Follow Us
माध्यम चुनें / Select Medium:
Eng (English) Hindi (हिन्दी)
झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 8 • Science • अध्याय 1
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

फसल उत्पादन एवं प्रबंध (Crop Production and Management)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 विज्ञान का प्रथम अध्याय "फसल उत्पादन एवं प्रबंध" (Crop Production and Management) मानव सभ्यता के पोषण, खाद्य सुरक्षा और कृषि विज्ञान की आधारशिला है। जब एक ही किस्म के पौधे किसी बड़े भू-भाग पर बड़े पैमाने पर उगाए जाते हैं, तो उसे "फसल" कहते हैं। इस अध्याय में फसलों के वर्गीकरण (खरीफ एवं रबी), कृषि पद्धतियों के सात अनिवार्य चरणों—मिट्टी तैयार करना, बुआई, खाद एवं उर्वरक मिलाना, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, कटाई, थ्रेशिंग तथा आधुनिक वैज्ञानिक भंडारण का सांगोपांग व प्रामाणिक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

🌾 140 करोड़ लोगों की थाली तक कैसे पहुँचता है भोजन?

क्या आपने कभी सोचा है कि जब हम सुबह रोटी या चावल खाते हैं, तो वह बीज से लेकर हमारी थाली तक की कितनी जटिल और श्रमसाध्य वैज्ञानिक यात्रा तय करता है? किसान केवल बीज नहीं बोते, बल्कि वे मिट्टी की सूक्ष्म जैविकी, जल प्रबंधन, पोषण चक्र और जलवायु के साथ सामंजस्य स्थापित करते हैं। आधुनिक ड्रिप सिंचाई और उन्नत कृषि यंत्रों ने इस पारंपरिक कला को एक उच्च तकनीकी विज्ञान में कैसे बदल दिया है? आइए, कृषि विज्ञान के इस अद्भुत सफर को गहराई से समझें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

भारत एक कृषि प्रधान देश है और झारखण्ड की 70% से अधिक ग्रामीण आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन, सीमित जल संसाधन और बढ़ती जनसंख्या के दौर में पारम्परिक खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों (जैसे ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई, संतुलित NPK उर्वरक, जैव-कीटनाशक और साइलो भंडारण) का ज्ञान होना न केवल अकादमिक सफलता के लिए, बल्कि भावी खाद्य सुरक्षा व आत्मनिर्भरता के लिए भी अपरिहार्य है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • सजीवों को ऊर्जा, वृद्धि व स्वास्थ्य के लिए भोजन (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन) की निरंतर आवश्यकता होती है।
  • पौधे प्रकाश-संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, जबकि मनुष्य व जन्तु प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पौधों पर निर्भर हैं।
  • पौधों की स्वस्थ वृद्धि के लिए मिट्टी, जल, वायु और सूर्य के प्रकाश की अनिवार्य भूमिका होती है।
  • ऋतुओं के परिवर्तन (वर्षा, शीत, ग्रीष्म) का पौधों की जीवन-प्रक्रियाओं और फसलों के जीवन चक्र पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • ऋतुओं के आधार पर खरीफ (Kharif) और रबी (Rabi) फसलों में सप्रमाण वैज्ञानिक अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
  • फसल उत्पादन के सभी सात चरणों (कृषि पद्धतियों) का विस्तृत, क्रमिक और वैज्ञानिक विश्लेषण कर सकेंगे।
  • जैविक खाद (Manure) और रासायनिक उर्वरक (Fertilizers) की तुलना करते हुए मृदा स्वास्थ्य पर उनके प्रभावों का मूल्यांकन कर सकेंगे।
  • जल संरक्षण के आधुनिक सिंचाई तंत्रों (ड्रिप व स्प्रिंकलर) और सुरक्षित अनाज भंडारण विधियों (साइलो) का निरूपण कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. फसल की अवधारणा एवं ऋतु-आधारित वर...
2 2. कृषि पद्धतियाँ: प्रथम चार मौलिक...
3 3. खाद बनाम उर्वरक तथा आधुनिक सिंचा...
4 4. खरपतवार नियंत्रण, कटाई एवं सुरक्...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. फसल की अवधारणा एवं ऋतु-आधारित वर्गीकरण

जब एक ही किस्म के उपयोगी पौधे किसी बड़े क्षेत्र में भोजन, रेशे या अन्य उपयोगी उत्पाद प्राप्त करने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर उगाए जाते हैं, तो उसे फसल (Crop) कहते हैं। भारत की विशाल भौगोलिक व जलवायविक विविधता के कारण फसलों को मुख्य रूप से दो प्रमुख श्रेणियों में बाँटा गया है:

वर्गीकरण का आधार खरीफ फसलें (Kharif Crops) रबी फसलें (Rabi Crops)
बुआई व कटाई का समय वर्षा ऋतु (जून से सितम्बर) में बोई और अक्टूबर-नवम्बर में काटी जाती हैं। शीत ऋतु (अक्टूबर से मार्च) में बोई और मार्च-अप्रैल में काटी जाती हैं।
जल की आवश्यकता अधिक मात्रा में जल और उच्च तापमान की आवश्यकता होती है। कम जल तथा अंकुरण के समय शीतोष्ण और पकने के समय शुष्क धूप की आवश्यकता।
प्रमुख उदाहरण धान (चावल), मक्का, सोयाबीन, मूँगफली, कपास। गेहूँ, चना, मटर, सरसों, अलसी (तीसी)।

जायद फसलें (Zaid Crops):

रबी और खरीफ के बीच ग्रीष्म ऋतु (मार्च से जून) में उगाई जाने वाली अल्पकालिक फसलों को जायद कहते हैं; जैसे—तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और विभिन्न ग्रीष्मकालीन सब्जियाँ।

2. कृषि पद्धतियाँ: प्रथम चार मौलिक चरण

फसल उगाने के लिए किसान को एक निश्चित समय-सारणी के अनुसार अनेक क्रियाकलाप करने पड़ते हैं, जिन्हें कृषि पद्धतियाँ (Agricultural Practices) कहते हैं:

  • 1. मिट्टी तैयार करना (Preparation of Soil): यह कृषि का प्रथम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण चरण है। मिट्टी को उलटने-पलटने और पोला (ढीला) करने की प्रक्रिया को जुताई (Ploughing / Tilling) कहते हैं। जुताई से जड़ें गहराई तक जा सकती हैं, श्वसन कर सकती हैं तथा केंचुओं व सूक्ष्मजीवों की वृद्धि तेजी से होती है, जो मिट्टी में ह्यूमस (Humus) बढ़ाते हैं। खेत के बड़े ढेलों को पाटल (Leveller) से तोड़ा जाता है।
  • 2. बुआई (Sowing): बुआई के लिए उच्च गुणवत्ता, साफ और स्वस्थ बीजों का चयन किया जाता है। बीज जल में डालने पर जो खोखले और हल्के बीज तैरने लगते हैं, वे क्षतिग्रस्त होते हैं। बुआई के पारंपरिक औजार (कीपदार हल) के स्थान पर आज सीड ड्रिल (Seed Drill) का उपयोग किया जाता है, जो बीजों को समान दूरी व गहराई पर बोता है तथा बीजों को मिट्टी से ढककर पक्षियों से बचाता है।
  • 3. खाद एवं उर्वरक मिलाना (Adding Manure and Fertilizers): पौधों की निरंतर वृद्धि से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इसकी पूर्ति के लिए खाद (जैविक) व उर्वरक (रासायनिक) मिलाए जाते हैं।
  • 4. सिंचाई (Irrigation): निश्चित समयांतराल पर फसल को जल देना सिंचाई कहलाता है।

3. खाद बनाम उर्वरक तथा आधुनिक सिंचाई तकनीकें

मृदा स्वास्थ्य और फसल गुणवत्ता बनाए रखने के लिए खाद और उर्वरक का विवेकपूर्ण अंतर समझना अनिवार्य है:

तुलना का बिंदु खाद (Organic Manure) उर्वरक (Chemical Fertilizer)
प्रकृति व निर्माण यह एक प्राकृतिक जैविक पदार्थ है जो गोबर, मानव अपशिष्ट और पौधों के अवशेषों के अपघटन से बनता है। खेतों में तैयार होती है। यह एक मानव-निर्मित अकार्बनिक लवण है। इसका निर्माण बड़े कारखानों में रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा होता है।
ह्यूमस (Humus) की मात्रा मिट्टी को प्रचुर मात्रा में जैविक ह्यूमस प्रदान करती है, जिससे जल-धारण क्षमता बढ़ती है। मिट्टी को बिल्कुल भी ह्यूमस प्राप्त नहीं होता। अत्यधिक उपयोग से मिट्टी बंजर व क्षारीय हो सकती है।
पोषक तत्वों की सांद्रता इसमें पादप पोषक तत्व (NPK) तुलनात्मक रूप से कम मात्रा में लेकिन संतुलित होते हैं। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम (NPK) जैसे विशिष्ट पोषक तत्व अत्यधिक उच्च सांद्रता में होते हैं।

आधुनिक सिंचाई प्रणालियाँ (Modern Irrigation Systems):

  • छिड़काव तंत्र (Sprinkler System): इस विधि में ऊर्ध्व पाइपों के सिरों पर घूमने वाले नोजल लगे होते हैं। जब पंप की सहायता से जल मुख्य पाइप में भेजा जाता है, तो यह नोजल से बाहर निकलकर वर्षा की भाँति फसलों पर छिड़कता है। यह असमतल भूमि और रेतीली मिट्टी के लिए अत्यंत उपयोगी है।
  • ड्रिप तंत्र (Drip System): इस तंत्र में जल बूँद-बूँद करके सीधे पौधों की जड़ों के पास गिरता है। इसमें जल का एक बूँद भी व्यर्थ नहीं होता। फलदार पौधों, बगीचों और वृक्षों के लिए यह सर्वोत्तम विधि है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ जल की अत्यधिक कमी है।

4. खरपतवार नियंत्रण, कटाई एवं सुरक्षित भंडारण

फसल की सुरक्षा और कटाई के उपरांत अनाज का संरक्षण उत्पादन प्रक्रिया का अंतिम चरण है:

  • खरपतवार नियंत्रण (Weeding): खेत में मुख्य फसल के साथ स्वतः उगने वाले अवांछित जंगली पौधों को खरपतवार (Weeds) कहते हैं (जैसे—बथुआ, गाजर घास, चौलाई)। ये प्रकाश, जल, स्थान और पोषक तत्वों के लिए मुख्य फसल से प्रतिस्पर्धा करते हैं। इन्हें खुरपी या हाथ से उखाड़कर, अथवा खरपतवारनाशी (Weedicidies) जैसे 2,4-D का छिड़काव करके नष्ट किया जाता है।
  • कटाई एवं थ्रेशिंग (Harvesting and Threshing): फसल पकने के बाद उसे काटना कटाई कहलाता है। इसे दरांती (Sickle) या आधुनिक हार्वेस्टर (Harvester) से काटा जाता है। काटी गई फसल से बीजों/दानों को भूसे से अलग करने की प्रक्रिया को थ्रेशिंग (Threshing) कहते हैं। दोनों कार्य एक साथ कंबाइन मशीन (Combine) द्वारा किए जाते हैं। छोटे किसान फटकना (Winnowing) विधि से दानों को अलग करते हैं।
  • वैज्ञानिक भंडारण (Storage): ताजे कटे दानों में 14% से अधिक नमी होती है। यदि उन्हें बिना सुखाए भंडारित किया जाए, तो कवक और कीट नष्ट कर देते हैं। इसलिए दानों को धूप में सुखाकर जूट के बोरों या धातु के बर्तनों में रखा जाता है। बड़े पैमाने पर बीजों का भंडारण साइलो (Silos) और भंडार गृहों (Granaries) में रासायनिक उपचार व नीम की सूखी पत्तियों के साथ किया जाता है।
  • पशुपालन (Animal Husbandry): बड़े पैमाने पर पशुओं को भोजन, आवास और देखभाल प्रदान कर उनसे दूध, अंडे, मांस व शहद प्राप्त करने की व्यवस्था को पशुपालन कहते हैं।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

फसल का मूल समीकरण
बड़े पैमाने पर उगाए गए समान पौधे = फसल (Crop)
जैसे गेहूँ की फसल का अर्थ है खेत में उगाए गए सभी पौधे गेहूँ के हैं।
NPK पोषक अनुपात
N (नाइट्रोजन) + P (फास्फोरस) + K (पोटेशियम)
रासायनिक उर्वरकों में पौधों की वृद्धि के लिए प्रमुख प्राथमिक तत्व।
ड्रिप सिंचाई जल बचत सूत्र
जल उपयोग दक्षता (WUE) ≥ 90% (पारंपरिक बाढ़ सिंचाई की तुलना में 50-70% बचत)
बूँद-बूँद सीधे मूल तंत्र (Root zone) तक जल आपूर्ति।
सुरक्षित भंडारण मानक
अनाज की नमी ≤ 10-12% + वायु अवरोधी साइलो पात्र
कीटों, जीवाणुओं और कवक के संक्रमण से बचाने की पूर्व-शर्त।
प्रमुख खरपतवारनाशी
2,4-D (2,4-Dichlorophenoxyacetic acid)
चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को मुख्य फसल को क्षति पहुँचाए बिना नष्ट करता है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1: खरीफ और रबी फसलों में तीन प्रमुख अंतर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:\n1. समय: खरीफ फसलें वर्षा ऋतु (जून-सितंबर) में बोई जाती हैं, जबकि रबी फसलें शीत ऋतु (अक्टूबर-मार्च) में उगाई जाती हैं।\n2. जलवायु आवश्यकता: खरीफ फसलों को अधिक जल, उच्च तापमान और आर्द्रता की आवश्यकता होती है; जबकि रबी फसलों को अंकुरण के समय ठंडा और पकते समय शुष्क व गर्म वातावरण चाहिए।\n3. उदाहरण: खरीफ के उदाहरण—धान (चावल), मक्का, सोयाबीन; रबी के उदाहरण—गेहूँ, चना, सरसों, मटर।
उदाहरण 2
प्रश्न 2: मिट्टी तैयार करने (जुताई) से पौधों को क्या-क्या वैज्ञानिक लाभ मिलते हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: मिट्टी तैयार करने (जुताई) के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:\n1. मिट्टी पोली होने से पौधों की जड़ें भूमि में गहराई तक सरलता से प्रवेश कर सकती हैं।\n2. पोली मिट्टी में जड़ों को श्वसन के लिए पर्याप्त वायु (ऑक्सीजन) सुलभ होती है।\n3. यह मिट्टी में केंचुओं और सूक्ष्मजीवों की वृद्धि में सहायक है, जो मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा बढ़ाते हैं।\n4. नीचे की पोषक तत्वों से भरपूर उपजाऊ मिट्टी ऊपर आ जाती है, जिससे पौधे पोषक तत्वों का सहज उपयोग कर पाते हैं।
उदाहरण 3
प्रश्न 3: खाद (Manure) को रासायनिक उर्वरक (Fertilizer) की अपेक्षा अधिक पर्यावरण-अनुकूल व बेहतर क्यों माना जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: खाद को उर्वरक से बेहतर मानने के चार मुख्य वैज्ञानिक कारण हैं:\n1. जैविक खाद से मिट्टी की जल-धारण क्षमता (Water holding capacity) में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।\n2. इससे मिट्टी भुरभुरी व सरंध्र हो जाती है, जिससे गैसों का विनिमय सुगम होता है।\n3. इससे मित्र जीवाणुओं (जैसे राइजोबियम) की संख्या में वृद्धि होती है।\n4. यह मिट्टी की भौतिक संरचना को सुधारती है तथा पर्यावरण व भूजल को प्रदूषित नहीं करती।
उदाहरण 4
प्रश्न 4: ड्रिप सिंचाई प्रणाली क्या है और यह जल संकट वाले क्षेत्रों के लिए वरदान क्यों है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: ड्रिप सिंचाई प्रणाली में पाइपों के सूक्ष्म छिद्रों द्वारा जल बूँद-बूँद करके सीधे पौधों के जड़ क्षेत्र में पहुँचाया जाता है। इस विधि में वाष्पीकरण, रिसाव या बहाव से जल का तनिक भी अपव्यय नहीं होता। पौधों को आवश्यकतानुसार निरंतर नमी मिलती रहती है, जिससे कम पानी में भी अधिकतम उत्पादन प्राप्त होता है। अतः यह जल संकट और अल्प वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए एक वरदान है।
उदाहरण 5
प्रश्न 5: कटी हुई फसल के दानों को भंडारण से पूर्व धूप में सुखाना क्यों अनिवार्य है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: ताजी कटी फसल के दानों में नमी (आर्द्रता) की मात्रा बहुत अधिक होती है। यदि नम दानों का सीधे भंडारण कर दिया जाए, तो उनमें सूक्ष्मजीवों (विशेषकर फफूंद/कवक) और कीटों का संक्रमण बहुत तेजी से होता है, जिससे बीज सड़ जाते हैं और उनकी अंकुरण क्षमता नष्ट हो जाती है। धूप में सुखाने से दानों की नमी 10-12% तक कम हो जाती है, जिससे वे महीनों तक सुरक्षित रहते हैं।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

धान को रबी मौसम (सर्दियों) में बोने का भ्रम पालना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

धान को अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए इसे केवल वर्षा ऋतु (खरीफ) में ही उगाया जा सकता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

उर्वरक और खाद को एक ही पदार्थ समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

उर्वरक कारखानों में बने अकार्बनिक रासायनिक लवण हैं (जैसे यूरिया, NPK), जबकि खाद खेतों में जैविक अपशिष्टों के अपघटन से तैयार प्राकृतिक पदार्थ है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

थ्रेशिंग और विनोइंग (फटकना) में भ्रम होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

थ्रेशिंग का अर्थ बालियों से दानों को अलग करना है, जबकि विनोइंग वायु के झोंके द्वारा हल्के भूसे को भारी दानों से अलग करने की प्रक्रिया है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

कृषि पद्धतियाँ (7 AGRICULTURAL PRACTICES) 1. मिट्टी तैयार जुताई (हल) 2. बुआई सीड ड्रिल 3. खाद व उर्वरक जैविक + NPK 4. सिंचाई ड्रिप / स्प्रिंकलर 5. खरपतवार रक्षा निराई (2,4-D) 6. कटाई कंबाइन / थ्रेशिंग 7. भंडारण साइलो (Silos) ड्रिप सिंचाई अध्याय 1: फसल उत्पादन एवं प्रबंध (CROP PRODUCTION)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. जब एक ही किस्म के पौधे बड़े पैमाने पर किसी स्थान पर उगाए जाते हैं, तो उसे फसल (Crop) कहते हैं।
मुख्य बिंदु 2
  1. वर्षा ऋतु (जून-सितम्बर) में उगाई जाने वाली फसलें खरीफ (धान, मक्का, सोयाबीन) कहलाती हैं।
मुख्य बिंदु 3
  1. शीत ऋतु (अक्टूबर-मार्च) में उगाई जाने वाली फसलें रबी (गेहूँ, चना, मटर, सरसों) कहलाती हैं।
मुख्य बिंदु 4
  1. कृषि पद्धतियों के 7 मुख्य चरण हैं: मिट्टी तैयार करना, बुआई, खाद व उर्वरक, सिंचाई, निराई, कटाई और भंडारण।
मुख्य बिंदु 5
  1. जुताई से मिट्टी पोली होती है, जिससे जड़ों को श्वसन और पोषक तत्व अवशोषण में सुगमता होती है।
मुख्य बिंदु 6
  1. जैविक खाद मिट्टी की बनावट व जल-धारण क्षमता बढ़ाती है, जबकि रासायनिक उर्वरक (NPK) विशिष्ट पोषक प्रदान करते हैं।
मुख्य बिंदु 7
  1. ड्रिप और स्प्रिंकलर आधुनिक सिंचाई विधियाँ हैं जो कम जल में अधिकतम सिंचाई दक्षता प्रदान करती हैं।
मुख्य बिंदु 8
  1. अवांछित पौधों (खरपतवार) को 2,4-D जैसे रसायनों या निराई द्वारा हटाया जाता है ताकि वे फसल से प्रतिस्पर्धा न करें।
मुख्य बिंदु 9
  1. फसल कटाई के पश्चात बीजों को भूसे से अलग करने की प्रक्रिया को थ्रेशिंग (Threshing) कहा जाता है।
मुख्य बिंदु 10
  1. अनाज को कीटों व फफूंद से बचाने के लिए धूप में सुखाकर साइलो (Silos) और भंडार गृहों में सुरक्षित रखा जाता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
धान को शीत ऋतु (रबी मौसम) में क्यों नहीं उगाया जा सकता?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि धान को बहुत अधिक मात्रा में जल और उच्च तापमान की आवश्यकता होती है, जो वर्षा ऋतु में ही उपलब्ध होता है।
शीत ऋतु में तापमान कम और वर्षा नगण्य होती है, जिससे धान की फसल नष्ट हो जाएगी।
2
मिट्टी में केंचुओं को "किसानों का मित्र" क्यों कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि केंचुए मिट्टी को उलट-पलट कर पोला बनाते हैं और उसमें जैविक ह्यूमस की मात्रा बढ़ाते हैं।
केंचुओं द्वारा बनाई गई सरंध्र मिट्टी में पौधों की जड़ें सरलता से श्वसन और जल अवशोषण करती हैं।
3
अनाज के बीजों को भंडारित करने से पूर्व धूप में सुखाना क्यों अनिवार्य है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: बीजों में मौजूद अतिरिक्त नमी (आर्द्रता) को दूर करने के लिए, ताकि फफूंद व कीट न लगें।
अधिक नमी वाले बीजों में सूक्ष्मजीवों का संक्रमण तेजी से होता है और अंकुरण क्षमता नष्ट हो जाती है।
4
फसल चक्रण (Crop Rotation) से मिट्टी को क्या लाभ पहुँचता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: मिट्टी में विशिष्ट पोषक तत्वों (विशेषकर नाइट्रोजन) की प्राकृतिक भरपाई होती है।
फलीदार फसलों (दालों) की जड़ों में राइजोबियम जीवाणु होते हैं जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करते हैं।
5
ड्रिप सिंचाई प्रणाली किस प्रकार की कृषि भूमि और पौधों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: जल की कमी वाले क्षेत्रों में फलदार पौधों, बगीचों और वृक्षों के लिए।
यह सीधे जड़ों में बूँद-बूँद जल पहुँचाती है जिससे जल का एक भी बूँद व्यर्थ नहीं बहता।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

ऑनलाइन CBT टेस्ट देकर तैयारी का मूल्यांकन करें

झारखण्ड बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का ऑनलाइन टेस्ट दें। तुरंत परिणाम, समय विश्लेषण और प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत हल प्राप्त करें।

AI अध्ययन मित्र

त्वरित शंका समाधान

फसल उत्पादन एवं प्रबंध (Crop Production and Management) में कोई संदेह या प्रश्न है? हमारे AI अध्ययन मित्र से तुरंत समझें।