी मोटर वाहनों (ट्रक, बस, ट्रैक्टर), रेल इंजनों और विद्युत जनरेटरों में।
स्नेहक तेल (Lubricating Oil) > 350°C मशीनों में घर्षण कम करने के लिए स्नेहन (Lubrication) हेतु।
पैराफिन मोम (Paraffin Wax) ठोस अवशेष मरहम, मोमबत्ती, वैसलीन आदि बनाने में।
बिटुमेन (Bitumen) गाढ़ा अवशेष सड़क निर्माण (Road surfacing) और वाटरप्रूफिंग पेंट में।

4. प्राकृतिक गैस, पर्यावरण प्रभाव एवं PCRA नियम

प्राकृतिक गैस (Natural Gas) एक अति महत्वपूर्ण स्वच्छ जीवाश्म ईंधन है, क्योंकि इसका मुख्य घटक मीथेन (CH4) होता है। इसे उच्च दाब पर संपीड़ित करके CNG (Compressed Natural Gas) के रूप में भंडारित किया जाता है:

  • CNG के लाभ: यह जलने पर धुआँ नहीं देती, कोई जहरीला अवशेष नहीं छोड़ती, और पेट्रोल/डीजल की तुलना में अत्यंत कम कार्बन उत्सर्जन करती है। इसे पाइपों द्वारा सीधे घरों व कारखानों में पहुँचाया जा सकता है (जैसे वडोदरा व दिल्ली में)।
  • जीवाश्म ईंधनों के पर्यावरणीय दुष्प्रभाव:
    • जीवाश्म ईंधनों के जलने से बिना जले कार्बन कण वायु में मिलकर दमा और सांस की बीमारियाँ पैदा करते हैं।
    • अपूर्ण दहन से अत्यंत विषैली कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस बनती है, जो बंद कमरे में मृत्यु का कारण बन सकती है।
    • इनके दहन से उत्पन्न CO2 गैस ग्रीनहाउस प्रभाव बढ़ाकर ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन को जन्म देती है।
    • कोयला व डीजल जलने पर सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन के ऑक्साइड बनाते हैं, जो वर्षा जल में घुलकर अम्ल वर्षा (Acid Rain) करते हैं।

PCRA (पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ) के सुनहरे नियम:

1. गाड़ी मध्यम और एकसमान गति से चलाएँ।
2. ट्रैफिक लाइटों अथवा प्रतीक्षा करते समय गाड़ी का इंजन बंद कर दें।
3. टायरों का वायु दाब (एयर प्रेशर) सही रखें।
4. गाड़ी की नियमित सर्विसिंग व रखरखाव सुनिश्चित करें।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

कार्बनीकरण (Carbonisation)
मृत वनस्पति + उच्च ताप + उच्च दाब + वायु की अनुपस्थिति (लाखों वर्ष) = कोयला
भू-वैज्ञानिक दबाव से कोयले के निर्माण का प्राकृतिक प्रक्रम।
CNG का मुख्य घटक
CH4 (मीथेन गैस, लगभग 85-95%)
न्यूनतम कालिख व प्रदूषण उत्पन्न करने वाला सबसे स्वच्छ हाइड्रोकार्बन।
अम्ल वर्षा (Acid Rain) निर्माण
SO2 + H2O → H2SO3 / H2SO4 एवं NO2 + H2O → HNO3
जीवाश्म ईंधन के दहन से उत्पन्न अम्लीय गैसों की वर्षा जल से क्रिया।
पेट्रोलियम व्युत्पत्ति
Petra (चट्टान) + Oleum (तेल) = चट्टानों का तेल (Rock Oil)
प्रागैतिहासिक समुद्री जीवों के अपघटन से निर्मित हाइड्रोकार्बन मिश्रण।
झारखण्ड कोयला हिस्सेदारी
भारत के कुल राष्ट्रीय कोयला भंडार का ~26% से अधिक (झरिया, धनबाद, बोकारो)
प्राइम कोकिंग कोल का भारत का सबसे समृद्ध खनन क्षेत्र।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1: कोयला किस प्रकार बना? कार्बनीकरण किसे कहते हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: लगभग 30 करोड़ वर्ष पूर्व घने दलदली वन प्राकृतिक आपदाओं के कारण पृथ्वी की मिट्टी के नीचे दब गए। जैसे-जैसे उन पर मिट्टी की और परतें जमती गईं, वे गहराई में धंसते गए जहाँ उच्च दाब, अत्यधिक तापमान और वायु की अनुपस्थिति थी। इस भीषण दबाव और ताप के कारण मृत वनस्पति धीरे-धीरे ठोस कोयले में रूपांतरित हो गई। मृत वनस्पति के इस धीमे प्रक्रम द्वारा कोयले में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को कार्बनीकरण (Carbonisation) कहते हैं।
उदाहरण 2
प्रश्न 2: कोक क्या है और यह सामान्य कोयले से किस प्रकार श्रेष्ठ है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: कोक एक कठोर, छिद्रयुक्त और काला ठोस पदार्थ है, जो कोयले के भंजक आसवन (वायु की अनुपस्थिति में अत्यधिक गर्म करने) से प्राप्त होता है। यह कार्बन का लगभग 98% शुद्ध रूप है।\nश्रेष्ठता के कारण:\n1. जलने पर यह कोयले की भाँति धुआँ उत्पन्न नहीं करता।\n2. इसका ऊष्मीय मान बहुत उच्च होता है।\n3. यह इस्पात निर्माण और धातुओं के औद्योगिक निष्कर्षण में अपचायक के रूप में प्रयुक्त होता है।
उदाहरण 3
प्रश्न 3: सीएनजी (CNG) और एलपीजी (LPG) का पूरा नाम लिखिए और बताइए कि सीएनजी को अधिक स्वच्छ ईंधन क्यों माना जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\n• CNG का पूरा नाम: Compressed Natural Gas (संपीडित प्राकृतिक गैस)\n• LPG का पूरा नाम: Liquefied Petroleum Gas (द्रवित पेट्रोलियम गैस)\nसीएनजी को स्वच्छ ईंधन मानने के कारण:\n1. इसका मुख्य घटक मीथेन (CH4) है, जो पूर्ण दहन पर केवल जलवाष्प और कार्बन डाइऑक्साइड देता है।\n2. यह जलने पर कोई राख, कालिख या हानिकारक विषैले कण नहीं छोड़ती।\n3. यह पेट्रोल और डीजल की तुलना में अत्यंत कम प्रदूषणकारी है।
उदाहरण 4
प्रश्न 4: जीवाश्म ईंधनों को "समाप्त होने वाले प्राकृतिक संसाधन" क्यों माना जाता है? हमें इनका संरक्षण क्यों करना चाहिए?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: जीवाश्म ईंधनों (कोयला, पेट्रोलियम) के बनने में प्रकृति को करोड़ों (लाखों) वर्ष लगते हैं। वर्तमान में हम जिस तीव्र गति से इनका दोहन कर रहे हैं, उस गति से अगले कुछ दशकों (100-200 वर्षों) में इनके ज्ञात भंडार समाप्त हो जाएँगे। मानव प्रयोगशाला में इन्हें तुरंत नहीं बना सकता। अतः भावी पीढ़ियों के लिए ऊर्जा सुनिश्चित करने और वायु प्रदूषण व ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने के लिए इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
उदाहरण 5
प्रश्न 5: PCRA (पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ) द्वारा वाहन चालकों को पेट्रोल/डीजल बचाने के लिए दिए गए मुख्य सुझाव क्या हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: PCRA के चार प्रमुख सुझाव हैं:\n1. गाड़ी मध्यम और एकसमान (45-55 किमी/घंटा) गति से चलाएँ।\n2. ट्रैफिक सिग्नल पर अथवा प्रतीक्षा के दौरान गाड़ी का इंजन बंद कर दें।\n3. टायरों का हवा का दबाव हमेशा सही रखें (कम दबाव से ईंधन अधिक जलता है)।\n4. वाहन का नियमित रखरखाव और सर्विसिंग समय पर कराएँ।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि कोयला और पेट्रोलियम थोड़े ही समय में दोबारा बन सकते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जीवाश्म ईंधनों के निर्माण में करोड़ों वर्ष लगते हैं; यह मानव जीवन-काल में अनवीकरणीय हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सड़क बनाने में आज भी कोलतार का ही उपयोग होने की गलत धारणा।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आजकल सड़कों की पक्की सतह बनाने के लिए कोलतार के स्थान पर पेट्रोलियम उत्पाद "बिटुमेन (Bitumen)" का उपयोग किया जाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

LPG और CNG को एक ही गैस समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

LPG मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का पेट्रोलियम द्रवित रूप है, जबकि CNG संपीडित प्राकृतिक गैस (मुख्यतः मीथेन) है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

भू-वैज्ञानिक जीवाश्म संचय अपरगम्य चट्टान (Cap Rock) 1. प्राकृतिक गैस (Gas) 2. पेट्रोलियम तेल (Crude Oil) 3. जल (Water - भारी तल) 4. कोयला संस्तर (Coal Seam) कच्चा तेल 400°C LPG गैस (< 40°C) पेट्रोल (कार/दोपहिया) केरोसीन (जेट ईंधन) डीजल (ट्रक/बस/ट्रेन) स्नेहक तेल (मशीनें) बिटुमेन (सड़क निर्माण) अध्याय 3: कोयला और पेट्रोलियम (COAL & PETROLEUM) ऊर्जा संरक्षण: PCRA नियम अपनाएँ • लाल बत्ती पर इंजन बंद करें • सीमित जीवाश्म ईंधन बचाएँ

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. प्राकृतिक संसाधन दो प्रकार के होते हैं: अक्षय (सूर्य, वायु) और समाप्त होने वाले (कोयला, पेट्रोलियम)।
मुख्य बिंदु 2
  1. कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस का निर्माण मृत सजीवों के अवशेषों से हुआ, अतः ये जीवाश्म ईंधन कहलाते हैं।
मुख्य बिंदु 3
  1. 300 मिलियन वर्ष पूर्व घने वनों के उच्च दाब व ताप पर दबने से कोयला बना; यह प्रक्रम कार्बनीकरण कहलाता है।
मुख्य बिंदु 4
  1. कोयले के भंजक आसवन से कोक (शुद्ध कार्बन), कोलतार (200 पदार्थों का मिश्रण) और कोयला गैस प्राप्त होते हैं।
मुख्य बिंदु 5
  1. पेट्रोलियम समुद्र में मृत जीवों के उच्च ताप-दाब में अपघटन से बना; तेल व गैस जल के ऊपर तैरते हैं।
मुख्य बिंदु 6
  1. पेट्रोलियम का प्रभाजी आसवन करके LPG, पेट्रोल, मिट्टी का तेल, डीजल, मोम और बिटुमेन अलग किए जाते हैं।
मुख्य बिंदु 7
  1. प्राकृतिक गैस का मुख्य घटक मीथेन (CH4) है; संपीडित रूप में इसे CNG कहते हैं जो एक स्वच्छ ईंधन है।
मुख्य बिंदु 8
  1. सड़कों की पक्की सतह बनाने में आजकल कोलतार के स्थान पर बिटुमेन का उपयोग किया जाता है।
मुख्य बिंदु 9
  1. जीवाश्म ईंधनों के दहन से वायु प्रदूषण, कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता और ग्लोबल वार्मिंग होती है।
मुख्य बिंदु 10
  1. PCRA संस्था नागरिकों को वाहनों में पेट्रोल और डीजल बचाने के वैज्ञानिक दिशा-निर्देश प्रदान करती है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
कार्बनीकरण (Carbonisation) किसे कहते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: मृत वनस्पति के धीमे रासायनिक प्रक्रम द्वारा कोयले में परिवर्तित होने को कार्बनीकरण कहते हैं।
करोड़ों वर्षों में उच्च ताप, दाब और वायु की अनुपस्थिति में लकड़ी कोयले में बदल जाती है।
2
सड़क निर्माण में कोलतार के स्थान पर आजकल किस पेट्रोलियम उत्पाद का उपयोग किया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: बिटुमेन (Bitumen)।
बिटुमेन पेट्रोलियम परिष्करण का गाढ़ा अवशेष है जो पक्की, टिकाऊ सड़कें बनाता है।
3
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की परत जल की परत के ऊपर क्यों स्थित होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि तेल और गैस का घनत्व जल से कम होता है, अतः वे जल के ऊपर तैरते हैं और उसमें नहीं घुलते।
कम घनत्व के कारण हाइड्रोकार्बन चट्टानों के बीच जल की सतह के ऊपर जमा हो जाते हैं।
4
कोक के दो प्रमुख औद्योगिक उपयोग बताइए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
  1. इस्पात (Steel) के निर्माण में। 2. कई धातुओं के निष्कर्षण में अपचायक के रूप में।

कोक में लगभग 98% शुद्ध कार्बन होता है और यह धुआँ रहित उच्च ताप देता है।
5
सीएनजी (CNG) को वाहनों के लिए आदर्श और स्वच्छ ईंधन क्यों माना जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि यह पूर्ण दहन करती है, कोई धुआँ या कालिख नहीं छोड़ती और न्यूनतम प्रदूषण करती है।
CNG का मुख्य घटक मीथेन (CH4) है, जो पेट्रोल/डीजल की तुलना में सबसे कम कार्बन छोड़ता है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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