जब कोई वस्तु किसी पृष्ठ पर गति करती है अथवा गति करने का प्रयास करती है, तो दोनों के संपर्क तलों के मध्य गति की विपरीत दिशा में एक प्रतिरोधी बल उत्पन्न होता है, जिसे घर्षण बल (Force of Friction) कहते हैं।
घर्षण बल की अनिवार्य विशेषताएँ:
- यह सदैव आपेक्षिक गति के विपरीत दिशा में कार्य करता है। यदि आप पुस्तक को बाईं ओर धकेलते हैं, तो घर्षण दाईं ओर कार्य करेगा।
- घर्षण बल दो वस्तुओं के संपर्क तलों के मध्य उत्पन्न होता है, अतः यह एक संपर्क बल (Contact Force) है।
घर्षण की उत्पत्ति का कारण: पृष्ठों का अंतःग्रथन (Interlocking)
कोई भी पृष्ठ, चाहे वह आँखों से कितना भी चिकना दिखाई दे, सूक्ष्मदर्शी से देखने पर उसमें अनगिनत सूक्ष्म उभार (Crests) और गड्ढे (Troughs) होते हैं, जिन्हें अनियमितताएँ (Irregularities) कहते हैं:
- जब दो पृष्ठ परस्पर संपर्क में आते हैं, तो एक पृष्ठ के उभार दूसरे पृष्ठ के गड्ढों में फँस जाते हैं। इस स्थिति को अंतःग्रथन (Interlocking) कहते हैं।
- वस्तु को गति में लाने के लिए हमें इस अंतःग्रथन को तोड़ने हेतु बाह्य बल लगाना पड़ता है। यही प्रतिरोधी बल घर्षण के रूप में प्रकट होता है।
- खुरदरे पृष्ठों पर घर्षण अधिक होता है: क्योंकि खुरदरे पृष्ठों में अनियमितताओं की संख्या और आकार बहुत बड़े होते हैं, जिससे अंतःग्रथन अत्यंत मजबूत होता है।
- अभिलंब बल (Normal Force) का प्रभाव: जब दो पृष्ठों को अधिक बलपूर्वक दबाया जाता है (जैसे खाली बक्से की तुलना में भारी बक्सा), तो अनियमितताएँ एक-दूसरे में गहराई से धँस जाती हैं और घर्षण बल बहुत बढ़ जाता है।