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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 8 • Science • अध्याय 5
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण (Conservation of Plants and Animals)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT कक्षा 8 विज्ञान का पंचम अध्याय "पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण" (Conservation of Plants and Animals) जैव विविधता की रक्षा, पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन और वन्यजीव सुरक्षा का एक अनिवार्य अध्याय है। झारखण्ड अपने समृद्ध वनों, बेतला राष्ट्रीय उद्यान, पलामू टाइगर रिजर्व और दलमा वन्यजीव अभयारण्य के लिए विख्यात है। इस अध्याय में वनोन्मूलन के भयावह कारण व परिणाम (मरुस्थलीकरण, बाढ़, सूखा, भूजल ह्रास), संरक्षित क्षेत्रों (वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, जैवमंडल निचय), स्थानिक प्रजातियों (Endemic Species), संकटापन्न जातियों (Endangered Species), रेड डाटा पुस्तक (Red Data Book), प्रवास (Migration), कागज के पुनर्चक्रण और पुनर्वनरोपण (Reforestation) का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

🌳 बेतला के घने जंगलों से उड़ते साइबेरियन क्रेन तक: वन्यजीवों की पुकार!

क्या आप जानते हैं कि हर मिनट पृथ्वी से दर्जनों फुटबॉल मैदानों जितने घने जंगल हमेशा के लिए मिटाए जा रहे हैं? जब पेड़ कटते हैं, तो न केवल बाघ और हाथी बेघर होते हैं, बल्कि उपजाऊ जमीन बंजर रेगिस्तान में बदलने लगती है। क्या हमारी आने वाली पीढ़ियाँ बाघ और पांडा को केवल किताबों में देख पाएँगी? रेड डाटा बुक क्या है और हम कागज बचाकर वनों को कैसे नया जीवन दे सकते हैं? आइए, जैव विविधता के इस जीवन-रक्षक महाकुंभ को समझें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

झारखण्ड का शाब्दिक अर्थ ही "झाड़ियों और वनों की भूमि" है। वनों और वन्यजीवों का विनाश न केवल आदिवासी समुदायों की आजीविका छीनता है, बल्कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन, सूखा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ाता है। इस अध्याय का अध्ययन विद्यार्थियों में वन्यजीवों के प्रति संवेदना, पर्यावरण संरक्षण के विधिक प्रावधानों की समझ और "संरक्षण ही जीवन है" के प्रति सक्रिय नागरिक जिम्मेदारी विकसित करता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • सजीव एक-दूसरे पर और अपने भौतिक पर्यावरण पर भोजन, आवास व सुरक्षा के लिए परस्पर निर्भर हैं।
  • पौधे प्रकाश-संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन का उत्सर्जन और हानिकारक CO2 का अवशोषण करते हैं।
  • वनों की कटाई से मिट्टी का कटाव (अपरदन) तेजी से होता है और उपजाऊ परत बह जाती है।
  • विभिन्न जंतुओं के अपने प्राकृतिक वास (Natural Habitats) होते हैं जहाँ वे अनुकूलित रहते हैं।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • वनोन्मूलन (Deforestation) के कारणों और मरुस्थलीकरण (Desertification) की वैज्ञानिक प्रक्रिया को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve), राष्ट्रीय उद्यान (National Park) और वन्यजीव अभयारण्य (Sanctuary) में तुलनात्मक अंतर बता सकेंगे।
  • स्थानिक (Endemic), विलुप्त (Extinct) और संकटापन्न (Endangered) प्रजातियों को उदाहरण सहित वर्गीकृत कर सकेंगे।
  • रेड डाटा बुक (Red Data Book), पक्षी प्रवास (Migration) और पुनर्वनरोपण (Reforestation) के महत्व का प्रतिपादन कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. वनोन्मूलन (Deforestation): कारण,...
2 2. संरक्षित क्षेत्र: अभयारण्य, राष्...
3 3. वनस्पतिजात, प्राणिजात एवं स्थानि...
4 4. प्रोजेक्ट टाइगर, रेड डाटा बुक, प...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. वनोन्मूलन (Deforestation): कारण, मरुस्थलीकरण एवं पर्यावरणीय प्रभाव

वनों को काटकर प्राप्त भूमि का अन्य कार्यों में उपयोग करना वनोन्मूलन (Deforestation) कहलाता है। इसके प्रमुख कारण और गंभीर परिणाम निम्नलिखित हैं:

  • वनोन्मूलन के मानव-निर्मित कारण: कृषि के लिए भूमि प्राप्त करना, औद्योगीकरण व शहरी बस्तियों का निर्माण, इमारती लकड़ी और फर्नीचर के लिए पेड़ों की अंधाधुंध कटाई।
  • प्राकृतिक कारण: दावानल (जंगल की भीषण आग) और गंभीर सूखा।
  • भौमजल स्तर में गिरावट व सूखा: पेड़ कम होने से जल चक्र असंतुलित हो जाता है, वर्षा कम होती है और सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है।
  • ग्लोबल वार्मिंग: प्रकाश-संश्लेषण के लिए पौधों को CO2 की आवश्यकता होती है। कम वृक्षों का अर्थ है CO2 का कम उपभोग, जिससे वायुमंडल में CO2 बढ़कर पृथ्वी के ताप को बढ़ा देती है।
  • मरुस्थलीकरण (Desertification): मिट्टी पर वृक्षों का आवरण न होने से वायु और वर्षा द्वारा मिट्टी की सबसे उपजाऊ ऊपरी परत (ह्यूमस युक्त) बह जाती है। धीरे-धीरे उपजाऊ भूमि कठोर, पथरीली और अनुपजाऊ मरुस्थल में परिवर्तित हो जाती है; इस प्रक्रम को मरुस्थलीकरण कहते हैं।

2. संरक्षित क्षेत्र: अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान एवं जैवमंडल निचय

वनस्पतिजात और प्राणिजात तथा उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण हेतु सरकार द्वारा विशेष संरक्षित क्षेत्र (Protected Areas) घोषित किए गए हैं:

संरक्षित क्षेत्र का प्रकार वैधानिक परिभाषा एवं विशेषता मानव गतिविधियों की अनुमति प्रमुख उदाहरण
वन्यजीव अभयारण्य (Sanctuary) वह क्षेत्र जहाँ वन्य प्राणी बिना किसी बाधा के प्राकृतिक वास में सुरक्षित रहते हैं। सीमित मानवीय गतिविधियाँ (पशु चराना, औषधि संग्रह) बिना जीवों को नुकसान पहुँचाए अनुमत। दलमा अभयारण्य (झारखण्ड - हाथी), बोरी अभयारण्य।
राष्ट्रीय उद्यान (National Park) वन्य जंतुओं के लिए आरक्षित विशाल प्राकृतिक क्षेत्र जहाँ वे प्राकृतिक वास व संसाधनों का उन्मुक्त उपयोग करते हैं। मानव गतिविधियाँ (चराई, शिकार, वनोपज दोहन) पूर्णतः प्रतिबंधित होती हैं। बेतला राष्ट्रीय उद्यान (लातेहार, झारखण्ड), सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, काजीरंगा।
जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve) पौधों, जंतुओं, सूक्ष्मजीवों और उस क्षेत्र के आदिवासियों के पारंपरिक जीवन के संरक्षण हेतु विशाल बहुउद्देश्यीय संरक्षित क्षेत्र। विभिन्न जोनों (कोर, बफर, ट्रांजिशन) में विभाजित; अनुसंधान व सतत विकास अनुमत। पंचमढ़ी जैवमंडल निचय (इसमें सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान और बोरी अभयारण्य समाहित हैं)।

3. वनस्पतिजात, प्राणिजात एवं स्थानिक प्रजातियाँ

जैव विविधता के विशिष्ट घटकों का वैज्ञानिक वर्गीकरण:

  • वनस्पतिजात (Flora): किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले सभी पेड़-पौधों को उस क्षेत्र का वनस्पतिजात कहते हैं; जैसे—पंचमढ़ी क्षेत्र में साल, सागौन, आम, जामुन, सिल्वर फर्न, अर्जुन।
  • प्राणिजात (Fauna): किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले सभी जीव-जंतुओं को प्राणिजात कहते हैं; जैसे—चिंकारा, नीलगाय, भौंकने वाला हिरण, चीतल, तेंदुआ, जंगली कुत्ता।
  • स्थानिक प्रजातियाँ (Endemic Species): पौधे एवं जंतुओं की वे प्रजातियाँ जो किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में ही विशेष रूप से पाई जाती हैं और प्राकृतिक रूप से अन्यत्र कहीं नहीं मिलतीं; जैसे—पंचमढ़ी क्षेत्र के स्थानिक वनस्पति साल और जंगली आम, तथा स्थानिक जन्तु भारतीय विशाल गिलहरी (Bison) और उड़ने वाली गिलहरी। इनके आवास नष्ट होने से इन पर अस्तित्व का संकट आ जाता है।

4. प्रोजेक्ट टाइगर, रेड डाटा बुक, प्रवास एवं पुनर्वनरोपण

विलुप्ति के कगार पर पहुँचे वन्यजीवों की सुरक्षा हेतु अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय पहलें:

  • प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger, 1973): भारत सरकार द्वारा बाघों की घटती संख्या को बचाने और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा हेतु यह महापरियोजना शुरू की गई थी। पलामू (झारखण्ड) और सतपुड़ा (म.प्र.) इसके प्रमुख केंद्र हैं।
  • संकटापन्न प्रजातियाँ (Endangered Species): वे प्रजातियाँ जिनकी संख्या एक निर्धारित स्तर से कम होती जा रही है और यदि उनका संरक्षण न किया गया, तो वे निकट भविष्य में विलुप्त हो सकती हैं; जैसे—बाघ, एशियाई शेर, हिम तेंदुआ, घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन।
  • रेड डाटा पुस्तक (Red Data Book): यह वह अंतरराष्ट्रीय स्रोत पुस्तक है जिसमें सभी संकटापन्न पादपों और जंतुओं का विस्तृत रिकॉर्ड रखा जाता है। इसे IUCN (अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ) द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
  • प्रवास (Migration): जलवायु में अत्यधिक ठंड या विषम परिस्थितियों के कारण पक्षी प्रत्येक वर्ष एक निश्चित समय पर सुदूर क्षेत्रों से हजारों किलोमीटर उड़कर प्रजनन हेतु अनुकूल स्थानों पर पहुँचते हैं; जैसे—साइबेरियन क्रेन (रूस से भारत के भरतपुर व सुल्तानपुर में)।
  • कागज का पुनर्चक्रण: 1 टन साफ कागज बनाने के लिए 17 पूर्ण विकसित वृक्षों को काटा जाता है। कागज का 5 से 7 बार पुनर्चक्रण किया जा सकता है। कागज बचाकर हम न केवल पेड़ों को बचाते हैं, बल्कि जल व हानिकारक रसायनों की भी बचत करते हैं।
  • पुनर्वनरोपण (Reforestation): काटे गए वनों के स्थान पर नए वृक्ष लगाना पुनर्वनरोपण कहलाता है। हमें कम से कम उतने पेड़ अवश्य लगाने चाहिए जितने हम काटते हैं। भारत में वन संरक्षण अधिनियम (Forest Conservation Act, 1980) वनों की रक्षा करता है।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

मरुस्थलीकरण का समीकरण
वनोन्मूलन → मृदा अपरदन → ऊपरी ह्यूमस परत नष्ट → बंजर मरुस्थल (Desertification)
उपजाऊ भूमि के रेगिस्तान में बदलने का भू-पारिस्थितिक चक्र।
कागज बचत पर्यावरण सूत्र
1 टन कागज = 17 पूर्ण विकसित वृक्ष + भारी जल व ऊर्जा खपत
कागज का 5 से 7 बार तक पुनर्चक्रण (Recycling) संभव है।
रेड डाटा बुक (IUCN)
Pink Pages (संकटापन्न प्रजातियाँ) + Green Pages (पुनर्प्राप्त प्रजातियाँ)
वैश्विक जैव विविधता का आधिकारिक वैज्ञानिक दस्तावेज।
प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger)
प्रारंभ: 1973 (भारत सरकार) • उद्देश्य: बाघों की आबादी का पुनरुत्थान
शीर्ष परभक्षी (Top Predator) को बचाकर पूरे पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा।
पुनर्वनरोपण का सुनहरा नियम
रोपित वृक्षों की संख्या ≥ काटे गए वृक्षों की संख्या (स्थानीय देशी प्रजातियाँ)
पारिस्थितिक तंत्र की जैव विविधता को अक्षुण्ण बनाए रखने की पूर्व-शर्त।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1: वनोन्मूलन से वर्षा दर और भौमजल स्तर में कमी क्यों आती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: वृक्षों की पत्तियाँ वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) द्वारा भारी मात्रा में जलवाष्प वायुमंडल में छोड़ती हैं, जो बादलों के संघनन और वर्षा में मुख्य भूमिका निभाती है। जब वनों की अंधाधुंध कटाई होती है, तो वायुमंडल में आर्द्रता घट जाती है और वर्षा कम हो जाती है। इसके अतिरिक्त, वृक्षों की जड़ें वर्षा जल को रोककर मिट्टी में रिसने (अंतःस्रवण) में सहायता करती हैं। पेड़ों के अभाव में वर्षा का जल बह जाता है और भूमिगत जल का पुनर्भरण नहीं हो पाता, जिससे भौमजल स्तर गिर जाता है।
उदाहरण 2
प्रश्न 2: जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve) और राष्ट्रीय उद्यान (National Park) में दो प्रमुख अंतर बताइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\n1. विस्तार एवं उद्देश्य: जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र एक विशाल भू-भाग होता है जिसका उद्देश्य जैव विविधता के साथ-साथ वहाँ के आदिवासियों की पारंपरिक जीवन-शैली का संरक्षण करना है। राष्ट्रीय उद्यान वन्य जीवों के संरक्षण के लिए अपेक्षाकृत केंद्रित प्राकृतिक क्षेत्र होता है।\n2. मानवीय हस्तक्षेप: जैवमंडल क्षेत्र के बाहरी क्षेत्रों (बफर व ट्रांजिशन जोन) में नियंत्रित मानवीय बस्तियाँ, कृषि और अनुसंधान अनुमत होते हैं; जबकि राष्ट्रीय उद्यान में किसी भी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप (शिकार, पशु चराई, वनोपज संग्रह) पूर्णतः प्रतिबंधित होता है।
उदाहरण 3
प्रश्न 3: स्थानिक प्रजातियाँ (Endemic Species) किन्हें कहते हैं? उदाहरण देकर समझाइए कि इनके अस्तित्व पर संकट क्यों बढ़ रहा है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: पौधे और जंतुओं की वे प्रजातियाँ जो किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में ही प्राकृतिक रूप से पाई जाती हैं और संसार में अन्यत्र कहीं नहीं मिलतीं, स्थानिक प्रजातियाँ कहलाती हैं (जैसे पंचमढ़ी की भारतीय विशाल गिलहरी और जंगली आम)।\nसंकट का कारण: स्थानिक प्रजातियों का दायरा सीमित होता है। जब मानव उनके प्राकृतिक आवासों को नष्ट करता है, बाहर से नई विदेशी आक्रामक प्रजातियाँ लाता है या जंगलों को काटता है, तो वे अन्यत्र जीवित नहीं रह पातीं और उनके विलुप्त होने का भारी खतरा उत्पन्न हो जाता है।
उदाहरण 4
प्रश्न 4: रेड डाटा पुस्तक क्या है? इसके संधारण से क्या वैज्ञानिक लाभ है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: रेड डाटा पुस्तक वह अंतरराष्ट्रीय संदर्भ स्रोत पुस्तक है जिसमें सभी संकटापन्न (विलुप्ति के कगार पर पहुँचे) पादपों, जंतुओं और अन्य जीवों का आधिकारिक वैज्ञानिक रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है। इसे IUCN संस्था द्वारा जारी किया जाता है।\nलाभ: इससे सरकारों और वैज्ञानिकों को यह स्पष्ट जानकारी मिलती है कि किन प्रजातियों के विलुप्त होने का सबसे अधिक खतरा है, जिससे उनके संरक्षण के लिए समय रहते प्रोजेक्ट टाइगर, अभयारण्य निर्माण और शिकार पर प्रतिबंध जैसे प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
उदाहरण 5
प्रश्न 5: कागज का पुनर्चक्रण व बचत करना वनों के संरक्षण में किस प्रकार सीधे सहायक है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: कागज लकड़ी की लुगदी (पल्प) से बनाया जाता है। मात्र 1 टन कागज तैयार करने के लिए लगभग 17 पूर्ण विकसित, विशाल वृक्षों को काटा जाता है तथा लाखों लीटर जल व हानिकारक रसायनों का उपयोग होता है। यदि प्रत्येक विद्यार्थी एक दिन में केवल एक पन्ना भी बचाए या पुराने कागज को 5-7 बार पुनर्चक्रित कराए, तो हम प्रतिवर्ष लाखों वृक्षों को कटने से बचा सकते हैं, जिससे वन, वन्यजीव और हमारा पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

चिड़ियाघर (Zoo) और वन्यजीव अभयारण्य (Sanctuary) को एक समान मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

चिड़ियाघर एक कृत्रिम बाड़ा है जहाँ जंतु पिंजरों में कैद रहते हैं; अभयारण्य एक विशाल प्राकृतिक वन क्षेत्र है जहाँ वन्यजीव उन्मुक्त रूप से घूमते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विलुप्त (Extinct) और संकटापन्न (Endangered) में अंतर न समझ पाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

विलुप्त प्रजातियाँ (जैसे डायनासोर, डोडो) पृथ्वी से पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं; संकटापन्न प्रजातियाँ (जैसे बाघ) वे हैं जो अभी जीवित हैं लेकिन विलुप्ति के खतरे में हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पुनर्वनरोपण में कोई भी विदेशी पेड़ लगाने की भूल करना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पुनर्वनरोपण में उसी क्षेत्र के मूल (स्थानीय/देशी) वृक्षों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन बना रहे।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

Project Tiger (1973) प्रवासी पक्षी (Migration) संरक्षित वन (BIOSPHERE) वनोन्मूलन → मरुस्थलीकरण अध्याय 5: पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण (CONSERVATION) रेड डाटा पुस्तक (IUCN) • 1 टन कागज = 17 वृक्ष • पुनर्वनरोपण ही समाधान है

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. वनों की कटाई (वनोन्मूलन) से वर्षा में कमी, भौमजल स्तर में गिरावट और मरुस्थलीकरण होता है।
मुख्य बिंदु 2
  1. उपजाऊ ऊपरी मिट्टी की परत बहने से भूमि का रेगिस्तान में बदलना मरुस्थलीकरण (Desertification) कहलाता है।
मुख्य बिंदु 3
  1. संरक्षित क्षेत्र तीन प्रकार के हैं: वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान और जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र।
मुख्य बिंदु 4
  1. झारखण्ड में बेतला राष्ट्रीय उद्यान और दलमा वन्यजीव अभयारण्य प्रसिद्ध प्राकृतिक संरक्षित क्षेत्र हैं।
मुख्य बिंदु 5
  1. किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पौधों को वनस्पतिजात (Flora) और जंतुओं को प्राणिजात (Fauna) कहते हैं।
मुख्य बिंदु 6
  1. किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में ही पाई जाने वाली प्रजातियाँ स्थानिक प्रजातियाँ (Endemic Species) कहलाती हैं।
मुख्य बिंदु 7
  1. वे प्रजातियाँ जो विलुप्त होने की कगार पर हैं, संकटापन्न प्रजातियाँ (Endangered Species) कहलाती हैं।
मुख्य बिंदु 8
  1. रेड डाटा बुक (Red Data Book) में सभी संकटापन्न जातियों का आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड रखा जाता है।
मुख्य बिंदु 9
  1. विषम जलवायु से बचने और प्रजनन हेतु पक्षियों का दूरस्थ यात्रा करना प्रवास (Migration) कहलाता है।
मुख्य बिंदु 10
  1. 1 टन कागज बनाने के लिए 17 पेड़ कटते हैं; कागज का पुनर्चक्रण और पुनर्वनरोपण वनों के संरक्षण के मुख्य उपाय हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
मरुस्थलीकरण (Desertification) किसे कहते हैं और इसका मुख्य कारण क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: उपजाऊ भूमि का धीरे-धीरे बंजर मरुस्थल में परिवर्तित होना मरुस्थलीकरण कहलाता है; इसका मुख्य कारण वनोन्मूलन है।
पेड़ों के कटने से मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ ह्यूमस परत अपरदित हो जाती है और केवल पथरीली मिट्टी बचती है।
2
स्थानिक प्रजाति (Endemic Species) का एक पादप और एक जन्तु उदाहरण दीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पादप: जंगली आम / साल; जन्तु: भारतीय विशाल गिलहरी (Bison)।
ये प्रजातियाँ केवल पंचमढ़ी जैवमंडल जैसे विशिष्ट क्षेत्र में ही प्राकृतिक रूप से पाई जाती हैं।
3
प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) कब शुरू हुआ और इसका मुख्य लक्ष्य क्या था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: यह 1973 में शुरू हुआ था; इसका लक्ष्य भारत में बाघों की उत्तरजीविता और संवर्धन सुनिश्चित करना था।
अवैध शिकार और वन विनाश से घटती बाघ आबादी को बचाने के लिए यह परियोजना लागू की गई थी।
4
रेड डाटा पुस्तक (Red Data Book) का संधारण किस अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा किया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: IUCN (International Union for Conservation of Nature)।
यह संस्था वैश्विक स्तर पर संकटापन्न पादपों और जंतुओं की सूची का संधारण करती है।
5
1 टन साफ कागज बनाने के लिए कितने पूर्ण विकसित वृक्षों को काटा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: लगभग 17 पूर्ण विकसित वृक्षों को।
कागज बचाने और पुनर्चक्रित करने से हम सीधे तौर पर वनों और जल संसाधनों की रक्षा करते हैं।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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