वनों को काटकर प्राप्त भूमि का अन्य कार्यों में उपयोग करना वनोन्मूलन (Deforestation) कहलाता है। इसके प्रमुख कारण और गंभीर परिणाम निम्नलिखित हैं:
- वनोन्मूलन के मानव-निर्मित कारण: कृषि के लिए भूमि प्राप्त करना, औद्योगीकरण व शहरी बस्तियों का निर्माण, इमारती लकड़ी और फर्नीचर के लिए पेड़ों की अंधाधुंध कटाई।
- प्राकृतिक कारण: दावानल (जंगल की भीषण आग) और गंभीर सूखा।
- भौमजल स्तर में गिरावट व सूखा: पेड़ कम होने से जल चक्र असंतुलित हो जाता है, वर्षा कम होती है और सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है।
- ग्लोबल वार्मिंग: प्रकाश-संश्लेषण के लिए पौधों को CO2 की आवश्यकता होती है। कम वृक्षों का अर्थ है CO2 का कम उपभोग, जिससे वायुमंडल में CO2 बढ़कर पृथ्वी के ताप को बढ़ा देती है।
- मरुस्थलीकरण (Desertification): मिट्टी पर वृक्षों का आवरण न होने से वायु और वर्षा द्वारा मिट्टी की सबसे उपजाऊ ऊपरी परत (ह्यूमस युक्त) बह जाती है। धीरे-धीरे उपजाऊ भूमि कठोर, पथरीली और अनुपजाऊ मरुस्थल में परिवर्तित हो जाती है; इस प्रक्रम को मरुस्थलीकरण कहते हैं।